साभार: NDTV तेलंगाना के वारंगल में विकास के नाम पर विनाश का एक खौफनाक मामला सामने आया है। प्रशासन ने एक स्कूल बनाने के लिए खानापुर में काकतीय काल के करीब 800 साल पुराने प्राचीन शिव मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। इस घटना के बाद इतिहासकारों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग ने केस दर्ज कर लिया है।
इतिहास पर चला दिया बुलडोजर
यह मंदिर महज पत्थर की दीवारें नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी की अनमोल विरासत थी। यह महान काकतीय राजा गणपतिदेव के शासनकाल का प्रतीक था। मंदिर परिसर में फरवरी 1231 ईस्वी का एक दुर्लभ शिलालेख भी था, जिसमें राजा को ‘महाराजाधिराज’ बताया गया था। प्रशासन की एक लापरवाही ने सदियों पुराने इस गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिला दिया।
MAHA-PAAP! 800-YEAR-OLD HINDU MANDIR BULLDOZED!
800-year-old Kakatiya-era Shiva Mandir has been bulldozed to build a Govt school in Warangal, Telangana.
District administration claims it was not protected and promises restoration, but historians slam the destruction of… pic.twitter.com/3bRHdowh5J
विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि वहां केवल ‘जर्जर अवशेष’ थे और वह जगह ‘संरक्षित स्मारक’ में दर्ज नहीं थी। हालाँकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 1965 में ही हेरिटेज विभाग ने इसे डॉक्युमेंट किया था। इस मामले में अधिवक्ता रामाराव ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत की है, जिसके बाद अधिकारियों पर ‘तेलंगाना हेरिटेज एक्ट’ की धारा 30 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की माँग की जा रही है।
बढ़ते विरोध के बाद सरकार के बदले सुर
धरोहर पर हुए इस हमले के बाद जब हिंदू संगठनों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने मोर्चा खोला, तो प्रशासन बैकफुट पर आ गया। वारंगल कलेक्टर और स्थानीय विधायक ने घटनास्थल का दौरा किया। भारी विरोध को देखते हुए अब सरकार ने आश्वासन दिया है कि उसी स्थान पर प्राचीन पारंपरिक शैली में मंदिर का दोबारा निर्माण कराया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जो ऐतिहासिक शिलालेख और प्राचीन अवशेष नष्ट हो गए, क्या उनकी भरपाई हो पाएगी?
BG रामकृष्णा (बाएँ) का अवार्ड हिजाब रोकने को लेकर रोक दिया गया है (चित्र साभार: Vijaya Karanataka, TOI & India Today) कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य के एक प्रिंसिपल को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने पर रोक लगा दी है। पहले उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया था, लेकिन प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI के विरोध के बाद इस पर रोक लगा दी गई। SDPI ने प्रिंसिपल के खिलाफ हिजाब पहनने से रोकने की बात कही है।
कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने मंगलवार(3 सितम्बर, 2024) को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य के दो प्रिंसिपल का नाम चुना गया था। इनमें से एक BG रामकृष्णा हैं। रामकृष्णा उडुपी के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। रामकृष्णा के अलावा एक और शिक्षक का नाम चुना गया था।
इन दोंनो को शिक्षक दिवस के दिन यह अवार्ड दिया जाना था। हालाँकि, कर्नाटक सरकार का यह फैसला कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI ने इसको लेकर विरोध जता दिया। SDPI ने तर्क दिया कि रामकृष्णा ने अपने कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोका था।
SDPI ने कहा कि जिस स्कूल में रामकृष्णा प्रिंसिपल हैं, वहाँ छात्राओं को हिजाब पहने के कारण कक्षा में नहीं घुसने दिया गया था, ऐसे में रामकृष्णा को यह अवार्ड नहीं दिया जाना चाहिए। SDPI के अलावा भी कई कथित एक्टिविस्टों ने इस पर बवाल मचाया।
दक्षिण कन्नड़ा के SDPI अध्यक्ष अनवर सादात ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कुंडापुर सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल रामकृष्ण ने मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने पर गेट से बाहर रखा और महीनों तक धूप में रखा। वह मुस्लिम विरोधी हैं और प्रोफ़ेसर होने के बाद भी साम्प्रदायिक हैं, ऐसे व्यक्ति को कॉन्ग्रेस सरकार अवार्ड दे रही है।”
ಹಿಜಾಬ್ ಧರಿಸಿದ ಕಾರಣಕ್ಕಾಗಿ ಮುಸ್ಲಿಂ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿನಿಯರನ್ನು ಗೇಟ್ನಿಂದ ಹೊರಗಟ್ಟಿ ತಿಂಗಳುಗಳ ಕಾಲ ಬಿಸಿಲಿನಲ್ಲಿ ನಿಲ್ಲಿಸಿದ, ಮುಸ್ಲಿಂ ದ್ವೇಷವನ್ನೇ ಉಸಿರಾಡುವ ಕುಂದಾಪುರ ಸರಕಾರಿ ಕಾಲೇಜಿನ ಪ್ರಾಂಶುಪಾಲರಾದ ರಾಮಕೃಷ್ಣ ರವರು ಕನಿಷ್ಠ ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕರಾಗಲೂ ಸಹ ನೈತಿಕತೆ ಇಲ್ಲದ ಕೋಮುವಾದಿ. ಇಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗೆ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಸರ್ಕಾರವು 1/2 pic.twitter.com/JkZVQqJMwa
SDPI के बवाल के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इस पर झुक गई। कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने BG रामकृष्णा को दिए जाने वाले अवार्ड को अभी के लिए रोक दिया है। शिक्षा विभाग ने इसके पीछे के कारण स्पष्ट नहीं किए हैं। उसने कहा है कि यह फैसला तकनीकी कारणों से लिया गया है।
कर्नाटक में मुस्लिम छात्राओं का क्लास में हिजाब पहनने की जिद को लेकर यह बवाल काफी लंबा चला था। 2022 में चालू हुआ यह बवाल 2023 तक जारी रहा था। इसकी शुरुआत एक कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहन कर कक्षा में बैठने से रोकने पर हुई थी। इसके बाद छात्राएँ अड़ गई थीं।
विवाद बढ़ने पर कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में ड्रेस लागू करने के नियम बनाए थे। इसमें कहा गया था कि हिजाब ड्रेस का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकता। इसके विरोध में हिजाब पक्ष हाई कोर्ट तक पहुँच गया था। हाई कोर्ट ने भी कर्नाटक सरकार के फैसले को सही बताया था।
राज्य में 2023 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने ऐलान किया था कि अब स्कूलों में हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं रहेगी। भाजपा ने इसे कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए उठाया गया कदम बताया था। अब इसी विवाद के जिन्न के बोतल से बाहर आने पर एक शिक्षक का अवार्ड रोक दिया गया है।
कहते हैं "भगवान ने गंजे को नाख़ून नहीं दिए, वरना पागलपन में अपना सिर जख्मी कर लेता'', ठीक वही हालत सिर्फ 99 सीट लाने वाली कांग्रेस का सामने आ रहा है। कांग्रेस और गठबंधन की हरकतों से याद आती है 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश में आपातकाल लगाकर प्रेस सेंसरशिप लागू कर दी थी, उसी इंदिरा के कदमों कांग्रेस और इसके समर्थक दलों ने चलना शुरू कर दिया है। ये तो बिल्ली भागों छीका टूट गया कि दुष्प्रचार की मेहरबानी से कांग्रेस की 99 सीटें आ गयीं, अन्यथा 30 भी नहीं आतीं। हाँ, अगर गलती से कांग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन सत्ता मेंआ गया होता, निश्चितरूप से देश में 1975 से 1977 वाला इंदिरा गाँधी युग वापस आ गया होता। अगर चुनाव आयोग गंभीरता से 'वोट के बदले नोट' पर कार्यवाही करे, कांग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन द्वारा जीती सीटों पर घोर संकट के घोर काले बादल छा जाएंगे। जिस तरह बैंकों में हर महीने खटाखट 8500 रूपए आने का लालच दिया था, उसी तरह कांग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन की सीटें खटाखट औंधे मुंह गिरनी शुरू हो जाएँगी। लालच में आकर वोट देने वाली जनता को अपनी इस खिनौनी हरकत पर शर्म आनी चाहिए, जो सच को जाने बिना वोट दे आते हैं।
जिस तरह सोशल मीडिया को कुचलने की कोशिश हो रही है, सोशल मीडिया अब कहीं अधिक उग्र हो रहा है। और जिस तरह EVM पर कीजड़ फेंकनी शुरू हो चुकी है, चुनाव आयोग कांग्रेस द्वारा हर महीने 8500 रूपए खटाखट पर जनता द्वारा दर्ज शिकायतों पर fast track court में केस दर्ज करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर चर्चित पत्रकारों में से एक अजीत भारती के खिलाफ कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में एफआईआर दर्ज हुई है। ये एफआईआर कांग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई है। बोपन्ना ने दावा किया है कि अजीत भारती ने राहुल गाँधी को लेकर झूठा दावा किया है कि राहुल गाँधी अयोध्या में राम मंदिर की जगह पर बाबरी मस्जिद बनाने की बात कह रहे हैं।
अजीत भारती के खिलाफ बेंगलुरु के हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये एफआईआर सेक्शन 153ए और आईपीसी की धारा 505(2) के तहत दर्ज कराई गई है। कांग्रेस से जुड़े शांतनु ने कहा कि ऐसे ही एफआईआर तेलंगाना समेत अन्य कई राज्यों में कराए जा रहे हैं।
#Breaking: An FIR has been registered against Ajeet Bharti in Bengaluru for spreading fake communal propaganda using the name of Rahul Gandhi Ji under sections 153A and 505 (2) of IPC 1860.
ध्यान देने वाली बात यह है कि फेक न्यूज फैक्ट्री ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर ने ही सबसे पहले अजीत भारती पर इस वीडियो को लेकर निशाना साधा। जुबैर नैरेटिव सेट करने के लिए क्लिपकटुए की भूमिका में हमेशा रहा है। उसने अजीत भारती के लंबे वीडियो से महज 40 सेकंड का वीडियो काटा और शेयर किया। इसमें जुबैर ने लिखा, “राहुल गाँधी ने अपने किसी भाषण में कब कहा कि राम मंदिर को हटाया जाएगा और वे बाबरी मस्जिद को वापस लाएँगे? वे बार-बार गलत सूचना फैलाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वे बीजेपी द्वारा संरक्षित हैं और विपक्ष उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।”
When did Rahul Gandhi say in any of his speeches that Ram Mandir will be removed and he would bring back Babri Masjid? They repeatedly spread disinformation because they know they are protected by BJP and the opposition will not take any action against them. pic.twitter.com/TzSgaVlONs
Let me remind you, it was former Congress leader Acharya Pramod who said that Rahul Gandhi in a meeting talked about forming a superpower commision that will overturn the Ram Mandir decision just like Rajiv Gandhi overturned the Shah Bano decision.pic.twitter.com/cGaiIMxCfv
कांग्रेसऔर इंडी गठबंधन की सरकारें लगातार पत्रकारों को प्रताड़ित करने की कोशिश करती रही हैं। पंजाब से लेकर तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक तक इंडी गठबंधन की सरकारों का यही रवैया है।
अमन चोपड़ा के खिलाफ राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार की कार्रवाई
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के रहते पत्रकारों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए। इसमें से एक मामला अमन चोपड़ा के खिलाफ दर्ज किया गया था। अमन चोपड़ा न्यूज18 इंडिया चैनल में पत्रकार हैं। उनसे ‘देश झुकने नहीं देंगे’ नामक शो प्रसारित करने और बाद में ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
तमिलनाडु में सोशल मीडिया एक्टिविस्ट के खिलाफ क्रैकडाउन
इंडी गठबंधन में कॉन्ग्रेस के बाद सबसे अहम पार्टी डीएमके द्वारा शाषित तमिलनाडु में पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट के खिलाफ लगातार कार्रवाई होती रही है। बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप का मामला काफी चर्चित रहा था। उनके खिलाफ एनएसए जैसे मामले में भी केस दर्द किया गया था। कई महीनों तक मनीष कश्यप को जेल में रहना पड़ा था। बाद में उन्हें कोर्ट ने सभी मामलों में बरी कर दिया था।
तमिलनाडु में यूट्यूबर पर ढाया गया जुल्म
तमिलनाडु के कोयम्बटूर स्थित जेल में YouTuber सुवुक्कु शंकर की पिटाई का मामला सामने आया था। उन्हें शनिवार (4 मई, 2024) को साइबर अपराध के मामले में तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके वकील गोपालकृष्ण ने बताया कि उनके मुवक्किल को कोयम्बटूर सेन्ट्रल जेल के कर्मचारियों ने पीटा। बताया जा रहा है कि न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद उनके दाएँ हाथ में फ्रैक्चर हुआ और उनके लिए सही इलाज तक की व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्हें थेनि से गिरफ्तार किया गया था और महिला कॉन्स्टेबलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला दर्ज किया गया था।
रेड पिक्स यूट्यूब के संपादक फेलिक्स गेराल्ड की दिल्ली से गिरफ्तारी
रेड पिक्स यूट्यूब के संपादक फेलिक्स गेराल्ड को नई दिल्ली में तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद नाम तमिलर काची (NTK) प्रमुख सीमन ने 11 मई 2024 को पूछा कि क्या तमिलनाडु अभी भी एक लोकतांत्रिक राज्य है या यह फासीवादी राज्य बन गया है। सीमन ने कहा कि गेराल्ड के खिलाफ मामला और ‘सवुक्कू’ शंकर पर थोपे गए झूठे मामले तुरंत वापस लिए जाने चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “जिस कार्यक्रम में शंकर ने आपत्तिजनक बयान दिए, उस कार्यक्रम के एंकर (फेलिक्स गेराल्ड) को गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है। गेस्ट द्वारा की गई टिप्पणी के लिए एंकर को गिरफ्तार करना अस्वीकार्य है। यह मीडिया की बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ख़त्म करने जैसा है।” उन्हीं के शो में थुवक्कू ने तमिलनाडु सरकार को घेरा था, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया था।
तजिंदर बग्गा को दिल्ली से गिरफ्तार करके ले गई थी पंजाब पुलिस
बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। पंजाब पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए दिल्ली में छापेमारी भी की थी। पंजाब पुलिस ने बग्गा के खिलाफ 2 बार कार्रवाई की। साल 2022 और 2023 में पंजाब पुलिस ने बग्गा को पकड़ने की कोशिश की और एक मामले में उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार करके पंजाब ले गई थी।
कर्नाटक में हिंदू मंदिरों से कर वसूलने वाला बिल पास (फोटो साभार: HerJindagi & ANI)
कर्नाटक सरकार ने हाल में ‘कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024’ पारित किया है। यह विधेयक सरकार को अधिकार देता है कि वह मंदिरों से टैक्स वसूल सकें।
कांग्रेस हिन्दू चोला ओढ़ हिन्दुओं का ही हनन करती रही है। इतिहास साक्षी है। कभी इस्लाम या ईसाई धर्म में हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं। ये वही कांग्रेस जो अपने यूपीए काल में हिन्दुओं के विरुद्ध Anti-Communal Violence Bill ये तो देवी-देवताओं का आशीर्वाद है, जो यह बिल पास नहीं हो पाया। अगर दुर्घटनावश यह बिल पास हो गया होता मुग़ल आक्रांताओं के जुल्मों से कहीं अधिक जुल्म हो रहा होता।
इस बिल के अनुसार अगर किसी हिंदू मंदिर का राजस्व 1 करोड़ है तो सरकार उनसे 10 फीसद टैक्स ले सकती है और जिनका राजस्व 1 करोड़ से कम है लेकिन 10 लाख रुपए से ज्यादा है तो उनसे सरकार 5 प्रतिशत कर ले सकती है।
The Karnataka Hindu Religious Charitable Institutions and Charitable Endowments (Amendment) Bill, 2024 https://t.co/BSshEPcVNS. In the constitution of the Board of Directors referred to in point 25 - it is mentioned that 'members may be appointed from both Hindu and https://t.co/bjteuh3Jlfpic.twitter.com/sbMTDJBF7N
इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश के भाजपा नेताओं ने इसका जमकर विरोध किया। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस सरकार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपनाकर अपना खाली खजाना भरना चाहती है।
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस सरकार राज्य में लगातार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपना रही है। अब उसकी हिंदू मंदिरों के राजस्व पर टेढ़ी नजर है। सरकार ने अपने खाली खजाने को भरने के लिए हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक पारित किया है। सरकार हिंदू मंदिरों से धन जुटाकर अपने दूसरे उद्देश्य पूरा करेगी।
ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಸರಣೀ ರೂಪದಲ್ಲಿ ಹಿಂದೂ ವಿರೋಧಿ ಧೋರಣೆ ಅನುಸರಿಸುತ್ತಿರುವ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಸರ್ಕಾರ ಇದೀಗ ತನ್ನ ಬರಿದಾಗಿರುವ ಬೊಕ್ಕಸ ತುಂಬಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಹಿಂದೂ ದೇವಾಲಯಗಳ ಆದಾಯದ ಮೇಲೂ ವಕ್ರ ದೃಷ್ಟಿ ಬೀರಿ ಹಿಂದೂ ಧಾರ್ಮಿಕ ಸಂಸ್ಥೆಗಳ ಮತ್ತು ಧರ್ಮಾದಾಯ ದತ್ತಿಗಳ ವಿಧೇಯಕವನ್ನು ಮಂಡಿಸಿ ಅಂಗೀಕಾರ ಪಡೆದು ಕೊಂಡಿದೆ.
विजयेंद्र ने कहा कि सरकार 1 करोड़ से अधिक कमाई वाले मंदिरों से आय का 10% टैक्स लेगी। भक्तों द्वारा भगवान को चढ़ाए गए धन का इस्तेमाल मंदिर और भक्तों की सुविधा के लिए होना चाहिए। यदि इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किया जाता है, तो यह लोगों के साथ हिंसा और धोखाधड़ी होगी। येदियुरप्पा ने आश्चर्य जताया कि कर्नाटक सरकार केवल हिंदू मंदिरों को ही क्यों निशाना बना रही है। अन्य धर्मों को क्यों नहीं?
बीजेपी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विजयेंद्र पर पलटवार किया। उन्होंने भाजपा पर धर्म को राजनीति में लाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा- “हिंदुत्व की सच्ची समर्थक तो कॉन्ग्रेस है। लेकिन भाजपा हमेशा कॉन्ग्रेस को हिंदू विरोधी दिखाकर लाभ लेती है। पर, हिंदू धर्म के सच्चे समर्थक हम हैं, क्योंकि वर्षों से कांग्रेस ने मंदिर और हिंदू हितों की रक्षा की है।”
राजस्थान में महिलाओं की दुर्दशा पर हाथरस आदि पर हंगामा करने वाले कहाँ है? क्या उनके घरों में मातम मचा है, जो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है? कहाँ है, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव, अरविन्द केजरीवाल, स्वरा भास्कर आदि? क्या राजस्थान में कांग्रेस की आड़ में मुग़ल शासन चल रहा है? राजस्थान में कांग्रेस शासित अशोक गहलोत की सरकार महिलाओं को कितना नीचे गिराएगी? क्या राजस्थान में महिलाओं का कोई आत्मसम्मान नहीं? अगर किस भाजपा शासित राज्य में ऐसा हो रहा होता, ये जितने भी ठोंगी नेता अब तक आसमान सिर पर उठा चुके होते, देश में हाहाकार मचवा देते, लेकिन कांग्रेस शासित राज्य में लड़कियों की बिक्री और मना करने पर उनकी माताओं का बलात्कार होने पर किसी की आवाज़ नहीं निकल रही? कांग्रेस में महिला वर्ग भी चुप है, क्यों?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान सरकार को नोटिस भेजा है। यह नोटिस 8 से 18 साल की लड़कियों की नीलामी को लेकर भेजा गया है। आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
मीडिया रिपोर्ट से राजस्थान में स्टाम्प पेपर पर लड़कियों को बेचे जाने के मामले का खुलासा हुआ था। इसमें बताया गया था कि मना करने पर लड़कियों की माँ के साथ रेप किया जाता है। इसके पीछे जातीय पंचायतों की भूमिका बताई गई थी। गुलामी में लड़कियों का शारीरिक शोषण होता है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। यौन उत्पीड़न होता है।
स्टांप पेपरों पर लड़कियों की कथित नीलामी और उनके इनकार के परिणामस्वरूप उत्पन्न विवादों को निपटाने के लिए जाति पंचायतों के फरमान पर उनकी माताओं के बलात्कार के संबंध में राजस्थान सरकार को एनएचआरसी का नोटिस. लिंक-https://t.co/ojQaPFUAha@ANI@PTI_News@PIB_India@PBNS_India
इसी रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है मीडिया रिपोर्ट में जिस घिनौनी प्रथा का दावा किया गया है, वह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस संबंध में की गई कार्रवाई को लेकर राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है। पुलिस महानिदेशक से इसमें शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू कर विस्तार से रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पंचायत बना रही लड़कियों को गुलाम
लड़कियों की ब्रिकी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट राजस्थान के भीलवाड़ा से संबंधित है। इसमें पीड़ितों के हवाले से बताया गया है कि लड़कियों को नीलाम कर देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों तक भेजा जा रहा है। इसमें बताया गया है कि भीलवाड़ा की कई बस्तियों में दो पक्षों के बीच विवाद या कर्ज के मामलों का निपटारा पुलिस की जगह जातीय पंच कर रहे हैं। वे लड़कियों की नीलामी करवा रहे हैं। इनकार करने पर उनकी माताओं से बर्बरता की जाती है।
रिपोर्ट में कई मामलों का जिक्र किया गया है। ऐसे ही एक मामले के बारे में बताया गया है कि 15 लाख रुपए के भुगतान के बदले जातीय पंचायत ने एक आदमी को पहले अपनी बहन को बेचने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसे 12 साल की बेटी को बेचने को मजबूर किया गया। इस तरह एक-एक कर उस व्यक्ति की सभी पाँच बेटियाँ गुलाम बन गई। बावजूद उस व्यक्ति का कर्ज खत्म नहीं हुआ।
बीजेपी ने गहलोत सरकार को घेरा
कांग्रेस पार्टी का नारा तो है, ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ का, लेकिन हकीकत राजस्थान में देखें, जहां बहन बेटियों की खुलेआम नीलामी चल रही है।
कांग्रेस के कुशासन से तंग आकर अब राजस्थान की बेटियां कह रही हैं; ‘लड़की हूँ बच सकती हूं, तभी तो राजस्थान में रह सकती हूं।’ pic.twitter.com/R6WXPIkvn3
मैं राजस्थानी हूं और हमारे यहां एक नियम है अगर महिला किसी को काट भी दे तो उसपे हाथ नहीं उठाते पहले हम गर्व से खुद को राजस्थानी बोलते थे गहलोत जी आपका बहुत आभार आपने हमें खुद को राजस्थानी बोलने लायक नहीं छोड़ा
लड़कियों की बिक्री का मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है, “कांग्रेस पार्टी का नारा है- लड़की हूँ लड़ सकती हूँ। लेकिन हकीकत राजस्थान में देखें, जहाँ बहन-बेटियों की खुलेआम नीलामी चल रही है। कांग्रेस के कुशासन से तंग आकर अब राजस्थान की बेटियाँ कह रही हैं- ‘लड़की हूँ बच सकती हूँ, तभी तो राजस्थान में रह सकती हूँ।”