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कानपुर में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी, बिरयानी खिलाकर पढ़ाया गया मजहबी कट्टरता का पाठ: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

                    कानपुर हिंसा में रुपए देकर मदरसे के बच्चों से कराई पत्थरबाजी (तस्वीर-इंडियन एक्सप्रेस)
CAA के विरोध में धरना/प्रदर्शन हो, किसान आंदोलन हो या फिर अब नूपुर के बहाने खेला गया साम्प्रदायिकता का नंगा नाच,सभी में रुपयों के लेन-देन की बात सामने आयी है, जो बहुत चिंताजनक है। फिर प्रदर्शनकारी गरीब, मज़लूम और बेगुनाह आदि कैसे? अब कानपुर दंगे में भी रुपयों का लेन-देन सामने आ रहा है। जिन बच्चों को रुपयों का लालच देकर पत्थरबाज़ी करवाई गयी, यदि यह बात सच है, फिर मास्टरमाइंड के साथ-साथ उन लालची बच्चों के साथ भी उसी सख्ती से पेश आना चाहिए, ताकि भविष्य में लालच में आकर देश की शांति भंग करने का साहस न कर सके। केवल बच्चा समझकर कोई नरमाई नहीं बरती जानी चाहिए। धन का लालच देकर इन्हें कभी भी ख़रीदा जा सकता है। इन बच्चों एवं परिजनों को मिली सरकारी सुविधाओं की ब्याज समेत वसूली की जाए, और भविष्य में भी इन्हें हर सरकारी सुविधा से वंचित किया जाना चाहिए। पूछा जाए पेट्रोल के किसने पैसे दिए, पेट्रोल बम बनाने का सामान और पत्थर कहाँ से और किसने प्रबंध करवाया।   

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून, 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे पुलिस की रडार पर है। हिंसा के दौरान इन बच्चों ने जमकर पत्थरबाजी की और बम फेंके थे। CCTV फुटेज और वायरल फोटो-वीडियो की जाँच से इस बात की पुष्टि हुई है। इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के आदेश पर पुलिस ने जाँच शुरू की तो ऐसे कई चौकाने वाले खुलासे हुए। जिन मदरसों के ये बच्चे थे, उन मदरसों को बंद करने के साथ-साथ इन मदरसों के संरक्षकों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई है कि जिले में हिंसा कराने के लिए मदरसे के बच्चों को पैसे दिए गए थे। यहाँ तक कि हिंसा से पहले उन्हें कई बार बिरयानी भी खिलाई गई। साथ ही बच्चों को मजहबी कट्‌टरता का भी पाठ पढ़ाया गया था।

कश्मीर में पत्थरबाजी करने के लिए आतंकी समूह भी ऐसा करते रहे हैं। जिससे इलाके के मदरसे में पढ़ने वाले छात्र भी अब पुलिस के रडार पर हैं। इसके अलावा एक बार फिर से कानपुर हिंसा के आरोपितों को पाँच दिन की रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई है। वहीं इस मामले में कानपुर पुलिस जल्द ही जाँच पूरी करके अपनी रिपोर्ट NCPCR को सौंपेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, JCP आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया, “बच्चों का हिंसा में शामिल होना गंभीर बात है। NCPCR ने भी इसका संज्ञान लेते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा को जाँच का आदेश दिया है। अभी तक कि जाँच में सामने आया कि नाबालिग बच्चों को रुपए देकर हिंसा के लिए डायवर्ट किया गया।”

उन्होंने बताया कि बच्चों तक फंड सीधे नहीं, बल्कि अलग-अलग चैनल से भेजे गए। यानी इलाके के नेताओं और गली-मोहल्ले के लोगों से रुपए बँटवाए गए। जिससे तय समय पर सैकड़ों नाबालिग हाथ में पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे और जमकर पथराव और बमबाजी किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में कानपुर के नामी बिल्डर हाजी वसी समेत आठ बिल्डरों का नाम सामने आया है। जिन्होंने कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी को फंडिंग करते थे। पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि कहीं इस पैसे का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए तो नहीं किया गया है।

कानपुर (Kanpur ) में 3 जून को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के दौरान पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया था। इसको लेकर अब खुलासा हुआ है कि घटना के 48 घंटे पहले ही चरमपंथियों ने सुनियोजित तरीके से बोतलों में पेट्रोल इकट्ठा किया था। हिंसा के दैरान कानपुर में दंगाइयों ने करीब 50 धमाके किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथियों ने शहर के डिप्टी पड़ाव स्थित भारत पेट्रोलियम के पंप से बोतलों में पेट्रोल भरवाया था। सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा होने के बाद कानपुर के जिलाधिकारी ने पेट्रोल पंप का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है। इसके साथ ही सभी 37 पंपों की जाँच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दिया था।

बरखा दत्त की ‘Shero’ का हिजाब खींचकर केरल पुलिस ने गाड़ी में बैठाया

                                                        आयशा रेन्ना की हालिया तस्वीर
साल 2019 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान Shero बनकर उभरी आयशा रेन्ना एक बार फिर से केरल में प्रदर्शन के कारण चर्चा में आई है। दरअसल, आयशा केरल के मल्लापुरम में भीड़ जुटाकर उस जावेद के घर पर हुई ‘बुलडोजर कार्रवाई’ का विरोध कर रही थी, जो प्रयागराज हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता कहा जा रहा है। आयशा पर आरोप है कि उसने मल्लापुरम में हाईवे को ब्लॉक करने के लिए भीड़ का नेतृत्व किया, जिसके बाद केरल पुलिस उस प्रदर्शन में पहुँची और खींचते हुए आयशा को वहाँ से बाहर ले गई।

Life of Rana Ayyub:

•Tweets how muslims are unsafe in India.

•Puts phone on side table n jumps into swimming pool.

•Comes out n posts cool selfie on Instagram.

•Opens twitter n Tweets Muslims are unable to breath in India because.

•Sips mocktail and posts selfie on IG.

— Facts (@BefittingFacts) June 13, 2022

सामने आई तस्वीर में आयशा नारे लगाने वाली मुद्रा में हैं और केरल की महिला पुलिसकर्मी उनका हिजाब पकड़कर उन्हें खींचते हुए ले जा रही हैं। अगली वीडियो में कुछ अन्य महिला पुलिसकर्मी आयशा को उठाकर गाड़ी में बिठा रही हैं वही आयशा गाड़ी में बैठने से मना कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने आयशा को हिरासत में ले लिया है। कुछ लोग आयशा के साथ हुए ऐसे बर्ताव के लिए केरल पुलिस की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोग केरल पुलिस को सही भी ठहरा रहे हैं।

आयशा रेन्ना केरल के मल्लापुरम के कोनडोट्टी की रहने वाली है। साल 2019 में जब सीएए एनआरसी के खिलाफ प्रोटेस्ट हुए तो आयशा की तस्वीर मीडिया में वायरल हुई थी। वह अपने साथियों को बचाने के लिए पुलिस के आगे खड़ी दिखी थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते उसकी फोटोज आई, जिन्हें देख बरखा दत्त ने उन्हें अपने ट्वीट में अपनी जामिया और शाहीन बाग की शीरो बताया। 2019 से पहले की बात करें तो आयशा 2015 में भी नागपुर में मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को सजा मिलने पर दुख जता चुकी हैं। हाल में उन्होंने यूपी के दंगों के साजिशकर्ता जावेद पंप और उनकी बेटी आफरीन फातिमा को समर्थन दिया है। आफरीन को लेकर भी पुलिस ने कहा है कि वो भी ऐसी ही गतिविधियों में शामिल हैं।