Showing posts with label #infiltration. Show all posts
Showing posts with label #infiltration. Show all posts

भारत में घुसपैठ पर 900 करोड़ रूपए साल खर्च करते हैं बांग्लादेशी, 1000 घाटों पर चलता अवैध कारोबार: शुभेंदु सरकार आई तो बंद हुआ बिचौलियों का धंधा

घुसपैठ को नासूर बनाने वाली हमारी भारत सरकार ही है। सियासतखोर नेता और उनकी पार्टियां कुछ काम करने की बजाए हिन्दू-मुसलमान कर जनता को गुमराह कर कुर्सी पर बैठते रहे। घुसपैठियों को घर में घुसाकर दामादों की तरह पाल अपने ही देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने का काम होता रहा है। जबकि दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं जहां घुसपैठियों को चोर रास्ते से घर में घुसा दामादों की तरह लालन-पालन करे। रोहिंग्या जिन्हे कोई मुस्लिम देश तक रखने को तैयार नहीं लेकिन भारत में सियासतखोर नेता और उनकी पार्टियां दामादों की तरह उनका बचाव करती हैं। क्या ऐसी पार्टियां देशहित में कोई काम कर सकती हैं? अपने आपको राष्ट्रवादी कहने वाली बीजेपी भी इस गंभीर मसले पर ज्यादा सख्त नहीं। हाँ, कुछ मुख्यमंत्री जरूर सख्ती से काम कर रहे हैं।       
घुसपैठियों को निकालने पर कट्टरपंथी और उनको समर्थन देने वाली पार्टियां दुष्प्रचार कर रही हैं कि भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं और मुसलमान भी इसे सच मान मोदी सरकार की कार्य क्षमता पर शक कर रहा है। 

कहने को पाकिस्तान कंगाली के दौर से गुजर रहा है। हाथ में कटोरा लिए घूम रहा है लेकिन आतंकवाद और भारत में दंगे/जेहाद पर खूब पैसा खर्च कर रहा है। बांग्लादेश जिसे भारत सरकार हर साल करोडो रुपया मानवीय सहायता देती है, क्यों? भारत में घुसपैठी भेजने पर जो पैसा खर्च हो रहा है कहाँ से आ रहा है? इस पर भी मोदी सरकार को गंभीरता से चिंतन करना होगा।     

भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ को लेकर सामने आई एक विस्तृत पड़ताल में एक पूर्व बिचौलिए ने कई बड़े दावे किए हैं। उसके मुताबिक, वर्षों तक सीमा पार लोगों की आवाजाही कराने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसका सालाना कारोबार करीब 800 से 900 करोड़ रुपए तक था।

उत्तर 24 परगना के सीमा क्षेत्र से जुड़े इस बिचौलिए ने दावा किया कि इस नेटवर्क में सीमा के दोनों ओर मौजूद एजेंट, स्थानीय संपर्क, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले लोग शामिल थे।

सत्ता के गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि जिस तरह मुख्यमंत्री शुभेन्दु हरकत में हैं कभी भी उन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर गाज गिर सकती जिन्होंने घुसपैठियों को राशन कार्ड, पहचान पत्र और दूसरी सरकारी सुविधाएं दिलवाई। दस्तावेज ऐसे ही नहीं बन गए। सबने अपनी-अपनी कमीशन जरूर ली होगी। जो इनके बैंक खातों की जाँच होने पर ही सामने आ पाएगा।  

TMC में बिखराव ऐसे ही नहीं हुआ है, इसके पीछे भी बहुत गहरा षड़यंत्र है। शक है कि इन घुसपैठियों को दामाद मान आबाद करवाने में इन लोगों का भी हाथ है। आज अपने आपको दूध का धुला साबित करने और मुख्यमंत्री के प्रकोप से बचने के लिए सब ममता का साथ छोड़ रहे हैं। और शायद यही कारण है कि बीजेपी ने इन बागियों को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करने की बजाए त्रिपुरा की पार्टी में शामिल होने को कहा है।    

हालाँकि नवंबर 2025 में राज्य में मतदाता सूची के SIR अभियान शुरू होने और पिछले महीने भाजपा सरकार के आने से परिस्थितियाँ बदल गईं, जिसके चलते यह कारोबार लगभग बंद होने की स्थिति में पहुँच गया।

‘घाट’ और ‘लाइनमैन’ के जरिए होती थी घुसपैठ

आनंदबाजार पत्रिका में पूर्व बिचौलिए के हवाले से दावा किया गया कि भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े कई इलाकों में ऐसे ‘घाट’ (1000 घाट) मौजूद थे, जहाँ से लोगों को सीमा पार कराया जाता था। उसके अनुसार, यह तय किया जाता था कि किस स्थान पर कब निगरानी कम है और उसी के आधार पर गतिविधियाँ संचालित होती थीं।

दावे के मुताबिक, भारतीय सीमा क्षेत्र में खेतों और झाड़ियों के बीच छिपकर बैठे कुछ लोग निगरानी करते थे और सीमा सुरक्षा बल की गश्त की जानकारी दूसरी ओर पहुँचाते थे। जब रास्ता सुरक्षित माना जाता, तब सीमापार आवाजाही कराई जाती थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल रात तक सीमित नहीं थी, बल्कि अवसर मिलने पर दिन में भी की जाती थी।

फोन, Sim और भुगतान के जरिए चलता था संपर्क

बिचौलिए ने दावा किया कि सीमा के दोनों ओर मौजूद लोगों के बीच लगातार संपर्क बना रहता था। इसके लिए भारतीय और बांग्लादेशी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। कई बार डिजिटल माध्यमों से पैसों का लेनदेन भी होने का दावा किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार पहुँचने के बाद लोगों को नजदीकी बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुँचाने की जिम्मेदारी स्थानीय नेटवर्क संभालता था। इसके बाद उन्हें बड़े शहरों तक भेजने के लिए अलग व्यवस्था की जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग स्तर पर भुगतान तय रहता था।

कमाई का मॉडल और सुरक्षा एजेंसियों को लेकर दावे

दावों के अनुसार, सीमा पार कराने के बदले प्रति व्यक्ति तय रकम ली जाती थी और उसका बंटवारा नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग लोगों के बीच होता था। बिचौलिए का दावा है कि कुछ सीमावर्ती हिस्सों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग लाए जाते थे और इसी आधार पर पूरे कारोबार का आकार काफी बड़ा हो गया था।

रिपोर्ट में कुछ स्थानीय लोगों के हवाले से यह भी दावा किया गया कि सीमा पार के कुछ तत्वों को आर्थिक लाभ देकर गतिविधियों को आसान बनाया जाता था। वहीं यह भी कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में निगरानी बढ़ने और हालिया सत्यापन प्रक्रियाओं के बाद इस तरह की गतिविधियों में गिरावट आई है।

फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के आरोप

पड़ताल में यह भी दावा किया गया कि सीमा पार आने के बाद पहचान स्थापित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का समानांतर तंत्र मौजूद था। आरोप लगाए गए कि कुछ मामलों में जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, आधार, वोटर ID और PAN कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल कराने के लिए स्थानीय स्तर पर संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था। रिपोर्ट में कुछ पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं कि वे ऐसे दस्तावेज तैयार कराने में मदद करते थे।

West Bengal : ममता मुख्यमंत्री हैं या गुंडों की सरगना : फर्जी वोटर को बचाने के लिए SIR का विरोध, BLO को धमका रहे हैं टीएमसी नेता

जो ममता बनर्जी विपक्ष में रहते घुसपैठियों को बाहर निकालने का शोर मचाती थी आज वही ममता घुसपैठियों को बचाने अपनी संवैधानिक सीमाओं को तोड़ने में आमादा है। आखिर क्यों आज घुसपैठियों की हिमायत कर रही हैं। बंगाल में जितने भी दंगे-फसाद हो रहे हैं क्या ममता की शै पर हो रहे हैं। दूसरे, जब से ममता बंगाल की मुख्यमंत्री बनी है तभी से हिन्दुओं पर कितने-कितने भयंकर हमले हुए हैं कितने दंगाइयों को गिरफ्तार जेलों में डाला? चुनावों में पैरों तले जमीन निकलते देख चोटिल होने का ड्रामा कर सिम्पथी वोट बटोरने का जाल बिछा देती है।       
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने एसआईआर की शुरुआत के पहले दिन से विरोध शुरू कर दिया है। राज्य में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटरों को बचाने के लिए अभी से सारी हदें पार की जा रही है। प्रदेश के बीएलओ यूनाइटेड फोरम का कहना है कि राजनीतिक संरक्षण वाले अपराधी तत्व बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को धमका रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि ममता के मुताबिक राज्य में कोई बोगस वोटर नहीं है, तो उन्हें एसआईआर से एतराज क्यों है? भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पश्चिम बंगाल यूनिट ने राज्य के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) को एक चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कूचबिहार ज़िला अध्यक्ष गिरिंद्रनाथ बर्मन ने एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को सरेआम धमकी दी। चिट्ठी में तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है कि वह वोटर लिस्ट से “भूतों, घुसपैठियों और फर्जी वोटर्स” के नामों को हटाने का विरोध कर रही है। एसआईआर की शुरुआत के दिन ही पश्चिम बंगाल में सियासी गर्मी बढ़ गई!

टीएमसी के इशारे पर गुंडा तत्व बीएलओ को धमकाने में लगे
पश्चिम बंगाल बंगाल समेत देश के 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के लिए शनिवार को BLO का ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर दिया है। राजस्थान समेत कई राज्यों में बीएलओ को ट्रेनिंग दी गई। लेकिन पश्चिम बंगाल में इस दौरान कई BLO ने प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं का विरोध किया। दरअसल, इसके पीछे वहां की तृणमूल सरकार ही है, जो एसआईआर का विरोध कर रही है। इसलिए पार्टी के इशारे पर गुंडा तत्व बीएलओज को धमकाने में लगे हैं। बीएलओ ने उचित दस्तावेज और सुरक्षा देने की मांग की है। BLO का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान उनके स्कूलों में उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है और BLO के रूप में उनकी ड्यूटी को ऑन ड्यूटी नहीं माना जा रहा है।

भाजपा ने ममता बनर्जी के मार्च को जमात की रैली बताया
पश्चिम बंगाल में मंगलवार को CM ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के खिलाफ कोलकाता में विरोध मार्च निकाला। 3.8 km लंबी रैली में उनके साथ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी और बड़ी संख्या में पार्टी वर्कर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जैसे हर उर्दू बोलने वाला पाकिस्तानी नहीं, वैसे ही हर बांग्लाभाषी बांग्लादेशी नहीं होता। इधर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता के मार्च को जमात की रैली बताया। उन्होंने कहा- यह भारतीय संविधान की नैतिकता के खिलाफ है। वहीं, बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा- ममता जी को अगर कुछ कहना है, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

टीएमसी नेता चाहते हैं किसी भी फर्जी वोटर का नाम ना कटे
इसी बीच, पश्चिम बंगाल के 94 हजार बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) खौफ में हैं। बीएलओ यूनाइटेड फोरम के महासचिव स्वप्न मंडल ने कहा कि राजनीतिक संरक्षण वाले अपराधी बीएलओ को धमका रहे हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी से पिछले हफ्ते सुरक्षा मांगी थी। पूर्व बर्दवान जिले के एक बीएलओ ने कहा, ‘ टीएमसी वाले चाहते हैं कि कोई नाम न कटे। हम हर पल खतरे में काम कर रहे हैं।’ हालात यह है कि नेता धमकाते हैं कि कोई गड़बड़ी मिली तो बीएलओ को जेल भेज देंगे। वहीं, ममता के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने वर्कर्स को बीएलओ संग साए जैसे रहने को कहा था। चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि बीएलओ की सुरक्षा का जिम्मा संबंधित थाने का है। सभी पुलिस अधीक्षकों को इस बाबत निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा ना मिलने से बीएलओ ने सामूहिक असंतोष जताया
BLO ने मांग की है कि आयोग में उनकी ट्रेनिंग और फील्ड वर्क को ड्यूटी मानने, पर्याप्त सुरक्षा देने और इसके लिए जरूरी कागजात जारी करने की मांग की है। बीएलओ ने आरोप लगाया है कि ट्रेनिंग का कोई वैध प्रमाण-पत्र या दस्तावेज नहीं दिया, जिससे वे अपने विभाग में उपस्थिति सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं। दुर्गापुर के उप-मंडलीय कार्यालय (SDO) में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए गए। वहां BLO ने सामूहिक रूप से असंतोष जताया। दरअसल, राज्य में SIR 4 नवम्बर से 4 दिसम्बर किया जाना है। इस दौरान बूथ स्तर अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर वोटर्स का सत्यापन और फॉर्म भरने का काम करेंगे। BLO की ट्रेनिंग 3 नवम्बर तक चलेगी।

बीएलओ की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होगी – आयोग
चुनाव आयोग ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होगी। आयोग ने बड़े बूथों के लिए दो BLO नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी नहीं माना। चुनाव आयोग ने BLO के लिए 16 प्वाइंट वाली गाइडलाइन जारी की है और फील्ड कार्य को सरल बनाने के लिए एक नया मोबाइल एप भी शुरू किया है। ट्रेनिंग के दौरान BLO को विशेष किट और प्रोसेस की विस्तार से जानकारी दी जा रही है। एक बीएलओ ने कहा, “हम काम करने को तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार को हमें सुरक्षा और उचित प्रमाण-पत्र देना चाहिए। इनके बिना हम ड्यूटी जारी नहीं रख सकते।”

पूरी वोटर लिस्ट के बिना आए तो बीएलओ को बांधने की धमकी
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पश्चिम बंगाल यूनिट ने राज्य के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) को एक चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कूचबिहार ज़िला अध्यक्ष गिरिंद्रनाथ बर्मन ने एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को सरेआम धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, बर्मन ने कथित तौर पर अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर बीएलओ 2000 लोगों की पूरी वोटर लिस्ट के बिना आता है, तो उसे बांध देना, यह कहते हुए कि “हम उसे बांध देंगे.” इस घटना का एक वीडियो लिंक भी चिट्ठी के साथ अटैच किया गया है।

लिस्ट से “भूतों, घुसपैठियों, फर्जी वोटर” के नाम हटाने का विरोध
बीजेपी ने इसे खुलेआम डराने-धमकाने वाला काम बताया और दावा किया कि यह BLOs को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस के तहत अपनी ड्यूटी करने से रोकने के लिए दी जा रही धमकियों का एक बड़ा हिस्सा है। चिट्ठी में तृणमूल पर आरोप लगाया गया है कि वह वोटर लिस्ट से “भूतों, घुसपैठियों और नकली लोगों” के नाम हटाने का विरोध कर रही है। बीजेपी ने CEO से गिरिंद्रनाथ बर्मन के खिलाफ ड्यूटी पर मौजूद सरकारी कर्मचारी को धमकी देने के लिए FIR दर्ज करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसी और भी घटनाएं हो सकती हैं और अधिकारियों पर शारीरिक हमले भी हो सकते हैं।

12 राज्यों में 51 करोड़ वोटर्स के लिए 5.33 लाख बीएलओ
देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR शुरू हो गया। इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव हैं। असम में भी अगले साल चुनाव हैं, लेकिन अभी वहां SIR का शेड्यूल तय नहीं है। जिन 12 राज्यों में SIR होना है, उनमें पश्चिम बंगाल, अंडमान निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। SIR वाले 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ वोटर्स हैं। इस काम में 5.33 लाख बीएलओ (BLO) और 7 लाख से ज्यादा बीएलए (BLA) राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जाएंगे। SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे।

हिम्मत है तो सैयदा घुसपैठिया बन बांग्लादेश में रहकर दिखाए ; ‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कांग्रेस सरकार में योजना आयोग की सदस्य रहीं सैयदा हमीद घुसपैठियों के समर्थन में उतरीं, कहा- अल्लाह ने इंसानों के लिए बनाई है धरती

                                                    सैयदा हमीद बनीं घुसपैठियों को नई पैरोकार

भारत में घुसपैठियों के नए-नए पैरोकार सामने आ रहे हैं। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली सैयदा हमीद का कहना है कि बांग्लादेशियों को भारत में रहने का पूरा हक है। सैयदा इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार के समय योजना आयोग की सदस्य रही थीं। सैयदा का यह बयान उनके असम दौरे के समय आया है। असम सरकार इन दिनों सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को वापस भेजने की कोशिशों में जुटी हुई है।

सैयदा हमीद पूरे वामपंथी गिरोह के साथ असम दौरे पर पहुँची हैं। इस दौरे पर उनके साथ जाने-माने वामपंथी प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर, जवाहर सरकार और अन्य लोग शामिल हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम सरकार ने वहाँ के मुसलमानों पर आफत ला दी है और उन्हें बांग्लादेशी कहकर निशाना बनाया जा रहा है।

सैयदा ने कहा, “अगर वे (घुसपैठिए) बांग्लादेशी भी हैं तो इसमें गलत क्या है? बांग्लादेशी भी इंसान हैं। धरती इतनी बड़ी है, बांग्लादेशी यहाँ भी रह सकते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कहना कि अवैध घुसपैठिए असली नागरिकों का हक छीन रहे हैं, बहुत ही परेशान करने वाली बात है। सैयदा ने इसे भ्रामक है और इंसानियत के लिए पूरी तरह नुकसानदायक बताया है।

सैयदा हमीद ने आगे कहा, “अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, हैवानों के लिए नहीं। अगर कोई इंसान जमीन पर खड़ा है और उसे वहाँ से खदेड़ा जाता है, तो यह मुसलमानों के लिए कयामत जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि सबको मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की मिली-जुली संस्कृति के लिए खड़ा होना होगा।

सैयदा हमीद ने एक और जहाँ यह माना कि असम सरकार बांग्लादेश से आए अवैध लोगों को वापस भेज रही है। वहीं, प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि भारत के मुसलमानों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली असम सरकार हर तरह की गैरकानूनी हरकत कर रही है। खासकर नागरिकों को जबरन बांग्लादेश और देश से बाहर धकेल रही है, उनको जमीन से बेदखल कर रही है और उनके घर गिरा रही है।”

यह टीम असम नागरिक सम्मेलन नामक एक मंच के निमंत्रण पर असम आई थी। इस मंच के सदस्य और राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां का कहना है कि वे बाहर से जानी-मानी हस्तियों को बुलाते हैं ताकि वे ताजा हालात पर अपनी राय दे सकें।

इस टीम के दौरे को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जमतीय द्वारा उनका इस्तीफा माँगे जाने के बाद दिल्ली से आई एक टीम असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर्ष मंदर, वजाहत हबीबुल्लाह, फैयाज शाहीन, प्रशांत भूषण और जवाहर सरकार शामिल हैं।”

सरमा ने आगे कहा कि इस टीम एक ही मकसद है कि किसी तरह कानूनी तौर पर की जा रही बेदखली को तथाकथित ‘मानवीय संकट’ बताकर बदनाम किया जाए। उन्होंने कहा, “यह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। हम सतर्क हैं और मजबूती से खड़े हैं, कोई भी प्रोपेगेंडा या दबाव हमें अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा करने से रोक नहीं पाएगा।”