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केरल : Pinarayi Vijayan के राज में आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं की बर्बर हत्या का दौर जारी, सनातन विरोधी राजनीतिक षड्यंत्र


एक तरफ जहाँ RSS अपनी स्थापना के 100 साल मना रहा है, लेकिन इन वर्षों में केरल राज्य में RSS-BJP कार्यकर्ताओं पर हत्याओं का दौर नहीं थम रहा। जबकि प्राप्त जानकारी के अनुसार संघ ने अन्य राज्यों के मुकाबले केरल में बहुत काम किया है उसके बावजूद जनता का समर्थन नहीं मिलना चिंता की बात है। अगर यही स्थिति बीजेपी शासित राज्यों में हो रही होती सारा विपक्ष विधवा विलाप करता नज़र आ रहा होता। क्या केरल की जनता वामपंथियों के दबाव में रहती है? शायद यही वजह है कि बीजेपी कहीं मुकाबले में नज़र नहीं आती, जबकि जिन राज्यों में संघ ने काम किया है बीजेपी ने अपने विरोधियों को टक्कर दी है। केरल की जनता कब संघ के कार्यों की कदरदान होकर वामपंथियों को नाकों चबाने को मजबूर करेगी?      

बीते कई दशकों से वामपंथियों का गढ़ रहे केरल में राजनीति का आधार ही नफरत की बुनियाद पर टिका है। केरल में आए दिन बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक दुश्मनी के चलते अत्याचार किए जा रहे हैं। यहां तक कि लेफ्ट लिबरल गैंग द्वारा उन्हें मौत का घाट भी उतारा जा रहा है। लेकिन पी.विजयन की वामपंथी सरकार मौन होकर सारा तमाशा देख रही है। बल्कि अगर यह कहा जाए कि वह हत्यारों को प्रोत्साहित कर रही है, तो कोई अतिश्योक्ति ना होगी। वामपंथियों की इस ‘हेट थ्योरी‘ के तहत माताओं-बहनों और मासूम बच्चों तक को नहीं बख्शा जा रहा है। इतना ही नहीं हर साल लगभग 2-3 हजार लड़कियों को जबरन इस्लाम कुबूल करवाया जा रहा है। इस तरह ऐसी लड़कियों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। बर्बर हिंसा और धर्मांतरण के बावजूद राज्य मानवाधिकार आयोग, ओबीसी आयोग एससी-एसटी आयोग, न्यायालय अब तक चुप क्यों है? आखिर हेट थ्योरी की बुनियाद पर खड़ी केरल की राजनीतिक विरासत को इसकी सजा क्यों नहीं मिलनी चाहिए?

लव जिहाद में फंसाकर 32 हजार लड़कियों को इस्लाम में धकेला गया

सुरक्षा एजेंसी की एक जांच के अनुसार, 2009 से केरल और मैंगलोर की लगभग 32,000 हिंदू और ईसाई समुदायों की लड़कियों को लव जिहाद में फंसाया गया और फिर इस्लाम में परिवर्तित किया गया। पहले इन्हें लव जिहाद के ट्रैप में फंसाया गया, उसके बाद धर्मांतरण कर मुसलमान बना दिया गया। ये लड़कियां नर्स बनकर अपना जीवन सुखमय बिताना चाहती थीं लेकिन अब वह आतंकवादी बना दी गई हैं। वर्ष 2021 में सिट्टी मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा था कि केरल से 32,000 लड़कियों के गायब होने के ये आंकड़े उनके नहीं हैं। वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के साथ अपनी बातचीत के आधार पर केरल में हिंदू और ईसाई लड़कियों के 32,000 जबरन धर्मांतरण की संख्या तक पहुंचे। सेन के अनुसार, ओमन चांडी ने कहा था कि “हर साल लगभग 2,800 से 3,200 लड़कियों को जबरन इस्लाम कुबूल करवाया जा रहा है। इस तरह 10 साल में ये संख्या 32,000 तक पहुंच गई।
भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को बनाया जा रहा निशाना
बड़ा सवाल यह है कि क्या आरएसएस कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जाना किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है? बीजेपी-आरएसएस पर फासीवाद, हिटलरशाही, साम्प्रदायिक से लेकर असहिष्णुता तक के आरोप लगाने वाली लेफ्ट लिबरल गैंग, वामपंथी औप पीएफआई का इन हत्याओं पर मौन संघ के प्रति हिंसक हमलों का समर्थन है? क्या राष्ट्रवाद की विचारधारा के विस्तार और उसके बढ़ते प्रभाव से वामपंथी और कांग्रेसी बौखलाए हुए हैं? क्या तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली सियासी जमात अब राष्ट्रवाद की विचारधारा को हिंसा से रोकने की कोशिश में लगी है? क्या राष्ट्रवादी अपनी बहनों को लव जिहाद के जाल में फंसते देख मौन रह सकते हैं, जिन्हें मुसलमान बनाने के बाद सीरिया, अफगानिस्तान के आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस और हक्कानी जैसे आतंकवादी संगठनों के हवाले कर दिया है।
पिछले कुछ सालों में भाजपा और आरएसएस पर वामपंथी और अतिवादियों द्वारा ढहाए गए कहर
मंदिर के उत्सव में जाते RSS कार्यकर्ता पर हमला
केरल के कन्नूर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता पर हमला करने के आरोप में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के दो कार्यकर्ताओं और छह अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की जानकारी के मुताबिक आरएसएस कार्यकर्ता, जिसकी पहचान शाजू के रूप में हुई है, पर एक मंदिर उत्सव में जाते समय हमला किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 189(2), 191(2), 191(3), 126(2), 118(1), 109(1), 351, 190 के तहत हत्या के प्रयास, चोट पहुँचाने, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, दंगा करने और घातक हथियार रखने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
सौ सीपीएम कार्यकर्ताओं ने घेरकर किया हमला
कन्नूर ज़िले के पय्यान्नूर के पास करिवेल्लूर में छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक दिवस (हिंदू साम्राज्य दिवस) समारोह के दौरान 100 से ज़्यादा सीपीएम कार्यकर्ताओं ने एक घर को घेर लिया । कार्यक्रम में आए भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया और दंगा भड़काने के लिए उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई। यह घटना 20 जून को शाम 7 बजे कुनियान में हुई। यह कार्यक्रम भाजपा मंडल समिति के सदस्य कुंदथिल बालन के घर पर आयोजित किया गया था और इसमें लगभग 20 लोग शामिल हुए थे। 100 से ज़्यादा सीपीएम कार्यकर्ताओं ने घर को घेर लिया और तीन घंटे तक धमकी भरे नारे लगाए। स्थानीय पुलिस ने हस्तक्षेप करके रात लगभग 10 बजे आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल लोगों को बचाया।
पलक्कड़ में संघ कार्यकर्ता को घेरकर मार डाला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता श्रीनिवासन की हत्या 16 अप्रैल 2022 को पलक्कड़ जिले में हुई थी। आरएसएस कार्यकर्ता (Palakkad Sreenivasan murder case) की हत्या मामले में 17 पीएफआई आरोपियों पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में साम्प्रादायिक हिंसा भड़काने के भी आरोप लगे। बाद में हाईकोर्ट ने इनको बेहद सख्त शर्तों के साथ जमानत दी।
रैली के बाद शाखा मुख्य शिक्षक की हत्या कर दी
केरल के अलाप्पुझा के वायलार ग्राम पंचायत के नागमकुलंगरा में 22 वर्षीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) शाखा मुख्य शिक्षक आर. नंदू उर्फ नंदू कृष्णा की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के गुंडों ने हत्या कर दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, एसडीपीआई ने केरल के अलप्पुझा जिले के वायलार क्षेत्र में एक रैली निकाली और भाजपा नेताओं के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए। इसके बाद दोनों समूहों के बीच झड़प हो गई। झड़प के दौरान, नंदू की हत्या कर दी गई। झड़प में छह अन्य घायल हो गए। भाजपा/आरएसएस ने 25 फरवरी को जिले भर में हड़ताल की।
भाजपा नेता रंजीत को बेरहमी से मार डाला
केरल में 2021 को भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवासन की बेहरमी से हत्या कर दी गई थी। पीएफआई वर्कर्स ने श्रीनिवासन की पत्नी, मां और बच्चे के सामने ही उनके अलाप्पुड़ा स्थित घर में बेरहमी से मार दिया था। श्रीनिवास की जब हत्या की गई, तब वह बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राज्य सचिव भी थे। तीन साल बाद 2024 में केरल की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। PFI के 15 एक्टिविस्ट को सजा-ए- मौत की सजा दी है। पीएमआई कार्यकर्ताओं को मौत का यह सजा भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवासन की हत्या के मामले में सुनाई गई है। रंजीत श्रीनिवासन आरएसएस से बीजेपी में आए थे और पेशे से वकील थे।
आरएसएस के मुख्य शिक्षक की बाइक को टक्कर मारी
कन्नूर के थालास्सेरी-कोट्टियूर मार्ग पर कन्नवम के पास कोमेरी में एक आरएसएस कार्यकर्ता की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। चित्तरिप्परम्बा निवासी और रवींद्रन के पुत्र, आरएसएस की 17वीं मील शाखा के मुख्य शिक्षक 24 वर्षीय श्यामा प्रसाद की कोमेरी स्थित बकरी फार्म के पास नकाबपोश कार में आए एक गिरोह ने हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि गिरोह ने बाइक चला रहे श्यामा का पीछा किया। कोमेरी में, कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी और वह गिर पड़े। हमलावरों से बचने के लिए, वह सड़के किनारे एक घर में भागे, लेकिन हमलावरों ने घर के सामने ही उन्हें मार डाला।
कालेज से लौटते समय आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या
त्रिशूर में बाइक से आईटीआई कॉलेज से लौटते समय आरएसएस कार्यकर्ता आनंदन की चार सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से पिटाई कर दी। इसमें आनंदन बेहद गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमलावरों में एक की पहचान नेनमेनी के रूप में हुई। हत्या करने के बाद हमलावर फरार हो गए।
त्रिवेंद्रम में आरएसएस कार्यकर्ता को सरेआम मार डाला
केरल के त्रिवेंद्रम में एक हिस्ट्रीशीटर की अगुवाई वाले गिरोह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता राजेश की शनिवार की रात धारदार हथियार से हत्या कर दी। राजेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्यवाह के पद पर था। पुलिस के मुताबिक राजेश शाखा से लौट रहा था। इस दौरान श्रीकरयम में 6 लोगों ने उसे घेर लिया। टू-व्हीलर पर सवार राजेश पर धारदार हथियार से हमले किए गए। जिसमें ई राजेश की बेरहमी से श्रीकरियम में सरेआम हत्या कर दी गई।
घर में ही चाकूओं से गोदकर कर दी हत्या
संतोष (कन्नूर) – 18 जनवरी, 2017 की रात घर में अकेला पाकर सीपीएम के गुंडों ने चाकूओं से गोदकर संतोष की हत्या कर दी। पुलिस को जानकारी मिलने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले संतोष की मौत हो गई।
पलक्कड़ में भाजपा कार्यकर्ता को जिंदा जलाया
सी. राधाकृष्णन (पलक्कड़) – 28 दिसंबर, 2016 को सीपीएम कार्यकर्ताओं ने कोझिकोड के पलक्कड़ में 44 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता सी. राधाकृष्णन को उनके ही घर में जिंदा जलाने की कोशिश हुई। उनके घर के सामने खड़ी उनकी बाइक में पहले आग लगाई। फिर घर में गैस का छिड़काव करके घर में आग लगा दी। इस आगजनी में सी राधाकृष्णन सहित दो परिजन और बुरी तरह से झुलस गए। त्रिस्सुर जुबली मिशन हॉस्पिटल में 6 जनवरी, 2017 को उपचार के दौरान सी. राधाकृष्णन की मौत हो गई।

वित्त मंत्री ने गोल्ड से इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से केरल की ब्लैक इकॉनमी डगमगाई: काला धन घटने से रियल एस्टेट में छाई मंदी

       सोने पर आयात घटने से केरल की अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर, तस्करी के मामले भी घटे (फोटो साभार: NDTV)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 में देश में सोने के आयात पर 15% से घटाकर 6% शुल्क लगाने का फैसला लिया। इसका सबसे अधिक असर केरल को हुआ, जहाँ सालों से सोने के अवैध कारोबार के जरिए पैरलल इकॉनमी मजबूत हो रही थी। पैरलल इकॉनमी का मतलब है कि पैसों का लेन-देन तो हो रहा होता है, लेकिन वो किसी सिस्टम में दर्ज नहीं होता। इसी पैरलल इकॉनमी से निकले मनी को ब्लैक मनी भी कहते हैं।

बिजनेस वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के चार अतंरराष्ट्रीय हवाई अड्डे- तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और कन्नुर खाड़ी देशों से सोने की तस्करी करने वाले मुख्य रास्ते हैं। यहाँ तक कि केरल की सोने की तस्करी का गढ़ माने जाने वाले दुबई से भी कनेक्शन मिले। केरल इन खाड़ी देशों से संबंध बेहतर करने के चलते ही ‘तस्करों का स्वर्ग’ बनता गया।

साल 2020 से 2023 तक केरल में 3,100 से अधिक सोना तस्करी के मामले सामने आए, इन सभी मामलों में करीब 200 से 400 टन अवैध सोना बरामद किया गया। लेकिन इससे भी हैरानी की बात यह है कि केरल में हर साल ₹1,31,586 करोड़ (15 अरब डॉलर) की कीमत के सोने की तस्करी होती थी, जो कि जब्त किए गए सोने के मुकाबले काफी कम मानी गई।

यह सोना तस्करी का कारोबार तब तक बढ़ता चला गया जब तक सोने के आयात में अच्छा शुल्क था। उस समय एक किलो सोने में करीब ₹9 लाख का मुनाफा होता, जिसमें से कुछ कैरियर शुल्क भी दिया जाता था। इस मुनाफा ने केवल तस्करों को अमीर नहीं बल्कि केरल की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (जिसका कागजों में कोई आकड़ा नहीं है) को भी गति दी।

इस काले धन से बिना हिसाब-किताब के रीयल एस्टेट डील, ज्वैलरी नेटवर्क और हवाला कारोबार चलाया गया। इससे जुड़ा एक मामला भी सामने आया था, जिसमें एक ज्वैलरी चेन के 4000 निवेशक थे, जो SEBI की सीमा का उल्लंघन है। ऐसी कंपनियाँ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध में भी सक्रिय रहती हैं।

लेकिन वित्त मंत्री ने जब से सोने के आयात पर शुल्क घटाने का फैसला लिया है, तभी से यह पूरी व्यवस्था ढह गई है। एक किलों पर मुनाफा घटकर अब करीब ₹3 लाख रह गया है, कैरियर की फीस भी कम हो गई और यहाँ तक की खाड़ी देशों से केरल आने वाला सोना भी अब कम हो गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने भी इस फैसले के बाद जब्तियों में तेज गिरावट की पुष्टि की है।

एयर ट्रैफिक के आँकड़े बताते हैं कि खाड़ी देशों से आने वाले यात्रियों की संख्या भी भारत में कम हुई है। यहाँ तक कि गल्फ एयर ने डिमांड कम होने के चलते साल 2025 में कालीकट की उड़ानें बंद कर दीं। इससे साफ है कि तस्करी के तार टूटने लगे हैं।

हालाँकि, इससे कानूनी सोने का व्यापार जरूर बढ़ा और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने साल 2024 की तीसरी तिमाही में हर साल 18% वृद्धि दर्ज की। लेकिन अवैध नगदी के अचानक गायब होने से केरल की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। 2024-25 में प्रदेश की GSDP ग्रोथ 6.19% रह गई, जो दक्षिण भारत में सबसे कम थी। रीयल एस्टेट, निर्माण और लग्जरी रिटेल जैसे सभी क्षेत्रों में गिरावट साफ दिखने लगी।

इस मंदी ने साफ कर दिया केरल की अर्थव्यवस्था अब तक काले धन पर निर्भर थी। केरल में प्रॉपर्टी डील 18% घटी, लग्जरी हाउसिंग की कीमतें 25% तक नीचे आईं और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि राष्ट्रीय औसत से पीछे रह गई। खाड़ी से आने वाले रेमिटेंस में भी 2024 में 10% की कमी आई, जिससे प्रदेश में काला धन लाने वाले कानूनी और अवैध सोर्स दोनों की कमजोर हो गए।

यह कदम महज एक टैक्स सुधार नहीं था बल्कि एक रणनीतिक प्रहार था, जिसने आतंकवाद फंडिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार से जुड़े एक अपराधिक नेटवर्क को कमजोर कर दिया। लेकिन इस कहानी का राजनीतिक पहलू अभी भी जीवित है। साल 2020 के केरल गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपितों में से एक स्वप्ना सुरेश ने 2023 में सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम केस से हटाने के लिए 30 करोड़ रुपए की पेशकश हुई थी।

एक फेसबुक लाइव ब्रॉडकास्ट में स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी और CPM के प्रदेश सचिव गोविंदन मास्टर के कहने पर पार्टी के लोग उन्हें डराने-धमकाने लगे। यहाँ तक कि उन्हें हरियाणा या जयपुर भेजने की योजना बनाई गई थी, जिसमें सरकार की तरफ से फ्लैट और फर्जी पासपोर्ट की भी व्यवस्था की जा रही थी।

स्वप्ना ने कई बार सीएम विजयन और उनके परिवार के सदस्यों और तीन कैबिनेट मंत्रियों के नाम हवाला और तस्करी से जुड़े मामलों में लिए हैं। उन्होंने पहले भी गवाही में कहा था कि 2016 में दुबई में मौजूद सीएम को भेजे जा रहे नगदी से भरे बैग को एयरपोर्ट स्कैनिंग में पकड़ा गया था, जो कांसुलर प्रोटोकॉल के तहत भेजा जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि तब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर के निर्देश पर UAE कॉन्सुलेट से मेटल से भरे बिरयानी के बर्तन मुख्यमंत्री के सरकारी आवास क्लिफ हाउस में ले जाए गए।

ये आरोप 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए थे और 2024 में फिर से चर्चा में आ गए, जब केंद्र सरकार के इस राजकोषीय प्रहार ने उस आर्थिक जड़ को काट दिया, जिस पर यह पूरा अवैध साम्राज्य खड़ा था।

केरल : कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सियासी जंग तेज, विधायक ने राहुल गांधी पर लगाया गंभीर आरोप 'निम्न स्तर' का नागरिक और 'DNA टेस्ट' कराने की मांग

मोदी विरोध में अपना-अपना अस्तित्व बचाने में बने INDI गठबंधन शुरू से ही विवादों में रहा, जो लोक सभा चुनाव सम्पन्न होने से पहले ही खंडित होने की उम्मीद जताई जा रही है। जिसका असली कसूरवार राहुल गाँधी ही रहेगा। हालांकि टीवी परिचर्चाओं में गठबंधन में शामिल पार्टियां कांग्रेस या राहुल का बचाव करते नज़र जरूर आते हैं, लेकिन अंदर खाने मनमुटाव बढ़ता जा रहा है। कम्युनिस्ट विवेक श्रीवास्तव टीवी पर वायनाड से राहुल के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारे जाने पर इधर-उधर की बात करते नजर जरूर आते हैं, लेकिन अब राहुल को 'निम्न स्तर' का आरोप लगाने के पीछे वामपंथ का बहुत जबरदस्त प्रहार है। यह आरोप अपने आपमें बहुत गंभीर है। विवाद इतना बढ़ गया कि राहुल का DNA टेस्ट करवाने की नौबत आ गयी है। आखिर DNA टेस्ट की नौबत क्यों आयी? ऐसा क्या किया है राहुल ने। क्या वायनाड में नितरोज बढ़ते विरोध के कारण वापस अमेठी भागना पड़ रहा है? देखना यह है कि दाल में कुछ काला है या सारी जी दाल काली है।   

केरल में INDI गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राज्य के एक विधायक द्वारा राहुल गांधी को अपना DNA चेक करवाने की सलाह देने के बाद विवाद खड़ा हो गया वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के समर्थक निर्दलीय विधायक पीवी अनवर ने कहा कि राहुल गांधी 'निम्न स्तर के नागरिक' है। अप्रैल 23 को पलक्कड़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए नीलांबुर विधायक ने कहा, 'मैं वायनाड का हिस्सा हूं, जो राहुल गांधी का निर्वाचन क्षेत्र है। मैं उन्हें गांधी सरनेम से नहीं नहीं बुला सकता। वह इतने निम्न स्तर के नागरिक बन गए हैं। 'वे गांधी सरनेम से बुलाए जाने के लायक नहीं है, ये मैं नहीं कह रहा हूं ये बात भारत की जनता पिछले दो दिनों से कह रही है।' दरअसल, अनवर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी से नाराज थे। केरल में अपनी हालिया चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने पूछा था कि पिनाराई विजयन को केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूछताछ और गिरफ्तार करने से क्यों छूट मिली है, जबकि उनके खिलाफ कई आरोप सामने आए थे। 

'राहुल गांधी का DNA टेस्ट होना चाहिए' 

निर्दलीय विधायक अनवर ने कहा कि क्या नेहरू परिवार में ऐसे सदस्य होंगे? क्या नेहरू परिवार में जन्म लेने वाला कोई व्यक्ति ऐसा कह सकता है? मुझे इस पर बहुत संदेह है। मेरी राय है कि राहुल गांधी के डीएनए का टेस्ट किया जाना चाहिए। राहुल के पास जवाहरलाल नेहरू के पोता कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। हमें सोचना चाहिए कि क्या राहुल गांधी पीएम मोदी के एजेंट हैं

अनवर की टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एमएम हसन ने कहा कि पार्टी ने निर्दलीय विधायक के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा दी है। हसन ने यह भी मांग की कि पुलिस विधायक के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करे। उन्होंने कहा कि अनवर ने नेहरू परिवार और राहुल गांधी का अपमान किया है

पीवी अनवर गोडसे का नया अवतार: एमएम हसन

हसन ने कहा, 'पीवी अनवर गोडसे का नया अवतार हैं। अनवर के शब्द गोडसे की उन गोलियों से भी ज्यादा घातक हैं, जिनसे गांधीजी की मौत हुई थी। अनवर ने एक ऐसी टिप्पणी की जो जनता के प्रतिनिधि की ओर से कभी नहीं आनी चाहिए।'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिनाराई विजयन लगातार राहुल गांधी की आलोचना कर रहे हैं। विजयन ने पीवी अनवर को कांग्रेस नेता के खिलाफ बोलने के लिए मजबूर किया है

पिनाराई विजयन ने किया विधायक का बचाव

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एमएम हसन ने कहा, 'पीवी अनवर मुख्यमंत्री के आत्मघाती दस्ते के रूप में काम करते हैं।' इस बीच पिनाराई विजयन एलडीएफ विधायक का बचाव करते दिखे और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आलोचना से परे व्यक्ति नहीं हैं। पिनाराई विजयन ने कहा, 'राहुल गांधी ने जो कहा उसका जवाब मिलेगा.वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो आलोचना से परे खड़े हों।' (पीटीआई और आजतक से इनपुट)

वायनाड में चर्च ने जमीन कब्जाया, सरकार ने 100 रूपए प्रति एकड़ पर दे दिया पट्टा: केरल HC ने रद्द किया आवंटन

                                                                   पिनराई विजयन (साभार: TFIPost & Vidhuraj M.T.)
केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा कल्लोदी सेंट जॉर्ज फोरेन चर्च को सिर्फ 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से 5.5358 हेक्टेयर (लगभग 13.7 एकड़) भूमि के आवंटन को रद्द कर दिया है। केरल सरकार ने यह आवंटन साल 2015 में किया था। चर्च ने उस भूमि पर अतिक्रमण कर लिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उस सरकारी भूमि को चर्च को आवंटित कर दिया था।

जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय जनजातीय समुदायों के लोगों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि जिले में सैकड़ों भूमिहीन जनजातीय समुदाय के लोग कृषि तथा आवासीय भूखंडों की प्रतीक्षा कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले किसी लाभ के हकदार नहीं हैं। अतिक्रमण वाली संपत्ति आवंटित करने में कोई सार्वजनिक हित नहीं है।

कोर्ट ने कहा, “गरीब भूमिहीन जनजातीय समुदाय को लोग अपनी आजीविका और कृषि के लिए भूमि पाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं… ऐसी स्थिति में एक्सटेंशन पी 5 (सरकारी आदेश) के तहत भूमि असाइनमेंट की शक्तियों का उपयोग करते हुए 5वें प्रतिवादी (चर्च) को बड़ी सरकारी भूमि सौंपी जाती है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “मेरी राय है कि यह न केवल अवैध है, बल्कि याचिकाकर्ताओं (जनजातीय समुदाय को लोगों) सहित जनजातीय समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह वायनाड में हमेशा मुस्कुराते रहने वाले मासूम जनजातीय लोगों के दिलों पर चाकू से वार करने के अलावा और कुछ नहीं है।” बता दें कि वायनाड में जनजातीय समुदाय के लोगों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है।

न्यायालय ने कहा, “किसी भी व्यक्ति को सरकारी भूमि की रजिस्ट्री पर असाइनमेंट का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने और उस पर अवैध निर्माण करने से अतिक्रमणकारियों को कोई अधिकार नहीं मिलेगा। सरकारी भूमि को वंचितों को आवंटित किया जाना चाहिए, न कि अमीर और शक्तिशाली लोगों को।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि चर्च को वर्तमान बाजार मूल्य पर संपत्ति खरीदने का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि चर्च सहमत नहीं है तो सरकार को भूमि वापस ले लेनी चाहिए और इसे पात्र व्यक्तियों में वितरित करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि चर्च जमीन खरीदता है तो उसकी बिक्री से प्राप्त पूरी राशि का उपयोग वायनाड में जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

दरअसल, कोर्ट का यह फैसला वायनाड में भूमिहीन जनजातीय समुदाय से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जुलाई-अगस्त 2001 में 32 जनजातीय लोगों की भूख से मौत हो गई थी। विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार के साथ सात सूत्री समझौता हुआ था। इसमें उन्हें पाँच एकड़ जमीन देने की बात कही गई थी।

कोर्ट को यह बताया गया कि चर्च ने 1962 के बाद से वायनाड जिले के मननथावडी तालुक में 5.5358 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया था। चर्च ने उस भूमि का पट्टाया (भूमि दस्तावेज) प्राप्त करने के लिए कई जगहों पर आवेदन किया, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने ₹100 प्रति एकड़ की दर से भूमि सौंपने के लिए एक सरकारी आदेश जारी किया गया था।

केरल सोना तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश ने खोले कई राज : 'सीएम पिनराई विजयन ने UAE दौरे पर नोटों से भरा बैग भेजा, मंत्री केटी जलील भी इसमें शामिल’

केरल सोना तस्करी मामले में मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश
 (फोटो साभार: बार एँड बेंच)
केरल सेना तस्करी के मामले में स्वप्ना सुरेश ने केरल हाई कोर्ट में राज्य के सीएम पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के खिलाफ एफिडेविट फाइल किया है। उन्होंने विजयन के परिवार और पूर्व मंत्री केटी जलील के कथित संबंधों को उजागर किया है। स्वप्ना सुरेश का आरोप है कि दिसंबर 2016 में सीएम पी विजयन के UAE के दौरे के दौरान उन्हें करेंसी से भरा एक बैग भेजा गया था। बाद में सीएम के सचिव शिवशंकर ने दावा किया था कि कुछ इमरजेंसी के कारण ये पीछे छूट गया था।

स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया, “सीएम के सचिव शिवशंकर ने मुझसे संपर्क कर कहा कि मुख्यमंत्री यूएई के दौरे पर हैं और उनका बहुत ही महत्वपूर्ण पार्सल छूट गया है। उन्होंने (सीएम) हमसे किसी तरह से इसे भेजने को कहा है। उन्होंने (शिवशंकर) मुझसे कहा कि इस पार्सल को संयुक्त अरब अमीरात में किसी अमीराती को दे देना। वहाँ हमारा आदमी इसे ले लेगा। असल में वाणिज्य दूतावास ने अबुधाबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री को सभी अतिरिक्त राजनयिक सुविधा की व्यवस्था की थी।” स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि उस दिन डिप्लोमैट अहमद अल डौखी जो कि अभी शारजाह में हैं, उन्हें उसी रात एयर शारजाह के लिए उड़ान भरने के लिए कहा गया था।

गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपित ने दावा किया कि वाणिज्य दूतावास के पीआरओ सरित पीएस को शिवशंकर ने उनसे पार्सल लेने के लिए कहा था। जब दूतावास ले जाकर सरित ने उसे स्कैन किया तो उसमें करेंसी दिखी। उन्होंने मुझे इसके बारे में तुरंत बताया, लेकिन ऑर्गनाइजेशन में नई होने के कारण मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

केटी जलील पर भी तस्करी में शामिल होने का आरो

स्वप्ना सुरेश ने पूर्व मंत्री केटी जलील की सीएम पी विजयन के परिवार के साथ कथित संलिप्तता को भी एफिडेविट में उजागर किया है। महावाणिज्य दूतावास के साथ जलील के मधुर संबंध थे। सुरेश के मुताबिक, विदेश मंत्रालय की जानकारी के बिना ही उनके बीच कई बैठकें हुई थीं। यहीं नहीं क्लिफ हाउस में महावाणिज्य दूत को शिवशंकर ने बुलाया था। बैठक में सीएम की पत्नी के साथ उनकी बेटी भी थी। दावा है कि ये बैठक शारजाह के राजा और रानी के कहने पर की गई थी।
14 जून को स्वप्ना सुरेश ने कहा था मेरे खिलाफ चाहे जितने भी मामले आ जाएँ, मैं अपना 164 बयान वापस नहीं लूँगी। सीएम ने ही शाज किरण को मेरे ऑफिस में भेजा था और वो उनका खास है। अब उन्होंने मेरे खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। वो आगे कहती हैं कि सीएम ने कहा कि वो मुझे नहीं जानते। सीएम और मैंने, उनकी पत्नी, उनकी बेटी और बेटे ने क्लिफ हाउस में बैठकर कई मामलों पर चर्चा की थी। अगर वो सब भूल गए हैं तो मैं उन्हें और उनके परिवार को आपके (मीडिया) के जरिए याद दिलाऊँगी।

गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।