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उइगरों को मिटाने के लिए चीन का खतरनाक कदम, बॉडी पार्ट काटकर तैयार कर रहा जीन बैंक

चीन बना रहा अपना जीन बैंक
काफी समय से चीन द्वारा मुस्लिम विशेषकर उइगर मुस्लिमो पर कोई न कोई अत्याचार कर रहा है, जिस पर सारे मुस्लिम देश और मानवाधिकार चुप्पी साधे हुए हैं। जितने भी मानवाधिकार है ये केवल भारत में ही सक्रीय होते हैं। 
उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार की हर सीमा को पार कर चुका चीन अब उनके अंगों से अपने देश में जीन बैंक बनाना चाहता है। एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें ये चौंकाने वाली जानकारी का उल्लेख है। उइगरों पर तरह-तरह के जुल्मों के बाद अब चीन अपनी सेना की मदद से इस काम को अंजाम देने में लगा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी (IFFRAS) के मुताबिक, चीन में लोगों के अंगों को जबरन काटकर उसका DNA इकट्‌ठा करने का काम हो रहा है। इसके लिए लोगों के साथ जबरदस्ती की जाती है। जब लोग इसका विरोध करते हैं तो उन्हें गायब कर दिया जाता है।

चीन में होते मानवाधिकारों के हनन और भयावह रिकॉर्ड के कारण कुछ समय पहले मेडिकल कम्युनिटी ने आवाज उठाई थी कि चीन से आने वाली वैज्ञानिक पत्रिकाओं के लेख प्रस्तुतियाँ अस्वीकार की जाएँ। टोरंटो के इस थिंक टैंक के मुताबिक, सितंबर में आयोजित वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के सम्मेलन में इन्हीं चीजों को देखते हुए चीन के किसी भी आयोजन का बहिष्कार करने का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ उसके किसी भी रिपोर्ट्स को अंतरराष्ट्रीय जनरल में जगह नहीं देने की माँग की गई। इसमें बताया गया कि हाल में चीन ने जो डेटा कलेक्ट किया वो ‘मास जेनेटिक टेस्टिंग’ के जरिए था, जिसे अल्पसंख्यक आबादी और निश्चित क्षेत्र से लिया गया।

थिंकटैंक ने कहा कि चीन का एल्गोरिदम हिरासत में लिए गए लोगों के अंग जबरन काटकर डेवलप होता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि लोगों को जेनेटिक डेटा लेने के लिए कैसे-कैसे परेशान किया गया। थिंकटैंक के अनुसार जेनेटिक डेटा का उपयोग मानवाधिकार मानकों के अनुसार समस्याग्रस्त है क्योंकि इसे इकट्ठा करते समय सूचित सहमति आवश्यकताओं का दुरुपयोग व उल्लंघन होने का मामला शामिल था।

IFRAS ने कहा, “चीन के डिटेंशन सेंटर्स में उइगरों की कैद और मानवाधिकारों के निरंतर उल्लंघन में एक नया आयाम जुड़ा है। ये डीएनए और नस्लीय प्रोफाइलिंग हैं ताकि वो व्यापक स्तर पर डीएनए को इकट्ठा करके चयनात्मक जाति का सफाया कर सकें। इस हरकत को मानवता के विरुद्ध किया जाने वाला सबसे घटिया अपराध कहा जा सकता है जो कि चीनी प्रशासन कर रहा है।”

उक्त दावे से संबंधित ये रिपोर्ट अगस्त में प्रकाशित हुई थी जिसमें ये जानकारी दी गई थी कि चीन में उइगरों का सफाया करने के लिए कैसे काम किया जा रहा है। मालूम हो कि वहाँ इससे पहले भी तमाम तरह की ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं जिसने चीन के मानवीय व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मसलन डिटेंशन कैंप में रखकर उइगरों को प्रताड़ित करना, उन्हें यातनाएँ देना, महिलाओं से रेप करना, उनके एबॉर्शन करवा देना, उनके प्राइवेट पार्ट में मिर्च लगाना आदि।

मोहन भागवत का बयान और अखण्ड भारत

 

ललित गर्ग

बेहद दुखद है कि दुनिया के सबसे बड़े गैर राजनैतिक संगठन के प्रमुख मोहन भागवत जब हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दे रहे हैं, तब कुछ नेता इसके लिए अतिरिक्त कोशिश कर रहे हैं कि हमारा समाज एकजुटता-सद्भावना की ऐसी बातों पर ध्यान न दे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़े पूर्वाग्रहों को दूर करते हुए कहा है कि संघ भले हिन्दुओं का संगठन है, लेकिन वह दूसरे धर्म वालों से नफरत नहीं करता। सभी भारतीयों का डीएनए एक है, के कथन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के आपत्ति एवं असहमति के स्वर राष्ट्रीय एकता की बड़ी बाधा है। अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति का आदर्श रहा है। यहां अनेक धर्म, संप्रदाय, जाति, वर्ण, प्रांत एवं राजनैतिक पार्टियां हैं, भिन्नता और अनेकता होने मात्र से सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय एकता को विघटित नहीं किया जा सकता। निश्चित ही मेवाड़ विश्वविद्यालय में दिया गया मोहन भागवत का उद्बोधन देश की एकता को बल देने का माध्यम बनेगा, देश के सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय परिवेश को एक नया मोड़ देगा। यह एक दिशासूचक बना है, गिरजे पर लगा दिशा-सूचक नहीं, यह तो जिधर की हवा होती है उधर ही घूम जाता है। यह कुतुबनुमा है, जो हर स्थिति में सही दिशा एवं दृष्टि को उजागर करता रहेगा।

2022 में उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके चलते तमाम कट्टरपंथियों सहित पूरी "छद्दम सेक्युलर जमात" एक वर्ग विशेष के मन में आरएसएस और भाजपा के विरुद्ध नफरत और घृणा का ज़हर भर रही है। पिछले कुछ समय से प्रदेश में साम्प्रदायिक दंगे भड़काने की भी कई कोशिशें हो चुकी हैं, जिन्हें योगी सरकार की सूझबूझ के चलते नाकाम कर दिया गया। दरअसल हिन्दू विरोधी मानसिकता के लोगों का यह षड्यंत्र है कि प्रदेश में सुनियोजित तरीके से दंगा भड़काकर उसका पूरा ठीकरा आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदुवादी संगठनों पर फोड़ दिया जाए। ठीक उसी प्रकार जैसे कि दिल्ली दंगों का ठीकरा कपिल मिश्रा सहित कुछ भाजपा नेताओं के सर पर मढ़ दिया गया था।

ऐसे में संघ प्रमुख मोहन भागवत का कोई भी बयान अंतराष्ट्रीय स्तर पर देखा-सुना और विश्लेषित किया जाना स्वाभाविक है। और विपक्ष किसी ऐसे ही बयान की तलाश में है जिसे मुद्दा बनाकर पूरे विश्व में आरएसएस और भाजपा की छवि को धूमिल किया जा सके और येन-केन प्रकारेण "भगवा आतंक" की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया जा सके।

यदि आप इस पूरे षड्यंत्र को बिना पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए गम्भीरता और निष्पक्षता के साथ समझने का प्रयास करेंगे तो शायद आप संघ प्रमुख की रणनीति की सराहना किये बिना नहीं रह सकेंगे।

विभिन्न जाति, धर्म, भाषा, वर्ग के लोगों का एक साथ रहना भारतीय लोकतंत्र का सौन्दर्य है, राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस सौन्दर्य को नुकसान पहुंचाना राष्ट्रीय एकता को खंडित करता है। भिन्नताओं का लोप कर सबको एक कर देना असंभव है। ऐसी एकता में विकास के द्वार भी अवरुद्ध हो जाते हैं। लेकिन अनेकता भी वही कीमती है, जो हमारी मौलिक एवं राष्ट्रीय एकता को किसी प्रकार का खतरा पैदा न करे। जैसे एक वृक्ष की अनेक शाखाओं की भांति एक राष्ट्र के अनेक प्रांत हो सकते हैं, उसमें अनेक जाति एवं धर्म के लोग रह सकते हैं, पर उनका विकास राष्ट्रीयता की जड़ से जुड़कर रहने में है, जब भेद में अभेद को मूल्य देने की बात व्यावहारिक बनेगी, उसी दिन राष्ट्रीय एकता की सम्यक् परिणति होगी और उसी दिन भारत अखंड बनेगा।

मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू कहता है कि यहां कोई मुसलमान नहीं रहना चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं है। गाय एक पवित्र जानवर है लेकिन जो लोग दूसरों को मार रहे हैं वे हिंदुत्व के खिलाफ जा रहे हैं। कानून को बिना किसी पक्षपात के उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। हिंदू-मुस्लिम एकता शब्द ही भ्रामक है। हिंदू-मुस्लिम अलग हैं ही नहीं, हमेशा से एक हैं। जब लोग दोनों को अलग मानते हैं तभी संकट खड़ा होता है। हमारी श्रद्धा आकार और निराकार दोनों में समान है। हम मातृभूमि से प्रेम करते हैं क्योंकि ये यहां रहने वाले हर एक व्यक्ति को पालती आई है और पाल रही है। जनसंख्या के लिहाज से भविष्य में खतरा है, उसे ठीक करना पड़ेगा। भारत को यदि विश्वगुरु बनाना है तो अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक की शब्दों की लड़ाई में नहीं पड़ना होगा। अल्पसंख्यकों के मन में यह बिठाया गया है कि हिंदू उनको खा जाएंगे। अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज आंखों से पट्टी हटाए और सबको गले लगाए। कट्टरता को छोड़कर आपसी भाई-चारे की राह अपनाए। यही एक आदर्श स्थिति की स्थापना है और इसी के प्रयास में संघ जुटा है।

संघ सिर्फ राष्ट्रवाद के लिए काम करता है। राजनीति स्वयंसेवकों का काम नहीं है। संघ जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति तोड़ने का हथियार बन जाती है। राजनीति की वजह से ही हिंदू-मुस्लिम एक नहीं हो सके हैं। बेहद दुखद है कि दुनिया के सबसे बड़े गैर राजनैतिक संगठन के प्रमुख मोहन भागवत जब हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दे रहे हैं, तब कुछ नेता इसके लिए अतिरिक्त कोशिश कर रहे हैं कि हमारा समाज एकजुटता-सद्भावना की ऐसी बातों पर ध्यान न दे। इस कोशिश से यही प्रकट हुआ कि कुछ लोगों की दिलचस्पी इसमें है कि हिंदू-मुस्लिम के बीच की दूरी खत्म न हो। इस संदर्भ में संघ प्रमुख ने यह सही कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता की बातें इस अर्थ में भ्रामक हैं, क्योंकि वे तो पहले से ही एकजुट हैं और उन्हें अलग-अलग देखना सही नहीं। कायदे से इसका स्वागत करते हुए अपने-अपने स्तर पर ऐसी कोशिश की जानी चाहिए कि भारतीय समाज एकजुट हो और उसके बीच जो भी वैमनस्य है, जो भी दूरियां हैं, वह खत्म हो। निःसंदेह कुछ लोग ऐसा नहीं होने देना चाहते और इसीलिए किसी ने संघ की कथनी-करनी में अंतर का उल्लेख किया तो किसी ने भीड़ की हिंसा का जिक्र।

विडम्बनापूर्ण है कि अपने देश में इस तरह की सीधी-सच्ची एवं आदर्श की बात पर भी सस्ती राजनीति की जा रही है, इसका उदाहरण है भागवत के इस प्रेरक एवं क्रांतिकारी उद्बोधन पर आपत्ति और असहमति भरी प्रतिक्रिया का होना। मायावती और असदुद्दीन ओवैसी से लेकर दिग्विजय सिंह ने जैसी प्रतिक्रिया दी, उससे विरोध के लिए विरोध वाली मानसिकता का ही परिचय मिला। इनमें से किसी ने भी यह समझने की कोशिश नहीं की कि मोहन भागवत अपने इस कथन के जरिये सभी देशवासियों में एकता, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं भाईचारे की भावना का संचार करने के साथ यह रेखांकित करना चाह रहे थे कि भारत के लोगों में जाति, मजहब, पूजा-पद्धति की कितनी भी भिन्नता हो, उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि वे सब इस देश की संतान हैं और सबके पूर्वज एक हैं। इस विचार में ऐसा कुछ भी नहीं कि उस पर आपत्ति जताई जाए। बावजूद इसके किसी-न-किसी बहाने आपत्ति जताई गई और विमर्श को खास दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई। इसका मकसद लोगों को गुमराह करना और अपने वोट बैंक को साधने के अलावा और कुछ नहीं नजर आता। ऐसा लगता है कतिपय राजनीतिक दलों की राजनीति एवं उनकी सोच विकृत हैं, उनका व्यवहार झूठा है, चेहरों पर ज्यादा नकाबें ओढ़ रखे हैं, उन्होंने सभी आदर्शों एवं मूल्यों को धराशायी कर दिया है। देश के करोड़ों लोग देश के भविष्य को लेकर चिन्तित हैं। वक्त आ गया है कि देश की साझा संस्कृति, गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखने के लिये भागवत जैसे शिखर व्यक्तियों को भागीरथ प्रयास करने होंगे, दिशाशून्य हुए नेतृत्व के सामने नया मापदण्ड रखना होगा। आज कोई ऐसा नहीं, जो धर्म की विराटता दिखा सके। सम्प्रदायविहीन धर्म को जीकर बता सके। समस्या का समाधान दे सके, विकल्प दे सके। जो कबीर, रहीम, तुलसी, मीरा, रैदास बन सके।

एक शुभ शुरुआत भी इसी दृष्टि से होने जा रही है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिखर व्यक्ति एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में 15 अगस्त 2021 से 15 अगस्त 2022 तक देश के आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने एवं इस दौरान मुस्लिम संगठनों के साथ मिलकर 500 कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना है। इसके माध्यम से अखंड भारत के लक्ष्य को साधने का प्रयास होगा। मुस्लिम समाज के लोगों को यह समझाया जाएगा कि हमारी पूजा पद्धति भले अलग हो, लेकिन हम सब एक हैं। यही अखंड भारत की परिकल्पना है।

इंद्रेश सहित समस्त संघ परिवार इस बात से भी परिचित है कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्य तक भाजपा को वोट तक नहीं देते। यह कोई आरोप नहीं, कटु सत्य है, जिसे यदा-कदा प्रमाण सहित प्रकाशित भी किया जाता रहा है। संक्षिप्त में, उस लेख के स्पष्ट लिखा था कि इस मंच का पदाधिकारी और सीताराम बाजार भाजपा अध्यक्ष के पोलिंग बूथ से भाजपा को जीरो वोट मिला था। इतना ही नहीं, हिन्दू क्षेत्रों से जीतते आ रहा भाजपा उम्मीदवार को मुस्लिम क्षेत्र में आकर अपनी जमानत जब्त करवानी पड़ती है।  

सांप्रदायिक एवं राजनीतिक स्वार्थ के उन्माद में उन्मत्त व्यक्ति कृत्य-अकृत्य के विवेक को खो देता है। इस संदर्भ में भागवत का सापेक्ष चिंतन रहा है। व्यक्ति अपने-अपने मजहब की उपासना में विश्वास करे, इसमें कोई बुराई नहीं, पर जहां एक संप्रदाय के लोग दूसरे संप्रदाय के प्रति द्वेष और घृणा का प्रचार करते हैं, वहां देश की मिट्टी कलंकित होती है, राष्ट्र शक्तिहीन होता है तथा व्यक्ति का मन अपवित्र बनता है। राष्ट्रीय एकता को सबसे बड़ा खतरा उन स्वार्थी राष्ट्र नेताओं से है, जो केवल अपने हित की बात सोचते हैं। देश-सेवा के नाम पर अपना घर भरते हैं, तथा धर्म, संप्रदाय, वर्ग आदि के नाम पर जनता को बांटने का प्रयत्न करते हैं। पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम की शिक्षा देने वाला भारत आज इन्हीं ओछी राजनीति करने वालों के कारण अपनों से कटकर दीनहीन होता जा रहा है। राजनीतिक स्वार्थ का दैत्य उसे नचा रहा है। क्या इस देश की मुस्लिम जनता सौहार्द एवं भाईचारे की भूमिका पर खड़ी होकर नहीं सोच सकती? दलगत राजनीति और साम्प्रदायिक समस्याओं को उभारने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले राजनीतिक दल अपने-अपने दल की सत्ता स्थापित करने के लिए कभी-कभी वे काम कर देते हैं, जो राष्ट्र के हित में नहीं है। सत्ता को हथियाने की स्पर्धा होना अस्वाभाविक नहीं है पर स्पर्धा के वातावरण में जैसे-तैसे बहुमत और सत्ता पाने की दौड़ में राष्ट्रीय एकता को नजरअंदाज करना कैसे औचित्यपूर्ण हो सकता है?(साभार : उगता भारत)

'Operation Virus' में बड़ा खुलासा, कोरोना के 'मानव बम' पर मौलाना का कबूलनामा

DNA ANALYSIS: 'Operation Virus' में बड़ा खुलासा, कोरोना के 'मानव बम' पर मौलाना का कबूलनामाभारत में एक खास विचारधारा वाले लोगों ने कोरोना वायरस फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. ये लोग अंदर ही अंदर चाहते हैं कि देश में कोरोना वायरस फैल जाए. जब हम ये बात कहते हैं तो कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगता. लेकिन यही बात सच है. इसे तबलीगी जमात के मामले से भी पूरा देश देख रहा है. देश में कोरोना वायरस के मामलों में करीब 30 प्रतिशत मामले अकेले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के हैं. Zee News ने एक बड़ा खुलासा किया है. Zee News ने उस व्यक्ति को बेनकाब किया है, जिसने दिल्ली में तबलीगी जमात के लोगों को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. इसलिए हमने इस खुलासे का नाम दिया है- ऑपरेशन वायरस (Operation Virus).
हाफिज गुलाम सरवर
ऑपरेशन वायरस के विलेन का नाम है- हाफिज गुलाम सरवर . आपने इस व्यक्ति को कई टीवी चैनलों पर तबलीगी जमात का पक्ष रखते हुए भी देखा होगा . हाफिज गुलाम सरवर...ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा नाम के संगठन का राष्ट्रीय प्रवक्ता है. इसके अलावा ये व्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम दलित मोर्चा नाम के संगठन का संस्थापक और सचिव भी है. हाफिज गुलाम सरवर का दावा है कि उसने दिल्ली में तबलीगी जमात के 15 लोगों को भगाने में मदद की थी. यहां हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि हाफिज गुलाम सरवर का तबलीगी जमात से कोई सीधा संबंध नहीं है. लेकिन इस व्यक्ति ने गैरकानूनी तरीके से तबलीगी जमात के लोगों को भगाने में मदद की थी. हम ये भी साफ बता रहे हैं कि ये स्टिंग ऑपरेशन सार्वजनिक हित में किया गया है. हमारा उद्देश्य न ही किसी समुदाय या धर्म को ठेस पहुंचाना है और न ही किसी की गोपनीयता का उल्लंघन करना है बल्कि हम ऐसे लोगों को बेनकाब कर रहे हैं, जो पूरे समाज के दुश्मन हैं.

लॉकडाउन
आपको याद दिला दें कि 25 मार्च को देश भर में लॉकडाउन लागू हुआ . 26 मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज को खाली कराने की कोशिश हुई थी  और 29 मार्च को 2 हज़ार से ज्यादा लोग निजामुद्दीन मरकज से बाहर निकाले गए थे . इनमें से कई लोगों में कोरोना का संक्रमण पाया गया था, जो कि देश के अलग-अलग राज्यों से दिल्ली आए हुए थे . 5 अप्रैल तक देश के 17 राज्यों में 1000 से ज्यादा जमाती कोरोना से संक्रमित मिले थे . इसके बाद, 6 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच हमने ये स्टिंग ऑपरेशन किया, ताकि जमात के लोगों द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण की सच्चाई का पता लगाया जाए .

इसी दौरान ZEE NEWS की टीम को दिल्ली में गुलाम सरवर और उनके नेटवर्क के बारे में पता चला . गुलाम सरवर से हमारी मुलाकात दिल्ली के जामिया नगर में उनके घर पर हुई . हमारी टीम के लोग, इस व्यक्ति से, एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के तौर पर मिले . गुलाम सरवर की सच्चाई जानने के लिए हमने उससे पूछा कि ... क्या वो आने वाले चुनावों में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कर सकता है ? जिसपर उसका जवाब था- हां, वो ये काम बखूबी कर सकता है .
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान गुलाम सरवर ने माना कि उसने दिल्ली में तबलीगी जमात के सदस्यों को पुलिस से बचाते हुए निकाला . लेकिन उसने ये नहीं बताया कि वहां से निकालने के बाद जमातियों को किस जगह छिपा कर रखा.
Sting Operation
मौलाना सरवर- बिहार से कैसे कैसे आ गए, ये बताइए?
रिपोर्टर- अरे मत पूछिए बिहार से आने में तो डॉक्टर साहब की तरफ से...

मौलाना सरवर- हां, हमारे पास में भी PASS है .
रिपोर्टर - कैसे बना (PASS)?

मौलाना सरवर- वो तो मीडिया के इससे बना है. हमारा भी एक चैनल छोटा सा है. साप्ताहिक अख़बार राज सहारा हिंदी का तो उसी के लिये बनाए थे. हम शुरू से घूम रहे थे. इसी वजह से तो हम बीसियों लोगों को...दिल्ली जमात के 10-15 लोगों को दायें-बायें कराए हैं.
रिपोर्टर- कैसे ?

मौलाना सरवर- करा देते हैं काम, जैसे पता चला फलां मस्जिद में हैं.  चुपचाप से गाड़ी लगाए उसको (जमाती) बिठाये. बैग लेकर फिर और चले लेके हम पहुंच गए, चलो, हमारे पास है तो बहुत कुछ कम से कम 15 को...
गुलाम सरवर का दावा है कि वो एक You Tube चैनल और 'राज सहारा' नाम का अखबार चलाता है . इसने जमात के सदस्यों को बचाने और भगाने के लिए मीडिया के पास का इस्तेमाल किया . लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पेशल कर्फ्यू पास जारी किए...जिसके ज़रिये मीडिया, बैंकिंग और मेडिकल जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को आने-जाने की छूट मिली थी . गुलाम सरवर ने इसी को अपना हथियार बना लिया . अब आप ये जानिए कि गुलाम सरवर कैसे एक जमाती को पुलिस के पहरे के बीच से, बचाकर ले गया ?
रिपोर्टर- अच्छा एक बात बताइए जैसे कि हम लोगों को...
मौलाना सरवर- आप निज़ामुद्दीन मेरे साथ चलिए. कसम ख़ुदा की आप कांप जाएंगे. हिन्दू-मुस्लिम दंगे में भी ऐसा कर्फ़्यू नहीं होता जिस तरह से सील किया है. हर चौराहे पर 12 मिलिट्री फोर्स को खड़ा किया है. लेकिन हिम्मत से काम करना होता है. मेरे को, मौलाना साद कासमी हैं एक, वहीं पर रहते हैं. दुआ-ताबीज़ करते हैं. अपने नेचर के ही हैं. उन्होंने कहा कि ये बंदे के पास पैसा ख़त्म हो रहा है. ये तमिलनाडु का है, ऐसे-ऐसे जमात का है और ऐसे-ऐसे घुसपैठ कर के चला आया था इधर क्योंकि मरकज़ से सबको निकाला जा रहा था. तो अब इसके पैसे ख़त्म हो रहे थे या तो इसके पैसों का इंतज़ाम करें या शिफ़्ट कीजिए. मैंने कहा कि भाई मेरी तो औक़ात नहीं है, रहने के 15 दिन हज़ार रुपये और दें उसे हां, शिफ़्ट कर देंगे. खाने-पीने, रहने का इंतज़ाम कर देंगे तो टीशर्ट-ट्राउज़र वो लेकर हम गए. हमने अंदर भिजवाया, टीशर्ट-ट्राउज़र पहनने को बोला. हमने कार्ड दिया, ये गले में टांग लो और अंदर घुसा लो. यानी कि कार्ड नहीं दिखना चाहिए. सिर्फ़ फीता दिखना चाहिए. माइक दिया राज सहारा का हाथ में. मैंने, कहा कि हाथ में ऐसे पकड़े रहना. मेरे पीछे बैठो बैग पकड़ो और 10 किलो आटे का कट्टा ख़रीदा क्योंकि उनका बैग था भारी. जमात वाले तो पूरा दरी भी रखे होते हैं और उनको (जमाती) बिठाया वो रखा कट्टा (आटे का) और उनको बोला कि आप कुछ मत बोलना बातें हम ही कर लेंगे सिर्फ़ कहना कि स्टाफ़ इससे आगे बोलना ही मत.

मौलाना सरवर- हमारे पास PASS बना हुआ है. ऐसे रोकता है नहीं, आज तक तो नहीं रोका है. एक बार रोका था सराय काले खां में तो कार्ड दिखाया तो उसने कहा कि इसको मोटर साइकिल पर चिपका के रखिये तो चिपकाया तो नहीं.
मौलाना सरवर लोगों को कोरोना पर गुमराह भी कर रहा है . वो कहता है कि इसकी कोई वैक्सीन नहीं आएगी... और तो और, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को... देश में कोरोना फैलने के लिए जिम्मेदार बता दिया .

खबर का असर
हमारी इस खबर को देखने के बाद ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा ने गुलाम सरवर को...संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया है . इस बीच दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वो गुलाम सरवर के दावों की जांच करेगी . इस बात की भी जांच होगी कि उसने कर्फ्यू पास कैसे बनवाया . दिल्ली पुलिस इस मामले में IPC की धारा 188, 269 और 270 के तहत मामला दर्ज कर सकती है . धारा 188 कहती है कि सरकारी आदेश का पालन ना करके, किसी की जान खतरे में डालने वाले को 6 महीने की सज़ा या जुर्माना हो सकता है . धारा 269 के तहत ...जान बूझकर वायरस या बीमारी फैलाने पर भी 6 महीने की सज़ा हो सकती है .

इसी तरह धारा 270 में भी, जानबूझ कर वायरस या बीमारी फैलाते हुए किसी की जान को खतरे में डालने वाले के खिलाफ 2 साल की जेल का प्रावधान है. अगर गुलाम सरवर ने जमातियों को भगाने के बदले उनका मेडिकल टेस्ट करवाया होता, या प्रशासन की मदद की होती तो...देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने में मदद मिली होती . लेकिन, इस व्यक्ति ने गलत तरीका अपनाया, और देश के नागरिकों के जीवन को ख़तरे में डाल दिया . इस मौलाना के गुनाह उन लोगों से कम नहीं हैं, जिन्होंने कोरोना से संक्रमित होने के बावजूद खुद को छिपाया .
ज़ी न्यूज़ के 'ऑपरेशन वायरस' का मसकद ये भी है कि आप ऐसे लोगों से सावधान रहें...और आपको पता चले तो ऐसे लोगों की जानकारी पुलिस को भी दें क्योंकि इस तरह के...वैचारिक संक्रमण के शिकार लोग, इस समय देश के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक हैं. 
(साभार : ZeeNews) 
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