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क्या तबलीगी जमात के आतंकवादी संगठनों अलकायदा, तालिबान और कश्मीरी आतंकवादियों से भी संबंध?

दिल्ली में बंगले वली मस्जिद के बाहर तब्लीगी जमात के फॉलोवर
                                              (फोटो साभार: Mint)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
2014 में मोदी सरकार आने से पहले की सरकारें इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दू धर्म पर प्रहार करती रहीं। आतंकवाद के झूठे आरोपों में निर्दोष साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित आदि को जेलों में डाल देशद्रोही आतंकवादियों के हौसले बुलंद किये जा रहे थे। दीपावली के शुभावसर पर हिन्दू धर्म के सम्मानित शंकराचार्य को गिरफ्तार करने ने भूतपूर्व महामहिम प्रणव मुख़र्जी तक को झंझोर दिया था। उस समय कांग्रेस कार्यकारणी के सदस्य रहते, कांग्रेस वर्किंग समिति की मीटिंग में प्रश्न किया था कि "क्या ईद के मौके किसी इमाम को गिरफ्तार करने की हिम्मत है?" उनके इस प्रश्न का आज तक उन्हें उत्तर नहीं मिला। जिस कारण विवश होकर अपनी पुस्तक में सोनिया गाँधी के हिन्दू विरोधी होने की पीड़ा को व्यक्त कर दिया। 
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही जिस प्रकार विश्व पटल पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध आवाज़ को बुलंदता से उठा उस विश्व को मानने को विवश कर दिया, जो विश्व पहले भारत की आवाज़ को यह कहकर दबा दिया करता था कि "यह भारत और पाकिस्तान का अंदरूनी मामला है।" जैसे-जैसे आतंकवाद की समस्या जोर पकड़ती गयी, पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ना शुरू हो गया। जिस कारण पाकिस्तान से अधिक चीन परेशान होने लगा। आतंकवाद के बाद भारत का दूसरा प्रहार कश्मीर को लेकर हुआ ही था कि सर्जिकल और एयर स्ट्राइक ने तो पाकिस्तान और चीन दोनों की नींद ही उड़ा दी। 
पाकिस्तान  तो सर्जिकल और एयर स्ट्राइक की मार से उभर नहीं पाया। लेकिन चीन ने पाकिस्तान से दोस्ती निभाते बायो बम की बात कही थी। जिसे कोई नहीं समझ पाया। कोरिया के केमिकल बम पर तो  हर कोई चिंतित था, परन्तु चीन की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। वर्तमान की बात करें, तो समस्त विश्व उस कोरोना से जूझ रहा है, जो  चीन के वुहान से विश्व में फैली जरूर है, लेकिन इस बीमारी की मार से दोस्त पाकिस्तान भी नहीं बचा।  
भारत के कई राज्यों में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका सामने आई है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में इस्लामी संगठन द्वारा आयोजित एक इस्लामी मजहबी आयोजन में भाग लेने के बाद कई लोगों की मौत हो गई है। वैसे भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो तबलीगी जमात की लापरवाही से प्रभावित है। अन्य दक्षिण एशियाई देश भी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ तबलीगी जमात के संबंध बेहद अर्थपूर्ण हो जाते हैं।
2011 में विकिलिक्स द्वारा जारी गुप्त अमेरिकी दस्तावेजों से पता चला है कि अलकायदा के कुछ गुर्गों ने जमात का इस्तेमाल अपनी पाकिस्तान की यात्रा के लिए वीजा और फंड हासिल करने के लिए किया। दस्तावेजों में कहा गया है कि वे दिल्ली या फिर इसके आस-पास भी रहते थे। ‘एक अनुभवी जिहादी’ के रूप में सऊदी अरब के अब्दुल बुखारी का हवाला देते हुए, क्यूबा में ग्वांतानामो बे के अमेरिकी अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 1985-1986 में वह जिस जमात के सदस्य से मिले थे, उसने पाकिस्तान के लिए वीजा में उनकी मदद की। 25 जुलाई, 2007 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात तबलीगी के एक सदस्य ने एक बंदी के लिए पाकिस्तान का वीजा खरीदा, जिसके बाद वो बंदी और अन्य सऊदी लोग लाहौर गए।
विकीलीक्स में खुलासा किया गया है कि उस बंदी को फिर नई दिल्ली में जमात तबलीगी के नेता से मिलवाया गया संगठन के लिए एक जीवन समर्पित करने के लिए कहा गया। बंदी ने जमात तबलीगी से कहा कि उसे इस बारे में सोचने की जरूरत है क्योंकि वह अपना जीवन सेवा, तीर्थयात्रा और मिशनरी कार्यों में नहीं लगाना चाहता। इसके बाद वो दो सप्ताह के लिए लाहौर लौटा और फिर सऊदी अरब चला गया।
1 सितंबर, 2008 को सोमालियाई बंदी मोहम्मद सोलिमन बर्रे पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में धर्मांतरण करवाने वाली संस्था जमात तबलीगी की पहचान अलकायदा कवर स्टोरी के रूप में की गई है। अलकायदा, जमात तबलीगी के सदस्यों की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने और फंड देने का काम करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी का दर्जा देने से इनकार कर दिया गया था, लेकिन उसने जमात तबलीगी के प्रायोजन के तहत पाकिस्तान जाने के लिए वीजा लिया था। बंदी ने कहा कि उसका मिशनरी कर्तव्यों को पूरा करने या जमात तबलीगी के साथ सेवा करने का कोई इरादा नहीं है, उन्होंने तो सिर्फ वीजा प्राप्त करने के लिए समूह का इस्तेमाल किया था।
एक अन्य रिपोर्ट में भी तबलीगी जमात का उल्लेख है। 27 जनवरी 2008 को तैयार किए गए सूडान के अमीर मुहम्मद पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1991 की शुरुआत में बंदी ने सुडान ने केन्या के रास्ते भारत की हवाई यात्रा की। भारत के लिए उड़ान भरते समय बंदी ने तबलीगी जमात के एक प्रतिनिधि से मुलाकात की, जिसने उसे नई दिल्ली के एक बड़े तबलीगी सेंटर के बारे में बताया, जहाँ वह सहायता के लिए जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदी ने पाकिस्तानी वीजा प्राप्त करने के लिए खुद को एक तबलीगी के रूप में पेश किया।
इस तरह से यह स्पष्ट है कि इस्लामिक संगठनों ने तबलीगी जमात का इस्तेमाल अपने सदस्यों की यात्राओं को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पाइपलाइन की तरह इस्तेमाल किया। 2003 में ब्रुकलिन ब्रिज को नष्ट करने के लिए एक आतंकवादी साजिश के आरोपित ओहियो ट्रक ड्राइवर आयमान फारिस ने अल कायदा के लिए एक काम पूरा करने के लिए जमात का इस्तेमाल पाकिस्तान की सुरक्षित यात्रा के लिए किया। तबलीगी जमात का नाम संयुक्त राज्य अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमले के बाद के बाद जाँचकर्ताओं की नजर में आया। इसके बाद कम से कम चार हाई-प्रोफाइल आतंकवाद मामलों में इसका नाम सामने आया था।
एक प्रतिष्ठित जिओपोलिटिकल इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म स्ट्रैटफ़ोर ने तबलीगी जमात और ग्लोबल जिहाद की दुनिया से इसके संबंध पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात और शिया विरोधी संप्रदाय समूहों, कश्मीरी आतंकवादियों और तालिबान के बीच ‘अप्रत्यक्ष कनेक्शन’ का सबूत है। इसमें कहा गया है कि तबलीगी जमात संगठन इस्लामिक चरमपंथियों के लिए और नए सदस्यों की भर्ती के लिए अलकायदा जैसे समूहों के लिए एक वास्तविक समूह के रूप में कार्य करता है। तबलीगी कट्टरपंथी इस्लामवाद की दुनिया से तब रूबरू होते हैं जब वे अपना शुरुआती ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान जाते हैं। एक बार पाकिस्तान में भर्ती होने के बाद, तालिबान, अल कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठन उन्हें अपने में शामिल करने की कोशिश करते हैं।
दुनिया भर में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में अपनी भारी भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने आतंकवादी हमलों में नियमित रूप से भाग लिया। 2017 के लंदन ब्रिज हमले में हमलावरों में से एक, यूसुफ ज़ाग्बा को तबलीगी जमात से जुड़ा था। 2005 में लंदन बम धमाकों को अंजाम देने वाले 7/7 आतंकवादियों के सरगना मोहम्मद सिद्दीकी खान और सहयोगी शहजाद तनवीर को भी तबलीगी जमात से जुड़ा था।
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लॉकडाउन के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनका काम सरकार और प्रशासन को परेशान करना है। वो ऐसा कर के न सिर्फ़ ज़रूरतमंदों का ह....
वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात के संदिग्ध तरीके और आतंकवादी संगठनों के लिंक उसके इतिहास को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि यह ‘बायोलॉजिकल टेरर’ का एक हिस्सा हो सकता है। पाकिस्तान, मलेशिया और अब भारत में भी तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों ने दक्षिण एशियाई देशों में वायरस फैला दिया है। यदि यह सच में जानबूझकर फैलाने का मामला था, तो यह उन घटनाओं के सबसे खतरनाक मोड़ को दर्शाता है जो अब देशों के अधिकारियों को झेलनी पड़ेंगी। साथ ही उनके लापरवाही के इस घिनौने कृत्य की वजह से कई जीवन खतरे में पड़ गए हैं।

सिर्फ़ कोरोना का ही कारण नहीं है ड्रैगन : जब चीन से निकली आपदा ने पूरी दुनिया में मचाया तहलका

चीन, कोरोना वायरस
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज कुछ वामपंथी सिर्फ़ इसीलिए तिलमिला रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस को वुहान वायरस, चीनी वायरस कहा जा रहा है। जबकि सालों से वायरस या रोग का नामकरण उस जगह के नाम पर किया जाता रहा है, जहाँ से ये शुरू हुआ और चीन तो हमेशा से दुनिया को ऐसी आपदा देने में अभ्यस्त रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे रोग और वायरस आते रहे हैं, जो चीन से निकला और जिन्होंने पूरी दुनिया में कहर बरपाया। इतना सब कुछ होने के बावजूद, किसी में चीन का आर्थिक बहिष्कार करने का साहस नहीं दिखाया। भारत में ही हर क्षेत्र में अपना दबदबा बना रखा है। देखिए उन 5 चीनी आपदाओं को जिन्होंने दुनिया भर में तहलका मचाया।
H7N9 Flu
इसे आप बर्ड फ्लू के नाम से जनता हैं, जिसका पहला मामला शंघाई में आया था। बात में पता चला कि एक पोल्ट्री मार्किट में ये वायरस चिकेन्स से निकल कर मनुष्य में आ गया। इस इन्फेक्शन का पता तब चला, जब कई लोग इससे बीमार हो गए। हालाँकि, इस वायरस के मामले में ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन की उतनी ख़बर नहीं आई। इस आपदा के अब तक 5 स्टेज आ चुके हैं, जिसमें से ताज़ा 2017 में आया था। ये एक ऐसा वायरस है, जिसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता मानवों में नहीं है, इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि इस पर नज़र नहीं रखा गया तो ये बड़ा तहलका मचाने की ताक़त रखता है।
SARS
‘Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS)’ भी पहली बार 2002 में चीन में ही देखा गया था। चीन के युनान प्रान्त में दूर एक गुफा में चमगादड़ों को इस वायरस का स्रोत माना गया था। ये बात भी 15 साल बाद पता चली थी। ये दक्षिणी चीन से 37 देशों में फैला और इसने 750 लोगों की जान ले ली। वैज्ञानिक भी कहते हैं कि इसका कोई वैक्सीन मिलना मुश्किल है क्योंकि क्वारंटाइन से ही अब तक काम चलाया जाता रहा है। हालाँकि, अब संभव है कि इसके सम्पूर्ण इलाज की व्यवस्था हो जाए।
H5N1 BIRDFLU
ये भी पहली बार हॉन्गकॉन्ग में दिखा था और उसके बाद से देश-विदेश की कई जंगली पक्षियों में पाया जाता रहा है। ये 1996 में पहली बार पाया गया था लेकिन 2002 में इसने अपना बड़ा असर दिखाया और एशिया, अफ्रीका और यूरोप से लेकर अरब जगत तक फ़ैल गया। इस वायरस के फैलने के बाद लोगों में तरह-तरह की बीमारियाँ होने लगीं और कई लोगों की मौत भी हो गई। ये वायरस भी अगर ह्यूमन टू ह्यूमन फैलने लगा तो बड़ी तबाही आ सकती है।
HONGKONG FLU 
ये एक ऐसा खतरनाक फ्लू था, जिसनें क़रीब 10 लाख लोगों की जान ले ली। ये 1968-69 में अपने चरम तक पहुँचा था। वियतनाम और सिंगापुर में ये काफ़ी फैला था। इसके बाद ये भारत, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप तक पहुँचा। 1969 में ये जापान, अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका तक पहुँचा। इससे 1 लाख लोग तो सिर्फ़ अमेरिका में ही मारे गए थे। हॉन्गकॉन्ग की तो इससे लगभग 15% जनसंख्या ही साफ़ हो गई थी।
ASIA FLU
इसका पहला मामला फ़रवरी 1957 में सिंगापुर में आया था लेकिन इसकी उत्पति भी चीन से ही हुई थी। दक्षिण-पश्चिमी एशिया में भारत में भी इसके 10 लाख मामले सामने आए थे। इसने दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर दिया था।
CORONA
कोरोना के मामले में भी दिसंबर 10, 2019 को ही चीन में कोरोना का पहला मरीज बीमार पड़ने लगा था। इसके एक दिन बाद वुहान के अधिकारियों को बताया गया कि एक नया कोरोना वायरस आया है, जो लोगों को बीमार कर रहा है। वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने 30 दिसंबर को इस वायरस के बारे में वीचैट पर सूचना दी। उन्हें जम कर फटकार लगाई गई और आदेश दिया गया कि वो इस वायरस के बारे में किसी को कुछ भी सूचना न दें।
इसी तरह डॉक्टर ली वेलिआंग ने भी इस बारे में सोशल मीडिया पर विचार साझा किए। उन्हें भी फटकार लगाई गई और बुला कर पूछताछ की गई। इसी दिन वुहान हेल्थ कमीशन ने एक ‘अजीब प्रकार के न्यूमोनिया’ के होने की जानकारी दी और ऐसे किसी भी मामले को सूचित करने को कहा।
2019 में लिखे एक लेख में ‘चाइनीज एक्सप्रेस’ ने SARS या फिर MERS की तरह कोई खतरनाक वायरस के सामने आने की शंका जताई थी और कहा था कि इसकी वजह चमगादड़ ही होंगे लेकिन बावजूद इसके लगातार लापरवाही बरती गई। उस लेख में ये भी कहा गया था कि ये वायरस चीन से ही आएगा। 2019 तो छोड़िए, 2007 में ही एक जर्नल में प्रकाशित हुए आर्टिकल में बताया गया था कि साउथ चीन में चमगादड़ जैसे जानवरों को खाने का प्रचलन सही नहीं है क्योंकि उनके अंदर खतरनाक किस्म के वायरस होते हैं। उस लेख में इस आदत को ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी गई थी। चीन में जनता बड़े स्तर पर इससे प्रभावित हुई है और इसका दोष भी वहाँ की सरकार व प्रशासन का है।
दुनिया को तबाह करना चाहता है चीन? इसीलिए कोरोना को बनाया सीक्रेट हथियार, पढ़ें सबूतक्या दुनिया को तबाह करना चाहता है चीन? इसीलिए बनायाकोरोना को सीक्रेट हथियार
कोरोना वायरस को लेकर चीन पूरी दुनिया से बार-बार झूठ बोलता रहा है। अमेरिका पर चीन ने वायरस फैलाने का आरोप लगाया, तो कभी इटली को भी जिम्मेदार ठहराया. अपनी गलती छिपाने के लिए चीन ने कई बार साज़िशों की कहानी गढ़ी 
लेकिन आज हम आपको इस रिपोर्ट के माध्यम से ऐसी जानकारी दे रहे हैं, जिसे समझकर हर कोई दंग रह जाएगा. कोरोना वायरस एक प्रकार का Biochemical Terrorist Attack है

साल 2018 में ही कोरोना वायरस का हुआ था जिक्र

Netflix पर उपलब्ध एक दक्षिण कोरियाई Web Series । My Secret, Terrius (माय सीक्रेट टेरियस) का एक सीन दिखाना चाहते हैं। जिसमें Corona Virus को एक सीक्रेट हथियार के तौर पर विकसित किए जाने का जिक्र है। ये सीरीज़ 2018 में आई थी, हालांकि भारत में ये सीरिज़ उपलब्ध नहीं है। लेकिन आपको ये सीन ज़रूर देखना चाहिए
निश्चित तौर पर इस वेब सीरीज का ये सीन देख कर कोई भी ये सोचने को मजबूर हो जाएगा कि क्या सचमुच चीन ने दुनिया को तबाही की आग में ढकेलने की खातिर इसे एक सीक्रेट हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया? 2018 में रिलीज़ हुई इस दक्षिण कोरियाई Web Series 'माय सीक्रेट टेरियस' के 10 एपिसोड में इस कोरोना वायरस का जिक्र किया गया है

क्या दुनिया को तबाह करना चाहता है चीन?

इस वेब सीरीज  में इस वायरस को एक बायोकैमिकल आतंकी हमला का जरिया भी बताया गया है। ये पहला सबूत नहीं हो जो चीन की नापाक साजिश को बेपर्दा करता दिखाई दे रहा है। पहले भी इस प्रकार के दावे सामने आते रहे हैं। आपको ऐसे ही कुछ दावों से रूबरू करवाते हैं
हाल ही में 2011 में आई एक फिल्म Contagion की भी बहुत चर्चा हो रही हैं। क्योंकि इस फिल्म में भी 11 साल पहले ही चीन से शुरू हुई ऐसी ही महामारी की कहानी दिखाई गई थी

चीन के डॉक्टरों ने खोल दी उसकी पोल

चीन कोरोना को लेकर दुनिया के सामने बहुत कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी सच्चाई ज्यादा दिनों तक छिप नहीं पाएगी। कोरोना वायरस पर चीन के डॉक्टर ली वेनलियांग के बाद अब और एक डॉक्टर ने भी चीन की पोल खोलकर रख दी है
वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल की इमरजेंसी डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉक्टर आई फेन ने चीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. आई फेन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि "चीन के सरकारी अधिकारियों ने मुझे धमकी दी थी कि अगर किसी को इस वायरस के बारे में बताया तो अंजाम बुरा होगा।" 
कोरोना वायरस को लेकर दावा है कि ये वायरस वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी' से लीक हुआ, जो अब पूरी दुनिया में फैल गया है। हालांकि, चीन का दावा है कि ये वायरस मानव निर्मित नहीं है। अगर चीन का दावा सच है तो चीन के डॉक्टर अपनी ही सरकार पर सवाल क्यों उठा रहे है। डॉक्टर आई फेन ने दुनिया को ये भी बताया कि "मुझे यह पता होता कि ये वायरस इतने लोगों की जान ले लेगा तो मैं चुप नहीं बैठती। मैं पूरी दुनिया को ये बात बताती। जिस भी माध्यम से कह पाती मैं ये जानकारी सभी को देती। फिर चाहे मुझे कोई जेल में ही क्यों न डाल देता।"
डॉ. फेन का यह इंटरव्यू रेनवू ने अपनी साइट से हटा दिया है। चीन की सोशल मीडिया से भी डॉ. फेन का इंटरव्यू गायब हो गया है। डॉ. आई फेन से पहले वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टर ली वेनलियांग ने भी कोरोना वायरस के बारे में सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी थी, लेकिन उन्हें भी धमकी दी गई थी। बाद में डॉक्टर ली की कोरोना वायरस से ही मौत हो गई थी

चीन की साज़िश का शिकार हो गई दुनिया ?

चीन के खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने तो यहां तक दावा किया था कि डॉ. ली की मौत कोरोना नहीं बल्कि उनकी हत्या चीनी सेना ने की थी। उस अधिकारी का भी दावा था कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से ही निकला है
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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में दान दिया है। ये ....
कोरोना वायरस पर सच्चाई क्या है ये किसी को नहीं मालूम, फिलहाल चीन से शुरू हुआ कोरोना अब दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन चुका है