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‘द कश्मीर फाइल्स’ से डरी कांग्रेस सरकार: राजस्थान के कोटा में 1 महीने के लिए धारा 144, 5 से अधिक के जमा होने पर पाबंदी

The Kashmir Files प्रदर्शन से जनता के सामने सच्चाई आने से कांग्रेस सहित जितने भी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हैं, सब की नींद, रोटी और पानी तक हराम हो चूका है। देश में साम्प्रदायिकता और गंगा-जमुनी तहजीब खतरे में नज़र आने लगी है, लेकिन जब कश्मीर में मस्जिदों तक के इस्तेमाल कर हिन्दुओं पर अत्याचार किया जा रहा था, तब साम्प्रदायिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब कहाँ थी? जब इस्लामिक आतंकवाद को बचाने के लिए 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' को बदनाम किया जा रहा था, तब सेकुलरिज्म और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा कहाँ था? इतना ही नहीं, जब CAA विरोध प्रदर्शन एवं धरने में fuck Hindutva के नारे लगाए जा रहे थे, तब गंगा-जमुनी तहजीब किस बिल में घुस आराम कर रही थी? आखिर कब तक इन ढोंगी नारों से हिन्दुओं को छला जाता रहेगा? 

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राजस्थान के कोटा जिले के सिनेमाघरों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अधिकारियों ने 22 मार्च से 21 अप्रैल तक जिले भर में CRPC की धारा 144 लगाने का सोमवार (21 मार्च, 2022) को आदेश दिया है। कोटा के जिलाधिकारी ने एक आदेश में कहा कि द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार 22 मार्च से 21 अप्रैल तक धारा 144 लागू है। जिसके तहत कहीं भी 5 लोगों से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते हैं।

राजस्थान सरकार के अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि यह कदम कई त्योहारों से पहले सावधानी बरतने के लिए उठाया गया है। साथ ही नए आदेश के मुताबिक यह भी कहा गया है कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने के लिए भीड़ नहीं जुटनी चाहिए।

जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी (कार्यवाहक) राजुकमार सिंह की ओर से जारी आदेश में भीड़ के जमा होने, विरोध-प्रदर्शन करने, जुलूस और मार्च निकालने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हालाँकि, इस दौरान चेती चंद, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बैसाखी, जुमा-तुल-विदा के त्योहार भी पड़ेंगे। आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि यह आदेश सरकारी कामों जैसे कोविड टीकाकरण और पुलिस कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पाबंदी को लेकर फिल्म डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले में दखल देने की माँग की है।

वहीं इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक रामलाल शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार का मानसिक दिवालियापन निकल चुका है। जिस तरह के सरकारी आदेश आ रहे हैं उनकी पालना होगी या अवहेलना? ऐसे आदेश राजस्थान सरकार की मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। धारा 144 लगा कर क्या साबित कर रहा प्रशासन? क्या केवल कोटा में ही मनाए जाएँगे त्योहार?”

रामलाल ने राजस्थान सरकार से माँग करते हुए कहा, “अगर कॉन्ग्रेस की अशोक गहलोत सरकार कश्मीर फाइल को प्रतिबंधित करना चाहती है तो अपनी मंशा साफ करे और अगर ऐसा नहीं है तो सरकार इस आदेश को वापस ले।”

यही नहीं बीजेपी से कोटा उत्तर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजाल ने भी धारा 144 लागू करने के राजस्थान सरकार के आदेश पर निशाना साधा और कहा, “मंगलवार को कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल ‘चंडी मार्च’ निकाला जाएगा। इसलिए धारा 144 लगाई गई थी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिर्फ एक बहाना है।”

अवलोकन करें:-

The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

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The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ को मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड में टैक्स फ्री कर दिया गया है। फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर है और इसे डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी हैं।

कोटा के अस्पताल में 8 घंटे में 9 बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री गहलोत का शर्मनाक बयान - "यह नई बात नहीं"


राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल (JK Lone Hospita) में एक बार फिर नवजातों के दम तोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। 8 घंटे में वहाँ 9 मासूमों की जान गई है। परिजन आरोप लगा रहे हैं कि बच्चों की हालत बिगड़ने पर वह लगातार अस्पताल प्रशासन से गिड़गिड़ा कर मदद माँग रहे थे, लेकिन ड्यूटी स्टॉफ ने नहीं सुनी।

राज्य के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा का दावा है कि मृतक बच्चों में से 3 मृत लाए गए थे। 3 को जन्मजात बीमारी थी और 3 की मौत फेफड़ों में दूध जाने के कारण हुई। उन्होंने इस मामले पर पूरी रिपोर्ट माँगी है। संभागीय आयुक्त केसी मीणा और जिलाधिकारी उज्जवल राठौड़ ने भी अस्पताल पहुँचकर निरीक्षण किया है और संबंधित अधिकारियों से बात की।

बच्चों की मृत्यु पर विपक्ष का सरकार पर प्रहार 

लोकसभा स्पीकर ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार की नाकामयाबी की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करवाया है। उन्होंने कहा है कि चिकित्सा व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार कोशिश नहीं कर रही है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि देश से शिशु मृत्यु दर एकदम खत्म हो जाए।

उन्होंने अपने ट्विटर पर जानकारी दी कि उन्होंने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी के प्रवास के दौरान जेके लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं की मृत्यु को लेकर जिला कलक्टर और अस्पताल के अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा की। उन्होंने लिखा, “हर जिंदगी कीमती है इसलिए अधिकारियों को मॉनीटरिंग बढ़ाने और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए हर संभव कदम उठाने को कहा है।”

वहीं राजस्थान की आम आदमी पार्टी ने भी गहलोत सरकार पर सवाल उठाए हैं। AAP राजस्थान ने ट्वीट कर कहा है, “साल बदला, हालात नहीं।  2019 में नवंबर दिसंबर में 35 दिनों में 110 बच्चों की मौत हुई थी। 8 दिसंबर 2020 को 8 घंटे में 9 मासूमों ने दम तोड़ दिया। मुख्यमंत्री गहलोत, कोटा का जेके लोन: हॉस्पिटल या कब्रगाह?”

भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत लिखते हैं, “कोटा के जेके लोन अस्पताल में 8 घंटे में 9 नवजातों की मृत्यु हृदय विदारक है। अक्षमता की पर्याय बन चुकी राजस्थान सरकार और अस्पताल प्रशासन दोनो इस दुर्घटना के लिए पूर्णतः ज़िम्मेदार है। आशा है, राज्य सरकार पिछली बार से विपरीत इस बार संज्ञान लेगी, कार्यवाही करेगी और सुधार भी!”

कोटा के हॉस्पिटल में सुविधाओं का अभाव 

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, कोटा में रात का तापमान 12 डिग्री तक पहुँच गया है। लेकिन अस्पताल में वार्मर सिर्फ 71 हैं, जबकि कुल नवजात 98 भर्ती हैं।  मौजूद वार्मर में भी 11 खराब हैं। इसके अलावा अस्पताल में नेबुलाइजर की सुविधा भी खराब है। कहा जा रहा है कि अस्पताल में नेबुलाइजर 56 की संख्या में आए थे, मगर इनमें से 20 खराब हैं। इंफ्यूजन पंप भी 89 हैं, लेकिन 25 इसमें से बेकार हैं। इसी तरह सोशल मीडिया पर लोग दावा कर रहे हैं कि अस्पताल में 100 से ज्यादा स्वास्थ्य उपकरण काम नहीं कर रहे हैं।

पिछले वर्ष भी कई बच्चों ने तोडा था दम 

पिछले साल भी इसी दिसंबर महीने में कोटा के जेकेलॉन अस्पताल में करीबन 110 बच्चों की मृत्यु हुई थी। NCPCR ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अस्पताल की जर्जर हलात और वहाँ पर साफ-सफाई को बरती जा रही लापरवाही बच्चों की मौत का एक अहम कारण है।

अपनी रिपोर्ट में NCPCR ने कहा था कि अस्पताल की ख़िड़कियों में शीशे नहीं हैं, दरवाजे टूटे हुए हैं, जिस कारण अस्पताल में भर्ती बच्चों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। इसके अलावा अस्पताल के कैंपस में सूअर भी घूमते पाए गए।

उस समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने असंवेदनशील बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हर अस्पताल में रोजाना 3-4 मौतें होती हैं। यह कोई नई बात नहीं है। लगे हाथ उन्होंने यह भी दावा किया कि इस साल केवल 900 मौतें हुई हैं जो बीते 6 साल में सबसे कम है।

मीडिया के सामने मुख्यमंत्री ने कहा 

“6 साल में सबसे कम मौतें हुई हैं। एक भी बच्चे की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन 1500, 1300 मौतें भी बीते सालों के दौरान हुई है। इस साल यह आँकड़ा 900 है। देश और राज्य के हरेक अस्पताल में रोज कुछ मौतें होती ही हैं। कदम उठाए जाएँगे।”