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वाकई राहुल गाँधी Leader of Opposition नहीं Leader of Propaganda है पुलिस ने किया सचेत ; अगर यही काम किसी और ने किया होता क्या पुलिस गिरफ्तार करने की बजाए सचेत कर छोड़ देती?


लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुई एक घटना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। गाजीपुर पुलिस ने राहुल के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें फैक्ट चेक किया है। पुलिस ने अपील की है कि वे बिना पुष्टि के अफवाहें न फैलाएँ। 

अगर यही गलत बयानी किसी आम नागरिक ने की होती क्या पुलिस उसको अफवाह फ़ैलाने के जुल्म में गिरफ्तार नहीं करती? फिर राहुल को क्यों नहीं? क्या देश में नेताओं और आम नागरिकों के लिए दो कानून हैं? अगर राहुल के प्रोपेगंडा से वहां दंगा हो गया होता क्या तब भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी होती?   

                               साभार: सोशल मीडिया IHateAAPParty, अप्रैल 26, 2026    
दरअसल राहुल गाँधी ने दावा किया था कि गाजीपुर में विश्वकर्मा समुदाय की एक बेटी के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई और परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियाँ दी गईं। राहुल गाँधी ने कहा कि हर बार पीड़ित कमजोर वर्ग से होता है, अपराधियों को संरक्षण मिलता है और सत्ता में बैठे लोग चुप रहते हैं।

राहुल गाँधी ने लिखा, “जिस देश और प्रदेश में माँ-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख माँगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं। मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए आपके राज में बेटियाँ इतनी असुरक्षित क्यों हैं?” गाजीपुर पुलिस ने राहुल गाँधी के आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए खारिज किया है।

गाजीपुर पुलिस ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “कृपया सही तथ्यों से संज्ञानित हों। 15 अप्रैल 2026 की सुबह 5:44 बजे मृतका के पिता ने डायल 112 पर कॉल करके बताया था कि लड़की ने पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली है।” पुलिस ने आगे लिखा, “प्रकरण में मृतका के पिता की तहरीर पर दर्ज FIR में भी रेप का कोई उल्लेख नहीं है। मृतका के पीएम में भी कोई बलात्कार संबंधी तथ्य नहीं आया है।”

पुलिस ने राहुल गाँधी को आगाह करते हुए कहा कि कृपया कोई ऐसी असत्यापित, तथ्यहीन एवं भ्रामक अफवाह ना फैलाएँ जिससे समाज में शांति भंग हो। पुलिस ने यह भी बताया कि मामले में हत्या के एक आरोपित समेत पथराव करने वाले 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आगे की कार्रवाई जारी है।

मालीवाल का दावा- केजरीवाल ने पंजाब में बनाया शीशमहल 2.0, AAP प्रमुख के समर्थन में आया नूपुर शर्मा को विवादित बनाने वाला कुख्यात जेहादी Alt News का जुबैर

 स्वाती मालीवाल (बाएँ), केजरीवाल (बीच में), मुहम्मद जुबैर (दाएँ), (साभार : livetrends, lallantop, Timesnow)
अपनी छोटी सी कार और छोटा सा घर दिखाकर कि मैं इसी कार में चलूंगा, मैं इसी घर में रहूंगा अब वह शीशमहल से कम की बात ही नहीं करता, क्योंकि अब उसे हराम का खाने  की आदत पड़ गई है, उसे भी पता है ऐसा कोई कानून नहीं है कि इस पर कोई कानूनी कार्यवाही हो सके, पहले दिल्ली को लूटा अब पंजाब को यह सब आपिये मिल कर लूट रहे है, दिल्ली में यमुना सफाई के नाम पर अरबों रुपए खा गया उससे हर राज्य में चुनाव लड़ प्रधानमंत्री बनने के सपने पहले दिन से देख रहा हैं। लेकिन इसी की राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल जिसकी दिल्ली के शीश महल में पिटाई की थी, तभी से वह केजरीवाल के लिए सिर दर्द बन बेनकाब कर इसी का नहीं बल्कि पूरी आम आदमी पार्टी का राजनीतिक जीवन समाप्त करने में पीछे नहीं हट रही। केजरीवाल और इसकी पार्टी भूल गयी कि औरत का इन्तेक़ाम बहुत खतरनाक होता है।  

राजनीति और सोशल मीडिया का रिश्ता हमेशा दिलचस्प रहा है। यहाँ बहसें मिनटों में ट्रेंड बन जाती हैं। कुछ ऐसा ही इन दिनों देखने को मिला राज्यसभा सांसद स्वाती मालिवाल और Alt News के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर के बीच, जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कथित ‘शीशमहल 2.0’ को लेकर दोनों के बीच X (पहले ट्विटर) पर जुबानी जंग छिड़ गई। यह विवाद दिल्ली से लेकर पंजाब और चंडीगढ़ की सियासत तक चर्चा का विषय बन गया है।

‘दिल्ली से भी शानदार शीशमहल 2.0’: स्वाति मालीवाल

 विवाद की शुरुआत 31 अक्टूबर को हुई, जब स्वाति मालीवाल ने दावा किया कि दिल्ली का ‘शीशमहल’ खाली करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने अब पंजाब में ‘दिल्ली से भी शानदार शीशमहल’ तैयार करवा लिया है। मालीवाल ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ के सेक्टर-2 में मुख्यमंत्री कोटे की 2 एकड़ जमीन पर बनी एक आलीशान 7-स्टार सरकारी कोठी केजरीवाल को मिल गई है।

स्वाती मालीवाल ने सीधे तौर पर पंजाब सरकार पर एक व्यक्ति (केजरीवाल) की सेवा में लगने का आरोप लगाया। स्वाती मालीवाल ने यह भी कहा कि केजरीवाल अंबाला जाने के लिए इसी घर के सामने से सरकारी हेलीकॉप्टर में बैठे और फिर पंजाब सरकार का प्राइवेट जेट उन्हें पार्टी के काम से गुजरात ले गया। मालीवाल के इन दावों ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया।

दावे झूठे और तस्वीर पुरानी: जुबैर का पलटवार

वहीं, केजरीवाल के बचाव में उतरे खुद को ‘फैक्ट चेकर’ बताने वाले मोहम्मद जुबैर। जुबैर ने मालीवाल के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि जिस बिल्डिंग का स्क्रीनशॉट दिखाया जा रहा है, वह हरियाणा के कृषि मंत्री के दफ्तर के बगल में है।
प्रोपेगेंडा फैलाने वाले फैक्ट चेकर जुबैर ने गूगल इमेजेज़ का हवाला देते हुए कहा कि यह बिल्डिंग अभी नहीं बनी है, बल्कि 2013 से 2024 तक यानी सालों से वहीं मौजूद है। इसके साथ ही, जुबैर ने मालीवाल के 2 एकड़ जमीन के आँकड़े पर भी सवाल उठाकर कहा कि बिल्डिंग के सामने की खाली जमीन अधिकतम 20,000 वर्ग फुट हो सकती है, न कि 2 एकड़।

‘झूठा प्रचार’ और ‘सच का पर्दाफाश’: मालीवाल का जवाबी हमला

फैक्ट चेकर जुबैर के पलटवार के बाद, 1 नवंबर 2025 को स्वाति मालीवाल ने जुबैर को ‘थाकथित फैक्ट चेकर’ कहते हुए जवाबी हमला किया और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के आर्टिक्ल की एक तस्वीर साझा की, जिसमें केजरीवाल के शीशमहल के बारे में लिखा हुआ है।
स्वाती मालीवाल ने लिखा, “अरविंद केजरीवाल जी के चंडीगढ़ के शीश महल पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की ये रिपोर्ट पढ़ें। कोठी को केजरीवाल जी के लिए तैयार करने के लिए अक्टूबर महीने में युद्ध स्तर पर सरकार ने काम करवाया, केजरीवाल जी इस घर में रहते भी हैं और मीटिंग भी लेते हैं। CM का कैंप ऑफिस कोठी नंबर 43 में है। ये आलीशान कोठी नंबर 50 केजरीवाल जी के लिए है।” इन दावों के साथ ही, मालीवाल ने केजरीवाल को खुली चुनौती दी और कहा, “हिम्मत है तो ये बताओ इस शीश महल में कितना खर्च हुआ है। इस घर को एक दिन के लिए जनता और मीडिया के लिए खोलो।”
मालीवाल ने जुबैर पर ओवरटाइम काम करके यह साबित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया कि केजरीवाल द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा आलीशान बंगला ‘कोई रैंडम बिल्डिंग’ है। स्वाती मालीवाल ने जुबैर के ट्वीट को ‘झूठा प्रचार’ यानि फेक प्रोपेगेंडा करार दिया और उसे अपना ट्वीट डिलीट करने और बिना रिसर्च के पोस्ट करने के लिए माफी माँगने को कहा।

स्वाती मालिवाल के और आरोप

स्वाती मालिवाल यहीं नहीं रुकीं। स्वाती मालिवाल यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि चंडीगढ़ में सिर्फ केजरीवाल ही नहीं, बल्कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के लिए भी आलीशान सरकारी बंगले तैयार किए गए हैं। स्वाती मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, “चंडीगढ़ में शीशमहल सिर्फ केजरीवाल जी का नहीं है। मनीष सिसोदिया का बंगला नंबर 960, सेक्टर 39 और सत्येंद्र जैन का बंगला नंबर 926, सेक्टर 39 है। ये सब वही आलीशान कोठियाँ हैं जो अब दिल्ली के नेताओं को पंजाब सरकार ने रहने के लिए दी हैं। सरकारी संपत्ति पर इस तरह कब्जा अपराध है।”

बिना विधायक कैसे मिला केजरीवाल को ‘शीशमहल 2.0’: स्वाती मालीवाल

मालीवाल ने अपने एक बयान में पूछा कि केजरीवाल को यह आलीशान ‘शीशमहल 2.0’ किस हैसियत से दिया गया है, क्योंकि वह दिल्ली में विधायक भी नहीं हैं। स्वाती मालीवाल ने मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस बताए जाने के दावे को झूठ बताते हुए सवाल किया, “अगर यह कैंप ऑफिस है, तो यह जनता के लिए क्यों नहीं खुलता? यह अंदर से बंद क्यों रहता है? और पिछले चार सालों में यहाँ कितनी बैठकें हुई हैं?”
अंत में स्वाती मालीवाल ने इस घर पर हुए खर्च का खुलासा करने और इसे एक दिन के लिए जनता और मीडिया के लिए खोलने की चुनौती दी और दोहराया कि यह आलीशान बंगला अब पंजाब के सुपर सीएम अरविंद केजरीवाल का है।

आखिर क्या है ‘शीशमहल’ विवाद?

‘शीशमहल विवाद’ की जड़ें असल में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दिल्ली स्थित सरकारी आवास (6, फ्लैग स्टाफ रोड) के रेनोवेशन पर हुए भारी-भरकम खर्च से जुड़ी हैं। विपक्ष ने उस समय यह गंभीर आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार ने इस सरकारी आवास के सौंदर्यीकरण और रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि खर्च की, जिसके चलते इस आवास को तंज कसते हुए ‘शीशमहल’ का नाम दिया गया।
यह विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। दिल्ली का वह पुराना आवास खाली होने के बाद, अब पंजाब सरकार द्वारा केजरीवाल को चंडीगढ़ में एक और आलीशान सरकारी बंगला दिए जाने के आरोपों ने एक नए विवाद को जन्म दिया है। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस नए बंगले को ‘शीशमहल 2.0’ का नाम दिया है, और यहीं से जुबानी जंग शुरू हुई है। यह पूरा मामला सिर्फ एक बंगले का नहीं है, बल्कि यह सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है।

जिस सुमैया शेख से ‘रिश्ता’ मोहम्मद जुबैर को नहीं कबूल, AltNews से उसके कितने गहरे संबंध: पोल खुलते ही गाली-गलौज पर उतर गया ‘फैक्टचेकर’

                                                        मोहम्मद जुबैर और सुमैया खान
दुनिया भर में ‘फैक्ट चेक’ का ठेका लेकर दूसरों को ज्ञान बाँटने वाला मोहम्मद जुबैर अब खुद अपने ही झूठ के जाल में फँस गया है। जिसने सालों तक हिंदू संगठनों, पत्रकारों और नेताओं को ‘फेक न्यूज फैलाने वाला’ बताया अब वही जुबैर अपनी ही पूर्व कर्मचारी को लेकर झूठ बोलता पकड़ा गया है। सोशल मीडिया पर लोग उसे आईना दिखा रहे हैं। स्क्रीनशॉट, पुराने ट्वीट और सबूतों के साथ उसका फैक्ट चेक कर रहे हैं।

क्या है सुमैया शेख से जुड़ा विवाद?

 इस विवाद की जड़ छिपी है लद्दाख हिंसा में, लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हिंसा हुई। इसका सूत्रधार बताया गया ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को। इसके बाद पुलिस ने वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया और विदेशी फंडिंग मामले में वांगचुक की NGO का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

विदेशी फंडिंग को लेकर बहस के बीच 27 सितंबर को जुबैर ने एक ट्वीट किया। इसमें पत्रकार आदित्य राज कौल के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट था जिसमें जुुबैर की विदेशी फंडिंग की जाँच करने की बात कही गई थी। इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए जुबैर ने लिखा, “विदेशी फंडिंग से याद आया, उन्हें अभी यह साबित करना है।”

जुबैर के इस ट्वीट पर ‘ऑनली फैक्ट इंडिया’ के फाउंडर और खोजी पत्रकार विजय पटेल ने जवाब दिया। विजय ने लिखा, “कट्टरपंथी जुबैर, मैं तुम्हारी विदेशी फंडिंग साबित कर दूँ। तुम्हारे दो पत्रकारों को अमेरिका स्थित ठाकुर परिवार फाउंडेशन से 50 लाख रुपए मिले थे। अब विक्टिम कार्ड खेलने के लिए तैयार हो जाओ!” इसके साथ विजय ने कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए थे जिसमें सुमैया शेख और सरफरोज सतनी (Sharfaroz Satani) का नाम था।

इसके बाद जुबैर ने अपना कुचक्र रचना शुरू किया। पोल खुलने से खफा जुबैर गाली-गलौज पर उतर आया। उसने विजय के पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, “अबे सस्ते देसी भां**, थोड़ा और रिसर्च कर ले। ये लोग ऑल्ट न्यूज के कर्मचारी नहीं बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थे।”

                                                                        विजय को जुबैर का जवाब

विजय ने इसके बाद ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “ये तुम्हारी वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है। जिसमें सुमैया को एडिटर के तौर पर दिखाया गया है, कॉन्ट्रीब्यूटर नहीं।” इस पर फिर जुबैर ने फिर लिखा कि वह ‘ऑल्ट न्यूज’ की कर्मचारी नहीं थी बल्कि कॉन्ट्रीब्यूटर थी।

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर सुमैया को लेकर क्या लिखा है?

‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया शेख की वेबसाइट में उसे ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक (Founding-Editor) बताया गया है। ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर लिखा है, “डॉ. शेख 2017 से 2021 तक ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ की संस्थापक संपादक रहीं। उनकी मुख्य भूमिका एक न्यूरोसाइंटिस्ट के रूप में हिंसक उग्रवाद और मनोरोग विज्ञान पर शोध करना है।”

                                         ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट पर मौजूद सुमैया की प्रोफाइल

जुबैर के इस दावे को लोगों ने झूठा बताकर उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। विवाद के बाद हमने सुमैया खान की X प्रोफाइल तलाशी तो उसमें कुछ पुराने पोस्ट मिले जिसमें उसने खुद को ‘ऑल्ट न्यूज साइंस’ का संपादक बताया था। यानी लोगों के दावे हवा-हवाई नहीं थे। मार्च 2019 के इस ट्वीट में सुमैया ने लिखा, “मैं भारत स्थित एक फैक्ट चेकिंग साइंस पोर्टल (ऑल्ट न्यूज साइंस) की संपादक हूँ।”

जाहिर है कि किसी संस्थान का ‘फाउंडिग एडिटर’ होना और उस संस्था का कर्मचारी ना होना और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा अगर था तो यह केवल मुखौटा था, इससे ज्यादा कुछ नहीं। अगर जुबैर का दावा सही भी है तो इसकी गंभीरता से जाँच किए जाने की जरूरत है। अब फिर सुमैया को मिली फंडिंग पर लौटते हैं।

सुमैया को मिली फंडिंग

असल में विवाद सुमैया को मिली फंडिंग को लेकर था। विजय ने जुबैर के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “तो क्या कॉन्ट्रीब्यूटर (योगदानकर्ताओं) को वेबसाइट पर सिर्फ 10 से 15 प्रोपेगेंडा लेख लिखने के लिए ₹50 लाख का विदेशी चंदा मिला? अगर वे वेबसाइट के लिए लेख लिखने के लिए विदेशी चंदा लेती भी हैं, तो यह भी गैरकानूनी है। यह कोई छोटी रकम नहीं है।”

जुबैर ने इस पर लिखा, “वो भारतीय नागरिक नहीं है। उसने ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए योगदान दिया है, कर्मचारी नहीं। उसे अपने शोध के लिए फाउंडेशन से अनुदान मिला है। ऑल्ट न्यूज़ को लिखने के लिए नहीं।” जुबैर ने खुद को कूल दिखाने के लिए अपने ट्वीट में जोकर की इमोजी भी चिपका दी।

जब ‘ठाकुर फाउंडेशन’ की वेबसाइट की जाँच करने पर सामने आया कि असल में जुबैर का दावा पूरी तरह झूठ था। वेबसाइट के इम्पैक्ट सेक्शन में संस्था द्वारा जनवरी 2020 में दिए गए धन का जिक्र था। ठाकुर फाउंडेशन ने लिखा है, “हमने न्यूरोसाइंटिस्ट और लेखिका डॉ. सुमैया शेख को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा से संबंधित उनके तथ्य-जांच दावों का समर्थन करने के लिए पुरस्कार दिया।”

                                                             ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

इस वेबसाइट पर जनवरी 2020 के सेक्शन लिंक में सुमैया शेख के कम-से-कम 14 लेखों का जिक्र था और ये सभी ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट के लिए लिखे गए थे। यानी जो दावा जुबैर ने करने की कोशिश की थी वो धराशायी हो गया।

                         ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सुमैया के ‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए लेख

फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज सतनी को भी मार्च 2020 में फंड दिए जाने का जिक्र है। इसमें लिखा है, “हमने वैज्ञानिक और चिकित्सीय गलत सूचनाओं का मुकाबला करने में डॉ. सुमैया शेख के काम में सहायता के लिए शोधकर्ता डॉ. सरफरोज सतनी को एक अवॉर्ड दिया।” इसमें भी 11 लिंक्स का जिक्र किया गया है जिसमें से 10 लिंक्स ‘ऑल्ट न्यूज’ की वेबसाइट की थीं और एक लिंक गूगल शीट का था जो लॉक थी।

                   ठाकुर फाउंडेशन की वेबसाइट पर सरफरोज के ‘आल्ट न्यूज’ के लिए लिखे गए आर्टिकल

भारत विरोधी कार्यों में संलिप्त ठाकुर फाउंडेशन

जुबैर के लिए लेख लिखने वाले पत्रकारों को जिस ठाकुर फाउंडेशन से पैसा मिला है वो खुद भारत को निशाने बनाने को लेकर सवालों में है। इसका कर्ताधर्ता दिनेश ठाकुर है जो खुद को पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट बताता है लेकिन उस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। The DisinfoLab ने दिनेश ठाकुर के काले कारनामों को लेकर एक लंबी चौड़ी रिपोर्ट बनाई है।

‘द प्रोपेगेंड पिल’ नाम से 2024 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है, “ठाकुर एक ऐसे उद्यम का मुखौटा जो कई स्तरों पर निशाना साध रहा है। पहले स्तर पर, यह रैनबैक्सी जैसी व्यक्तिगत कंपनियों को निशाना बनाता है, जिनका अमेरिकी कंपनियों के साथ विवाद चल रहा है। इसी को आधार बनाकर, अगला स्तर भारतीय जेनेरिक दवाओं को निशाना बनाता है, जो आम तौर पर अमेरिकी बड़ी दवा कंपनियों के लिए एक खतरा हैं।”

इसमें ठाकुर को लेकर लिखा गया, “इस पूरे अभियान का अंतिम लक्ष्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाना है। ठाकुर ने ऐसे लोगों और संगठनों को फंड दिया है जो खुले तौर पर भारत-विरोधी एजेंडे पर काम करते हैं, जैसे सुचित्रा विजयन् जिनके प्रोजेक्ट Polis का सोशल मीडिया एक पाकिस्तानी व्यक्ति चलाता है।”

                                       ठाकुर फैमिली फाउंडेशन की फंडिंग (फोटो -The DisinfoLab)

ऑल्ट-न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन का नेक्सस

DisinfoLab की रिपोर्ट में ऑल्ट न्यूज और ठाकुर फाउंडेशन के नेक्सस का भी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “सरफरोज ने 2020 में कोविड-19 की पहली लहर के दौरान करीब 8 लेख लिखे थे। उसके लेखों का विषय मुख्य रूप से कोविड-19 से जुड़े घरेलू नुस्खों और अफवाहों की पड़ताल था। इस काम के लिए सरफरोज को साल 2020-21 के बीच कुल $5907 का भुगतान किया गया।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “सुमैया शेख को भी ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ने काम पर रखा था। उन्होंने कुल 10 लेख लिखे, जिनमें से कुछ डॉ. सतानी के साथ मिलकर लिखे गए थे। इन लेखों के बदले सुमैया शेख को TFF से 2021 में $23,740 और 2022 में $35,260 का भुगतान किया गया।” रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि 2020 के बाद से ठाकुर फैमिली ने व्यक्तियों/पत्रकारों/कार्यकर्ताओं को भारत में धन भेजने के लिए वित्तीय सेवा संस्थानों को काम पर रख लिया था।

                                       ठाकुर फाउंडेशन द्वारा भारतीय पत्रकारों को दिया गया धन

कोविड-19 के दौर में ‘फैक्ट चेक’ की जाँच की माँग

पैसे के बदले आर्टिकल लिखने के आरोपों के बाद अब लोग इसकी जाँच किए जाने की माँग कर रहे हैं। ‘द हॉक आई’ नामक एक यूजर ने लिखा, “क्या यह FCRA का उल्लंघन हो सकता है और हितों का टकराव भी हो सकता है? योगदानकर्ता या कर्मचारी, ऑल्ट न्यूज के दो पूर्व पत्रकारों को कोविड के दौरान कुछ तथ्य-जाँच लेखों के लिए बड़ी दवा कंपनी के पैरवीकार ठाकुर फाउंडेशन से ₹50 लाख का अनुदान मिला। इसकी जाँच होनी चाहिए।”

कथित फैक्ट चेकर जुबैर पर पहले भी फंडिंग को लेकर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। अब इन सवालों के बाद नया विवाद शुरू हो गया है। जुबैर बचने की कितनी भी कोशिश करे लेकिन सत्य कभी तो बाहर आ ही जाता है। अगर विदेशी फंडिंग को लेकर लोगों को संदेह है तो जरूरी है कि इनकी जाँच की जाए और स्थितियाँ स्पष्ट कर दी जाएँ।

झूठों के सरगना राहुल गाँधी ने बिहार में जीप पर चढ़वाकर जिससे कहलवाया ‘वोट चोरी’, वो निकला बड़ा फ्रॉड: चुनाव आयोग ने राजद BLA सुबोध कुमार के हर झूठ की खोली पोल

बिहार के नवादा में वोट अधिकार यात्रा में सुबोध कुमार से वोट चोरी का आरोप लगवाते राहुल गाँधी की तस्वीर (साभार : X_@RahulGandhi)
SIR को लेकर राहुल गाँधी और INDI गठबंधन जो हंगामा कर उपद्रव कर रहे हैं, लेकिन इनका हर प्रोपेगंडा बेनकाब हो रहा है। फिर भी झूठ का पुलंदा लिए राहुल गुमराह कर अपने LoP पद को कलंकित कर रहे हैं। 

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी इस समय बिहार के नवादा में ‘वोट अधिकार यात्रा’ पर निकले हुए है। रैली के दौरान राहुल गाँधी की गाड़ी पर एक शख्स सवार होता है और चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर कहता है कि ‘वोट चोरी’ हुई है और उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

आश्चर्य नहीं कि चुनाव आयोग की फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। चुनाव आयोग ने बताया कि सुबोध कुमार नाम का यह शख्य कोई आम मतदाता नहीं है, बल्कि ये राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं और उसका नाम कभी भी वोटर लिस्ट में था ही नहीं।

चुनाव आयोग पर राहुल गाँधी का ‘नकली ड्रामा’

राहुल गाँधी को तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं। वो हर चुनाव से पहले बच्चों जैसी जिद पर अड़े रहते हैं कि ‘वोट चोरी हो गई’ और हर बार चुनाव आयोग फैक्ट चेक कर उनके झूठ को उजागर करता है, फिर भी वो वही रट लगाते रहते हैं।

दरअसल, अपनी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान नवादा में एक शख्स को मंच पर माइक थमाकर राहुल गाँधी ने कहा, “इनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है, यही लाखों लोगों के साथ हो रहा है।” यह शख्स सुबोध कुमार था, जिसने राहुल गाँधी के रथ पर चढ़ते ही कैमरे के सामने आरोप जड़ा कि उसका नाम वोटर लिस्ट से गायब है।

राहुल गाँधी ने इस पूरे वाकये को रैली से लाइव दिखाया और फिर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलाया। X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “जो सुबोध कुमार जी के साथ हुआ, वही लाखों लोगों के साथ बिहार में हो रहा है। वोट चोरी भारत माता पर आक्रमण है– बिहार की जनता ये होने नहीं देगी।”

सुबोध कुमार नाम के व्यक्ति को मंच पर बुलाना, माइक थमाना और कैमरे के सामने आरोप लगवाना… यह सब पहले से स्क्रिप्टेड था। राहुल गाँधी ने इसे ‘भारत माता पर हमला‘ बताया। लेकिन असल हमला जनता की समझदारी पर किया गया छल था। रंजू देवी के झूठ के बाद अब सुबोध कुमार पर राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ की कहानी हर बार फेल होती है।

फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने आरोपों को किया तार-तार

चुनाव आयोग की विस्तृत जाँच रिपोर्ट के अनुसार, सुबोध कुमार नाम का व्यक्ति कोई आम मतदाता नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का बूथ लेवल एजेंट है। 29 अक्तूबर 2024 को प्रकाशित सूची और फिर 2025 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भी सुबोध कुमार का नाम कभी भी मतदाता सूची में नहीं था। उसके परिवार के कुछ सदस्य सूची में शामिल है, लेकिन खुद उसका नाम कभी दर्ज नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रकाशित विलोपित मतदाताओं की सूची में भी उसका नाम दर्ज नहीं है।

चुनाव आयोग बताता है कि सुबोध कुमार ने ना तो फॉर्म-6 भरा और ना ही किसी प्रकार का घोषणा पत्र (Annexure-D) दिया। जब बीएलओ ने विलोपित मतदाताओं की सूची बूथ पर चिपकाई तब सुबोध वहीं मौजूद था, लेकिन उसने कोई आपत्ति नहीं दर्ज की। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि वह स्वयं हस्ताक्षर कर चुका है, फिर भी मंच पर दावा किया कि उसका नाम हटा दिया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि सुबोध कुमार ने जो आरोप लगाए, वो निराधार एवं असत्य है। यदि वे भविष्य में नियमानुसार फॉर्म-6 एवं घोषणा पत्र प्रस्तुत करेंगे तो उनका नाम जोड़ा जा सकता है।

बार-बार दोहराया गया झूठ

यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह का निराधार आरोप लगाया है। इससे पहले, औरंगाबाद में उन्होंने रंजू देवी नाम की एक महिला का मामला उठाया था, यह दावा करते हुए कि उनका नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। लेकिन बाद में रंजू देवी ने खुद एक वीडियो में बताया कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है और उन्हें गुमराह किया गया था।

अवलोकन करें:-

सोरोस के हाथ बिकाऊ विपक्ष वोट चोरी पर कर रहा उपद्रव; CSDS का ट्वीट, राहुल का वोट चोरी राग और विपक्षी
सोरोस के हाथ बिकाऊ विपक्ष वोट चोरी पर कर रहा उपद्रव; CSDS का ट्वीट, राहुल का वोट चोरी राग और विपक्षी
 

राहुल गाँधी का बार-बार एक ही तरह के निराधार आरोप लगाना, एक बच्चे की तरह रट्टा लगाने जैसा लगता है, जो ‘फैक्ट चेक’ के बाद भी अपनी बात पर अड़े रहते हैं। यह न सिर्फ उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर भी गलत आरोप लगाने का प्रयास करता है।

चीनी और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फैलाई US के साथ ट्रेड बंद करने की खबर, ताकि लोगों में फैल जाए पैनिक: MEA ने खारिज की अफवाहें

                                                                                                     साभार: MEA Fact check
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट की बाढ़ आ गई, जिसमें भारत-अमेरिका के बीच सबकुछ ‘सही’ नहीं होने की बात कही जा रही थी। यही नहीं, दावे ये भी किए जा रहे थे कि अब भारत अमेरिका के साथ कोई संबंध नहीं रखेगा और वो अमेरिका पर पलटवार की तैयारी कर रहा है। भारत अब अमेरिका की ‘शत्रुतापूर्ण आर्थिक नीतियों’ के जवाब में ‘दोगुना’ तक टैरिफ लगा देगा।

भारत-अमेरिका के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने वाले फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट चीन समर्थित या इस्लामी देशों से जुड़े दिखने वाले हैंडल्स से लगातार किए जा रहे थे। ऐसे ही एक हैंडल ‘मिडिल ईस्टर्स अफेयर्स’ की पोस्ट में दावा किया गया कि अगर अमेरिका अपनी ‘होस्टाइल’ नीतियों को नहीं बदलता है, तो भारत सरकार अमेरिका से साथ सभी व्यापारिक समझौतों को रद्द कर सकती है।

इसी तरह से ‘चाइना इन इंग्लिश’ नाम के हैंडल से बाकायदा एक लिस्ट ही जारी कर दी गई, जिसके इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट को लेकर भारत सरकार फैसले लेने वाली है। दावा किया गया कि भारत अमेरिका को देने वाली व्यापार छूटों को खत्म कर देगा।

हालाँकि विदेश मंत्रालय ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने साफ कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। ये भी साफ कर दिया गया है कि भारत सरकार फिलहाल किसी भी जल्दबाजी में नहीं है। वो अमेरिका को दी गई व्यापारिक छूटों को वापस लेने या समीक्षा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 अगस्त से लागू हो चुका है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस को अपनी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ‘डूब जाना चाहिए।’ ट्रंप का यह बयान भारत द्वारा रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के कारण भी आया, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका इससे नाराज है।

इन तनावों के बावजूद भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश आपसी सहमति से लाभकारी व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि वर्चुअल मोड में चर्चा चल रही है और 24 अगस्त को अमेरिकी व्यापार वार्ता टीम नई दिल्ली आएगी। इस दौरे में छठे दौर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने पर जोर रहेगा।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने का आह्वान किया है, ताकि भारतीय उत्पादों को बढ़ावा मिले। वहीं, विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत खबरें, जैसे कि भारत का ‘कोई सम्मान नहीं तो कोई छूट नहीं’ जैसा बयान, पूरी तरह बेबुनियाद हैं। सरकार का ध्यान व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर है, न कि उन्हें तोड़ने पर।

चुनाव आयोग ने राहुल को बेनकाब करते कहा- आधारहीन और झूठी कहानियाँ न गढ़ें, कर्नाटक चुनाव में लगाया था गड़बड़ी का आरोप; LoP राहुल को अपने पद के सम्मान की चिंता नहीं


चुनाव आयोग ने गुरुवार (24 जुलाई 2025) को कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के आरोप को निराधार बताया है। दरअसल राहुल गाँधी ने कर्नाटक में मतदाता सूची में गड़बड़ियों का चुनाव आयोग पर इल्जाम लगाते हुए धमकी दी थी।

चुनाव आयोग के साथ PIB  फैक्ट चेक ने भी तीखा पलटवार करते हुए कहा कि है उन्हें आधारहीन और झूठे आरोप लगाने से बचना चाहिए। आयोग का कहना है कि कर्नाटक लोकसभा चुनाव 2024 की जिस मतदाता सूची को लेकर पार्टी गड़बड़ी के आरोप लगा रही है, उस पर लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 24 के तहत मिले अधिकारों को उस समय इस्तेमाल क्यों नहीं किया? कांग्रेस के उम्मीदवारों को मतदाता सूची को गड़बड़ियों को लेकर जिला और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील करनी चाहिए थी, क्योंकि यह एक वैध कानूनी उपाय था।

आयोग ने तथ्य रखते हुए स्पष्ट किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया को लेकर दायर 10 चुनाव याचिकाओं में से एक भी चुनाव याचिका किसी भी हारे हुए कांग्रेस उम्मीदवार द्वारा दायर नहीं की गई, जबकि यह RP अधिनियम 1951 की धारा 80 के तहत उपलब्ध एक कानूनी उपाय था।

रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गाँधी ने कहा था कि कर्नाटक के एक चुनाव क्षेत्र में चुनाव आयोग ने धोखाधड़ी की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा था, “चुनाव आयोग गलतफहमी में न रहे, वोट चोरी करने के आपके हथकंडों के 100 प्रतिशत पुख्ता सुबूत हैं हमारे पास। हम उन्हें सामने भी लाएँगे और आप इसके अंजाम से बच नहीं पाएँगे। लोकतंत्र और संविधान को बर्बाद करने की कोशिश करने वाले बक्शे नहीं जाएँगे।”

इसी बयान का फैक्ट आयोग द्वारा किया गया है।

कर्नाटक : सुधीर चौधरी ने पूछा ‘सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए क्यों’ तो दर्ज हुई FIR: मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी धमकी, मोहम्मद ज़ुबैर की स्व-घोषित ‘फैक्ट चेक’ ने किया गुमराह

                                     प्रियांक खरगे, सुधीर चौधरी और फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार एक नए विवाद में फँस गई है। इसकी शुरुआत 8 सितंबर 2023 को हुई, जब भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अखबार में छपे विज्ञापन की कटिंग शेयर की। इस विज्ञापन में कर्नाटक सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजना के बारे में जानकारी दी गई थी।

इस विज्ञापन को देखकर ये लगता है कि इसे सरकार ने नहीं, बल्कि एआर-रहीम ट्रस्ट नाम के किसी निजी संगठन की ओर से दिया गया था। इसे कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम लिमिटेड की ओर से जारी किया गया है। इस विज्ञापन को लेकर ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा साझा किए गए विज्ञापन में बताया गया है कि कर्नाटक सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों को टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। बता दें कि स्वावलंबी सारथी योजना पिछले महीने कर्नाटक सरकार के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमीर अहमद खान ने शुरू की थी।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से गैर-हिंदुओं के लिए है। यहाँ तक ​​कि आर्थिक रूप से गरीब हिंदू समुदायों को भी इससे बाहर रखा गया है। मंत्री ने इसे खुलेआम भेदभाव और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया है।

चंद्रशेखर ने कहा कि इसी पार्टी के नेता विदेश जाकर देश के संविधान के खतरे में होने की बात करते हैं। उन्होंने इसे ‘राज्य प्रायोजित धर्मांतरण प्रलोभन’ कहा। उन्होंने इस योजना को ‘कर्नाटक में राहुल गाँधी की कांग्रेस द्वारा कुछ समुदायों को रिश्वत देने की बेशर्म नीति और तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया।

                                                   एआर-रहीम ट्रस्ट द्वारा दिया गया विज्ञापन

चन्द्रशेखर ने कहा, “सभी कन्नडिगाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करके एक समुदाय को बेशर्मी से रिश्वत देकर भेदभाव और संविधान की धारा 14 का उल्लंघन किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए राज्य-प्रायोजित प्रलोभन है ये। यह यूपीए/I.N.D.I गठबंधन के वंशवादियों की तुष्टिकरण और भ्रष्ट राजनीति है।”

8 सितंबर को ही AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने राजीव चंद्रशेखर और तेजस्वी सूर्या की पोस्ट का ‘फैक्ट चेक’ करने की कोशिश की। यहाँ ध्यान रखना जरूरी है कि AltNews और मोहम्मद जुबैर ऑफिशियली खबरों के ‘फैक्ट चेक’ के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी कर रही है। यह जानकारी कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे दे चुके हैं।

मोहम्मद जुबैर ने राजीव चन्द्रशेखर और तेजस्वी सूर्या के पोस्ट का फैक्ट चेक करने के चक्कर में कुछ दावे भी किए, जिसमें-

1-जुबैर ने दावा किया कि दोनों नेता इस योजना का सांप्रदायिकरण कर रहे हैं और यह योजना एससी/एसटी के लिए भी उपलब्ध है।
2- इस योजना में SC/ST को 75% या अधिकतम 4 लाख तक की सब्सिडी राशि मिल सकती है।
3- अल्पसंख्यक 50% या अधिकतम 3 लाख तक की सब्सिडी राशि के लिए पात्र हैं।
3- भाजपा के तहत भी ऐसी ही योजना थी, इसलिए चंद्रशेखर और सूर्या गलत सूचना फैला रहे थे।

चूँकि जुबैर को अपने हिसाब से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और अपना एजेंडा चलाने की पुरानी आदत है, उसने इस मामले में भी ऐसा ही किया। उसने अपनी बात साबित करने के लिए 2 स्क्रीनशॉट्स शेयर किए। जुबैर ने ‘डिस्ट्रिक्टइंफो‘ वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स को आधिकारिक जानकारी के तौर पर शेयर किया, जबकि वो वेबसाइट निजी है, जिसका सरकार से कोई लेना देना ही नहीं है।

डिस्ट्रिक्ट इंफो वेबसाइट का अबाउट अस सेक्शन, जो ये बताता है कि वेबसाइट थर्ड पार्टी से मिली जानकारियाँ साझा करती है।

जुबैर ने जिस आर्टिकल का इस्तेमाल अपने फैक्ट चेक में किया, वो 19 अगस्त 2023 को पब्लिश हुआ था, कर्नाटक सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद। ये अलग बात है कि उस दिन उस वेबसाइट के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एयर फ्रायर और इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के विज्ञापन वाले अमेजन के लिंक पोस्ट कर रहा था। उस वेबसाइट के सोशल मीडिया पर महिलाओं के कपड़े और जूतों से जुड़े लिंक भी पोस्ट किए जाते हैं।

                        डिस्ट्रिक्ट्स इंफो के सोशल मीडिया हैंडल पर अमेजन के सामानों की मार्केटिंग

वैसे, ये वेबसाइट देखने में बिल्कुल साफ है कि वो कोई भरोसेमंद वेबसाइट नहीं है, जिसका इस्तेमाल फैक्ट चेक में किया जाए। हालाँकि जो जानकारी वेबसाइट पर है, वो पूरी तरह से गलत भी नहीं है।

कांग्रेस सरकार के बजट के अनुसार, वास्तव में इस योजना की घोषणा सरकार ने की थी। हालाँकि महत्वपूर्ण बात ये है कि उक्त वेबसाइट और मोहम्मद जुबैर ने शायद जानबूझकर पूरी बात नहीं रखी और पाठकों को ये पता करने के लिए कि क्या सही है, उन्हीं पर छोड़ दिया।

जुबैर ने इन बातों को पाठकों के विवेक पर छोड़ा

जब कोई व्यक्ति ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ के बारे में सर्च करता है, तो वह केएमडी – कर्नाटक अल्पसंख्यक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुँचता है। इस सरकारी वेबसाइट पर भी इस योजना के बारे में जानकारी दी गई है कि ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है।
                            कर्नाटक सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना के बारे में जानकारी
                                                योजना का लाभ पाने की शर्तों की जानकारी
वेबसाइट स्पष्ट रूप से कहती है कि इस योजना के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक को धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए। यह योजना अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी है, और चल रही है, जैसा कि “ऑनलाइन आवेदन करें” बटन से साफ पता चला है।
अब, कोई यह तर्क दे सकता है कि चूँकि यह अल्पसंख्यक विभाग की वेबसाइट है, इसलिए यह केवल अल्पसंख्यकों से जुड़ी जानकारी ही देगी। ऐसे में हमने समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट को भी देखा और ये जानने की कोशिश की कि क्या ये योजना एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए भी चल रही है, जैसा कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में घोषणा की थी?
उस वेबसाइट पर ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ नाम की कोई योजना नहीं दिखी और न ही उसके लिए आवेदन करने की कोई जगह मिली। जब ऑपइंडिया ने समाज कल्याण विभाग से बात की तो हमें साफ तौर पर बताया गया है कि इस योजना का लाभ सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही मिलेगा। एससी/एसटी समुदाय के लोगों को नहीं।
हालाँकि, यह सच है कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदाय के लिए इस योजना की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक की जानकारी से ऐसा लगता है कि यह योजना अभी तक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई है, एससी/एसटी समुदाय के लिए नहीं। यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय इस योजना का लाभ तभी प्राप्त कर सकता है, जब इस बारे में सरकार अधिसूचना जारी करे। फिलहाल तो ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है।
इस योजना को लेकर आजतक के पत्रकार सुधीर चौधरी ने 12 सितंबर को एक शो किया था। इस शो में उन्होंने अंबेडकर विकास निगम के प्रमुख पी नागेश के हवाले से बताया था कि यह योजना अभी एससी/एसटी समुदाय के लिए लागू नहीं है। हालाँकि इसे इन समुदायों के लिए शुरू करने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने पुष्टि की थी कि ये योजना अभी तक एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए अधिसूचित नहीं की गई है।
जब मोहम्मद जुबैर अमेजन के विज्ञापनों को शेयर करने वाली एक ‘ऐरी-गैरी’ वेबसाइट पर भरोसा कर रहे था, तब भी इस बात की पूरी जानकारी मौजूद थी कि कर्नाटक सरकार ने इस योजना की घोषणा तो अल्पसंख्यकों के साथ ही एससी/एसटी वर्ग के लिए भी की थी। इसे लागू भी कर दिया गया, लेकिन सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए। एससी/एसटी के लिए इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इस बीच एक अन्य ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने एक और भ्रामक दावा किया। जुबैर ने ट्वीट किया, ”बीजेपी सरकार में भी ऐसी ही एक योजना थी। यहाँ अल्पसंख्यक विभाग @DOMGOK के कुछ पुराने ट्वीट हैं, ‘प्रत्येक लाभार्थी को वाहन की कीमत 33% सब्सिडी मिलेगी, जिसमें ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी खरीदने के लिए अधिकतम 2.5 लाख रुपये दिए जाएँगे’।”
                                                                  जुबैर का ट्वीट
ज़ुबैर ने फिर से चालाकी से सेलेक्टिव जानकारी साझा की, ताकि इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट न हो।
हालाँकि, यह भी सच है कि ऐसी ही एक योजना भाजपा सरकार में भी चल रही थी। ये जानकारी कर्नाटक के अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 2021-2022 में दी गई थी, जिसमें बताया गया है कि 31 मार्च 2022 तक वाहनों की खरीद के लिए कितनी सब्सिडी दी गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 1,333 वाहनों पर सब्सिडी दी गई थी।
                                                   सरकारी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी
हालाँकि, जुबैर द्वारा डाले गए स्क्रीनशॉट भ्रम पैदा करने वाले थे, क्योंकि भाजपा सरकार ने 2022 में इस योजना को होल्ड (रोक) पर रख दिया था।
जुबैर ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए, उनमें से एक कर्नाटक के अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का जवाब था। ये जवाब 17 अक्टूबर 2022 को दिया गया था। इसमें विभाग ने लिखा था, “प्रत्येक लाभार्थी को वाहन मूल्य पर 33% सब्सिडी मिलेगी, अधिकतम रु 2.5 लाख रुपए। अगर ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी बैंक लोन पर खरीदा जा रहा है तो उसके लिए बैंक का पत्र भी जमा करना होगा। (1/1)”
कोई भी व्यक्ति ध्यान देगा कि अगर किसी ट्वीट में 1/1 लिखा है, तो इसका मतलब है कि जवाब अभी अधूरा है और वो दूसरे ट्वीट में आ रहा है। कम से कम असली फैक्ट चेकर तो इस बात पर ध्यान देगा ही। चूँकि अगले ट्वीट में पूरा मामला साफ हो जाता, इसलिए जुबैर ने सिर्फ अपने काम का अधूरा ट्वीट ही लगाया।
मोहम्मद जुबैर ने जिस दूसरे ट्वीट को ‘जानबूझकर’ छोड़ा, उसमें साफ लिखा है कि ये योजना अब बंद हो चुकी है। ये सभी ट्वीट्स अब भी विभाग के सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं।
जुबैर ने दिसंबर 2022 का एक और स्क्रीनशॉट शेयर किया था। ये भी दो हिस्सों में है, लेकिन उसने जानबूझकर पहला हिस्सा ही शेयर किया है।
इस ट्वीट में भी साफ लिखा है कि ये योजना लागू की जाएगी। इसका जवाब दिसंबर माह में दिया गया है। इस बात से ये साफ है कि ट्वीट के समय ये योजना बंद थी, चल नहीं रही थी।
अब ये सब कुछ पूरी तरह से साफ है कि किस तरह से जुबैर ने KMDC के जवाबी ट्वीट का महज एक हिस्सा ही शेयर किया, दूसरे को छोड़ दिया (जिसमें साफ साफ लिखा है कि ये योजना उस समय बंद थी)। लोग गुमराह ही रहें, इसलिए उसने एक और स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया।
इन सब तथ्यों के आधार पर ये बात साफ है कि जब मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आई, तब ये योजना बंद थी। ऐसे में ये कांग्रेस सरकार की ही योजना है, जिसके बारे में सरकार ने पूरी योजना बनाई और बजट में इसकी घोषणा की। बजट में घोषणा के समय ये कहा गया था कि इस योजना का लाभ एससी/एसटी समुदाय को भी मिलेगा, लेकिन अब तक ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही चलाई जा रही है।
ऐसे में ये भी संभव है कि कर्नाटक सरकार की अन्य योजनाएँ जो एससी/एसटी/ओबीसी के लिए भी चल रही हैं, उनका भी हश्र ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ की तरह ही हुआ हो।
उदाहरण के लिए, कर्नाटक सरकार की एक और योजना है, जिसे ऐरावत योजना कहा जाता है। इस योजना के तहत एससी/एसटी समुदाय के ग्रामीण युवाओं को सब्सिडी वाली गाड़ियाँ पाने की सुविधा देने के लिए ओला और उबेर के साथ पार्टनरशिप की गई है। हालाँकि, ये योजना स्वावलंबी सारथी योजना के बराबर नहीं है, जो सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए थी, बल्कि ये योजना एससी/एसडी समुदाय के ग्रामीण युवाओं के लिए है।

आजतक के सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR और जुबैर का फेक न्यूज

जब जुबैर ने भ्रामक जानकारी फैलाना शुरू कर दिया तो प्रियांक खड़गे, जो जुबैर को ‘चीफ’ कहना पसंद करते हैं, ने सुधीर चौधरी को कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद उनके के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के लिए एफआईआर दर्ज करा दी गई।
सुधीर चौधरी ने एक शो किया था, जिसमें उन्होंने इस योजना के बारे में बताया था कि कैसे इसे हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही हिंदू विरोधी बयान देने वाले प्रियांक खड़गे ने ट्वीट किया कि सुधीर गलत सूचना फैला रहे हैं और वह एंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
रात 11:36 बजे मोहम्मद जुबैर ने सबसे पहले ट्वीट किया था कि सुधीर चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

इन सबके बीच, सुधीर चौधरी ने एक और शो किया, जिसमें उन्होंने ये बातें साफ कीं।

1-बजट में कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि यह योजना अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदायों के लिए उपलब्ध होगी
2-अखबार और कांग्रेस सरकार की अपनी वेबसाइट के विज्ञापन से साबित होता है कि इस योजना के लिए पात्रता की आवश्यकता यह है कि व्यक्ति अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए।
3-एससी/एसटी समुदाय के लिए योजना की पात्रता अभी तक अधिसूचित नहीं की गई है।
4-इस बात की पुष्टि अंबेडकर विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने आजतक से की है।
5-साफ है कि यह योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
यहाँ ये ध्यान देने लायक बात है कि असल चीजों को अभी तक मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट नहीं किया है, जबकि सुधीर चौधरी जब शो कर रहे थे, तब यही जुबैर लगातार ट्वीट पर ट्वीट कर रहा था।
स्व-घोषित फैक्ट चेकर जुबैर ने इन मामले में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं किया। सच्चाई ये है कि उसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इस पूरे मामले में आगे चलकर यह संभव है कि कर्नाटक सरकार अपनी घोषणा पर अमल करते हुए एससी/एसटी वर्ग के लिए भी योजना को अधिसूचित कर दे, लेकिन अभी तथ्य यही है कि ये योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
साफ है कि इस मामले में सुधीर चौधरी हों या अन्य मीडिया हाउस, उन्होंने कोई फेक न्यूज नहीं फैलाया है। फिर भी कर्नाटक सरकार ने सच्चाई को स्वीकार करने की जगह उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की है।
चूँकि कर्नाटक सरकार की ये योजना अगर एससी/एसटी वर्ग के लिए लागू होती तो वो इसका नोटिफिकेशन सार्वजनिक करते, न कि जुबैर के फर्जी फैक्ट चेक की आड़ में सुधीर चौधरी पर एफआईआर दर्ज करते।
ऐसे में साफ है कि सुधीर चौधरी पर एफआईआर सिर्फ इसलिए की गई है कि अगर कोई सच्चाई बताने का प्रयास करेगा और इससे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की असलियत बाहर आएगी, तो वो बच नहीं पाएगा। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उसे प्रताड़ित किया जाएगा।
मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।(साभार)