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उत्तर प्रदेश : मर चुके कोरोना मरीज की Remdesivir इंजेक्शन को नर्स आबिद और अंकित 32000 रूपए में बेचते गिरफ्तार

देश है कोरोना की बीमारी से झूझ रहा है, लेकिन कुछ लोग कोरोना को एक व्यापार के रूप में कर रहे हैं। कुछ ही दिन पूर्व, महाराष्ट्र के विषय में शीर्षक "मुंबई में कोरोना बना व्यापार" लेख सत्यापित हो रहा है। 

हॉस्पिटल में मरीजों के साथ हो व्यवहार के ही कारण शायद कोरोना मरीजों के कमरों, वार्ड, बाहर गैलरी आदि में कैमरे लगाने की मांग करना उचित है। एक तरफ दवाओं और ऑक्सीजन से मरीज परेशान है, वही हॉस्पिटल स्टाफ किस तरह मृतक मरीजों की दवाइयों को बेच अपना खजाना भरने में लगे हुए हैं।    

देश में कोरोना के कहर के बीच कुछ ऐसी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं, जो मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक चर्चित अस्पताल में सामने आया, जहाँ के दो वॉर्डबॉय (पुरुष स्टाफ नर्स) को एक मरीज के लिए आवंटित रेमडेसिविर इंजेक्शन को कथित तौर पर 32000 रुपए में बेचने की कोशिश करने के लिए अप्रैल 24 को गिरफ्तार किया गया।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 900-2000 रुपए है लेकिन इसे नीलामी के लिए रखा गया था और इसे 25000 रुपये की बोली लगाकर खरीदा गया। हालाँकि बोली एक मरीज का रिश्ता बनकर एक पुलिसवाले द्वारा लगाई गई थी।

मरीज के इंजेक्शन को अस्पताल स्टाफ ने की बेचने की कोशिश

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ के एक प्रमुख अस्पताल में भर्ती एक कोविड शोभित जैन की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने थे। उन्हें इसके तीन डोज लगाए गए लेकिन चौथी डोज को अस्पताल के इन दो वार्डबॉयों ने अपने पास रख लिया। जब जैन की मौत हो गई तो वे इस इंजेक्शन को बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश में जुट गए।

मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की सर्विलांस टीम और पुलिसकर्मी इस मामले की जाँच में जुटे थे। उन्होंने वॉर्डबॉय ने 32000 रुपए की बोली रखी थी। पुलिस ने वॉर्डबॉय आबिद खान और अंकित शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। अस्पताल के छह सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम द्वारा उन पर काबू पाते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 147 (दंगा करना), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 353 (सार्वजनिक बल पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और महामारी रोग अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं हैं।

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अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। इस अस्पताल को चलाने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट सुभारती केकेबी के ट्रस्टी डॉ. अतुल कृष्णा ने पुलिस के दावे को गलत बताते हुए कहा कि यहाँ ऐसा नहीं होता है और यह एक अलग मामला था। उन्होंने कहा कि पुलिसवाले सादे कपड़ों में हथियार लेकर जा रहे थे, इसीलिए ड्यूटी पर मौजूद गार्डों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

महाराष्ट्र : Remdesivir सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस ने किया अरेस्ट

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि रेमडेसिविर सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस परेशान कर रही है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य की पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहाँ के सप्लायर ने बीजेपी नेताओं के अनुरोध पर राज्य को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गए थे। हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह बस स्टॉक की जाँच के लिए निकले थे ताकि कालाबाजारी ना हो।

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

फडणवीस ने बताया कि (फार्मा कंपनी के मालिक से) बात करने पर पता चला कि उन्हें धमकी दी गई है। इस बारे में देवेंद्र फडणवीस ने डीसीपी और एडिशनल सीपी से बात कर उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग की। फडणवीस ने महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में एनसीपी (NCP) कोटे से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) पर महाराष्ट्र में रेमडेसिविर  की मौजूदा स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि नवाब मलिक को सिर्फ कोरी राजनीति करना और नैरेटिव सेट करना आता है, उन्हें राज्य के लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने डीसीपी मंजूनाथ सिंगे को अनुमति पत्र दिखाया और बताया कि रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए उन्होंने बोला है। लेकिन डीसीपी ने कहा कि इससे पहले उन्हें (पुलिस को) सूचित नहीं किया गया था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो भी कुछ राज्य की सरकार पुलिस के साथ मिलकर कर रही है, वो गलत है।

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों को डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें बस पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि एंटी वायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी के इनपुट्स मिले थे।

केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।