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‘मुस्लिम भीड़ ने काट डाला था मेरे दादा का गला’: योगेंद्र यादव उर्फ़ ‘सलीम’

‘स्वराज इंडिया पार्टी’ के संस्थापक योगेंद्र यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में योगेंद्र यादव कहते दिख रहे हैं कि उनके दादा को मुस्लिमों की भीड़ ने मार डाला था। इस वीडियो को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

इस वीडियो में योगेंद्र यादव ने कहा है कि उनके दादा मुस्लिमों की ‘मॉब लिंचिंग’ का शिकार हुए थे। तब, उनके दादा का मुस्लिमों की भीड़ ने गला काट दिया था।

योगेंद्र यादव ने कहा है, “जैसे मैं अपने दादा के बारे में कहता हूँ कि मेरे दादाजी ने मुस्लिमों की भीड़ से कहा तुम इन बच्चों को मार नहीं सकते। ये मेरे बच्चे हैं, मेरा गला काट लो… और उस भीड़ ने मेरे दादा का गला काट दिया था। आज मैं उनका पोता गर्व से यह बात कहता हूँ। वैसे ही मैं चाहता हूँ मेरी आने वाली पीढ़ी ये कह सके हाँ मेरा दादा लड़ा था।”

योगेंद्र यादव के दादा की हत्या मुस्लिमों की भीड़ ने की थी, यह जानते हुए भी वह लगातार मुस्लिमों के पक्ष में और हिन्दुओं के विरोध में बोलते रहे हैं। ज्ञानवापी के मुद्दे पर हिन्दुओं से बदला लेने की बात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

यही नहीं, योगेंद्र यादव पर कई बार खुले मंच से मुस्लिमों को भड़काने के आरोप भी लग चुके हैं। खासतौर से उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद योगेंद्र यादव ने मुस्लिमों को उकसाने वाले कारनामे किए हैं। योगेंद्र ने अपने एक लेख में कहा था “उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद अब मुसलमानों को भारत में लड़ने के लिए लोकतांत्रिक तरीके काफी नहीं हैं। मुस्लिमों की नई पीढ़ी को अब गैर लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।”

इसके अलावा, उन्होंने एक रैली में बताया था, “जब मेरे दादाजी की हत्या कर दी गई थी, उसके बाद मेरे पिता ने मेरा नाम सलीम, मेरी बहन का नाम नजमा रखा था। मेरे करीबी दोस्त, मेरा परिवार और मेरी पत्नी अब भी मुझे सलीम कहते हैं। यह मेरे परिवार का एक गुप्त रहस्य माना जाता था।”

योगेंद्र यादव के इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया सामने आयी है। श्यामल उपाध्याय नामक ट्विटर यूजर ने लिखा ” और ये आज तक उनसे डरा हुआ है….अब समझ में आया इस का मुस्लिम प्रेम का कारण।”

वहीं, अतुल पाण्डेय नामक यूजर ने लिखा “सलीम मियाँ, तुम क्या हो सब जानते हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “आजकल सलीम अपने फिरोज खान अंकल के पोते को प्रधानमंत्री बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है।” बता दें कि अब योगेंद्र यादव कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं। वो राहुल गाँधी के साथ घूम रहे हैं, सोशल मीडिया में इस यात्रा के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और भीड़ जुटाने में मदद कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश : मॉब लिंचिंग के डर से शिवलिंग पर पेशाब करने का दावा करने वाला प्रोफेसर आपातकालीन छुट्टी लेकर भागा

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
हिन्दू होकर हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने में अपनी शान समझने वाले अक्ल के पैदलों को जितनी छूट मिली हुई है, काश ऐसी अपमानित भाषा किसी और धर्म के लिए प्रयोग होती, पता नहीं किस पाताललोक में छुपे होते। रहम की भीख मांग रहे होते। आखिर हिन्दू-विरोधी इन हिन्दू-जयचन्दों को कब तक छूट मिली रहेगी? क्या ये हिन्दू-विरोधी हिन्दू-प्रेमियों को कानून हाथ में लेने को विवश कर, देश का माहौल ख़राब करने का प्रयास नहीं कर रहे?
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर बहाना बनाकर किसी दुर्घटना की आशंका के डर से अनिश्चितकालीन छुट्टी पर चले गए हैं। हिस्ट्री डिपार्टमेंट में 40 वर्षीय दलित असिस्टेंट प्रोफेसर विक्रम हरिजन ने कहा कि अगस्त में वायरल हुए एक वीडियो में कुछ टिप्पणियों को लेकर पिछले दिनों कैंपस के छात्रों के समूह ने उनका घेराव किया था और उन्हें धमकी दी थी, जिसके बाद वो ‘मॉब लिंचिंग’ का डर बताकर आपातकालीन छुट्टी पर चले गए। 
यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने वायरल हुए इस वीडियो में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर विक्रम को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है, जिस पर प्रोफेसर ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। वहीं, छात्र संगठन एबीवीपी ने भी इस वीडियो को लेकर प्रोफेसर विक्रम के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करवाई है।
प्रोफेसर विक्रम के खिलाफ शिकायत करने वालों का आरोप है कि वायरल हो रहे वीडियो में विक्रम ने कथित रूप से हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। पिछले महीने वायरल हुए वीडियो में हरिजन को यह दावा करते हुए देखा जा सकता है कि वो अपने पैतृक गाँव में अपने कुछ दोस्तों के साथ मंदिर गए और वहाँ उन्होंने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया।
हरिजन ने कहा कि लोगों में अंधविश्वास है कि अगर वे देवताओं का अनादर करेंगे तो कुछ बुरा होगा। उसने यही दिखाने के लिए कि कोई भी देवता उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकता, उसने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया। मगर उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं हुआ, वह सामान्य जिंदगी जी रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद, विक्रम हरिजन ने दावा किया कि वीडियो को पीएचडी के एक छात्र रंजीत सरोज ने दुश्मनी के कारण उन्हें बदनाम करने के लिए अपलोड किया था। 20 अगस्त को वायरल हुए 2.3 मिनट के वीडियो को लेकर विक्रम का कहना है कि यह वीडियो दो साल पुराना 14 अप्रैल, 2017 का है और इसमें डॉक्टर बीआर अंबेडकर की जयंती के दौरान दिए गए भाषण के कुछ हिस्सों को दिखाया गया है।
इस मौके पर कैंपस के बाहर एक छोटा सा मिलन समारोह रखा गया था, जिसमें उन्होंने यह समझाने के लिए एक घटना का जिक्र किया था कि कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। भाग्य पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनका कहना है कि वो अपने बयान के माध्यम से ‘विचार’ को बढ़ावा देना चाहते थे।
बाद में एक ब्लॉग-पोस्ट भी सामने आया था, जहाँ यह दावा किया गया था कि डॉ विक्रम हरिजन लंबे समय से अपने पीएचडी छात्र रंजीत सरोज को परेशान कर रहे थे और उन्होंने उससे पैसे भी लिए थे। ब्लॉग पोस्ट में दावा किया गया है कि विक्रम हरिजन, सरोज को विरोध प्रदर्शन करने और अपने उच्च जाति प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
पोस्ट के अनुसार, जब सरोज ने उनकी गतिविधियों का हिस्सा बनने पर आपत्ति जताई, तो विक्रम हरिजन ने उन्हें धमकी दी थी कि वह उसका करियर बर्बाद कर देंगे। हालाँकि, हम ब्लॉग पोस्ट द्वारा किए गए दावों को सत्यापित नहीं कर सके।
इस महीने की शुरुआत में द हिंदू से बात करते हुए, विक्रम हरिजन ने दावा किया था कि वीडियो रणजीत सरोज द्वारा अपलोड किया गया था, क्योंकि सरोज की उनके प्रति व्यक्तिगत दुश्मनी है और वह उन्हें उनकी ‘औकात’ दिखाना चाहता है। दोनों ही अनुसूचित जाति के हैं। विक्रम का कहना है कि सरोज ‘पासी’ है और वह सोचता है कि वो उसकी जाति उनसे (विक्रम हरिजन) से बेहतर है।
हालाँकि, सरोज ने विक्रम हरिजन के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि उसने वीडियो इसलिए अपलोड किया था, क्योंकि वह विक्रम हरिजन द्वारा बार-बार उत्पीड़न और हिंदू देवताओं के अपमान से व्यथित था। सरोज ने कहा था कि भारत का संविधान सभी को समान अधिकार देता है और किसी को भी इस तरह धर्म का अपमान नहीं करना चाहिए।
वहीं, इस मामले में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रॉक्टर आरएस दुबे ने कहा कि अगर डॉ विक्रम हरिजन अपनी जान की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं, तो उन्हें पुलिस की मदद लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षक संघ के अध्यक्ष के रूप में, वे एक शिक्षक द्वारा की गई धार्मिक बातों के खिलाफ इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी की निंदा करते हैं।

क्यों चुप है #mob-lynching आदि गैंग, जब फजरुद्दीन, सलीम, अली ने मिलकर दलित संजय को बेदर्दी से मार डाला

संजय और रुख़सार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में हुए पिछले चुनावों तक #metoo, #intolerance, #mob-lynching, #not in my name, #award wapsi  आदि गैंगों ने चुनावों को प्रभावित किया, लेकिन आज ये गैंग एक दलित हिन्दू संजय की इतनी निर्मम हत्या पर क्यों खामोश हैं? क्या उनको पीना साँप पी गया है? कहाँ है मायावती, राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल, नसीरुद्दीन शाह, आमिर खान, आदि जब एक दलित की उनके वोट बैंक ने दामिनी से कहीं अधिक निर्दयता से हत्या की गयी है? यही गैंग उस समय पता नहीं किस मातम में डूबे हुए थे, जब विकासपुरी दिल्ली में इसी वोट बैंक द्वारा बेकसूर डॉ नारंग की हत्या की गयी थी? किसी फिरकापरस्त की आवाज़ तक नहीं निकली, दूसरों में ही इनको दोष दिखाई देता है, अपने पापों पर चुप्पी साध लेते हैं? यह दर्शाता है कि ये बिकाऊ गैंग किसी के इशारे पर ही चीखता-चिल्लाता है, इनका अपना कोई अस्तित्व नहीं, इनको कोई प्रलोभन दो, कहीं भी ले जाकर शोर-शराबा करवा कर देश का वातावरण दूषित करवा लो। अन्यथा वोट बैंक द्वारा किये जाने वाले घिनौने अपराधों पर खामोश नहीं रहते। 
Image result for shannomaganयही गैंग उस समय भी खामोश था, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ही कार्यकाल में एक रेहड़ी चलाने वाले दलित द्वारा रास्ता माँगने पर समाजवादी पार्टी के एक मुस्लिम पदाधिकारी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उस दलित को अपना पेशाब पिलाया था।      
हेट क्राइम का एक और पीड़ित परिवार पिछले 6 महीने से न्याय का इंतजार कर रहा है। पता नहीं कब उसे न्याय मिलेगा। मामला हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अगस्त में अपनी पत्नी के परिवार के हाथों 22 वर्षीय संजय कुमार की निर्मम हत्या का है। 
एक दलित हिंदू, संजय ने एक मुस्लिम महिला से शादी करने और अपने परिवार का धर्म परिवर्तित करने की माँग को स्वीकार न करने की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। मुस्लिम युवती के परिवार वालों ने युवक की वीभत्स तरीके से हत्या कर दी।
संजय की मौत के बाद, उसकी माँ मंजू, मानसिक रूप से विकलांग नाबालिग भाई और पाँच साल पहले शादी के बंधन में बँध चुकी एक बहन सहित पूरा परिवार न केवल वित्तीय संकट से जूझ रहा है, बल्कि अपने प्रियजन के लिए न्याय की लड़ाई में भी खुद को अशक्त पा रहा है। 
संजय 16 अगस्त 2018 की शाम को लापता हो गया था, एफआईआर 19 अगस्त को दर्ज की गई थी और उसका क्षत-विक्षत शरीर 21 अगस्त को पास के पहाड़ी जंगल में पाया गया था।
इस घटना से लगभग एक साल पहले, संजय ने रुखसार के साथ राजस्थान में अपने दादा के गाँव जाकर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी कर ली थी। दोनों आठ महीने बाद फरीदाबाद लौट आए, जब रुखसार, जो अब खुद को रुक्मिणी कहती थी, गर्भवती हो गई। लड़के की माँ मंजू के अनुसार, रुखसार के परिवार ने उसे उसके पाँच महीने के भ्रूण का गर्भपात कराने और उसके माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर किया। फिर भी, दोनों ने लगातार संपर्क बनाए रखा था।
मंजू के अनुसार, रुखसार के पिता फजरुद्दीन खान और भाई सलीम खान ने 15 अगस्त को संजय को फोन किया था, जब वह राजस्थान में था, और उसे कॉलोनी लौटने के लिए मना लिया, ताकि दोनों पक्ष प्रेमी युगल के विवाह का मामला सुलझा सकें। अगले दिन, सलीम और फजरुद्दीन संजय के घर मोटरसाइकिल पर आए और उसे ले गए।
वे संजय को जंगल में ले गए, दो पुरुषों की मदद से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया और उसके शरीर को सड़ने के लिए छोड़ दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, जब संजय का मृत शरीर सड़ी हालत में हासिल हुआ तो उससे क्रूरता की हदों का पता चला। उसका मलाशय गायब था, उसके गुदा में कोई वस्तु डालकर उसे जबरन बाहर निकाला गया था। उनके लिंग को काट दिया गया था। उसके फेफड़े गायब थे, उसका शरीर खुला हुआ था। यहाँ तक कि आँखे भी निकाल ली गई थी। उसके कई दांत गायब थे। उसे बाँध कर घसीटा गया था। कुछ स्थानों पर त्वचा को बुरी तरह से छील दिया गया था, जिसमें एक पैच भी शामिल था जहाँ ‘ओम’ का एक टैटू मौजूद था।
मंजू के भाई प्रह्लाद ने कहा कि उसने अपनी बहन से उन तथ्यों को छिपाया। कई वर्षों से विधवा रहीं मंजू ने 10 साल पहले अपने बड़े बेटे को भी खो दिया था, जिनकी बिजली के झटके से मौत हो गई थी। और अब इस हादसे ने पूरी तरह से मंजू को तोड़ दिया। 
स्वराज मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपपत्र में रुखसार का उल्लेख नहीं है। उसका बयान महत्वपूर्ण है, लेकिन दर्ज नहीं किया गया है। परिवार इसके लिए प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुका है। 
चार्जशीट में चार अभियुक्तों का नाम है- फजरुद्दीन, सलीम, सलीम के चाचा अली मोहम्मद और सलीम के पड़ोसी सुमित ने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है।
आज 6 महीने बीतने के बाद भी परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहा है। चूँकि, इस मामले में मृत हिन्दू है तो तथाकथित हल्ला बोल मीडिया ने भी इसे कोई खास कवरेज नहीं दिया। और न ही इस मामले में कोई अवार्ड वापसी गैंग सामने आया।