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खुद को ‘ईसा मसीह’ मानने वाले नासिरे बेस्ट ने व्हाइट हाउस के बाहर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियाँ, चर्च में क्यों नहीं बरसाईं?

                                    व्हाइट हाउस और हमलावर नासिरे बेस्ट (फोटो साभार - आज तक)
पिछले दो/तीन दिनों से अमेरिका में फायरिंग के समाचार सुर्खी बने हुए हैं, आखिर हो रही फायरिंग के पीछे क्या कोई षड़यंत्र हैं?  

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन DC में शनिवार (23 मई 2026) की शाम व्हाइट हाउस के बाहर अचानक गोलियाँ चलने लगीं। यह फायरिंग व्हाइट हाउस के बेहद सुरक्षित इलाके में बने एक सिक्योरिटी चेकपॉइंट के पास हुई।

घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे, जिसके बाद पूरे इलाके में तुरंत हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को गोली मार दी। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

कैसे शुरू हुई पूरी घटना?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाम करीब 6 बजे एक युवक 17th स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू के पास बने सिक्योरिटी चेकपॉइंट तक पहुँचा। कुछ ही देर बाद उसने अपने बैग से रिवॉल्वर निकाली और सीक्रेट सर्विस अधिकारियों पर फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उसने शुरुआती दौर में कम से कम तीन गोलियाँ चलाईं।

सीक्रेट सर्विस के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की आवाज सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने मीडिया कर्मियों और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि घटना के दौरान 20 से 30 राउंड तक गोलियाँ चलीं। घटना में एक आम नागरिक भी गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हालाँकि राहत की बात यह रही कि किसी भी सीक्रेट सर्विस अधिकारी को चोट नहीं आई। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमलावर सुरक्षा घेरे को पार नहीं कर पाया।

 घटना के बाद पूरे व्हाइट हाउस इलाके को कई घंटों तक घेराबंदी में रखा गया। अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI और वॉशिंगटन DC पुलिस अब इस मामले की जाँच कर रही हैं। जाँच एजेंसियाँ CCTV फुटेज, चश्मदीदों के बयान और बैलिस्टिक सबूतों की जाँच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपित का मकसद क्या था।

कौन था नासिरे बेस्ट?

पुलिस ने हमलावर की पहचान 21 साल के नासिरे बेस्ट के रूप में की है, जो मैरीलैंड का रहने वाला था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह पहले भी सीक्रेट सर्विस की नजर में आ चुका था। उस पर व्हाइट हाउस से दूर रहने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह कई बार प्रतिबंधित इलाके के आसपास देखा गया।

बताया जा रहा है कि जून 2025 में उसने सीक्रेट सर्विस एजेंटों को रोककर धमकी दी थी, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया था। जुलाई 2025 में भी वह प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश करते पकड़ा गया था।

नासिरे बेस्ट मानसिक रूप से परेशान था और खुद को ईसा मसीह मानता था। शनिवार की घटना में उसने रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया लेकिन सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सवाल यह है कि अगर आरोपी मानसिक रूप से परेशान था तो व्हाइट हाउस ही क्यों चुना, चर्च क्यों नहीं चुना? यह निश्चितरूप से कोई सुनियोजित षड़यंत्र है।   

 ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला होंडुरास, दो हमलों में 25 लोगों की मौत: बंदूकधारियों ने मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर बरसाईं गोलियाँ

सेंट्रल अमेरिका के देश होंडुरास में गुरुवार (21 मई 2026) को हुई दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। इन हमलों में अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 6 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

सबसे बड़ा हमला ट्रूजिलो इलाके के एक खेत और प्लांटेशन में हुआ, जहाँ हथियारबंद हमलावरों ने मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में 19 लोगों की जान चली गई।

यह इलाका लंबे समय से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर चल रहे विवादों से प्रभावित है। यहाँ पर्यावरण और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को पहले भी धमकियाँ मिलती रही हैं।

दूसरी घटना ग्वाटेमाला सीमा के पास ओमोआ इलाके में हुई, जहाँ बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी राजधानी तेगुसिगल्पा से एंटी-गैंग मिशन पर जा रहे थे, तभी उन पर गोलियाँ बरसा दी गईं।

इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। पुलिस और सेना ने दोनों इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और जाँच के लिए फॉरेंसिक टीमों को भेजा गया है।

क्या भारत से अपने लड़ाकू जहाज को छुड़ाने(वीडियो) के लिए डील की जा रही है? भारत के साथ ‘बड़ी ट्रेड डील’ करने का ट्रंप ने किया दावा, घट सकता है टैरिफ: बातचीत के लिए भारतीय दल पहुँचा अमेरिका, 41 लाख करोड़ रूपए से भी अधिक का होगा फायदा

         ट्रंप और नरेंद्र मोदी (वीडियो का स्क्रीनशॉट/फाइल फोटो, साभार- X- @WhiteHouse/@Narendramodi)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे भारत के साथ एक ‘बहुत बड़ी ट्रेड डील’ करने जा रहे हैं। गुरुवार (26 जून 2025- स्थानीय समय के अनुसार) को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ कार्यक्रम में भारत के लिए दरवाजे खोलने की बात कही है। ट्रंप का यह बयान चीन के साथ एक नए समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद सामने आया है।

व्हाइट हाउस में कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हर कोई चाहता है कि वे ट्रेड डील करे और इसका हिस्सा बने। हम हर देश के साथ डील नहीं करने जा रहे। ट्रंप ने कहा, “आपको याद है कुछ महीने पहले प्रेस ने कहा था कि क्या आपको सचमुच लगता है कि इसमें किसी को रुचि होगी? खैर, हमने कल चीन के साथ एक डील साइन की है।”

 ट्रंप ने आगे कहा, “हम हमारे पास कुछ बेहतरीन डील्स हैं और हम उसे लेकर आ रहे हैं- शायद भारत के साथ। हम इंडिया के साथ एक बहुत बड़ी डील की शुरुआत करने जा रहे हैं। चीन के साथ ट्रेड डील करके हम चीन के लिए भी नए रास्ते खोलने जा रहे हैं।”

अमेरिका पहुँची भारतीय टीम

भारत से वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में ट्रेड डील पर बातचीत के लिए एक टीम अमेरिका पहुँची है। अमेरिकी टीम से भारतीय समूह दो दिन से बातचीत कर रहा है। भारत और अमेरिका वर्तमान में एक अंतरिम व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं।

अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 को भारत से निर्यात होने वाले सामानों पर 26% अतिरिक्त टैक्स लगाने का ऐलान किया था, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया। यह 90 दिन 9 जुलाई 2025 को समाप्त हो रहे हैं।

भारतीय समूह अमेरिकी टीम के साथ बातचीत कर 9 जुलाई से पहले इस समझौते पर अपनी डील सुनिश्चित करना चाहता है। अगर यह ट्रेड डील नहीं होती है तो भारत से निर्यात होने वाले सामानों पर अतिरिक्त टैक्स लागू हो जाएगा।

भारत-अमेरिका को होगा फायदा

भारतीय समूह के साथ अगर अमेरिका की यह ट्रेड दिल सकारात्मक रूप लेती है तो भारत और अमेरिका के बीच 2030 तक व्यापार 500 अरब डॉलर यानी लगभग 41 लाख 75,000 करोड़ रुपए तक पहुँच जाएगा। इस समय यह 191 अरब डॉलर (15 लाख 94 हजार 961 करोड़ रुपए) है। इसकी वजह से भारत के लिए अमेरिकी कंपनियों में भी कई अवसर खुल सकते हैं।

पाकिस्तान की गुलाम कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने केवल पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाया: असीम मुनीर को नहीं आया था अमेरिका से कोई बुलावा, सच खुलने पर लग रही लताड़, लोग बोल रहे- माफी माँगो

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पाकिस्तानी फौज का मुखियाजनरल असीम मुनीर (फोटो साभार-newsX/Indiatoday)
समय आ गया है कि जनता को जानना चाहिए कि कांग्रेस स्थापना किसने की और क्यों? कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिशर द्वारा भारतीयों का ध्यान आज़ादी आंदोलन से हटाने के लिए की गयी और आज की कांग्रेस पार्टी की स्थापना के उद्देश्य को अपनाते हुए देश की अस्मिता के विरुद्ध जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है। पाकिस्तान जाकर रोते हैं "मोदी से बचाओ", इन पागलों से पूछो कि क्या मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान में चुनाव होंगे या भारत में?  

गौरतलब बात है कि कांग्रेस के कार्यकाल में हो रहे आतंकी हमलों पर "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दुओं को बदनाम कर अपने आका पाकिस्तान के आतंकियों को बचाने का काम किया जा रहा था। माना अमेरिका पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है इसका मतलब यह नहीं कि पाकिस्तान इतनी बड़ी गलती दुनियां में बेनकाब हो जाए।      

पिछले दिनों एक खबर आई थी कि पाकिस्तानी फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर को अमेरिका ने सेना दिवस के मौके पर अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। खबर उड़ी कि मुनीर को व्हाईट हाउस बुलाया गया है। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत की आलोचना की थी। अब अमेरिका ने इसे फर्जी खबर करार दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सामने आ रहा है।

असीम मुनीर के न्यौते पर अपने ट्वीट में जयराम ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। लिखा, “यह खबर भारत के लिए कूटनीतिक और सामरिक दृष्टि से एक बड़ा झटका है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मोदी सरकार कह रही है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, ऐसे में पाकिस्तानी सेना प्रमुख का अमेरिकी सेना दिवस में बतौर अतिथि शामिल होना निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है”।

जयराम रमेश ने अमेरिका पर भी सवाल उठाया था और कहा था “यह वही व्यक्ति है जिसने पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले भड़काऊ और उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया था, सवाल उठता है कि अमेरिका की मंशा क्या है?”

हालाँकि कुछ समय बाद ही अमेरिका ने स्पष्ट किया कि असीम मुनीर के न्यौते वाली बात पूरी तरह से अफवाह है। अब, जब पूरी खबर ही झूठी निकल गई तो सोशल मीडिया पर जयराम रमेश को लोगों ने घेरना शुरू कर दिया। एक के बाद एक कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट कर कहा कि जयराम रमेश को अपने आलोचनात्मक और झूठे बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए।

किसी वरिष्ठ नेता की तरफ से इस तरह की खबरें फैलाना और उसी खबर के आधार पर देश के ही खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणी करना उन पर भी कई सवाल खड़े करता है।

जयराम रमेश ने जब पोस्ट किया था तब कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी भारत के खिलाफ इसी तरह की बयानबाजी की थी। हालाँकि बाद में जो खबर आई वो जयराम के बयान और सोशल मीडिया पर फैली अफवाह से एक रत्ती भी मेल नहीं खा रही है। ऐसे में लोगों का गुस्सा भी जायज है।

ट्रंप ने कुर्सी खींच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिठाया- दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ने जीत लिया 140 करोड़ भारतीय का दिल


अमेरिका के व्हाइट हाउस में गुरुवार रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हुई। इस दौरान दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ ऐसा किया कि उन्होंने 140 करोड़ भारतीय का दिल जीत लिया। व्हाइट हाउस में हुए गर्मजोशी के साथ स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी जब विजिटर्स डायरी में एंट्री करने के लिए बैठने जा रहे थे तो अमेरिका के राष्ट्रपति ने खुद अपने हाथों से कुर्सी खींचकर उनके लिए जगह बनाई और उन्हें बिठाया। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री के विजिटर्स डायरी में दस्तखत करते तक उनके पीछे खड़े रहे।

इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री अपनी पुस्तक, ‘आवर जर्नी टुगेदर’ की एक कॉपी भेंट की। अपनी इस पुस्तक पर हस्ताक्षर कर उन्होंने लिखा, ‘Mr Prime Minister, you are great.’ इस फोटोबुक में ट्रंप के पहले कार्यकाल का ब्योरा है। इसमें ‘हाउडी मोदी’ और नमस्ते ट्रंप जैसे कार्यक्रम के फोटो भी शामिल किए गए हैं।



रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान- ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित कर पुतिन ने मोदी विरोधियों का दिया करारा जवाब ; अमेरिका भी हुआ मुरीद, कहा- भारत खत्म करवा सकता है यूक्रेन से युद्ध: ऑस्ट्रिया के चांसलर ने पोस्ट की सेल्फी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने भारत विरोधी ताकतों की कठपुतली बन विपक्ष ने क्या-क्या हत्कण्ठे नहीं अपनाए, लेकिन मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए। इन सभी में कौतुहल करने रूस के राष्ट्रपति ने मोदी को 9 जुलाई 2024 को रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से आधिकारिक रूप से सम्मानित किया। पीएम मोदी को मिला यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि रूस और भारत के बीच एक खास रणनीतिक साझेदारी विकसित करने और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने में उन्होंने विशेष योगदान दिया है। पीएम मोदी का एक ग्लोबल लीडर के तौर पर ओहदा लगातार बढ़ता जा रहा है। विदेशी धरती पर उन्हें कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से नवाजा है। बीते 10 सालों में लगभग 15 देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है। इसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं।
         राष्ट्रपति पुतिन और ऑस्ट्रिया के चांसलर नेहमार के साथ पीएम मोदी (चित्र साभार: Narendra Modi/X)

यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को दिए गए शीर्ष राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों की श्रृंखला में एक और बड़ी उपलब्धि है। इसके पहले ग्रीस ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर (Grand Cross of the Order of Honour) से सम्मानित किया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया था। फिजी ने अपने देश के सर्वोच्च सम्मान ‘कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ और पापुआ न्यू गिनी ने ‘द ग्रैंड कम्पैनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से सम्मानित किया था। 

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार चैंपियंस ऑफ अर्थ, बहरीन के शीर्ष पुरस्कार किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां, यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायेद, मालदीव के सर्वोच्च सम्मान निशान इज्जुद्दीन, रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल, दक्षिण कोरिया के सियोल शांति पुरस्‍कार, फिलिस्तीन का सर्वोच्च ग्रैंड कॉलर सम्मान, सऊदी अरब के सर्वोच्च सैश ऑफ किंग अब्दुल अजीज सम्मान, अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड के साथ प्रथम फिलिप कोटलर प्रेशिडेंशियल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान- ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार (9 जुलाई 2024) को रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया गया। ये रूस का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से आधिकारिक रूप से सम्मानित किया। 2019 में रूस ने उनको इस सम्मान को देने का ऐलान किया था। यह पुरस्कार रूस और भारत के बीच एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित करने और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के पीएम मोदी के विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये 326 साल पुराना है। 1698 में जार पीटर द ग्रेट ने रूस के संरक्षक संत सेंट एंड्रयू के सम्मान में ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ को शुरू किया था। ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ मूल रूप से उत्कृष्ट नागरिक और सैन्य योग्यता के सम्मान और देश की असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार के प्रतीक चिन्ह में एक नीला सैश, सेंट एंड्रयू के क्रॉस वाला एक बैज और छाती पर पहना जाने वाला एक सितारा शामिल होता है। बैज सेंट एंड्रयू का एक सुनहरा क्रॉस है, जिसमें एक एक्स-आकार के क्रॉस पर यीशु की छवि है। 1917 में रूसी क्रांति के बाद इस पुरस्कार को समाप्त कर दिया गया था लेकिन सोवियत काल के बाद इसे फिर से शुरू किया गया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा के बाद अमेरिका ने भी भारतीय विदेश नीति का लोहा माना है। अमेरिका ने कहा है कि भारत अपनी रूस के साथ पुरानी दोस्ती के सहारे यूक्रेन-रूस संघर्ष खत्म करवा सकता है। अमेरिका के व्हाइट हाउस ने यह टिप्पणी की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रेस सचिव जीन पियरे ने मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “भारत हमारा रणनीतिक साझेदार है और हम उसके साथ सभी मुद्दों पर एकदम खुलेपन से बात करते हैं, इन मुद्दों में उसके रूस के साथ रिश्ते भी शामिल हैं। हमने इस मामले पर पहले भी बातचीत की है। हमें लगता है कि यह जरूरी है कि भारत समेत सभी देश यूक्रेन के मामले में स्थायी शांति हासिल करने के प्रयासों को समर्थन दें।”

आगे उन्होंने भारत के इस मामले में सहयोग करने को लेकर कहा, “भारत के रूस के साथ उसके पुराने रिश्ते उसे यह क्षमता भी देते हैं कि वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन से युद्ध हो खत्म करने की बात कह सके।” अमेरिका ने कहा कि युद्ध रूस द्वारा चालू किया गया था और इसे उसके द्वारा ही खत्म किया जाएगा।

अमेरिका की यह टिप्पणी पीएम मोदी के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में यूक्रेन-रूस संघर्ष को उठाने के बाद आई है। पीएम मोदी ने मंगलवार (9 जुलाई, 2024) को राष्ट्रपति पुतिन के साथ आधिकारिक बातचीत में कहा था कि दोनों देशों के विवाद का समाधान युद्धभूमि पर नहीं निकलने वाला है। उन्होंने कहा था कि बम, बंदूकों और गोलीबारी के बीच बातचीत नहीं हो सकती है।

मोदी ने इस बातचीत के दौरान कहा था कि भारत शांति बहाली के लिए हर सहयोग को तैयार है। उन्होंने कहा था भारत स्वयं भी शांति के पक्ष में है और विश्व समुदाय को यह बात जाननी चाहिए। पीएम मोदी ने इस दौरान यह भी कहा था कि राष्ट्रपति पुतिन का शांति के विषय में बात करना उन्हें आशान्वित कर रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस दौरान पीएम मोदी के शांति प्रयासों की सराहना की थी। उन्होंने इस दौरान भारत और रूस के मजबूत रिश्तों पर भी बात की थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान दिया था।

मोदी तीन दिवसीय विदेश (8-10 जुलाई) दौरे पर हैं। वह रूस में विदेश यात्रा पूरी करने के बाद मंगलवार को ऑस्ट्रिया पहुँचे थे। यहाँ ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने उनके एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमार से भी मुलाक़ात की है। वह उनके साथ अब आधिकारिक बातचीत में शामिल होंगे।


राहुल गांधी की व्हाइट हाउस में गुप्त बैठक! मोदी को सत्ता से हटाने के लिए 2024 चुनाव के लिए क्या बनी सीक्रेट रणनीति?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अमेरिकी दौरे को लेकर एक अहम खुलासा हुआ है। राहुल गांधी ने अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में गुप्त बैठक की। वे न तो भारत में विपक्ष के नेता हैं और न ही किसी संवैधानिक पद पर हैं। अब तो वह सांसद भी नहीं हैं। ऐसे में राहुल गांधी किस हैसियत से व्हाइट हाउस पहुंचे, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। राहुल की इस बैठक न केवल व्हाइट हाउस ने बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी गुप्त रखा है जो कि संदेह पैदा करता है। अमेरिका की ऐसी क्या मजबूरी है कि एक सजायाफ्ता, अयोग्य सांसद से बैठक उसे जरूरी लगा? इस बैठक में राहुल अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण एशिया के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू सहित वरिष्ठ अमेरिकी अफसरों से मुलाकात की। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार जब गिरी थी तब उन्होंने डोनाल्ड लू को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। इसे देखते हुए यह प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए जो अंतर्राष्ट्रीय साजिशें रची जा रही हैं, कहीं राहुल गांधी भी उसका हिस्सा तो नहीं हैं?

राहुल गांधी की व्हाइट हाउस बैठक भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए?
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी 2 जून को व्हाइट हाउस गए थे। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका संबंधों पर तफसील से चर्चा की। इस दौरान राहुल गांधी ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर हिंदुस्तान के स्टैंड को लेकर भी बातचीत की। राहुल के व्हाइट हाऊस में गुप्त बैठक का यह एक पहलू है जबकि दूसरा पहलू कुछ और ही है। अब दूसरे पहलू का खुलासा हुआ है। हालांकि इस बैठक के पीछे उनकी क्या मंशा थी और आखिर उन्होंने इसे गुप्त क्यों रखा। यह बड़े सवाल खड़ी करती है, यह चौंकाने वाली है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसके बुलावे पर व्हाइट हाऊस गए थे राहुल? वहां किससे मुलाकात हुई और क्या बातें हुईं? क्या इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में सत्ता परिवर्तन रहा?

राहुल-डोनाल्ड लू मुलाकात को गुप्त क्यों रखा गया?
राहुल गांधी अपने अमेरिकी दौरे के दौरान व्हाइट भी गए और वहां उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण एशिया के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू सहित वरिष्ठ अमेरिकी अफसरों से मुलाकात की थी। उनकी इस मुलाकात को गुप्त रखा गया था। उनके इस कथित व्हाइट हाउस दौरे पर न तो बाइडेन प्रशासन और न ही कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई स्टेटमेंट जारी किया गया है। सवाल यही उठता है इस मुलाकात को गुप्त क्यों रखा गया?

राहुल गांधी 2024 में व्हाइट हाउस के उम्मीदवार होंगे?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने चुपके से व्हाइट हाउस का दौरा किया और अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका मतलब है कि व्हाइट हाउस भारत में शासन परिवर्तन अभियान चला रहा है। इसे इस रूप में समझा जा सकता है कि राहुल गांधी 2024 के चुनाव के लिए व्हाइट हाउस के उम्मीदवार हो सकते हैं। और इसमें उनकी मदद के लिए CIA, डीप स्टेट, मीडिया, टेक दिग्गज, जार्ज सोरोस द्वारा वित्तपोषित NGO भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप करेंगे। सवाल यह भी है कि जैसे कांग्रेस पार्टी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जिस तरह गुप्त समझौता किया जिसका विवरण आज तक सामने नहीं आ पाया। क्या अमेरिका में राहुल ने कुछ इसी तरह का गुप्त समझौता तो नहीं किया। अमेरिका का समर्थन हासिल करने के बदले राहुल ने उन्हें क्या आश्वासन दिया है?

विदेश नीति को लेकर लेख में राहुल की प्रशंसा
‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में सीमा सिरोही द्वारा लिखे गए लेख में राहुल गांधी की जमकर प्रशंसा की गई है। साथ ही बताया गया है कि विदेशी नीतियों के मामले में अब वो परिपक्व हो गए हैं और एक रणनीतिक साझेदार के रूप में अमेरिका की महत्ता समझते हैं। प्रवासी भारतीय समुदाय में उत्साह भरने के लिए भी इस लेख में राहुल की प्रशंसा की गई है। जब ट्विटर पर ‘हिन्दू एक्शन’ पेज ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलोचक बताया तो वो कहने लगीं कि पीएम मोदी को प्रतिदिन साष्टांग प्रणाम न करने वालों को उनका आलोचक बता दिया जाता है। हालांकि, सीमा सिरोही ने माना कि राहुल गांधी द्वारा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को सेक्युलर बताया जाना ठीक नहीं था।

राहुल गांधी ने अमेरिका में बोले कई सफेद झूठ, भारत को नीचा दिखाया
राहुल गांधी ने अमेरिका में भारत को नीचा दिखाने वाले कई ऐसे बयान दिए जो विवादस्पद रहे। डीआरडीओ की खुफिया जानकारी को विदेशी एजेंसियों के साथ साझा करने वाले पत्रकार विवेक रघुवंशी का अपरोक्ष समर्थन किया। इसी बहाने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने मुस्लिम लीग को धर्मनिरपेक्ष करार दिया। सनातन संस्कृति का अपमान किया। प्रवासी भारतीयों से कहा कि भारत वापस आएं और लोकतंत्र के साथ संविधान की रक्षा करें। पीएम मोदी का अपमान किया। मुसलमानों को खुश करने के लिए उनकी तुलना दलितों से की। राहुल ने कहा कि उनकी भारत जोड़ो यात्रा रोकने की कोशिश की गई। जबकि वह बेखौफ कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत विरोधी तत्वों से मिलते रहे। राहुल ने कहा कि भारत में राजनीति करना अब आसान नहीं है और एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। यहां राहुल से पूछा जाना चाहिए कि अगर राजनीति करना आसान नहीं तो फिर वह हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक का चुनाव कैसे जीते? राहुल ने एक और सफेद झूठ बोला कि ‘मैं पहला ऐसा व्यक्ति, जिसे मानहानि मामले में इतनी बड़ी सजा मिली।’ जबकि उनसे पहले कई सांसदों के दोष सिद्ध होने पर संसद सदस्यता जा चुकी है। कुछ लोग भारत से इतनी नफरत करते हैं कि कुछ भी बोलते हैं, सारी दुनिया देखती है भारत को विश्व गुरु की तरह, पर कुछ लोग आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं जिससे उन्हें कुछ नजर नहीं आताl

भारत में अमेरिका मिशन के डिप्टी चीफ रह चुके हैं डोनाल्ड लू
डोनाल्ड लू फॉरेन सर्विस ऑफिसर हैं, जिनके पास अमेरिकी सरकार के लिए काम करने का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह भारत में 2010 से लेकर 2013 तक अमेरिका मिशन के डिप्टी चीफ रह चुके हैं। डोनाल्ड दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों पर विदेश विभाग में सबसे टॉप राजनयिक हैं। वह किर्गिस्तान और अल्बानिया के पूर्व राजदूत भी रह चुके हैं। डोनाल्ड ने भारत में दो अलग-अलग मौकों पर अमेरिकी दूतावास में अपनी सेवाएं भी दी हैं।

इमरान खान ने सरकार गिरने के लिए डोनाल्ड लू को दोषी ठहराया था
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने भी अपनी सरकार गिरने के लिए डोनाल्ड लू को दोषी ठहराया था। इमरान खान ने यह साफ तौर पर कहा था कि अमेरिकी डिप्लोमैट डोनाल्ड लू हमारी सरकार गिराने की साजिश में शामिल था। बाइडेन प्रशासन ने डोनाल्ड लू मध्य और दक्षिण एशियाई देशों अमेरिकी एजेंडा लागू करने का दायित्व सौंपा है।

भारत तरक्की की राह पर, अमेरिका और डीप स्टेट घबराया
राहुल गांधी की व्हाइट हाउस में अमेरिकी अधिकारियों की मुलाकात और इसे गुप्त रखने से यह बात साफ हो जाती है कि यह भारत में शासन परिवर्तन एजेंडा का एक हिस्सा है। इससे यह भी पता चलता है कि बीजेपी सरकार भारत में सही काम कर रही है। हम तेजी से आगे बढ़े हैं और पश्चिम नहीं चाहता कि इस क्षेत्र में एक और चीन उनके हाथ आए। मोदी सरकार ने वैक्सीन युद्ध जीत लिया है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार रुपये में शुरू हो रहा है, रूस से थोक तेल खरीद, स्वतंत्र विदेश नीति, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी आ रही है। ऐसे में डीप स्टेट एजेंडा भारत में चल नहीं पा रहा है और उनकी दाल नहीं गल रही है। ऐसे में उन्हें कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी में उम्मीद दिखी जो भारत को नीचा दिखा सकते हैं। लाएंगे और उन्हें अमेरिका का समर्थन करने के लिए मजबूर करेंगे और भारत को हमेशा एक और चीन होने से नियंत्रित करेंगे।

राहुल गांधी को भारत का जेलेंस्की बनाना चाहता था डीप स्टेट!
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में चीन का जिक्र बार-बार किया था। चीन भारत में घुसपैठ कर रहा है। चीनी सैनिक भारतीय जवानों को पीट रहे हैं। चीन में काफी सद्भावना है। इस तरह के न जाने कितने ही बयान हैं। लेकिन ब्रिटेन के दौरे के दौरान उनके जुबान से वह बात भी निकल गई जिसका उन्हें सब्जबाग दिखाया गया था। उन्होंने कहा- जैसा रूस ने यूक्रेन में किया, वही भारत के खिलाफ दोहरा सकता है चीन। दरअसल पश्चिमी देशों के डीप स्टेट (दुनिया को अपने हिसाब से चलाने वाले) और अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस ने मई 2022 में राहुल गांधी के मेकओवर और पीएम उम्मीदवार बनाने की पटकथा तैयार की गई थी। उस वक्त राहुल भी ब्रिटेन के दौरे पर थे। उसी वक्त यह तय हुआ था कि जिस तरह यूक्रेन में आंदोलन खड़ा कर जेलेंस्की को प्रधानमंत्री बनाया गया उसी तरह 2024 में पीएम मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर राहुल की ताजपोशी करवाई जाएगी। अब इसी कड़ी के तहत राहुल गांधी ने अमेरिका में गुप्त बैठक की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पीएम मोदी को दिल में बसा चुकी जनता इन तिकड़मों का किस तरह जवाब देती है।