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‘इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS’: सोशल मीडिया पर नेटिजन्स समलैंगिक संबंधों को बता रहे वजह; बकरी फार्म मलेशियाई पुलिस के कब्जे में

                                                                   (फोटो साभार: Grok_AI)
भगोड़े इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS होने की खबर सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से जमकर वायरल है। भारत में धार्मिक कट्टरता फैलाने का आरोपित जाकिर इन दिनों मलेशिया में रह रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि उसे AIDS होने के बाद मलेशिया के ही किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

लोगों के क्या हैं दावे?

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने X पर इससे जुड़े पोस्ट किए हैं। फातिमा खान नामक एक X यूजर ने दावा किया, “कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को AIDS होने का पता चला है! कथित तौर पर वह फिलहाल मलेशिया के सनवे मेडिकल सेंटर में भर्ती हैं।”

एक अन्य यूजर ने तो उसके शागिर्दों को भी अपनी जाँच कराने की सलाह दे दी। यूजर ने लिखा, “सुना है जाकिर नाइक को एड्स हो गया है। अब इसके शागिर्दों को भी अपनी जाँच करवा लेनी चाहिए आपको नहीं लगता? बेचारा संबंध बना बनाकर बीमार हो गया।”

एक अन्य यूजर ने तो इसकी वजह समलैंगिक संबंध बता दी। यूजर ने लिखा, “इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS डायग्नोस हुआ है! एड्स के ज्यादातर मामलों की वजह समलैंगिक यौन संबंध हैं। जाकिर नाइक के मजहब में समलैंगिक रिश्ते की मनाही है! फिर उसे एड्स क्यों?”

एक अन्य यूजर ने उसकी बकरियों की भी जाँच कराए जाने का दावा कर दिया। उसने लिखा, “मलेशिया जाकिर नाइक के घर के सभी सदस्यों, यहाँ तक कि उसके बकरी फार्म की भी जाँच कर रहा है। जाकिर के एड्स से संक्रमित होने के बाद, उसका बकरी फार्म मलेशियाई पुलिस के कब्जे में है।”

जाकिर नाइक ने क्या कहा?

इस खबर के वायरल होने के बाद भगौड़ा कट्टरपंथी भी सामने आया और उसने भी अपना पक्ष रहा है। ‘फ्री मलेशिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी ने इन दावों को खारिज किया है। नाइक ने कहा, “यह फर्जी खबर है।”
गौरतलब है कि जाकिर नाइक पर भारत में नफरत फैलाने वाले भाषण देने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसाने और आतंकवाद के लिए प्रेरित करने जैसे गंभीर आरोप हैं। भारतीय एजेंसियाँ लंबे समय से उसकी गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं लेकिन वह 2016 से भारत से फरार है और मलेशिया में शरण लिए हुए है। भारत ने उसे प्रत्यर्पित करने की कई बार कोशिश की है लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।

जुमे पर नमाज नहीं पढ़ी तो होगी 2 साल की जेल, भरना पड़ेगा जुर्माना: मलेशिया में तालिबानी फरमान का हो रहा विरोध, इसी मुल्क में है भारत का भगोड़ा जाकिर नाइक

                         जुमे की नमाज नहीं पढ़ी, तो होगी जेल ( प्रतिकात्मक फोटो साभार-chatgpt )
मलेशिया के टेरेंगानु राज्य में जुमे की नमाज पढ़ने में नहीं शामिल होने वाले मुस्लिमों पुरुषों को 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। शरिया कानून को सख्ती से लागू करते हुए सरकार ने ये फरमान सुनाया है।

इसमें कहा गया है कि अगर बिनी किसी उचित कारण बताए शुक्रवार की नमाज में अनुपस्थित रहे, तो मुस्लिम पुरुषों को जेल जाना पड़ेगा। साथ ही 3000 रिंगिट यानी 61,000 रुपए जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

पहले लगातार 3 जुमे की नमाज में शामिल होना अनिवार्य था

टेरेंगानू में पीएएस यानी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी की सरकार है। पहले लगातार तीन शुक्रवार को नमाज छोड़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को ये सजा दी जाती थी। लेकिन अब हर जुमे की नमाज में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य के कार्यकारी परिषद के सदस्य मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बेरिटा हरियन अखबार को बताया, “नमाज केवल मजहबी प्रतीक नहीं है, बल्कि मुस्लिमों की खुदा के आज्ञा मानने से भी जुड़ा हुआ है।”

तालिबान बन जाएँगे हम- अजीज

इस पर मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने तर्क दिया है कि कुरान में कहा गया है कि ‘मजहब में कोई जबरदस्ती नहीं’ होती। सरकार का फरमान इसके खिलाफ है। उन्होंने कहा, “जुमे की नमाज अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन इसे अपराध बनाना गलत है। हमें सभी मलेशियाई लोगों की चिंता है, वरना हम तालिबान बन जाएँगे।”

रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया के इस राज्य में कोई विपक्षी पार्टी नहीं है। 12 लाख की आबादी है, जिसमें अधिकतर स्थानीय मुस्लिम हैं। सत्ताधारी पीएएस पार्टी ने 2022 में सभी 32 सीटों पर जीत हासिल की थी। ये हथकंडा पीएएस को अपनी सत्ता बचाने के लिए जरूरी लग रहा है, क्योंकि दो साल के अंदर चुनाव होने वाले हैं।

इस्लाम मलेशिया का आधिकारिक मजहब है। मलेशिया का संविधान राज्यों को इस्लामी मामलों पर कानून बनाने का अधिकार देता है। लेकिन उसका क्षेत्र परिवार या व्यक्तिगत स्तर पर होना चाहिए।

दूसरे राज्य ने भी कानून बनाना चाहा था

2019 में, मलेशियाई राज्य केलंतन ने अपने शरिया कानून को विस्तार देना चाहा था। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। यहाँ मलेशियाई संघ का कानून सबसे अहम है। इस फैसले को पीएएस नेताओं ने इस्लामी सत्ता पर हमले के रूप में प्रचारित किया और जमकर बवाल काटा।

तेरेंगानु के नए फरमान के खिलाफ भी लोग सड़कों पर आ गए हैं। कई लोगों ने कानूनी दबाव के जरिए मजहबी रिवाजों को मनवाने की ‘समझदारी’ पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कहा, “धर्मनिष्ठा दिल से आनी चाहिए, न कि लोगों के डर से”। कुछ लोगों ने चेताया है कि ऐसे कानून दूसरे राज्य भी अपना सकते हैं।

मलेशिया में ही है भगोड़ा जाकिर नाइक

भारत का भगोड़ा इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक मलेशिया में ही है। जुलाई 2016 में बांग्लादेश के ढाका में बम धमाके के बाद जाकिर नाइक भारत से भाग गया था। इस धमाके में 29 लोगों की मौत हुई थी। हमले में शामिल आतंकियों ने कहा था कि वो नाइक के भाषणों से प्रभावित थे।

भारत में भगोड़ा घोषित होने के बाद से उसने मलेशिया में शरण ली हुई है। भारत सरकार मलेशिया की सरकार से उसके प्रत्यर्पण के लिए लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं आया है।

‘हम भी मुस्लिम- तुम भी मुस्लिम’ का नारा देकर मलेशिया को साधने की कोशिश कर रहा था पाकिस्तान, उल्टी पड़ गई चाल

    जदयू सांसद संजय झा के नेतृत्व में मलेशिया पहुँचा भारतीय प्रतिनिधि मंडल (फोटो साभार- @SanjayJhaBihar X)
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मलेशिया यात्रा को रोकने की कोशिश में पाकिस्तान ने एक बार फिर मुँह की खाई है। आतंकी मुल्क ने मलेशिया सरकार से मुस्लिम देश होने की दुहाई तक दे डाली। हालाँकि मलेशिया ने पाक के इस पैंतरे को ठुकरा दिया और प्रतिनिधिमंडल से बेहतरीन मुलाकात की।

पाकिस्तानी दूतावास ने मलेशिया से कहा- आप भी मुस्लिम देश हैं और हम भी मुस्लिम देश हैं। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बात न सुनकर उनके दौरे को रद्द करना चाहिए। इस पर मलेशिया ने भारत के साथ अपने संबंधों में पाकिस्तान के हस्तक्षेप को सिरे से ठुकरा दिया।

हथकंडों का जाल फैला रहा पाकिस्तान

पहलगाम आतंकी हमले के जवाबी एक्शन में चलाए गए मिशन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की हालत पस्त है। वहीं भारत के अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल दुनिया भर के अलग अलग देशों में दौरा कर देश की के पक्ष को मजबूती से दर्शा रहे हैं। इससे तिलमिलाया आतंकी मुल्क अलग-अलग हथकंडे अपना रहा है।

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका, गुयाना, कोलंबिया, ब्राजील और पनामा का दौरा किया तो वहीं जेडीयू सांसद संजय झा के नेतृत्व में एक अन्य प्रतिनिधिमंडल जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया का दौरा कर रहा है।

संजय झा के साथ इस प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी से सांसद अपराजिता सारंगी, बृजलाल, प्रदान बरुआ और हेमांग जोशी, तृणमूल के अभिषेक बनर्जी, सीपीएम के जॉन ब्रिटास, कॉन्ग्रेस से सलमान खुर्शीद और पूर्व राजनयिक मोहन कुमार शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल के सभी कार्यक्रम तय की गई योजना के तहत ही संचालित हुए।

अपनै दौरे का बारे में सांसद संजय झा ने अक्स पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “मलेशिया के सामने हमने अपनी बात रखी। ये स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को युद्ध की कार्रवाई मानता है। भारत इस पूरे डोजियर को अतंर्राष्ट्रीय मंच FATF के सामने रखेगा ताकि आतंक के समर्थन देने वाले पाकिस्तान जैसे देश पर दबाव बढ़े।”

भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार (2 जून 2025) को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर पहुँचा। यहाँ उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की पार्टी केदिलन राक्यत (PKR) और डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (DAP) के नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित इरादों को मलेशिया के सामने रखा और पहलगाम हमलों और ऑपरेशन सिंदूर की वस्तुस्थिति स्पष्ट की।

इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर मिशन के बाद मलेशिया ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। लेकिन अब उसने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत कर भारत की बात सुनी है।

मलेशिया ने आतंकवाद के खिलाफ भारत को समर्थन दिया है। देश का कहना है कि इस्लाम किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करता। इसलिए पहलगाम में हुए हमले को लेकर ये कहना गतल नहीं होगा कि भारत को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।

अपने दौरे में प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर चर्चा की। मलेशिया ने इस पर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 100 वर्षों से भी पहले से हैं। यहाँ 20 लाख भी अधिक भारतीय लोग रहते हैं। यही मलेशिया और भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की प्रगाढ़ता दिखाता है। संजय झा के साथ प्रतिनिधिमंडल सभी देशों की यात्रा कर वापस भारत लौट आया है।

इस्लामी देश मलेशिया में ‘रद्द’ हुए शरिया के 16 कानून

                           मलेशिया में कोर्ट ने शरिया कानून किया रद्द (तस्वीर साभार: Reuters)
मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है और इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं। इस फैसले के बाद मलेशिया में इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हो रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में यह केस 2022 में दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से दायर किया गया था जिस पर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2024 को नौ सदस्यीय संघीय न्यायालय ने 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में 16 कानूनों को अमान्य करार दिया गया।

इन कानूनों में कुकर्म, यौन उत्पीड़न, अनाचार और ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (विपरीत लिंग से संबंधित कपड़े पहनना) से लेकर झूठे सबूत देने तक के अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने इन कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि इन (उक्त) विषयों के लिए इस्लामी कानून नहीं बना सकते, क्योंकि ये विषय मलेशियाई संघीय कानून के अंतर्गत आते हैं।

इस फैसले को सुनाते वक्त कोर्ट के बाहर सिक्योरिटी टाइट थी क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी इस केस के विरोध में पहले से थे। द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निर्णय आने के वक्त 1000 से अधिक कट्टरपंथी लोग पुतराज्य में कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कोर्ट के बाहर थे। निर्णय आने के बाद वह सब नाराज हो गए।

उन्होंने कहा, “इस तरह का निर्णय इस्लामी मुल्क में नहीं लिया जाना चाहिए। ये हमारी आँखों के आगे हो रहा है। हम मुस्लिमों को लग रहा है कि हमें चुनौती दी जा रही है। अगर हमारे मुल्क में कानून नहीं होगा तो मुश्किल हो सकती है। देश मुश्किल में पड़ जाएगा।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के लिए नेताओं को दोषी बताया। वहीं कुछ ने माँग की कि शरिया को वापस से वैसे ही राज्य में लागू किया जाए जैसे वो पहले था। उसमें कोई बदलाव न हो।

गौरतलब है कि मलेशिया में 1990 से कट्टरपंथी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी या PAS का राज है। वहाँ दो स्तरीय कानून प्रणाली चलती है। इसके तहत शरिया के तहत मुस्लिमों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामले आते हैं और साथ ही यहाँ सिविल कानून भी चलता है। जिस राज्य की अदालत ने इस फैसले को सुनाया है वहाँ की 97 फीसद आबादी मुस्लिमों की है।

1 दिसंबर से बिना वीजा मलेशिया जा सकेंगे भारतीय, पासपोर्ट दिखाकर 30 दिनों तक रह सकेंगे

                                                                                                               साभार: Nation Thailand
दक्षिणपूर्व एशियाई देश मलेशिया ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा लेने की बाध्यता को हटा दिया है। यह नई व्यवस्था 1 दिसम्बर, 2023 से लागू होगी। मलेशिया में अब भारतीय केवल अपने पासपोर्ट के सहारे ही 30 दिन तक रह सकेंगे।

मलेशिया ने भारत के अलावा चीन के नागरिकों के लिए यही वीजा मुक्त व्यवस्था लागू की है। मलेशिया ने यह कदम अपने यहाँ पर्यटन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उठाया है क्योंकि भारत और चीन दोनों बड़ी पर्यटक संख्या वाले देश हैं।

यह घोषणा मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम ने अपनी पार्टी की सालाना कॉन्फ्रेंस के दौरान पुत्राजाया में की। इब्राहिम इस कदम के जरिए आशा कर रहे हैं कि उनके देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। गौरतलब है कि मलेशिया में सबसे अधिक पर्यटक चीन और भारत से ही पहुँचते हैं। वर्ष 2023 में केवल जनवरी से जून के बीच ही भारत से 2.8 लाख पर्यटक मलेशिया पहुँचे।

दक्षिणपूर्वी एशिया में स्थित अधिकांश देश अब अपने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ऐसी ही रियायते दे रहे हैं। हाल ही में थाईलैंड ने भी भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की घोषणा की थी। थाईलैंड ने नवम्बर, 2023 और मई 2024 के बीच भारत से जाने वाले पर्यटकों के लिए वीजा की आवश्यकता को हटा दिया है।

थाईलैंड के अलावा श्रीलंका ने हाल ही में भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा की शुल्क ना लेने का निर्णय लिया था। श्रीलंका का भी लक्ष्य अपने देश में पर्यटन को बढ़ाना है। इसके जरिए वह अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाह रहा है।

एक अन्य दक्षिणपूर्व एशियाई देश विएतनाम भी भारतीयों के लिए वीजा की बाध्यता को खत्म करने पर विचार कर रहा है। विएतनाम के लिए भारत एक बड़ा पर्यटक स्रोत है। वियतनाम की एयरलाइन कम्पनियाँ भी लगातार अपनी सेवाएँ भारत में बढ़ा रही हैं।

विश्व के अलग-अलग देशों के पासपोर्ट की ताकत को बताने वाली हेनले इंडेक्स के अनुसार, भारत के नागरिक बिना वीजा के 57 देशों की यात्रा कर सकते हैं। अधिक देशों का किसी देश के नागरिकों को बिना वीजा के आने देना उसके प्रभाव को प्रदर्शित करता है।

अमेरिका में मनेगा ‘सनातन धर्म दिवस’: उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद ऐलान, लुइसविले में 3 सितंबर सनातन धर्म दिवस घोषित

   उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान पर विदेशों में होने लगा बवाल (फोटो साभार- ट्विटर                        @Udhaystalin /इंडिया टुडे)
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस के प्रियांक खड़गे की सनातन धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों पर भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मलेशिया के एक हिंदू संगठन ने उदयनिधि के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले शहर की मेयर ने 3 सितंबर 2023 को सनातन धर्म दिवस घोषित कर दिया है।

मलेशिया के हिंदू संगम नाम के हिंदू संगठन ने उदयनिधि के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन ने मलेशिया के भारतीय उच्चायोग को उदयनिधि के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। वहीं, अमेरिका में लुइसविले की मेयर बारबरा सेक्सटन ने महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान शहर में हर साल 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस मनाने का आधिकारिक ऐलान किया है।

मलेशिया हिंदू संगम ने जताया एतराज

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई का कामराजार एरिना में सनातन उन्मूलन सम्मेलन में विवादित टिप्पणी की थी। सम्मेलन के शीर्षक की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा था कि आयोजनकर्ताओं ने ‘सनातन विरोधी सम्मेलन’ के बजाए ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो बहुत अच्छा है।

उन्होंने आगे कहा था, “कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका महज विरोध ही काफी नहीं होता, हमें उन्हें जड़ से मिटाना होगा। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना, ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते, बल्कि हमें उन्हें मिटाना होगा। सनातन धर्म भी ऐसा ही है।” उनके इस बयान पर भारत भारत में बवाल हो गया।
मलेशिया के हिंदू संगम ने सोमवार 4 सितंबर को मलेशिया में भारतीय उच्चायोग को पत्र लिखकर कहा, “मलेशिया हिंदू संगम और मलेशिया के हिंदू समुदाय की तरफ से हम उदयनिधि स्टालिन के बयान का सख्त विरोध करते हैं। सनातन रोको कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बयान दिया, हम उसकी निंदा करते हैं। सनातन उन्मूलन सम्मेलन में दिए गए भाषण में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना मच्छरों, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की और कहा कि सनातन धर्म को बढ़ने से रोकना होगा।”
मलेशिया हिंदू संगम ने पत्र में लिखा कि तमिलनाडु के खेल मंत्री एक तरह से एक धर्म के लोगों के नरसंहार का आह्वान कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में हिंदुत्व यानी सनातन धर्म की शुद्धता को तार-तार कर दिया। यह एक अपमानजनक भाषण था। इसमें एक मंत्री ने ऐसे धर्म के खिलाफ बोला, जिसे भारत में अधिकतर लोग मानते हैं।
पत्र में आगे लिखा है, “मंत्री होने के नाते उन्हें धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और पूरी पारदर्शिता के साथ अपने कार्यों का निर्वहन करना चाहिए। उनके भाषण से पूरी दुनिया के हिंदुओं में नफरत और गुस्से को बढ़ाया है।” इस संगठन ने भारत सरकार से स्टालिन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
संगठन ने लिखा, “हम एक बार फिर इस भाषण पर अपनी कड़ी निंदा और असहमति दर्ज करते हैं। हम भारत सरकार से लोगों की संवेदनशीलता का अपमान करने वाले इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं।”

लुइसविले में 3 सितंबर सनातन धर्म दिवस घोषित

संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले के मेयर ने शहर में 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस घोषित किया है। लुइसविले में केंटुकी के हिंदू मंदिर में महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान मेयर क्रेग ग्रीनबर्ग की ओर से डिप्टी मेयर बारबरा सेक्स्टन स्मिथ ने ये आधिकारिक उद्घोषणा पढ़ी।
इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक नेता मौजूद रहे थे। इनमें परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष चिदानंद सरस्वती, श्री श्री रविशंकर और भगवती सरस्वती के साथ-साथ उपराज्यपाल जैकलीन कोलमैन, डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ कीशा डोर्सी और कई अन्य आध्यात्मिक नेताओं और गणमान्य लोगों ने शिरकत की थी।

उदयनिधि और प्रियांक खड़गे खिलाफ दर्ज हैं एफआईआर

I.N.D.I.A. गठबंधन में डीएमके की सहयोगी पार्टियों ने भी स्टालिन के बयान की निंदा की है। वहीं, देश के 262 मशहूर हस्तियों ने स्टालिन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने का निवेदन किया है।
हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के खिलाफ रामपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, उदयनिधि के खिलाफ दिल्ली में भी एफआईआर दर्ज कराई गई है।

चीन के काल्पनिक नक़्शे पर भड़के कई देश: भारत के बाद ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया ने भी किया खारिज, दक्षिण चीन सागर पर दावे को भी नकारा

चीन के काल्पनिक नक़्शे पर भारत के विरोध  के तीन दिन बाद  चार अन्य  देशों ने भी उनके क्षेत्रों को अपना बताने वाले चीन के मानचित्र जारी करने पर आलोचना की है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार शाम (29 अगस्त, 2023 ) को ही चीन द्वारा काल्पनिक क्षेत्रीय मानचित्र का 2023 का संस्करण जारी करने पर पलटवार किया। चीन के विचित्र दावों पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चीन के तथाकथित 2023 “मानक मानचित्र” को खारिज कर दिया।
                                                         चीन का विकृत मानचित्र (स्रोत X)

वहीं अब, फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया और वियतनाम ने भी चीन द्वारा जारी “मानक मानचित्र” को अस्वीकार कर भारत की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। बता दें कि चीन के काल्पनिक मानचित्र में इन चार देशों के क्षेत्रों को भी चीन ने अपना बताया है। वियतनाम ने बयान दिया है कि यह नक्शा स्प्रैटली और पारासेल द्वीपों पर उसकी संप्रभुता और उसके जल क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।

वियतनाम के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, फाम थू हैंग (Pham Thu Hang) ने सरकार की वेबसाइट पर एक बयान में कहा, “वियतनाम डॉटेड लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर में चीन के सभी दावों का दृढ़ता से विरोध करता है।” फिलीपींस ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान जारी किया है। 

फिलीपींस सरकार ने भी एक बयान जारी कर विरोध जताया है,  फिलीपींस ने बयान में कहा, “फिलीपींस के समुद्री क्षेत्रों पर चीन की कथित संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र को वैध बनाने के इस नवीनतम प्रयास का अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के तहत कोई आधार नहीं है।”

चीन ने अपने काल्पनिक क्षेत्रीय मानचित्र का नवीनतम संस्करण जारी किया है जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख (अक्साई चिन क्षेत्र) जैसे भारतीय क्षेत्रों को अपना बताया। भारतीय क्षेत्रों के अलावा, चीन के नक़्शे में ताइवान और दक्षिण चीन सागर में विवादास्पद 9-डैश लाइन भी शामिल थी, लेकिन इस बार उसने दक्षिण चीन सागर में अपना दावा बढ़ाते हुए इसे 10-डैश लाइन तक बढ़ा दिया; जबकि इस क्षेत्र का अधिकांश भाग पश्चिमी फिलीपींस सागर में शामिल है।

आधिकारिक फिलीपींस समाचार एजेंसी ने विदेश मामलों के प्रवक्ता मा टेरेसिटा डाज़ा ( Ma. Teresita Daza) ने कहा, “(2016 Arbitral Award) ने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘नाइन-डैश लाइन’ के प्रासंगिक हिस्से से घिरे दक्षिण चीन सागर के समुद्री क्षेत्र कन्वेंशन के विपरीत हैं और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”

चीन द्वारा हाल ही में जारी किए गए विकृत मानचित्र में, उसने दक्षिण चीन सागर के 10-डैश लाइन तक दावा थोक दिया है।  (स्रोत: एएनसी डिजिटल/यूट्यूब)

मलेशिया और ताइवान भी चीन के आक्रामक विस्तारवादी रवैये की आलोचना करते हुए विरोध में आगे आए। मलेशिया ने कथित तौर पर कहा कि वह चीन को प्रोटेस्ट नोट भेजेगा। बर्नामा समाचार एजेंसी ने विदेश मंत्री डॉ. जाम्ब्री अब्दुल (Dr Zambry Abdul Kadir) के हवाले से कहा, “यह हमारी प्रथा रही है (इस तरह के मुद्दों से निपटने के दौरान)…और विस्मा पुत्रा (विदेश मंत्रालय) द्वारा कल जारी किए गए बयान के आधार पर, अगले कदम में एक विरोध नोट भेजना शामिल है।” 

ताइवान ने कहा कि उस पर कभी भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा शासन नहीं किया गया है। “ताइवान, चीन गणराज्य, एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है जो पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के अधीन नहीं है। पीआरसी ने कभी भी ताइवान पर शासन नहीं किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेफ लियू ने ताइवान न्यूज को बताया, ये सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त तथ्य और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मौजूद है।

यह विवाद तब सामने आया जब चीनी सरकार के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स ने एक पोस्ट किया। पोस्ट में कहा गया कि प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 28 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चीन का नवीनतम ‘मानक मानचित्र’ लॉन्च किया। इस चीन के ‘मानक मानचित्र’ के नवीनतम संस्करण के रूप में बताया गया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अभी हाल ही में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात की थी और इस बात पर जोर दिया था कि दोनों देशों को सीमा पर तनाव कम करने के लिए व्यापक बातचीत करनी चाहिए। उस चर्चा की पृष्ठभूमि में, और जी-20 शिखर सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले ही भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा करने में चीन का आक्रामक व्यवहार एलएसी पर तनाव को हल करने के लिए उसकी ओर से ईमानदारी की कमी को दर्शाता है।

हिजाब वाली महिला मंत्री के मर्दों को टिप्स : बीवी जिद्द करे तो उसके साथ 3 दिन न सोएँ, करें पिटाई

कर्नाटक में बुर्के पर चल रहे विवाद  के बीच मलेशिया की हिजाब पहनने वाली एक महिला मंत्री के बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। महिला मंत्री ने ​मर्दों को सलाह दी है कि यदि उनकी पत्नी ‘उचित व्यवहार’ न करें तो वे उसकी पिटाई करें। इतना ही नहीं मर्दों को जिद्दी बीवी के साथ तीन दिन तक नहीं सोने की भी सलाह दी है।

मलेशिया की इस महिला मंत्री का नाम है- सिती जैला मोहम्मद युसॉफ (Siti Zailah Mohd Yusoff)। वे पैन इस्लामिक मलेशियन पार्टी की सांसद हैं। महिला, परिवार और सामुदायिक विकास विभाग की उपमंत्री हैं। जैला मोहम्मद युसॉफ ने इंस्टाग्राम पर दो मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने इसे ‘मदर टिप्स’ का नाम दिया। इस वीडियो में उपमंत्री ने जिद्दी पत्नियों को अनुशासित करने के लिए पतियों को ‘टिप्स’ दिए हैं। इसके बाद उन्होंने महिलाओं को भी पति के साथ रहने के तौर-तरीकों के बारे में ‘सलाह’ दी है।   

वीडियो में वह कहती हैं कि पति पहले अपनी जिद्दी पत्नियों के साथ बात करके उन्हें अनुशासित करें। अगर उनकी पत्नियाँ फिर भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति तीन दिनों तक उनके साथ नहीं सोएँ। सिती जैला ने आगे कहा कि इसके बावजूद अगर पत्नी सलाह लेने से इनकार करती है या अलग सोने के बाद भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति सख्ती दिखाए। वे अपनी पत्नियों की पिटाई करें। उनके इस वीडियो के बाद उन पर घरेलू हिंसा (Domestic Violence) को सामान्य करने का आरोप लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि वह मर्दों को अपनी पत्नियों को पीटने के लिए कहकर घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं।

महिलाओं को दी ये हिदायत

मंत्री सिती जैला ने महिलाओं को सलाह दी कि अगर वे पतियों का दिल जीतना चाहती हैं, तो वे अपने शौहर के कहने पर ही बातचीत करें। सिती ने महिलाओं से कहा कि अपने शौहर से तब बात करें जब वे शांत हों, खाना खा चुके हों, प्रार्थना कर चुके हों और आराम कर रहे हों। उनका कहना था कि जब वह बोलना चाहती हैं, तो पहले अपने शौहर से इजाजत लें। मलेशिया की मंत्री की इन बयानों को लेकर उनकी हर तरफ आलोचना हो रही है और कई संगठनों ने कहा है कि उन्हें अब अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

एक साल में रिपोर्ट हुए 9015 घरेलू हिंसा के मामले

महिला अधिकार समूहों के एक गठबंधन, ज्वाइंट एक्शन ग्रुप फॉर जेंडर इक्वेलिटी ने सिती जैला पर घरेलू हिंसा को सामान्य करने का आरोप लगाया और माँग की कि वह उप महिला मंत्री के पद से इस्तीफा दें। एक संयुक्त बयान में कहा गया कि उप मंत्री को घरेलू हिंसा को सामान्य करने का प्रयास किया, जो कि मलेशिया में एक अपराध है। संगठन ने कहा कि 2020 और 2021 के बीच, घरेलू हिंसा की 9015 पुलिस रिपोर्टें दर्ज की गईं। इसन ने कहा कि हो सकता है कि असल में ये आँकड़े और भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कुछ महिलाएँ अपने साथ हुई ज्यादतियों को रिपोर्ट नहीं करवाती है, जिसकी वजह से वह रिकॉर्ड में नहीं आ पाता है।

मलेशिया की फोटो से भारत में फैलाया जा रहा झूठ

कोरोना महामारी के समय में केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए मीडिया गिरोह ने अफवाहों का कारोबार तेज किया हुआ है। इसी क्रम में कल पत्रकार रोहिणी सिंह ने अपने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर किया और उसे ऐसे दर्शाया जैसे वह भारत में लागू किए गए लॉकडाउन का दुष्परिणाम है।
दरअसल, रोहिणी सिंह ने मलेशिया की दुकानों में रखे चमड़ों के प्रोडक्ट्स की कुछ तस्वीरें शेयर की, जिन पर नमी के कारण पड़े धब्बे साफ दिख रहे थे।
बस फिर क्या? उन्होंने मलेशिया की इस खबर का इस्तेमाल अपना प्रोपेगेंडा चलाने के लिए किया और तस्वीरों के साथ ट्वीट में ऐसा लिखा, जिससे देशव्यापी लॉकडाउन पर सवाल किए जाने लगे।

उन्होंने लिखा, “इन सामानों को देखिए, अगर लोगों को लॉकडाउन से पहले थोड़ा समय दिया जाता तो शायद वे लोग अपने सामानों को सुरक्षित रख पाते।”
हालाँकि, ये ट्वीट रोहिणी के ट्विटर से डिलीट किया जा चुका है। लेकिन झूठ फैलाने के कारण लोग उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं और उन्हीं के गिरोह के प्रतीक सिन्हा को इसका फैक्ट चेक करने को बोल रहे हैं। साथ ही ये भी कह रहे है कि अगर ऑल्ट न्यूज इसका फैक्ट चेक करेगा तो उनके पैसे कट जाएँगे।

वास्तविक खबर 
कोरोना महामारी के कारण 50 दिन के लॉकडाउन से जूझते हुए मलेशिया में व्यापारियों ने हाल में अपना कारोबार दोबारा चालू किया। मगर, इस बीच उन्हें एक नई परेशानी से जूझना पड़ा। 
संक्रमण का प्रभाव रोकने के लिहाज से 50 दिन तक जो दुकानें वहाँ बंद रहीं, उन दुकानों में रखे-रखे चमड़ों के प्रोडक्ट्स पर धब्बे पड़ गए। जिसके कारण कुछ व्यापारियों ने वहाँ इसे देखकर हताशा जताई। वहीं कुछ व्यापारी सकारात्मक होकर इसके समाधान पर बात करते नजर आए।
स्ट्रेटटाइम्स के अनुसार, पिनांग के पुलाऊ तिकस के एक शॉपिंग मॉल में कोल्ड वियर स्टोर के मालिक, चोंग ने बताया कि ये सब ह्यूमिडिटी के कारण हुआ होगा। उन्होंने कहा कि मॉल का तापमान एयर कंडीशनिंग पर निर्भर करता है, कभी-कभी यह ठंडा हो जाता है। इससे आसपास की हवा में नमी अचानक बढ़ जाती है और धब्बे पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
चोंग के मुताबिक, कुछ वॉलेट, चमड़े के बैग और हैंडबैग में उन्हें ये परेशानी देखने को मिली है। इन धब्बों के पड़ने से दुकान में रखा नया सामान भी कम आकर्षित लगने लगा है। लेकिन इससे उनका काम प्रभावित नहीं होगा। वे कहते हैं कि केवल साफ कपड़े पर थोड़े से तेल का इस्तेमाल करके वो इन सभी प्रोडक्ट्स को साफ कर सकते हैं।
ऐसे ही, मिस ले नाम की अन्य महिला दुकानदार ने बताया कि जब 2 महीने बाद उन्होंने अपनी दुकान खोली तो उन्हें अधिकतर सामानों पर धूल जमी मिली। उन्होंने बताया कि उनके कुछ सामान जो डिस्प्ले पर रखे थे, उनमें उन्हें धूल ज्यादा मिली, क्योंकि दुकानें बंद होने के बाद वह उस जगह को साफ करने में असमर्थ थे। मगर वे प्रोडक्ट जो उन्होंने कागजों में लपेट कर रखे थे, वे सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा, हमारे ज्यादातर प्रोडक्ट शुद्ध चमड़े के नहीं होते। वे या तो आर्टिफिशियल चमड़े (PU Leather) के होते हैं या फिर पीवीसी चमड़ों के। इसी लिए उनमें धब्बे कम पड़ते हैं। 
उन्होंने कहा, हमारे ज्यादातर प्रोडक्ट शुद्ध चमड़े के नहीं होते। वे या तो आर्टिफिशियल चमड़े (PU Leather) के होते हैं या फिर पीवीसी चमड़ों के। इसी लिए उनमें धब्बे कम पड़ते हैं। 
अगर यही स्थिति भारत की होती 
मलेशिया में व्यापारी कोरोना से आई इस परेशानी को बेहद आम बात मानकर चल रहे हैं। लेकिन भारत में मीडिया गिरोह के लिए ये तस्वीरें झूठ फैलाने का साधन बन गई हैं। सोचिए, जिन धब्बों को हटाने को लेकर मलेशिया के व्यापारी आम युक्तियाँ बता रहे हैं और कह रहे हैं कि इससे आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है, उस खबर को लेकर रोहिणी सिंह ने कैसे अपने फॉलोवर्स को बरगलाया कि देखते ही देखते इस पर 400 लोगों ने बिना सच्चाई जाने लाइक कर दिया।
अगर वास्तविकता में ये तस्वीर भारत के किसी कोने से आती, तो क्या ये अजेंडा ट्वीट डिलीट करने मात्र से खत्म होता? नहीं। तब शायद इसे पूरे राष्ट्र की परेशानी बताया जाता और इस प्रकार दर्शाया जाता जैसे मोदी सरकार द्वारा लॉकडाउन का फैसला कोरोना के समय में लिया गया सबसे गलत निर्णय है, जिसने व्यापारियों को नुकसान झेलने पर मजबूर कर दिया है।

मोदी ने फिर पेश की मानवता की मिसाल ; 55 देशों को HCQ सप्लाई


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं "फलदार वृक्ष हमेशा झुकता है", जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चरितार्थ कर रहे हैं। विदेशों से मिल रहे दान या खैरात से अपनी तिजोरी भरते भारत में पल रहे मोदी विरोधी चाहे जितना मोदी का विरोध कर लें, परन्तु सख्त फैसलों के लिए विश्व में चर्चित मोदी कोमलता में भी खूब चर्चित हैं। 
कोरोना वायरस के प्रसार के साथ ही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) की माँग दुनिया भर में बढ़ती जा रही है। इसकी आपूर्ति के लिए दुनिया के अधिकतर देश भारत की तरफ देख रहे हैं। भारत भी अपनी जरूरतों को देखते हुए और इसे पूरा करने के बाद दुनिया के अधिकतर देशों की मदद कर रहा है। भारत ने 55 देशों में मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भेजने का फैसला किया है। 
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक फलक पर एक बार फिर मानवता की मिसाल कायम की है। उन्होंने इस संकट की घड़ी में उन देशों की मदद की है जो आज तक हमें घाव देते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन देशों को भी मरहम लगाकर वैश्विक कूटनीतिक के लिए उच्चतम मापदंड स्थापित किया है। ब्राजिल और अमेरिका के बाद अब पाकिस्तान ने भी वैश्विक महामारी कोरोना से बचने के लिए भारत से मलेरिया की हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई मांगी है। इतना ही नहीं इस दवाई के लिए मलेशिया और तुर्की ने भी भारत से संपर्क किया है। भारत इन देशों की मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार किया है।

जिन देशों ने घाव दिया उन्हें भी मरहम दे रहा भारत
जो देश बीते समय में भारत के विरोधी देश के रूप में सामने आए हैं आज वही अपनी जनता को कोरोना के कहर से बचाने के लिए भारत के सामने याचक की तरह खड़ा है। वह चाहे पाकिस्तान हो या फिर मलेशिया या फिर तुर्की सभी अपनी जनता को कोरोना से बचान के लिए भारत की मदद मांगने को मजबूर है। ऐसा भी नहीं है कि भारत ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानवता की मिसाल कायम करते हुए उन देशों को मदद करने को तैयार है।
मलेशिया ने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण से किया इनकार
भारत के विरोधी देश के रूप में पाकिस्तान का नाम तो जगजाहिर है, लेकिन बीते कुछ दिनों में मलेशिया ने भी भारत का विरोध किया था। मलेशिया वही देश है जो आतंक को बढ़ा देने के आरोपी जाकिर नाइक के प्रत्‍यर्पण से इनकार कर दिया था। मालूम हो कि पिछले चार सालों  से जाकिर नाइक मलेशिया में ही रह रहा है। लेकिन भात के दबाव के बावजूद मलेशिया ने नाइक के प्रत्यर्ण को खारिज कर दिया था। आज वही मलेशिया अपनी पूरी जनता को कोरोना के कहर से बचाने के लिए भारत के आगे हाथ फैलाए हुए खड़ा है।
पाकिस्तान तो शुरू से रहा है विरोधी
पाकिस्तान तो भारत का शुरू से विरोधी रहा है। वह चाहे आतंकियों को प्रश्रय देना हो या सीजफायर का उल्लंघन करना हो, पाकिस्तान हर प्रकार से भारत का दुश्मन रहा है। हाल ही में देश सीएए कानून लागू करना हो या फिर जम्मू एवं कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म करना हो, पाकिस्तान ने भारत के कदम का विरोध ही नहीं किया था बल्कि उसके खिलाफ जो बन सकता था वह सब किया भी था। आज वही पाकिस्तान भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा मांग रहा है। मालूम हो कि पाकिस्तान भी कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है।
भारत की ओर उम्मीदों से देख रही दुनिया
इससे पहले भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करने के बाद अमेरिका समेत दूसरे देशों को भी भारत ने मानवीय आधार पर HCQ की आपूर्ति शुरू की। अमेरिका को भारत 36,00000 टेबलेट भेज चुका है। इसी के साथ 15 से ज्यादा देशों को ये दवा अब तक भेजी जा चुकी है।

इनमें अमेरिका और ब्रिटेन से लेकर रूस, दक्षिण अफ्रीका समेत यूरोप लैटिन अमेरिका, अरब और अफ्रीकी देश शामिल हैं। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा मलेरिया के अलावा आर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होती है। हाल में अमेरिका, चीन व दक्षिण कोरिया समेत कई देशों में इस दवा से ही कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज हुआ है। इसके बाद से ही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की माँग विदेशों में बढ़ गई है।
 हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सबसे बड़ा उत्पादक
भारत दुनिया में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सबसे बड़ा उत्पादक है। यही वजह है कि अब विदेशों से ही इस दवा की अचानक माँग बढ़ गई है। हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी साफ कर चुके हैं कि भारत की जरूरत को देखते हुए ही अन्य देशों को इस दवा की सप्लाई की जाएगी।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को काफी उपयोगी माना जा रहा है। यही कारण है कि अमेरिका व ब्राजील के राष्‍ट्रपति और इजराइल के पीएम ने पीएम मोदी की प्रशंसा की। ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने पीएम मेादी की तुलना हनुमान भगवान से की, जिन्‍होंने कष्‍ट के समय लोगों को संजीवनी उपलब्‍ध कराई।
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'Islam on the Move' पुस्तक में हस्तमैथुन, समलैंगिकता, सबके सामने शौच-पेशाब करने की तबलीगियों की पूरी ट्रेनिंग की कहानी

Coronavirus: 20 states at risk due to Tablighi Jamaat, search ...
OAPEN Library - Islam on the Move : The Tablighi Jama'at in ...आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
तबलीगी जमातियों के कोरोना संक्रमित होने के कारण के चर्चा में आने के बाद उनसे संबंधित नई-नई बातों का खुलासा हो रहा है। टीवी परिचर्चाओं में भाग लेने वाले अधिकतर मुस्लिम विद्धवान जमात का घोर विरोध करते देख हैरानी होती है, कि आखिर ये लोग भी इस्लाम का प्रचार एवं प्रसार कर रहे हैं। लेकिन खुलकर नहीं नहीं बताया जाता कि आखिर विरोध का मूल कारण क्या है? इतना तो जरूर कहते हैं कि "मरकज़ी जमाती कुरान को नहीं मानते।" ऐसे में गैर-मुस्लिमों को यह सोंचने के लिए विवश होना पड़ता है कि "जब ये लोग कुरान को नहीं मानते, फिर किस आधार पर इनको मुसलमान अनुसरण करते हैं?"
लेकिन मलेशिया के लेखक फारिश अ नूर ने अपनी किताब, ‘इस्लाम ऑन द मूव’ में इसी से संबधित चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि जो जमाती मरकज़ में रहते हैं, वे एक-दूसरे के सामने खुलेआम शौच करने व पेशाब करने में शर्म नहीं करते। क्योंकि उनके भीतर अपने शरीर को लेकर शर्म खत्म हो चुकी होती है। 
मलेशिया लेखक की किताब का अंश
Islam on the Move: The Tablighi Jama'at in Southeast Asia: Farish ...इतना ही नहीं, वहाँ टॉयलेट का डिजाइन इस तरह से बनाया जाता है कि तबलगियों को शौच करते हुए सब देख सकें। ताकि अन्य तबलीगी अपने भाइयों को आँकें और उनके पेशाब करने की मुद्रा को सुन्नत के अनुरूप सुधार सकें। किताब में इस बात का उल्लेख है कि मुस्लिमों को बैठकर पेशाब करना चाहिए, खड़े होकर नहीं।

इसके अलावा इन खुले शौचालयों का एक उद्देश्य ये भी होता है कि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि तबलीगी जमात का कोई भी जमाती मरकज़ के भीतर समलैंगिक संबंध और हस्तमैथुन जैसी क्रियाएँ न करें। क्योंकि ये दोनों चीजें इस्लाम में हराम है। 
अब अगर, मलेशिया के लेखक का अवलोकन उचित है और ये सारी बातें सच हैं तो हमें इस समय जमातियों से संबंधित खबरों पर हैरान नहीं होना चाहिए। क्योंकि इनकी शर्म तो उस मरकज़ में ही खत्म कर दी जाती है, जहाँ दीन की बातें सिखाने का दावा होता है। लेकिन उसके बदले मजहब का हवाला देकर ये सब सिखाया जाता है।

PDF) Farish A. Noor, Islam on the move: the Tablighi Jama'at in ...
स्तंभकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्या कुमार सोती ने भी इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने अपने ट्विटर पर इसके संबंध में लिखा, “आज हर कोई आइसोलेशन में रखे गए तबलीगियों को देखकर हैरान है कि वे इतना क्यों थूक रहे हैं। तो बता दें कि उनका धर्मशास्त्र उन्हें ऐसा करने की शिक्षा देता है कि नमाज पढ़ते समय या मजहबी कार्य करते समय शैतान की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए वो ये करें।”
इन सभी बातों के अलावा हमें मरकज़ के मुखिया मौलाना साद की वो वायरल ऑडियो भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है, जिसमें वह सभी जमातियों को यह शिक्षा देने की कोशिश कर रहा था कि कोरोना वायरस एक साजिश है, जिसे मुस्लिमों को मारने के लिए रचा जा रहा है। साथ ही सरकार को एक शैतान के रूप में प्रदर्शित किया था क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस के मद्देनजर किसी भी धार्मिक स्थल पर भीड़ इकट्ठा करने को मना किया था।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा अपने विवादित बयानों के लिए पहले ही चर्चित हैं। जामिया मे.....
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तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद, जिसने दावा किया था कि वो कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात बरतते हुए क्वारंटीन में ह.....
इसी शिक्षा का असर है कि अब स्वास्थ्यकर्मियों को जमातियों के बेहूदे रवैये का सामना करना पड़ा रहा है। और खबरें आ रही हैं कि वे सरकार व प्रशासन की बात नहीं मान रहे हैं, वॉर्डों में थूक रहे हैं, नर्सों से बदतमीजी कर रहे हैं, फब्तियाँ कस रहे हैं। आस-पास गंदगी मचा रहे हैं और खुलेआम कॉरिडोर में शौच कर रहे हैं।