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महबूबा मुफ्ती से आरफा तक चाहती हैं कि हम न जानें इस्लामी लुटेरों-आक्रांताओं का सच, क्योंकि नफरत फैलेगी: अजीत डोभाल से यूँ ही नहीं चिढ़ा लेफ्ट-लिबरल गैंग

                                          अजीत डोभाल के बयान के बाद पीछे पड़े लिबरल और कट्टरपंथी
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 10 जनवरी 2026 को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह में युवाओं से प्रेरित करने के लिए शब्द कहे, उससे इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों का धड़ा आहत होकर बैठा है।

नतीजतन NSA को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक, नफरत फैलाने वाला, देश को बाँटने वाला व इनसिक्योर बताकर सेकुलर भारत के लिए खतरा बताया जा रहा है। उन्हें घेरने वालों में इस्लामी पत्रकारिता के लिए कुख्यात आरफा खानम, अलगाववादियों का समर्थन करने वाली जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती जैसों के नाम हैं।

नीचे देख सकते हैं महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट किया, “यह बहुत दुखद है कि डोभाल जैसे उच्च पद के अधिकारी, जिनका काम देश को अंदरूनी और बाहरी खतरों से बचाना है, उन्होंने नफरत फैलाने वाली सांप्रदायिक विचारधारा को अपनाया और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश की। 21वीं सदी में सदियों पुराने घटनाओं के लिए Revenge लेने की बात करना केवल एक इशारा है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को एक पहले से ही परेशान और लक्ष्य बन रही अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला करने के लिए उकसाता है।”

इसी तरह, आरफा खानम शेरवानी ने डोभाल को ऐसा इनसिक्योर अधिकारी बताया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

इनके अलावा कंचना यादव जैसे लोग भी अजीत डोभाल के बयान को तोड़-मरोड़कर अपना एंगल देने में लगे हैं। वो अपने फॉलोवर्स को ये बता रहे हैं कि डोभाल अपने बच्चों को तो विदेशों में पढ़ा रहे हैं और आपके बच्चों को भड़का रहे हैं। कंचना का ट्वीट देखिए-

ऐसे ही लिबरल धड़े का जाना-माना नाम स्वाति चतुर्वेदी- लिखती हैं- आपके बच्चे मंदिर तोड़ने वालों से बदला लेंगे और डोभाल के बच्चे बाहर विदेश में बिजनेस करके लक्जरी जीवन जीएँगे।

ऊपर दिए सारे ट्वीट को देख ऐसा लग रहा है मानो डोभाल ने देश के युवाओं से बदला लेने की बात कही है, उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ युवाओं को भड़काया है। जबकि हकीकत इससे पूरी अलग है। अजीत डोभाल ने कार्यक्रम में युवाओं से जो कहा, उसका कहीं से कहीं तक अर्थ हिंसा से जुड़ा नहीं था।

क्या कहा था अजीत डोभाल ने?

कार्यक्रम में अजीत डोभाल ने देश के युवाओं को देश के इतिहास के प्रति जागरूक किया था। उन्होंने युवाओं से ये कहा था स्वतंत्रता हमें आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए पीढ़ियों ने अपार बलिदान दिए। इतिहास की सच्चाइयों को समझ कर युवाओं को देश के पुनर्निर्माण में जुटना चाहिए।

उनके जिस शब्द पर वामपंथी और कट्टरपंथी ने बवाल मचाया हुआ है उसे भी उन्होंने किस संदर्भ में कहा था इसे उनके पूरे बयान से समझिए। डोभाल ने कहा था-

भारत के अतीत को सिर्फ दुख के साथ याद नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई लोगों को फाँसी दी गई, गाँव जला दिए गए, हमारी सभ्यता को नुकसान पहुँचाया गया। मंदिर लूटे गए और लोग बेबस होकर यह सब होते देखते रहे। यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। ‘बदला’ शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन बदला एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा।

डोभाल के बयान से साफ है कि वो कहीं भी ‘बदले’ शब्द को हिंसा से जोड़कर नहीं बोल रहे थे बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण की बात कर रहे हैं। उन्होंने इतिहास से सीख लेकर राष्ट्र को पुनर्निर्मित करने की बात कही, न कि किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़काने की। उनका मकसद अपने श्रोता युवाओं में देशभक्ति जगाने का था, द्वेष फैलाने का नहीं।

हालाँकि, उनके बयान को वामपंथी और कट्टरपंथी अपने एजेंडे के अनुसार तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। उन्हें शायद डर है कि कहीं सच में लोग उस इतिहास को लेकर सजग न हो जाएँ जहाँ देश को तोड़ने वालों और संपत्तियों को लूटने वालों का जिक्र है। इनकी दिक्कतें इसलिए हैं क्योंकि जिन्होंने भारत को समय-समय पर नष्ट करने का प्रयास किया वो ही इनके पसंदीदा ‘नायक’ हैं।

इस्लामी आक्रांताओं को क्यों कर रहे हो बदनाम- लिबरल और कट्टरपंथियों का तर्क

दिलचस्प बात ये है कि डोभाल के बयान को विकृत ढंग से पेश करने के चक्कर में ये लोग खुद ही इसको स्वीकार कर बैठे कि देश के मंदिर को लूटने वाली घटनाएँ बिलकुल सच हैं। महबूबा मुफ्ती के ट्वीट से स्पष्ट है कि वह मान रही हैं कि 21वीं सदी से पहले ये घटनाएँ हुईं थीं। लेकिन फिर भी वो इससे मुँह इसलिए मोड़ रही हैं क्योंकि वो नहीं चाहती इतिहास को बार-बार उकेरा जाए जिससे पता चले सच क्या था।

वहीं आरफा खानम हैं, जिनकी पत्रकारिता का केंद्र हमेशा ये बताने-समझाने पर रहता है कि मुगलों ने देश के लिए क्या किया… उनके लिए अगर कोई ये बता दे कि उन्होंने देश में और देश के लोगों के साथ क्या किया तो उन्हें इससे आपत्ति होने लगती है।

कंचना यादव और स्वाति चतुर्वेदी का भी यही पैटर्न है। वह अच्छे से जान-समझ रही हैं कि डोभाल ने क्या बोला है, लेकिन उनकी बात चूँकि वामपंथी एजेंडे पर सही नहीं बैठ रही इसलिए उन्होंने उस बयान के खुद ही मायने गढ़ लिए।

असली गलती किसकी?

ऐसे ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग लोगों को समझने की जरूरत है कि इतिहास को इनके हिसाब से पेश करने का एक दौर बीत चुका है। अब वो समय नहीं है कि इस्लामी आक्रांताओं के कुकृत्यों को महिमामंडन करने का काम हो। इतिहास का अर्थ वही होता है जो बीता समय का सच हो। अगर उसे बताने से एक समुदाय पर सवाल उठ रहे हैं, तो समस्या उस रिलिजन या मजहब में है न कि इतिहास में।

आज अगर देश को लूटे जाने के इतिहास को गहराई से पढ़ने पर ‘लुटेरे’ इस्लामी आक्रांता ही निकलकर आ रहे हैं तो इसमें इतिहास बताने वाले की क्या गलती है? गलती उसकी है जिसने ये किया, गलती उसकी है जिसने हमेशा ये समझा कि दुनिया वही इतिहास पढ़ेगा जो वो वर्ग पढ़ाना चाहेगा। गलती उस वर्ग की है जिसे लगा कि उन्होंने कह दिया तो अकबर हमेशा ‘महान’ बना रहेगा और औरंगजेब को लोग हमेशा ‘मंदिर का निर्माण’ कराने वाले के तौर पर जानेंगे।

‘किसान उत्पातियों’ पर अंबाला पुलिस ने ठोका NSA, उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई

किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने का काम किया जा रहा है उसे देखते हुए हरियाणा की अंबाला पुलिस ने सख्त खदम उठाए हैं। अंबाला पुलिस ने कहा है कि सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्तियों से की जाएगी। इसके लिए संपत्ति की कुर्की और बैंक खातों को सीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा किसान संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ NSA लगाने की बात भी पुलिस ने कही है।

जिस दिन ने इनके बैंक खातों को जब्त करना शुरू कर दिया, बिकाऊ उत्पादी अपने आप भागते नज़र आएंगे। यह आंदोलन वास्तव में पंजाब में होना था, क्योकि 5 मिनट में कानून बनाकर 22 फसलों पर MSP देने का वायदा भगवंत सिंह मान है, जो अब प्रदेश के मुख्यमत्री हैं। क्यों नहीं कानून बनाकर 22 फसलों पर MSP देते? क्यों अपना पाप केंद्र सरकार पर थोपा जा रहा है? 


22 फरवरी 2024 को जारी प्रेस नोट में अंबाला पुलिस ने कहा कि 13 फरवरी 2024 से किसान संगठनों द्वारा किसानों द्वारा दिल्ली कूच को लेकर शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स को तोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं व पुलिस प्रशासन पर पत्थरबहाजी व हुड़दंगबाजी करके कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश भी हो रही है। इन सबसे सरकारी और प्राइवेट संपत्तियों को काफी नुकसान हो रहा है।

पुलिस ने कहा कि वो अब आंदोलनकारियों द्वारा सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को पहुँचाए गए नुकसान का आँकलन कर रहे हैं। सबकी भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्ति और बैंक खातों को सीज करके की जाएगी। पुलिस की मानें तो उन्होंने इस संबंध में पहले ही सूचित किया था कि अगर सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ तो वह यह कार्रवाई करेंगे। हालाँकि पिछले कुछ दिनों में फिर भी ऐसी घटनाएँ आईं, जिसके बाद पुलिस ने यह नोट जारी किया।

इसके अलावा पुलिस ने एक और ट्वीट में यह जानकारी दी है कि उन्होंने NSA के तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। अंबाला पुलिस द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि आंदोलन में 30 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं, 1 पुलिसकर्मचारी का ब्रेम हैमरेज हुआ और 2 की मृत्यु हो गई है। ऐसे में आंदोलन के कई किसान नेता जो सक्रिय भूमिका हैं और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए पोस्टर कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के विरुद्ध गलत शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में अपराधिक गतिविधियों को रोकने व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 2(3) राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की कार्यवाही पुलिस प्रशासन द्वारा अमल में लाई जा रही है।

ये भी जानकारी आई है कि अंबाला पुलिस की तरफ से भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान मजदूर मोर्चा के सदस्य अमरजीत सिंह मोहड़ी के घर पर पुलिस का नोटिस चस्पा किया गया है। इसमें लिखा गया है कि अमरजीत सिंह उस प्रदर्शन में अहम भूमिका में है, जो अब उग्र हो रहा है। अगर प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हैं तो फिर मोहड़ी की संपत्ति से भी भरपाई की जा सकती है।