Showing posts with label #abusive language. Show all posts
Showing posts with label #abusive language. Show all posts

टीएमसी के बाद अब INDI गठबंधन में भी टूट, उद्धव ठाकरे की ‘सेना’ और समाजवादी पार्टी में भी टूट


जो काम मोदी सरकार-3 को 400 सांसद होने पर करना था वही काम होने जा रहा है 240 सांसदों के होते। As you sow you will reap यानि हिन्दी में जो बोया वही काटो यानि कांग्रेस ने जो बोया वही आज INDI गठबंधन को काटना पड़ रहा है। इतिहास में झाँकने पर मालूम होता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर बीजेपी तत्कालीन भारतीय जनसंघ तक जितनी भी पार्टियां है सभी कांग्रेस से निकली है। जनसंघ वर्तमान बीजेपी जैसी पार्टियां तो अपना अस्तित्व बनाने में सफल रही और कुछ सिर्फ क्षेत्रीय पार्टी। 
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल दलों की एकजुटता की चूलें हिलाकर रख दी हैं संसद के उच्च सदन की दूसरी सीट पर प्रियंका गांधी के करीबी कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की करारी शिकस्त के बाद सत्ताधारी महागठबंधन यानी INDI ब्लॉक की दीवारें पूरी तरह दरकती दिख रहीं हैं इस चुनावी मुकाबले ने गठबंधन के भीतर चल रहे अविश्वास का एक ऐसा ‘एनकाउंटर’ किया है, जिसके जख्म के निशान अब मुख्यमंत्री आवास की दीवारों पर नजर आ रहे हैं चुनाव के इस लिटमस टेस्ट में बुरी तरह जख्मी नजर आ रही कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल(RJD) और वामपंथी दल माले(CPI-ML) पर खुलेआम क्रॉस वोटिंग और भितरघात का आरोप मढ़ा है वहीं राजद ने भी अब पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही असली ‘गद्दार’ बता दिया है और उसे गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग तेज कर दी है
वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार बैजनाथ मिश्रा का मानना है कि यह चुनाव परिणाम महज एक सीट की हार नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर आपसी भरोसे का पूरी तरह अंत है ऐसे में चुनाव के बाद घायल अवस्था में पड़ी कांग्रेस के नेता जहां तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं, वहीं राजद भी पूरी तरह आक्रामक है राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी खुद की अंदरूनी कलह और कमजोरी को छिपाने के लिए सहयोगियों पर ठीकरा फोड़ रही है उन्होंने कहा कि जो दल अपने विधायकों को संभाल नहीं सकता, उसे दूसरों पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है
खैर, जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक कांग्रेस ने जितनी पार्टियों में टूट और विधान सभाओं को भंग किया ऐसा कभी नहीं हुआ। आज अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी वही काम कर रही है क्योकि बीजेपी को पास कराना है महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पारित करवाना जिसके लिए जरुरत है संसद में दो-तिहाई बहुमत। 
पार्टी छोड़कर आने वाले किसी भी विधायक से लेकर सांसद तक किसी को बीजेपी अपनी पार्टी में शामिल करने की बजाए अपनी सहयोगी पार्टियों की तरफ हस्तांतरण किया जा रहा है।    
देश में विपक्ष की सियासत इस समय दलबदल और राजनीतिक पुनर्गठन के एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है। संसद से लेकर राज्यों के सियासी गलियारों तक, क्षेत्रीय दलों के भीतर मची भगदड़ ने भारतीय दलबदल विरोधी कानून की गलियों और राजनीतिक शुचिता के दावों को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों के दूसरी छोटी पार्टी में विलय के बाद अब महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 सांसदों की बगावत सुर्खियों में है। इसको लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत तो गालीगलौज तक पर उतर आए हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी के कुनबे में टूट की सुगबुगाहट आ रही है। ये महज छिटपुट सियासी घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये देश के राजनीतिक परिदृश्य में आ रहे एक गहरे ढांचागत बदलाव का संकेत हैं। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि मजबूत दिखाई देने वाले क्षेत्रीय क्षत्रपों के किले भी अब अंदरूनी अंतर्विरोधों और एनडीए की राष्ट्रवादी राजनीति के आकर्षण के कारण ढह रहे हैं।

ममता के किले में बड़ी सेंध: टीएमसी सांसदों का विलय
इस पूरे राजनीतिक भूचाल की शुरुआत पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से हुई, जहां भाजपा ने टीएमसी को रोंदकर सरकार बनाई। विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर का असंतोष ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने एक साथ पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावत कर दी। दलबदल विरोधी कानून की अयोग्यता से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक कम प्रसिद्ध, पंजीकृत दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में अपने पूरे गुट का विलय कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए सरकार को समर्थन देने का यह फैसला केवल एक तकनीकी विलय नहीं है, बल्कि ममता बनर्जी के एकछत्र नेतृत्व को दी गई अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। एनडीए के पाले में 20 सांसदों के खड़े हो जाने से यह साफ हो गया है कि टीएमसी सियासत के दिन अब पूरी तरह लद गए हैं। इस टूट ने संसद में ममता बनर्जी की ताकत को बेहद सीमित कर दिया है।

उद्धव गुट को एक और झटका: शिवसेना की बगावत
दूसरी ओर महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना (यूबीटी) का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले विधानसभा और अब लोकसभा स्तर पर पार्टी को एक और करारे झटके का सामना करना पड़ा है। पार्टी के छह प्रमुख सांसदों, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना के बागी रुख ने उद्धव ठाकरे खेमे की रीढ़ तोड़ दी है। इस टूट ने पार्टी नेतृत्व की उस संगठनात्मक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके लिए कभी बाल ठाकरे की शिवसेना जानी जाती थी।

हताशा से भरे सांसद संजय राउत गाली गलौज पर उतरे
शिवसेना उद्धव गुट के इन सांसदों के गुट ने अभी किस पार्टी में विलय किया है, यह तो साफ नहीं हुआ है, लेकिन इस बिखराव की तल्खी तब खुलकर सामने आ गई जब पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना आपा खो बैठे। संजय राउत ने बागी सांसदों के खिलाफ अभद्र भाषा तथा गाली-गलौज पर उतर आए। राउत का यह गुस्सा और तीखे आरोप दरअसल उस लाचारी और हताशा को दर्शाते हैं, जो एक समय महाराष्ट्र की सत्ता के केंद्र रहे दल के भीतर अपनी जमीन खिसकने के कारण पैदा हुई है। गाली-गलौज की यह राजनीति बताती है कि संवाद के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।

समाजवादी पार्टी पर भी मंडरा रहे हैं बड़ी टूट के बादल
संसद के इस दलबदल चक्र की तपिश अब देश के सबसे बड़े राजनीतिक सूबे उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के इस सनसनीखेज दावे ने यूपी की सियासत में खलबली मचा दी है कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं और उनके भीतर गहरी फूट पड़ चुकी है। राजनीति में इस तरह के दावों को अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति माना जाता है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 37 और राज्यसभा में चार सांसद हैं। ऐसे में 25 सांसदों के टूटने की खबरों से पार्टी में हड़कंप की स्थिति बन गई है और सांसदों को रोकने के रणनीति बनाई जा रही है।

‘सपा के सांसद टूटने को तैयार हैं, हम तोड़ नहीं रहे हैं’
इस बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने इस चर्चा को हवा दे दी है। मौर्य का यह कहना कि’सपा के सांसद टूटने को तैयार हैं, हम तोड़ नहीं रहे हैं’, दरअसल सपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है। यह बयान दिखाता है कि सत्ता पक्ष विपक्ष के किलों में लगी दरारों को भांप चुका है और केवल सही वक्त का इंतजार कर रहा है। अखिलेश यादव के लिए अपने इस बड़े कुनबे को एकजुट रखना आने वाले दिनों में सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

कमजोर पड़ता क्षेत्रीय दलों का नेतृत्व और केंद्रीय सत्ता का आकर्षण
इन तीनों राज्यों के घटनाक्रमों को अगर एक सूत्र में पिरोकर देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत के क्षेत्रीय दल इस समय एक बड़े अस्तित्व के संकट से गुजर रहे हैं। जब तक ये दल सत्ता में रहते हैं या मजबूत दिखते हैं, तब तक इनका अंतर्विरोध दबा रहता है। लेकिन जैसे ही चुनावी हार या राजनीतिक दबाव बढ़ता है, वैसे ही सांसदों और विधायकों का मोहभंग होने लगता है। टीएमसी, शिवसेना और सपा जैसी पार्टियों का ढांचा अक्सर एक ही परिवार या व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित होता है। ऐसे में जब जमीनी स्तर पर नेतृत्व कमजोर पड़ता है, तो महत्वाकांक्षी नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य असुरक्षित लगने लगता है। केंद्रीय सत्ता का संरक्षण और उसके साथ मिलने वाले लाभ इन सांसदों को अपनी मूल पार्टी की विचारधारा को छोड़ने के लिए मजबूर कर देते हैं।

क्षेत्रीय राजनीतिक दल आत्ममंथन करें कि ऐसी नौबत क्यों आई
संजय राउत के बयानों और विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाओं से यह भी साफ है कि विपक्ष की राजनीति में अब गरिमापूर्ण संवाद के लिए कोई जगह नहीं बची है। जब कोई नेता या सांसदों का समूह पार्टी छोड़ता है, तो नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई। इसके विपरीत, बागी नेताओं को गद्दार घोषित करना, उनके खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना और व्यक्तिगत कीचड़ उछालना अब एक आम चलन बन गया है। यह रवैया राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर को दिखाता है। लोकतंत्र में असहमति और दलबदल की एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन उसे निजी दुश्मनी और गाली-गलौज के स्तर पर ले जाना देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करता है।

दलों ने आंतरिक लोकतंत्र नहीं सुधारा तो भविष्य और चुनौतीपूर्ण
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का यह खेल उस आम मतदाता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है, जो किसी पार्टी की विचारधारा, उसके घोषणापत्र और उसके नेता का चेहरा देखकर अपना वोट देता है। जब चुनाव जीतने के बाद वही जनप्रतिनिधि निजी स्वार्थ या दबाव में आकर विरोधी खेमे में शामिल हो जाता है, तो जनता की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आस्था कम होने लगती है। टीएमसी, शिवसेना और संभावित रूप से सपा के भीतर चल रहा यह घटनाक्रम यह चेतावनी है कि यदि राजनीतिक दलों ने अपनी अंदरूनी लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं सुधारा और जनमत का सम्मान नहीं किया, तो उनके लिए आने वाला भविष्य और चुनौतीपूर्ण होगा। सत्ता पाना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादाओं की कीमत पर पाई गई सत्ता लंबे समय तक अपनी साख नहीं बचा सकती।

क्या है दलबदल विरोधी कानून का लक्ष्मण रेखा
भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत लागू दलबदल विरोधी कानून मूल रूप से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के स्वार्थी पाला-बदल को रोकने के लिए बनाया गया था, जिसके तहत यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या सदन में व्हिप (पार्टी निर्देश) के उल्लंघन में मतदान करता है, तो उसकी सदन की सदस्यता तुरंत समाप्त की जा सकती है; हालांकि, इस कानून की सबसे बड़ी कानूनी खिड़की इसके ‘विभाजन और विलय’ संबंधी प्रावधानों में छिपी है, जिसके मुताबिक यदि किसी दल के कुल निर्वाचित सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ मिलकर एक अलग गुट बनाते हैं और किसी अन्य पंजीकृत राजनीतिक दल में अपने गुट का आधिकारिक रूप से विलय कर लेते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्रवाई लागू नहीं होती और उनकी सांसदी या विधायकी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। जैसा कि हाल ही में टीएमसी के 20 सांसदों ने किया।

‘मुझे झाँ* फर्क नहीं पड़ता’: ममता बनर्जी ने मोदी के लिए किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल; और कितनी गन्दी गालियां सुनेगा मोदी; मीडिया खामोश


नरेंद्र मोदी भारत का पहला ऐसा प्रधानमंत्री है जिसे सबसे ज्यादा गालियां पड़ी हैं। फिर भी मस्त हाथी की तरह अपने काम में लगा हुआ है। हद तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुंडों द्वारा दी जाने वाली गाली दे दी। लेकिन सारा मीडिया इस गुण्डई गाली पर खामोश है। अगर यही गाली किसी बीजेपी वाले ने दे दी होती सारा मीडिया breaking news चलाकर उछाल रहा होता।   

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस(TMC) की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है।

अरामबाग टीवी के पत्रकार शफीकुल इस्लाम द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में ममता बनर्जी कहती सुनाई दीं, “वह (नरेंद्र मोदी) दूरदर्शन का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और राजनीतिक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के बारे में कुछ कहा था। मैं उनके भाषण नहीं सुनती।”

इसके बाद उन्होंने हैरान करते हुए कहा, “अमार ब** लागे ना”। जानकारी के लिए बता दें कि ‘ब**’ एक बेहद आपत्तिजनक बंगाली शब्द है जिसका इस्तेमाल जननांगों के बाल के रूप में किया जाता है। जिस तरह हिंदी में ‘मुझे झाँ** फर्क नहीं पड़ता’ का इस्तेमाल होता है, उसी तरह बंगाली में इसका इस्तेमाल किया गया है। ममता बनर्जी के इस बयान पर लोगों में आक्रोश है और उन पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा के स्तर को और नीचे गिराने के आरोप लग रहे हैं।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया हो। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी ने ‘B#ra’ जैसे सेक्सिस्ट शब्द का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा था। इसका इस्तेमाल पुरुषों के जननांग के लिए किया जाता है।

उस समय भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने कहा था, “आज के समय में ममता बनर्जी जितनी घृणित और आपत्तिजनक कोई भी नेता नहीं है। लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग अब उनसे तंग आ चुके हैं।”

हरामी: लोकसभा में तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा की सड़कछाप भाषा

आज हमारी राजनीति का स्तर इतना अधिक गिर चुका है, जिसका शब्दों में वर्णन करना कठिन है। मोदी-योगी विरोध में विरोधियों की बुद्धि ही भ्रष्ट हो गयी है। जिसका प्रमाण 7 फरवरी को लोकसभा में देखने को मिला।  
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने 7 फरवरी 2023 को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान एक अन्य सांसद के लिए हर@मी शब्द का प्रयोग किया। सदन में अध्यक्ष के सामने ‘अडानी ग्रुप’ पर मुद्दा रखने के बाद उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया। उनका यह शब्द संसद में गूंजते ही सत्तापक्ष के नेताओं ने काफी बवाल मचाया। भाजपा नेताओं ने कार्यवाही रुकवाते हुए कहा कि पहले मोइत्रा को माफी माँगनी चाहिए। ये वही महुआ है, जिसने माँ काली का भी अपमान करने के अलावा ब्राह्मणों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर चुकी हैं।  

महुआ की वायरल होती वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे वो अध्यक्ष के आगे अपनी बातें दोहराते हुए शिकायत करती हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। इसके बाद जब टीडीपी सांसद राम मोहन नायडू लोकसभा में बोलना शुरू करते हैं कि तभी वो (वीडियो में 3.10 के स्लॉट के बाद) उठकर भाजपा नेता (रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा नेता का नाम राम बिधूड़ी है) को हर@मी कहती हैं। इसी के बाद पूरी संसद मे सांसदों का शोर साफ सुना जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की जगह एक्टिंग स्पीकर भृतहरि महताब ने महुआ की रिकॉर्डिंग को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने महुआ की भाषा सुनते ही कान से हेडफोन उतार दिए। इसके बाद वह बोले कि कुछ भी रिकॉर्ड नहीं होगा। कुछ बेहद आक्रमक व अभद्र शब्द उपयोग किए गए हैं। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री से टीएमसी पार्टी से बात करने के लिए भी कहा।

महुआ के हर@मी कहने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग गई। साथ ही यह शब्द और महुआ मोइत्रा ट्विटर पर ट्रेंड करने लगीं। कुछ ने ऐसे बर्ताव को शर्मनाक बताया तो कुछ ने महुआ मोइत्रा के रवैये पर तंज कसा। वहीं कुछ ने कहा कि सदन में उन्होंने अपनी औकात दिखा दी।

भाजपा नेता शहजाद जय हिंद ने लिखा, “महुआ मोइत्रा ने संसद में फि अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया। इससे पहले वो एक पत्रकार से अभद्रता कर चुकी हैं, माँ काली का अपमान कर चुकी हैं, ब्राह्मणों को चोटीवाला राक्षस कह चुकी हैं। क्या इस बार भी टीएमसी उनका समर्थन करेगी और उनकी इस हरकत की निंदा की जाएगी।”

अंकुर सिंह द्वारा शेयर की गई वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे संसद में मर्यादा लांघने के बाद जब टीएमसी सांसद से भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने माफी माँगने को कहा तो उन्होंने माफी की जगह केवल हँसती रहीं। प्रह्लाद जोशी ने ये भी कहा कि वो सिर्फ माफी माँगने की बात कह सकते हैं लेकिन माफी माँगना न माँगना उनके हाथ में है, ये उनकी संस्कृति दर्शाता है।

कविता लिखती हैं, “महुआ मोइत्रा ने हर@मी शब्द कहा। तुम्हारे पास पैसा हो सकता है, ताकत हो सकती है, राजनीति कार्यालय हो सकता है लेकिन ये सब मिलाकर तुम्हारे घिनौनेपन को नहीं छिपा सकता। तुम्हारी असली औकात हमेशा दिख जाती है।”

दिल्ली : ईमानदार अरविन्द केजरीवाल की अभद्र भाषा

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के झूठे वादे की जब पोल खुल जाती है तो उनकी भाषा कितनी अभद्र हो जाती है यह देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। आज से कुछ 10 दिन पहले हिमाचल में चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल सोलन पहुंचे। वहां केजरीवाल के रोड शो में पंजाब के टीचर अपनी मांगों को लेकर पहुंच गए। इसके बाद आप कार्यकताओं मे टीचरों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। इसके बाद हुए हंगामे के बाद केजरीवाल की गलत टिप्पणी पर पंजाब के शिक्षक भड़क गए। इन्होंने केजरीवाल पर दोगली नीति अपनाने का आरोप लगाया। भड़कते हुए कहा कि पहले उन्हें पंजाबी टीचर और बाद में भाड़े का टट्टू कहा गया। इसी से पता चलता है कि केजरीवाल हम शिक्षकों को क्या समझते हैं। यही नहीं आप की पंजाब सरकार भी हम शिक्षकों के साथ भेदभाव ही कर रही है। रोड शो में हंगामे के बाद केजरीवाल ने अपनी मांगों को लेकर शिक्षकों को दिलासे की जगह उन्हीं पर भड़ास निकाली। केजरीवाल ने कहा, ” ये जो आए हैं, ये पंजाब के टीचर नहीं हैं, उनके भाड़े के टट्टू हैं, उनके भाड़े के गुंडे हैं”।

केजरीवाल ने 2016 में पुलिसकर्मियों को ठुल्ला कहा था

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2016 में दिल्ली पुलिसकर्मियों को ठुल्ला कहा था। इस पर दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने मानहानि की याचिका दायर की थी। याची ने आरोप लगाया कि एक साक्षात्कार के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों को ठुल्ला कहा, इससे उनकी मानहानि हुई है। गोविंदपुरी थाने में तैनात कांस्टेबल हरविंद्र ने साकेत अदालत में दायर याचिका में कहा कि केजरीवाल की टिप्पणी से वह अपमानित महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों को नीचा दिखाने के लिए ठुल्ला शब्द का प्रयोग किया है जो आम लोगों की नजर में अपमानजनक है। इस प्रकार की टिप्पणी से आम लोगों, उनके परिवार, रिश्तेदारों व मित्रों की नजर में उसकी प्रतिष्ठा कम हुई है। सिपाही ने कहा कि केजरीवाल ने जानबूझ कर पूरी दिल्ली पुलिस फोर्स का अपमान करने व उनको उत्तेजित करने के लिए इस प्रकार की टिप्पणी की है। केजरीवाल भारत की राजधानी के मुख्यमंत्री पद पर हैं और यह पद संवैधानिक है। ऐसे में उनके द्वारा इस प्रकार ठुल्ला कहने से आम लोगों की नजर में पुलिस के प्रति गलत प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री द्वारा पुलिसकर्मियों के प्रति इस तरह के अपमानजनक शब्द का उपयोग करना शालीनता की सभी हदें पार कर गया है।

केजरीवाल ने कहा- उन सालों ने हमें हराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी

एक स्टिंग आपरेशन में केजरीवाल कुछ इस भाषा में बात कर रहे हैं…तुम्हारी अच्छी टीम जो कह रहे हो न…उन सालों ने हमें हराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी दिल्ली के अंदर। उनको साथ लेकर चलें…किसी और पार्टी में होते तो उनके पीछे लात मारकर पार्टी से बाहर निकाल देते सालों को।

डंडे की कमी नहीं है और डंडों की साइज में भी कमी नहींः केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली कटौती के मसले पर 2016 में धमकी देते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार बिजली कंपनियों को डंडे के जोर पर ठीक किया जाएगा। बिजली की समस्या पर जनता से मुखातिब हुए केजरीवाल ने कहा कि वह चिंता न करे क्योंकि उनकी सरकार बिजली कंपनियों के खिलाफ सख्ती करने में कोई कमी नहीं कर रही है। हालांकि इस दौरान उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया उसे विवादास्पद माना जा रहा है और यही वजह है कि उनके इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसी भाषा एक मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देती है। केजरीवाल ने कहा था- डंडा दिखा रहे हैं हम। डंडे की कमी नहीं है और डंडों की साइज में भी कमी नहीं है।

केवल आम आदमी पार्टी है, जिससे इनकी पैंट गीली होती हैः केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने महाराष्ट्र या शिवसेना का नाम लिए बिना विधानसभा में कहा था, ”पूरे देश के अंदर आज एक एक करके सारी पार्टियां टूटी जा रही हैं। सारी पार्टयां झुकती जा रही हैं। सारी पार्टियां गरिती जा रही हैं। इन्होंने सबको तोड़ लिया। पूरा देश आम आदमी पार्टी की ओर देख रहा है। केवल आम आदमी पार्टी है, जिससे इनकी पैंट गीली होती है। केवल आम आदमी पार्टी है जिससे इनके टॉप के दोनों नेता डरते हैं।”

केंद्र का पैसा किसी के पिता जी का पैसा नहीं

अरविंद केजरीवाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि केंद्र का पैसा किसी के पिता जी का पैसा थोड़े न है। केंद्र का पैसा भी हमारा पैसा है।

इन लोगों को लगता है इनके बाप का माल है

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक अफसर को अपशब्द तक कह डाले। केजरीवाल 25 जुलाई 2018 को कठपुतली कॉलोनी से विस्थापित लोगों का हाल जानने आनंद पर्वत ट्रांजिट कैंप पहुंचे थे। वहां मौजूद लोगों ने जब सीएम से कहा कि उन्हें काफी परेशानी हो रही है, और कंपनी के अधिकारी ठीक से काम नहीं करते हैं। तो केजरीवाल ने कहा कि इन लोगों को लगता है कि इनके बाप का माल है। अधिकारी से बात करते वक्त केजरीवाल गुस्से से लाल नजर आए।

बीजेपी वालों औकात में रहो

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2018 में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं और कार्यताओं को चेतावनी दी। उन्होंने बीजेपी नेताओं को औकात में रहने की नसीहत देते हुए जूते लगने तक की चेतावनी दी। बीजेपी को निशाने पर लेते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘ये बीजेपी वालों को भी चेतावनी देता हूं कि औकात में रहो दिल्ली की जनता से पंगे मत लो, वर्ना ऐसे जूते पड़ेंगे कि शक्ल ध्यान नहीं रहेगी।’

मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव नहीं

जैसाकि सर्वविदित यह कि समय परिवर्तनशील है। वो समय गया जब शेख जी फाख्ता उड़ाते थे। मुख्यमंत्री से लेकर अब प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी को अगर मोदी को गाली देकर चुनाव जीतना आसान है, उनसे बड़ा मुर्ख अथवा पागल दुनियां के परदे पर नहीं मिलेगा। बन्दे ने केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि पुरे गुजरात के लिए काम किया। 

गोधरा दंगे पर आज भी मोदी को मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ-साथ सेक्युलरिस्ट्स अपमानित करते हैं, लेकिन उन दंगों ने मोदी के चरित्र को चमकाया है। चमकने का कारण है। ऐसा नहीं 2002 से पहले गुजरात में दंगे नहीं हुए, बहुत हुए, लेकिन यही एक ऐसा दंगा ऐसा था, जो गिनती के दिन चला और कसूरवार ही नपे, बेकसूर नहीं। अक्सर देश में हुए आतंकवादी हमलों में इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने बेकसूर हिन्दू, साधु और साध्वियों को जेल में डाल "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर भारत ही नहीं विश्व को गुमराह किया जाता था। परन्तु गोधरा कांड में ऐसा नहीं हुआ, मोदी ने केवल दंगाइयों को ही पकड़ा, जिन्होंने साबरमती ट्रेन में 59 रामभक्तों को जिन्दा जलाया था, जिस कारण गुजरात में दंगे हुए। 
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अभी तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। गुजरात के सियासी रण में उतरी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बदजुबानी में सबको पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधने में सरी हदें पर कर दीं। ऐसे में एबीपी न्यूज़ के लिए सी-वोटर ने गुजरात और हिमाचल दोनों राज्यों का साप्ताहिक चुनावी सर्वे किया है। 
सर्वे में सवाल किया गया कि क्या  प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव है? इस सवाल के जनता ने चौंकाने वाले जवाब दिए हैं।

सी-वोटर के सर्वे में 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव नहीं है, जबकि 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हां, प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द बोलकर गुजरात में चुनाव जीतना संभव है। सर्वे में गुजरात के 1425 और हिमाचल प्रदेश के 1,361 लोगों की राय ली गई। सर्वे में मार्जिन ऑफ एरर प्लस माइनस 3 से प्लस माइनस 5 प्रतिशत है।

इससे पहले 12 से 14 अक्टूबर,2022 के बीच C-Voter ने गुजरात चुनाव को लेकर एक और सर्वे किया था। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के लिए आम आदमी पार्टी नेता गोपाल इटालिया द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद पार्टी को कितना नुकसान हो सकता है, इस पर लोगों की राय ली गई थी। इस सर्वे में गुजरात के 1 हजार 337 लोगों से राय ली गई थी। इस सवाल के जवाब में 58 प्रतिशत लोगों ने अपने जवाब में कहा- ‘हां, AAP ने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करके सेल्फ गोल किया है’। वहीं इस सवाल पर 42 प्रतिशत लोगों का मानना था कि इससे आम आदमी पार्टी ने कोई सेल्फ गोल नहीं किया है।

आम आदमी पार्टी इस बार बीजेपी के गढ़ में सेंध मारने के पूरे-पूरे चक्कर में है। जहां, अरविंद केजरीवाल स्वयं को योगी राज श्री कृष्णजी के रूप में दर्शा रहे हैं, वहीं वो बीजेपी को वह ‘कंस’ का रूप देने को तत्पर हैं। साथ ही साथ, जिस प्रकार से गोपाल इटालिया ने कुंठित शब्द, ‘नीच’ का प्रयोग और इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की मां का अपमान किया, उससे गुजराती जनता में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि इसके लिए आप नेता गोपाल इटालिया को जनता माफ नहीं करेगी।

गौरतलब है कि गुजरात चुनाव में जब विरोधी दलों की दाल नहीं गल रही है तो वे अब गाली देने के स्तर तक नीचे गिर गए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी और गुजरात AAP के अध्यक्ष गोपाल इटालिया उस वीडियो पर बुरी तरह घिर गए हैं, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ बताते हुए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे पीएम मोदी के लिए जातिसूचक गाली करार दिया। इससे गुजरात एवं देश की जनता खासी नाराज हो गई। इसके बाद गोपाल इटालिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। हालांकि इसमें उन्होंने पीएम मोदी से माफी नहीं मांगी और जाति से लेकर गांव के होने तक की अजब दलीलें दीं। 

मोदी एक नीच शख्स: गुजरात आप प्रमुख

इस वीडियो में गोपाल इटालिया को कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नीच’ व्यक्ति हैं। मैं पुष्टि नहीं कर सकता लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या देश का कोई पूर्व प्रधान मंत्री है जिसने वोट डालने के लिए इतनी नौटंकी की है? यह ‘नीच’ किस्म का शख्स यहां रोड शो कर रहा है। और वह दिखा रहा है कि मैं इस देश को कैसे C… बना रहा हूं। आप मेरे कहने का अर्थ को बेहतर ढंग से समझते हैं। वह डिजिटल इंडिया के बारे में बात करते हैं और वोट डालने के लिए दिल्ली से गुजरात जाते हैं। इस तरह वह देश को AAP के C… बना रहे हैं। तो, यह ‘नीच’ प्रकार का व्यक्ति देश को यह संदेश दे रहा है कि वह इस देश को कैसे C… बना रहा है।

2017 में मणिशंकर अय्यर ने भी कहा था नीच

यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ‘नीच’ का इस्तेमाल किया है। 2017 में कांग्रेस के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को नीच आदमी कहा था। जिसे उन्होंने 2019 के चुनावों से पहले भी दोहरया था। उस वक्त भारत की जनता ने पीएम मोदी को ऐतिहासिक फैसला सुनाकर अय्यर को करारा जवाब दिया था। अब नरेंद्र मोदी के खिलाफ गोपाल इटालिया की इस ‘नीच’ टिप्पणी पर गुजरात के लोग माकूल जवाब देंगे।

मेरे सिर्फ शब्द खराब, इनके तो करम खराब : केजरीवाल का मोदी पर हमला

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के आवास पर छापे मारने पर 2015 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि राजेंद्र तो बहाना है केजरीवाल उनका निशाना है। उन्होंने कहा कि मेरे तो सिर्फ शब्द खराब थे, लेकिन इनके तो कर्म ही खराब हैं।

मोदी देशद्रोही हैः केजरीवाल

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मोदी देशद्रोही है, मोदी ने आतंकवादियों के साथ सेटिंग कर रखी है। यही नहीं, केजरीवाल ने पीएम मोदी को कायर, मनोरोगी, पाकिस्तान से हाथ मिलाने जैसे आक्रामक और उत्तेजक शब्दों का प्रयोग कर भड़काऊ बयानबाजी से नफरत फैलाने और समाज में शांति भंग करने की कोशिश की है।

मोदी एक बेशर्म तानाशाहः केजरीवाल

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने 2017 में आयकर विभाग द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए कहे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेशर्म तानाशाह करार दिया। आयकर विभाग ने पार्टी को मिलने वाले चंदे के बारे में झूठी और गलत ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की वजह से निर्वाचन आयोग से आप का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने को कहा है।

मोदी के कारण भारत को दुनिया में होना पड़ा शर्मिंदा : संजय सिंह 

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल के करीबी और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि भाजपा की नफरत की राजनीति के कारण भारत का सिर शर्म से झुक गया है। संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय बेइज्जती कराई है। भाजपा के कामों और नफरत की राजनीति के कारण भारत का सिर शर्म से झुक गया है। आजादी के 75 वर्षों में आज तक किसी प्रधानमंत्री ने भारत को इतना अपमानित नहीं किया और भारत का सिर इस तरीके से दुनिया के सामने नहीं झुकाया जितना मोदी ने झुकाने का काम किया है।

BBC के शो में किसान आंदोलन पर ‘Big Debate’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गंदी गाली, अश्लील भाषा का प्रयोग क्यों होने दिया ?

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर ‘BBC एशियन नेटवर्क’ के एक डिबेट शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी (माँ की गाली) की गई। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने चैनल के ‘Big Debate’ शो में ये टिप्पणी की।

BBC एशियन नेटवर्क में जब यह प्रोग्राम हो रहा था, तब एंकर किसी साइमन से बात कर रही होती है और इसी दौरान वो पंजाबी में मोदी को माँ की गाली देता है। एंकर इस दौरान आपत्ति भी नहीं जताती।

BBC एशियन नेटवर्क को एंकर के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए कि उसने किसी देश के प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक अश्लील भाषा का क्यों प्रसारण होने दिया? क्या 'Big Debate' के माध्यम से किसी षड़यंत्र को अंजाम दिया जा रहा था? क्या इस डिबेट से भारत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा था?  

हालाँकि, इसके बाद कॉल कट हो जाता है। ‘BBC एशियन नेटवर्क’ जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय चैनल के शो पर पीएम मोदी को इस तरह की गाली देना और अश्लील भाषा का प्रयोग किए जाने से लोग आक्रोशित हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘किसान आंदोलन’ में अपशब्दों का प्रयोग किया गया हो। इससे पहले ही ऐसा किए जाने के कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिससे इस आंदोलन की असलियत सामने आती है।