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आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ने पर अरशद मदनी को इमाम डॉ उमर अहमद इलियासी की फटकार

                                                                मौलाना अरशद मदनी
जिस तरह जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली ब्लास्ट में पकडे जा रहे इस्लामिक आतंकवादियों को cover fire देते इस्लाम से जोड़ने पर सरकार को समय की नजाकत को देखते हुए आतंकवादियों को cover fire देने वालों की भी जाँच करनी चाहिए, चाहे जमीयत ही क्यों न हो। किसी भी शोभा यात्रा और हिन्दू त्यौहारों पर पत्थरबाज़ी करने वालों को भी हलके में नहीं लेना चाहिए। ऐसे ही लोग आतंकवादियों के स्लीपर सेल होते हैं जिनके बलबूते आतंकवादी और दंगाई देश का माहौल ख़राब कर बेगुनाहों की जानों से खिलवाड़ करते हैं। इतना ही नहीं, निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और आतंकवादियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर बार एसोसिएशन को भी इस गंभीर मुद्दे पर सख्ती से पेश आना होगा। वकीलों को रोजी-रोटी के लिए और भी केस मिल जाएंगे। देश की सुरक्षा का सवाल है।       
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भारत में मुसलमानों की स्थिति की तुलना अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों के मुसलमानों से की थी। अब उनके इसी बयान पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइज़ेशन के चीफ इमाम डॉ उमर अहमद इलियासी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही यह भी खुलासा किया कि उन्होंने पाकिस्तान के चीफ इमाम को एक स्पष्ट फतवा भेजा है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी आतंकी संगठन को पैगंबर मोहम्मद के नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति न दी जाए।
मदनी जवाब दे कि क्या आतंकवादी इस्लाम का प्रचार प्रसार कर रहे थे? हर अपराध को इस्लाम से जोड़ victim card खेलते शर्म करो।

     
डॉ इलियासी को और दूसरे इमामों, मौलानाओं, मौलवियों और इस्लामिक विद्वानों को लेकर मस्जिदों से लेकर सड़क तक मदनी जैसों के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। बात-बात पर दंगाइयों और आतंकवादियों पर कानूनी कार्यवाही होने पर उसे इस्लाम से जोड़ना कौनसी इंसानियत है? क्यों नहीं दिल्ली ब्लास्ट में पकडे जाने वाले आतंकवादियों के परिवार का बहिष्कार करते? सरकार पर दबाव डाल इनको मिलने वाली सरकारी सुविधाएं और बैंक खातों की जाँच करने के लिए  भी दबाव डालना चाहिए।       

इलियासी ने न केवल इस बयान को देश का माहौल खराब करने वाला बताया। इलियासी का कहना है कि मदनी की टिप्पणी से देश में डर और अराजकता फैल सकती है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल: गलत पक्ष का साथ क्यों?

इलियासी ने आरोप लगाया कि अरशद मदनी आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर गलत पक्ष का साथ दे रहे हैं। उन्होंने अल फलाह यूनिवर्सिटी के संदर्भ का ज़िक्र करते हुए कहा कि लाल किले पर धमाके की साजिश में जुड़े तीन जाने-माने लोगों की गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मामला है, ऐसे में जमीयत उलेमा-ए-हिंद को आतंकवाद का विरोध करना चाहिए था।

इलियासी ने कहा कि अगर गिरफ्तार लोग मुस्लिम हैं, तो भी आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना अनिवार्य है, क्योंकि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने माँग की कि मदनी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात स्पष्ट करें ताकि जनता तक सही संदेश पहुॅंचे और समाज में एकता बनी रहे।

भारत के मुस्लिमों की स्थिति बेहतर, मोदी सरकार में नए अवसर

इमाम इलियासी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुस्लिमों को अधिक अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सिविल सेवाओं में मुस्लिम युवाओं की संख्या बढ़ी है और केंद्र सरकार की योजनाओं से मुस्लिमों को उल्लेखनीय लाभ मिला है।

उनका कहना है कि भारत में मुस्लिमों को हमेशा सम्मान मिला है और वे सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुँचे हैं, इसलिए उनकी तुलना किसी पश्चिमी देश के मुस्लिम समाज से करना गलत और अनावश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है, सभी को इसमें साथ देना चाहिए।

देशहित में बयान वापस लें: इलियासी की अपील

इलियासी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अरशद मदनी अपना बयान वापस नहीं लेते या स्पष्ट नहीं करते, तो इससे देश में अविश्वास और तनाव का वातावरण पैदा हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र और समाज की शांति सर्वोपरि है और हर जिम्मेदार नेतृत्व को आतंकवाद व सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।

‘यही मौलाना शिक्षक भर्ती पर डालते थे दबाव…’ CM हिमंता बोले- असम को नहीं बनने देंगे इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़: मौलाना अरशद मदनी ने किया कांग्रेस पर प्रेशर डाल टिकट कटाने का दावा

          हिमंता बिस्वा सरमा ने मौलाना अरशद मदनी को दिया करारा जवाब (फोटो साभार: India Today)
असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के चीफ मौलाना अरशद मदनी ने विवादित टिप्पणी की। मौलाना मदनी ने दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर हिमंता बिस्वा सरमा को कांग्रेस से चुनाव टिकट ना देने की माँग की थी। मदनी ने कहा कि सरमा RSS की मानसिकता से प्रभावित हैं और अब असम में आग लगा रहे हैं।

अरशद मदानी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था कि कांग्रेस से हिमंता बिस्वा सरमा को टिकट न दें क्योंकि उनमें RSS की मानसिकता है। अब वही हिमंता बिस्वा सरमा पूरे असम को आग में झोंक रहे हैं।”

मदनी के बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने मदनी के दावों पर करारा जवाब देते हुए कहा, “मौलाना मदनी ने खुद माना है कि असम में कांग्रेस उम्मीदवार के चयन में उनकी भूमिका थी। जब मैं कांग्रेस में था तब यही मौलाना शिक्षक भर्ती में मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश करते थे। बीजेपी सरकार ने आते ही उनकी यह ‘दुकान’ ताला लगाकर बंद कर दी।।”

मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, “मौलाना मदनी, सैयदा हमीद और हर्ष मंदर जैसे लोगों का एक ही उद्देश्य है। असम को एक कट्टर इस्लामवादी प्रदेश में बदलना। लेकिन भाजपा के रहते यह कभी संभव नहीं होगा।” सीएम ने आगे कहा, “बीजेपी लगातार असम की सत्ता पर काबिज है। असम में बीजेपी काफी मजबूत है। वो हमारे खिलाफ अब कुछ नहीं कर पाएँगे। भले ही वो लगातार कुछ न कुछ करने की कोशिश जरूर करते रहेंगे।

सीएम ने कहा, “हमारा अगला चरण NRC है। घुसपैठियों की बेदखली जारी रहेगी, इसके अलावा हमारे एजेंडे में और भी बहुत कुछ है। हम अपना काम जारी रखेंगे। हमारे पास मौलाना अरशद मदनी के जैसे विचारों वाले नेताओं के खिलाफ एक लंबा एजेंडा है। असम को कट्टरपंथी इस्लामी राज्य बनाने के विचार के खिलाफ काम करेंगे।”

मौलाना मदनी के बयान पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने मदनी की टिप्पणी का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा, “क्या अब मौलवी तय करेंगे कि कांग्रेस का टिकट किसे मिलेगा?”

अमित मालवीय ने आगे कहा, “यह बात तेजी से स्पष्ट होती जा रही है कि कांग्रेस सभ्यता संबंधी बहस में गलत पक्ष पर खड़ी है।”

मुस्लिमों का बदला, जय फिलिस्तीन, कश्मीर में 90 वाला नरसंहार की धमकी… Muslim will be Muslim, जिस ‘मजहबी वफादारी’ से आगाह कर गए थे अंबेडकर वह खतरा टला नहीं

हिन्दुओं को मुस्लिम सियासत जिस ओर जा रही है, उसे गंभीरता से लेना पड़ेगा। तुम इस्लाम का सामना करने में असमर्थ हो यही अकाट्य सत्य है।
हिन्दू व्यक्तिवाद, जातिवाद, समाजवाद, राष्ट्रवाद में उलझा हुआ है और मुस्लिम कट्टरपंथी 1400 वर्षो से इस्लामिक संघर्ष अर्थात् जिहाद करते आ रहे है। लेकिन कोई हिन्दू संगठन मुस्लिमों में जातपात को exploit करने में पूर्णरूप से असफल है। जिस दिन हिन्दू संगठनों ने ऐसा शुरू कर दिया मुस्लिम कट्टरपंथी ही नहीं, आरक्षण और जातपात पर सियासत करने वाले हिन्दू भी पीछे हटते नज़र आएंगे। 
जमीन जिहाद:- काफिर की धरती पर जाकर उनसे शरण मांगना धीरे धीरे जमीन को अपने कब्जे में करना।
जनसंख्या बढ़ोत्तरी जिहाद:- 9 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की मुस्लिम औरत और लड़की से बच्चे पैदा करवाने की भरपूर कोशिश करना।
लव जिहाद:- गैर मुसलमानो की बहन- बेटी को धीरे धीरे अपने प्यार के जाल में फसाना।
मतांतरण जिहाद:- गैर मुसलमानो की कमियां खोज कर उनसे इस्लाम कबूल करवाना।
व्यवसाय जिहाद:- हाथो के कारीगर और जमीन व्यवसाय पर मजबूती से पकड़ बनाना।
असूरवृति जिहाद:-  अपने समाज के भीतर खून खराब देखने की हिम्मत पैदा करना।
तबलीगी जिहाद:- गैर मुसलमानो को इस्लाम की दावत देना।
हाल के समय में कई चीजें ऐसी सामने आई हैं जो कि हिंदुओं के लिए काफी डराने वाली है। ये डर लगातार गहरा होता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ एक मुस्लिम सांसद कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार को खुलेआम खारिज करते हैं और धमकी देते हैं कि 370 हटा रहा तो वापस से पुराने हाल होंगे। दूसरे मुस्लिम नेता कहते हैं भाजपा को हराकर मुस्लिमों ने बीजेपी से बदला लिया है और तीसरे नेता संसद में खुलेआम जाकर ‘जय फिलीस्तीन’ के नारे बुलंद करता दिखते हैं। ऐसे लोगों के बीच देश के प्रधानमंत्री ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ देश को विकसित करने की सोच रहे हैं। सवाल है कि क्या सिर्फ प्रधानमंत्री के सोचने से ऐसा संभव हो पाएगा वो भी तब जब मुस्लिम सांसद और नेता इस प्रकार से खुलकर हिंदूविरोधी बयानबाजी करते हैं और बात सिर्फ मजहब की और मजहब के लोगों की करते हैं।

‘370 हटने से कश्मीरियों में गुस्सा, कभी भी भड़क सकते हैं’ : JKNC नेता रुहुल्लाह मेहदी

श्रीनगर से नवनिर्वाचित सांसद व जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के नेता रुहुल्लाह मेहदी ने खुलेआम भारत की सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा साइट द वायर पर बयान दिया। रुहुल्लाह मेहदी ने इस इंटरव्यू में कहा कि कश्मीरियों में आर्टिकल 370 हटाए जाने का गुस्सा है जो कि कभी फूट सकता है जैसा कि स्वतंत्रता के 40 साल बाद देखने को मिला था। आरफा खानुम शेरवानी को दिए इटरव्यू में रुहुल्ला मेहदी ने इस्लामी आतंक को धो पोंछने के लिए साथ इस मुद्दे पर बात की। साथ ही कहा कि मुस्लिमों को टारगेट करके मॉब लिंचिंग हो रही है, सिखों को खालिस्तानी कहा जा रहा है, ईसाइयों को धर्मांतरण का आरोप लगाकर सामाजिक कार्य करने से रोक रहे हैं।
दिलचस्प बात ये है कि अपने इंटरव्यू में मेहदी को हिंदुओ की आवाज उठानी जरूरी नहीं लगी। इसके अलावा रुहुल्लाह ने साफ-साफ कश्मीरी पंडितों के उस दर्द से खारिज कर दिया जिसे वो लोग पिछले 34 साल से सीने में दबाए हुए थे और कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई हकीकत को देख रो पड़े। जेकेएनसी नेता ने तो कहा कि द कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई चीजें सच नहीं हैं। मेहदी एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथ को मानने से इनकार करते दिखे है तो दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से लड़ने के लिए मुस्लिमों के साथ खड़े होने को कहते दिखे।

मुस्लिमों ने वोट देकर भाजपा को दिया जवाब: मौलाना मदनी

इसी तरह जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भी लोकसभा चुनावों के बाद ताजा बयान दिया है। चुनावों के नतीजों पर मौलाना मदनी ने कहा कि लोगों ने नफरत और सांप्रदायिकता की राजनीति को खारिज कर दिया और इसका सारा श्रेय मुस्लिमों द्वारा बुद्धिमानी से किए गए मतदान को जाता है। अगर मतदाताओं ने समझदारी से वोट नहीं डाले होते तो नतीजे अलग हो सकते थे। ये मौलाना मदनी वहीं है जिन्हें तालिबान एक आतंकी संगठन नहीं लगता बल्कि उन्हें वो स्वतंत्रता सेनानी जैसा मानते हैं। मदनी ने एक बार इंटरव्यू में तालिबान का पक्ष लेते हुए कहा था कि अगर सिर्फ गुलामी के खिलाफ लड़ना आतंकवाद है तो इस हिसाब से तो महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना हजरत शेखुद्दीन भी आतंकवादी थे।

‘जय फिलीस्तीन’ के नारे

इनके अलावा हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को पिछले दिनों खुलेआम जय फिलिस्तीन के नारे लगाते सुना ही गया था। उन्होंने लोकसभा सदन में सांसद पद की शपथ उर्दू भाषा में ली थी। शपथ के बाद ओवैसी को “जय भीम-जय मीम” और “अल्लाहू अकबर” के नारों के साथ “जय फिलिस्तीन” कहते सुना गया था। जबकि देश का जो संविधान ओवैसी को सांसद बनने के लिए योग्य बनाता है उसी संविधान के अनुच्छेद 102, 103 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है।

कैसे होगा सबका-साथ सबका विकास?

तीनों नेताओं के ऐसे बयानों से स्पष्ट है कि ऐसे मुस्लिम नेता समाज में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देते हुए खुलेआम मजहब की राजनीति करते हैं और उनके समर्थक इसी आधार पर इन्हें अपना मसीहा मानते हैं जबकि दूसरी ओर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी सरकार में आने के बाद से लगातार जो देश के हर वर्ग के लिए काम करने में लगे हैं मगर उससे इनके समर्थकों का कोई सरोकार नहीं। वो भूल बैठे है कि पीएम मोदी ने ही सरकार बनने के बाद तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को राहत दिलवाई और इसके खिलाफ कानून बनाया। इसके अलावा घर-घर राशन बिजली-पानी बिन किसी भेदभाव के पहुँचाया… पीएम मोदी ने मुस्लिम समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने के लिए जो प्रयास किए उसके कारण कई बार उनके धुर समर्थक तक उनके ऊपर ‘तृप्तिकरण’ का आरोप लगाते दिखे। बावजूद इसके उन्होंने जैसे देश के बाकी समुदायों के लिए काम किया, वैसा मुस्लिमों के हित में करते दिखे ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा, स्कॉलरशिप और अन्य हर वो सुविधा मिले जो बाकी नागरिकों को मिलती है… लेकिन जब बात आई उन्हें समर्थन करने की तो मजहब परस्त लोगों को उनसे ज्यादा वो लोग विश्वसनीय लगे जो बातें ही सिर्फ अराजकता और हिजाब-बुर्का की करते हैं।

बाबासाहब अंबेडकर के क्या थे विचार

मालूम हो कि भले ही आज पीएम मोदी सरकार में इन नेताओं का और इनके समर्थकों का ऐसा चेहरा उभर कर सामने आ रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि दशकों पहले डॉक्टर भीम राव अंबेडकर खुद भी इनकी ऐसी प्रवृति के बारे में सबको बता चुके हैं। अंबेडकर के विचारों का एक संग्रह में पढ़ने को मिलता है- “इस्लाम में जिस भाईचारे की बात की गई है, वो केवल मुस्लिमों का मुस्लिमों के साथ भाईचारा है। इस्लामिक बिरादरी जिस भाईचारे की बात करता है, वो उसके भीतर तक ही सीमित है। जो भी इस बिरादरी से बाहर का है, उसके लिए इस्लाम में कुछ नहीं है- सिवाय अपमान और दुश्मनी के। इस्लाम के अंदर एक अन्य खामी ये है कि ये सामाजिक स्वशासन की ऐसी प्रणाली है, जो स्थानीय स्वशासन को छाँट कर चलता है। एक मुस्लिम कभी भी अपने उस वतन के प्रति वफादार नहीं रहता, जहाँ उसका निवास-स्थान है, बल्कि उसकी आस्था उसके मज़हब से रहती है। मुस्लिम ‘जहाँ मेरे साथ सबकुछ अच्छा है, वो मेरा देश है’ वाली अवधारणा पर विश्वास करें, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता।”
इसके अलावा बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि इस्लाम कभी भी किसी भी अपने नुमाइंदे को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि भारत उसकी मातृभमि है। बाबासाहब के अनुसार, इस्लाम कभी भी अपने नुमाइंदो को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि हिन्दू उनके स्वजन हैं, उनके साथी हैं। बाबा साहब ने इस मामले पर विचार प्रकट करते हुए ये भी कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना देश मानेगा, जहाँ इस्लाम का राज चलता हो…आज के समय में बाबा साहब की मुस्लिमों को लेकर कही गई ये सारी बात सत्य साबित होती दिखती हैं। बाबा साहब ने जैसा कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना मानेंगे जहाँ इस्लाम का राज चले, ठीक वैसे ही मुस्लिम आज के समय में उसी नेता पर विश्वास जताते हैं जो सिर्फ इस्लाम की बात करे। उनके लिए विकास का अर्थ देश का विकास नहीं बल्कि मजहबी विकास है। वहीं शिक्षा का अर्थ दीनी तालीम का प्रसार है।