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उत्तर प्रदेश : कैराना को आज भी डराते हैं फुरकान, मुकीम, साबिर

                                 मतदाताओं से जनसंपर्क के दौरान कैराना से बीजेपी की उम्मीदवार मृगांका सिंह
उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी 2022 को 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले जाएँगे। इसमें कैराना (Kairana) जैसी चर्चित सीट भी है। कैराना में बीजेपी की मृगांका सिंह और सपा के नाहिद हसन के बीच सीधा मुकाबला है।

हिंदुओं के पलायन के कारण कुछ साल पहले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने वाले कैराना में कभी फुरकान, मुकीम काला, साबिर जंधेड़ी का खौफ था। आज भी दबी जुबान लोग बताते हैं कि कैसे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के जमाने में नाहिद हसन के परिवार के दबदबे के आगे पुलिस प्रशासन बेबस था। गुंडे हवालात से छुड़ा लिए जाते थे। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी अपनी ही दुकानों में दिनदहाड़े मार डाले जाते थे। आज इस कैराना में कानून-व्यवस्था दुरुस्त बताई जा रही। चुनावी चर्चाओं में अजयपाल शर्मा, अजय कुमार, सुकीर्ति माधव, प्रेम वीर सिंह राणा जैसों के किस्से हैं।

अजयपाल, सुकीर्ति, प्रेम वीर… किसी उम्मीदवार के नाम नहीं हैं। ये किसी पार्टी से ताल्लुक नहीं रखते। ये चुनाव लड़वा भी नहीं रहे। न चुनावी राजनीति बना रहे और न चुनावी नारे गढ़ रहे। असल में ये उत्तर प्रदेश के पुलिस अफसर हैं, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ताबड़तोड़ एक्शन लिए। न केवल अपराधियों को जेल के भीतर डाला, एनकाउंटर किए, बल्कि हिंदुओं के मन से उनका खौफ मिटाने के लिए थाने में हवन तक करवाए गए। पुलिसिंग के साथ व्यवसाइयों, नागरिकों को जोड़ा ताकि उनका विश्वास फिर से कानून पर बहाल हो।

यह हाल केवल कैराना का ही नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी आपको ​दिनेश कुमार पी, विद्यासागर मिश्रा, आकाश तोमर, कृष्ण कुमार गुर्जर जैसे अधिकारियों के किस्से लोग चाव से सुनाते हैं।

हर तरफ कानून-व्यवस्था में सुधार के चर्चे

यह कानून-व्यवस्था में सुधार ही है, जिससे कैराना सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश की तमाम सीटों पर बीजेपी को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त दिखती है। इस मोर्चें पर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने जो काम किया है, उसके आगे अन्य मुद्दे गौण हैं। कागजों के समीकरण जमीन पर टूटते दिख रहे हैं। कैराना के अमित स्वीट्स के मालिक कहते हैं, “जिंदा रहेंगे, चैन से रहेंगे तो आदमी महँगाई से लड़ लेगा। बीमारी से लड़ लेगा। जान है तो जहान है।” गंगोह विधानसभा क्षेत्र के महंगी गाँव के त्रिलोचन सिंह कहते हैं, “हमारे तरफ तो भाजपा ही है। इस सरकार में गुंडागर्दी खत्म है। पहले गुंडागर्दी थी। पशु भी खोल के ले जाते थे। रात में मार कुटाई भी करते थे। घर में घुसकर। खेत में से मोटर निकाल लेते थे। अब गुंडागर्दी खत्म है।” मुस्लिम बहुत देवबंद के मुर्तजा कुरैशी कहते हैं, “कानून-व्यवस्था इस सरकार में सबसे अच्छी है। भाजपा विधायक हिंदू-मुस्लिम में भेदभाव नहीं करते।”
        कैराना मेन मार्केट में विनोद सिंघल की दुकान, दाएँ मार डाले गए कारोबारी भाइयों की सालों से बंद पड़ी दुकान

सपा सरकार की गुंडागर्दी

पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में किस तरह की गुंडागर्दी थी, इसे कैराना की कुछ घटनाओं से समझा जा सकता है। इनकी वजह से ही हिंदू पलायन को मजबूर हुए थे। 16 अगस्त 2014 को फुरकान ने कारोबारी विनोद सिंघल को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था। 24 अगस्त 2014 को कारोबारी भाइयों राजेंद्र उर्फ राजू और शंकर की भरे बाजार उन्हीं की दुकान पर हत्या कर दी गई थी। इस दुकान का शटर आज भी गिरा है। इनकी दुकान कैराना में जिस जगह पर थी, उससे कुछ ही मीटर की दूरी पर सर्कल पुलिस ऑफिसर का कार्यालय और थाना है। विनोद की दुकान कैराना मेन मार्केट में है। अब उनके भाई वरुण सिंघल इस दुकान पर बैठते हैं।

कैराना में अब नहीं अखिलेश राज वाला खौफ

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया, “यहाँ के दो बदमाश बड़े कुख्यात थे। एक फुरकान और दूसरा मुकीम काला। रंगदारी नहीं देने पर एक हफ्ते के भीतर तीन दुकानदारों की हत्या कर दी गई थी। एक हत्या तो मेरी दुकान से 5-7 दुकान आगे ही की गई थी। अब माहौल अच्छा हुआ है और पलायन करने वाले वापस आए हैं।” यह पूछे जाने पर कि उस समय प्रशासन व्यापारियों की सुनवाई करता था, गुप्ता कहते हैं, “हमलोग जब शिकायत लेकर जाते थे तो अधिकारी कहते थे देखते हैं। लेकिन होता कुछ नहीं था। हमें लगता था कि ऊपर जो सरकार बैठी है, उसके कारण ही कुछ नहीं हो रहा। अब भी तो वही पुलिस है। वही प्रशासन है। अब क्यों टाइट काम कर रहा है? अब रंगदारी वाली घटना नहीं होती। कोई किसी को परेशान नहीं करता। सब आराम से व्यापार कर रहे हैं। पहले व्यापारी दुकान बंद करके जाते थे तो उनका थैला छीन लेने की भी घटनाएँ होती थी, जिसमें उनका पैसा, हिसाब-किताब होता था। ऐसी घटनाएँ अब नहीं होती है। कई गाँव ऐसे हैं जहाँ पहले रात को जाने में डर लगता था। अब लोग बेरोकटोक आ जा रहे। उस समय व्यापारियों में ऐसा खौफ था कि सब जल्दी से जल्दी दुकान बंद कर सुरक्षित घर चले जाना चाहते थे। अब ये डर नहीं रहा तो आराम से दुकान बंद करते हैं।”

चुनाव के अन्य मुद्दों को लेकर पूछने पर गुप्ता कहते हैं, “कैराना में आतंक ज्यादा बढ़ गया था। यहाँ के लोगों का कहना था कि चाहे खाना एक टाइम खाना पड़े, लेकिन कानून-व्यवस्था सुधरनी चाहिए। इसमें सुधार आया है। लोग चाहते हैं जो थोड़ी-बहुत बदमाशी बची हुई है अब वो भी खत्म हो जाए। आज भी यहाँ के लोगों के लिए कानून-व्यवस्था ही सबसे प्रमुख मुद्दा है।”

सपा की सरकार में सुनवाई थी ही नहीं

केवल कारोबारी ही नहीं, कैराना के आम नागरिक भी कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार को लेकर योगी सरकार की प्रशंसा करते हैं। फतेहपुर गाँव के कासिम अली का कहना है, “हमारे यहाँ जो मेन काम हुआ है वो है कि पहले जो चोरी-डकैती, घोटाले होते थे, वह अब बहुत कम हो गया है। कोई भी अब रात में आ-जा सकता है। कोई परेशानी नहीं हुई इस सरकार में। पहले की सरकारों में यहाँ घर से निकलना भी मुश्किल हो गया था। सुनवाई कहीं थी नहीं। आदमी किसी अधिकारी से मिलने जाता था तो वहाँ तक पहुँच ही नहीं पाता था।” यह पूछे जाने पर कि कानून-व्यवस्था के अलावा यहाँ कौन से मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, धर्मपाल कहते हैं, “कानून-व्यवस्था ही यहाँ मेन मुद्दा है।”

क्यों मजबूत बताई जा रहीं बीजेपी की मृगांका सिंह

मृगांका सिंह दो बार चुनावी राजनीति में किस्मत आजमा चुकी हैं। दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें ही हराकर सपा के नाहिद हसन विधायक बने थे। लेकिन, यह कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर योगी सरकार का कामकाज ही है, जिसकी वजह से इस बार मृगांका की स्थिति पिछले दोनों बार के मुकाबले मजबूत बताई जा रही। मृगांका सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “2017 के बाद से जो कैराना में स्थिति है, लोग उससे बहुत संतुष्ट हैं। योगी जी ने जो जीरो टॉलरेंस अपराध के प्रति रखा है, उससे यहाँ की जनता बहुत खुश है। वे स्वयं कह रहे हैं कि योगी राज में राम राज है।” मृगांका दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी हैं जिनकी इस इलाके में काफी प्रतिष्ठा रही है। उन्होंने ही सांसद रहते हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था।

नाहिद हसन मुस्लिम वोट के आसरे

नाहिद हसन के परिवार का भी इस इलाके में राजनीतिक दबदबा रहा है। इन पर कई गंभीर आरोप भी हैं। गैंगस्टर एक्ट में आरोपित नाहिद हसन को चुनावी पर्चा दाखिल करने के बाद जेल जाना पड़ा था। वे इसे अपने प्रचार का मुद्दा बना रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार की कमान सँभालने वाली उनकी बहन इकरा लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि मुस्लिम होने के कारण उनके परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। वे इसके जरिए मुस्लिम वोटों में बिखराव रोकने का प्रयास कर रहीं हैं।

कैराना में खिलेगा कमल?

कैराना विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता 318294 हैं। इनमें से करीब 1.37 लाख मुस्लिम हैं। सपा की पूरी सियासत इसके इर्द गिर्द ही सिमटी हुई है। लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार के कारण यह वोट बैंक बिखरता दिख रहा है। यही वजह है कि इस बार समीकरण मृगांका सिंह के पक्ष में बताए जा रहे हैं। लेकिन, एक सच यह भी है कि नाहिद का जेल जाना भी मुस्लिमों के बीच चर्चा का एक मुद्दा है। लिहाजा नतीजे इस बात से तय होंगे कि अपने परंपरागत वोट बैंक ​से छिटके लोगों को नाहिद हसन मतदान से ऐन पहले अपने पाले में लाने में कामयाब रहते हैं या नहीं।

उत्तर प्रदेश : सदफ ज़फर के लिए प्रचार करने पहुँचे कन्हैया कुमार पर कांग्रेस दफ्तर में ही फेंकी गई स्याही, समर्थकों का दावा – एसिड है

उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए प्रचार करने पहुँचे कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार पर स्याही फेंकी गई है। ये घटना कांग्रेस के ही लखनऊ मुख्यालय में हुई। जिसने जनता में कांग्रेस के ही विरुद्ध संकेत दे दिया है, जो इस बात को भी साबित कर रहा है कि कांग्रेस ही कांग्रेस को हराने में लगी हुई है। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि कांग्रेस के दफ्तर में धक्का-मुक्की चल रही है और कन्हैया कुमार के समर्थन किसी तरह उन्हें बचा कर ले जा रहे हैं। कन्हैया कुमार 1 फरवरी, 2022 को लखनऊ सेंट्रल की प्रत्याशी सदफ जफर के लिए प्रचार-प्रसार करने पहुँचे थे।

कांग्रेस पार्टी ने कन्हैया कुमार का नाम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने ‘स्टार प्रचारकों’ की सूची में भी रखा हुआ है। कन्हैया कुमार के समर्थकों ने स्याही फेंकने वाले युवक के साथ धक्का-मुक्की भी की। जबकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि ये स्याही नहीं, बल्कि एसिड है। हालाँकि, स्याही कन्हैया कुमार पर तो नहीं पड़ी लेकिन आसपास खड़े उनके कुछ समर्थकों के ऊपर इसकी कुछ बूँदें पड़ी थीं। स्याही फेंकने वाले युवक ने अब तक कुछ बताया नहीं है।

कन्हैया कुमार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लिए ‘डोर टू डोर’ कैम्पेन चलाने के लिए पहुँचे थे। उन्हें लखनऊ की गलियों में लोगों से हाथ जोड़ कर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट माँगते हुए भी देखा गया। उन्होंने बाकी पार्टियों पर सब कुछ वर्चुअल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही जनता के साथ सड़क पर है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ने पर उन्होंने कहा कि पुराने नेता छोड़ रहे हैं, क्योंकि अब पार्टी नई हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस अबकी दिखा देगी और भाजपा को उखाड़ फेंकेगी।

हालाँकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सम्बन्ध में कन्हैया कुमार ने कहा कि जनता जनार्दन का जो भी फैसला होगा, ये उन्हें मंजूर होगा। उन्होंने कहा कि ये चुनाव उनकी पार्टी प्रियंका गाँधी वाड्रा के नेतृत्व में लड़ रही है और इसीलिए ये बड़ा हो गया है। हाथरस, उन्नाव और लखीमपुर खीरी में हुई घटनाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तभी से कांग्रेस पार्टी लोगों के साथ सड़कों पर संघर्ष कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने देश बनाया है, इसीलिए वो इसे बिकने से बचा रही है।

उत्तर प्रदेश : बाबाजी (योगी आदित्यनाथ) से बेहतर उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं मिला- अपर्णा यादव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के बीच मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री अभी तक नहीं हुआ। सीएम योगी ना अपने संस्कार छोड़ें हैं और ना भविष्य को बेहतर बनाने की चिंता छोड़ी है। अपर्णा ने कहा, “मैं हिंदू राष्ट्र में हिंदी बोलने वाली व्यक्ति हूँ। ये बहुत ही जरूरी था कि राम मंदिर बने। ये सभी ने देखा था कि मैंने इसके लिए चंदा भी दिया था।” जबकि मुसलमानों को खुश करने और उनकी वोट लेने के लिए मुलायम सिंह द्वारा निहत्ते रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गयीं थी और अखिलेश यादव भी राममंदिर का विरोध करते रहे। 

टीवी 9 के कार्यक्रम ‘सत्ता का सम्मेलन’ के दौरान 27 जनवरी 2022 को अपर्णा यादव ने सीएम योगी की जमकर तारीफ करते हुए कहा, “आदरणीय महाराज जी से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इन्होंने अपने अतीत को नहीं छोड़ा, यानी महाराज अवैद्यनाथ जी के डायरेक्शन में जो राम मंदिर का आंदोलन शुरू हुआ था, वो आज (योगी सरकार में) पूरा हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये आज ‘कल के लिए’ कॉलेज, मेडिकल कॉलेज बनवा रहे हैं। तात्पर्य की इन्होंने (योगी आदित्यनाथ ने) न अपने अतीत को छोड़ा है और ना आने वाले कल को छोड़ा है। ये अमेल्मेशन जो हमें देखने को मिलता है, वो हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी में ही देखने को मिलता है। आज तक मैंने नहीं देखा कि ऐसा कोई मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में बना हो, जिसने आज तक ना अपने संस्कार छोड़ें हों और ना कल की चिंता छोड़ी हो। ये बहुत बड़ी बात है।”

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के भी मुख्यमंत्री रहने के सवाल पर अपर्णा ने कहा, “मैं तो कह रही हूँ कि बाबा जी जितना अच्छा मुख्यमंत्री कोई नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने (योगी आदित्यनाथ) प्रदेश में 27 मेडिकल कॉलेज दिए। 29 पॉलिटेक्निक कॉलेज दिए। कोविड के इस दौर में जब पूरा विश्व चरमरा गया है, वहीं उत्तर प्रदेश में बाबा जी ने पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण करवाया, जो ये दिखाता है कि वो शिक्षा पर फोकस कर रहे हैं।”

अपर्णा यादव ने यह भी कहा कि जब वो भाजपा में शामिल हुईं तो मुलायम सिंह यादव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भाजपा में शामिल होकर लौटने के बाद सबसे पहले वह मुलायम सिंह यादव से मिली थीं और उनके साथ अपनी तस्वीरें साझा की थीं। अपर्णा ने बताया कि मुलायम सिंह यादव ने उनसे कहा कि जिस चीज में खुशी है, वो करिए।

अपर्णा यादव ने आगे कहा, ”मैंने बहुत काम किया और मुझे इस बात का दुख है कि भैया (अखिलेश यादव) को मेरा काम नहीं दिखा। लेकिन, मुझे खुशी इस बात की है कि महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) को मेरा सामाजिक काम दिखा और उन्होंने इसकी प्रशंसा की।” अखिलेश यादव और सपा के खिलाफ प्रचार के सवाल पर अपर्णा यादव ने कहा कि पार्टी जो कहेगी, जहाँ कहेगी वहाँ वह प्रचार करने के लिए जाएँगी। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए वह राजनीति में नहीं आई हैं। राजनीति में उनका आने का मकसद लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।

इंटरव्यू के दौरान अपर्णा ने भाजपा के लिए एक गाना भी गाया। जिसके बोल हैं, ‘केशरी बाना सजा है वीर का श्रृंगार कर। ले चले हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार कर’। बता दें कि अपर्णा यादव एक बेहतरीन गायिका भी हैं।

उत्तर प्रदेश चुनाव : ‘दलित-मुस्लिम साथ चलेगा, बाबर जैसा राज चलेगा’: अलीगढ़ में AIMIM नेता गुफरान नूर

AIMIM का अलीगढ़ जिलाध्यक्ष गुफरान (बाएँ) और असदुद्दीन ओवैसी
उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा का समय नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे भारत एवं हिंदू विरोधी बयानों की बौछार होती जा रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए उनकी पार्टी के नेता भड़काऊ बयानबाजी को मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं।

अलीगढ़ के जमालपुर इलाके में AIMIM की एक नुक्कड़ सभा में मुस्लिम आक्रांता बाबर की राज लाने का संदेश दिया जा रहा है। पार्टी के जिलाध्यक्ष गुफरान नूर ने सभा के दौरान नारा दिया ‘दलित-मुस्लिम साथ चलेगा, बाबर जैसा राज चलेगा’। सभा में मौजूद लोगों ने भी इस नारे को दोहराया। इस दौरान सभा में 5-6 साल के छोटे-छोटे बच्चे भी नजर आए। छोटे-छोटे बच्चों के मन में इस तरह का विष भरने का काम लगातार जारी है। इस दौरान नूर ने हिंदुओं को मारने सहित कई भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें कहीं।

नूर ने आगे कहा, “अभी हरिद्वार के अंदर धर्म संसद हुई थी। आपने देखा होगा कि वहाँ एक धर्म विशेष को काटने की बात होती है, एक समुदाय को काटने की बात होती है। कौन था वो समुदाय जिसे काटने की बात हो रही थी? वो था मुस्लिम समुदाय। कुछ हिंदुत्व का चोला पहने आतंकवादी उस धर्म संसद में एक समुदाय को काटने की बात कर रहे थे।”

मुस्लिमों को हत्या के लिए उकसाते हुए गुफरान नूर ने कहा, “हमारे इस्लाम में ना खुद मरने की इजाजत है और ना किसी को मारने की इजाजत है, लेकिन जालिम जब जुल्म हद पार कर जाए तो उसे….(मारने का इशारा करते हुए)। उसे अपने बीच से हटाने (यानी मारने) की इजाजत है।”

गुफरान ने कहा, “अगर दलित और मुस्लिम एक हुए तो इंशाअल्लाह हम पूरे हिंदुस्तान के अंदर हम लोग राज कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी हद तक हो। बाबर कोई गलत नहीं था। जैसे हालात चल रहे हैं, बाबर जैसा शासन होना चाहिए। इंशाल्लाह वो दिन जरूर आएगा कि एक दिन बाबर जैसा राज होगा।” उन्होंने कहा कि इस्लाम ये नहीं कहता कि एक बच्चा बनाएँ या दो बच्चा बनाएँ। खिलाने वाले अल्लाह-ताला हैं, परवरिश करने वाला अल्लाह-ताला है।

AIMIM चीफ ओवैसी ने मुरादाबाद में लोगों को भड़काते हुए कहा था कि म्यामांर के मुस्लिमों की तरह भारत के मुस्लिमों का भी रोहिंग्या जैसा हाल हो जाएगा। ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम अब दूसरे को राज करने के लिए नहीं चुनेंगे, बल्कि खुद राज करेंगे। उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि एक मुसलमान दरी बिछाता रहे… दरी बिछाता रहे… उसे बेशरम किया जाए, लेकिन उसके मुकद्दर में दरी बिछाना नहीं है। मैं तुमसे कहता हूँ… अब तुम दर्री नहीं बिछाओगे, अब तुम कुर्सी पर बैठोगे और राज भी करोगे… इंशाल्लाह।”