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I.N.D.I.A. का नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ – 13 लोगों की समन्वय समिति में मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता भी

मुंबई में I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक दूसरे दिन भी जारी है। इस बैठक में विपक्षी दल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति से लेकर मंथन कर रहे हैं। वहीं आज इंडिया के नेताओं ने 13 सदस्यों की समन्वय समिति बनाने का फैसला लिया है। साथ ही गठबंधन ने अपना नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ भी जारी किया है। 

सूत्रों के अनुसार अब गठबंधन में ही प्रश्न यह हो रहा है कि भारत टूटा ही कब था जो जुड़ेगा? दूसरे यह कि भारत की दूसरी बड़ी जनसंख्या वाला समाज अल्पसंख्यक क्यों? यानि गठबंधन तो हो गया, लेकिन दिल नहीं मिल पा रहे, जो गठबंधन पर संदेह खड़ा कर रहा है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ने शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को मुंबई की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर किस राज्य में किस पार्टी को कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने हैं इसे लेकर भी इस बैठक में चर्चा हो रही है। मुंबई में हो रही इस बैठक में इस गठबंधन के संयोजक के नाम को लेकर भी चर्चा हुई है। इस बैठक के दौरान एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया है। 

इस समन्वय समिति में कॉन्ग्रेस से केसी वेणुगोपाल, एनसीपी से शरद पवार, डीएमके से एमके स्टालिन, शिवसेना से संजय राउत, आरजेडी से तेजस्वी यादव, टीएमसी से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जेडीयू से ललन सिंह, जेएमएम से हेमंत सोरेन, सीपीआई से डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल हैं। 

इस समन्वय समिति में हरामखोर को नॉटी समझाने वाले नेता भी शामिल हैं। राउत के अनुसार हरामखोर का मतलब उनके यहाँ नॉटी या बेईमान होता है। वहीं 1993 के बम ब्लास्ट के दौरान मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता शरद पवार भी हैं। अब ऐसे में इस समिति का क्या होगा ये आने वाला समय ही बताएगा।

एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का साझा संकल्प

इंडिया गठबंधन ने लोकसभा चुनाव-2024 एक साथ मिलकर लड़ने का भी संकल्प लिया। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। उन्होंने लिखा, “इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का संकल्प लिया। जहाँ तक संभव होगा वहाँ तक हम एकसाथ लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।”  
वहीं ANI की रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन ने इस पर एक प्रस्ताव भी पास किया।
जयराम रमेश ने कॉन्ग्रेस की तरफ से जानकारी देते हुए आगे कहा, “सीट बँटवारे पर अलग-अलग राज्यों में चर्चा तत्काल शुरू की जाएगी और जल्द से जल्द से इसे पूरा किया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्से में जनसभा आयोजित की जाएगी। अलग-अलग भाषाओं में “जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया” की थीम के साथ विपक्षी गठबंधन चुनाव में उतरेगा। मीडिया की साझा रणनीति भी बनाई जाएगी।

विपक्ष जारी कर सकता है लोगो 

INDIA गठबंधन द्वारा आज लोगो जारी करने की बात सामने आई है वहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि लोगो अभी तैयार नहीं है तो गठबंधन विचार-विमर्श के बाद इसे जारी करेगा। 

किसान आंदोलन' में मरे प्रदर्शनकारियों को मुआवजा नहीं

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को ‘किसान आंदोलन’ के तहत ट्रैक्टर रैली निकाली गई थी। इसमें ट्रैक्टर से स्टंट करते हुए एक ‘किसान’ की मौत हो गई। दिन भर हिंसा हुई। इसके अलावा ‘किसान आंदोलन’ में शामिल संगठन और विपक्षी दलों के नेता अलग-अलग आँकड़े देकर किसानों की मौत की बातें कर रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा है कि ऐसे मृतकों को मुआवजा देने की कोई योजना नहीं है।

पंजाब के ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ ने दावा किया है कि 4 महीने से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में 70 से अधिक किसान मारे गए हैं। संगठन का कहना है कि इनमें अधिकतर ठंड और हार्ट अटैक के कारण मरे हैं। संगठन का कहना है कि कई युवा किसान दुर्घटना में मरे तो बुजुर्गों की मौत का आँकड़ा ज्यादा है। कई किसान संगठनों ने 76-78 का आँकड़ा भी दिया है। बताया गया कि इनमें 65 पंजाब के और 10 हरियाणा के थे।

अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा है कि ‘किसान आंदोलन’ में मरे ‘किसानों’ के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा। लगभग 29 सांसदों ने केंद्रीय किसान एवं कृषि कल्याण मंत्री से ये सवाल पूछा था। पहला सवाल था कि क्या सरकार को पता है कि हजारों किसान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 2 महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर सरकार ने कहा “हाँ, कुछ किसान संगठन और उसके सदस्य इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।”

वहीं दूसरा सवाल था कि इस आंदोलन के दौरान कितने किसानों की मौत हुई है? इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि किसान संगठनों से हुई दर्जन भर दौर की वार्ताओं में कई बार उनसे अपील किया गया कि वो महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इस आंदोलन में न लेकर आएँ। किसान नेताओं को कोरोना संक्रमण और ठंड स्थित अन्य कठिनाइयों की याद दिलाई। हालाँकि, सरकार ने मौत का कोई आँकड़ा नहीं दिया।

तीसरे प्रश्न में मृतकों के परिजनों को मुआवजा सम्बन्धी विवरण माँगे गए थे, जिसके उत्तर में सरकार ने ‘No Sir’ जवाब दिया। किसानों से हुई वार्ताओं के सम्बन्ध में पूछे गए चौथे प्रश्न के जवाब में सरकर ने कहा कि अब तक 11 राउंड की बैठकें हो चुकी हैं। सरकार ने बताया कि किसान नेताओं को एक के बाद एक कई प्रस्ताव दिए गए, ताकि मुद्दे का समाधान हो। इन कानूनों को वापस लेने के बारे में पूछे गए पाँचवें व अंतिम सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन पर रोक लगाई हुई है।

अब इस ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में विदेशी सेलेब्रिटीज से भी ट्वीट्स करवाए जा रहे हैं। गायिका एवं अभिनेत्री रिहाना ने भी CNN की एक खबर का लिंक शेयर करते हुए पूछा कि हम इस पर क्यों बात नहीं कर रहे हैं? इस पर जवाब देते हुए कंगना रनौत ने उन्हें ‘मूर्ख’ के विशेषण से नवाजा और चुप बैठने की सलाह दी। पर्यावरण एक्टिविस्ट कही जाने वाले ग्रेटा थनबर्ग ने भी पराली जलाने वाले प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता को बताया फर्जी

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सुब्रमण्यम स्वामी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी शैक्षिक योग्यता का प्रमाण मांगने वालों में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी से उनकी शिक्षा का प्रमाण मांगने की हिम्मत है? राजीव गाँधी से शादी करने से पूर्व क्या काम करती थी? है किसी में हिम्मत सोनिया से यह प्रश्न करने की? इन मोदी विरोधियों को फिल्म 'वक़्त' के इस संवाद को स्मरण करना चाहिए कि "जिनके घर शीशे को हों, दूसरे पर पत्थर नहीं फेंकते।" 
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को घेरते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि, सोनिया गाँधी ने 17वीं लोकसभा ‘Who’s Who’ प्रकाशन के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत बताया है। स्वामी ने यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत उन्होंने लोकसभा स्पीकर से भी की है।
सोनिया को मालूम है कि डॉ स्वामी ने पहले भी शिक्षा पर इतना शोर मचाया था, कि तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत करने पर, उन्होंने इसे टाइपिंग गलती कहकर अपना बचाव किया था, जिस पर डॉ स्वामी ने इस भयंकर गलती को Guinness Book of world records तक में भेजने की बात कही थी। लेकिन देश का दुर्भाग्य कहा जाए या कांग्रेस पार्टी का जो एक अल्पशिक्षित के हाथों में खेलते हैं। कभी कॉलेज की शक्ल न देखी हो, वह यूनिवर्सिटी की बात करे, क्या जग-हंसाई होगी की नहीं? क्या कांग्रेस पार्टी अपनी गुलामी मानसिकता का परिचय नहीं दे रही?  
सोनिया एवं उनकी कांग्रेस पार्टी यह भी जानती है कि डॉ स्वामी सार्वजनिक मंचों से इस बात को उजागर करने से नहीं चूकते। इतना सबकुछ होने के बावजूद के पार्टी में सोनिया से कहीं अधिक शिक्षित एवं विद्वान भी पता नहीं किस कारण से सोनिया की जी-हजूरी करते रहते हैं। पार्टी में शिक्षित लोगों में इतनी भी बुद्धि नहीं कि विश्व को क्या संकेत दे रहे हैं। शायद यही कारण है कि विश्व ने भारत को कभी उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी गंभीरता से आज ले रहा है। यही कारण था कि पाकिस्तान हमारे पर हावी रहा। जिस पार्टी की कमान कम पढ़ी-लिखी के हाथ में होगी, उस पार्टी का भविष्य सब लोग अपनी खुली आँखों से देख भी रहे हैं।    




2 अगस्त, 2020 भाजपा सांसद ने सोनिया गाँधी के शैक्षणिक योग्यता को गलत बताते हुए एक ट्वीट किया है। इसके अलावा उन्होंने इस संदर्भ में लोकसभा स्पीकर को भी एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सोनिया गाँधी ने गलत कहा है कि 1965 में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी भाषा में प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। सोनिया के इस फर्जी दावे का जिक्र मैंने 20 साल से पहले भी किया था। मैंने उस वक्त कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाए थे।


उन्होंने लिखा, “तब जस्टिस बालकृष्णन के नेतृत्व वाली चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मसले पर सुनवाई की थी। यह आग्रह किया गया था कि सोनिया गाँधी इस झूठी जानकारी को फिर से प्रस्तुत नहीं करेगी। मैंने भी इस मामले में बड़ा दिल रखते हुए सजा की माँग नहीं की। इस आधार पर मैं सहमत था कि इस मामले का निपटारा हो जाए।
स्वामी ने स्पीकर से इस मामले को लोकसभा की आचार समिति को भेजे जाने का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें सबूत पेश करने में खुशी होगी ताकि उन्हें (सोनिया) उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में इस जानबूझकर और बार-बार बोल जाने वाले झूठे के लिए दंडित किया जा सके।
राज्यसभा सांसद ने स्पीकर से 15वीं और 16वीं लोकसभा के लिए ‘Who’s Who’ के अंतर को खोजने के लिए सोनिया गाँधी की पिछली फाइलिंग की तुलना करने का आग्रह भी किया।
इसके अलावा, स्वामी ने ट्विटर पर अपने द्वारा किए गए दावे को सही ठहराने के लिए कुछ डॉक्युमेंट्स की तस्वीरें भी सबूत के तौर पर साझा किए।

‘Rape in India’ पर घिरे राहुल गाँधी : बपौती नहीं देश की महिलाएँ-- स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी-राहुल गॉंधी
रेप इन इंडिया वाले बयान को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी बुरी तरह फॅंस गए है। लोकसभा में उनके इस बयान पर शुक्रवार को काफी हंगामा हुआ। इसके बाद लोकसभा की कार्रवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई महिला सांसदों ने राहुल गाँधी के बयान पर आपत्ति जताई और उनसे माँफी की माँग की। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल के बयान को आधार बनाकर पूछा है कि क्या ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को सदन में आना चाहिए?
झारखंड के राजमहल में गुरुवार को राहुल गाँधी ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विवादित बयान दिया था। उन्होंने देश में बढ़ रही यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अपनी चिंता व्यक्त करते-करते प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया था कि उन्होंने केंद्र की ‘मेक इन इंडिया’ को ‘रेप इन इंडिया’ बना दिया है। इससे वैश्विक स्तर पर देश की बदनामी हो रही है।
उनके इस बयान पर आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जताई। प्रश्नकाल आरंभ होने से पहले ही भाजपा की कई महिला सदस्य अपने स्थान पर खड़ी हो गईं और राहुल गाँधी से माफी की माँग करने लगीं।


स्मृति ईरानी ने कहा, “गाँधी खानदान के सदस्य ने कहा है कि महिलाओं का बलात्कार होना चाहिए, देश में हर कोई बलात्कारी नहीं है। जो बलात्कारी है, उसे कानून सजा देता है। हर महिला को कलंकित नहीं किया जा सकता है, इस पर एक्शन लेना चाहिए।”
ईरानी ने कहा, “देश की महिलाएँ उनकी बपौती नहीं हैं, रेप इन इंडिया का बयान देने का जो दुस्साहस उन्होंने किया है, उस पर एक्शन होना चाहिए।”
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी जाहिर की नाराजगी 
राहुल गाँधी के रेप इन इंडिया के बयान को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा, “मैं आहत हूँ, पूरा देश आहत हुआ है, क्या ऐसे लोग सदन में आ सकते हैं जो ऐसे शब्द इस्तेमाल करते हैं? क्या उनको पूरा सदन ही नहीं, बल्कि पूरे देश से माफी नहीं माँगनी चाहिए?”
महिला सांसदों और रक्षा मंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल खुलेआम कह रहे हैं कि रेप इन इंडिया, तो क्या वो दुनिया को भारत में आकर बलात्कार करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।”
वहीं, महिला भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा,”मोदी जी ने कहा मेक इन इंडिया लेकिन राहुल गाँधी ने कहा रेप इन इंडिया, यानी वो स्वागत करते हैं उन लोगों का जो आएँ और बलात्कार करें। ये भारतीय महिलाओं और भारत माता का अपमान हैं।”
राहुल गांधी ने गुरुवार को झारखंड की मेहराना रैली में मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था, “देश में नरेंद्र मोदी ने कहा था मेक इन इंडिया, अब जहाँ भी देखो वहाँ मेक इन इंडिया नहीं, बल्कि रेप इन इंडिया है। अखबार खोलो तो झारखंड में महिला से बलात्कार, यूपी में नरेंद्र मोदी के विधायक ने महिला का रेप किया…हर प्रदेश में हर रोज रेप इन इंडिया।”
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी से पहले सदन में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी ऐसा ही बयान दिया था। जहाँ उन्होंने भारत को रेप इन इंडिया बताया था। लेकिन काफी विरोध और आालोचनाएँ झेलने के बाद उन्होंने इस पर माफी माँग ली थी। 

'रमा देवी की मांग : आज़म खान की लोकसभा सदस्यता खत्म की जाए

Image result for ओम बिरला स्पीकरभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद रमा देवी पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के विवादित बयान पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने फैसला सुना दिया है। उन्होंने कहा कि आजम खान को अपने शर्मनाक बयान के लिए बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो वो कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इस विषय पर लोकसभा में शुक्रवार(जुलाई 26) को भी हंगामा हुआ।
कुछ एक दलों को छोड़कर पार्टी लाइन से ऊपर उठते हुए नेताओं ने आजम खान पर कार्रवाई की मांग की। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आजम के बयान को अभद्र बताते हुए कहा कि सपा नेता या तो सदन में माफी मांगे या उन्हें निलंबित किया जाए। लोकसभा में भाजपा के नेताओं ने आजम के बयान पर नाराजगी जाहिर की और स्पीकर से अपील की कि वह खान को ऐसी सजा दें जो मिसाल बन सके। खान पर कार्रवाई की मांग का टीएमसी और बाद में कांग्रेस ने भी समर्थन किया। भाजपा के अलावा टीएमसी, कांग्रेस और टीआरएस ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई के लिए वे स्पीकर को अधिकृत करते हैं। लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा था  कि वह सभी दलों के नेताओं से बात करने के बाद खान पर कार्रवाई का फैसला करेंगे। 
सपा नेता ने जुलाई 25 को लोकसभा में रमा देवी पर विवादित टिप्पणी की थी। रमा देवी सदन की कार्यवाही चलाने के लिए स्पीकर की कुर्सी पर विराजमान थीं। इसी दौरान आजम खान ने उन पर विवादिय बयान दिया। आजम खान के इस बयान का भाजपा ने तीखा विरोध किया। खास बात यह थी कि आजम के बयान के समय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सदन में मौजूद थे लेकिन अपने नेता को रोकने या उनके बयान की निंदा करने की जगह उन्होंने खान का बचाव किया। शुक्रवार को रमा देवी ने आजम खान की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की।
Lok Sabha Speaker Om Birla on Azam Khan: I will call a meeting of leaders of all parties and then take a decision on this issue
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लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा नेताओं ने आजम खान के बयान का मुद्दा उठाते हुए उन पर कार्रवाई करने की मांग की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'महिला से जुड़े मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। हमें एकजुट होने की जरूरत है। कार्रवाई करने में इतनी हिचकिचाहट और किंतु-परंतु क्यों हैं?' वित्त मंत्री ने कहा कि सभी ने एक सुर में आजम खान के बयान की निंदा की है, इसे देखकर उन्हें अच्छा महसूस हुआ। उन्होंने कहा, 'हम खान पर कार्रवाई करते हुए स्पीकर को देखना चाहते हैं।'
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी महिलाओं के अनादर के खिलाफ रही है लेकिन यह भी सच है कि एक समय इसी संसद में सोनिया गांधी को 'इटली की कठपुतली' कहा गया।' रंजन के इस बयान का भाजपा सदस्यों ने विरोध किया। इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आजम खान अपने बयान के लिए यदि माफी नहीं मांगते तो उन्हें संसद से निलंबित किया जाना चाहिए। भाजपा सदस्यों की मांग का समर्थन टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती ने भी किया। 
TMC MP, Mimi Chakraborty on Azam Khan, in Lok Sabha: Nobody can stand in the Parliament and tell a woman "look into my eyes and talk." Speaker sir, all women here are expecting something big from you on this.
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मिमी चक्रवर्ती ने कहा, 'संसद में कोई भी खड़ा होकर एक महिला से यह नहीं कह सकता कि मेरी आंखों में देखकर बात करो। स्पीकर महोदय, आज लोकसभा की सभी महिलाएं आप से कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि गुरुवार को लोकसभा में जो कुछ हुआ उसे पूरे देश ने देखा। ईरानी ने कहा कि इसे केवल महिलाओं से जोड़कर न देखा जाए। अमेठी से सांसद ने कहा, 'मैं सभी से एक आवाज में बोलने की अपील करती हूं। आप एक महिला से बदसलूकी नहीं कर सकते।'
Rama Deviरमा देवी की मांग : आज़म खान की लोकसभा सदस्यता खत्म की जाए 
उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सदस्य आजम खान द्वारा शुक्रवार को भाजपा सांसद रमा देवी पर की गई टिप्पणी से बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। रमा देवी जिस समय सदन की अध्यक्षता कर रहीं थीं उसी दौरान आजम ने यह अभद्र टिप्पणी की। अब रमा देवी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजम खान कभी भी महिलाओं की इज्जत नहीं करते हैं और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
मीडिया से बात करते हुए रमा देवी ने कहा, 'आसन पर बैठने वाला आदमी सभी लोगों के प्रति समान भाव से काम करता है और सबकी चिंता करता है। ऐसी आपत्तिजनक बात कोई भी करता है तो उसको रोका जाता है, कार्रवाई से निकाला जाता है, वो सारी बातें हो रही थीं कि कार्रवाई से निकाला जाए। लेकिन उनका (आजम खान) का लड़ने का मूड था। हमारे पार्टी के जो लोग बाद में बोलना शुरू किए। मैंने उनसे अध्यक्ष की तरफ मर्यादा में रहकर बात करने को कहा। उसके बाद वो शुरू हो गए। वो तंज करने वाली बातों को कहने लगे।' 
Rama Devi,BJP MP on Azam Khan's remark on her: He has never respected women, we all know what he had said about Jaya Prada ji. He has no right to stay in Lok Sabha, I will request Speaker to dismiss him. Azam Khan must apologize.
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मैंने निभाई सदन की मर्यादा
रमा देवी ने आगे कहा, 'उस समय मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन फिर भी मैं आसन पर बैठी हुई थी, उसकी मर्यादा  को निभाते मैंने उनसे कहा कि ठीक से बोलो जो कुछ बोलना है सही से बोलो। कार्रवाई से निकालने के बाद वो कहा कि मैं तो इनको बहन की तरह प्यार करता हूं। मैं कुछ नहीं बोली, मुझे हंसी भी आई कि ये नौटंकीबाज यहां संसद बंद करता है वो महिलाओं को किस नजर से देखता है वो सारा जगजाहिर है। कहीं ऐसा नहीं है कि ये आदमी कभी भी महिला की इज्जत किया हो। उनको या तो रिजाइन करना होगा या मैं अध्यक्ष से जाकर कहूंगी कि इनमें कोई कार्रवाई करें और इस तरह की बातों के लिए माफी मांगे।' 
Smriti Irani'आजम खान और अखिलेश यादव की सोच एक जैसी' : स्मृति ईरानी
आजम खान ने माफी मांगने के बदले सपा सदस्यों के साथ सदन से वॉकआउट किया। उनके इस व्यवहार की जमकर आलोचना होने लगी। अमेठी से बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी ने शर्मानक बताते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव को घेरा। स्मृति ईरानी ने ट्वीट किया, आजम खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया की उनकी सोच में भी कोई फर्क नहीं। जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा यह सोचने वाली बात है।
आज़म खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया की उनकी सोच में भी कोई फ़र्क़ नहीं।

जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा यह सोचने वाली बात है।
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सपा सांसद आजम खान जब मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 पर लोकसभा में हो रही बहस में भाग ले रहे थे खान ने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के हस्तक्षेप का जिक्र किया और एक दोहे पढ़े...तूं इधर-उतर की बात ना कर। इस पर पीठासीन अध्यक्ष रमा देवी ने कहा कि इधर उधर न देखें और अध्यक्ष के आसन की ओर देखकर संबोधित करें।
इसके बाद आजम खा ने कुछ ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की जिससे सदन का मौहल अचानक गर्म हो गया। हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी सांसदों ने आजम खान का जोरदार विरोध किया और माफी मांगने के लिए कहा। रमा देवी भी ने भी कहा यह बोलना उचित नहीं है और इसे रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने भी इसके लिए आजम खान से माफी मांगने को भी कहा। हालांकि आजम खान ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, आप मेरी प्यारी बहन हैं।'
This man is shame for the entire elected representatives, he has become a repeat sexism offender, who doesn't have any respect for women.

Rather sacking him from party, @yadavakhilesh enjoys guttermouth's Thamasha!

Anyone voice against this from liberal gang??
बीजेपी सांसद शोभा करंदालजे ने कहा कि यह शख्स सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों पर धब्बे की तरह है। वो लगातार महिलाओं के प्रति अभद्र टिप्पणियां करता रहा है, सच तो ये है कि महिलाओं के लिए आजम खान के दिल में सम्मान का भाव नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वो आजम खान को बर्खास्त करने की जगह गंदी जुबां वाले शख्स का तमाशा देख रहे हैं। क्या कोई लिबरल गैंग से ऐसा सदस्य है जो आजम खान के खिलाफ कुछ बोले। 
अवलोकन करें:-
समझ में नहीं आता कि "आखिर किस कारण समाजवादी पार्टी आज़म खान को ढ़ो रही है? आखिर क्या मजबूरी है, जो मुलायम सिंह से लेकर अब अखिलेश यादव इस अमर्यादित आज़म खान को पार्टी में क्यों रखे हुए हैं? क्या समाजवादी पार्टी का महिलाओं को अपमानित करना ही उद्देश्य है? जब लोगों की प्रतिक्रिया होगी, फिर सिरफिरा आज़म खान इस्लाम को बीच में लाकर जहर फैलाएगा। आखिर कोई न कोई ऐसा राज है, जिस कारण मुलायमसिंह से लेकर अखिलेश यादव इस आदमी को पार्टी से निकालने की बजाए इसका बचाव करते आ रहे हैं?"
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आर.बी.एल.निगम लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान की एक टिप्पणी को लेकर हंगाम...

आजम खान को सात दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग की जरूरत है- पूर्व स्पीकर
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने गुरुवार को कहा कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान जैसे लोगों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम होना चाहिए ताकि वे सीख सकें कि संसद में कैसे व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी महिला या पुरुष की प्रतिष्ठा का मामला नहीं है, खान ने एक आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे पूरे संसद की गरिमा और परंपराओं को ठेस पहुंची। यह पूछे जाने पर कि खान के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए? उन्होंने कहा कि केवल कुछ दिनों के लिए संसद से निलंबन पर्याप्त नहीं होगा। उनके जैसे लोगों के लिए सात दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग की जरूरत है। ताकि उन्हें पता चल सके कि एक सांसद को सदन में कैसा व्यवहार करना चाहिए। महाजन ने कहा कि खान को खुद स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया है। अध्यक्ष से माफी मांगनी चाहिए। जब तक वह माफी नहीं मांगे तक उन्हें सदन में बोलने नहीं देना चाहिए।

आजम खान खुद सोचें, सांसद कहलाने के योग्य है या नहीं?
पूर्व स्पीकर ने कहा कि संसद के सदस्य बनने के बाद सांसद एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। अगर यह व्यक्ति (खान) यह समझने में असमर्थ है, तो उसे खुद के लिए सोचना होगा कि क्या वह सांसद कहलाने के योग्य है या नहीं?' महाजन ने कहा, 'आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद, खान ने चेयर (रमा देवी) को अपनी बहन कहना शुरू कर दिया। लेकिन शेर-ओ-शायरी (उर्दू कविता) जिसे संसद में सुनाया, एक बहन को संबोधित नहीं किया।'उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर भी निराशा व्यक्त की। 'मुझे समझ नहीं आया कि अखिलेश को क्या हो गया है। वह एक राज्य के मुख्यमंत्री थे, वह खान के पक्ष में क्यों खड़े हैं?'

आजम खान को पागलखाने या जेल भेजना चाहिए
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि सपा नेता आजम को संसद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया वह आजम की अपमानजनक बयान की निंदा करती हैं। उन्हें संसद के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। दिल्ली महिला आयोग की चीफ स्वाति मालीवाल ने भी खान आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें इस असभ्य बयान के लिए जेल भेज देना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया 'आजम खां को शर्म आनी चाहिए। पीठासीन सभापति की कुर्सी पर बैठीं सांसद के खिलाफ ऐसा असभ्य बयान ऐसे नेताओं की गिरफ्तारी के लिए केंद्र सरकार कब कानून बनाएगा? इस व्यक्ति को पहले पागलखाने और फिर जेल भेजना चाहिए।'

आश्चर्य तब हुआ जब सपा सांसद, पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पार्टी के सांसद की निंदा करने के बजाय कहा कि मैं नहीं मानता आजम खान जी ने अध्यक्ष (रमा देवी) जी अनादर किया है। ये (बीजेपी सांसद) लोग इतने असभ्य हैं, कौन हैं जो उंगलियां उठाते हैं?

आखिर बद्तमीज आज़म खान को समाजवादी पार्टी क्यों पाले हुए है?


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लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान की एक टिप्पणी को लेकर हंगामा मच गया। सपा सांसद आजम खान ने भाजपा सांसद रमा देवी के खिलाफ विवादित बयान दे दिया, जिस पर रमा देवी सहित संसद के सदस्यों ने आपत्ति जताई आजम खान ने स्पीकर की चेयर पर बैठीं रमा देवी से कहा कि 'मैं आपको इतना देखना चाहता हूं कि आप कहें की नजरें हटा लो मैं आपकी आंखों में आंखें देख कर बात करना चाहता हूं आप इतनी प्यारी हैं' बिहार के शिवहर से सांसद रमा देवी ने उस वक्त स्पीकर की कुर्सी पर बैठी हुई थीं 
वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि यह भाषा असंसदीय है. आपको मर्यादित होकर अपनी बात रखनी चाहिए. उन्होंने आजम से माफी मांगने को कहा इसके बाद हंगामा होने पर आजम खान रमा देवी को बहन-बहन कहने लगे। क्या बद्तमीज़ आज़म खान को बहन का भावार्थ मालूम है? क्या आज़म खान अपनी बहन को ऐसे शब्द बोलने की हिम्मत कर सकते हैं? हैरानी होती है, ऐसे बद्तमीज आदमी को वोट देने वालों पर कि जो आदमी नारी जाति का सम्मान नहीं कर सकता, उसे नेता बने रहने का अधिकार भी नहीं। 
हालांकि बाद में आजम खान की इस बात को सदन के रिकॉर्ड से हटा दिया गया इसके बाद आजम खान ने कहा कि अगर मैंने कोई भी आपत्तिजनक शब्द बोला है तो मैं अभी इसी वक्त इस्तीफा देता हूं इसके बाद आजम खान लोकसभा से निकलकर चले गए वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा, 'मुझे नहीं लगता, आज़म खान जी का अध्यक्ष (रमा देवी) का असम्मान करने का इरादा था... ये लोग (BJP सांसद) बेहद अशिष्ट हैं, तो वे अंगुली उठाने वाले कौन होते हैं'
आजम खान का विवादों से पुराना नाता रहा है इससे पहले कई बार उन्होंने विवादित बयान दिया है। भारत माता को डायन कहने वाले भी यही मुस्लिम सांसद। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जया प्रदा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी बता दें कि आजम खान ने एक चुनावी रैली के दौरान रामपुर से बीजेपी की उम्मीदवार जया प्रदा पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुझे तो यह भी पता है कि वह तो अंदर अंडरवीयर भी खाकी का है पहनती है उन्होंने  रैली के दौरान जया प्रदा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिसको हम ऊंगली पकड़कर रामपुर लाए, आपने 10 साल जिससे अपना प्रतिनिधित्व कराया...उसकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है 
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समझ में नहीं आता कि "आखिर किस कारण समाजवादी पार्टी आज़म खान को ढ़ो रही है? आखिर क्या मजबूरी है, जो मुलायम सिंह से लेकर अब अखिलेश यादव इस अमर्यादित आज़म खान को पार्टी में क्यों रखे हुए हैं? क्या समाजवादी पार्टी का महिलाओं को अपमानित करना ही उद्देश्य है? जब लोगों की प्रतिक्रिया होगी, फिर सिरफिरा आज़म खान इस्लाम को बीच में लाकर जहर फैलाएगा। आखिर कोई न कोई ऐसा राज है, जिस कारण मुलायमसिंह से लेकर अखिलेश यादव इस आदमी को पार्टी से निकालने की बजाए इसका बचाव करते आ रहे हैं?" 
विवादित बयान को लेकर आज़म ख़ान के खिलाफ़ FIR दर्ज

संसद में शोर के बीच क्यों दिखा सन्नाटा?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
लोकतंत्र का मंदिर, मस्जिद, गुरद्वारा और चर्च कही जाती है संसद। संविधान इसकी आत्मा कहलाती है। पुजारी, मौलाना, ग्रंथी और पादरी कहलाते हैं सांसद। इन्हीं सांसदों की आवाज़ को हम जनता की आवाज़ कहते हैं। यह मान लेते हैं कि सांसद के रूप में मंदिर का पुजारी जो कवायद कर रहा है वही पूजा है। इसी पूजा में आस्था होती है भक्तों की। जी हां, वही भक्त जिन्होंने मतदाता बनकर इन सांसदों को लोकतंत्र के मंदिर में भेजा है।
पंडित, मौलाना, ग्रंथी और पादरी के तौर पर नियुक्ति की शपथ लेते हुए ये सांसद अचानक ही कुछ भूलने लग गये। बोलना था कुछ, कुछ और बोलने लग गये। प्रज्ञा सिंह ठाकुर अपना नाम ही गलत पढ़ गयीं। गलत को सही बताकर गलत कर गयीं। रिकॉर्ड चेक कराया गया, तो इस बात का खुलासा हुआ। राहुल गाँधी शपथ के बाद हस्ताक्षर करना ही भूल गए। ऐसा लगा कि लोकतंत्र के मंदिर में सच्चाई का 'राम नाम सत्य' करने की ठान ली गयी थी। जैसे-जैसे 'धर्म' का जयघोष हो रहा था, अधर्म की अग्नि धधकने लगी थी। जिन्ना की तस्वीर को पाकिस्तान भिजवाने की रट लगाते रहे अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम की देशभक्ति शपथ के वक्त जाग उठी- भारत माता की जय, जय श्री राम, वंदेमातरम् के नारे फूटने लगे।

समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान ने 'वंदे मातरम' कहने से इनकार कर दिया, उन्होंने इसे 'इस्लाम के खिलाफ' करार दिया है। उत्तर प्रदेश के संभल से चुनाव जीतने वाले शफीकुर्रहमान ने शपथ लेने के बाद कहा, 'जहां तक वंदे मातरम का ताल्लुक है, यह इस्लाम के खिलाफ है और हम इसे नहीं मान सकते'
सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी रहे, जिन्होंने भाजपा के 'जय श्रीराम' व 'वंदे मातरम्' के नारों के बीच जून 18 को 17वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली
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आर.बी.एल.निगम , वरिष्ठ पत्रकार लोकसभा में जून 18 को सांसद पद की शपथ लेते वक्त समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान न....

जो असदुद्दीन ओवैसी कह रहे थे कि इस देश में मुसलमान किराएदार नहीं है, उन्हें देखते ही जय श्री राम का ऐसा शोर उठा मानो पंडित मत्रोच्चार कर रहे हों। ओवैसी ने दोनों हाथ उठाकर 'मंत्रोच्चार' जारी रखने को कहते रहे। मगर, जल्द ही संविधान की रस्मी शपथ लेकर बोलते सुने गये- जय भीम, जय मीम, अल्ला-हू-अकबर, जय हिन्द। यह अलग किस्म की आयतें रहीं। पश्चिम बंगाल से चुनकर आए सांसदों ने जय श्री राम के नारे लगाए, तो कई ऐसे भी रहे जिन्होंने साथ में मां दुर्गा और मां काली की जय भी जोड़ दिया। एक्टर रविकिशन ने 'हर हर महादेव' का नारा बुलन्द किया। ईश्वर की शपथ लेकर संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने का संकल्प अचानक संविधान के लिए ली गयी शपथ तोड़ते हुए अपने-अपने ईश्वर के प्रति कथित सच्ची श्रद्धा और कथित निष्ठा रखने के संकल्प में बदल गया। अपने-अपने ईश्वर हो गये। उन ईश्वरों के लिए नारे भी अपने-अपने और एक-दूसरे से अलग थे। हर नारा दूसरे नारे को दबाता दिख रहा था। हर ईश्वर का भक्त दूसरे ईश्वर के भक्तों को नीचा दिखा रहा था। ऐसा करते हुए सभी अपने-अपने ईश्वर को श्रेष्ठ बताते दिख रहे थे।
लेकिन जय श्रीराम के नारों से संसद को गरमाने वाले विवादित बनाए गए अयोध्या, काशी और मथुरा को हल करने के लिए कोर्ट की तरफ देखते हैं, क्या ये सभी सांसद इन धार्मिक स्थलों को विवादित बनाने वाले नेताओं, इतिहासकारों और पार्टियों पर ठोस कार्यवाही करने के लिए कोर्ट जायेंगे? क्या जय श्रीराम नारे को लॉलीपॉप की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं?