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मुस्लिम कट्टरपंथियों का दोगलापन : नीतीश पर सियापा, शामली पर सन्नाटा क्यों?

बुर्का/हिजाब विवाद मेरे हिसाब से कई दशक पुराना है। Organiser Weekly के तत्कालीन संपादक प्रो वी पी भाटिया अपना बहुचर्चित स्तम्भ Cabbages & Kings में पता नहीं कितनी बार लिखा कि "burqa is not islamic culture......even attractive and charming boys were asked to go in purdah..." लेकिन कभी किसी ने इसका खंडन नहीं किया। प्रो भाटिया के इस स्तम्भ को लगभग हर शिक्षित मुस्लिम बड़े शौक से पढ़ता था। टीवी परिचर्चाओं में मुस्लिम महिलाओं द्वारा मौलानाओं से यही सवाल पूछने पर बगलें झांकते नज़र आते हैं।    
अगर बुर्का Islamic Culture है तो चीन में दाढ़ी और रोज़ा रखने तक पर पाबन्दी है। किसी भी कट्टरपंथी संस्था ने चीन दूतावास पर धरना या प्रदर्शन करने की हिम्मत की? इतना ही नहीं अब तो विदेशों में बैन लगना शुरू होने पर किसी की आवाज़ नहीं निकल रही। भारत में इसलिए सियापा करते है कि इन कट्टरपंथियों के आगे पाखंडी सेक्युलरिस्ट्स घुटने टेक चुके हैं।   
भारत में बुर्के और हिजाब को लेकर छिड़ी ताजा बहस ने एक बार फिर समाज के दोहरेपन को उजागर कर दिया है। एक तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने पर बवाल मचा है, जहाँ पाकिस्तानी डॉन से लेकर देश के तमाम इस्लामी संगठन इसे ‘सम्मान’ की लड़ाई बताकर धमकी दे रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, ठीक इसी समय उत्तर प्रदेश के शामली से एक रूहँकपा देने वाली खबर आती है, जहाँ एक शौहर ने अपनी बीवी और दो मासूम बच्चों को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि महिला बिना बुर्के के अपने मायके चली गई थी।

हैरानी की बात यह है कि नीतीश कुमार के मुद्दे पर आसमान सिर पर उठाने वाले कट्टरपंथी और ‘नारीवादी’ सुर, शामली की उस बेगुनाह माँ और बच्चों की मौत पर पूरी तरह खामोश हैं। यह दोहरा रवैया साफ करता है कि इस देश में मुस्लिम महिलाओं के ‘अधिकार’ क्या होंगे, यह वो खुद नहीं बल्कि कट्टरपंथी जमात तय करती है। जहाँ ईरान जैसे देशों में महिलाएँ हिजाब की बंदिशों से आजादी के लिए जान दे रही हैं, वहीं भारत में बेंगलुरु से लेकर पटना तक, उसी हिजाब को ‘अनिवार्यता’ बनाने के लिए छात्राओं को मोहरा बनाकर सड़कों पर उतारा जा रहा है।

चुनिंदा नारीवाद: जब ‘एजेंडा’ देखकर बदल जाती है संवेदना

भारत में बुर्का विवाद पर होने वाली चर्चा अक्सर ‘सुविधाजनक राजनीति’ की भेंट चढ़ जाती है। यहाँ खुद को नारीवादी (Feminist) और उदारवादी कहने वाले लोगों का एक ऐसा वर्ग है, जिसका रुख घटना के पात्रों को देखकर बदल जाता है। जब नीतीश कुमार जैसे नेता किसी महिला का हिजाब खींचते हैं, तो यही लोग इसे ‘अस्मिता’ और ‘सम्मान’ की लड़ाई बना देते हैं। बॉलीवुड हस्तियाँ वीडियो जारी कर इसे इस्लाम का अपमान बताती हैं और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की माँग करती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के शामली जैसे मामले में ये ‘प्रगतिशील’ स्वर अचानक खामोश हो जाते हैं।

यह मौन बहुत खतरनाक है। यह दर्शाता है कि इन लोगों के लिए ‘महिला अधिकार’ केवल एक राजनीतिक हथियार है। जब कट्टरपंथ की वजह से किसी मुस्लिम महिला की जान जाती है, तो ये लोग इसे ‘मजहबी मामला’ कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन जब किसी गैर-मुस्लिम नेता से गलती होती है, तो इसे ‘सांप्रदायिक एजेंडा’ बना दिया जाता है। शामली की घटना, जहाँ शौहर फारुख ने अपनी बीवी ताहिरा और दो मासूम बेटियों की हत्या कर उन्हें सेफ्टी टैंक में दबा दिया क्योंकि बीवी बुर्का नहीं पहनी थी।

इसके साथ ही, बुर्के की आड़ में कट्टरपंथी सोच एक ऐसा समाज रच रही है जहाँ महिलाओं की पहचान केवल उनके पहनावे तक सीमित कर दी गई है। कट्टरपंथी तत्व बुर्के को ‘सुरक्षा’ का नाम देते हैं, लेकिन हकीकत में यह नियंत्रण का एक माध्यम है। बुर्के की आड़ में कई बार ऐसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है जहाँ अपराधी की पहचान करना नामुमकिन हो जाता है। चाहे वह मतदान केंद्रों पर फर्जी वोटिंग की कोशिश हो या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होना, बुर्का एक सुरक्षा कवच के बजाय एक ढाल की तरह इस्तेमाल होने लगा है। जब तक समाज इस कट्टरपंथी सोच और नारीवाद के दोहरे मापदंडों को नहीं पहचानेगा, तब तक नुसरत परवीन जैसी महिलाएँ राजनीति का मोहरा बनती रहेंगी और शामली जैसी महिलाएँ कट्टरपंथ की भेंट चढ़ती रहेंगी।

दुनिया में क्यों बढ़ रही है बुर्का बैन की माँग?

 दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बुर्का और नकाब को लेकर बहस तेज होती जा रही है। भारत में इसे कई बार महिला अधिकार और पसंद से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कई विकसित देशों में इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखा जा रहा है। वहाँ बुर्का को महिलाओं पर दबाव का प्रतीक और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है। यही वजह है कि यूरोप और अन्य देशों में बुर्का बैन की माँग लगातार बढ़ रही है।

यूरोप में बुर्का पर रोक की लहर- यूरोप के कई देशों ने बीते कुछ सालों में बुर्का और नकाब पर सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एब्बा बुश ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का और नकाब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही। उन्होंने साफ कहा कि यह महिलाओं के लिए एक तरह का उत्पीड़न है, जिसे सहन नहीं किया जाना चाहिए।

फ्रांस 2011 में ऐसा पहला देश बना, जिसने सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर पूरी तरह रोक लगा दी। इसके बाद बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और नीदरलैंड जैसे देशों ने भी इसी तरह के कानून बनाए। इन देशों का कहना है कि खुले समाज में लोगों को एक-दूसरे को पहचानने का अधिकार होना चाहिए।

बुर्का बैन के पीछे सबसे बड़ा कारण सुरक्षा को बताया गया। यूरोपीय देशों की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चेहरा ढकने से किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इससे अपराध और आतंकी गतिविधियों को छिपने का मौका मिल सकता है।

इसी वजह से चीन के शिंजियांग प्रांत और श्रीलंका जैसे देशों ने भी बम धमाकों और आतंकी हमलों के बाद सार्वजनिक जगहों पर लंबी दाढ़ी और बुर्का पहनने पर पाबंदी लगाई। सरकारों का कहना है कि सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

यूरोप में बुर्का को केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लैंगिक असमानता से भी जोड़ा जा रहा है। कई देशों का तर्क है कि बुर्का महिलाओं को समाज से अलग-थलग कर देता है और उन्हें मुख्यधारा से दूर कर देता है।

यूरोपीय नेताओं का कहना है कि अगर कोई महिला समाज का हिस्सा बनना चाहती है, तो उसे पूरी तरह ढका हुआ नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, चेहरा छिपाने से संवाद, पढ़ाई, नौकरी और सामाजिक मेल-जोल में रुकावट आती है।

पुर्तगाल की संसद ने हाल ही में बुर्का बैन से जुड़े एक बिल को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरे यूरोपीय देशों में भी इसी तरह के नियम लागू हैं, जहाँ बार-बार नियम तोड़ने पर जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान है। इन देशों का साफ कहना है कि मजहब निजी मामला है, लेकिन सार्वजनिक जगहों पर नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया में भी सांसद पॉलिन हैनसन संसद में बुर्का पहनकर पहुँचीं, ताकि यह दिखा सकें कि चेहरा ढककर किसी सार्वजनिक जगह पर जाना सुरक्षा के लिए कितना जोखिम भरा हो सकता है। उनका कहना है कि अगर आम लोग चेहरा ढककर हर जगह जा सकते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। इस कदम पर उनकी आलोचना भी हुई, लेकिन मुद्दे को लेकर बहस भी हुई।

पश्चिमी देशों का मानना है कि खुले और आधुनिक समाज में पहचान छिपाने की परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उनके लिए यह सिर्फ कपड़ों का मुद्दा नहीं, बल्कि समानता, सुरक्षा और सामाजिक मेल-जोल से जुड़ा सवाल है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में बुर्का बैन की माँग लगातार तेज होती जा रही है।

क्या वाकई इस्लाम में बुर्का या हिजाब अनिवार्य है?

बुर्का या हिजाब को लेकर दुनिया दो धड़ों में बँटी हुई है। कट्टरपंथी सोच इसे इस्लाम का अभिन्न हिस्सा और महिलाओं के लिए ‘अनिवार्य’ (Mandatory) बताती है, लेकिन यदि गहराई से कुरान और इस्लामी सामग्रियों का लिखित विश्लेषण करेंगे, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।

कुरान इस्लाम की बेवसाइट के ट्रू इस्लाम में जानकारी दी गई है। इसका टाइटल ‘बुर्का- इस्लामी या सांस्कृतिक?’। कुरान में ‘हिजाब’ शब्द का जिक्र सात बार आया है। लेकिन इसका इस्तेमाल महिलाओं के पहनावे या ड्रेस कोड के संदर्भ में नहीं किया गया है। वहाँ हिजाब का अर्थ एक ‘पर्दा’ या ‘अवरोध’ (Barrier) है, जो दो चीजों के बीच अलगाव पैदा करता है। कुरान की आयत 24:31 और 33:59 शालीनता (Modesty) की बात करती हैं। आयत 24:31 महिलाओं को अपना ‘सीना’ (जयब) ढकने का निर्देश देती है, न कि चेहरे या बालों को पूरी तरह ढँकने का।

                                      बुर्का-हिजाब पर कुरान व इस्लामी इतिहास क्या कहता है?

इस्लामी विद्वानों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि चेहरे को पूरी तरह ढकना (नकाब या बुर्का) एक मजहबी उर्फ यानि सांस्कृतिक परंपरा है, जो समय के साथ मजहबी रंग में रंग गई। यदि चेहरा ढकना अनिवार्य होता, तो कुरान की वह आयत बेमानी हो जाती जो पुरुषों को अपनी निगाहें नीची रखने और महिलाओं की ‘सुंदरता’ से आकर्षित न होने की सलाह देती है।

चेहरा ढका होने पर सुंदरता और आकर्षण का सवाल ही पैदा नहीं होता। आज के दौर में सऊदी अरब जैसे देशों में भी ‘अबाया’ (ढीला वस्त्र) अनिवार्य नहीं रहा, जबकि तालिबान शासित अफगानिस्तान में बुर्का न पहनना मौत को दावत देने जैसा है। यह विरोधाभास साबित करता है कि बुर्का पहनना मजहब से ज्यादा उस देश की सत्ता और वहां के कट्टरपंथियों की सनक पर निर्भर करता है।

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने और धर्म का पालन करने की आजादी देता है, लेकिन जब यह ‘पसंद’ दबाव में बदल जाती है, तो वह शोषण बन जाती है।

मजहब, अधिकार और असुरक्षा की त्रिवेणी

नीतीश कुमार का मामला हो या शामली का हत्याकांड, केंद्र में ‘बुर्का’ ही है। समस्या बुर्के के कपड़े में नहीं, बल्कि उसे पहनने या न पहनने के पीछे छिपे ‘दबाव’ में है। यदि कोई महिला अपनी स्वेच्छा से इसे पहनती है, तो वह उसका अधिकार है, लेकिन यदि इसे न पहनने पर उसे नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया जाए या उसकी जान ले ली जाए, तो यह मजहब नहीं, बल्कि अपराध है।

भारत में इस मुद्दे पर हो रही चर्चा में सबसे बड़ी कमी ‘ईमानदारी’ की है। हम एक तरफ तो आधुनिक भारत का सपना देखते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सात साल की बच्चियों को बुर्के में लपेटकर उनकी मानसिक आजादी को कुचलने वाली सोच पर चुप रहते हैं। पाकिस्तान के डॉन द्वारा दी गई धमकी यह बताती है कि यह मुद्दा केवल आस्था का नहीं बल्कि वर्चस्व का है। यदि हम दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि किसी भी महिला की पहचान उसकी योग्यता और उसके चेहरे से होनी चाहिए, न कि उस कपड़े के टुकड़े से जो उसे समाज से अलग करता है। अंततः, आजादी केवल कपड़े पहनने की नहीं, बल्कि बिना डरे जीने की होनी चाहिए।

मस्जिद के बाहर माँगता है भीख, करना चाहता है तीसरा निकाह: भिखारी की दूसरी बीवी पहुँची केरल हाई कोर्ट

भिखारी द्वारा तीसरा निकाह करने पर अपने बेरोजगारी के दिनों में जामा मस्जिद डाकघर के रजिस्ट्री बाबू की बात याद गयी। एक बार बाबू से पूछा कि "बाबू जी(उन दिनों कोई अंकल नहीं बोलता था) जब भी रजिस्ट्री करवाने आता हूँ मनीऑर्डर की खिड़की पर भिखारियों की लम्बी लाइन होती है।" बाबू ने जवाब दिया "बेटा जिसने एक महीना जामा मस्जिद पोस्टऑफ़िस में काम कर लिया कभी किसी भिखारी को भीख नहीं देगा। किसी का पता लेकर देख आओ कोठियां हैं। तुम नौकरी के टक्कर मार रहे हो, ये इनका बिज़नेस है। होटल के आगे बैठ खाना खा लिया, किसी ने चाय पिला दी, खर्चा कहाँ होगा?"

अभी कुछ दिन पहले मुंबई में एक भिखारी गैंग का खुलासा हुआ है(देखिए संलग्न फोटो), इतना ही नहीं बाजार मटिया महल में सुबह के समय ड्रग बिकती है, एक दिन सुबह डीएमएस बूथ से दूध लाते समय देखा कि मीना बाजार में हैंडीकैप को ड्रग खरीदते देख, किसी भी हैंडीकैप को भी भीख देनी छोड़ दी। तो केरल में अगर कोई भिखारी तीसरा निकाह कर रहा है मतलब इतनी भीख मिलती है कमाई अच्छी है।     

केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में एक से ज़्यादा निकाह की इजाजत है, लेकिन एक शर्त है। मियाँ को अपनी हर बीवी के साथ न्याय करना होगा। उसे अपनी सभी पत्नियों का ख्याल रखना होगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति के मामले में की जो भीख माँगकर गुजारा करता है। वह तीसरा निकाह करने की तैयारी में था। कोर्ट ने सामाजिक कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि उस व्यक्ति की काउंसलिंग की जाए ताकि उसे तीसरी निकाह करने से रोका जा सके।

क्या था पूरा मामला?

 रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति की दूसरी बीवी ने फैमिली कोर्ट से गुज़ारा भत्ता माँगा था। मियाँ भीख माँगता है और बीवी का दावा था कि वह शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को मस्जिदों के बाहर भीख माँगकर लगभग 25,000 रुपए महीने कमाता है।

हालाँकि, फैमिली कोर्ट ने बीवी की गुज़ारा भत्ता की माँग यह कहकर खारिज कर दी थी कि एक भिखारी को यह देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

बीवी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की और बताया कि उसका मियाँ उसे तलाक की धमकी दे रहा है और तीसरी शादी करने वाला है। केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने फैमिली कोर्ट के फैसले को तो सही ठहराया, लेकिन तीसरी शादी के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी बीवियों का खर्चा नहीं उठा सकता, उसे एक और निकाह करने का कोई हक नहीं है।

कुरान का हवाला और पॉलिगामी की शर्तें

कोर्ट ने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए समझाया कि पॉलिगामी यानि बहुविवाह की इजाजत इस शर्त पर दी गई है कि पुरुष अपनी सभी बीवियों के साथ न्याय कर सके। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी दूसरी या तीसरी बीवी का भरण-पोषण नहीं कर सकता, उसे दोबारा निकाह करने का कोई अधिकार नहीं है।

कोर्ट का यह फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ में पॉलिगामी (बहुविवाह) के अधिकार को स्पष्ट करता है, लेकिन इसे जिम्मेदारी और न्याय की कसौटी पर परखता है।

स्वरा भास्कर के शौहर को अखिलेश यादव ने बनाया अध्यक्ष, टिकट के लिए शरद पवार की पार्टी में गए: नवाब मलिक की बेटी से होगा मुकाबला; दल बदलुओं को वोट न कर सबक सिखाए जनता चाहे, ये दल बदलू चाहे किसी पार्टी से हों, ये कभी भी देश को मुसीबत में डाल सकते हैं

सियासत में कोई किसी का सगा नहीं। कौन कब पाला बदल ले नहीं कह सकते। ऐसे दल- बदलुओं को 2024 लोकसभा चुनावों में जनता सबक सिखाने की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'अब की बार 400 पार' की हवा इसीलिए निकली कि इतने वर्षों से कार्यरत और संघर्ष करने वालों को टिकट न देकर imported को टिकट देना। उस पर कांग्रेस के "खटाखट" ने सोने पर सुहागे का काम कर दिया।    
ऐसे दल बदलुओं पर न कोई ED कार्यवाही करती है और न ही कोई Income Tax क्यों? सियासत एक सफेदपोशी धंधा है। कोई सियासतखोर इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकता। बिना किसी लालच के कोई एक पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी में नहीं जाता। जब 56 इंच वाली सरकार ही कुछ नहीं कर रही, चुनाव में ऐसे लालची और दल बदलुओं को जनता एक भी वोट न देकर चारों खाने चित करें। यानि जो पार्टी का नहीं हुआ देश का क्या होगा? ये लालची कभी भी देश को मुसीबत में डाल सकते हैं।     

समाजवादी पार्टी के नेता और अभिनेत्री स्वरा भास्कर के शौहर फहद अहमद ने एनसीपी (शरद पवार) में शामिल होकर मुंबई की अनुशक्ति नगर सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। वे इस सीट पर एनसीपी (अजीत पवार) की सना मलिक के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। सना मलिक एनसीपी नेता नवाब मलिक की बेटी है।

एनसीपी-एससीपी नेता जयंत पाटिल ने बताया कि फहद एक पढ़े-लिखे और अनुभवी युवा नेता हैं। उन्होंने कहा, “फहद पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन हमारी बातचीत के बाद वे हमारे साथ आए हैं। हमने उन्हें अनुशक्ति नगर सीट से टिकट दिया है।”

फहाद ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से उनके नाम पर सहमति बनाई। फहद को सपा के यूथ विंग समाजवादी युवजन सभा का महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अखिलेश यादव ने ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी।

इससे पहले, एनसीपी-एससीपी ने महाराष्ट्र चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की थी, जिसमें कई प्रमुख नाम शामिल हैं। पहली सूची में 45 नाम थे। बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव में कॉन्ग्रेस, एनसीपी-शरद पवार और शिवसेना-उद्धव ठाकरे ग्रुप एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों पार्टियों के हिस्से 85-85 सीटें आई हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होंगे और 23 नवंबर को मतगणना होगी।

पति ने पत्नी की भतीजी से सेक्स किया तो बीवी ने लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया

                                                                         प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
ब्राजील में एक महिला ने अपने पति का लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया। महिला अपने पति से नाराज चल रही थी। महिला के पति ने उसकी 15 साल की भतीजी के साथ सेक्स कर लिया था जिसके कारण महिला नाराज थी। यह घटना दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की है।

जानकारी के अनुसार, ब्राजील की राजधानी साओ पाउलो के नजदीक अतिबाया में हुआ। यहाँ 34 वर्षीय इस महिला ने अपने 39 वर्षीय पति से बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। इसके लिए उसने पहले पति को रिझा कर बेड पर बुलाया और उसके हाथ पैर एक कपड़े से बाँध दिए। इसके बाद उसके लिंग को एक ब्लेड से काट दिया और इसकी तस्वीरें भी ली।

इसके बाद उसने कटे हुए लिंग को टॉयलेट में बहा दिया क्योंकि उसने सुन रखा था कि कटे हुए अंग दुबारा जुड़ सकते हैं। महिला का दावा है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसका पति महिला की 14 वर्षीय भतीजी के साथ सेक्स कर चुका था। इसी का बदला लेने के लिए महिला ने यह कदम उठाया।

महिला इसके बाद खुद ही पुलिस थाने अपने-आप को सौंपने पहुँच गई। यहाँ पहुँच कर महिला ने कहा, “गुड इवनिंग सर, मैं यहाँ आत्मसमर्पण करने आई हूँ क्योंकि मैंने अपने पति का लिंग काट दिया है।” यह सुनकर पुलिस वाले भी सकते में आ गए। पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अभी उसके पति की हालत के विषय जानकारी सामने नहीं आई है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। वर्ष 2021 में ब्राजील में ही एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड का लिंग काट कर कढ़ाई में तल दिया था। महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की हत्या भी कर दी थी। जुलाई 2023 में भारत में ही आंध्र प्रदेश में एक महिला ने अपने पति का लिंग इसलिए काट दिया था क्योंकि वह अपनी पूर्व पत्नी की रील्स देखता था।

‘यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा’: शौहर ने भाई और बहनोई से कहा :“दोनों अपनी इच्छा पूरी कर लो। हलाला भी हो जाएगा।”

 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। पीड़िता का दावा है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। शौहर के छोटे भाई और बहनोई के साथ सेक्स का दबाव डाला जा रहा था। ससुराल वाले उससे देह व्यापार कराना चाहते थे।

पीड़िता के अनुसार विरोध करने पर उसकी पिटाई होती थी। जान से मारने की धमकी दी जाती थी। केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र की है। करुला इलाके में रहने वाली महिला ने अपने शौहर और ससुराल के बाकी सदस्यों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

पीड़िता ने शिकायत में बताया है कि उसका निकाह फरवरी 2022 में संभल के एक युवक से हुआ था। निकाह के कुछ समय बाद ही पीड़िता को उसका शौहर, सास और ननद दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। देवर और शौहर का बहनोई उससे पर गलत नजर रखते थे। पीड़िता के अनुसार जब उसने यह बात सास को बताई तो उसने खामोश रहने की धमकी दी। उससे कहा, “यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा।”

इस बीच महिला के शौहर ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए। इसे दिखाकर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता का आरोप है कि प्रताड़ना के चलते उसे असमय एक बच्चा हुआ और जिसकी मौत हो गई। 30 अगस्त 2023 को ससुराल वालों ने बुरी तरह से पीट कर उसे घर से निकाल दिया।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि घर से निकाले जाने के बाद वह मायके में रहने लगी। 10 सितंबर 2023 को उसका शौहर ससुराल के कुछ अन्य सदस्यों के साथ आ धमका। वे उसे जबरन अपने साथ ले जाना चाहते थे। जब उसने विरोध किया तो शौहर ने दुपट्टे से गला घोंट कर उसे मार डालने की कोशिश की। उसे तीन तलाक दे दिया।

पीड़िता का आरोप है कि घटना के समय उसका देवर और शौहर का बहनोई भी था। उसके शौहर ने इन दोनों से कहा, “दोनों अपनी इच्छा पूरी कर लो। हलाला भी हो जाएगा।” कथित तौर पर इसके बाद देवर और बहनोई ने पीड़िता के कपड़े फाड़ने की कोशिश की। किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। महिला की शिकायत पर पुलिस ने रविवार (22 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज की।

अप्राकृतिक सेक्स करने से मना करने पर शौहर ने इस्त्री गर्म कर बीबी के जला डाले दोनों कूल्हे

प्राकृतिक संबंध बनाने से मना करने पर शौहर ने अपनी बीवी को प्रेस गर्म करके जलाया (फोटो साभार : न्यूज18/भास्कर)
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक व्यक्ति द्वारा अपनी बीवी के साथ हैवानियत की बात सामने आई है। उसने अप्राकृतिक संबंध बनाने से विरोध करने पर पत्नी के कूल्हों को गर्म प्रेस से जला डाला। जानकारी के मुताबिक, शौहर ने रात के समय अपनी बीवी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका बीवी ने विरोध किया। इस बात से शौहर इतना गुस्सा हुआ कि वो हैवान बन बैठा। उसके पहले तो बीवी को जमकर पीटा, फिर गर्म प्रेस से उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।

अप्राकृतिक संबंध बनाने की सनक में बना हैवान

ये पूरा मामला रसूलपुर थाना इलाके का है, जहाँ फिजोराबाद के दक्षिण थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला का निकाह 5 साल पहले रसूलपुर क्षेत्र में रहने वाले युवक के साथ हुआ था। दोनों में विवाद चल रहा था, लेकिन समझौते के बाद महिला अपने शौहर के घर आ गई थी। इस बीच, 31 अगस्त की रात शौहर ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका उसने विरोध किया। इस बात से खफा उसके शौहर ने उसे खूब मारा-पीटा, फिर प्रेस गर्म कर उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।
इस दौरान वो चीखती रही, लेकिन उसके हैवान शौहर पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

पीड़ित महिला के भाइयों ने अस्पताल में कराया भर्ती

महिला ने अपने भाइयों को किसी तरह से सूचना दी। इसके बाद गंभीर हालत में पीड़िता को थाना रसूलपुर ले जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद महिला का मेडिकल कराने के लिए जब अस्पताल ले जाया गया, तब सब चौंक गए, क्योंकि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। महिला को तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

समझौते के बाद ससुराल आई थी महिला

इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है कि उसके शौहर के साथ झूठ बोलकर उसका निकाह कराया गया था, वो पहले ही एक बार निकाह कर चुका था। शिकायत में महिला ने कहा, “वो मुझे रोज परेशान करता था, जिसकी वजह से मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।” पारिवारिक न्यायालय में समझौते के बाद वो अपनी ससुराल आ गई थी।

राजस्थान : गर्भवती को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया: पुलिस कह रही पीहर और ससुराल का विवाद

            प्रेमी संग गई तो पति ने गर्भवती पत्नी को निर्वस्त्र कर गाँव में दौड़ाया (फोटो साभार: X/ @MajorPoonia)
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक गर्भवती महिला घर से कहीं चली गई थी। इसके बाद पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे निर्वस्त्र कर करीब 1 किलोमीटर तक दौड़ाया। घटना 31 अगस्त की है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी में जुटी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला जिले के धरियावद थाना क्षेत्र के पहाड़ा गाँव का है। बताया जा रहा है कि यहाँ रहने वाली एक महिला का एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। 31 अगस्त 2023 को महिला प्रेमी के साथ चली गई थी। परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद महिला को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया।

इस मामले में पुलिस ने बताया कि महिला 31 अगस्त को पड़ोस में रहने वाले एक युवक से मिलने गई थी। जानकारी मिलने पर ससुराल वाले भी वहाँ पहुँच गए। पहले तो उन लोगों ने महिला को पकड़कर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया।

#तनातनी_चीरहरण #राजस्थान_मे_जंगलराज राजस्थान के प्रतापगढ़ में आदिवासी महिला का चिरहरण जारी गहलोत सरकार मे महिलाओं की स्तिथि चिंताजनक असुरक्षित महिलाएं ।डुब मरो चुल्लू भर पानी में @ashokgehlot51 जी स्मार्ट फोन देने की बजाय महिलाओं की सुरक्षा करनी चाहिए थी । pic.twitter.com/jwPIghytZR

— Amayara (@__Ammu__786_) September 2, 2023

घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। वायरल वीडियो में महिला चीख रही है। चिल्ला रही है। खुद को छोड़ने की गुहार लगा रही है, लेकिन पति उसके कपड़े उतरता जा रहा है। आसपास खड़े लोग भी उसके पति को उकसाते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग वीडियो भी बनाते दिखाई दे रहे हैं। महिला के कपड़े उतारने के बाद आरोपितों ने उसे गाँव में घुमाया।

इस मामले में प्रतापगढ़ एसपी अमित कुमार ने कहा है कि मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस की 6 टीमों का गठन किया गया है। साथ ही धरियावद थाने में पूर्व में सेवाएँ दे चुके सभी कॉन्स्टेबल से लेकर बड़े अधिकारियों को बुलाया गया है। पीड़ित पक्ष द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एक ओर जहाँ मीडिया में इस मामले को महिला के प्रेम-प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं राजस्थान पुलिस और सीएम अशोक गहलोत इसे महिला के मायके और ससुराल के बीच विवाद से जुड़ा बता रहे हैं। राजस्थान पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर डीजीपी उमेश मिश्रा का वीडियो शेयर कर लिखा, “प्रतापगढ़ जिले में पीहर और ससुराल पक्ष के आपसी विवाद में ससुराल पक्ष के लोगों का कृत्य घोर निंदनीय हैं।”

वीडियो में राज्य के पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने घटना का कारण महिला का कहीं चले जाना बताया है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को चिन्हित किया गया है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, सीएम अशोक गहलोत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “प्रतापगढ़ जिले में पीहर और ससुराल पक्ष के आपसी पारिवारिक विवाद में ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा एक महिला को निर्वस्त्र करने का एक वीडियो सामने आया है। पुलिस महानिदेशक को एडीजी क्राइम को मौके पर भेजने एवं इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।”

उन्होंने आगे लिखा है, “सभ्य समाज में इस तरह के अपराधियों की कोई जगह नहीं है। इन अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे डालकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर सजा दिलवाई जाएगी।”

इस मामले में BJP अशोक गहलोत सरकार पर हमलावर है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर लिखा है, “प्रतापगढ़ जिले की पहाड़ा ग्राम पंचायत, धरियावाद में एक गर्भवती युवती को सरेआम निर्वस्त्र करने का अश्लील वीडियो वायरल होता रहा और घटना की प्रशासन को खबर तक नहीं थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध ने इस कदर पैर पसारे हैं कि आए दिन राजस्थान को शर्मिंदा होना पड़ रहा है। महिला अत्याचार में प्रदेश को देश में नंबर 1 बनाने की जिम्मेदार स्वयं कॉन्ग्रेस सरकार की है। मुख्यमंत्री जी आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि राजस्थान में बेटियों की लुटती अस्मत और चीखें आपकी कॉन्ग्रेस सरकार को सुनाई नहीं देतीं?”

इस मामले में पुलिस ने 21 साल की पीड़ता के पति समेत 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, 7 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ धारा 294, 354, 365, 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

आंध्र प्रदेश : दूसरी बीवी ने ब्लेड से काट डाला गुप्तांग ; भारी पड़ा पहली पत्नी का इंस्टाग्राम रील देखना

                                                                                                     प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
आंध्र प्रदेश में एक महिला द्वारा अपने पति का गुप्ताँग काटने की खबर है। महिला अपने पति की दूसरी बीवी थी। बताया जा रहा है कि वह अपने पति द्वारा पहली बीवी का इंस्टाग्राम पर बनाया गया रील देखने से नाराज थी। गंभीर रूप से घायल पति को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला नंदीगामा के पास चंदरलापाडु मंडल का है। यहाँ का रहने वाला कोटा आनंद बाबू 5 साल पहले अपनी पत्नी से अलग हो गया था। आनंद बाबू ने वरम्मा नाम की महिला से दूसरी शादी की और पिछले 5 माह से मुप्पल्ला में रह रहा था। घटना के दिन शुक्रवार को आनंद बाबू घर में अपनी पूर्व पत्नी की इंस्टाग्राम पर बनाई रील देख रहा था। यह हरकत उनकी दूसरी बीवी वरम्मा को नागवार गुजरी। बताया जा रहा है कि इस बात को ले कर पति-पत्नी में खूब झगड़ा हुआ।

पीड़ित पति का आरोप है कि उनकी बीवी ने ब्लेड ने उनके गुप्तांग पर वार किया। इस हमले की वजह से आनंद बाबू के प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोटें आईं हैं। पीड़ित पति को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ काफी खून बहने की वजह से उसे बेहतर इलाज के लिए विजयवाड़ा शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस घटना की जाँच कर रही है। आरोपित वरम्मा का कहना है कि उनका अपने पति के गुप्तांग पर हमले का कोई इरादा नहीं था और ये घटना गलती से हुई। इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बीवी द्वारा अपने पति का गुप्ताँग काटने का यह पहला मामला नहीं है। इस से पहले भी नवंबर 2022 में, राजस्थान के बाड़मेर में एक महिला ने मामूली लड़ाई के बाद अपने पति का प्राइवेट पार्ट काट दिया था। इसके अलावा अक्टूबर 2022 में ओडिशा के जाजपुर जिले में एक 33 वर्षीय महिला ने कथित तौर पर झगड़े के दौरान अपने पति के गुप्तांग को काट कर चाकू मारकर हत्या कर दी थी।

हिजाब वाली महिला मंत्री के मर्दों को टिप्स : बीवी जिद्द करे तो उसके साथ 3 दिन न सोएँ, करें पिटाई

कर्नाटक में बुर्के पर चल रहे विवाद  के बीच मलेशिया की हिजाब पहनने वाली एक महिला मंत्री के बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। महिला मंत्री ने ​मर्दों को सलाह दी है कि यदि उनकी पत्नी ‘उचित व्यवहार’ न करें तो वे उसकी पिटाई करें। इतना ही नहीं मर्दों को जिद्दी बीवी के साथ तीन दिन तक नहीं सोने की भी सलाह दी है।

मलेशिया की इस महिला मंत्री का नाम है- सिती जैला मोहम्मद युसॉफ (Siti Zailah Mohd Yusoff)। वे पैन इस्लामिक मलेशियन पार्टी की सांसद हैं। महिला, परिवार और सामुदायिक विकास विभाग की उपमंत्री हैं। जैला मोहम्मद युसॉफ ने इंस्टाग्राम पर दो मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने इसे ‘मदर टिप्स’ का नाम दिया। इस वीडियो में उपमंत्री ने जिद्दी पत्नियों को अनुशासित करने के लिए पतियों को ‘टिप्स’ दिए हैं। इसके बाद उन्होंने महिलाओं को भी पति के साथ रहने के तौर-तरीकों के बारे में ‘सलाह’ दी है।   

वीडियो में वह कहती हैं कि पति पहले अपनी जिद्दी पत्नियों के साथ बात करके उन्हें अनुशासित करें। अगर उनकी पत्नियाँ फिर भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति तीन दिनों तक उनके साथ नहीं सोएँ। सिती जैला ने आगे कहा कि इसके बावजूद अगर पत्नी सलाह लेने से इनकार करती है या अलग सोने के बाद भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति सख्ती दिखाए। वे अपनी पत्नियों की पिटाई करें। उनके इस वीडियो के बाद उन पर घरेलू हिंसा (Domestic Violence) को सामान्य करने का आरोप लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि वह मर्दों को अपनी पत्नियों को पीटने के लिए कहकर घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं।

महिलाओं को दी ये हिदायत

मंत्री सिती जैला ने महिलाओं को सलाह दी कि अगर वे पतियों का दिल जीतना चाहती हैं, तो वे अपने शौहर के कहने पर ही बातचीत करें। सिती ने महिलाओं से कहा कि अपने शौहर से तब बात करें जब वे शांत हों, खाना खा चुके हों, प्रार्थना कर चुके हों और आराम कर रहे हों। उनका कहना था कि जब वह बोलना चाहती हैं, तो पहले अपने शौहर से इजाजत लें। मलेशिया की मंत्री की इन बयानों को लेकर उनकी हर तरफ आलोचना हो रही है और कई संगठनों ने कहा है कि उन्हें अब अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

एक साल में रिपोर्ट हुए 9015 घरेलू हिंसा के मामले

महिला अधिकार समूहों के एक गठबंधन, ज्वाइंट एक्शन ग्रुप फॉर जेंडर इक्वेलिटी ने सिती जैला पर घरेलू हिंसा को सामान्य करने का आरोप लगाया और माँग की कि वह उप महिला मंत्री के पद से इस्तीफा दें। एक संयुक्त बयान में कहा गया कि उप मंत्री को घरेलू हिंसा को सामान्य करने का प्रयास किया, जो कि मलेशिया में एक अपराध है। संगठन ने कहा कि 2020 और 2021 के बीच, घरेलू हिंसा की 9015 पुलिस रिपोर्टें दर्ज की गईं। इसन ने कहा कि हो सकता है कि असल में ये आँकड़े और भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कुछ महिलाएँ अपने साथ हुई ज्यादतियों को रिपोर्ट नहीं करवाती है, जिसकी वजह से वह रिकॉर्ड में नहीं आ पाता है।

पूनम पांडे को शौहर सैम अहमद ने इतना क्यों पीटा कि अस्पताल में एडमिट होना पड़ा?

पूनम पांडे के पति सैम अहमद को पुलिस ने किया गिरफ्तार
(साभार: अमर उजाला)
अपने बोल्ड फोटोशूट के लिए सोशल मीडिया पर चर्चा में बनी रहने वाली अभिनेत्री पूनम पांडे के पति सैम अहमद बॉम्बे को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अभिनेत्री ने अपने शौहर के ऊपर मारपीट करने का आरोप लगाया था। वह अस्पताल में भी भर्ती हुई थीं।
आखिर ऐसी क्या बात हुई कि शौहर ने इतनी पिटाई कर दी? क्या यह मात्र प्रचार के लिए है या वास्तविक?

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने बताया कि पूनम पांडे के पति सैम अहमद को उन्होंने रविवार (नवंबर 7, 2021) को गिरफ्तार किया। अभिनेत्री ने शिकायत की थी कि सैम ने उनसे मारपीट की। पूनम को अस्पताल में भी भर्ती किया गया था।

ये पहली बार नहीं है जब सैम अहमद के खिलाफ़ पूनम पांडे ने मारपीट का मामला दर्ज कराया हो। उन्होंने पिछले साल सितंबर में अपनी शादी के दो हफ्ते बाद ही अहमद के ख़िलाफ़ उत्पीड़न, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया था।

इस शिकायत के बाद बॉम्बे पुलिस ने सैम अहमद को गोवा में 22 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। पुलिस में दर्ज श‍िकायत के मुताबिक, दक्ष‍िण गोवा के कानाकोना गाँव में पूनम पांडे किसी फिल्‍म की शूटिंग कर रही थीं। यह घटना तभी हुई थी। 

कानाकोना पुलिस थाने के इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम चव्‍हाण के अनुसार, पूनम ने अपनी श‍िकायत में कहा था कि सितंबर 21, 2020 की रात सैम अहमद ने उन्‍हें मोलेस्‍ट किया और मारपीट की। इतना ही नहीं, पूनम ने यह भी कहा था कि सैम अहमद बॉम्‍बे ने उन्‍हें अंजाम भुगतने की भी धमकी दी थी।

अभिनेत्री के 37 वर्षीय शौहर सैम अहमद पेशे से एक फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनका घर दुबई में है। उनके एक प्रोडक्शन हाउस का नाम बॉम्बे मैटिनी फिल्म्स भी है। वहीं, पूनम पांडे कानपुर से हैं। उन्होंने साल 2013 में फिल्म नशा से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद से वह अपने बोल्ड फोटोशूट के कारण अक्सर चर्चा में रहीं। उन्होंने कई तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। सैम अहमद बॉम्बे के साथ उनका रिलेशन करीब 4 साल पुराना है। पिछले साल 27 जुलाई 2020 को दोनों ने सगाई की थी और 10 सितंबर 2020 को सोशल मीडिया पर खबर दी थी कि उन्होंने शादी कर ली है।

4000+ लड़कियों के साथ हमबिस्तर होने के लिए 200 करोड़ रूपए खर्च करने वाले की 55 साल छोटी बीवी ने कर दी हत्या

                                        कोसुके नोज़ाकि की उनकी पत्नी साकी सुडो ने ही की थी हत्या (फाइल फोटो)
जापान की एक महिला को उसके पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 25 वर्षीय साकी सुडो पर आरोप है कि उन्होंने अपने करोड़पति पति कोसुके नोज़ाकि उर्फ़ ‘डॉन जुआन’ को ज़हर देकर मार डाला। 3 साल पहले हुई ये घटना जापान के वकायामा प्रीफेक्चर (Wakayama Prefecture) के सबसे बड़े शहर तनबे (Tanabe) की है। 2018 में हत्या से 3 महीने पहले ही साकी सुडो ने कोसुके से शादी की थी।

कोसुके अपनी पत्नी से 55 वर्ष बड़े थे। उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार, कृषि और कर्ज देने के जरिए अकूत दौलत कमाई थी। उन्होंने फ़रवरी 2018 में सुडो से शादी की। उन्होंने खुद पर एक किताब भी लिख रखी थी। ‘डॉन जुआन’ का दावा था कि उन्होंने अपने जीवन में 4000 महिलाओं के साथ बिस्तर शेयर किया था। उन्होंने अपने दौलत कमाने के पीछे की वजह ‘आकर्षक महिलाओं को डेट करना’ बताया था।

पुलिस ने कहा है कि सुडो ने अपनी पति की हत्या के लिए उन्हें तीक्ष्ण विष दिया। उन्होंने सुडो से पूछा था, “क्या तुम मेरे जीवन की अंतिम महिला बननी चाहोगी?” तनबे में मई 2018 में सुडो ने दावा किया था कि उनके पति सोफे पर मृत मिले। इससे पहले पुलिसकर्मियों को संदेह था कि सुडो ने नोज़ाकि को ड्रग्स दिया था। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को पुलिस ने छापा मार कर सुडो को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने टोक्यो से उसे गिरफ्तार करने के बाद उसके गृह राज्य वकायामा लेकर गई, जहाँ वो अपने पति के साथ रहा करती थी। चूँकि कोसुके के शरीर पर सूई चुभोने का कोई निशान नहीं मिला, माना जा रहा है कि उन्हें ड्रिंक्स में मिला कर ज़हर दिया गया था। कोसुके ने अपनी आत्मकथा में दावा किया था कि उन्होंने 4000 महिलाओं को बिस्तर पर लाने के लिए 300 करोड़ येन (204.21 करोड़ रुपए) खर्च किए थे।

उन्होंने लिखा था, “मुझे लक्जरी कारों और घरों में कोई रुचि नहीं है। लेकिन, मेरे मन में हमेशा आकर्षक महिलाओं के साथ सेक्स करने की इच्छा मौजूद रहती है।” इस पुस्तक में उन्होंने बताया था कि यूनिवर्सिटी की छात्रों और फ्लाइट अटेंडेंट महिलाओं को कैसे आकर्षित करें। उन्होंने गरीबी में धातुओं के टुकड़े, कंडोम और शराब बेचने से कारोबार की शुरुआत की थी। वो अपने गृह शहर को 130 करोड़ येन (88.45 करोड़ रुपए) दान करना चाहते थे।

उनकी मौत के बाद आधी संपत्ति विधवा सुडो को ही जानी थी। ख़बरों में ये भी कहा गया है कि सुडो हत्या के दिन से पहले ऑनलाइन ड्रग्स के बारे में सर्च कर रही थी। पहले तो इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन उनके शरीर में नारकोटिक्स की मात्रा मिलने के बाद पुलिस का शक बढ़ा क्योंकि वो ड्रग्स नहीं लेते थे। सुडो से उनकी मुलाकात टोक्यो के हेनेडा अस्पताल में हुई थी। सुडो मॉडल हुआ करती थी।