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उत्तर प्रदेश : मुजफ्फरनगर के 1 दर्जन मदरसों को शिक्षा विभाग का नोटिस : ‘फ़ौरन लगाओ ताला, वरना रोज भरो 10000 रूपए का जुर्माना’

                                                                                                         प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस भेजी जा रही है। इन नोटिसों में अवैध मदरसों को फ़ौरन बंद करने की हिदायत दी गई है। नोटिस में आदेश का पालन न करने वाले मदरसा संचालकों पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। अनुमान के मुताबिक, जिले में अवैध मदरसों की तादाद लगभग 100 है। शुरुआती चरण में अब तक 12 मदरसों को चिह्नित कर के नोटिस भेजी गई है। ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ ने इस आदेश की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी फंडिंग से चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर जिले में भी बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का डाटा जिले के अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिले में अब तक लगभग 100 ऐसे मदरसे ऐसे चिह्नित हुए है जिनके कागजात सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें से प्रशासन द्वारा 12 मदरसा संचालकों को नोटिस भेज कर कहा गया है कि अगर उन्होंने मदरसा फ़ौरन बंद नहीं किया तो उन पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को मुजफ्फरनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुर्माने वाली नोटिस ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी किए गए हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जिले में गैर-पंजीकृत पाए गए 100 मदरसों के बारे में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, ‘उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेशन बोर्ड’ इस नोटिस का विरोध कर रहा है। मदरसा बोर्ड साल 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार के उस प्रावधान का जिक्र कर रहा है जिसमें मदरसों को स्कूलों की बनाई नियमावली से अलग कर दिया गया था। बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक मदरसा मामलों में शिक्षा विभाग समेत किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मदरसों को आम स्कूल न समझने की बात कहते उन्हें अल्पसंख्यक विभाग के अधीनस्थ बताया।

मदरसों को मिली नोटिस के मामले में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपने विरोध के सुर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। जमीयत के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली। इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आदेश को संविधान द्वारा मिली धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों को नोटिस मिली है उनमे मज़हबी शिक्षा फ्री में दी जाती है और वहाँ क्लास नहीं चलते। मदरसा बोर्ड की तरह जमीयत भी इन मदरसों को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है।

‘कमर में हाथ डाल नीचे खींच लिया… समझ नहीं पाई क्या हो रहा’: रैली में महिला किसान नेता से बदतमीजी

                 पहले अभिनेत्री सपना चौधरी की बाउंसर हुआ करती थीं किसान नेता पूनम पंडित (फाइल फोटोज)
केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के क्रम में लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कई किसान संगठन पिछले एक साल से आंदोलन करने में लगे हुए हैं और भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं। किसान आंदोलन के महिला चेहरों में एक पूनम पंडित भी हैं, जो पहले डांसर एवं मॉडल सपना चौधरी की बाउंसर हुआ करती थीं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली किसान नेता पूनम पंडित के साथ मुजफ्फरनगर ‘किसान महापंचायत’ में दुर्व्यवहार हुआ।

हाल ही में राकेश टिकैत सहित ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ ने मुजफ्फरनगर में भाजपा के खिलाफ रैली आयोजित की थी, जहाँ से ‘अल्लाहु अकबर’ का भी नारा दिया गया। वहाँ पूनम पंडित को मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया संस्थानों से बात करते हुए पूनम पंडित ने कुछ गंभीर आरोप लगाए। कभी हरियाणा के करनाल में नौकरी करने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कृषि कानूनों की बारीकियों को समझने के बाद वो ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ीं।

सपना चौधरी खुद को अंतरराष्ट्रीय शूटर भी बताती हैं। नेपाल में स्वर्ण पदक जीतने का दावा करने वाली पूनम पंडित को इस बात का मलाल है कि एक कलाकार होने के बावजूद सपना चौधरी किसानों के समर्थन में नहीं आईं। उन्होंने कुछ लोगों पर ज़हर फैला कर ‘किसान आंदोलन’ को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यही कारण है कि मुजफ्फरनगर में उनके साथ बदतमीजी की गई थी।

इस सम्बन्ध में पूनम पंडित ने बताया, “एक लड़के ने मुझे कोली भर के, अर्थात कमर में हाथ डालकर नीचे खींच लिया। इसके बाद मुझे मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। उसने धमकाया कि मैं किसी भी हालत में तुम्‍हें मंच पर नहीं चढ़ने दूँगा। मेरे साथ धक्‍का-मुक्‍की भी की गई। मैं पसीने से तरबतर हो गई और मेरी तबीयत भी खराब हो गई थी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाई की मेरे साथ ये क्या किया जा रहा है।”

पूनम पंडित ने दावा किया कि खुद BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उन्हें महापंचायत में आमंत्रित किया था। बाद में राकेश टिकैत ने उन्हें मंच पर भी जगह दी। आखिरी दम तक ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ी रहने की बात करते हुए पूनम पंडित ने बताया कि वो अभी 25 साल की हैं और उन्होंने हाल ही में अपनी छोटी बहन की शादी की है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और माँ ने ही बच्चों की परवरिश की है।

हरियाणवी और यूपी के लहजे में भाषण देने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कई लोग उन्हें पसंद नहीं करते और उनके साथ पहले भी दुर्व्यवहार हो चुका है। टिकरी सीमा पर चल रहे प्रदर्शन में भी उन्हें रोक दिया गया था। करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप लगा कर हुए आंदोलन में भी वो सक्रिय रही थीं। हरियाणा को अपने घर जैसा बताने वाली पूनम पंडित ने कहा कि कुछ लोगों की नफरत के कारण वो हार नहीं मान सकतीं।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने किसान नेता पूनम पंडित की तस्वीर शेयर करते हुए उन पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगा उन्हें ‘विश्वासघाती’ भी कह रहे हैं। ध्रुव राठी जैसों ने उनकी तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि वो भाजपा दफ्तर में बैठी हुई हैं। लोगों का कहना है कि पूनम पंडित इन तस्वीरों को एडिटेड बता रही हैं, लेकिन भाजपा दफ्तर में बैठे उनके वीडियोज को लेकर वो क्या कहेंगी? लोग उन्हें ‘किसान आंदोलन’ से अलग करने की माँग भी कर रहे हैं।

मुज़फ्फरनगर किसान मोर्चा : क्या किसान आंदोलन में थूक मिला हलवा बांटा गया था?

                          मुसलमान हर हर महादेव नहीं बोलेगा: राकेश टिकैत पर बरसे स्थानीय लोग (फोटो: ट्विटर)
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान मोर्चा की महापंचायत के दौरान अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाले राकेश टिकैत से कुछ लोग बेहद नाराज हैं। वहाँ के स्थानीय निवासी शाहिद हुसैन ने उनके भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसान नेता पर शाहिद हुसैन की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ट्विटर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट आलोक भट्ट ने उनका वीडियो शेयर किया है।

शाहिद हुसैन की टिकैत को दो टूक – ‘संभव नहीं हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा’  

उनसे सवाल किया गया कि राकेश टिकैत ने अल्लाह-हू-अकबर और हर हर महादेव का नारा दिया इसमें क्या दिक्कत हो गई। इसको लेकर हुसैन ने कहा, “मुसलमान हर हर महादेव नहीं बोलेगा। यह आज का कोई एकांकी नाटक नहीं है। जब महात्मा गाँधी सक्रिय राजनीति में आए, तब वो भी हिंदू-मुस्लिम भाई चारा बढ़ाने के लिए, रोजाना ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान गाया करते थे, लेकिन मुसलमानों ने इसे कभी भी नहीं गाया। यहाँ तक की देश का विभाजन भी हो गया, तभी भी इसे किसी भी मुसलमान ने नहीं गाया।”

उन्होंने आगे कहा, ”आज किसान के नाम पर राकेश टिकैत राजनीति कर रहे हैं। जहाँ तक उनके अल्लाह-हू-अकबर और उसके प्रतिवाद में हर हर महादेव कहने की बात है, तो वो कहते रहें। लेकिन मुसलमान हर हर महादेव कभी नहीं कहेगा। ऐतिहासिक रूप से मुझे इसकी जानकारी है।”

जब हुसैन से पूछा गया कि क्या आप नहीं चाहते कि हिंदू-मुस्लिम भाई चारा बढ़े। इस पर वो कहते हैं, ”नहीं, भारत में हिंदू-मुस्लिम भाई चारा ना कभी संभव था, ना है और ना कभी रहेगा। दोनों की विचारधारा का मौलिक अंतर है। जहाँ जहाँ इस्लाम गया वहाँ इस्लामिक सिद्धांत के अलावा सब फेल हुआ। अखंड भारत की बात करें तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसी का हिस्सा थे, जो हिस्सा बँट गया उसमें से हर हर महादेव कट गया और अल्लाह-हू-अकबर रह गया। यहाँ भी जो हिस्सा कट जाएगा उसमें अल्लाह-हू-अकबर रह जाएगा और बाकी हर हर महादेव रह जाएगा। उन्होंंने कहा कि ये वो रोजाना गाते रहें, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये दंगे भाजपा ने नहीं कराए थे, बल्कि भारतीय किसान यूनियन के नाम पर राकेश टिकैत ने हर स्टेज को तैयार किया था। 27 तारीख को सचिन और गौरव की हत्या के बाद सबसे पहले वहाँ जाने वाले आमिर आलम और राकेश टिकैत ही थे। इसके बाद 31 तारीख को घोषणा करने वाले राकेश टिकैत थे।

हुसैन ने कहा, “जहाँ तक किसान यूनियन और राकेश टिकैत की बात है तो ये दोनों एक ही हैं, इनमें कोई विरोधाभास नहीं है। दोनों का एक ही मिशन है सत्ता पर काबिज होना। वर्तमान में ये केवल राजनीति में आना और अपना लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं।”

शाहिद हुसैन ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधी जिनमें मुस्लिम भी हैं, वे पुलिस से बचने के लिए किसान यूनियन में शामिल हो रहे हैं। ये इनके लिए बहुत अच्छा मंच है। इन अपराधियों की बीजेपी में कोई अच्छी पकड़ नहीं है, इसलिए ये किसान यूनियन के लोगों की मदद से पुलिस से अपना बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कि हिंदू मुस्लिम भाई चारे की बात केवल एक नाटक है।

इससे पहले अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाले राकेश टिकैत को एक आम मुसलमान ने संदेश दिया था, “हमें 113 मस्जिदें दो। मुजफ्फरनगर दंगों के लिए सभी जाटों की तरफ से माफी माँगो। तुम अल्लाह-हू-अकबर बोलो, हम हर हर महादेव कभी नहीं बोलेंगे!” ये संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी शेयर किया था।


क्या किसान आंदोलन में थूक मिला हलवा बांटा गया था?

इसी बीच सोशल मीडिया पर राकेश के आंदोलन में थूक मिला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसकी पुष्टि तो नहीं हो सकी है। यदि यह सच है, राकेश और आंदोलन में सम्मिलित सभी नेताओं को इसका जवाब देना पड़ेगा। क्या राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव वीडियो में हलवे में थूक मिलाने वाले पर सख्त कार्यवाही करने की मांग करेंगे? क्या प्रदर्शन में शामिल किसान इन आन्दोलनजीवियों से थूक मिला हलवा खिलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे? क्या आन्दोलनजीवी और इनके समर्थक इस गिरी हुई हरकत को बर्दाश्त करेंगे? 

हम हर-हर महादेव कभी नहीं कहेंगे: पश्चिमी UP के मुस्लिम का वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महापंचायत के दौरान अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाले राकेश टिकैत को एक आम मुसलमान ने संदेश दिया है। ये संदेश अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी शेयर किया है।

अपने ट्वीट में शलभ मणि त्रिपाठी मुस्लिम व्यक्ति की बातों के मुख्य बिंदु उजागर करते हैं। वह लिखते हैं, “हमें 113 मस्जिदें दो। मुजफ्फरनगर दंगों के लिए सभी जाटों की तरफ से माफी माँगो। तुम अल्लाह-हू-अकबर बोलो, हम हर हर महादेव कभी नहीं बोलेंगे!”

वायरल वीडियो के मुताबिक पश्चिमी यूपी का एक आम मुसलमान राकेश टिकैत को संदेश दे रहा है। वह कहता है, “अल्लाह-हू-अकबर कह देने से राकेश टिकैत के गुनाह नहीं धुलेंगे। अल्लाह-हू-अकबर कहने से न ही उनकी तौबा कबूल होगी। अगर राकेश टिकैत को मुसलमानों से आगे हाथ बढ़ाना है तो सबसे पहले जो 113 मस्जिदें वीरान है हमारे जनपद की, जो 2013 के दंगों में किसान यूनियन के लोगों ने वीरान की थी, पहले उन मस्जिदों को आजाद कराएँ। उसके बाद आपका अल्लाह-हू-अकबर कहना जायज है।”

वह कहते हैं, “अल्लाह-हू-अकबर कहने से अल्लाह ताला माफ नहीं करेंगे। आपको वो बच्चे माफ नहीं करेंगे जिनके साथ किसान यूनियन के लोगों ने बलात्कार किया। वो बेसहारा, यतीम बच्चे आपको माफ नहीं करेंगे। जमीयत उलेमा ए हिंद के लोगों ने उन्हें मकान दिया। आज भी उनके आँसू आप नहीं धो सकते अल्लाह-हू-अकबर कहने से। ये सब झूठ है, ढकोसला है। आप अल्लाह-हू-अकबर कहते रहें हम हर हर महादेव नहीं कहेंगे। हमारा ईमान अल्लाह-हू-अकबर पर है, ला इलाहा इल्लल्लाह पर है। आपके अल्लाह-हू-अकबर कहने से आप चाहते हैं मुसलमान आपको माफ कर देगा…नहीं करेगा। अगर आपको लगता है मुसलमान आपको माफ कर देगा तो बताइए कितने मुसलमान आपके साथ है, जमीयत उलेमा ए हिंद के लोग आपके साथ हैं?”

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किसान महापंचायत में अल्लाह-हु-अकबर नारों का क्या मतलब?

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किसान महापंचायत में अल्लाह-हु-अकबर नारों का क्या मतलब?
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत हो रही है, किसान संगठनों ने 

किसान नेता राकेश टिकैत ने रविवार (5 सितंबर) को किसान मोर्चा की महापंचायत में भीड़ से अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए थे। उन्होंने कहा था, ”यूपी की जमीन को दंगा करवाने वालों को नहीं देंगे।” राकेश टिकैत ने कहा था कि जब भारत सरकार हमें बातचीत के लिए आमंत्रित करेगी, हम जाएँगे। जब तक सरकार हमारी माँगे पूरी नहीं करती तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आजादी के लिए संघर्ष 90 साल तक चला, इसलिए मुझे नहीं पता कि यह आंदोलन कब तक चलेगा।

 

भाड़ में जाए किसान आंदोलन, हम तो बीजेपी को हटाने के लिए आए हैं

एक ऑनलाइन समाचार चैनल हिन्दुस्तान 9 ने महापंचायत की एक ग्राउंड रिपोर्ट अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की है। इसमें भाड़े के किसान खुद अपनी पोल खोलते नजर आ रहे हैं। हिन्दुस्तान 9 के पत्रकार रोहित शर्मा ने महापंचायत में शामिल किसान प्रदर्शनकारियों से कुछ सवाल पूछे। मोहम्मद दानिश नाम के एक शख्स ने बताया कि वह पास के एक गांव के किसानों के समूह के साथ प्रदर्शन स्थल पर आया है।

दानिश ने कहा, “हम भारत सरकार द्वारा लाए गए तीन काले कानूनों का विरोध करने के उद्देश्य से यहां आए हैं। राकेश और नरेश टिकैत के नेतृत्व में गाजीपुर बॉर्डर पर हम पिछले नौ महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार को इन काले कानूनों को निरस्त करना होगा, जो किसानों के हित में नहीं हैं।”

जब रोहित ने भाड़े के किसानों से तीन कृषि कानूनों के बारे में पूछा तो, उनका जवाब काफी दिलचस्प था। किसान दानिश ने कहा, “हां, मुझे पता है। एक है एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर), एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) और एक और है, जिसे मैं भूल गया हूं।” रोहित ने पूछा कि क्या आप सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के बारे में बात कर रहे हैं, जिस पर दानिश ने कहा, “हां, हां! वही वाला।” रोहित ने पूछा, “तो आप इन तीन कानूनों के खिलाफ महापंचायत में भाग ले रहे हैं?” इस पर दानिश ने हां में जवाब दिया। वहीं मौजूद दूसरे भाड़े के किसान ने कहा कि भाड़ में जाए किसान आंदोलन, हम तो बीजेपी को हटाने के लिए आए हैं। बीजेपी को साफ करने के लिए ही किसान आंदोलन हो रहा है।

दानिश की बातों और “अल्लाह-हू-अकबर” के नारे ने किसान आंदोलन के पीछे चल रही साजिशों और उनके पीछे की ताकतों को बेनकाब कर दिया है। दरअसल यह पूरी तरह से किसानों के नाम पर चल रही सियासी नौटंकी है, जिसके मुख्य किरदार संयुक्त किसान मोर्चा के तथाकथित किसान नेता निभा रहे हैं, लेकिन इनकी डोर कांग्रेस, सपा, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के हाथों में हैं। राकेश टिकैत इस आंदोलन की आड़ में अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस और अन्य सियासी दोलों का मकसद किसानों को भड़का कर किसी भी तरह से 2022 में उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होना और 2024 में दिल्ली पर अपनी दावेदारी मजबूत करना है।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) : उधार की रकम मांगने पर धर्मांध खल कारोबारी द्वारा पशु चिकित्सक की हत्या


क्या यही है वो भारत का डरा हुआ समुदाय जो उधारी मांगने पर डॉक्टर की हत्या कर देता हैं ?

अब इस हत्या के बाद कोई  सेक्युलरवादी ‘असहिष्णुता’, #award vapsi, #not in my name आदि का ढिंढोरा नहीं पीटेगा, क्योंकि हत्या करने वाले (अ)शांतिप्रिय समुदाय से है ! प्रतापगढ़ में हनुमान मूर्ति को खंडित कर दिया गया, सभी छद्दम धर्म-निरपेक्षों को साँप सूंघ गया है या उनके परिवार में कोई मातम। 

उधार की रकम मांगने पर धर्मांध खल कारोबारी ने साथियों संग मिलकर पशु चिकित्सक की सिर में रॉड मारकर हत्या कर दी। हत्या का पता चलने पर भोपा क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। लोगों ने तीन जगहों पर जाम लगाकर फरार हत्यारोपितों को गिरफ्तार करने की मांग की। भाजपा व भाकियू नेताओं ने थाने पहुंचकर राजफाश की मांग की। गांव का बाजार बंद कर दिया गया। सभी स्कूलों की छुट्टी कर दी गई। पुलिस के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

रुपयों का तकादा किया था

पुलिस के अनुसार, ककराला निवासी मोहम्मद कामिल ने डॉक्टर सतीश मलिक से लाखों रुपये उधार लिए थे। डॉ. सतीश की ओर से पैसों का तकादा होने के कारण कामिल ने शुक्रवार को उनको घर बुलाया। चुडियाला निवासी दिलशाद, आरिफ व आशु के साथ मिलकर सिर में रॉड मारकर सतीश की हत्या कर दी। शव को एक बोरी में बंद कर दो अन्य बोरियों के साथ रेहडे पर रखकर जंगल में फेंकने के लिए चल दिए। बीच रास्ते में कामिल चुड़ियाला के तीनों आरोपितों को एक लाख रुपये देकर घर लौट आया।

आरोपित हिरासत में

कोतवाल के मुताबिक कामिल पुलिस हिरासत में है और उसी ने हत्या का सच खोला है। बाकी आरोपितों की तलाश में पुलिस जुटी है। कई थानों का फोर्स कस्बे में मौजूद है। आरएएफ भी तैनात कर दी गई है। शव की तलाश में डॉग स्क्वाड की सहायता ली गई है।
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खामोश मीडिया क्यों?
स्वतन्त्र भारत में इतनी भयानक घटना घटती है, मीडिया में कोई चर्चा ही नहीं होती। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस समर्पित सरकार के राज में होने के कारण मीडिया इसे छुपाने की कोशिश कर रही है। यही नहीं, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अखिलेश यादव के कार्यकाल में एक मुस्लिम पदाधिकारी द्वारा के दलित को मूत्र पिलाये जाने पर भी मीडिया खामोश रही। उस समय भी किसी #metoo, #mob lynching, #intolerance, #not in my name, और #award vapsi आदि गैंग के मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली थी।
अब प्रश्न यह है कि कांग्रेस अपने राज्यों में दलितों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में असफल है। लेकिन राहुल गाँधी भी अब तक खामोश हैं।

धर्मांध व्यक्ति ने तोडी हनुमानजी की मूर्ति, कहा – ‘अल्लाह ने सपने में तोडने को कहां था !´

मीडिया अब इसे ‘विक्षिप्त’/ ‘सिरफिरा’ कहती है ! क्या आपको ये व्यक्ति सिरफिरा लगता है ?

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ में एक मुस्लिम युवक ने हनुमान मंदिर का ताला तोडकर मंदिर में रखी मूर्ती खंडित कर दी और बाहर निकलकर नमाज अदा करने लगा, फिर उठकर धार्मिक नारे भी लगाए, जिसके बाद लोगों ने उसे पकडकर जमकर पिटायी की और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और मंदिर में नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी शुरू कर दी। पूछताछ में पता चला है कि युवक विक्षिप्त किस्म का है। हालांकि लोगों ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी युवक के के साथ दो और लोग भी थे, जिन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाय।
लोगों ने जब उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया तो उसने कहा कि, उसे सपना आया था और ऐसा करने के लिये उसे अल्लाह ने कहा था।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गयी और युवक को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने पूछताछ की तो उसने वही बताया जो स्थानिय लोगों को बताया। स्थानीय लोगों का कहना था कि आरोपी के साथ दो लोग और थे, जिनकी गिरफ्तारी के लिये पुलिस से मांग की गयी है। पुलिस ने युवक पर मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। एसपी एस आनंद ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

इमाम के भाई ने भाभी से किया बलात्कार, पीड़िता को तलाक का नोटिस

Representative Imageउत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इमाम के भाई पर अपनी ही भाभी का रेप करने का आरोप लगा है। पीड़िता के पति दिल्ली की एक मस्जिद में इमाम हैं। इमाम के भाई ने यहां धानदेड़ा गांव में कथित तौर पर न केवल महिला के साथ रेप किया बल्कि विरोध करने पर उसकी पिटाई भी की। घटना अक्टूबर 28 की है जब महिला अकेली घर पर थीं और पीड़िता का पति भी बाहर था। 
पुलिस के मुताबिक पीड़िता की शिकायत के बाद आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और आरोपी की तलाश की जा रही है। घटना के बाद पीड़िता के पति ने पत्नी को तीन तलाक का नोटिस भेज दिया। पीड़िता का निकाह पिछले वर्ष ही हुआ था। कुछ महीने पहले दिल्ली के एक मदरसे में आठ साल की एक मासूम के साथ रेप का मामला सामने आया था।
दिल्ली में बच्ची के साथ उस समय रेप की घटना को उस समय अंजाम दिया गया जब मदरसे में कोई भी बच्चा नहीं था। इस मदरसे में आस-पास झुग्गियों में रहने वाले छोटे बच्चे पढ़ते थे। तब मदरसा ने वहां बच्चों की जबरन छुट्टी कर थी और बच्ची को रोक लिया था। रेप के बाद बच्ची की हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
अगस्त माह के दौरान उत्तर प्रदेश के मऊ में 5 लोगों 11 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया है। यहां मदरसा मैनेजर ने 5 लोगों के साथ मिलकर एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की मां ने आरोप बताया था कि 4 अगस्त को मदरसा मैनेजर के भाई और चार अन्य लोगों ने बच्चियों को एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ रेप किया।