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बंगाल में BJP सरकार आई तो डरकर दक्षिण में भाग रहे घुसपैठिए, कर्नाटक में 20 लाख+ अवैध बांग्लादेशी होने का दावा


कर्नाटक में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से इसको लेकर लगातार रिपोर्टें सामने आ रही हैं। ऑर्गेनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, हुबली के श्री सिद्धरूढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर कुछ दिनों पहले हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया और पश्चिम बंगाल व पूर्वी राज्यों से आने वाले लोगों की कड़ी निगरानी की माँग उठाई।

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुथालिक और संगठन के कार्यकर्ताओं ने यह विरोध प्रदर्शन उस आशंका के बीच किया कि पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार की कार्रवाई के बाद कई संदिग्ध बांग्लादेशी दक्षिण भारत के शहरों में शरण लेने पहुँच रहे हैं। हिंदू संगठनों का दावा है कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ऐसे लोग पहचान छिपाने और काम की तलाश में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का रुख कर सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे लोगों को बिना पर्याप्त जाँच के यात्रा करने दी जा रही है। उनका कहना था कि रेलवे पुलिस ट्रेनों में संदिग्ध यात्रियों की केवल औपचारिक जाँच कर रही है। हाल ही में हुबली रेलवे स्टेशन पर पश्चिम बंगाल से आए करीब 10 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई थी। उन्होंने खुद को बागलकोट जिले में मजदूरी के लिए जा रहा बताया और आधार कार्ड दिखाने के बाद उन्हें जाने दिया गया।

इस पर नाराजगी जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण नहीं हो सकता क्योंकि फर्जी दस्तावेज भी आसानी से बन जाते हैं। प्रमोद मुथालिक ने कहा कि केवल आधार कार्ड देखकर लोगों को छोड़ना ठीक नहीं है बल्कि गहराई से जाँच होनी चाहिए ताकि घुसपैठिए कर्नाटक में बस न सकें। उन्होंने पुलिस, रेलवे और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की भी माँग की।

विरोध के बाद रेलवे स्टेशन पर खासकर पश्चिम बंगाल से आने वाली शालीमार एक्सप्रेस के यात्रियों की जाँच बढ़ाई गई लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे कर्मचारियों की कमी के कारण केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई बताया।

इस बीच जनवरी में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कर्नाटक में करीब 20 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं। खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इनमें से 70-80% लोगों के पास भारतीय पहचान पत्र हैं। अनुमान के मुताबिक, बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में 5 से 6 लाख, मालनाड और तटीय क्षेत्रों में 8 से 10 लाख और बाकी उत्तर कर्नाटक व पुराने मैसूर क्षेत्र में रह रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताकर कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे हैं। बेंगलुरु, बेंगलुरु ग्रामीण और मालनाड क्षेत्रों में ये लोग निर्माण स्थलों, सुपारी और कॉफी बागानों, कबाड़ दुकानों समेत कई जगहों पर कम मजदूरी में काम करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय मजदूरों की तुलना में ये 100 से 150 रुपए कम दिहाड़ी पर काम करने को तैयार हो जाते हैं और इसलिए इन्हें प्राथमिकता मिलती है।

राज्य में सबसे अधिक ऐसे लोग बेंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों में रहने की बात कही गई है। यहाँ वे कूड़ा बीनने, निर्माण मजदूर, सैलून कर्मचारी, अस्पतालों में सफाई कर्मी, होटल-रेस्तराँ में कामगार और सड़क किनारे कपड़े व रोजमर्रा का सामान बेचने का काम करते हैं। वहीं, चिक्कमगलुरु, उडुपी, शिवमोग्गा, कोडागु, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जैसे जिलों में कॉफी-सुपारी बागानों, रिसॉर्ट, एस्टेट और फार्महाउस में भी इनके काम करने की बात सामने आई है। कुछ लोग अपने परिवारों के साथ रहते पाए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई कि तटीय और मालनाड क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों से रह रहे कई अवैध बांग्लादेशी भारतीय पहचान पत्र हासिल कर चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने लाखों रुपये की संपत्ति खरीदी और कथित तौर पर भारतीय पहचान के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर 15-20 साल बाद दूसरे देशों तक में पहुँचे हैं।