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कश्मीर घाटी पर हमले के लिए पाक के जैश-ए-मोहम्मद ने 400 आतंकियों को अफगान कैंप में किया प्रशिक्षित

जैश 400 आतंकी कश्मीर
                                                                                           प्रतीकात्मक 

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ विश्व कोरोना से लड़ रहा है, लेकिन पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने में मस्त है। पाकिस्तान को न अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने का होश है और न ही फ़ैल रहे कोरोना का। विपरीत इसके अपनी जनता का कोरोना से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां तेज करने पर, अगर भारत द्वारा पुनः कोई स्ट्राइक करने पर मीडिया से लेकर सियासत तक उसी स्ट्राइक की माला जपते नज़र आएंगे। एक डर जो जनता में पनप रहा है कि कहीं अबकी बार भारत की ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर ही स्ट्राइक कर अपने में न मिला ले।   
दूसरी ओर, पाकिस्तान में यह भी चर्चा हो रही है कि आतंकवादी हरकतों पर खर्च करने के लिए सरकार के पास धन कहाँ से आ रहा है? यदि सरकार के पास इन गतिविधियों के लिए पर्याप्त धन है, फिर जनहित की ओर क्यों नहीं ध्यान दिया जा रहा? या फिर आतंकवादी हरकतों को दुबारा शुरू कर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्टेड होने का मन बना जा चुका है?   
जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने वाले आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने अफगानिस्तान में अपने प्रशिक्षण शिविरों में 400 आतंकवादियों को तैयार किया है, जिन्हें कश्मीर घाटी में भेजे जाने से पहले तालिबान यूनिट्स के साथ तैनात किया गया है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया कि पिछले महीने 12 अप्रैल को जब अफगानिस्तान फोर्स आतंक रोधी मिशन पर थी, तो गिरफ्तार किए गए आतंकियों से प्रारंभिक पूछताछ में उन्हें एक आतंकी कैंप के बारे में पता चला था। हालाँकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वहाँ पर आधा दर्जन से अधिक आतंकी कैंप थे।
दिल्ली और काबुल में आतंकवाद विरोधी अधिकारियों ने बताया कि तालिबान के अफ़गानिस्तान सुलह ज़ाल्मे ख़ालिज़ाद के लिए अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि के साथ 29 फरवरी के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने इन शिविरों में 400 लड़ाकों को तैयार किया था।
काबुल में एक आतंक रोधी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त से जलालाबाद के बीच और कंधार प्रांत में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में भी जैश कैडर को तालिबान इकाइयों के साथ तैनात किया गया है।”
अधिकारियों ने कहा कि तालिबान और जैश-ए-मोहम्मद के बीच आपसी तालमेल है। कुछ खुफिया रिपोर्टों में कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा ने जैश शिविरों में प्रशिक्षण के लिए अपने कैडर भी भेजे हैं। जिन्हें पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा सहायता दिया जा रहा है।
अफगान फोर्स द्वारा गिरफ्तार किए गए जैश के एक ऑपरेटिव्स में से एक जरार ने पूछताछ के दौरान बताया कि फोर्स द्वारा तहस-नहस किए गए ट्रेनिंग बेस को ‘पाकिस्तान के सैन्य कर्मियों द्वारा प्रशिक्षित, सुसज्जित और समर्थित बनाया जा रहा था।’ उनमें से कई ने बताया कि पाकिस्तानी सेना की तरफ से उन्हें हर तरह की मदद की जाती है, ताकि वो बच सके। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के निवासी के रूप में पहचाने जाने वाले ज़ेरार उनमें से एक था। उसे 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था।
मौलाना मसूद अजहर द्वारा स्थापित आतंकवादी समूह को उसके छोटे भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर द्वारा चलाया जा रहा है। काबुल में राजनयिकों का कहना है कि मसूद अजहर के बड़े भाई, इब्राहिम अजहर को मध्य अफगानिस्तान में गजनी शहर में देखा गया है, संभवत: तालिबान के साथ संबंधों को गहरा करने के प्रयास के संदर्भ में वो वहाँ गए हों।
पिछले दिनों NIA ने आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के ओवर ग्राउंड वर्कर शाकिर बशीर मागरे को कश्मीर से गिरफ्तार किया था। शाकिर ने पुलवामा के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को शरण और हमले के लिए अन्य सहायता उपलब्ध कराई थी।
आदिल अहमद डार ही वो आतंकी था जो कार में सवार होकर सुरक्षाबल के काफिले में जा घुसा था। शाकिर ने खुलासा किया कि उसने आदिल अहमद डार और एक और अन्य सहयोगी मोहम्मद उमर फारूक को साल 2018 के आखिरी से फरवरी में किए हमले तक अपने घर में शरण दी थी। शाकिर ने कार में रखे विस्फोटक को तैयार किया। लेथपोरा स्थित दुकान से वह सीआरपीएफ काफिले की मूवमेंट पर नजर रखता था।

जहां IAF ने गिराए बम, वहां जाने से मीडिया को रोक रहा पाकिस्तान, क्यों?

air strikes
एक तरफ भारत में मोदी विरोधी पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों की लाशें देखने के लिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान किसी मीडिया को उस स्थान तक जाने से रोक रहा है, ताकि एयर स्ट्राइक से हुए नुकसान की सच्चाई सार्वजनिक न हो सके।  
भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एक पहाड़ी पर जिस मदरसे पर एयर स्ट्राइक की थी, वहां अभी भी मीडिया को जाने से रोका जा रहा है। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने गुरुवार को एक मीडिया एजेंसी की टीम को उस मदरसे और आसपास की इमारतों के एक समूह पर चढ़ाई करने से रोक दिया, जहां पिछले सप्ताह भारतीय युद्धक विमानों ने हवाई हमले किए थे।
पिछले 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब रॉयटर्स के पत्रकारों ने इस क्षेत्र का दौरा किया। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने पहुंच से इनकार करने के लिए सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया। इस्लामाबाद में सेना की प्रेस विंग ने दो बार मौसम और संगठनात्मक कारणों से साइट पर जाने का प्लान बदल दिया। एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा के कारण कुछ दिनों के लिए कोई यात्रा संभव नहीं होगी।
अवलोकन करें:-

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पुलवामा में सीआरपीएफ कर्मियों की शहादत पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं हो....

26 फरवरी को वायु सेना की कार्रवाई के बाद से ही पाकिस्तान कह रहा है कि वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है और किसी की भी जान नहीं गई है। जिस दिन भारत ने ये कार्रवाई की, उस दिन विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि इसमें कथित प्रशिक्षण शिविर में बहुत बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों के समूहों को मार डाला।
रॉयटर्स की टीम मदरसे को 100 मीटर दूर से देख सकती थी। जिस इमारत को पत्रकार देखे सकते है, वह पेड़ों से घिरी हुई है, और इसमें क्षति या गतिविधि के कोई संकेत नहीं दिख रहे। यह देखते हुए मूल्यांकन बहुत सीमित है।