| UPSC एजुकेटर अवध प्रताप ओझा उर्फ ओझा सर ने देश में 'मार-काट' होने की भविष्यवाणी की (साभार: Salt by Lutyens) |
इन सारे विवादित बयानों के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में हाथ आजमाया, यह सोचकर कि विवादों में ही सही, फेमस तो हुआ हूँ, लोग वोट कर ही देंगे। लेकिन लोगों को उनकी देश-विरोधी और हिंदू विरोधी बयानों की सच्चाई पता थी, तभी वह चुनाव हार गए। और अब दोबारा निकल पड़े हैं देश की तबाही की राह खोजने।
तो हाल ही में ओझा सर ने सॉल्ट बाय लुटियंस को इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू का एक वीडियो क्लिप काफी चर्चा का विषय बना। वीडियो में ओझा सर ने US-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का हवाला देते हुए भारत में ‘मार-काट’ होने की भविष्यवाणी कर दी। और बोला कि ऐसे में वह खुद चीन भाग जाएँगे।
UPSC teacher Awadh Ojha:
— Incognito (@Incognito_qfs) April 1, 2026
- There will soon be a revolution in India. Banks will collapse, gas cylinders won't be available because of war and hungry people will revolt, soldiers will unite with normal people and there will be a lot of bloodshed.
- I will run away to China. I… pic.twitter.com/PzaDXaEVPj
ओझा सर के ‘मारकाट’ वाले बयान का संदर्भ
ओझा सर यह बात किस संदर्भ में कहते हैं उसे भी पहले जान लेना जरूरी है, क्योंकि यह बात एक शिक्षक की जुबान से सुनना काफी अटपटा लगता है। भारत में शिक्षा व्यवस्था को खराब बताते हुए ओझा कहते हैं, “यहाँ शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त है। मेरी बेटियों के टीचर्स मुझसे शिकायत करते हैं कि पढ़ती नहीं हैं। हमने कहा कि क्या करोगे इतना पढ़ाकर… इंजीनियर, डॉक्टर हमें बनाना नहीं… हमें बनाना है नेता।”
यह बात वाकई में एक शिक्षक के जुबान से सुननी अटपटी लगती हैं। एक शिक्षक, जो छात्रों को बेहतर शिक्षा देकर एक बेहतर समाज तैयार करता है। अगर वह कहे कि पढ़ाई की क्या जरूरत, नेता बन जाओ। जैसे नेता तो पढ़े-लिखे होते ही नहीं, और अगर कुछ धारणाएँ और हकीकत ऐसी हैं भी। तो क्या इसे बदलना एक शिक्षक का कर्तव्य नहीं, या बच्चों के मन में ये भरना कि पढ़ो मत, नेता बन जाना। क्या इससे देश में कोई बदलाव आएगा?
ओझा सर शायद ही ऐसा सोच पाएँ, क्योंकि वह ठान कर बैठे हैं कि भारत माता को जय करने वाला हमारा देश एक ‘जंगल’ है। वह कहते हैं कि इस जंगल में या तो ‘शिकारी’ या फिर ‘शेर’ रहते हैं। एक शिक्षक की ऐसी भाषा न सिर्फ आक्रामक है, बल्कि पूरी व्यवस्था और समाज को नकारने वाली भी है। अगर एक शिक्षक ही देश के बारे में ऐसी सोच रखता है, तो वह छात्रों को क्या दिशा देगा।
अब ओझा सर की विशेष भविष्यवाणी
और बस यहीं ओझा सर क्रांति की बात शुरू करते हैं। भविष्यवाणी करते हैं कि शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए एक क्रांति होगी। ओझा कहते हैं, “एक क्रांति होने जा रही है, भयंकर मार-काट होगी… इस देश में। इकोनॉमी और बैंकों का पतन होगा।”
इसके बाद खुद को दुनिया की राजनीति का ‘फर्जी’ एक्सपर्ट दिखाते हुए आगे कहते हैं, “ये ईरान और अमेरिका वाला युद्ध बढ़ जाए और गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद हो जाए। तो ये दिल्ली, मुंबई, कोलकाता… यहाँ भूखा आदमी मरने से पहले मारेगा।”
ओझा सर ने यह तुलना फ्रांस और रूस की क्रांतियों से की, जब पहले विश्व युद्ध के दौरान 1917 में रूस में भूखमरी और खाद्यान्न की भारी कमी के कारण जनता ने विद्रोह किया था। ये ओझा सर की भविष्यवाणी कम और बददुआ ज्यादा नजर आती है। पहली बात तो भारत की स्थिति को उसी तराजू में रखना पूरी तरह गलत है, दूसरी बात ओझा सर को अंदाजा भी नहीं है कि ऐसी बातों से लोगों में कितना डर पैदा हो सकती है, जिनका कोई ठोस आधार तक नहीं है।
लेकिन ओझा सर ने ऐसे डर पैदा करने वाले बयान जानबूझ कर दिए हैं। यहाँ भी दो पहलू हो सकते हैं। पहली बात की वो फेमस होने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, उन्हें अच्छा लगता है जब लोग उनकी बात करते हैं, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता कि ये बातें आलोचना हो या तारीफ। दूसरी बात कि यहाँ ओझा सर की भारत के खिलाफ घृणा साफ झलकती है, जो कि सिर्फ झलकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस देश को ‘तबाह’ करने की सोची-समझी मंशा है।
क्योंकि खुद तो वह चीन भागने की तैयारी में हैं। वह खुद कहते हैं, “मैं तो चीन निकल जाऊँगा, मेरा तो अपना है सारा व्यापार। दोस्त हैं, शोरूम हैं… वहाँ निकल जाएँगे।” यहाँ पूरे देशवासियों में डर पैदा करके ओझा सर ने अपना इंतजाम कर लिया है। भागने की बात कर रहे हैं, वो भी एक ऐसे देश में, जिसके साथ भारत की दुश्मनी है। ये तो वही हो गया, विजय माल्या ने देशवासियों के पैसे लूटे और बस गया ‘अंग्रेजों’ के बीच, जिन्होंने भारत पर 200 साल राज किया।
ये सभी लोग देश को बर्बाद करने के ख्वाब बुनते हैं और खुद विदेशी सहयोग के सहारे बैठे रहते हैं। कोई चौंकने वाली बात नहीं होगी, जब कल को ओझा सर का कोई विदेशी लिंक सामने आएगा, जिसमें कहा जाएगा कि ओझा सर को विदेशी फंडिंग मिल रही थी ये सब बेतुके और भद्दे बयान देने के लिए।
ओझा सर के इस्लाम और आतंकियों के बखान में प्रवचन
देश में ‘मार-काट’ हो जाने जैसा भारत-विरोधी और ‘आतंकी’ विचारधारा वाला बयान ओझा सर ने कोई पहली बार नहीं दिया है। ये वही ओझा सर हैं, जिनके इस्लाम और आतंकियों का बखान करते वीडियो वायरल होते हैं। और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं को गाली देने में भी इनका नाम कुख्यात की लिस्ट में आता है।
कभी ये आतंकवादी ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में किए 9/11 हमले को महान उपलब्धि ठहरा देते हैं और उसके बहादुरी के किस्से छात्रों को सुनाते हैं। कभी इस्लाम की बड़ाई में चूर रहते हैं और कहते हैं कि इस्लाम ही पूरी दुनिया में रोशनी लेकर आया, इससे पहले तो अँधेरा था।
वहीं हिंदुओं की बात आती है तो अवध ओझा कड़वाहट के बोल निकालने शुरू कर देते हैं। श्रीकृष्ण पर लांछन लगाते हैं औऱ दावा करते हैं कि यादव लोग एक बार भगवान को मिलकर मारने वाले थे। इतना ही नहीं श्रीकृष्ण के चरित्र पर भी सरेआण बोलते हैं कि वे तो यादव की बीवियों के साथ नाचते थे।
और ऐसा नहीं है कि छात्र जानते नहीं है अवध ओझा की सच्चाई को। ओझा की क्लासेज अटेंड करने वाले छात्र कहते हैं कि ओझा सर कच्छा पहनकर क्लास में आते हैं और सेक्स की बातें करते हैं। कहने को ये UPSC एस्पिरेंट को पढ़ाने वाले शिक्षक हैं।
अगर ऐसी घटिया मानसिकता वाले शिक्षक से छात्र पड़ेगा, तो लाजमी है कि कल को परीक्षा में सफल होकर कोई छात्र देश के बड़े उच्च पदों पर बैठेगा, तो उसके विचार क्या होंगे? वो देश को किस नजरिए से देखेगा? और देश की तरक्की में योगदान देने के बजाए क्या वह भी ओझा सर की तरह चीन चला जाएगा?
ओझा सर खुद तो राजनीति में टिक नहीं पाए, और शिक्षक के तौर पर भी उनका करियर सफल हो नहीं सका। तो अब वे ऐसे भविष्य तैयार करने में निकल पड़े हैं, जो उनकी मानसिकता को पूरे देश में फैलाए। तो इसीलिए छात्र को समझना होगा कि ऐसे शिक्षक केवल देश को तबाह करने के बारे में सोचते हैं, न कि देश की तरक्की के बारे में।

