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इजरायल में भी शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंधु’, भारतीयों को लगातार वापस ला रही सरकार, 161 लोग पहुँचे दिल्ली: ईरान से अब तक 2003 लोग सकुशल पहुँचे भारत

                                                                                                                साभार- X/@MEAIndia
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच दोनों देशों में फँसे भारतीयों को वापस देश लाने के लिए सरकार ऑपरेशन सिंधु मिशन के तहत लोगों को रेस्क्यू कर रही है। इसके तहत अब तक 2003 लोग सकुशल भारत लाए जा चुके हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (23 जून 2025) को ईरान के मशहद से 290 भारतीय नागरिकों के साथ एक श्रीलंका के नागरिक को भी सकुशल दिल्ली पहुँचाया गया है। ईरान के अलावा ऑपरेशन सिंधु के तहत अब इजरायल से भी भारतीयों को निकाला जा रहा है। इजरायल से 161 भारतीय नागरिकों का पहला जत्था 24 जून को दिल्ली पहुँच चुका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 23 जून 2025 की शाम को 290 भारतीय नागरिकों और एक श्रीलंकाई नागरिक को मशहद से निकाला गया है।

12 दिनों से संघर्ष जारी

इजरायल और ईरान के बीच 13 जून 2025 से ही संघर्ष चल रहा है। दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला कर रहे हैं। इससे वहाँ कई लोगों के मरने और हताहत होने की खबरें सामने आईं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से ईरान गए लोगों के परिवारों ने उन्हें वापस लाने के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई।

इसके बाद भारत सरकार ऑपरेशन सिंधु चलाकर अपने लोगों को वापस लाने का जतन शुरू किया। इसके तहत पहले जत्थे में ईरान से 110 लोगों को अर्मेनिया के रास्ते भारत लाया गया। इसके बाद से लगातार लोगों को वापस लाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गरिटा ने बताया कि भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंधु के हिस्से के तहत अगले दो से तीन दिनों में ईरान से तीन अतिरिक्त उड़ानें (एक्ट्रा एवैक्यूवैशन फ्लाइट्स) निर्धारित की गई है ताकि भारतीयों को वापस लाया जा सके।

लगातार बढ़ते हमलों से इजराइल में भी काफी लोग घायल हो रहे हैं और कई लोगों की मौत भी हो गई है। इसके बाद ऑपरेशन सिंधु के तहत इजरायल से भी लोगों को भारत लाया जा रहा है। सोमवार को इस ऑपरेशन के तहत 604 भारतीय नागरिकों को मिस्र (इजिप्ट) और जॉर्डन के रास्ते से होकर इजरायल से निकाला गया है।

ऑपरेशन सिंधु का यह सफर आसान नहीं रहा है। इजरायल से जॉर्डन और फिर अम्मान से रवाना हुई उड़ान को कुवैत से डायवर्ट कर दिया गया था। सोमवार की रात को ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के कारण कुवैत का एयरस्पेस बंद कर दिया गया।

ऐसी कौन सी डॉक्टरी पढ़ाता है ईरान जो शिया मुल्क की दौड़ लगाते हैं कश्मीरी, 100+ छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला: इजरायली हमलों के बीच भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन सिन्धु’

ऑपरेशन सिंधु (फोटो साभार- एक्स/ @DDIndialive)
इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद भारत ने अपने नागरिकों को निकालना चालू कर दिया है। भारत ने अपने नागरिकों को युद्धग्रस्त ईरान से निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सिन्धु’ लॉन्च किया है। भारत ने अपने 100+ नागरिकों को ईरान से निकाल भी लिया है। इन्हें आर्मेनिया के रास्ते निकाला गया है।

लगभग 110 भारतीय छात्र, जो ईरान के विभिन् विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें दूतावास की मदद से पहले सीमा पार कर आर्मेनिया पहुँचाया गया और अब सभी विशेष उड़ान से भारत लौट आए हैं। इन छात्रों को लेकर पहली फ्लाइट आर्मेनियाई राजधानी येरेवन से बुधवार (18 जून 2025) को दिल्ली पहुँचे।

ईरान और आर्मेनिया ने इस मामले में भारत की काफी सहायता की है। ईरान ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह भारत के छात्रों को बाहर निकालने के लिए अपने दरवाजे खुले रखेगा और इसी प्रतिबद्धता को निभाते हुए उसने भारतीय मिशन को हरसंभव सहायता दी।

ईरान से सुरक्षित निकाले गए छात्र

तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने तनाव के बाद बिगडती स्थिति को देखते हुए 110 भारतीय छात्रों को तुरंत शहर से बाहर निकालने की योजना बनाई। इन छात्रों को सुरक्षित रास्ते से आर्मेनिया ले जाया गया और फिर वहाँ से भारत भेजा गया।

निकाले गए छात्रों में से ज्यादातर उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी के हैं। इनमें से करीब 90 छात्र जम्मू-कश्मीर के हैं। ईरान से निकाले गए छात्र तमहीद मुगल ने बताया कि वे सभी भारत सरकार के इस त्वरित कदम के लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा कि कहा कि इस मुश्किल समय में सरकार ने उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

भारतीय छात्र ईरान में क्या करने जाते हैं?

ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए जाते हैं। उर्मिया, तेहरान, मशहद जैसे शहरों में कई मेडिकल विश्वविद्यालय हैं जहाँ छात्र एमबीबीएस और अन्य मेडिकल डिग्रियों की पढ़ाई करते हैं। यहाँ फीस कम होती है और एडमिशन प्रक्रिया भी सरल होती है, जिससे मध्यवर्गीय भारतीय परिवारों के लिए यह एक आसान विकल्प बन जाता है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में जहाँ MBBS की पढ़ाई की फीस ₹1 करोड़ जाती है तो वहीं ईरान में यह ₹14 लाख से ₹30 लाख तक में ही हो जाता है। बताया गया है कि यहाँ मेडिकल की शिक्षा बांग्लादेश से भी सस्ती है। इसके अलावा ईरान, बांग्लादेश के मुकाबले कहीं अधिक विकसित है।

कुछ लोगों का दावा है कि ईरान जम्मू-कश्मीर से ईरान जाने वाले शिया छात्रों को सब्सिडी भी मिलती है। बताया गया है कि ईरान में वर्तमान में 2000 भारतीय छात्र पढ़ते हैं। ईरान का मेडिकल शिक्षा क्षेत्र भारत में मान्यता प्राप्त है और छात्रों को विदेश में अच्छी शिक्षा मिलती है।

यहाँ के कई विश्वविद्यालय विश्व में मान्यता रखते हैं। हालाँकि, इस बार के हालात असामान्य हैं और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियातन छात्रों को बाहर निकालने का फैसला लिया। अब इन्हें ऑपरेशन सिंधु के तहत बाहर निकाला जाएगा।