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बिहार चुनाव INDI गठबंधन की अग्निपरीक्षा : महागठबंधन में तनातनी और तेज, RJD की लिस्ट के बाद I.N.D.I.A. में खींचतान, आपस में ही होगी चुनावी लड़ाई

बिहार विधान सभा के 14 नवम्बर को जो भी परिणाम आए, इतना तय है कि ये  INDI गठबंधन के किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। अगर INDI गठबंधन सरकार नहीं बनाया तो इसका टूटना निश्चित है कोई रोक नहीं पाएगा। अगर सरकार बन भी गयी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर फूट होगी अगर तेजस्वी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया तब भी गठबंधन के तार-तार होने की अटकलों का बाजार बहुत गर्म है। झाड़खंड मुक्ति मोर्चा वो अलग हो गया। अपने दम पर चुनाव लड़ रहा है। हकीकत में गठबंधन को शुरू से कांग्रेस को बाहर रखना था। जिस राहुल को सफल बनाने की कवायत की जा रही है धूल में लठ पीटने से कम नहीं। दूसरे, कांग्रेस अपने साथ गठबंधन को डुबो रहा है। इस समय अरविन्द केजरीवाल सही की सियासत खेल रहे है, जो अपना वजूद बनाए रखने के लिए अपने आपको गठबंधन से अलग कर चुनाव लड़ रहे हैं।     

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज के आखिरी दिन तक INDIA गठबंधन में फूट, टिकट बंटवारे पर नाराजगी और अंदरूनी बगावत और तेज हो गई है। आपसी तनातनी से हालात इतने बदतर हो गए हैं कि महागठबंधन ने राज्य की कुल 243 सीटों पर 254 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। आरजेडी ने 143, कांग्रेस ने 61, सीपीआई (एम) ने 20, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 6 और मुकेश सहनी की पार्टी ने 15 प्रत्याशी हैं। इस तरह इनकी संख्या 254 हो जाती है। 12 प्रत्याशी एक दूसरे के खिलाफ उतारे हैं। बिहार चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ कि INDIA गठबंधन (महागठबंधन) ने टिकट बंटवारे को लेकर कोई ज्वाइंट प्रेस कॉन्फेंस नहीं की। सभी दल नॉमिनेशन के आखिरी समय तक लिस्ट जारी करते रहे। महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर खींचतान अब तक चल रही है। उधर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अपनी ढपली, अपना राग अलाप रही है। महागठबंधन के सभी घटक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सीट बंटवारा अब तक नहीं हुआ है। एनडीए इस बात को मुद्दा बना चुका है। एनडीए के नेता कह रहे हैं कि महागठबंधन में गांठ पड़ चुकी है। वहीं पप्पू यादव ने तो गठबंधन तोड़ने तक की बात कह दी।

 बिहार में सीटें 243, महागठबंधन ने 254 उम्मीदवार उतारे

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान छह नवंबर और दूसरे चरण का 11 नवंबर को है। अब तक महागठबंधन के सभी दलों ने सीटों का बंटवारा नहीं किया है। ऐसा भी कह सकते हैं कि इस चुनाव में महागठबंधन सीट बंटवारे की घोषणा किए बिना ही चुनावी मैदान में है। सभी दलों ने अपने प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी। राजद ने 143, कांग्रेस ने 60, भाकपा माले ने 20, वीआईपी ने 15, सीपीआई ने नौ, सीपीएम ने चार और आईआईपी ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। यानी कुल मिलाकर 254 सीट। 12 सीटें ऐसी हैं जहां महागठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी फेज के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया खत्म हो गई। चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले फेज के चुनाव के लिए कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। 300 से अधिक प्रत्याशियों के पर्चे खारिज हो गए। 61 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीटों पर 6 नवंबर और दूसरे फेज की 122 सीटों के लिए 11 नवंबर को मतदान होना है। दूसरे फेज के प्रत्याशियों की स्थिति 23 अक्टूबर तक साफ होगी।
महागठबंधन में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी समेत सहयोगी दलों में बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। सीट शेयरिंग पर सहमति ना बन पाने से महागठबंधन में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है, यहां तक कि कार्यकर्ता भी पशोपेश में हैं वे किसका समर्थन करें और किसकी खिलाफत करें? महागठबंधन में पहले ही सीट शेयरिंग को लेकर तनाव है। अब कांग्रेस की कलह भी खुलकर सामने आ गई है। टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के एक गुट ने पटना में दावा किया कि ऐसे हालात में जल्द ही महागठबंधन टूटने वाला है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक कांग्रेस प्रदेश प्रभारी की वजह से ही महागठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने और राहुल गांधी ने सीएम फेस का ऐलान नहीं किया। इससे आरजेदी में दरार पैदा हो गई। इतना ही नहीं कांग्रेस नेताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ की बजाए इसी की तर्ज पर ‘टिकट चोर, पद छोड़’ के नारे भी लगाए।
सहयोगी दलों में सीटों को लेकर मचा घमासान खुलकर सामने आया
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीटों को लेकर कन्फ्यूजन का माहौल बना हुआ है। महागठबंधन में सीटों को लेकर मचा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। कई सीटों पर सहयोगी दलों के बीच तालमेल बिगड़ गया है। अब हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस और आरजेडी जैसे पुराने सहयोगी एक-दूसरे के आमने-सामने उतर आए हैं। पहले चरण के नामांकन के बीच कई सीटें ऐसी हैं जहां गठबंधन की एकता सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक, बछवाड़ा, वैशाली, गौड़ा बराम, रोसड़ा, लालगंज और राजापाकड़ समेत कई सीटें हैं, जहां अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। कहीं कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो कहीं वाम दलों और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर असमंजस जारी है।
सांसद पप्पू यादव बोले- इस महागठबंधन तोड़ देना चाहिए
महागठबंधन में पड़े दरार के बाद पूर्णिया के सांसद और खुद को कांग्रेसी घोषित करने वाले पप्पू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो से गठबंधन धर्म निभाने की अपील की है। पप्पू यादव वाकई पप्पू ही है। जिसे राहुल-तेजस्वी यात्रा के दौरान मंच पर ही नहीं चढ़ने दिया फिर भी पिछलग्गू बना फिर रहा है। आखिर और कितने जूते यानि बेइज्जती करवानी है? उन्होंने कहा कि 12 सीटों पर दोहरे उम्मीदवार उतारना गठबंधन की एकता के खिलाफ है। क्या इस तरह गठबंधन चलता है? कांग्रेस को निर्णय लेना चाहिए। जिस तरह से टिकट बाटा गया है, यह बिल्कुल गलत है। मैं बार-बार कह रहा हूं कि गठबंधन को वापस लीजिए। गठबंधन को कमजोर किया जा रहा है। वीआईपी के मुकेश सहनी भी दोतरफा नाराज बताए जा रहे हैं। एक तो उन्हें कम सीटें मिलने से नाराजगी है, दूसरे इंडिया गठबंधन ने उन्हें जो सीटें दी हैं, उनमें से भी कई उनकी मनचाही नहीं है। इसके चलते उनके लिए चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने का संकट पैदा हो गया है।
महागठबंधन में सीटों की खरीद-फरोख्त देख रही है जनता- भाजपा
वहीं बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार के मतदाता महागठबंधन की अंदरूनी लड़ाई और टिकटों की खरीद-फरोख्त को देख रहे हैं महागठबंधन आज तक सीटों का बंटवारा नहीं कर पाया है। कई सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में वह सरकार कैसे चलाएगा? हालात यह है कि इस बार RJD ने तो नॉमिनेशन का समय खत्म होने से 7 घंटे पहले, पहली बार 143 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इससे पहले उसके प्रत्याशी नॉमिनेशन भरते रहे। पहले फेज के नॉमिनेशन खत्म होने के बाद भी सीट शेयरिंग की घोषणा नहीं हुई थी। तब 10 सीटों पर महागठबंधन की पार्टियों आमने-सामने हैं। राजद ने बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को टिकट दिया है। इस बीच तेजस्वी ने अनीता देवी को पार्टी सिंबल दिया। वो नवादा के वारिसलिगंज से चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस ने इस सीट पर पहले से मंटन सिंह को उतारा है।
महागठबंधन की राह में रोड़ा बने ये अहम सियासी कदम
• RJD इस बार भी सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ रही है, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ शीट शेयरिंग पर तनातनी दिखी।
• कांग्रेस को पिछली बार मिली 66 में से सिर्फ 19 सीटें मिली थीं। इसलिए इस बार उन्हें 61 पर सीमित कर दिया गया।
• CPI(ML) ने पिछली बार शानदार प्रदर्शन किया (19 में से 12 सीटें), इस बार 20 सीटें मिलीं।
• विकासशील इंसान पार्टी (VIP) जो पिछली बार NDA में थी, इस बार INDIA के साथ है। VIP ने जिन 15 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें से 2 सीटें ऐसी हैं, जिन पर RJD ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
• महागठबंधन में टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रत्याशियों ने बगावत कर दी और निर्दलीय पर्चा भर दिया। इसमें सबसे प्रमुख नाम है 2020 में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली रितु जायसवाल का। इस बार राजद ने उनका टिकट काट दिया। इसलिए उन्होंने निर्दलीय अपना पर्चा भरा है।
कई सीटों पर महागठबंधन के भीतर ही आपस में ही मुकाबला
हालात यह हैं कि पहले चरण में आरजेडी ने 62 सीटों पर और कांग्रेस ने 24 सीटों पर नामांकन दाखिल किए हैं। हालांकि, सीटों को लेकर सहमति न बन पाने के कारण कई जगहों पर गठबंधन के भीतर ही मुकाबला देखने को मिल रहा है। कांग्रेस ने रोसड़ा से तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी बीके रवि को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन उनके खिलाफ शुक्रवार को भाकपा प्रत्याशी लक्ष्मण पासवान ने यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया। 2020 में यहां से कांग्रेस के नरेंद्र कुमार विकल चुनाव लड़े थे। इसी प्रकार राजापाकड़ सीट से कांग्रेस की वर्तमान विधायक प्रतिमा दास उम्मीदवार हैं और अपना नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद सीपीआई से मोहित पासवान ने भी शुक्रवार को यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।

महा-कन्फ्यूज महागठबंधन: अब ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ की जगह लग रहे ‘टिकट चोर, पद छोड़’ के नारे, कई सीटों पर आपस में लड़ रही कांग्रेस-राजद-सीपीआई

साझे की हांड़ी हमेशा चौक पर ही फूटती है और इस इस कहावत को कोई झुठला नहीं पाया। 1977 में आपातकाल लगाने वाली इंदिरा गाँधी के विरुद्ध वामपंथियों को छोड़ सारे विपक्ष ने जनता पार्टी बनाई, चुनाव भी जीते अंजाम मुश्किल से ढाई साल बाद ही जनता पार्टी तार-तार हो गयी। लेकिन वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को हराने भारत विरोधियों की गोदी में बैठे  विपक्ष ने महागठबंधन बनाया जो अपना मकसद पूरा होने से पहले ही आत्महत्या कर रहा है। जो साबित करता है कि महागठबंधन का मकसद मोदी या योगी को हराना नहीं बल्कि जनता को पागल बना, साम दाम दंड भेद अपनाकर सत्ता हासिल करना है। मुस्लिम वोट लेने सनातन को जितना अपमानित कर सकते हो करो। अब मुसलमान भी समझ रहा है कि जो अपने धर्म का नहीं हुआ किसी के मजहब/इस्लाम का क्या होगा। कट्टरपंथी मुस्लिम गैंग में भी जबरदस्त खलबली मची हुई है।      
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी समेत सहयोगी दलों में बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। सीट शेयरिंग पर सहमति ना बन पाने से महागठबंधन में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है, यहां तक कि कार्यकर्ता भी पशोपेश में हैं वे किसका समर्थन करें और किसकी खिलाफत करें? महागठबंधन में पहले ही सीट शेयरिंग को लेकर तनाव है। अब कांग्रेस की कलह भी खुलकर सामने आ गई है। टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के एक गुट ने पटना में दावा किया कि ऐसे हालात में जल्द ही महागठबंधन टूटने वाला है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक कांग्रेस प्रदेश प्रभारी की वजह से ही महागठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने और राहुल गांधी ने सीएम फेस का ऐलान नहीं किया। इससे आरजेदी में दरार पैदा हो गई। इतना ही नहीं कांग्रेस नेताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ की बजाए इसी की तर्ज पर ‘टिकट चोर, पद छोड़’ के नारे भी लगाए।
झाड़खंड मुक्ति मोर्चा भी महागठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ रहा है। दरअसल, तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने पर अड़ा है जबकि गठबंधन की कोई अन्य पार्टी तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने को तैयार नहीं। दूसरे शब्दों में कहा जाए कि हर पार्टी अपना मुख्यमंत्री बनाने को बेताब है। जबकि मुख्यमंत्री पद एक है और दावेदार अनेक यानि एक अनार सौ बीमार। 
 

महागठबंधन में कई सीटों पर मचा घमासान खुलकर सामने आया
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीटों को लेकर कन्फ्यूजन का माहौल बना हुआ है। महागठबंधन में सीटों को लेकर मचा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। कई सीटों पर सहयोगी दलों के बीच तालमेल बिगड़ गया है। अब हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस और आरजेडी जैसे पुराने सहयोगी एक-दूसरे के आमने-सामने उतर आए हैं। पहले चरण के नामांकन के बीच कई सीटें ऐसी हैं जहां गठबंधन की एकता सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक, बछवाड़ा, वैशाली, गौड़ा बराम, रोसड़ा, लालगंज और राजापाकड़ समेत कई सीटें हैं, जहां अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। कहीं कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो कहीं वाम दलों और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर असमंजस जारी है। सूत्रों का कहना है कि इन सीटों पर अब तक कोई फाइनल लिस्ट पार्टी स्तर पर जारी नहीं की गई है।

कई सीटों पर महागठबंधन के भीतर ही आपस में ही मुकाबला
हालात यह हैं कि पहले चरण में आरजेडी ने 62 सीटों पर और कांग्रेस ने 24 सीटों पर नामांकन दाखिल किए हैं। हालांकि, सीटों को लेकर सहमति न बन पाने के कारण कई जगहों पर गठबंधन के भीतर ही मुकाबला देखने को मिल रहा है। कांग्रेस ने रोसड़ा से तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी बीके रवि को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन उनके खिलाफ शुक्रवार को भाकपा प्रत्याशी लक्ष्मण पासवान ने यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया। 2020 में यहां से कांग्रेस के नरेंद्र कुमार विकल चुनाव लड़े थे। इसी प्रकार राजापाकड़ सीट से कांग्रेस की वर्तमान विधायक प्रतिमा दास उम्मीदवार हैं और अपना नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद सीपीआई से मोहित पासवान ने भी शुक्रवार को यहां से अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।

आरजेडी के खिलाफ कांग्रेस और कांग्रेस के खिलाफ सीपीआई
वहीं बिहार शरीफ सीट से कांग्रेस ने ओमेर खान को अपना उम्मीदवार बनाया है। उधर सीपीआई प्रत्याशी शिव प्रकाश यादव उर्फ सरदार जी ने भी यहां से पर्चा दाखिल किया है। 2020 में यह सीट आरजेडी के खाते में थी। कांग्रेस और सीपीआई ही नहीं कांग्रेस और आरजेडी भी आपस में ही गुत्थमगुत्था हो रहे हैं। कहलगांव सीट पर भी कांग्रेस और आरजेदी के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस ने इस सीट से प्रवीण कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है। लेकिन इससे पहले ही आरजेडी के उम्मीदवार रजनीश यादव ने यहां से नामांकन दाखिल कर दिया। कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण कुशवाहा 20 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगे, जिससे यहां गठबंधन के भीतर ही मुकाबला तय हो गया है।

आपसी टकराव से महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल
इस तरह के टकराव से महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पहले चरण में ही 5 सीटों पर गठबंधन के भीतर मुकाबला होने की संभावना है, जो गठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे टकराव से विपक्षी एकता कमजोर होगी, जिसका फायदा एनडीए को मिलेगा। महागठबंधन में सीटों को लेकर जारी कन्फ्यूजन ने गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस और आरजेडी के बीच छह सीटों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है, जबकि कहलगांव सीट पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के नामांकन से गठबंधन के भीतर ही मुकाबला तय हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन इन मुद्दों को सुलझा पाता है या नहीं, क्योंकि चुनावी वैतरणी पार करना महागठबंधन के लिए अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ की जगह अब लग रहे ‘टिकट चोर, पद छोड़’ के नारे
महागठबंधन में पहले ही सीट शेयरिंग को लेकर तनाव है। अब कांग्रेस की कलह भी खुलकर सामने आ गई है। टिकट कटने से नाराज गुट ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, महागठबंधन टूटने वाला है। नाराज नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पर टिकट बेचने का आरोप लगाया है। इसमें खगड़िया से वर्तमान विधायक छत्रपति यादव, बरबीघा से गजानंद शाही, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र पासवान, बांका के जिलाध्यक्ष कंचना कुमारी सिंह सहित अन्य नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेता बंटी चौधरी ने कहा कि महागठबंधन टूटने के कगार पर है, यह प्रभारी की वजह से हुआ है। उन्होंने सीएम फेस का ऐलान नहीं किया। इन लोगों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा दिया था। हमलोग ‘टिकट चोर, पद छोड़’ की बात कह रहे हैं। प्रदेश प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी वजह से सीट शेयरिंग नहीं हो पाई। पार्टी में योग्य कैंडिडेट को टिकट नहीं दिया जा रहा। इस बार के चुनाव में पार्टी 10 सीट भी नहीं जीत पाएगी। इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता आनंद माधव ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेटर लिखा है।

बाहुबली अशोक महतो की पत्नी को राजद के टिकट पर बवाल
पहले फेज के नॉमिनेशन खत्म होने के बाद भी सीट शेयरिंग की घोषणा नहीं हुई। 10 सीटों पर महागठबंधन की पार्टियों आमने-सामने हैं। राजद ने बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को टिकट दिया है। इस बीच तेजस्वी ने अनीता देवी को पार्टी सिंबल दिया। वो नवादा के वारिसलिगंज से चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस ने इस सीट पर पहले से मंटन सिंह को उतारा है। वहीं कसबा से टिकट नहीं मिलने पर शुक्रवार को फूट-फूटकर रोए मो. इरफान आलम को कांग्रेस ने मौका दिया है। यहां से 4 बार के सिटिंग एमएलए आफाक आलम का टिकट काटकर सांसद पप्पू यादव के करीबी मो. इरफान को टिकट मिला है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से इसकी आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है। मगर सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा करते हुए, इसकी घोषणा कर दी है। महागठबंधन में सीट शेयरिंग की खींचतान के बीच मधेपुरा की आलमनगर विधानसभा से नबीन कुमार को महागठबंधन से वीआईपी और राजद दोनों ने अपना सिंबल दिया है। इन्होंने दोनों सिंबल से अपना नॉमिनेशन भरा है। हालांकि एक टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक पार्टी से नामांकन वापस लेंगे।

पहले फेज की 121 सीटों पर महागठबंधन के 125 प्रत्याशी
फर्स्ट फेज के 121 सीटों पर महागठबंधन के 125 प्रत्याशियों ने नामांकन किया। 121 में राजद ने 72, कांग्रेस ने 24, लेफ्ट ने 21, वीआईपी ने 6 और आईआईपी ने 2 सीटों पर नामांकन भर दिया है। वहीं, पिछले 8-10 दिनों से पटना से लेकर दिल्ली तक सीट शेयरिंग और कैंडिडेट्स सिलेक्शन पर माथापच्ची चलती रही, लेकिन इससे कुछ नहीं निकला। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने रूठे नेताओं से फोन पर बात की और मनाने की कोशिश की, लेकिन वो भी विफल रहे। नतीजा बिना लिस्ट जारी किए पार्टियों ने सिंबल बांटे और नामांकन दाखिल किया। इस बीच VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा, ‘हमे राज्यसभा नहीं चाहिए, मुझे डिप्टी CM बनना है। मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लडूंगा, बताया जा रहा है कि सहनी को केवल 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। इसके अलावा उन्हें राज्यसभा और 2 MLC सीट का लालच दिया गया है।

दलित झुकेगा नहीं अब इंकलाब होगा- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पहले फेज के लिए 121 सीटों पर नामांकन हो चुका है। इनमें से 7 सीटों पर महागठबंधन, एनडीए के साथ-साथ आपस में भी लड़ेगा। इस बीच आरजेडी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की सीट पर भी अपना कैंडिडेट उतारने का फैसला कर लिया है। यहां से पूर्व मंत्री सुरेश पासवान को पार्टी चुनाव लड़वा सकती है। उन्होंने एनआर भी कटवा लिया है। 20 अक्टूबर को अपना नामांकन पर्चा दाखिल करेंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, ‘कई सीटों पर क्रॉस डिमांड है। गठबंधन में 6 पार्टियां हैं, सबकी अपनी डिमांड है। सारी प्रक्रिया साथ-साथ चल रही है। कुछ घंटे में सब कुछ क्लियर हो जाएगा।’ सीटों पर खींचतान के बीच राजेश राम ने शुक्रवार देर रात X पर एक पोस्ट शेयर करते लिखा- ‘दलित दबेगा नहीं, झुकेगा नहीं अब इंकलाब होगा। जय बापू ,जय भीम, जय संविधान, जय कांग्रेस l

बिहार में इन 10 सीटों पर महागठबंधन Vs महागठबंधन
• 1- बछवाड़ा: सीपीआई ने अवधेश राय और कांग्रेस ने शिव प्रकाश गरीबदास को उम्मीदवार बनाया। यह सीट सीपीआई के खाते में जानी थी, लेकिन कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।
• 2- बिहार शरीफ: यहां सीपीआई के शिव प्रसाद यादव और कांग्रेस के उमर खान आमने-सामने हैं।
• 3- रोसड़ा: सीपीआई के लक्ष्मण पासवान और कांग्रेस ने ब्रजकिशोर रवि के बीच मुकाबला है।
• 4- राजापाकड़: सीपीआई और कांग्रेस के बीच यहां भी टकराव है। सीपीआई ने मोहित पासवान को और कांग्रेस ने प्रतिमा दास को टिकट दिया।
• 5- वैशाली: आरजेडी और कांग्रेस दोनों ने इस सीट पर दावेदारी ठोकी है। राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के संजीव कुमार के बीच मुकाबला है।
• 6- तारापुर: राजद के अरुण शाह और वीआईपी के सकलदेव बिंद आमने-सामने हैं।
• 7- गौरा बौराम: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और आरजेडी के बीच टकराव की स्थिति है। राजद के अफजल अली और वीआईपी के मुकेश सहनी के बीच टक्कर है।
• 8- लालगंज: आरजेडी और कांग्रेस दोनों ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। राजद की शिवानी शुक्ला के सामने कांग्रेस के आदित्य राजा हैं।
• 9- कहलगांव: राजद के रजनीश यादव और कांग्रेस ने प्रवीण कुशवाहा के बीच मुकाबला है।
• 10-वारिसलिगंजः राजद की अनीता देवी और कांग्रेस के मंटन सिंह के बीच मुकाबला है।

जिस तरह कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में महिलाओं को ‘धोखा’ दिया था, वैसी ही RJD की तैयारी : माई-बहिन योजना के नाम पर महिलाओं से भरवाए जा रहे फॉर्म, बाहरी लोगों की मदद से हो रही साजिश


बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियाँ आधी आबादी को लुभाने की कोशिशों में लगी हुई है। आरजेडी ने वादा किया है कि अगर महागठबंधन को सत्ता मिलती है तो महिलाओं को माई- बहिन योजना के तहत हर महीने 2500 रुपए दिए जाएँगे। पार्टी इसको लेकर अभी से फॉर्म भरवा रही है। महिलाओं से उनके आधार कार्ड माँगे जा रहे हैं।

एनडीए ने आधार कार्ड नंबर लेने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे गैर कानूनी कहा है। माई बहन मान योजना पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल कहते हैं, “यह योजना एक घोटाला है और जनता समझती है कि राजद और कांग्रेस झूठे वादे कर रहे हैं। महिलाओं को फॉर्म भरकर गुमराह किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उन्हें पैसा तभी मिलेगा जब पार्टी जीतेगी।”

नीतीश सरकार लेकर आई महिला रोजगार योजना

नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए महिला रोजगार योजना की शुरुआत की है। इसमें परिवार की एक महिला को तत्काल 10 हजार रुपए और 6 महीने बाद 2 लाख रुपए देने की योजना है। इसकी शुरुआत सितंबर में की जा रही है। इसको लेकर आरजेडी कह रही है कि ये माई बहिन मान योजना को देखते हुए लाया गया है।

क्या है माई बहिन मान योजना?

महागठबंधन के कार्यकर्ता और समर्थक महिलाओं के बीच जा रहे हैं और उनसे फॉर्म भरवा रहे हैं। ये फॉर्म दो तरह के हैं- एक है माई बहिन योजना और दूसरा तेजस्वी रोजगार योजना। जाहिर तौर पर पूर्व डिप्टी सीएम के नाम पर लोगों से रोजगार का वादा किया जा रहा है। वहीं माई बहिन मान योजना के तहत महागठबंधन की सरकार बनने पर हर जरूरतमंद महिला के खाते में हर महीने 2500 रुपए भेजे जाएँगे, इसका वादा किया जा रहा है।

आधार नंबर लेना गैरकानूनी

किसी भी योजना को लागू तभी किया जा सकता है जब सरकार उसे मंजूर करे। इसके लिए लाभार्थियों से सरकारी कागजात भरवाए जाते हैं और आधार कार्ड नंबर लिया जाता है। यहाँ मौजूद महिलाओं में ज्यादातर को योजना की पूरी जानकारी नहीं है। एक महिला ने कहा कि अगर धोखाधड़ी हुई, तो खूब पिटाई होगी।

चुनाव से पहले पार्टियाँ वादा कर सकती हैं। फॉर्म भरवाना या नागरिकों के पहचान पत्र लेना गैर कानूनी है। बिहार में महिलाओं की बड़ी आबादी अनपढ़ है। उन्हें ये नहीं पता है कि जो फॉर्म उनके नाम पर भरा जा रहा है, उसमें क्या है। ऐसे में झाँसे में लेकर फॉर्म भरवाना, कम पढ़े-लिखे और अनपढ़ महिलाओं को धोखा देना है।

बजट कहाँ से लाएँगे- प्रशांत किशोर

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने महागठबंधन से कहा है कि माई बहिन मान योजना का बजट कहाँ से आएगा, पहले ये बता दीजिए। उन्होंने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कैलकुलेटर लेकर भी इस योजना में कितना पैसा खर्च होगा, ये वह नहीं बता सकते। इतना बजट कहाँ से आएगा, ये बात तो छोड़ दीजिए।

फॉर्म भरवा रहे लोग कौन हैं?

आरजेडी और कांग्रेस माई बहिन मान योजना के फॉर्म भरवाने के लिए कई लोगों को काम में लगाया है। इनके पास किसी तरह की अथॉरिटी नहीं है, न ही कोई पार्टी से जारी किया गया पत्र है। ऐसे में पहचान पत्र लेने वाले लोगों की खुद की पहचान ही शक के दायरे में आ जाती है। ये पार्टी कार्यकर्ता हैं या बाहरी लोग हैं। फॉर्म भरवाने आयी एक महिला का कहना है कि वह पीआर एजेंसी की तरफ से आई हैं। पार्टी की कार्यकर्ता नहीं हैं। वह महिलाओं को बता रही हैं कि जब तेजस्वी यादव की सरकार आएगी, तो महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए मिलेंगे।

कांग्रेस ने दिया था महिलाओं को ‘धोखा’

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस ने घोषणा की थी कि वह महिलाओं को 1 लाख रुपए देगी। चुनाव में करारी हार के बाद महिलाएँ उन्हें वादा याद दिलाने पहुँची। कांग्रेस ने कई परिवारों को ‘गारंटी कार्ड’ वितरित किए थे। इसमें हर गरीब परिवार की महिला मुखिया को हर साल 1 लाख रुपए देने का वादा किया गया था। नतीजों के बाद कांग्रेस के नेता महिलाओं से बचते हुए नजर आए थे। महिलाएँ पैसे लेने कांग्रेस दफ्तर तक पहुँच गई थी।