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‘यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा’: शौहर ने भाई और बहनोई से कहा :“दोनों अपनी इच्छा पूरी कर लो। हलाला भी हो जाएगा।”

 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। पीड़िता का दावा है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। शौहर के छोटे भाई और बहनोई के साथ सेक्स का दबाव डाला जा रहा था। ससुराल वाले उससे देह व्यापार कराना चाहते थे।

पीड़िता के अनुसार विरोध करने पर उसकी पिटाई होती थी। जान से मारने की धमकी दी जाती थी। केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र की है। करुला इलाके में रहने वाली महिला ने अपने शौहर और ससुराल के बाकी सदस्यों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

पीड़िता ने शिकायत में बताया है कि उसका निकाह फरवरी 2022 में संभल के एक युवक से हुआ था। निकाह के कुछ समय बाद ही पीड़िता को उसका शौहर, सास और ननद दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। देवर और शौहर का बहनोई उससे पर गलत नजर रखते थे। पीड़िता के अनुसार जब उसने यह बात सास को बताई तो उसने खामोश रहने की धमकी दी। उससे कहा, “यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा।”

इस बीच महिला के शौहर ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए। इसे दिखाकर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता का आरोप है कि प्रताड़ना के चलते उसे असमय एक बच्चा हुआ और जिसकी मौत हो गई। 30 अगस्त 2023 को ससुराल वालों ने बुरी तरह से पीट कर उसे घर से निकाल दिया।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि घर से निकाले जाने के बाद वह मायके में रहने लगी। 10 सितंबर 2023 को उसका शौहर ससुराल के कुछ अन्य सदस्यों के साथ आ धमका। वे उसे जबरन अपने साथ ले जाना चाहते थे। जब उसने विरोध किया तो शौहर ने दुपट्टे से गला घोंट कर उसे मार डालने की कोशिश की। उसे तीन तलाक दे दिया।

पीड़िता का आरोप है कि घटना के समय उसका देवर और शौहर का बहनोई भी था। उसके शौहर ने इन दोनों से कहा, “दोनों अपनी इच्छा पूरी कर लो। हलाला भी हो जाएगा।” कथित तौर पर इसके बाद देवर और बहनोई ने पीड़िता के कपड़े फाड़ने की कोशिश की। किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। महिला की शिकायत पर पुलिस ने रविवार (22 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज की।

कभी बीवी, कभी अम्मी, कभी भाभी… हलाला की ‘हॉरर स्टोरी’

                                                                                          साभार: रामधरण दास द्वारा शेयर वीडियो
सोशल मीडिया पर बरेली की तीन तलाक पीड़िता की एक पुरानी वीडियो वायरल होना शुरू हुई है। इस वीडियो में पीड़िता बता रही है कि कैसे उसके शौहर ने पहले तीन तलाक देकर अपने अब्बा से उसका हलाला कराया और फिर दोबारा तलाक देकर अपने भाई से निकाह करके हलाला करने को कहने लगा।

इस वीडियो को हाल में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने शेयर किया है। महिला का दर्द सुन आप हैरान रह जाएँगे। वीडियो में वह बता रही है निकाह के कई साल बाद तक औलाद न होने की वजह से उसके शौहर ने उसके जीवन का मजाक बना दिया।

वह कहती है, “पहले मैं अपने शौहर के साथ निकाह होकर गई। उसने मुझे तलाक दिया। फिर मेरे ससुर ने मुझसे निकाह किया तो इस हिसाब से मैं अपने शौहर की अम्मी बन गई। फिर से मेरे शौहर ने मुझे छोड़ा। फिर उन्होंने भाई से रिश्ता बनाने को कहा कि मतलब मैं उनकी भाभी बन जाऊँ। इस तरह से मेरे साथ मजाक हो रहा है कि कब मैं उसकी अम्मी बन जाऊँ, भाभी बन जाऊँ, बीवी बन जाऊँ।”

बरेली में मुस्लिम महिला के साथ हुई ज्यादती का यह मामला 2018 का है। मीडिया में इसकी खूब चर्चा हुई थी। 2009 में निकाह के बाद औलाद न होने के कारण पीड़िता को 2017 में तीन तलाक दिया गया था। इसके बाद इंजेक्शन देकर उसका ससुर से हलाला कराया गया। जब पीड़िता की बहन को खबर हुई तो उसने इस बाबत शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि कैसे कई दिन ससुर ने पीड़िता का बलात्कार किया। 

पीड़िता के ऊपर अत्याचार यहीं नहीं रुके। उसका शौहर से दोबारा निकाह हुआ और बदले में दोबारा तलाक ही नसीब हुआ। इस बार शौहर चाहता था कि उसकी बीवी उसके भाई से हलाला करे जिसके लिए महिला नहीं मानी। 2018 की एक वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे महिला ने ट्रिपल तलाक का विरोध करते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया था।

बरेली की पीड़िता ने मजहबी ठेकेदारों को करार जवाब देते हुए कहा था कि इन लोगों ने तमाशा बना रखा है। पहले बीवी को तलाक देते हैं, फिर निकाह कराते हैं, फिर हलाला कराने को मजबूर करते हैं। उसने कहा था, ये लोग बंद कमरे में तय कर लेते हैं कि किससे हलाला करवाना है, चाहे वो बाप के समान हो या कोई भाई जैसा। ये लोग बातों बाहर जाने ही नहीं देते। उन्होंने पूछा था कि शरीयत का हवाला देकर तीन तलाक को जायज बताने वाले बताएँ कि क्या बुआ-भतीजे, भाई-बहन का रिश्ता जायज होता है।

बीवी के ऑर्केस्ट्रा पर डांस और देह व्यापार से मना करने पर नसीम अहमद ने कहा तलाक-तलाक-तलाक

औरत को मात्र एक मनोरंजन और भोग की वस्तु समझने वालों की कोई कमी नहीं। आखिर ऐसे लोगों पर कब लगाम  लगेगी?
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से तीन तलाक का एक हैरान करने वाला मामला आया है। खबर है कि वहाँ एक मुस्लिम महिला ने थाने में उसके शौहर के विरुद्ध शिकायत दी। महिला ने बताया कि उसके शौहर ने इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उसने देह व्यापार में घुसने से और ऑर्केस्ट्रा में नाचने से मना कर दिया था।

अब पीड़िता ने पुलिस थाने में इस संबंध में अपने शौहर नसीम अहमद, उसकी अम्मी और दो बहनों के ख़िलाफ़ शिकायत दी है। पुलिस के मुताबिक महिला ने बताया कि साल 2007 में उसका निकाह जौनपुर जिले के मुंगरा बादशाहपुर इलाके में रहने वाले नसीम अहमद से हुआ था। इसके बाद दोनों के 3 बच्चे हुए- 2 बेटे और 1 बेटी। महिला का आरोप है कि साल 2015 में नसीम और उसके घरवालों ने उसके अब्बा से 2 लाख रुपए माँगे थे जबकि उसके अब्बा एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।

नसीम पर आरोप है कि वो अपनी बीवी से ऑर्केस्ट्रा शो में डांस करने के लिए दबाव बनाता था और उसे देह व्यापार में ढकेलने के लिए मजबूर करता था। महिला ने बताया कि ससुराल वालों के अत्याचार से बचाने के लिए उसकी अम्मी ने ससुराल में 5000 रुपए देने शुरू कर दिए थे ताकि उसे किसी तरह मजबूर न किया जाए।

बावजूद इतनी कोशिशों के नसीम के घरवालों ने अगस्त 2021 में महिला को घर से निकाल दिया। वह बार-बार अपने शौहर से घर बुलाने को कहती रही। लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल में जब उसने फोन किया तो उसे तलाक-तलाक-तलाक कहकर रिश्ता तोड़ दिया गया।

देहरादून में तीन तलाक

कुछ दिन पहले देहरादून से एक तीन तलाक का मामला प्रकाश में आया था। उस समय बीवी ने आरोप लगाया था कि शौहर दहेज के लिए उसे आए दिन ताने मारता था। उसकी शक्ल सूरत पर नकारात्मक कमेंट करता था। विरोध करने पर दूसरी निकाह की धमकी देता था। आरोप था कि शौहर ने उससे अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। फिर तीन तलाक दे घर से निकाल दिया। पीड़िता का कहना था कि मई 2021 में उसकी सास की मौत के बाद प्रताड़ना और अधिक बढ़ गई। पटेल नगर के इंस्पेक्टर देवेंद्र चौहान के अनुसार महिला की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। आरोपित शौहर पर तीन तलाक देने और अप्राकृतिक संबध बनाकर कर उत्पीड़न की भी धाराएँ लगाई गई थी।

‘सपा सरकार है और सीएम हमारी जेब मैं है, जो चाहेंगे वही होगा’: कांग्रेस को समर्थन का ऐलान करने वाले तौकीर रजा पर बहू ने लगाए गंभीर आरोप

                                                              शीरान रजा खान के साथ निदा खान
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुस्लिम धर्मगुरू इत्तेहाद मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान ने कांग्रेस का समर्थन करने का ऐलान किया है। लेकिन उनके ही खानदान की बहू निदा खान ने तौकीर रजा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिसने अपने ही खानदान की बहू का सम्मान नहीं किया वो कांग्रेस के ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कैम्पेन का समर्थन करने का दिखावा कर रहे हैं। निदा खान ने दो टूक कहा कि महिलाओं को सम्मान तो मोदी सरकार में मिला है।
                                    कांग्रेस को समर्थन का ऐलान करने वाले तौकीर रजा की बहू ने लगाए गंभीर आरोप

निदा खान ने बताया कि 2015 में उनका निकाह दरगाह आला हजरत में नबीर ए आला हजरत के नाम से मशहूर शीरान रजा खान से हुई थी, जो कि तौकीर रजा खान के भतीजे हैं। शादी के कुछ दिनों के बाद मेरे एम कॉम की परीक्षा शुरू हुई तो मैं परीक्षा देने के लिए गई, लेकिन मेरे शौहर बीच परीक्षा से मुझे वापस ले आए। उन्होंने खुद ही कहा कि वो नहीं चाहते कि उनके घर की कोई भी महिला पढ़े। मैंने इसका विरोध किया तो मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी। दहेज को लेकर काफी मारपीट की।

उन्होंने आगे कहा, “शादी के पाँच महीने के बाद जब मैं अपने घर आ गई। जब ये दूसरा निकाह कर रहे थे तो मैंने कोर्ट में केस किया। तब उन्होंने मुझे कोर्ट में ही तलाक दे दिया और कहा कि ये मेरा हक है और मैं कभी भी दे सकता हूँ। उस दौरान उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी। मेरे शौहर ने मुझे धमकाते हुए कहा कि कुछ भी कर लो मुख्यमंत्री हमारी जेब में है। हम जो चाहेंगे वो करेंगे।”

तीन तलाक पीड़िता निदा कहती हैं कि उस घटना के बाद जब भी वो थाने में एफआईआर दर्ज कराने जाती थीं, तो यह कहकर रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया जाता था कि बहुत बड़े लोग हैं। जो भी इंसाफ मिला उस दौरान वो कोर्ट से मिला। लेकिन भाजपा की सरकार में हमने थाने में अपनी शिकायत बताई और तुरंत केस दर्ज किया गया।

निदा कहती हैं कि बीजेपी की सरकार में जब इनके खिलाफ केस दर्ज होने शुरू हुए तो इन्होंने (शौहर) फतवे का इस्तेमाल किया, जो कि औरतों को दबाने के लिए होते थे। ऐसा ही एक फतवा मेरे खिलाफ जारी हुआ था, जिसमें कहा गया था कि मैं मर जाऊँ तो मेरे जनाजे में कोई न आए। तौकीर मियाँ सात साल बाद भी अपनी बहू के साथ इंसाफ नहीं कर पाए तो वो दूसरों के साथ क्या करेंगे।

बीजेपी ने तीन तलाक से लड़ने में दिया साथ

तौकीर रजा खान के खानदान की बहू निदा तीन तलाक को लेकर अपना डर बयाँ करते हुए कहती हैं, “जब भी मेरा पति बाहर जाता था तो मैं इस बात से डरी रहती थी कि मेरा पति घर लौटेगा तो मैं उसके निकाह में रहूँगी या नहीं। इसके खिलाफ लड़ाई में भाजपा सरकार ने साथ दिया, महिलाओं को सुरक्षा दी। तौकीर रजा महिलाओं को इस्तेमाल का सामान समझते आए हैं और आज भी वही कर रहे हैं। अगर आज हम जिंदा है तो वो केवल भाजपा की ही देन है।”

उत्तर प्रदेश : सपा नेता चौधरी बशीर को तीसरी बीवी ने पहुँचाया जेल, छठे निकाह से पहले तलाक दे भगाया था

                                                      सपा नेता बशीर को बीवी ने पहुँचाया जेल
उत्तर प्रदेश के आगरा के थाना मंटोला में कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी नेता व पूर्व मंत्री चौधरी बशीर के ख़िलाफ़ तीन तालक के तहत केस दर्ज हुआ था। अब इसी मामले में ताजा जानकारी है कि पूर्व मंत्री को गुरुवार (अगस्त 19, 2021) को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। इससे पहले कोर्ट ने पूर्व मंत्री की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया था। इसके बाद कथिततौर पर उन्होंने खुद थाने आकर आत्मसमर्पण किया।

एसएसपी मुनिराज ने बताया कि तीन तलाक के केस में आरोपित पूर्व मंत्री चौधरी बशीर को थाना मंटोला पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेजा गया है। विवेचना के बाद चार्जशीट लगाई जाएगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिला जेल में चौधरी बशीर को बैरक नंबर 14 में रखा गया है। इसमें 50 से अधिक बंदी हैं। इस बैरक में आरोपित पूर्व मंत्री चौधरी बशीर को बंदियों के साथ फर्श पर सोना होगा। उनके खिलाफ दिल्ली में पूर्व विधायक के परिवार की महिला ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। मंटोला पुलिस अब इस मुकदमे की भी जानकारी ले रही है। इसमें भी उनका वारंट बनवाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी नेता की तीसरी पत्नी नगमा ने उनके विरुद्ध उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करवाया था। पीड़िता का कहना था कि 23 जुलाई को बशीर शाइस्ता नाम की महिला से छठा निकाह कर रहा था, जब उन्होंने ऐसा करने से उसे रोका तो बशीर ने सबके सामने उन्हें तीन तलाक बोलकर भगा दिया। दोनों के दो बेटे हैं।

नगमा ने शिकायत दर्ज करवाते हुए अपनी सेफ्टी के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की थी। उनका कहना था कि निकाह के बाद से ही शौहर और ननदों ने उनका शारीरिक व मानसिक शोषण शुरू कर दिया था। इसीलिए अब तंग आकर वह कार्रवाई चाहती हैं। पुलिस ने नगमा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले में जाँच की जा रही थी।

नगमा ने शिकायत में कहा था कि उनका शौहर बीवियाँ बदलने के लिए कोई भी रूप धारण कर लेता है। एक बार तो उन्होंने हिंदू लड़की से शादी के लिए हिंदू का चोला पहना था। नगमा ने अपने इस दावे के प्रमाण भी दिए। उन्होंने हिंदू महिला के साथ उनकी (बशीर) शादी की तस्वीरें दिखाईं, जिसमें नजर आ रहा था कि बशीर ने माथे पर टीका लगाया हुआ है। इसके अलावा एक तस्वीर ऐसी भी थी जिसमें उन्होंने ‘जय माता दी’ की पट्टी माथे पर बाँधी है।

नगमा ने अपने शौहर के लिए कहा था, “वह आदमी नहीं हैवान है, उसने मुझसे पहले भी कई औरतों की जिंदगी बर्बाद की है।” उनके मुताबिक, बशीर की मुस्लिम समाज में अच्छी पैठ है। इसी का फायदा उठा कर वह हर बार चुनाव लड़ता है। पूर्व में उसके ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। पिछले साल उसने बकरीद पर दंगा करवाने की कोशिश की थी, मगर वीडियो वायरल होने पर दो केस दर्ज हुए थे।

उत्तर प्रदेश : ‘समझौता कर लो, जो माँगोगी वो मिलेगा’: तलाक पीड़िता को सपा नेता आजम खान के ‘रिश्तेदार’

उत्तर प्रदेश के बरेली में तीन तलाक के एक मामले में सपा नेता आजम खान का नाम उछला है। खबर है कि एक पीड़िता ने पुलिस अधिकारी पर यह आरोप लगाया कि उसे न्याय दिलाने की बजाय पुलिस ने उससे कहा कि वह समझौता कर ले, क्योंकि उसके ससुराल वाले आजम खान के समधी हैं और वो जो भी माँगेगी उसे वो सब मिलेगा। हालाँकि, पुलिस अधिकारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता कर खारिज किया है।

पत्रिका की खबर के अनुसार, सूफिया खान नाम की महिला कांकरटोला की रहने वाली है। उसका निकाह 30 मई 2020 को फहाद अली से हुआ था। उसके मुताबिक फहाद के मामा सपा नेता आजम खान के समधी हैं इसलिए उनसे कहा जा रहा है कि वो समझौता कर ले। लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं है। वह बताती हैं कि निकाह के कुछ दिन बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और इसी बीच उसके पति ने उसे तीन तलाक देकर घर से भी निकाल दिया।

कोई रास्ता न दिखने पर महिला ने 1 नवंबर को बारादरी पुलिस में इस संबंध में शिकायत की और पुलिस ने उसके बयान के आधार पर उसके शौहर फहाद, सास जरीना, जेठानी रूबी और जेठ रिजवान व आमिर के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया। मगर दो माह बीत जाने के बाद भी जब इनके विरुद्ध पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया, तो महिला ने दोबारा आवाज उठाई।

इसके साथ ही पुलिस अधिकारी शितांशु शर्मा पर इल्जाम लगाकर कहा कि वह उस पर समझौते का दबाव बना रहे हैं, जबकि पुलिस इंस्पेक्टर का कहना है कि महिला के शौहर की ओर से पहले ही उसके व उसके परिजनों के विरुद्ध डकैती का केस दर्ज है। और इसीलिए वह इस मामले में अपनी जाँच कर रहे हैं। वहीं महिला का कहना है कि आरोपित शौहर ने उसके भाई व परिजनों के ख़िलाफ़ झूठे केस दर्ज करवाए हैं, जिसकी जाँच शितांशु शर्मा कर रहे हैं।

तीन तलाक का एक अन्य मामला उत्तर प्रदेश के हरदोई से आया है। यहाँ बेटे की चाहत में एक शौहर ने अपनी बीवी को तीन तलाक दिया और ससुराल वाले उसे ताने दे देकर प्रताड़ित करते रहे। महिला की शिकायत पर शौहर समेत 7 के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है।

पीड़िता ने बताया कि उसका निकाह साल 2015 में नजीफ से हुआ था। उसके तीन साल बाद उसने एक बेटी को जन्म दिया, जिसे देख पति, सास, ससुर सब मिलकर उसे प्रताड़ित करने लगे। जब महिला तंग होकर मायके गई तो एक माह पहले नजीफ वहाँ पहुँचा और उसे तीन तलाक देकर आ गया।

पुलिस ने इस संबंध में मुजीब, इस्लाम, गुलाम, मो इसहाक, नूरजहाँ व सकीना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है और उसी के आधार पर आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश : भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो : दारोगा मंसूर अहमद, कानपुर पुलिस

ट्रिपल तलाक पीड़िता हिना परवीन
पीड़िता हिना परवीन 
उत्तरप्रदेश के कानपुर में हिना परवीन को उसके शौहर नूरजादे ने सऊदी अरब जाकर मोबाइल से तीन तलाक दे दिया। ससुराल वालों ने पीट-पीटकर घर से भगा दिया। देवर ने ‘छपाक-2’ बनाने की धमकी दी। जब न्याय की गुहार लगाई तो इंसाफ की जगह उसे शरीयत मानने की सलाह दी गई।
कार्रवाई के बदले थाने के मुस्लिम दारोगा मंसूर अहमद ने उसे बताया कि तीन तलाक कानून कुछ नहीं होता। शरीयत के हिसाब से उसका तलाक हो गया है। अब वह उसी को माने। दरोगा ने महिला के विरोध पर यह भी कहा कि उसके जैसी लड़कियों के कारण ही लोग मुस्लिमों के मामले में हस्तक्षेप करते हैं।
दारोगा ने महिला से यह भी कहा, “तुम पहली लड़की नहीं हो, जिसे तीन तलाक मिला। ये मुस्लिमों में शरिया कानून के तहत होता आया है, जिसे तुम्हें मानना चाहिए, भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो।”
क्या है पूरा मामला 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर के सुजातगंज निवासी हिना परवीन का निकाह पिछले साल 5 जुलाई को अजीतगंज के नूरजादे उर्फ इशान से हुआ था। निकाह के तीन माह बाद ही नूरजादे सऊदी अरब चला गया। 27 अक्टूबर को उसने परवीन को मोबाइल के जरिए तीन तलाक दिया। ससुराल ने भी तलाक की जानकारी पाते ही उसे पीट-पीटकर घर से निकाल दिया।
इसके बाद हिना ने पति नूरजादे, सास-ससुर, देवर, नंद, बहनोई समेत 8 लोगों के ख़िलाफ़ 4 नवंबर को बाबूपुरवा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। हिना ने आरोप लगाया कि निकाह के बाद उसके ससुराल वाले 5 लाख रुपए की माँग कर रहे थे। लेकिन उसके पिता ये बड़ी रकम देने असमर्थ थे। इसलिए साजिश के चलते उसका तलाक करवाया गया।
महिला के मुताबिक जब उसे ससुराल वालों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई तो उसके देवर फैसल ने एसिड अटैक करके छपाक-2 बनाने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने इसी साल जनवरी में वीडियो बनाकर मदद माँगी थी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिना परवीन को डर था कि उनके मामले की जाँच में बाधा आ जाएगी, क्योंकि उनके ससुराल वाले बाबू पुरवा थाने में पुलिस को प्रभावित कर सकते हैं। इसकी वजह से, उसने अधिकारियों से उसका मामला रेल बाजार पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने की माँग की। फिर उसका केस रेल बाजार में स्थांतरित करवाया गया। वहाँ मंसूर अहमद को जाँच सौंपी गई। लेकिन उन्होंने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। फिर ये केस पवन दुबे को दिया गया।
तीन तलाक पर कानपुर पुलिस की निष्क्रियता 
11 अगस्त को इस मामले में इंस्पेक्टर पवन दुबे ने हिना के पति नूरजादे को गिरफ्तार करके जेल भेजा। हैरानी की बात ये है कि एफआईआर से नूरजादे को छोड़कर सभी का नाम हटा दिया गया है। हिना ने इसके लिए पुलिस की निष्क्रियता को आरोप लगाया। उसने कहा कि उसे अपने शौहर और उसके परिवार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाए 9 महीने हो गए हैं। लेकिन उनके खि़लाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हिना का यह भी कहना है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उसके पति ने पुलिस को 50 हजार की घूस दी ताकि उसके परिवार वालों का नाम एफआईआर से हटा दिया जाए। फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए हिना ने बताया कि उससे साफ पता चल रहा है कि उसके शौहर ने अपने परिवार के साथ मिल कर कर उसके ख़िलाफ़ साजिश रची। उसने उस रिकॉर्डिंग में माना है कि उसने हिना से निकाह भी पैसों के लिए किया था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में नूरजादे को पुलिस प्रशासन और प्रधानमंत्री को लेकर भी घटिया भाषा का प्रयोग करते सुना जा सकता है। ऐसे में हिना का सवाल है कि इतना पुख्ता सबूत होने के बाद भी पुलिस एक्शन क्यों नहीं ले रही।
हिना यह भी पुष्टि करती है कि वह बाबू पुरवा थाने के सीओ आलोक सिंह से मिली थी और यह पूछा था कि पुलिस ने आरोपितों का नाम एफआईआर से क्यों हटाया। आलोक सिंह ने कथित तौर पर हिना को आश्वासन दिया कि वह इस मामले में तेजी लाएँगे। उसने कहा कि आलोक सिंह के निर्देश पर, IO पवन दुबे ने उसे फोन किया और कॉन्फ्रेंस कॉल पर पूर्व IO मंसूर अहमद को ले लिया। हिना के मुताबिक, पहले पवन दुबे ने ही उसे बताया कि मॅंसूर अहमद ने मामले के अन्य आरोपितों के नाम हटा दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया।
हिना परवीन जो पिछले 9 महीनों से पर्याप्त सबूतों के आधार पर न्याय माँग रही हैं, उसकी अब भी यही माँग है कि पुलिस को सारे आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए।

एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है: PM मोदी का खुला खत

Narendra Modi (@narendramodi) | Twitterआज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दूसरी बार देश की ज़िम्मेदारी सँभाली थी। अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के अवसर पर PM मोदी ने देश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में जनता को धन्यवाद देते हुए देश के लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति को पूरे विश्व के लिए मिसाल बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस खुले पत्र में लिखा है कि इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है और यह अवसर जनता को नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इस निष्ठा को प्रणाम करने का है।
'मैं आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ'
मेरे प्रिय स्नेहीजन,
आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का।
यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन, वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियाँ बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाशीष और आपके सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा, प्रेरणा दी है।
इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2014 में आपने, देश की जनता ने, देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पाँच वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है।
उन पाँच वर्षों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए गवर्नेंस को परिवर्तित होते देखा है। उस कार्यकाल में जहाँ विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई।
उस कार्यकाल में जहाँ सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- GST, किसानों की MSP की बरसों पुरानी माँगों को भी पूरा करने का काम किया। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। वर्ष 2019 में आपका आशीर्वाद, देश की जनता का आशीर्वाद, देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था।
भारत की ऐतिहासिक यात्रा में जनता का योगदान 
और इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है।
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है।
अनुच्छेद 370, अयोध्या में राम मन्दिर, तीन तलाक और CAA  जैसे ऐतिहासिक फैसले 
राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम- राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियाँ आप सभी को स्मरण हैं।
इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहाँ सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं।
इस दौरान गरीबों, किसानों, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है। अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत 9 करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है।
देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।
देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हज़ार रुपए की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।
मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएँ बढ़ाने और ब्लू इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। इसी तरह व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 7 करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। हाल में ही स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर दोगुना यानी 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है।
 सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी तेज गति से कार्य हुआ है। संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेज़ी से बन पाए हैं।
कम हुआ रूरल और अर्बन के बीच का अंतराल  
सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गाँवों के बीच की खाई कम हो रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब गाँव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10% ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं।
लेकिन, मैं इतना अवश्य कहूँगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है, संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं। देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना ने भारत को भी घेर लिया।
एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी 
आज सभी देशवासियों ने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।
निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है।
इनकी परेशानियाँ दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है।
ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहाँ के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत : भारत को अपने पैरों पर खड़ा होना है 
आज समय की माँग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है – आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्ट अप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा।
अभी बहुत कुछ करना बाकी है : मुझमे कमी हो सकती है, देश में नहीं 
बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।
देश के सामने चुनौतियाँ अनेक हैं, समस्याएँ अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूँ। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। और इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है।
कोई आपदा भारत का भविष्य तय नहीं कर सकती 
मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है।
हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती।
हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूँ। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए !!!
जागृत रहिए, जागरूक रखिए !!!

आपका प्रधान सेवक 
नरेन्द्र मोदी 


CAA से अच्छा ट्रिपल तलाक --सुप्रिया सुले, एनसीपी सांसद

NCP सांसद सुप्रिया सुले
CAA का विरोध कर रही मुस्लिम महिलाओं को सम्बोधित करते
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले 
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले की नजर में तीन तलाक महिलाओं के अच्छा है। मुंबई में शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून CAA के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान कुरान का हवाला देते हुए उन्होंने इसे अच्छा बताया है।
शरद पवार की बेटी ने यह बयान YMCA मैदान में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए दिया। इस सभा में ज्यादातर महिलाएँ बुर्क़ा पहने हुए आई थीं जो कि एक बार फिर CAA के विरोध के पीछे छुपे हुए इस्लामिक एजेंडा को दर्शाता है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि आम लोगों से मिलने जब वो एक बार बाजार में घूम रही थीं तो उन्होंने लोकसभा में अपने भाषण से पहले कुछ महिलाओं से हिजाब की एक दूकान में ट्रिपल तलाक़ पर उनकी राय जानने की कोशिश की। NCP नेता ने कहा कि वो एक ऐसी महिला से मिलीं जो पूरी तरह से बुर्क़ा पहने हुए थीं, वो एक डॉक्टर थी और उसकी बेटी भी डॉक्टर थी।
सुले ने कहा कि जब उसने बुर्का पहने हुए डॉक्टर महिला से पुछा कि ट्रिपल तलाक़ रहना चाहिए या नहीं तो डॉक्टर ने कहा कि रहना चाहिए। फिर सुले ने उस महिला से पूछा कि जब उनके पति को गुस्सा आता है तो वे क्या करती हैं? इस सवाल पर डॉक्टर नाराज हो गई और पीछे बैठ गई।
इसके बाद सुप्रिया सुले ने महिला से ट्रिपल तलाक की अहमियत के बारे में पुछा। तो महिला ने बताया कि उसका नाम किरण कुलकर्णी है और उसने एक मुस्लिम से शादी की है। शादी के बाद उसने क़ुरान पढ़ी। महिला ने सुप्रिया सुले से कहा- “मैं पूरी क़ुरान जानती हूँ। इससे मुझे पता चला है कि ट्रिपल तलाक़ जैसी व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। और मैं मानती हूँ कि किसी को भी इसके लिए जेल नहीं भेजा जाना चाहिए।”
घटना के बारे में बताते हुए सुप्रिया सुले ने कहा- “मेरे पति जैसे भी हों, वो मेरे पति और मेरे बच्चों के पिता हैं और उन्हें कोई जेल नहीं भेज सकता। अगर घर में कोई मतभेद हो जाता है तो हम इसे खुद निपटाएँगे।” उसने कहा कि रिश्तेदार उसके पति को मामला सुलझाने की सलाह देंगे क्योंकि घर के मुद्दे बाहर नहीं जाने चाहिए। उसने कहा कि एक महिला अपने पति को कभी भी जेल नहीं भेजेगी।
सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर कोई महिला अपने पति (तीन तलाक देने के बाद) को इस कारण से जेल भेजती है, तो समाज उसकी बुराई करेगा, लोग उनके बच्चों से कहेंगे कि उनकी माँ बुरी महिला है जिसने अपने पति को जेल भेजा। सुप्रिया सुले के अनुसार, उस महिला ने सुले से कहा कि हर कम्युनिटी को अपने नियम बनाने का अधिकार है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महिलाएँ खुद यह तय करेंगी कि उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है। जैसे कि CAA और NRC हम लोगों के लिए बुरा है।
ट्रिपल तलाक़ के खिलाफ बोलते हुए यह पहली बार नहीं है जब सुप्रिया सुले ने किरण कुलकर्णी, जिसका कि अब हिना नाम है, का जिक्र किया हो। दिसंबर 2018 में लोकसभा में अपने भाषण के दौरान भी सुप्रिया सुले ने जिक्र किया था कि किस तरह से एक हिन्दू महिला ने मुस्लिम से शादी करने के बाद क़ुरान के अनुसार तीन तलाक़ को जरूरी बताया था।
यह भी दिलचस्प बात है कि सुप्रिया सुले ने एक ऐसी महिला का उदाहरण दिया जो पढ़ी-लिखी है और वह भी शरिया कानून को मानते हुए ट्रिपल तलाक की व्यवस्था का समर्थन करती है। अक्सर देखा जाता है कि एक आर्थिक रूप से समर्थ परिवार में ट्रिपल तलाक जैसे मामले कम ही देखे जाते हैं। ट्रिपल तलाक से वास्तविक पीड़ित महिलाएँ ज्यादातार अनपढ़ या फिर आर्थिक रूप से बदहाल परिवारों से होती हैं। ट्रिपल तलाक जैसे प्रचलनों से उन्हीं का सबसे ज्यादा शोषण भी होता है।

'रमा देवी की मांग : आज़म खान की लोकसभा सदस्यता खत्म की जाए

Image result for ओम बिरला स्पीकरभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद रमा देवी पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के विवादित बयान पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने फैसला सुना दिया है। उन्होंने कहा कि आजम खान को अपने शर्मनाक बयान के लिए बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो वो कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इस विषय पर लोकसभा में शुक्रवार(जुलाई 26) को भी हंगामा हुआ।
कुछ एक दलों को छोड़कर पार्टी लाइन से ऊपर उठते हुए नेताओं ने आजम खान पर कार्रवाई की मांग की। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आजम के बयान को अभद्र बताते हुए कहा कि सपा नेता या तो सदन में माफी मांगे या उन्हें निलंबित किया जाए। लोकसभा में भाजपा के नेताओं ने आजम के बयान पर नाराजगी जाहिर की और स्पीकर से अपील की कि वह खान को ऐसी सजा दें जो मिसाल बन सके। खान पर कार्रवाई की मांग का टीएमसी और बाद में कांग्रेस ने भी समर्थन किया। भाजपा के अलावा टीएमसी, कांग्रेस और टीआरएस ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई के लिए वे स्पीकर को अधिकृत करते हैं। लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा था  कि वह सभी दलों के नेताओं से बात करने के बाद खान पर कार्रवाई का फैसला करेंगे। 
सपा नेता ने जुलाई 25 को लोकसभा में रमा देवी पर विवादित टिप्पणी की थी। रमा देवी सदन की कार्यवाही चलाने के लिए स्पीकर की कुर्सी पर विराजमान थीं। इसी दौरान आजम खान ने उन पर विवादिय बयान दिया। आजम खान के इस बयान का भाजपा ने तीखा विरोध किया। खास बात यह थी कि आजम के बयान के समय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सदन में मौजूद थे लेकिन अपने नेता को रोकने या उनके बयान की निंदा करने की जगह उन्होंने खान का बचाव किया। शुक्रवार को रमा देवी ने आजम खान की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की।
Lok Sabha Speaker Om Birla on Azam Khan: I will call a meeting of leaders of all parties and then take a decision on this issue
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लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा नेताओं ने आजम खान के बयान का मुद्दा उठाते हुए उन पर कार्रवाई करने की मांग की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'महिला से जुड़े मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। हमें एकजुट होने की जरूरत है। कार्रवाई करने में इतनी हिचकिचाहट और किंतु-परंतु क्यों हैं?' वित्त मंत्री ने कहा कि सभी ने एक सुर में आजम खान के बयान की निंदा की है, इसे देखकर उन्हें अच्छा महसूस हुआ। उन्होंने कहा, 'हम खान पर कार्रवाई करते हुए स्पीकर को देखना चाहते हैं।'
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी महिलाओं के अनादर के खिलाफ रही है लेकिन यह भी सच है कि एक समय इसी संसद में सोनिया गांधी को 'इटली की कठपुतली' कहा गया।' रंजन के इस बयान का भाजपा सदस्यों ने विरोध किया। इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आजम खान अपने बयान के लिए यदि माफी नहीं मांगते तो उन्हें संसद से निलंबित किया जाना चाहिए। भाजपा सदस्यों की मांग का समर्थन टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती ने भी किया। 
TMC MP, Mimi Chakraborty on Azam Khan, in Lok Sabha: Nobody can stand in the Parliament and tell a woman "look into my eyes and talk." Speaker sir, all women here are expecting something big from you on this.
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मिमी चक्रवर्ती ने कहा, 'संसद में कोई भी खड़ा होकर एक महिला से यह नहीं कह सकता कि मेरी आंखों में देखकर बात करो। स्पीकर महोदय, आज लोकसभा की सभी महिलाएं आप से कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि गुरुवार को लोकसभा में जो कुछ हुआ उसे पूरे देश ने देखा। ईरानी ने कहा कि इसे केवल महिलाओं से जोड़कर न देखा जाए। अमेठी से सांसद ने कहा, 'मैं सभी से एक आवाज में बोलने की अपील करती हूं। आप एक महिला से बदसलूकी नहीं कर सकते।'
Rama Deviरमा देवी की मांग : आज़म खान की लोकसभा सदस्यता खत्म की जाए 
उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सदस्य आजम खान द्वारा शुक्रवार को भाजपा सांसद रमा देवी पर की गई टिप्पणी से बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। रमा देवी जिस समय सदन की अध्यक्षता कर रहीं थीं उसी दौरान आजम ने यह अभद्र टिप्पणी की। अब रमा देवी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजम खान कभी भी महिलाओं की इज्जत नहीं करते हैं और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
मीडिया से बात करते हुए रमा देवी ने कहा, 'आसन पर बैठने वाला आदमी सभी लोगों के प्रति समान भाव से काम करता है और सबकी चिंता करता है। ऐसी आपत्तिजनक बात कोई भी करता है तो उसको रोका जाता है, कार्रवाई से निकाला जाता है, वो सारी बातें हो रही थीं कि कार्रवाई से निकाला जाए। लेकिन उनका (आजम खान) का लड़ने का मूड था। हमारे पार्टी के जो लोग बाद में बोलना शुरू किए। मैंने उनसे अध्यक्ष की तरफ मर्यादा में रहकर बात करने को कहा। उसके बाद वो शुरू हो गए। वो तंज करने वाली बातों को कहने लगे।' 
Rama Devi,BJP MP on Azam Khan's remark on her: He has never respected women, we all know what he had said about Jaya Prada ji. He has no right to stay in Lok Sabha, I will request Speaker to dismiss him. Azam Khan must apologize.
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मैंने निभाई सदन की मर्यादा
रमा देवी ने आगे कहा, 'उस समय मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन फिर भी मैं आसन पर बैठी हुई थी, उसकी मर्यादा  को निभाते मैंने उनसे कहा कि ठीक से बोलो जो कुछ बोलना है सही से बोलो। कार्रवाई से निकालने के बाद वो कहा कि मैं तो इनको बहन की तरह प्यार करता हूं। मैं कुछ नहीं बोली, मुझे हंसी भी आई कि ये नौटंकीबाज यहां संसद बंद करता है वो महिलाओं को किस नजर से देखता है वो सारा जगजाहिर है। कहीं ऐसा नहीं है कि ये आदमी कभी भी महिला की इज्जत किया हो। उनको या तो रिजाइन करना होगा या मैं अध्यक्ष से जाकर कहूंगी कि इनमें कोई कार्रवाई करें और इस तरह की बातों के लिए माफी मांगे।' 
Smriti Irani'आजम खान और अखिलेश यादव की सोच एक जैसी' : स्मृति ईरानी
आजम खान ने माफी मांगने के बदले सपा सदस्यों के साथ सदन से वॉकआउट किया। उनके इस व्यवहार की जमकर आलोचना होने लगी। अमेठी से बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी ने शर्मानक बताते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव को घेरा। स्मृति ईरानी ने ट्वीट किया, आजम खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया की उनकी सोच में भी कोई फर्क नहीं। जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा यह सोचने वाली बात है।
आज़म खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया की उनकी सोच में भी कोई फ़र्क़ नहीं।

जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा यह सोचने वाली बात है।
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सपा सांसद आजम खान जब मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 पर लोकसभा में हो रही बहस में भाग ले रहे थे खान ने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के हस्तक्षेप का जिक्र किया और एक दोहे पढ़े...तूं इधर-उतर की बात ना कर। इस पर पीठासीन अध्यक्ष रमा देवी ने कहा कि इधर उधर न देखें और अध्यक्ष के आसन की ओर देखकर संबोधित करें।
इसके बाद आजम खा ने कुछ ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की जिससे सदन का मौहल अचानक गर्म हो गया। हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी सांसदों ने आजम खान का जोरदार विरोध किया और माफी मांगने के लिए कहा। रमा देवी भी ने भी कहा यह बोलना उचित नहीं है और इसे रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने भी इसके लिए आजम खान से माफी मांगने को भी कहा। हालांकि आजम खान ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, आप मेरी प्यारी बहन हैं।'
This man is shame for the entire elected representatives, he has become a repeat sexism offender, who doesn't have any respect for women.

Rather sacking him from party, @yadavakhilesh enjoys guttermouth's Thamasha!

Anyone voice against this from liberal gang??
बीजेपी सांसद शोभा करंदालजे ने कहा कि यह शख्स सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों पर धब्बे की तरह है। वो लगातार महिलाओं के प्रति अभद्र टिप्पणियां करता रहा है, सच तो ये है कि महिलाओं के लिए आजम खान के दिल में सम्मान का भाव नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वो आजम खान को बर्खास्त करने की जगह गंदी जुबां वाले शख्स का तमाशा देख रहे हैं। क्या कोई लिबरल गैंग से ऐसा सदस्य है जो आजम खान के खिलाफ कुछ बोले। 
अवलोकन करें:-
समझ में नहीं आता कि "आखिर किस कारण समाजवादी पार्टी आज़म खान को ढ़ो रही है? आखिर क्या मजबूरी है, जो मुलायम सिंह से लेकर अब अखिलेश यादव इस अमर्यादित आज़म खान को पार्टी में क्यों रखे हुए हैं? क्या समाजवादी पार्टी का महिलाओं को अपमानित करना ही उद्देश्य है? जब लोगों की प्रतिक्रिया होगी, फिर सिरफिरा आज़म खान इस्लाम को बीच में लाकर जहर फैलाएगा। आखिर कोई न कोई ऐसा राज है, जिस कारण मुलायमसिंह से लेकर अखिलेश यादव इस आदमी को पार्टी से निकालने की बजाए इसका बचाव करते आ रहे हैं?"
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आर.बी.एल.निगम लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान की एक टिप्पणी को लेकर हंगाम...

आजम खान को सात दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग की जरूरत है- पूर्व स्पीकर
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने गुरुवार को कहा कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान जैसे लोगों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम होना चाहिए ताकि वे सीख सकें कि संसद में कैसे व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी महिला या पुरुष की प्रतिष्ठा का मामला नहीं है, खान ने एक आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे पूरे संसद की गरिमा और परंपराओं को ठेस पहुंची। यह पूछे जाने पर कि खान के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए? उन्होंने कहा कि केवल कुछ दिनों के लिए संसद से निलंबन पर्याप्त नहीं होगा। उनके जैसे लोगों के लिए सात दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग की जरूरत है। ताकि उन्हें पता चल सके कि एक सांसद को सदन में कैसा व्यवहार करना चाहिए। महाजन ने कहा कि खान को खुद स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया है। अध्यक्ष से माफी मांगनी चाहिए। जब तक वह माफी नहीं मांगे तक उन्हें सदन में बोलने नहीं देना चाहिए।

आजम खान खुद सोचें, सांसद कहलाने के योग्य है या नहीं?
पूर्व स्पीकर ने कहा कि संसद के सदस्य बनने के बाद सांसद एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। अगर यह व्यक्ति (खान) यह समझने में असमर्थ है, तो उसे खुद के लिए सोचना होगा कि क्या वह सांसद कहलाने के योग्य है या नहीं?' महाजन ने कहा, 'आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद, खान ने चेयर (रमा देवी) को अपनी बहन कहना शुरू कर दिया। लेकिन शेर-ओ-शायरी (उर्दू कविता) जिसे संसद में सुनाया, एक बहन को संबोधित नहीं किया।'उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर भी निराशा व्यक्त की। 'मुझे समझ नहीं आया कि अखिलेश को क्या हो गया है। वह एक राज्य के मुख्यमंत्री थे, वह खान के पक्ष में क्यों खड़े हैं?'

आजम खान को पागलखाने या जेल भेजना चाहिए
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि सपा नेता आजम को संसद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया वह आजम की अपमानजनक बयान की निंदा करती हैं। उन्हें संसद के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। दिल्ली महिला आयोग की चीफ स्वाति मालीवाल ने भी खान आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें इस असभ्य बयान के लिए जेल भेज देना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया 'आजम खां को शर्म आनी चाहिए। पीठासीन सभापति की कुर्सी पर बैठीं सांसद के खिलाफ ऐसा असभ्य बयान ऐसे नेताओं की गिरफ्तारी के लिए केंद्र सरकार कब कानून बनाएगा? इस व्यक्ति को पहले पागलखाने और फिर जेल भेजना चाहिए।'

आश्चर्य तब हुआ जब सपा सांसद, पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पार्टी के सांसद की निंदा करने के बजाय कहा कि मैं नहीं मानता आजम खान जी ने अध्यक्ष (रमा देवी) जी अनादर किया है। ये (बीजेपी सांसद) लोग इतने असभ्य हैं, कौन हैं जो उंगलियां उठाते हैं?