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ढह गया ‘केरल मॉडल’: राज्य में पिछले 5 दिनों में कोरोना के 1.5 लाख से अधिक नए मामले

मीडिया से लेकर मोदी विरोधी राजनेता कोरोना पर केरल की वास्तविकता को छुपाकर खूब कसीदे पढ़ते नहीं थक रहे थे, लेकिन वहां इस महामारी का क्या हाल है, सब मुंह में दही जमाए बैठे हैं। किसी में सच्चाई बताने का साहस नहीं।  
केरल में कोरोना की बेकाबू रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आँकड़ों के मुताबिक, पिछले पाँच दिनों में केरल में कोविड-19 के 1.5 लाख से अधिक नए मामले सामने आए हैं। राज्य में कोरोना के दर्ज किए गए नए मामले पिछले पाँच दिनों में देश में दर्ज किए गए कुल मामलों का 68% से अधिक है। इस समय भारत में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 2,26,067 है, जबकि केरल में 1,55,424 मामले दर्ज किए गए हैं।

हर दिन दर्ज हो रहे नए केस 

25 अगस्त को केरल में 31,445 (भारत में कुल मामलों का 67.9%) नए मामले दर्ज किए गए, जबकि उस दिन भारत में कुल कोरोना मामलों की संख्या 46,280 थी।

  • 26 अगस्त को, केरल में 30,077 (भारत में कुल मामलों का 67.5%) नए मामले सामने आए, जबकि देश के बाकी हिस्सों में केवल 14,473 मामले सामने आए।

    27 अगस्त को, केरल में पिछले दिन की तुलना में 2,000 से अधिक मामलों की बढ़त के साथ (भारत में कुल मामलों का 70.07%) इस दिन यहाँ कोरोना के 32,801 नए मामले दर्ज किए गए। उसी दिन भारत में कुल कोविड-19 मामलों की संख्या 46,806 थी।

    28 अगस्त को, केरल में 31,265 (भारत में कुल मामलों का 69.3%) नए मामले दर्ज किए, जबकि भारत में नए मामलों की कुल संख्या 45,064 थी।

    29 अगस्त को, केरल में 29,836 (भारत में कुल मामलों का 68.7%) नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए, जबकि भारत में नए मामलों की कुल संख्या 43,367 थी।

                                               सभी ग्राफ साभार  Source: Covid19india.org

    ढह गया केरल मॉडल 

    केरल का कोविड-19 प्रबंधन, जिसे अक्सर केरल मॉडल कहा जाता है, इसकी शुरुआत में मीडिया और लिबरल लोगों द्वारा ‘महामारी को नियंत्रित करने’ के लिए सराहना की गई थी। वास्तव में, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों ने फरवरी और मार्च 2020 की शुरुआत में ही घोषणा कर दी थी कि केरल ने महामारी पर पूरी तरह से काबू पा लिया है। हालाँकि, शुरुआत में सबसे अच्छे कोविड-19 प्रबंधन के लिए अपनी पीठ थपथपाने वाले राज्य का केरल मॉडल ताश के पत्तों की तरह ढह गया था। राज्य की वर्तमान स्थिति देखने के बाद अब कोई केरल मॉडल की सराहना नहीं कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब पूरे देश में केरल ही एक मात्र ऐसा राज्य है, जहाँ कोरोना के सबसे अधिक नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

    देश के बाकी हिस्सों की तो वह कोरोना महामारी पर काबू पाने में सफल हुए हैं। केरल नए मामलों में अभी भी सबसे आगे है। ध्यान दें केरल में प्रति दिन लगभग 70% नए कोरोना के मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि यह भारत की कुल आबादी का सिर्फ 3% है। केरल का औसत पॉजिटिविटी रेट, जाँच किए गए प्रत्येक 100 लोगों के पॉजिटिव मामलों की तुलना में 18.5 प्रतिशत है।

    वर्तमान में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश एक दिन में 50 से भी कम नए मामले दर्ज कर रहा है। केरल पिछले 5 दिनों से 30,000 के करीब मामले दर्ज कर रहा है। हाल ही में, रॉयटर्स जैसे मीडिया घरानों ने कोरोना के कुप्रबंधन को लेकर केरल सरकार को क्लीन चिट देने का प्रयास किया, जिसकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी आलोचना की गई।

    अगस्त 27 को, रॉयटर्स ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था, ‘Kerala’s COVID-19 lessons for India and Modi’s government’। उन्होंने पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार को कोविड-19 महामारी के प्रभावी संचालन के लिए धन्यवाद भी कहा।

    ऐसे में जब यहाँ मामले इतने अधिक हैं, तो राज्य सरकार को परीक्षण बढ़ाना चाहिए ताकि संक्रमण का पता लगाया जा सके और उस पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन केरल ने इस समय जाँच भी कम कर दी है। केरल सरकार में ‘नो टेस्ट, नो केस’ नया मंत्र लगता है। द हिंदू बिजनेसलाइन में 23 अगस्त की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल में कोरोना मामलों की जाँच में पिछले दो हफ्तों में लगभग एक तिहाई की कमी आई है।

    कोरोना महामारी पर अंकुश लगाने में केरल सरकार पूरी तरह से असफल रही है। इसके चलते हिंदू समुदाय अपने आने वाले त्योहार को भी नहीं मना सकेंगे, क्योंकि अन्य राज्य सरकारों पर इसका दबाव होगा कि केरल मॉडल को न दोहराया जाए। केरल में रहने वाले हिंदू परिवार, जिन्होंने पिछले 18 महीनों में महामारी के कारण कोई त्योहार नहीं मनाया हैं, वे उत्सव मनाने का इंतजार कर रहे हैं।

    पाक विस्थापित हिन्दुओं का कोविड टीकाकरण न कराए जाने पर हाई कोर्ट ने लगाई राजस्थान सरकार को फटकार

    राजस्थान हाई कोर्ट ने पाक विस्थापित हिन्दू प्रवासियों का कोरोना वैक्सीनेशन न कराए जाने के लिए राज्य की अशोक गहलोत सरकार को फटकार लगाई है। इस मामले में सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार (3 जून) को राज्य सरकार की ‘निष्क्रियता’पर नाराजगी जताई।

    राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों, जिनके पास निर्धारित पहचान पत्र नहीं हैं, उन्हें कोविड-19 टीकाकरण के लिए पात्र क्यों नहीं मान रही है।

    जस्टिस विजय विश्नोई और जस्टिस रामेश्वर व्यास ने पाया कि उसके 28 मई के आदेश के बावजूद पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है।

    पाक विस्थापित हिन्दू टीकाकरण योग्य क्यों नहीं: गहलोत सरकार से हाई कोर्ट 

    कोर्ट ने राजस्थान सरकार से यह बताने को कहा कि वह केंद्र के नियमों द्वारा पाकिस्तान से आए हिन्दू प्रवासियों को टीकाकरण के लिए पात्र बनाने के बावजूद उन्हें कोविड टीकाकरण के लिए पात्र क्यों नहीं मान रही हैं।

    साथ ही हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि गहलोत सरकार द्वारा पाकिस्तान से आए हिन्दू प्रवासियों सहित निर्धारित पहचान पत्र नहीं रखने वाले लोगों के टीकाकरण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी भी कोर्ट को नहीं दी गई है।

    हाई कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा 28 मई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि किसी वैध पहचान दस्तावेज न होने पर टीकाकरण के लिए लोगों की पहचान के लिए केंद्र की एसओपी पाकिस्तानी प्रवासियों को टीकाकरण के लिए पात्र बनाती है।

    पीठ ने कहा, ”यह समझ पाना मुश्किल है कि राजस्थान सरकार केंद्र से और स्पष्टीकरण क्यों माँग रही है और एसओपी में पाकिस्तानी प्रवासियों को शामिल करने का आग्रह क्यों कर रही है।”

    हिन्दू प्रवासी पात्र नहीं, मुस्लिमों के लिए विशेष टीकाकरण कार्यक्रम

    एक ओर जहाँ गहलोत सरकार पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों को केंद्र के नियमों और हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कोविड टीकाकरण के लिए पात्र नहीं मान रही है तो वहीं मुस्लिमों के टीकाकरण के लिए अलग से कैंप लगाकर विशेष टीकाकरण कार्यक्रम चला रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान में मुस्लिमों में कोरोना टीकाकरण को बढ़ाने और लोगों में फैली तरह-तरह की भ्रांतियों को दूर करने के लिए अब विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।

    ऐसे ही कैंप चित्तौड़गढ़ में 1 जून से छिपा मोहल्ले, यथासमय कच्ची बस्ती और रेलवे स्टेशन के पास स्थित कॉलोनी में आयोजित किए जा रहे हैं। चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत के साथ मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई और कोरोना टीकाकरण के कम कवरेज पर विचार-विमर्श किया।

    बैठक के दौरान कलेक्टर ने वैक्सीन के महत्व पर प्रकाश डाला और मुस्लिम समुदाय के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए आगे आने का आह्वान किया। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि मुस्लिमों में कोरोना वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने और इस समुदाय के लोगों में फैली तरह-तरह की भ्राँतियों को दूर करने के लिए अब विशेष कैंप लगाए जाएँगे।

    उत्तर प्रदेश : मर चुके कोरोना मरीज की Remdesivir इंजेक्शन को नर्स आबिद और अंकित 32000 रूपए में बेचते गिरफ्तार

    देश है कोरोना की बीमारी से झूझ रहा है, लेकिन कुछ लोग कोरोना को एक व्यापार के रूप में कर रहे हैं। कुछ ही दिन पूर्व, महाराष्ट्र के विषय में शीर्षक "मुंबई में कोरोना बना व्यापार" लेख सत्यापित हो रहा है। 

    हॉस्पिटल में मरीजों के साथ हो व्यवहार के ही कारण शायद कोरोना मरीजों के कमरों, वार्ड, बाहर गैलरी आदि में कैमरे लगाने की मांग करना उचित है। एक तरफ दवाओं और ऑक्सीजन से मरीज परेशान है, वही हॉस्पिटल स्टाफ किस तरह मृतक मरीजों की दवाइयों को बेच अपना खजाना भरने में लगे हुए हैं।    

    देश में कोरोना के कहर के बीच कुछ ऐसी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं, जो मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक चर्चित अस्पताल में सामने आया, जहाँ के दो वॉर्डबॉय (पुरुष स्टाफ नर्स) को एक मरीज के लिए आवंटित रेमडेसिविर इंजेक्शन को कथित तौर पर 32000 रुपए में बेचने की कोशिश करने के लिए अप्रैल 24 को गिरफ्तार किया गया।

    रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 900-2000 रुपए है लेकिन इसे नीलामी के लिए रखा गया था और इसे 25000 रुपये की बोली लगाकर खरीदा गया। हालाँकि बोली एक मरीज का रिश्ता बनकर एक पुलिसवाले द्वारा लगाई गई थी।

    मरीज के इंजेक्शन को अस्पताल स्टाफ ने की बेचने की कोशिश

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ के एक प्रमुख अस्पताल में भर्ती एक कोविड शोभित जैन की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने थे। उन्हें इसके तीन डोज लगाए गए लेकिन चौथी डोज को अस्पताल के इन दो वार्डबॉयों ने अपने पास रख लिया। जब जैन की मौत हो गई तो वे इस इंजेक्शन को बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश में जुट गए।

    मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की सर्विलांस टीम और पुलिसकर्मी इस मामले की जाँच में जुटे थे। उन्होंने वॉर्डबॉय ने 32000 रुपए की बोली रखी थी। पुलिस ने वॉर्डबॉय आबिद खान और अंकित शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। अस्पताल के छह सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम द्वारा उन पर काबू पाते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 147 (दंगा करना), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 353 (सार्वजनिक बल पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और महामारी रोग अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं हैं।

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    अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। इस अस्पताल को चलाने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट सुभारती केकेबी के ट्रस्टी डॉ. अतुल कृष्णा ने पुलिस के दावे को गलत बताते हुए कहा कि यहाँ ऐसा नहीं होता है और यह एक अलग मामला था। उन्होंने कहा कि पुलिसवाले सादे कपड़ों में हथियार लेकर जा रहे थे, इसीलिए ड्यूटी पर मौजूद गार्डों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    ‘फाँसी पर चढ़ा देंगे’ – केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी, हर एक सवाल पर लताड़ा

    दिल्ली की केजरीवाल सरकार ऑक्सीजन आपूर्ति के मुद्दे पर लगातार घिरती नजर आ रही है। केजरीवाल सरकार पर जहाँ एक ओर यह आरोप लग रहा है कि उन्होंने 8 ऑक्सीजन के प्लांट स्थापित करने के लिए मिले फंड के बावजूद एक ही ऑक्सीजन प्लांट बनवाया, वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय भी लगातार इस मुद्दे पर केजरीवाल सरकार से प्रश्न कर रहा है। अप्रैल 24 को न्यायालय ने यहाँ तक कह दिया कि यदि किसी अधिकारी ने ऑक्सीजन की आपूर्ति पर रुकावट डाली तो उसे फाँसी पर चढ़ा देंगे।

    जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। न्यायालय में हॉस्पिटल की ओर से वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की अक्षमता पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी उस समय नदारद रहे, जब अस्पताल में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं।

                                          दिल्ली सरकार की निष्क्रियता पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी
    दिल्ली सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले वकील राहुल मेहरा से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील दत्ता ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार (23 अप्रैल) को पूरा दिन दिल्ली सरकार के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयत्न किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

                                                             केंद्र सरकार के अधिकारी का बयान
    न्यायालय में दिल्ली सरकार की ओर से स्वास्थ्य सचिव आशीष वर्मा पेश हुए। न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा कि राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए कुछ कदम हैं, जो उठाए जाने चाहिए थे लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। सरकार की ओर से दलीलें पेश कर रहे एडवोकेट मेहरा से न्यायालय ने कहा कि टैंकर इत्यादि के माध्यम से ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए कुछ प्रक्रियाएं हैं लेकिन जब तक दिल्ली सरकार कुछ नहीं करेगी, तब तक कुछ भी नहीं होगा।

    ऑक्सीजन के टैंकरों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि सभी राज्य ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था कर रहे हैं, दिल्ली की सरकार भी करे। अरविंद केजरीवाल पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि वह खुद एक प्रशासनिक अधिकारी थे, ऐसे में उन्हें यह पता होना चाहिए कि इस पूरी प्रक्रिया में कैसे काम किया जाना चाहिए।

    न्यायालय ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव आशीष वर्मा से कहा कि एक बार दिल्ली के लिए ऑक्सीजन अलॉट हो गई तो आपको लगा कि अब सब आपके दरवाजे पर आ जाएगा लेकिन ऐसे काम नहीं होता है। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से प्रश्न किया कि क्या उन्होंने ऑक्सीजन संग्रहित करने के लिए टैंकरों का प्रबंध किया?

    केंद्र सरकार के अधिकारी पीयूष गोयल ने न्यायालय को यह भी सूचना दी कि राउरकेला से ऑक्सीजन की आपूर्ति तैयार थी लेकिन उसे लेने के लिए कोई भी नहीं था। गोयल ने कहा कि बाकी राज्य इस मामले पर सहयोग कर रहे हैं, दिल्ली को भी करना होगा। 

    महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑक्सीजन के संकट पर तल्ख टिप्पणी की। जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संक्रमण की इस सुनामी में यदि कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है तो उसे हम फाँसी पर चढ़ा देंगे। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की गलती है तो उनकी शिकायत केंद्र से करें, जिससे उन पर कार्रवाई की जा सके। 

    कोरोना के दूसरे काल में सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सेवा भारती ने तैयार की कार्य योजना

    नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2021 । वर्तमान में हम सब वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं । आज पूरा विश्व कोविड-19 के दुष्प्रभाव से ग्रस्त है । इस कारण पूरे विश्व की गति थम सी गई है। समाज के हर वर्ग पर इसकी मार पड़ी है । ऐसी विषम और त्रासदीपूर्ण परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सेवा भारती ने समाज की सज्जन शक्ति को साथ में लेकर दिल्ली में कोरोना से सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए नीचे दिए बिन्दुओं के अनुसार व्यापक प्रयास शुरू कर दिए हैं -

    1. दिल्ली में स्थानीय स्तर पर पुलिस व प्रशासन के साथ समन्वय करके कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में जरूरतमंदों को आयुर्वेदिक काढ़ा/होम्योपैथिक दवाई, ऑक्सिजन सिलेंडर, आइसोलेशन सेंटर आदि की व्यवस्था के लिए योजना बनाई है। एक हेल्पलाइन नंबर सेवा भारती द्वारा शीघ्र जारी किया जाएगा जिस पर कॉल करने पर जरूरतमंदों को कोरोना काल से सम्बंधित सभी जरूरी आवश्यकताएं पूरी की जाएँगी।

    2. कोरोना से बचाव के लिए  सामाजिक, धार्मिक व व्यापारिक संस्थाओं के सहयोग से मास्क, सोशल डिस्टेंस व स्वच्छता के लिए जनजागरण अभियान भी आरम्भ किये जाएंगे जिसमें स्थानीय स्तर पर मास्क बनाकर वितरित किये जाएंगे। क्षेत्र में वैक्सीनेशन के लिए जागरूकता अभियान एवं इसके पंजीकरण में लोगों की सहायता की जाएगी सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर भी इसके लिए जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा।

    3. डॉक्टर्स के द्वारा स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन संवाद के कार्यक्रम किये जाएंगे, साथ ही FAQ के लिए कुछ डॉक्टर्स के वीडियो बनाकर शेयर करने की योजना है। 

    4.इस कोविड काल में सबसे ज्यादा समस्या अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को हो रही है, इसके लिए अपने-अपने क्षेत्र में सेवा भारती कार्यकर्ताओं वरिष्ठ नागरिकों की सूची तैयार करेंगे, जिसमें से प्रत्येक कार्यकर्ता अकेले रह रहे एक-एक वरिष्ठ नागरिक को अपनाकर उनकी हर तरह की सहायता करेगा।

    5.कोरोना संक्रमित रोगी की सहायता के लिए प्लाज्मा दान सहित अन्य हर संभव प्रयास कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में करेंगे। इसके अतिरिक घर से दूर रहकर काम करने वाले, पी.जी. छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी एवं जिन परिवारों में सब लोग यदि कोरोना पीड़ित हैं उनके लिए हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से कॉल आने पर निशुल्क भोजन पहुँचाने की व्यवस्था पर भी कार्य योजना तैयार की गई है।

    6.शमशान घाटों में दाह संस्कार के लिए बड़ी संख्या में आ रहे शवों के कारण हो रही व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी को ठीक करने के लिए वहां की प्रबंध समिति को कार्यकर्ता सहायता करेंगे ।

    7.क्षेत्र में पलायन कर रहे दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिक परिवारों को हर संभव सहायता देने की व्यवस्था की जाएगी।

    8.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रान्त के अंतर्गत प्रत्येक नगर इकाई में कोरोना से संक्रमित व्यक्तियों की सूची तैयार की जाएगी ताकि उनके स्वस्थ होने पर उनसे प्लाज़्मा आदि की स्थानीय स्तर पर व्यवस्था हो सके।

    9.  UTKARSH BHARAT एप के द्वारा 'रक्त-सेवा' Digital Helpline प्रारम्भ हो गयी है। इस Helpline के माध्यम से प्रत्येक बस्ती में जो Blood/Plasma/Platelets - Donate कर सकते हैं उनका पंजीकरण करवाया जा रहा है । इसके पश्चात जिन्हें भी Blood/Plasma/Platelets की आवश्यकता होगी उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

    जारीकर्ता

    भारत भूषण

    प्रान्त कार्यवाह

    रा. स्व.संघ,दिल्ली

    ‘अल्लाह का शुक्रिया, Covid ने मुसलमानों को डिटेन्शन कैंप से बचाया’: इरेना अकबर, इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार

    नागरिकता संशोधक कानून विरोधी कोरोना महामारी में भी जनता में जहर फ़ैलाने से बाज़ नहीं आ रहे। इंडियन एक्सप्रेस के साथ काम कर चुकी ‘पत्रकार’ इरेना अकबर ने कोविड-19 महामारी के लिए खुदा का शुक्रिया कहा है और यह दावा किया है कि यदि कोरोनावायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। एक पत्रकार होते हुए, इरेना को नागरिकता कानून की पूर्ण जानकारी नहीं, या फिर जानकारी होते हुए न होने के स्वांग से अपने अल्पज्ञान से मुसलमानों को भ्रमित करना साबित करता है कि वह एक पत्रकार कम, घुसपैठियों की मददकार अधिक हैं। उनका यह बयान उस दौरान आया जब लिबरल्स यह चर्चा कर रहे थे कि कोविड-19 से लड़ने में किसी ‘संघी’ की सहायता करनी चाहिए अथवा नहीं। जिस समाचार समूह में इरेना जैसे पत्रकार होंगे, उस समाचार पत्र की विश्विनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। 

    इरेना अकबर ने कहा, “यदि कोरोना वायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। हालाँकि मैं वायरस की शुक्रगुजार नहीं हूँ जिसने मेरी आंटी की जान ली, जिसने मेरे अब्बू को आईसीयू में पहुँचा दिया और कई घरों में ट्रेजेडी का कारण बन गया। मैं इस तथ्य पर बात कर रही हूँ कि जब ‘फासीवादी’ अपने प्लान बना रहे थे तब अल्लाह ने अपना प्लान बना दिया।“

    अकबर ने आगे कहा, “भारतीय मुसलमानों के लिए यह कुआँ और खाई की स्थिति है। या तो वो कोविड-19 के डर से मरें या फिर राज्य व्यवस्था की मुस्लिम विरोधी हिंसा के डर से। हालाँकि कोविड-19 हमें चुनकर निशाना तो नहीं बना रहा क्योंकि दूसरे केस में जनता इसका (राज्य आधारित मुस्लिम विरोधी हिंसा) आनंद लेगी।

    ऐसा ही एक बयान राहुल गाँधी के सहयोगी अब्बास सिद्दीकी ने पिछले साल कोरोनावायरस की महामारी के दौरान दिया था। सिद्दीकी ने अल्लाह के वायरस से 50 करोड़ भारतीयों की मौत की दुआ माँगी थी। 

    न तो भारत में कोई डिटेन्शन कैंप बनाया गया है और न ही मुस्लिमों के खिलाफ कोई राज्य आधारित हिंसा हो रही है लेकिन तथाकथित पत्रकारों द्वारा संकट के समय में ऐसे बयान देना उनकी विषाक्त मानसिकता को जरूर बताता है।

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    ‘मुहर्रम के कारण दुर्गा विसर्जन को रोका’ – 50 करोड़ के मरने की दुआ मांगने वाले मौलाना अब्बास सिद्
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    ‘मुहर्रम के कारण दुर्गा विसर्जन को रोका’ – 50 करोड़ के मरने की दुआ मांगने वाले मौलाना अब्बास सिद्

    इरेना अकबर हमेशा से ही ऑनलाइन मंचों पर घृणास्पद बयान देने के लिए जानी जाती रही है। फरवरी 2020 में अकबर ने दलितों पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिमों का गैंगरेप और उनकी हत्या की थी। अकबर हिंदुओं के द्वारा चलाए जा रहे व्यापार के बहिष्कार की बात भी कर चुकी है। उसने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जामिया के पक्ष में आवाज न उठाने पर घोर निराशा भी व्यक्त की थी। https://fb.watch/4XtLb82jL_/   

    झारखण्ड : छठ पर लगाया बैन: घाट पर स्नान, सजावट और पटाखों पर प्रतिबंध – हेमंत सरकार का आदेश जारी

    पूरे देश में, खासकर पूर्वी भारत में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। नवंबर 18, 2020 से 4 दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत हो रही है और नहाय-खाय के साथ व्रती इसे प्रारम्भ करते हैं। झारखण्ड में इस बार तालाबों और नदियों के किनारे छठ महापर्व के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने रविवार( नवम्बर 15) की रात ही इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए, जिसके बाद श्रद्धालुओं में मायूसी का माहौल बन गया है।

    झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार का कहना है कि अभी कोरोना महामारी का समय गया नहीं है और नदियों एवं तालाबों के घाटों पर सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना संभव नहीं है। कोरोना को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के पालन का हवाला देकर ऐसा किया गया है। सरकार ने कहा है कि लोग इस बार अपने घरों से ही छठ महापर्व मनाएँ और बाहर न निकलें। उन्हें पिछले सालों की भाँति घाट पर जाने की अनुमति नहीं होगी।

    झारखण्ड के आपदा प्रबंधन विभाग ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कहा है कि छठ महापर्व के दौरान किसी भी नदी, झील, बाँध या तालाब के छठ घाट पर किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन की अनुमत नहीं होगी। साथ ही घाट के समीप किसी भी प्रकार के दुकान या स्टॉल लगाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। किसी भी सार्वजनिक स्थलों पर पटाखे छोड़ना या लाइटिंग व मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित करने की भी मनाही होगी।

    झारखण्ड के अधिकारियों का कहना है कि जलीय स्थलों पर डुबकी लगाने के दौरान सबका मास्क पहनना संभव नहीं है। साथ ही दो गज की दूरी का पालन न होने की बात भी कही जा रही है, क्योंकि इसमें एक जगह पर कई परिवारों के लोग शामिल होते हैं। सैकड़ों भक्तों के पानी में जमा होने के कारण कोरोना फैलने की संभावना का हवाला देते हुए ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। लोगों को घर से ही अर्घ्य देने के लिए कहा गया है। सरकार के इस निर्णय से जनता में उपजे रोष से राजनीतिक नहीं सियासती जमावड़ों में भाग लेने पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं :-

    सरकार का कहना है कि घाट पर स्नान करने आई भीड़ को नियंत्रित करना भी उसके लिए संभव नहीं है, ताकि लोग बारी-बारी से स्नान कर सकें। घाट के आसपास सार्वजनिक जगहों पर बिजली के बल्ब इत्यादि से सजावट भी नहीं की जा सकेगी। संगीत का कोई कार्यक्रम नहीं हो सकेगा। मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ही आपदा प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष हैं और उनके द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में ही ये बातें कही गई हैं।

    इसके बाद झारखण्ड के लोगों ने भी बाजारों से टब की खरीददारी शुरू कर दी है और कइयों ने घर में ही हौदा बनवा लिया है। वहीं बिहार में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के तालाबों में छठ महापर्व मनाने की अनुमति दी गई है। तालाब क्षेत्र को सैनिटाइज किए जाने की व्यवस्था भी हुई है। नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को इसके लिए तैयार किया गया है। हालाँकि, घाट के आसपास भोज या प्रसाद वितरण नहीं हो सकेगा।

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को पश्चिम बंगाल में छठ पर्व मनाने सम्बन्धी जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोलकाता की दो सबसे बड़ी झीलों रवींद्र सरोवर और सुभाष सरोवर में भी छठ महपर्व के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। एक परिवार से दो लोग से ज्यादा पानी में उतर कर पूजा नहीं कर सकते। जिसके घर में छठ पर्व हो रहा है, उस परिवार के अन्य सदस्यों को घर में रह कर ही इसे देखना पड़ेगा।

    'Operation Virus' में बड़ा खुलासा, कोरोना के 'मानव बम' पर मौलाना का कबूलनामा

    DNA ANALYSIS: 'Operation Virus' में बड़ा खुलासा, कोरोना के 'मानव बम' पर मौलाना का कबूलनामाभारत में एक खास विचारधारा वाले लोगों ने कोरोना वायरस फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. ये लोग अंदर ही अंदर चाहते हैं कि देश में कोरोना वायरस फैल जाए. जब हम ये बात कहते हैं तो कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगता. लेकिन यही बात सच है. इसे तबलीगी जमात के मामले से भी पूरा देश देख रहा है. देश में कोरोना वायरस के मामलों में करीब 30 प्रतिशत मामले अकेले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के हैं. Zee News ने एक बड़ा खुलासा किया है. Zee News ने उस व्यक्ति को बेनकाब किया है, जिसने दिल्ली में तबलीगी जमात के लोगों को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. इसलिए हमने इस खुलासे का नाम दिया है- ऑपरेशन वायरस (Operation Virus).
    हाफिज गुलाम सरवर
    ऑपरेशन वायरस के विलेन का नाम है- हाफिज गुलाम सरवर . आपने इस व्यक्ति को कई टीवी चैनलों पर तबलीगी जमात का पक्ष रखते हुए भी देखा होगा . हाफिज गुलाम सरवर...ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा नाम के संगठन का राष्ट्रीय प्रवक्ता है. इसके अलावा ये व्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम दलित मोर्चा नाम के संगठन का संस्थापक और सचिव भी है. हाफिज गुलाम सरवर का दावा है कि उसने दिल्ली में तबलीगी जमात के 15 लोगों को भगाने में मदद की थी. यहां हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि हाफिज गुलाम सरवर का तबलीगी जमात से कोई सीधा संबंध नहीं है. लेकिन इस व्यक्ति ने गैरकानूनी तरीके से तबलीगी जमात के लोगों को भगाने में मदद की थी. हम ये भी साफ बता रहे हैं कि ये स्टिंग ऑपरेशन सार्वजनिक हित में किया गया है. हमारा उद्देश्य न ही किसी समुदाय या धर्म को ठेस पहुंचाना है और न ही किसी की गोपनीयता का उल्लंघन करना है बल्कि हम ऐसे लोगों को बेनकाब कर रहे हैं, जो पूरे समाज के दुश्मन हैं.

    लॉकडाउन
    आपको याद दिला दें कि 25 मार्च को देश भर में लॉकडाउन लागू हुआ . 26 मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज को खाली कराने की कोशिश हुई थी  और 29 मार्च को 2 हज़ार से ज्यादा लोग निजामुद्दीन मरकज से बाहर निकाले गए थे . इनमें से कई लोगों में कोरोना का संक्रमण पाया गया था, जो कि देश के अलग-अलग राज्यों से दिल्ली आए हुए थे . 5 अप्रैल तक देश के 17 राज्यों में 1000 से ज्यादा जमाती कोरोना से संक्रमित मिले थे . इसके बाद, 6 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच हमने ये स्टिंग ऑपरेशन किया, ताकि जमात के लोगों द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण की सच्चाई का पता लगाया जाए .

    इसी दौरान ZEE NEWS की टीम को दिल्ली में गुलाम सरवर और उनके नेटवर्क के बारे में पता चला . गुलाम सरवर से हमारी मुलाकात दिल्ली के जामिया नगर में उनके घर पर हुई . हमारी टीम के लोग, इस व्यक्ति से, एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के तौर पर मिले . गुलाम सरवर की सच्चाई जानने के लिए हमने उससे पूछा कि ... क्या वो आने वाले चुनावों में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कर सकता है ? जिसपर उसका जवाब था- हां, वो ये काम बखूबी कर सकता है .
    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान गुलाम सरवर ने माना कि उसने दिल्ली में तबलीगी जमात के सदस्यों को पुलिस से बचाते हुए निकाला . लेकिन उसने ये नहीं बताया कि वहां से निकालने के बाद जमातियों को किस जगह छिपा कर रखा.
    Sting Operation
    मौलाना सरवर- बिहार से कैसे कैसे आ गए, ये बताइए?
    रिपोर्टर- अरे मत पूछिए बिहार से आने में तो डॉक्टर साहब की तरफ से...

    मौलाना सरवर- हां, हमारे पास में भी PASS है .
    रिपोर्टर - कैसे बना (PASS)?

    मौलाना सरवर- वो तो मीडिया के इससे बना है. हमारा भी एक चैनल छोटा सा है. साप्ताहिक अख़बार राज सहारा हिंदी का तो उसी के लिये बनाए थे. हम शुरू से घूम रहे थे. इसी वजह से तो हम बीसियों लोगों को...दिल्ली जमात के 10-15 लोगों को दायें-बायें कराए हैं.
    रिपोर्टर- कैसे ?

    मौलाना सरवर- करा देते हैं काम, जैसे पता चला फलां मस्जिद में हैं.  चुपचाप से गाड़ी लगाए उसको (जमाती) बिठाये. बैग लेकर फिर और चले लेके हम पहुंच गए, चलो, हमारे पास है तो बहुत कुछ कम से कम 15 को...
    गुलाम सरवर का दावा है कि वो एक You Tube चैनल और 'राज सहारा' नाम का अखबार चलाता है . इसने जमात के सदस्यों को बचाने और भगाने के लिए मीडिया के पास का इस्तेमाल किया . लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पेशल कर्फ्यू पास जारी किए...जिसके ज़रिये मीडिया, बैंकिंग और मेडिकल जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को आने-जाने की छूट मिली थी . गुलाम सरवर ने इसी को अपना हथियार बना लिया . अब आप ये जानिए कि गुलाम सरवर कैसे एक जमाती को पुलिस के पहरे के बीच से, बचाकर ले गया ?
    रिपोर्टर- अच्छा एक बात बताइए जैसे कि हम लोगों को...
    मौलाना सरवर- आप निज़ामुद्दीन मेरे साथ चलिए. कसम ख़ुदा की आप कांप जाएंगे. हिन्दू-मुस्लिम दंगे में भी ऐसा कर्फ़्यू नहीं होता जिस तरह से सील किया है. हर चौराहे पर 12 मिलिट्री फोर्स को खड़ा किया है. लेकिन हिम्मत से काम करना होता है. मेरे को, मौलाना साद कासमी हैं एक, वहीं पर रहते हैं. दुआ-ताबीज़ करते हैं. अपने नेचर के ही हैं. उन्होंने कहा कि ये बंदे के पास पैसा ख़त्म हो रहा है. ये तमिलनाडु का है, ऐसे-ऐसे जमात का है और ऐसे-ऐसे घुसपैठ कर के चला आया था इधर क्योंकि मरकज़ से सबको निकाला जा रहा था. तो अब इसके पैसे ख़त्म हो रहे थे या तो इसके पैसों का इंतज़ाम करें या शिफ़्ट कीजिए. मैंने कहा कि भाई मेरी तो औक़ात नहीं है, रहने के 15 दिन हज़ार रुपये और दें उसे हां, शिफ़्ट कर देंगे. खाने-पीने, रहने का इंतज़ाम कर देंगे तो टीशर्ट-ट्राउज़र वो लेकर हम गए. हमने अंदर भिजवाया, टीशर्ट-ट्राउज़र पहनने को बोला. हमने कार्ड दिया, ये गले में टांग लो और अंदर घुसा लो. यानी कि कार्ड नहीं दिखना चाहिए. सिर्फ़ फीता दिखना चाहिए. माइक दिया राज सहारा का हाथ में. मैंने, कहा कि हाथ में ऐसे पकड़े रहना. मेरे पीछे बैठो बैग पकड़ो और 10 किलो आटे का कट्टा ख़रीदा क्योंकि उनका बैग था भारी. जमात वाले तो पूरा दरी भी रखे होते हैं और उनको (जमाती) बिठाया वो रखा कट्टा (आटे का) और उनको बोला कि आप कुछ मत बोलना बातें हम ही कर लेंगे सिर्फ़ कहना कि स्टाफ़ इससे आगे बोलना ही मत.

    मौलाना सरवर- हमारे पास PASS बना हुआ है. ऐसे रोकता है नहीं, आज तक तो नहीं रोका है. एक बार रोका था सराय काले खां में तो कार्ड दिखाया तो उसने कहा कि इसको मोटर साइकिल पर चिपका के रखिये तो चिपकाया तो नहीं.
    मौलाना सरवर लोगों को कोरोना पर गुमराह भी कर रहा है . वो कहता है कि इसकी कोई वैक्सीन नहीं आएगी... और तो और, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को... देश में कोरोना फैलने के लिए जिम्मेदार बता दिया .

    खबर का असर
    हमारी इस खबर को देखने के बाद ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा ने गुलाम सरवर को...संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया है . इस बीच दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वो गुलाम सरवर के दावों की जांच करेगी . इस बात की भी जांच होगी कि उसने कर्फ्यू पास कैसे बनवाया . दिल्ली पुलिस इस मामले में IPC की धारा 188, 269 और 270 के तहत मामला दर्ज कर सकती है . धारा 188 कहती है कि सरकारी आदेश का पालन ना करके, किसी की जान खतरे में डालने वाले को 6 महीने की सज़ा या जुर्माना हो सकता है . धारा 269 के तहत ...जान बूझकर वायरस या बीमारी फैलाने पर भी 6 महीने की सज़ा हो सकती है .

    इसी तरह धारा 270 में भी, जानबूझ कर वायरस या बीमारी फैलाते हुए किसी की जान को खतरे में डालने वाले के खिलाफ 2 साल की जेल का प्रावधान है. अगर गुलाम सरवर ने जमातियों को भगाने के बदले उनका मेडिकल टेस्ट करवाया होता, या प्रशासन की मदद की होती तो...देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने में मदद मिली होती . लेकिन, इस व्यक्ति ने गलत तरीका अपनाया, और देश के नागरिकों के जीवन को ख़तरे में डाल दिया . इस मौलाना के गुनाह उन लोगों से कम नहीं हैं, जिन्होंने कोरोना से संक्रमित होने के बावजूद खुद को छिपाया .
    ज़ी न्यूज़ के 'ऑपरेशन वायरस' का मसकद ये भी है कि आप ऐसे लोगों से सावधान रहें...और आपको पता चले तो ऐसे लोगों की जानकारी पुलिस को भी दें क्योंकि इस तरह के...वैचारिक संक्रमण के शिकार लोग, इस समय देश के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक हैं. 
    (साभार : ZeeNews) 
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    लॉक डाउन के चलते पुरी दुनिया में कंडोम की कमी, सप्लाई में 50% तक की गिरावट

    Afraid to buy condom, couple uses plastic bag during sex, suffer ...
    जब पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही है, तो इसी बीच कंडोम की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी ने वैश्विक कमी की चेतावनी दी है। कंपनी का कहना है कि आपूर्ति में लगभग 50% की गिरावट आई है, जबकि इसका भंडार केवल दो महीने तक और चल सकता है।
    मलेशिया स्थित कंपनी कैरेक्स, जो दुनिया भर में हर पाँच में से एक कंडोम बनाती है, ने एक सप्ताह तक लगातार बंद होने के बाद शुक्रवार(मार्च 27) को अपने कारखानों को फिर से चालू कर दिया है। वहीं कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का पालन करते हुए कंपनी मात्र आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। कंपनी ने कहा कि कंडोम मुख्य रूप से चीन और भारत में बनाए जाते हैं, जबकि दोनों ही देश महामारी से बुरी तरह से जूझ रहे हैं।
    इस बीच कंडोम की माँग बढ़कर दहाई में पहुँच रही है, क्योंकि दुनिया भर की सरकारें लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने के निर्देश दे रही है। ऐसे में लोग घरों में रहकर भविष्य के ताने बाने में और अधिक बच्चे पैदा करने से परहेज कर रहे हैं।

    दरअसल यह कंपनी ड्यूरेक्स जैसे ब्रांडों के लिए उत्पादन करती है और साथ ही ड्यूरियन-फ्लेवर्ड वाले अपने खुद के विशेष कंडोम का भी उत्पादन करती है। वहीं यह कंपनी प्रति वर्ष 5 बिलियन से अधिक कंडोम का उत्पादन करती है और उन्हें 140 से अधिक देशों को निर्यात करती है। अब यह और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि सरकारें अपने देशों की सीमाओं को बंद कर रही हैं, साथ ही विभिन्न एयरलाइंस जहाजों की उड़ानें रद्द कर रही हैं।
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    लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया तंत्र की हमारे देश में मज़बूत उपस्थिति है। ऐसे में मीडिया से अपेक्षा क...
    गोह ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा, “मैं निश्चित रूप से कहूँगा कि यह एक अभूतपूर्व स्टेज है क्योंकि हमने कभी इस तरह की मुश्किल पहले नहीं देखी। कंडोम और भी महँगा हो सकता है। हम अभी भी अपने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे हैं, जबकि कंपनी के कर्मचारी केवल आधे समय ही काम कर रहे हैं। इसलिए आगामी समय में कंडोम की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।”