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पूर्व रॉ अधिकारी ने किया था पवार-दाऊद संबंधों का दावा, अब उसकी बहन से जुड़े नवाब मलिक के तार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से लिंक का खुलासा किया है। अब खबर आई है कि NCP अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल के आवास पर एक बड़ी बैठक में हिस्सा लिया है। इस बैठक में मुंबई के पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और CP (लॉ एंड ऑर्डर) वी नांगरे पाटिल को भी तलब किया गया। इसमें आर्यन खान ड्रग्स मामले को लेकर चर्चा की गई। नवाब मलिक ने फिर से खुलासे की धमकी दी है।

देवेंद्र फडणवीस ने एक सलीम पटेल का जिक्र अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया, जिसे आतंकी दाऊद इब्राहिम का करीबी बताया जाता है। वो दाऊद की बहन हसीना पार्कर का ड्राइवर और बॉडीगार्ड हुआ करता था। 2007 में ये दोनों ही गिरफ्तार किए गए थे। जाँच में खुलासा हुआ था कि दाऊद इब्राहिम की सारी संपत्तियों को हसीना के नाम पर किया जा रहा है और इस पूरे मामले में ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ सलीम को बनाया जा रहा था। उसे ‘गोवा पटेल’ के नाम से अंडरवर्ल्ड में जाना जाता था।

जमीन के कब्जे की सारी वारदातों को वो अपने हाथ में लेता था और पूरा करता था। हैदराबाद बम ब्लास्ट मामले के अलावा रंगदारी और धोखाधड़ी के उस पर कई मामले दर्ज हैं। 2010 में तत्कालीन गृह मंत्री आरआर पाटिल के साथ सलीम पटेल की कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं। एक इफ्तार में दोनों बातचीत करते हुए दिखे थे। पाटिल को तब विपक्ष के आरोपों के बाद सफाई देनी पड़ी थी। ये पार्टी 11 सितंबर 2010 को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष नसीम कुरैशी के घर पर हुई थी।

इसी इफ्तार पार्टी में भाजपा के विधायक रहे प्रेम कुमार शर्मा की हत्या का आरोपित मोबिन कुरैशी भी उपस्थित था और उसने पाटिल को गुलदस्ता भेंट किया था। उस पर भी एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वो पेशे से बिल्डर था और अवैध निर्माण के कई नोटिस उसे मिल चुके थे। दिवंगत आरआर पाटिल NCP और कॉन्ग्रेस में रहे थे। वो महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी थे। 26/11 हमले के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन 2009 में उन्हें फिर गृह मंत्री बना दिया गया था।

अब नवाब मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर कहा है कि देवेंद्र फडणवीस ने सब कुछ ‘राई का पहाड़’ बना कर पेश किया है और असली ‘हाइड्रोजन बम’ तो वो अब फोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि फडणवीस के सीएम कार्यकाल में मुंबई हॉस्टेज बनी हुई थी और दुबई में बैठ कर अंडरवर्ल्ड वाले उगाही करते थे। नवाब मलिक ने कहा कि जिस जमीन की बात हो रही, वहाँ उनका परिवार पहले किराएदार था और बाद में मालिकाना हक़ मिला। उन्होंने दावा किया कि वहाँ पहले से उनके गोदाम और दुकानें थीं।

रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने NCP अध्यक्ष शरद पवार के सम्बन्ध में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के बेहद करीबी माने जाने वाले पार्टी सांसद अहमद पटेल के दाऊद से करीबी संबंध थे। कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से अपनी इसी करीबी का फायदा उठाकर अंडरवर्ल्ड डॉन देश से भाग निकलने में कामयाब रहा। उसे पकड़ कर लाने के खुफिया ऑपरेशन भी इसकी भेंट चढ़े। 1993 मुंबई ब्लास्ट के इस गुनहगार को केंद्र सरकार ने हाल ही में यूएपीए कानून के तहत आतंकी घोषित किया है।

सूद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जब दाऊद और मुंबई धमाकों के अन्य आरोपी देश से भागे, तब पवार मुख्यमंत्री थे। उनके मुताबिक धमाकों के बाद दाऊद और उसके गुर्गों के खिलाफ कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने सख्ती नहीं की। इस सबसे संकेत मिलते हैं कि शरद पवार और दाऊद के बीच संबंध थे। उन्होंने कहा था, “यह जगजाहिर है कि शरद पवार के दाऊद इब्राहिम से संबंध थे।” सूद ने जोर देकर कहा था कि आतंकवाद के सरपरस्त मुल्क पाकिस्तान की तारीफ करने के पीछे पवार और दाऊद इब्राहिम के ही संबंध ही हैं। दाऊद के साथ उनका व्यापारिक संबंध भी रहा है।

इसी तरह शरद पवार के एक अन्य करीबी NCP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के इकबाल मिर्ची से संबंधों का खुलासा हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें अवैध वित्तीय लेनदेन के मामले में समन भेजा था। उन्होंने अंडरवर्ल्ड के अपराधी इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेनन के साथ डील की बात स्वीकारी थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रफुल्ल पटेल और मिर्ची की डील को देशद्रोह करार दिया था। उन्होंने शरद पवार और राहुल गाँधी को भी इस मामले में ख़ुद को पाक-साफ़ साबित करने को कहा था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कहा था कि पटेल के दाऊद के साथ क्या सम्बन्ध हैं, वह जाहिर करें।

देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आरोप लगाए

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।
इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।
देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”
उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए?

‘नवाब मलिक की 4 संपत्तियों का दाऊद से लिंक, 20 लाख रूपए में 3 एकड़ जमीन, पैसे मुंबई बम धमाके के आतंकियों को भी मिले’: फडणवीस ने दिखाए सबूत

                          मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से सम्बन्ध होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वो दिवाली के बाद ही कुछ खुलासे करने वाले थे, लेकिन दस्तावेज जमा करने में देर हो गई थी।

उन्होंने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।

इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।

देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”

देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए? भाजपा नेता की मानें तो यह अकेला उदाहरण नहीं है और ऐसी 5 संपत्तियाँ हैं। उन्होंने बड़ा आरोप लगाया कि अंडरवर्ल्ड इनमें से 4 संपत्तियों के लेनदेन में सीधे तौर पर शामिल है।

देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि वो इन सभी करतूतों के सबूत न सिर्फ जाँच एजेंसियों को सौंपेंगे, बल्कि NCP के अध्यक्ष शरद पवार को भी देंगे। उन्होंने आगे बताया कि गोवा का कुर्ला में एलबीएस रूट पर एक कंपाउंड है। जमीन सॉलिडस नाम की कंपनी में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन सलीम पटेल और शाह वली खान द्वारा बेची गई थी और जिस सॉलिडस कंपनी को जमीन आवंटित की गई थी, वह नवाब मलिक के परिवार की कंपनी है। खरीद और बिक्री दस्तावेज पर एक फ़राज़ मलिक के नाम हैं।

आर्यन खान शाहरुख खान का बेटा, फिर मिर्च नवाब मलिक को क्यों लग रही है?

जब भी बॉलीवुड में ड्रग का मुद्दा चर्चा में आता है, लिबरल गैंग एकदम बॉलीवुड के पक्ष में खड़ा हो जाता है, लेकिन एक लम्बे समय से इसी बॉलीवुड में यौन शोषण का मुद्दा #metoo चर्चा में है, कोई नहीं बोलता, क्यों महिला यौन शोषण पर इन लोगों की आवाज़ क्यों नहीं निकलती? और जहाँ तक नवाब मलिक की बात है कि जब समीर के विरुद्ध उनके पास इतने सबूत हैं तो मंत्री होते हुए कार्यवाही क्यों नहीं की? क्यों अब तक चुप्पी साधे हुए थे?
एनसीबी (NCB) ने आर्यन खान को ड्रग मामले में गिरफ्तार किया तो परंपरागत और सोशल मीडिया पर युद्ध सा छिड़ गया। आर्यन खान के समर्थन और एनसीबी के विरोध में कई लोग उठ खड़े हुए। तर्क, कुतर्क और बालसुलभ बातों से मीडिया स्पेस भर गया। गिरफ्तारी के पीछे के कारणों को लेकर लगाए गए कुछ कयास और जारी किए गए कुछ बयानों को पढ़कर लगा जैसे उनका उद्देश्य ही एनसीबी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाना और आम लोगों में भ्रम पैदा करना था। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के खिलाफ माहौल बना कर भ्रम पैदा करना लिबरल इकोसिस्टम के टूलकिट का ऐसा हिस्सा है जिसे बार-बार आजमाया जाता रहा है।

आर्यन के बहाने NCB पर हमला: नवाब मलिक सहित लिबरल गिरोह की सोची-समझी चाल, कानूनी कार्रवाई को दिया राजनीतिक रंग

मुंबई क्रूज ड्रग्स पार्टी केस में एनसीबी ने एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस मुद्दे पर परिवार से ज्यादा महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक को ज्यादा मिर्ची लग रही है। वे शुरू से ही इस मामले में एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को निशाना बना रहे हैं। इसको लेकर आज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है कि आखिर नवाब मलिक किस हैसियत से जांच को लेकर रोज ट्विटर पर सवाल पर सवाल उठा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि असल में नवाब मलिक एनसीबी और समीर वानखड़े को इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि एनसीबी ने मलिक के दामाद को ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया था। उनके दामाद समीर खान को 9 महीने बाद इस साल सितंबर में जमानत पर रिहा किया गया था।

यह बताया गया कि केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी दरअसल आर्यन खान को नहीं बल्कि उनके बहाने शाहरुख खान के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ऐसे बयान के पीछे के कारण तो इसे जारी करने वाले बयानबाजों को ही पता होंगे पर सबकुछ धड़ल्ले से कहा गया। जैसे शाहरुख खान की वर्तमान केंद्र सरकार से कोई दुश्मनी है और सरकार इसी कारण से शाहरुख़ खान को परेशान कर रही है। यह तब जब शाहरुख़ खान की केंद्र सरकार से ही नहीं, भाजपा के साथ भी कभी किसी तरह का सार्वजनिक विवाद नहीं रहा। फिर भी कुछ टीवी न्यूज़ चैनल, उनके संपादक और संवाददाताओं ने अपनी चिर परिचित नीति के तहत एनसीबी की कार्रवाई का खुलकर विरोध और आर्यन खान का समर्थन किया।

आगे चलकर कहा गया कि शाहरुख खान को इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। इस तरह के तर्क हमेशा से अजीब लगते रहे हैं पर समय-समय पर यह दोहरा कर इसे सच बनाने का प्रयास जारी है। कुछ तो अपने कुतर्क मार्ग पर चलकर वहाँ पहुँच गए जहाँ से यह कहते सुने गए कि; चूँकि शाहरुख़ खान सदी के सबसे लोकप्रिय भारतीय हैं इसलिए उनके बेटे के साथ ऐसा व्यवहार न तो कानून सम्मत है और न ही संविधान सम्मत।

भारत का कानून या सरकार शाहरुख़ खान की लोकप्रियता के आधार पर आचरण करें, यह कहना वैसा ही है जैसे यह कहा जाए कि अमिताभ बच्चन के कर्ज बैंकों द्वारा केवल इसलिए माफ़ कर देने चाहिए थे क्योंकि उन्हें सदी का महानायक माना जाता रहा है।

ऐसा लगता है जैसे मीडिया में आर्यन और शाहरुख़ खान के समर्थन में दिए गए बयान और कुतर्क वगैरह का असर होता दिखाई न दिया तो राजनीतिक हस्तक्षेप का सहारा लिया गया। अब महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने इसे ड्रग मामले में की गई सामान्य कानूनी कार्रवाई से आगे ले जाकर खुद और एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के बीच का मामला बना दिया है। नतीजा यह हुआ है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के दिनों से भी नीचे चली गई है। नवाब मलिक को वानखेड़े से चाहे जो समस्या हो पर आर्यन खान मामले में उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप किसी भी तरह से संवैधानिक नहीं है।

वानखेड़े के विरुद्ध वे रोज कोई न कोई ऐसा बयान जारी करते हैं जो लगते तो व्यक्तिगत हमले हैं पर उनका उद्देश्य एनसीबी के साथ-साथ केंद्र सरकार के अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाना जान पड़ता है। ऐसा महाराष्ट्र की वर्तमान सरकार के मंत्री और सत्ताधारी दलों के अन्य नेता पहले भी कर चुके हैं। आज नवाब मलिक जो कर रहे हैं वो केंद्र सरकार के विरुद्ध खड़े होने के अनिल देशमुख के अजेंडे का ही विस्तार है। पूर्व गृहमंत्री देशमुख अपने दिनों में लगभग रोज केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कोई न कोई जाँच का आदेश देते ही रहते थे। यह बात और है कि बाद में उनका और उनके पुलिस अफसरों का क्या बना वह सबके सामने है।

पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय जाँच एजेंसियों के विरुद्ध कुछ राज्य सरकारों ने जिस तरह की राजनीति की है वह कई स्तरों पर संघीय ढाँचे को क्षति पहुँचाने वाली रही है। चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी का अपने राज्य में सीबीआई को न घुसने देने की घोषणा इसी राजनीति का हिस्सा थी। अपने मंत्रियों की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी द्वारा सीबीआई का घेराव इसी वर्ष किया गया। नवाब मलिक आज जो कर रहे हैं वह इसी राजनीति का नवीनतम संस्करण है। उन्हें वानखेड़े से जो भी समस्या है, उसका खुलासा जब होगा तब होगा पर फिलहाल उनके आचरण ने एनसीबी की एक विशुद्ध कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक लड़ाई बना दिया है। यह बात वर्तमान विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार के विरुद्ध शुरू की गई राजनीतिक प्रवृत्ति को पुख्ता ही नहीं करेगी बल्कि अन्य राज्य सरकारों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगी।

मलिक एक मंत्री की हैसियत से यह सब कर रहे हैं पर आश्चर्य यह है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अपने मंत्री के ऐसे आचरण पर प्रतिक्रिया नहीं देते। मुख्यमंत्री ठाकरे की यही चुप्पी अनिल देशमुख की अति सक्रियता के समय भी थी। ठाकरे तो चुप हैं ही पर शरद पवार की चुप्पी और महत्वपूर्ण है। वर्तमान भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेता पिछले लगभग दो वर्षों से चुप होकर अपने दल के नेताओं को निकृष्ट राजनीतिक आचरण करते हुए लगातार देख रहे हैं पर हस्तक्षेप नहीं करते। उनका ऐसा राजनीतिक आचरण महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति पर उनकी लगातार ढीली होती पकड़ का नतीजा है या फिर केंद्र सरकार से अलग-अलग स्तर पर टकराव का, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

महाराष्ट्र : Remdesivir सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस ने किया अरेस्ट

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि रेमडेसिविर सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस परेशान कर रही है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य की पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहाँ के सप्लायर ने बीजेपी नेताओं के अनुरोध पर राज्य को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गए थे। हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह बस स्टॉक की जाँच के लिए निकले थे ताकि कालाबाजारी ना हो।

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

फडणवीस ने बताया कि (फार्मा कंपनी के मालिक से) बात करने पर पता चला कि उन्हें धमकी दी गई है। इस बारे में देवेंद्र फडणवीस ने डीसीपी और एडिशनल सीपी से बात कर उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग की। फडणवीस ने महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में एनसीपी (NCP) कोटे से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) पर महाराष्ट्र में रेमडेसिविर  की मौजूदा स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि नवाब मलिक को सिर्फ कोरी राजनीति करना और नैरेटिव सेट करना आता है, उन्हें राज्य के लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने डीसीपी मंजूनाथ सिंगे को अनुमति पत्र दिखाया और बताया कि रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए उन्होंने बोला है। लेकिन डीसीपी ने कहा कि इससे पहले उन्हें (पुलिस को) सूचित नहीं किया गया था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो भी कुछ राज्य की सरकार पुलिस के साथ मिलकर कर रही है, वो गलत है।

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों को डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें बस पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि एंटी वायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी के इनपुट्स मिले थे।

केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक के बयानों पर भड़के अन्ना हजारे


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन के मुखिया और ज्येष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे एनसीपी पर बिफर पड़े हैं। शरद पवार की पार्टी एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक के बयान से नाखुश अन्ना हजारे ने मलिक के ख़िलाफ़ कानूनी कारवाई की बात कही है 
नवाब मलिक ने अन्ना हजारे पर लगाए गंभीर आरोप
अन्ना हजारे ने लोकपाल और लोकायुक्त कानून के पालन की मांग को लेकर जनवरी 30 से अपने गृहनगर रालेगणसिद्धि में अनशन शुरू किया है। अण्णा के इस आन्दोलन से जुड़ी बातों को लेकर जी मीडिया समूह के मराठी न्यूज चैनल, ‘जी24 तास’ के डिबेट शो रोखठोक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अर्थात एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि अन्ना हजारे पैसे के लिए आंदोलन चलाते हैं
 
2003 में छोड़ना पड़ा था श्रम मंत्री का पद
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि इससे पहले के आंदोलन में उन्हीं से अन्ना हजारे ने वकील की फीस के बहाने पैसे उगाही की कोशिश की थी। मलिक ने अपने बयान के समर्थन में जरूरी सबूत होने का दावा भी किया। बता दें कि 2003 में नवाब मालिक को कांग्रेस-एनसीपी सरकार से बतौर श्रम मंत्री के पद से तब हटना पड़ा था जब अन्ना हजारे ने उन पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था
 
शो के दौरान समाजसेवी विश्वम्भर चौधरी ने और अण्णा के सहयोगी दिलीप अवारी ने मलिक के आरोप को सिरे से ख़ारिज कर दिया। लेकिन, इस बात से आहत हुए अण्णा का गुस्सा जनवरी 31 को फूट पड़ा। अण्णा ने उनसे मिलने आ रहे एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष जयंत पाटिल और विधान परिषद में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे को आधे रास्ते से लौटा दिया। दोनों नेता अण्णा के इलाके में ही आयोजित पार्टी की परिवर्तन रैली को संबोधित करने के बाद रालेगण निकले थे कि उन्हें आधे रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। उधर, रालेगण में गुस्साए अन्ना हजारे ने संवाददाताओं से बातचीत में ऐलान किया की, वे नवाब मलिक की बयानबाज़ी ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दायर करेंगे। उन्होंने खुद पर लगे आरोप ख़ारिज करते हुए कहा की, उनका दामन बेदाग है। जनवरी 31को अन्ना हजारे के अनशन आंदोलन का दूसरा दिन था 
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अन्ना हजारे ने भूमि अधिगृहण अध्यादेश के खिलाफ देेश के किसानों को ढाल बनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी अध्यादेश फि.....

अन्ना  आप भी गांधीवादी हो और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी भी गांधीवाद की ही विरासत पर सत्तानशीं हैं, फिर झगडा किस बात का दोनों गांधीवादी एक साथ मिल जुल कर मामले को हल कर लेते लेकिन आपके आन्दोलन के पीछे जिन ताकतों का हाथ है। उन ताकतों की तरफ या तो आप देख नहीं रहे हैं या देख कर भी अनदेखी कर रहे हैं।
अन्ना जी भ्रष्टाचार तो सिर्फ बहाना है, एन.जी.ओ का मतलब ही भ्रष्टाचार है…
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश  है आपके अनशन के पीछे फोर्ड फाउण्डेशन, ब्लैक ऑथोर फाउण्डेशन सहित दुनिया के तमाम साम्राज्यवादी देशों  से सहायता  लेने वाले गैर-सरकारी संगठन (एन.जी.ओ) हैं और मीडिया अपनी खबरें बेचने का काम कर रहा है इसके अतिरिक्त कुछ नहीं है। भ्रष्टाचार तो सिर्फ बहाना है। एन.जी.ओ का मतलब ही भ्रष्टाचार है और आपके पीछे अधिकांश एन.जी.ओ वाले ही हैं। देश की बहुसंख्यक जनता का लोकपाल या जन लोकपाल से कोई लेना देना नहीं है।
ngo-delhi-anna17 मार्च 2014 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अन्ना की दिल्ली रैली फ्लाॅप हुई थी। उस रैली में भीड़ नहीं थी। कुर्सियां खाली पड़ी थी। अन्ना को जब मालूम हुआ भीड़ नही जमा हुई, अन्ना रामलीला ग्राउंड ही नही पहुंचे। क्योंकि उस रैली को किसी एनजीओ का समर्थन नहीं था।  उस रैली के बाद अन्ना की इतनी हैसियत नहीं थी, जिससे किसी आम आदमी का ऊपर  उठना संभव हो। लेकिन अब कौन सी ऐसी हिम्मत आ गयी कि अन्ना जंतर-मतर पर यह सोचकर आश्वस्त होकर फिर चल दिए कि भीड़ तो आनी ही है, आंदोलन सफल होना ही है। अगर इस बूते अन्ना धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं तो जो रैली 5 अप्रैल 2011 को हुई थी, उसको सफल करने में कौन सी ताकत प्रयत्नशील थी? इसमे सच्चाई भी है, अतिशीघ्र इसके ऊपर से पर्दा हटेगा, यदि मीडिया निष्ठा एवं ईमानदारी से प्रयत्न करें। क्योंकि यूपीए के शासन काल के यदि वो शक्तियां खुलकर सामने आती तो न अन्ना आंदोलन का साहस कर पाते और न ही भीड़ आ पाती। यानि अन्ना के ड्रामे की पोल ही खुल जाती, अन्ना का आंदोलन फ्लाॅप हो जाता, उसके पीछे किसकी ताकत थी? यह प्रश्न तब उठता है जब अन्ना द्वारा दुबारा आंदोलन की घोषणा की जाती है और कांग्रेस के महारथियों की चहल कदमी उसके पक्ष में हो जाती है। समस्त लामबंधियों के साथ कांग्रेस जुगलबंदी भी सामने आ जाती है, एक नही अनेक पहलू है, जिनकी यदि जांच की जाए तो अन्ना और उनके सहयोगी कटघरे में दिखेंगे।
अन्ना  ईमानदार एवं निष्ठावान गांधीवादी?
annaअन्ना यदि ईमानदार एवं निष्ठावान गांधीवादी है, तो राष्ट्र को बताएं कि जिस चार्टर्ड प्लान से अन्ना पुणे से दिल्ली आए, वह किस कम्पनी का था? किसने उनके आने का खर्चा किया? क्या यह सच नहीं कि उस चार्टर्ड प्लेन में अन्ना के साथ कौन बैठा था? वह व्यक्ति उन्हें क्या मंत्रणा पढ़ा रहा था? क्या यह सच नहीं कि अन्ना के उस प्रदर्शन  को सफल बनाने के लिए पलवल से भीड़ मंगवायी गयी? क्या यह सच नहीं कि इस आंदोलन को सफल बनाने मे कांग्रेसी उद्योगपति पानी की तरह पैसा नहीं बहा रहे थे ? क्या यह सच नहीं के एकता परिषद परिषद के पी. वी. राजगोपाल अन्ना के किसान आंदोलन से अलग हो गए हैं? केरल से गांधीवादी कार्यकर्ता गांधी शांति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष एवं एकता परिषद के प्रमुख राजगोपाल ने 2011 में ही कहा था कि अन्ना टीम के निर्णयों के उन्हें नहीं पूछा जाता।
आज अमेरिका दिवालियेपन की ओर  बढ़ रहा है, फ्रांस ऋण ग्रस्त हो रहा है, भारत पूंजीवादी विकास के पथ पर एक शक्तिशाली आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है। साम्राज्यवादी शक्तियां उस पूंजीवादी आर्थिक विकास को रोकने के लिये हर तरह के हथकंडे अपना रही हैं जिसका एक औजार आप भी बन गए हैं। साम्राज्यवादियों के आका अमेरिका को अब लोकतंत्र याद आने लगा है।
भारतीय दौरे पर आए अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्‍केन ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि भारत में इस समय हर ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। देश के लोकतंत्र के लिए यह चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र के लिए यह शुभ  संकेत नहीं है।  उन्होंने कहा कि उनके होटल के सामने हजारों लोग भ्रष्टाचार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। अन्ना  हजारे की गिरफ्तारी पर अमेरिका की तरफ से यह बयान आया था कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और वहां किसी को अनशन करने की इजाजत मिलने में रुकावट नहीं आनी चाहिए।
क्या अमेरिका बताएगा कि किसको अनशन करने की इजाजत होगी किसको नहीं?
क्या अब अमेरिका बताएगा कि किसको अनशन करने की इजाजत होगी किसको नहीं। ईराक से लेकर अफगानिस्तान तक लोकतंत्र का ठेका अमेरिका ने ले रखा है और इन देशों की दशा और दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। लीबिया में नाटो सेनाएं लोकतंत्र के लिये बम्बार्ड कर रही हैं। अधिकांश एशियाई व अफ्रीकी देश  अमेरिकन साम्राज्यवादियों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से गुलाम हैं। आप अनशन अवश्य करिए सिर्फ 21 दिन का नहीं 121 दिन का कर दीजिये, तो भी इस देश की मेहनतकश जनता का आपको समर्थन नहीं मिलने वाला है और न समर्थन। सिर्फ हिन्दुत्ववादी शक्तियों का आपको समर्थन प्राप्त है जो बेनकाब हो चुकी हैं और आप का लोकपाल बिल भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है। आपकी ज़िद है, ज़िद का राजनीति में कोई स्थान नहीं है अगर अमेरिकन इशारे पर यह तय होने लगेगा कि लोकतंत्र है या नहीं तो देश नहीं चलेगा। भारत अमेरिकन साम्राज्यवाद से टक्कर लेने में असमर्थ नहीं है न इस देश की जनता। लेकिन जब बात देश की आन, बान और मर्यादा की होगी तो भारत पीछे भी नहीं रहेगा।
अमेरिका को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि यदि उसने अपने एजेंटों के माध्यम से देश में गड़बड़ी करने की कोशिश की तो दुनिया के नक़्शे पर अमेरिकन साम्राज्यवाद का नामोनिशान भी मिटने में देरी नहीं होगी। यदि अन्ना को वर्तमान गांधी के नाम से सम्बोधित किया जाता है, तो यह सबसे बड़ी भूल होगी। एक आरटीआई को अपवाद को छोड़ उनका कौन सा आंदोलन सफल हुआ ?जनता से बाबा रामदेव आन्दोलन से जनता में प्रज्जवलित हो रही घोटालों एवं विदेशों में जमा काले धन ज्वाला से ध्यान परिवर्तित करने में कांग्रेस के हाथ एक कठपुतली बन एनजीओज की पीठ पर बैठ सुरमा भोपाली बनने का नाटक किया। अन्ना जी अगर साहस है तो एनजीओज को मिल रही विदेशी सहायता के विरुद्ध अनशन करो। क्योंकि  एनजीओज ही भ्रष्टाचार की जननी है।