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उत्तर प्रदेश : मुजफ्फरनगर के 1 दर्जन मदरसों को शिक्षा विभाग का नोटिस : ‘फ़ौरन लगाओ ताला, वरना रोज भरो 10000 रूपए का जुर्माना’

                                                                                                         प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस भेजी जा रही है। इन नोटिसों में अवैध मदरसों को फ़ौरन बंद करने की हिदायत दी गई है। नोटिस में आदेश का पालन न करने वाले मदरसा संचालकों पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। अनुमान के मुताबिक, जिले में अवैध मदरसों की तादाद लगभग 100 है। शुरुआती चरण में अब तक 12 मदरसों को चिह्नित कर के नोटिस भेजी गई है। ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ ने इस आदेश की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी फंडिंग से चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर जिले में भी बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का डाटा जिले के अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिले में अब तक लगभग 100 ऐसे मदरसे ऐसे चिह्नित हुए है जिनके कागजात सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें से प्रशासन द्वारा 12 मदरसा संचालकों को नोटिस भेज कर कहा गया है कि अगर उन्होंने मदरसा फ़ौरन बंद नहीं किया तो उन पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को मुजफ्फरनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुर्माने वाली नोटिस ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी किए गए हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जिले में गैर-पंजीकृत पाए गए 100 मदरसों के बारे में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, ‘उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेशन बोर्ड’ इस नोटिस का विरोध कर रहा है। मदरसा बोर्ड साल 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार के उस प्रावधान का जिक्र कर रहा है जिसमें मदरसों को स्कूलों की बनाई नियमावली से अलग कर दिया गया था। बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक मदरसा मामलों में शिक्षा विभाग समेत किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मदरसों को आम स्कूल न समझने की बात कहते उन्हें अल्पसंख्यक विभाग के अधीनस्थ बताया।

मदरसों को मिली नोटिस के मामले में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपने विरोध के सुर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। जमीयत के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली। इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आदेश को संविधान द्वारा मिली धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों को नोटिस मिली है उनमे मज़हबी शिक्षा फ्री में दी जाती है और वहाँ क्लास नहीं चलते। मदरसा बोर्ड की तरह जमीयत भी इन मदरसों को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है।