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जेल में मिल रही जान से मारने की धमकी, पीने को साफ़ पानी तक नहीं: बंगाल पुलिस की कैद में बंद शर्मिष्ठा ने माँगी सुरक्षा

                  शर्मिष्ठा को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था (फोटो साभार: Deccan Herald)
मुस्लिमों की मजहबी भावनाएँ आहत करने के नाम पर गिरफ्तार इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को जेल के भीतर धमकियाँ मिल रही हैं। जेल के भीतर ही लोग उसकी जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह बातें शर्मिष्ठा ने एक याचिका में कहीं हैं। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिष्ठा की तरफ से अलीपुर (कोलकाता) की जिला अदालत में दायर एक याचिका में समस्याएँ बताई गईं थी। शर्मिष्ठा ने इस याचिका में कहा था कि उन्हें जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। शर्मिष्ठा ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है।

शर्मिष्ठा को अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि इस महिला सुधार गृह में ना सही से साफ़-सफाई होती है ना ही यहाँ पीने का साफ़ पानी है। शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि उन्हें बीमारियाँ भी हैं और इस महिला सुधार गृह में उन्हें कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है।

शर्मिष्ठा ने अलीपुर कोर्ट में याचिका दायर खुद को सुरक्षा दिए जाने की माँग की है। अलीपुर कोर्ट में इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस बीच शर्मिष्ठा की जमानत याचिका को सोमवार (3 जून, 2025) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुना। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम तौर पर जमानत देने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वीडियो ने लोगों की भावनाएँ आहत की हैं। हाई कोर्ट ने राहत माँगने पर यह भी कहा कि अगर शर्मिष्ठा को जेल में दो दिन रहना पड़ेगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने इस दौरान बोलने की आजादी को लेकर टिप्पणियाँ की।

वहीं इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने शर्मिष्ठा को राहत देने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि उन्हें यह वीडियो बनाने से पहले सोचना चाहिए था। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी प्रयास किया कि यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में अब छुट्टियों के बाद सुना जाए। इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार (5 जून, 2025) को है।

शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई, 2025) को गिरफ्तार किया था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने इससे पहले अभियान चलाया था।

शर्मिष्ठा पनोली मामले में NHRC ने पश्चिम बंगाल पुलिस से माँगा जवाब, कहा- सुरक्षा का रखो पूरा ध्यान: जेल में मिल रहीं थीं रेप-हत्या की धमकियाँ

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पानोली की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि शर्मिष्ठा को गिरफ्तार होने के बाद से ‘बलात्कार और जान से मारने की कई धमकियाँ’ मिल रही हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

शर्मिष्ठा को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े उनके कुछ कथित विवादित पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया था। NHRC को एक शिकायत मिली है जिसमें आरोप है कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (30 मई 2025) को हरियाणा के गुरुग्राम से शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करते समय सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। अब शर्मिष्ठा 13 जून 2025 तक न्यायिक हिरासत में हैं।

अवलोकन करें:-

जैसे ही माँ कामाख्या पर गंदी टिप्पणी करने वाले जेहादी वजाहत खान को असम ने माँगा, वैसे ही बंगाल प
जैसे ही माँ कामाख्या पर गंदी टिप्पणी करने वाले जेहादी वजाहत खान को असम ने माँगा, वैसे ही बंगाल प
 

NHRC ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और DGP से शर्मिष्ठा की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही, हरियाणा सरकार से भी पूछा गया है कि क्या गिरफ्तारी के दौरान सभी नियम-कानूनों का पालन किया गया था। इन जवाबों के आधार पर ही NHRC आगे की कार्रवाई तय करेगा।

बिहार : शराब मुक्त राज्य में शराब माफिया कौन है? गरीबों के पास शराब के लिए पैसे कहाँ से आए?

बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब बनाने का काम जारी है और उसे पीकर मरने वालों का आँकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबके बीच जहरीली शराब पीकर मरे लोगों को मुआवजे की माँग पर राजनीति तेज हो गई है। जदयू के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने मृतकों की तुलना बम बनाने वालों से की है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार मौत के मामलों की जाँच करेगी।

आज देश की राजनीति का स्तर इतना गिर गया है, जहां तर्कसंगत विरोध करना अपमान समझा जा है। बिहार में शराब पीकर मरने वालों के परिवार वालों को मुआफजा देने की मांग करने की बजाए, सरकार को शराब मुक्त राज्य में शराब बनाने, बेचने एवं इस माफिया को संरक्षण देने वालों को फांसी की मांग होनी चाहिए। इस बात की भी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए यह शराब क्या उन्हें मुफ्त में मिली थी या खरीद कर पी थी, समाचार है कि मरने वाले के परिवारों के पास अंतिम संस्कार करने के भी पैसे नहीं, फिर शराब पीने के लिए कहाँ से आए? अगर खरीदकर पी थी, फिर उसके पैसे किसने दिए थे? इतना ही नहीं, इस कांड में सम्मिलित सरकारी कर्मचारी अथवा अधिकारियों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा जैसे पेंशन आदि तुरंत छीन लेनी चाहिए। गुजरात में भी चुनाव से पूर्व शराब कांड हो चुका है।    

बिहार में जहरीली शराब पीकर लगातार हो रही मौतों का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने जहरीली शराब से हुई मौतों की जाँच के लिए एक टीम बिहार भेजने का निर्णय लिया है। आयोग ने कहा कि इसके सदस्य की अध्यक्षता वाली एक जाँच टीम बनाई जाएगी।

उधर, JDU नेता उपेंद्र कुशवाहा ने जहरीली शराब पीकर मरने वाले लोगों की तुलना बम बनाने वालों से करते हुए कहा कि बम बनाते वक्त विस्फोट में किसी की मौत हो तो सरकार मुआवज़ा देती है? उन्होंने मृतकों को मुआवजे देने की विपक्ष की माँग को सिरे से खारिज कर दिया।

बिहार में जहरीली शराब पीने से मृतकों की संख्या बढ़ रही है। इसुआपुर से शुरू शुरू हुआ मौत का सिलसिला मशरख, मढ़ौरा, तरैया, अमनौर, बनियापुर तक जा पहुँचा। अब तक 72 लोगों की मौत की बात सामने आई है। वहीं, कई लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि जहरीली शराब पीने के कारण मृतकों के शरीर में फॉलिक एसिड बढ़ गई है, जिसके कारण शरीर कम अंग काम करना बंद कर दे रहे हैं। मौत से पहले सभी मृतकों के ब्लड प्रेशर में लगातार बदलाव भी देखने को मिल रहा है। मरीजों में बेचैनी, उल्टी, पेट दर्द, साँस लेने में परेशानी, आँखों से धुँधला दिखाई देने जैसे कई तरह की समस्याएँ देखने को मिल रही हैं।

उधर लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि जहरीली शराब पीने से लगभग 200 मौतें हुई हैं। सरकार बिना पोस्टमार्टम के मृतकों का अंतिम संस्कार करा रही है और मृतकों की संख्या छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वे राज्यपाल से मिलकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग करेंगे।

मृतकों को लेकर राज्य की नीतीश सरकार की छिछालेदर होने के बाद सारण के SP ने इसुआपुर थाना के अध्यक्ष संजय कुमार राम, चौकीदार और दफदार को निलंबित कर अपने काम की इतिश्री कर ली है। पुलिस ऑपरेशन क्लीन के तहत छापेमारी कर शराब के कारोबार से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी कर रही है। हालाँकि, इसमें बड़ी मछलियाँ पहले भी बचती रही हैं और आशंका है कि इस बार भी बच जाएँगी।

जब विधानसभा में विपक्ष ने जहरीली शराब पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को घेरना शुरू किया तो वे बिफर उठे थे। कुर्सी और सदन की मर्यादा को तार-तार करते हुए वे विपक्ष पर चिल्लाने लगे थे। उन्होंने कहा था कि जो नकली शराब पीएगा, वो मरेगा ही।

नीतीश कुमार ने राज्य में शराब की तस्करी और अवैध निर्माण को रोकने में लाचार रहने के बावजूद मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया। दरअसल, मुआवजे की माँग को नकार कर नीतीश कुमार जहरीली शराब मामले में सरकार की लापरवाही को नजरअंदाज करना चाहते हैं।

राजस्थान : लड़कियों की हो रही बिक्री, मना करने पर उनकी माँओं का बलात्कार, NHRC का गहलोत सरकार को नोटिस

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट
राजस्थान में महिलाओं की दुर्दशा पर हाथरस आदि पर हंगामा करने वाले कहाँ है? क्या उनके घरों में मातम मचा है, जो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है? कहाँ है, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव, अरविन्द केजरीवाल, स्वरा भास्कर आदि? क्या राजस्थान में कांग्रेस की आड़ में मुग़ल शासन चल रहा है? राजस्थान में कांग्रेस शासित अशोक गहलोत की सरकार महिलाओं को कितना नीचे गिराएगी? क्या राजस्थान में महिलाओं का कोई आत्मसम्मान नहीं? अगर किस भाजपा शासित राज्य में ऐसा हो रहा होता, ये जितने भी ठोंगी नेता अब तक आसमान सिर पर उठा चुके होते, देश में हाहाकार मचवा देते, लेकिन कांग्रेस शासित राज्य में लड़कियों की बिक्री और मना करने पर उनकी माताओं का बलात्कार होने पर किसी की आवाज़ नहीं निकल रही? कांग्रेस में महिला वर्ग भी चुप है, क्यों?  

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान सरकार को नोटिस भेजा है। यह नोटिस 8 से 18 साल की लड़कियों की नीलामी को लेकर भेजा गया है। आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

मीडिया रिपोर्ट से राजस्थान में स्टाम्प पेपर पर लड़कियों को बेचे जाने के मामले का खुलासा हुआ था। इसमें बताया गया था कि मना करने पर लड़कियों की माँ के साथ रेप किया जाता है। इसके पीछे जातीय पंचायतों की भूमिका बताई गई थी। गुलामी में लड़कियों का शारीरिक शोषण होता है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। यौन उत्पीड़न होता है।

इसी रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है मीडिया रिपोर्ट में जिस घिनौनी प्रथा का दावा किया गया है, वह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस संबंध में की गई कार्रवाई को लेकर राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है। पुलिस महानिदेशक से इसमें शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू कर विस्तार से रिपोर्ट देने को कहा गया है।

पंचायत बना रही लड़कियों को गुलाम 

लड़कियों की ब्रिकी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट राजस्थान के भीलवाड़ा से संबंधित है। इसमें पीड़ितों के हवाले से बताया गया है कि लड़कियों को नीलाम कर देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों तक भेजा जा रहा है। इसमें बताया गया है कि भीलवाड़ा की कई बस्तियों में दो पक्षों के बीच विवाद या कर्ज के मामलों का निपटारा पुलिस की जगह जातीय पंच कर रहे हैं। वे लड़कियों की नीलामी करवा रहे हैं। इनकार करने पर उनकी माताओं से बर्बरता की जाती है।

रिपोर्ट में कई मामलों का जिक्र किया गया है। ऐसे ही एक मामले के बारे में बताया गया है कि 15 लाख रुपए के भुगतान के बदले जातीय पंचायत ने एक आदमी को पहले अपनी बहन को बेचने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसे 12 साल की बेटी को बेचने को मजबूर किया गया। इस तरह एक-एक कर उस व्यक्ति की सभी पाँच बेटियाँ गुलाम बन गई। बावजूद उस व्यक्ति का कर्ज खत्म नहीं हुआ।

बीजेपी ने गहलोत सरकार को घेरा

लड़कियों की बिक्री का मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है, “कांग्रेस पार्टी का नारा है- लड़की हूँ लड़ सकती हूँ। लेकिन हकीकत राजस्थान में देखें, जहाँ बहन-बेटियों की खुलेआम नीलामी चल रही है। कांग्रेस के कुशासन से तंग आकर अब राजस्थान की बेटियाँ कह रही हैं- ‘लड़की हूँ बच सकती हूँ, तभी तो राजस्थान में रह सकती हूँ।”