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जेल में ही कटेंगे अरविंद केजरीवाल के दिन, दिल्ली की कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ाई: सेहत की पूरी जाँच करा कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे

दिल्ली शराब घोटाला केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार (05 जून 2024) को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। केजरीवाल ने सेहत का हवाला देते हुए सात दिनों की अंतरिम जमानत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया, लेकिन जेल प्रशासन को ये निर्देश दिया है कि वो अरविंद केजरीवाल की सेहत की पूरी जाँच कराए और रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत भी 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। अब केजरीवाल को 19 जून तक जेल में ही रहना होगा। अपने आदेश में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जरूरी मेडिकल टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में केजरीवाल की चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखने का निर्देश दिया है।

केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 मई को दी गई अंतरिम जमानत पर एक जून तक के लिए जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद उन्होंने अंतरिम जमानत को सात दिन के लिए बढ़ाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को उनकी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था।

इस याचिका में केजरीवाल ने गुहार लगाई थी कि उन्हें मेडिकल जाँच कराने के लिए समय चाहिए क्योंकि उनका वजन कम हो रहा है और कीटोन का स्तर बढ़ा है। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की माँग करते हुए विशेष सीबीआई-ईडी अदालत का रुख किया। 1 जून को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने अपना आदेश पाँच जून के लिए सुरक्षित रख लिया था। अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने कहा था कि केजरीवाल अदालत को गुमराह कर रहे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि लगातार चुनाव प्रचार कर रहे केजरीवाल का स्वास्थय तब खराब हुआ जब सरेंडर करने का समय आया।

अरविंद केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 1 जून तक की अंतरिम बेल दी थी, ताकि वो लोकसभा चुनाव में प्रचार कर सकें। इसके बाद उन्होंने तिहाड़ जेल पहुँचकर सरेंडर कर दिया था। अरविंद केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका अभी पेंडिंग है। आगामी 7 जून 2024 को उस जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।

केजरीवाल की याचिका तत्काल सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, अब CJI चंद्रचूड़ करेंगे फैसला: 2 जून को करना है सरेंडर

जैसी शंका की जा रही थी कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला अरविन्द केजरीवाल जून 2 को सरेंडर नहीं करना का कोई न कोई बहाना निकालेगा। वैसे भी अपनी चुनावी रैलियों में कह रहा है कि 'अगर झाड़ू और INDI गठबंधन को वोट दिया तो 5 जून को बाहर आ जाऊंगा' दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल में health check up क्यों करवाया? जबकि रैलियों में अपने मौहल्ला क्लिनिक और सरकारी हॉस्पिटलों को उच्च स्तरीय बताते हैं, यानि खुद ही साबित कर दिया कि  जनता को पागल बनाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का ड्रामा। जब स्वास्थ्य ठीक नहीं, रोज प्रदर्शन क्यों किये जा रहे हैं? जब जेल से बाहर आकर शेरों की तरह दहाड़ने से नहीं लगता जेल में 7 किलो वजन कम हुआ हो। 

केजरीवाल को नहीं मालूम कि द्वापर युग में दुर्योधन का राज गया द्रौपदी चीरहरण के कारण, वही हाल पार्टी का स्वाति मालीवाल के कारण होने वाला है। दोनों महिलाएं माहवारी से थीं, दोनों के केशों को खिंचा गया था, और इस दौरान महिला के साथ की पर-पुरुष द्वारा उत्पीड़न उसके पतन का आधार बन जाता है। दोनों ने ही अपनी रजस्वला को बता दिया था। जब दिमाग छल-कपट में हो सनातन धर्म का ज्ञान कहाँ से होगा? अयोध्या राममन्दिर के विरुद्ध बहुत कहते फिरते थे कि 'मेरी नानी ऐसे कहती थी, वैसे कहती थी' लेकिन नानी ने संस्कारी बातें नहीं बताईं?     

दिल्ली के मुख्यमंत्री और AAP के मुखिया अरविन्द केजरीवाल की अंतरिम जमानत बढ़ाने की अर्जी को लेकर CJI डीवाई चंद्रचूड़ फैसला करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की अवकाश बेंच ने इस मामले को तत्काल सुनने से मना कर दिया है। केजरीवाल ने 7 दिन की जमानत स्वास्थ्य आधार पर माँगी है।

28 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट की जेके माहेश्वरी और केवी विश्वनाथन की अवकाश बेंच ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बेंच के सामने अरविन्द केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उनकी अंतरिम जमानत बढ़ाने को लेकर लगाई गई याचिका की तत्काल सुनवाई की माँग की। उन्होंने दावा किया कि यह जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं बल्कि केवल एक छोटी सी माँग है।

अवकाश बेंच ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले को CJI चंद्रचूड़ के सामने रखा जाए, वही इस पर अंतिम फैसला लेंगे कि याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए या नहीं। CM केजरीवाल ने सोमवार (28 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका लगाई थी कि उनकी अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया जाए।

उन्होंने माँग की थी कि 1 जून, 2024 को खत्म हो रही उनकी चुनाव प्रचार के लिए दी गई जमानत को 8 जून, 2024 तक बढ़ा दिया जाए। उन्होंने कहा है कि उन्हें इस एक सप्ताह में कुछ मेडिकल चेकअप करवाने हैं, जिसके लिए उन्हें यह बढ़ी हुई जमानत चाहिए। AAP ने बताया था कि डॉक्टरों ने केजरीवाल को गंभीर मेडिकल चेकअप करवाने की सलाह दी है, उन्हें पूरे शरीर का PET स्कैन करवाने को कहा गया है। इसी कारण से अरविन्द केजरीवाल को एक सप्ताह की अतिरिक्त जमानत चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई, 2024 को अरविन्द केजरीवाल को 1 जून तक लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। उन्हें 2 जून को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करना था। उन्हें मार्च, 2024 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था । अब उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर फिर से जमानत बढ़ाने की माँग की है।

इससे पहले भी वह जेल में स्वास्थ्य को लेकर कई दावे कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि तिहाड़ जेल में ले जाए जाने के बाद CM केजरीवाल का वजन 4.5 किलोग्राम कम हो हुआ था। हालाँकि, इस दावे को तिहाड़ प्रशासन ने नकारते हुए बताया था कि वह जेल में 65 किलोग्राम के आए थे और उतने ही बने रहे थे।

केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट को बताया था कि वह अपना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए आम और मिठाई खा रहे थे। ऐसा वह जेल के भीतर पाना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए कर रहे थे ताकि उन्हें स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिल सके।

देश के खिलाफ विद्रोह करने वालों को ऐसे छोड़ दिया जाता है ; देश के विरुद्ध साज़िशकर्ताओं पर मीलॉर्ड कब गंभीर होंगे?

सुभाष चन्द्र

मई 16 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यायप्राणी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सुप्रीम कोर्ट पर भी प्रहार कर दिया, जिससे सुप्रीम कोर्ट में हड़कंप मचना स्वाभाविक है। जिस आधार पर अरविन्द केजरीवाल को interim bail दी, तिहाड़ में बंद अन्य मुख्यमंत्रियों/नेताओं को क्यों नहीं दी? अगर चुनाव केजरीवाल के लिए प्रमुख है अन्यों के लिए क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने कल(मई 15) Newsclick के editor प्रबीर पुरकायस्थ की UAPA में गिरफ्तारी अवैध कहते हुए रिहा कर दिया। जस्टिस बी आर गवई और संदीप मेहता ने उसका कारण बताया कि उसे गिरफ़्तारी के कारण लिख कर नहीं दिए गए 

यानी 2021 जुलाई से पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ़्तारी पर रोक लगाई थी और बड़ी मुश्किल से दिल्ली पुलिस के हाथ लगा था ये चीन पैसा लेकर भारत की Stability & Integrity के साथ खिलवाड़ करने वाला और उसे छोड़ कर जैसे उसके देश के खिलाफ सभी कामों को भी जैसे ठीक बता दिया। मीलॉर्ड ने कहा कि UAPA में गिरफ़्तारी के कारण बताना जरूरी है और नहीं बताए तो गिरफ़्तारी अवैध है

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
पुरकायस्थ पर चीन से 75 करोड़ रुपए मंगवाने का गंभीर आरोप है

इसके अलावा सबसे खतरनाक आरोप इन पर था कि इसने उत्तर भारत के borders का ऐसा नक्शा बनाया जिसमें अरुणाचल प्रदेश और J&K को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया लेकिन मीलॉर्ड ने इस पर कुछ ध्यान नहीं दिया और तकनीकी आधार पर रिहा कर दिया

पुरकायस्थ 3 अक्टूबर, 2023 को गिरफ्तार हुआ था तब मजिस्ट्रेट को इसे 7 दिन की रिमांड पर भेजते हुए यह देखना चाहिए था कि Grounds of Arrest बताये गए हैं या नहीं तुषार मेहता ने हाई कोर्ट में कहा था कि UAPA guidelines में अरेस्ट के ग्राउंड के written copy देना जरूरी नहीं है वैसे मजिस्ट्रेट के सामने grounds बता दिए गए थे

पुरकायस्था ने हाई कोर्ट में अपील की थी लेकिन हाई कोर्ट ने 10 अक्टूबर को उसकी अपील खारिज कर दी यह कहते हुए कि उसमे कोई Merit नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिहाई के लिए पंकज बंसल के केस का जिक्र किया है लेकिन वह केस UAPA का नहीं था बल्कि PMLA का था और दोनों कानून अलग है वैसे भी वह फैसला दिसंबर, 2023 का था जबकि पुरकायस्था गिरफ्तार अक्टूबर, 23 में हुआ। उसको backdate में कैसे apply कर सकते हैं

ये तो मतलब साफ़ हो गया कि सुप्रीम कोर्ट हर किसी को छोड़ने में आगे रहेगा चाहे वह देश का दुश्मन ही क्यों न हो दूसरे शब्दों में जो भी मोदी सरकार के खिलाफ होगा, अदालत उसके साथ होगी जैसे केजरीवाल के साथ थी जिसे अनैतिक रूप से बेल दे दी गई आज(मई 16) अमित शाह से सुन ही लिया न कि अदालत द्वारा उसे special Treatment दिया गया एक गृह मंत्री इससे ज्यादा और सख्त नहीं कह सकता अदालत के आचरण पर 

मजिस्ट्रेट ने परवाह नहीं की और न ही हाई कोर्ट ने परवाह नहीं की आपको चिंता थी तो पुलिस को हिदायत दे सकते थे कि 2 दिन में उसको लिखित में गिरफ़्तारी के आधार बताये जाएं मगर आपने तो उसे छोड़ना ही बेहतर समझा

आप उसे कह रहे हैं कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना आपने कह दिया और उसने मान लिया, ऐसा होगा क्या? वो सारे पैसे और ख़ुफ़िया  जानकारी सात तालों में बंद कर छुपा कर चीन से मंगवा लाया और उससे आप उम्मीद कर रहे हो कि सबूतों से छेड़छाड़ न करे

पुरकायस्थ तो मौका मिलते ही सबूतों को नष्ट कर देगा इतना गंभीर केस सुप्रीम कोर्ट ने मिट्टी मिला दिया जिसका मतलब यह भी निकलता है कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट को इशारा है सोच कर फैसले करना हम बैठे हैं ऊपर 

क्या सुप्रीम कोर्ट केजरीवाल के मकड़जाल में फंस गया है? घोटाले के सबूतों से हो सकती है छेड़छाड़; चुनाव बड़ा या घोटाले?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं। जमानत दे दी जाए, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए हम कुछ नहीं कह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को भी सूचना दे दी है कि 7 मई को इस मामले में वो सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर ये मामला लंबा चलता है, तो अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर दोनों पक्षों को बहस के लिए तैयार हो कर आने के लिए कहा है। मंगलवार (7 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने बहस के लिए समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये मामला लंबा चलेगा, लिहाजा आम चुनाव के मद्देनजर हम केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर चुनाव प्रचार के लिए छोड़े जाने पर विचार करेंगे। उनको अंतरिम जमानत दी जाए या नहीं, इस पर बात करेंगे। साथ ही कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अपने मुवक्किल ईडी से जमानत की शर्तों पर निर्देश लेकर आएँ। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा कि क्या केजरीवाल अभी भी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जवाब देने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई में समय लगने की संभावना है और इसलिए अदालत उन्हें अंतरिम जमानत देने पर ईडी की दलीलें सुनने पर विचार कर रही है। इस पर एसवी राजू ने कहा कि वह केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का विरोध करेंगे। बता दें कि बेंच केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखी, लेकिन कोर्ट ने राजू को टोका और कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि आपके पास मेटेरियल क्या हैं जिनसे ये बताया जा सके कि गिरफ्तारी अनिवार्य है। जस्टिस संजीव खन्ना ने केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि दिल्ली में चुनाव कब होने हैं? इस पर एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि 25 मई को दिल्ली में चुनाव होने हैं। चुनाव के 48 घंटे पहले प्रचार बंद हो जाएगा।