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बहुत दिन हो गए हिंदुओं का कत्लेआम किए’: TV पर ‘दुआ’ माँगते पाकिस्तानी का पुराना Video वायरल

जैद हामिद (तस्वीर साभार: पाकिस्तान टुडे)
भारत में राजनीतिक समूह जो एक हिंदू तालिबान के बड़े खतरे की चेतावनी देकर चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश करते हैं, असली तालिबान की आलोचना करने में विफल रहते हैं क्योंकि यह अफगानिस्तान में एक बार फिर अपने दमनकारी शासन को लागू करता है। उनकी आवाज को किस चीज ने बंद कर दिया है?

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटने के बाद कथिततौर पर पाकिस्तानी सहयोग पाकर तालिबान ने एक दफा फिर वहाँ अपना दबदबा कायम कर लिया है। तालिबानी लड़ाकों द्वारा काबुल को कब्जे में लेने के बाद वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्ला सालेह ने अपने कुछ करीबियों के साथ देश को छोड़ दिया है। वहीं तालिबानी नेता मुल्ला बरादर का कहना है कि उन्होंने खुद नहीं सोचा था कि इतनी आसानी से उन्हें जीत मिल जाएगी।

पिछले दिनों एक रिपोर्ट में सामने आया था कि तालिबानियों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है, बिन उनके ये लोग कुछ नहीं कर सकते। हालाँकि, अब एक ऐसी वीडियो सामने आई है जिससे साफ हो जाता है कि पाकिस्तानी किस हद तक इंतजार में थे कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटे और वह वहाँ हिंदुओं के कत्लेआम को अंजाम दें।

विपरीत इसके वोट और कुर्सी के भूखे भारतीय नेता और पार्टियां पाकिस्तान की चापलूसी करते रहते हैं, इन बेशर्मों की पाकिस्तान की हिन्दुओं के प्रति हिंसक मानसिकता को देखते हुए भी आंखें नहीं खुलती, कसूरवार हिन्दू भी है जो पाकिस्तानपरस्त नेताओं की चमचागिरी करता रहता है। 

यह वीडियो पाकिस्तानी बुद्धिजीवी जैद हामिद का है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि जैद किस तरह ऑन टीवी हिंदुओं के लिए जहर उगल रहे हैं और उनके नरसंहार की बात कर रहे हैं। इसमें वह कहते है,

“मैं अल्लाह से दुआ कर रहा हूँ कि अमेरिकन वहाँ से निकलें और इंडियन्स को वहाँ छोड़कर जाएँ। बहुत अरसा हो गया है कि हमने अफगानिस्तान में हिंदुओं का कत्लेआम नहीं किया। आम तौर पर ये हमेशा ही हुआ करता था, जिस वजह से अफगानिस्तान के पहाड़ों का नाम हिंदु कुश रखा गया। हिंदुओं को कत्ल करने वाली जगह। वो जगह जो हिंदुओं को कत्ल करती है। तारीखी तौर पर जब भी हिंदू अफगानिस्तान में दाखिल हुए हैं तो उन्हें जबां किया गया है। हम दुआ कर रहे हैं अल्लाह से अमेरिकन वहाँ से जाएँ और बनिए को छोड़ कर जाएँ।”

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये वीडियो कब की है, लेकिन ऐसी ही जानकारी रेडिट पर 8 वर्ष पहले पब्लिश हुई थी। डिस्कशन को देख अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तान में हिंदुओं के नरसंहार की बातें टीवी के डिबेट का टॉपिक हैं। ऐसे में किसी को क्या हैरानी होगी, जब वो जानेगा कि पाकिस्तान में आए दिन हिंदुओं पर अत्याचार होते हैं, उन्हें मारा जाता है, उनकी बहू-बेटियों को किडनैप कर इस्लाम कबूल करवा दिया जाता है। इसके अलावा एक 8 साल का हिंदू बच्चा भी वहाँ ईशनिंदा का आरोपित बनने के बाद मौत का हकदार करार दिया जाता है।


नरेन्द्र मोदी के पुनः प्रधानमन्त्री बनने पर पाकिस्तान मीडिया बेचैन


Related imageआर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार   
भारत में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का प्रचंड बहुमत से पुनः वापसी से पाकिस्तान में खलबली मच रही है।भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत इन दिनों हर तरफ चर्चा में हैं। इस पर भारत में तो लगातार बात हो ही रही है लेकिन पाकिस्तान मीडिया में भी पीएम मोदी छाए हुए हैं। 
पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भले ही प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत की बधाई दी हो लेकिन वहां की मीडिया की मानसिकता अब भी बदलती दिखाई नहीं दे रही है।पाकिस्तान मीडिया में लगातार मोदी की बड़ी जीत का विश्लेषण हो रहा है। इस बीच पाकिस्तानी चैनल का एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
एक पाकिस्तानी एंकर की नासमझी की वजह से इंटरनेट पर पाकिस्तानी मीडिया की खिल्ली उड़ रही है। वायरल वीडियो में लोकसभा चुनाव 2019 में जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण विश्लेषण किया जा रहा था लेकिन पाकिस्तानी पत्रकार से हिंदी का शब्द समझने में चूक हो गई और इसी चूक ने उसे हंसी का पात्र बना दिया।
दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने जीत के बाद दिए गए अपने भाषण में बीजेपी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा था- 'इस जीत पर बीजेपी का प्रत्येक कार्यकर्ता अभिनंदन का अधिकारी है।' 'अभिनंदन' शब्द ने पाकिस्तान को भ्रमित कर दिया और उन्हें भारत के जांबाज पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की याद आ गई। 
पाकिस्‍तान के नामी अखबार द डॉन ने अपने संपादकीय में इस जीत पर चिंता जताई है। इसमें कहा गया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सांप्रदायिक राजनीति की जीत लोकतंत्र के भविष्‍य को तय करेगी। इसके मुताबिक इन परिणामों ने चुनावी पंडिंतों की उस भविष्‍यवाणियों को दरकिनार कर दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था पीएम मोदी के वोट बैंक पर भारी पड़ेगी। लेकिन अब रिजल्‍ट सभी के सामने हैं और अति राष्‍ट्रवादी पार्टी भाजपा लोकसभा चुनाव में मिली एकतरफा जीत के बाद एक बार फिर से पांच वर्षो के लिए भारत में सरकार बनाने जा रही है।
मजे की बात तो यह है कि साम्प्रदायिकता का जहर फैलाने वाले ही जब भाजपा को साम्प्रदायिक बताने का अर्थ तो यही निकाला जा सकता है कि अब समस्त भारत साम्प्रदायिक हो गया है। पाकिस्तान के चर्चित द डॉन में सम्पादकीय लिखने वाले पत्रकार को इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि लोहा ही लोहे को काटता है।
द डॉन द्वारा साम्प्रदायिक राजनीती की जीत बोलना प्रमाणित करता है कि भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थक भी भाजपा के लिए इन्हे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे भी जिस तरह एक चोर को सामने वाला भी चोर दिखता है, ठीक उसी तरह द डॉन और भारत में पाकिस्तान समर्थकों का भी यही हाल है। देशहित की बात करने वाले ऐसी मानसिकता वालों को साम्प्रदायिक ही जान पड़ते हैं। लूटो, लड़वाओ की प्रवित्ति वाले लोग धर्म-निरपेक्ष जान प्रतीत होते हैं। पाकिस्तान अगर अभी भी अपनी मानसिकता नहीं बदलता, फिर वह दिन भी बहुत दूर नहीं जब पाकिस्तान को और न जाने कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।  
अखबार ने लोकसभा चुनाव के इन परिणामों को आश्‍चर्यजनक बताया है। संपादकीय के मुताबिक इससे यह बात साफ हो गई है कि चुनाव में जीत पाने या मतदाताओं को लुभाने के लिए धार्मिक घृणा और सांप्रदायिक राजनीति को एक हथियार के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इस बात को भूला नहीं जा सकता है कि पीएम मोदी का पूरा चुनाव प्रचार मुस्लिमों और पाकिस्‍तान के खिलाफ किया गया था। इसके अलावा भारत ने पाकिस्‍तान के साथ तनाव को न सिर्फ बढ़ाया बल्कि चुनाव में इसका पूरा फायदा भी उठाया और भारतीय जनमानस की भावनाएं भड़काने के लिए उन्‍होंने पाकिस्‍तान में एयर स्‍ट्राइक तक के आदेश दिए। लेकिन चुनाव के नतीजों के बाद अब सब कुछ खत्‍म हो चुका है।
जहाँ तक भारतीय जनमानस की भावनाएं भड़काने के लिए उन्‍होंने पाकिस्‍तान में एयर स्‍ट्राइक तक के आदेश देने की बात है, भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को सुधरने का हर अवसर प्रदान किया था, कितनी बार पाकिस्तान गए, लेकिन मोदी द्वारा पाकिस्तान जाने को शायद उनके(पाकिस्तान) आकाओं ने मोदी की कमजोरी समझ भारत में आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखे रहे, आखिर जुल्म का कभी न कभी तो अंत होना निश्चित है। प्रधानमंत्री मोदी से न आज तक कभी मिला हूँ और न ही कोई इच्छा, लेकिन गुजरात चुनाव 2012 के दौरान उनके एक भाषण से, एक पत्रकार होने के नाते निरन्तर मोदी के दिमाग को पढ़ रहा हूँ। इतने चर्चित अख़बार में सम्पादकीय लिखने वाले पत्रकार इस बात का ज्ञान होगा कि उस गुजरात चुनाव के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री जो वर्तमान में देश का प्रधानमंत्री है, द्वारा भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री डॉ मनमोहन सिंह को दी ललकार से पाकिस्तान तक सहम गया था। इतना ही नहीं, उस दौरान भारत दौरे पर आये रहमान मलिक भारत में प्रेस वार्ता के दौरान किस प्रकार बहके-बहके जवाब दे रहे थे।    
संपादकीय में कहा गया है कि हमें उम्‍मीद है कि मोदी इस कार्यकाल में उन कट्टरवादी हिन्दू संगठनों पर लगाम लगाएंगे जिनके निशाने पर भारत के अल्‍पसंख्‍यक या मुस्लिम रहते आए हैं। यह केवल तब ही मुमकिन है जब पीएम मोदी पाकिस्‍तान से इस बारे में वार्ता को आगे आएंगे। पाकिस्‍तान ने पहले भी कई बार विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत से वार्ता की मेज पर आने की अपील की है, लेकिन वह हर बार इस अपील को ठुकराते रहे हैं। इसके अलावा पीएम मोदी इस कार्यकाल में सही मायने में क्षेत्र की शांति बनाए रखने के लिए काम करेंगे। पाकिस्तान से वार्ता करके भारत को पाकिस्तान ने दिया "कारगिल" और "पठानकोट", "उरी", भारत को सलाह देने की बजाए डॉन अपनी सरकार को आतंकवादी सरगनाओं को जेल में डाले और जनता की निर्वाचित सरकार फौज के इशारे पर चलने की बजाए जनता के हित में स्वयं निर्णय ले। पाकिस्तान में पल रहे कट्टरपंथियों ने ही अयोध्या में राम मन्दिर बनने पर भारत में हालात बद से बदतर करने की धमकी देने की बात करते हैं। डॉन में सम्पादकीय लिखने वाले पत्रकार को इस बात का भी ज्ञान होना चाहिए, इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने मोदी से पूर्व सरकार पाकिस्तान हितैषी यूपीए सरकार ने इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने की खातिर "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के छलावे से भारत ही नहीं बल्कि विश्व को भ्रमित करने वाली सरकार नहीं। विपरीत इसके आतंकवाद का उसी की भाषा में जवाब देने वाली सरकार पुनः सत्ता में आयी है।  
अखबार के मुताबिक चुनाव परिणाम सामने आने से एक दिन पहले ही एक फोटोग्राफर ने पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी और भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज की एकसाथ फोटो कैप्‍चर की थी। यह फोटो किर्गिस्‍तान के बिश्‍केक में एससीओ की बैठक से इतर खींची गई थी। मीडिया में आई खबरों में यहां तक कहा गया था कि सुषमा ने कुरैशी के साथ स्‍वीट्स शेयर किए पूर्व में हुई बातचीत को भी याद किया।
इस फोटो के सामने आने के बाद इस बात के कयास भी लग रहे हैं कि रमजान माह के बाद भारत और पाकिस्‍तान के बीच वार्ता हो सकती है। अखबार ने ये भी लिखा है कि हालांकि भारत के पूर्व के अनुभवों के आधार पर यह कहना निराधार नहीं होगा कि वह क्षेत्र में शांति को लेकर सीरियस नहीं है। पुलवामा हमले से पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर की ग्राउंडब्रेकिंग सेरेमनी में भारतीय दल को आमंत्रित किया था, लेकिन इसके बाद भी विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज नहीं आई। इतना ही नहीं भारत ने पाकिस्‍तान में होने वाले सार्क सम्‍मेलन तक के बहिष्‍कार करने का एलान किया। इमरान खान ने पाकिस्‍तान में सरकार बनाने के बाद अपने कहे मुताबिक भारत से बातचीत की कई बार कोशिश की और पीएम मोदी क्षेत्र में शांति स्‍थापित करने के लिए न सिर्फ प्रस्‍ताव भेजा बल्कि उनको इसका मौका भी दिया, जिसे उन्‍होंने हर बार ठुकरा दिया। इसके बाद भी पाकिस्‍तान ने इसकी कोशिशें जारी रखी और बुधवार को कुरैशी और सुषमा के बीच अनाधिकृत मुलाकात हुई। अखबार के संपादकीय में कहा गया है कि अभी यह कहना जल्‍दबाजी ही होगी कि इमरान खान ने पीएम मोदी दोनों देशों के बीच शांति वार्ता करने के लिए सही थे या नहीं। यह सभी कुछ भारत पर निर्भर करता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि अभी तक क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ा बाधक भारत ही रहा है। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत का यह लोकसभा चुनाव कई मामलों में खास है। संभवतः यह पहला चुनाव है, जिसमें महंगाई म.....

आखिर किस आधार पर पाकिस्तानी अख़बार भारत को शांति में बाधक बताने का साहस कर रहा है? क्या पाकिस्तान में नैतिकता बिल्कुल ही दफ़न हो चुकी है? आतंकवाद के कारखाने पाकिस्तान में ही चलते हैं, भारत में नहीं। भारत में जनता सरकार चुनती है, जो हर निर्णय स्वयं लेती है, फौज सरकार के निर्णय पर ही चलती है , जबकि पाकिस्तान में एकदम विपरीत। वहाँ सरकार जनता चुनती जरूर है, लेकिन चलती फौज के इशारे पर। ऐसे देश के पत्रकार भारत को नसीहत दे रहे हैं, पाकिस्तान के पत्रकारों को चाहिए कि वह सरकार एवं निर्वाचित नेताओं से पूछे कि "जब जनता की वोट से सरकार में शामिल होते हो, फिर फौज के आदेश पर क्यों चलते हो, फौज आपके आदेश पर क्यों नहीं चलती?"  

Exit Polls के नतीजों से पाकिस्तान में बढ़ी टेंशन!

Pak Media on Exit Poll
एग्जिट पोल्स के नतीजे घोषित होने के बाद अब सबकी निगाह 23 मई को घोषित होने वाले नतीजों पर टिकी है। देश ही नहीं विदेशों की निगाह भी दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र के नतीजों पर टिकी है, खासकर कि पाकिस्तान की। जब से एग्जिट पोल्स के नतीजे आए हैं पाकिस्तानी मीडिया में भी हिंदुस्तान की खबरें छाई हुईं हैं। तमाम चैनल अपनी डिबेट्स में इन एग्जिट पोल्स को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
तमाम पाकिस्तानी चैनल एग्जिट पोल्स में मोदी सरकार के दुबारा आने को लेकर अपनी-अपनी राय बता रहे हैं। भारत की विपक्षी दलों की तरह पाकिस्तान के टीवी चैनल्स भी बता रहे हैं कि ये एग्जिट पोल्स गलत साबित हो सकते हैं। एक टीवी चैनल तो सीधे-सीधे कह रहा है कि मोदी के सत्ता में आने से पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाही और तेज हो सकती है। भारत में विरोधियों को भी हकीकत में यही चिन्ता खाए जा रही है, इसीलिए ईवीएम पर निशाना साध रहे हैं। पाकिस्तान मीडिया खुद मान रहा है कि वो ब्रेसब्री से भारतीय चुनावों के नतीजों की घोषणा का इंतजार कर रहा है।
एक एक्सपर्ट ने माना कि यदि मोदी जीतते हैं तो पाकिस्तान को लेकर उनके नजरिये में कोई खास बदलाव नहीं आने वाला है। वहीं एक अन्य चैनल के एक्सपर्ट मानते हैं कि मोदी का फिर से पीएम बनने का मतलब है पाकिस्तान के लिए फिर से टफ टाइम शुरु होने वाला है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि मोदी जब मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद अपना पहला भाषण देंगे तो तब साफ होगा कि उनकी पाकिस्तान को लेकर क्या नीति है।
दरअसल पाकिस्तानी मीडिया भी मानता है कि पीएम मोदी ने पाकिस्तान को विश्व में अलग-थलग करने में बड़ी भूमिका निभाई है। खुद कई वरिष्ठ पत्रकार मानते हैं कि मोदी का इंडियन पॉलिटिक्स में तगड़ा होल्ड है जबकि राहुल गांधी एक कमजोर लीडर साबित हुए हैं। यही कारण है कि एग्जिट पोल के नतीजे घोषित होने के बाद पाकिस्तान में इंटरनेट पर सबसे ज्यादा 88 फीसदी नरेंद्र मोदी को सर्च किया जबकि 12 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी को सर्च किया।
सोशल मीडिया में पाकिस्तानी लोग भी कह रहे हैं कि पीएम मोदीकी सत्ता में वापसी नहीं होनी चाहिए क्योंकि उन्होंने बालाकोट में एयर स्ट्राइक करने के अलावा सर्जिकल स्ट्राइक कराई। पाकिस्तानी लोग कहते हैं कि मोदी की सत्ता में वापसी पाकिस्तान के लिए हितकारी नहीं हैं। 
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान जनमानस इस बात को भी स्वीकार कर रहा है कि सरकार और फौज आतंकवादियों के सरगनाओं को संरक्षण देना पाकिस्तान के लिए मुसीबत पैदा कर रहे हैं। क्योकि सरकार केवल नाम की हैं, वास्तव में सरकार का संचालन फौज द्वारा ही किया जाता है और किसी सरकार में फौज के खिलाफ जाने का साहस नहीं।  मोदी सरकार के पुनः वापसी होने पर पाकिस्तान सरकार और फौज को भारत के विरुद्ध अपनी सोंच में बदलाव लाना होगा। ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो से लेकर बेनज़ीर भुट्टो तक भारत से 1000 साल तक लड़ने की सोंच रखते रहे, परन्तु पाकिस्तान के विकास की तरफ सभी की सोंच एकदम विपरीत रही।       

जहां IAF ने गिराए बम, वहां जाने से मीडिया को रोक रहा पाकिस्तान, क्यों?

air strikes
एक तरफ भारत में मोदी विरोधी पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों की लाशें देखने के लिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान किसी मीडिया को उस स्थान तक जाने से रोक रहा है, ताकि एयर स्ट्राइक से हुए नुकसान की सच्चाई सार्वजनिक न हो सके।  
भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एक पहाड़ी पर जिस मदरसे पर एयर स्ट्राइक की थी, वहां अभी भी मीडिया को जाने से रोका जा रहा है। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने गुरुवार को एक मीडिया एजेंसी की टीम को उस मदरसे और आसपास की इमारतों के एक समूह पर चढ़ाई करने से रोक दिया, जहां पिछले सप्ताह भारतीय युद्धक विमानों ने हवाई हमले किए थे।
पिछले 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब रॉयटर्स के पत्रकारों ने इस क्षेत्र का दौरा किया। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने पहुंच से इनकार करने के लिए सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया। इस्लामाबाद में सेना की प्रेस विंग ने दो बार मौसम और संगठनात्मक कारणों से साइट पर जाने का प्लान बदल दिया। एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा के कारण कुछ दिनों के लिए कोई यात्रा संभव नहीं होगी।
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पुलवामा में सीआरपीएफ कर्मियों की शहादत पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं हो....

26 फरवरी को वायु सेना की कार्रवाई के बाद से ही पाकिस्तान कह रहा है कि वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है और किसी की भी जान नहीं गई है। जिस दिन भारत ने ये कार्रवाई की, उस दिन विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि इसमें कथित प्रशिक्षण शिविर में बहुत बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों के समूहों को मार डाला।
रॉयटर्स की टीम मदरसे को 100 मीटर दूर से देख सकती थी। जिस इमारत को पत्रकार देखे सकते है, वह पेड़ों से घिरी हुई है, और इसमें क्षति या गतिविधि के कोई संकेत नहीं दिख रहे। यह देखते हुए मूल्यांकन बहुत सीमित है।

भारत के मुंहतोड़ जवाब के बाद पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही दोनों देशों की मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि इस बार भारत शांत नहीं बैठने वाला है। हुआ भी कुछ ऐसा ही और हमले के 12 दिन बाद भारत के 12 मिराज विमानों ने पाक अधिकृत कश्मीर में 1000 किलो के बम गिराए और कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया।
भारत की एयर स्ट्राइक की खबर ने दोनों ही देशों की मीडिया को सक्रिय कर दिया। भारतीय मीडिया जहां एक ओर इसे पुलवामा का बदला बता रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की मीडिया इस बात का दावा कर रही है कि भारतीय विमानों ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया लेकिन पाकिस्तानी सेना की सतर्कता के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
पाकिस्तान की मीडिया डीजी आईएसपीआर के हवाले से ही खबर चला रही है, इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान एयर फोर्स की सतर्कता के कारण भारत के इस हमले को समय रहते भांप लिया गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट डॉन ने भारत की एयर स्ट्राइक की खबर को कुछ इस तरह से प्रकाशित किया है। डॉन लिखता है- “मुजफ्फराबाद सेक्टर में भारतीय विमानों ने घुसपैठ की कोशिश की, पाकिस्तानी वायु सेना की कार्रवाई के बाद वो भागने लगे। “
इसमें आगे लिखा है, “घुसपैठ पर नई दिल्ली की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने तुरंत कार्रवाई की है। बालाकोट पर बम गिराए गए हैं, कोई हताहत नहीं हुआ है।”
“भारत अधिकृत कश्मीर में 40 भारतीय जवानों पर हुए आत्मघाती हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। नई दिल्ली ने हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाया है। इस्लामाबाद ने आरोप को खारिज किया है।”
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इस वेबसाइट का परिचय

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पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की सुरक्षा बढ़...

“प्रधानमंत्री इमरान खान ने नई दिल्ली से जांच कराने का वादा किया है, लेकिन अगर वह सबूत पेश करें तभी। लेकिन चेतावनी भी दी है कि अगर भारत हमला करता है तो पाकिस्तान भी उसका पूरा जवाब देगा। वहीं दूसरी ओर जब जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली, तो नई दिल्ली ने तुरंत इस्लामाबाद पर आरोप लगा दिया। और घोषणा की कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए एक राजनयिक कदम उठाएगा।”

पाकिस्तानी पत्रकार ने दी भारत को धमकी- टमाटर का जवाब एटम बम से दिया जाएगा

pak journo over tomatoes banned from indiaपुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गए हैं। भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कड़े फैसलों को लेकर पाकिस्तान में काफी गुस्सा है और ये गुस्सा वहां की मीडिया और उनके पत्रकारों में भी साफ नजर आ रही है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी पत्रकार ने गुस्से में अपनी राय रखी है। पाकिस्तान के इस पत्रकार की ऑनलाइन खूब ट्रोलिंग हो रही है।
दरअसल उसने सोशल मीडिया पर अपलोड किए एक वीडियो ऐसी बात ही कही है जिस पर इंटरनेट यूजर्स ने उसे आड़े हाथों ले लिया है और जम कर उसका मजाक बना रहे हैं। उसने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान को टमाटर निर्यात करना बंद कर दिया है इसलिए अब भारत को इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उसे पाकिस्तान की शक्ति का अंदाजा नहीं है।
लगता है पाकिस्तान ने परमाणु नहीं कोई जिन्न बनाया है, इसीलिए बात-बात पर हर कोई परमाणु की धमकी दे रहा है। कल(फरवरी 23) एक चैनल पर एक भारतीय जनरल(सेवा निर्वित) ने भारतीय परमाणु और पाकिस्तान परमाणु की शक्ति से अवगत करवाते कहा था कि पाकिस्तान का एक परमाणु पंजाब जैसे प्रान्त को बर्बाद कर सकता है, जबकि मात्र एक भारतीय परमाणु पुरे पाकिस्तान को। 
ट्विटर पर अपलोड किए इस वीडियो में एक ही सांस में उसने लंबी-चौड़ी बात कह दी है। इस वीडियो पर बड़ी संख्या में लोग कमेंट कर रहे हैं और यह चंद मिनटों में वायरल हो गया है। वीडियो में पत्रकार कह रहा है- ये टमाटर हम राहुल औऱ मोदी के मुंह पर मारेंगे। ये इंडिया ने गंदी और नीच हरकत की है। इसने आगे कहा कि वक्त आ गया है कि टमाटर का जवाब एटम बम से दिया जाएगा।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत के कई ग्रामीण किसानों ने विरोधस्वरुप पाकिस्तान को अपने टमाटर निर्यात करने से मना कर दिया है। मध्य प्रदेश के किसान रविंदर पाटीदार ने कहा था कि हम किसान हैं और हम टमाटर उगाते हैं। हम टमाटर पाकिस्तान भी भेजते हैं और हमारा ही उगाई सब्जियां खाकर वे हमारे ही जवानों को मार रहे हैं। अब हम पाकिस्तान की बर्बादी चाहते हैं इसलिए हम अब से पाकिस्तान को अपने टमाटर नहीं भेजेंगे और दूसरे देशों से भी ऐसी ही उम्मीद रखते हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पाकिस्तान द्वारा इतने वर्षों से खेली जा रही खून की होली से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्....

पाकिस्तानी पत्रकार के इस वीडियो को देखकर एक यूजर्स ने ट्रोल करते हुए लिखा कि-इसकी बातें सुनकर इसके पीछे खड़े लोग भी हंस रहे हैं। दूसरे ने लिखा है-पाकिस्तान के न्यूज चैनल वाकई में हम भारतीय का मनोरंजन करते हैं।
Embedded video
"Tamatar ka jawab atom bomb se de gay." So much trash on our tv channels
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Seriously , these tv channels have only succeeded in providing entertainment to the Indians
"Tamatar ka jawab atom bomb se de gay." So much trash on our tv channels
एटम बम से जवाब देंगा पाकिस्तान हँसी आती हैं ऐसे लोगो पर जिनको ठीक से बोलना भी नही आता है,,,
"Tamatar ka jawab atom bomb se de gay." So much trash on our tv channels
कई लोगों ने उसके 2 मिनट 20 सेकेंड के वीडियो में 18 बार तौबा-तौबा बोलने पर भी उसे ट्रोल किया है। बता दें कि पाकिस्तानी पत्रकार की यह पहली वीडियो नहीं है इसके अलावा भी कुछ पत्रकारों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनकी भी खूब ट्रोलिंग हो रही है।