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सागरिका घोष क्या आप इसी लिए संसद में आई हैं? राज्यसभा के वेल में हंगामे पर सभापति जगदीप धनखड़ ने फटकारा, कहा- यह भारतीय इतिहास का कलंकित दिन

                                       जगदीप धनखड़ एवं सागरिका घोष (साभार: हिंदुस्तान/वेब दुनिया)
संसद सत्र के पाँचवें दिन राज्यसभा में शुक्रवार (28 जून 2024) को विपक्ष ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर खूब हंगामा किया। इस दौरान कई सांसद वेल में पहुँच गए। इससे राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने भड़क गए और इसमें टीएमसी सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ ब्रायन सहित को फटकार लगाते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

सांसदों के व्यवहार को देखते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा, “जो लोग वेल में खड़े हैं, हम उनका नाम ले रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने खड़े होकर उन सांसदों का नाम लेना शुरू किया जो हंगामा कर रहे थे। सबसे पहले टीएमसी सांसद सागरिका घोष का नाम लेते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आप यहाँ सदन में हंगामे के मकसद से आई हैं?”

सभापति जगदीप धनखड़ यहीं नहीं रूके। कुछ देर के बाद तृणमूल कॉनग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन का नाम लेकर उन्होंने कहा, “मिस्टर डेरेक ओ ब्रायन, आप इस हंगामे के डायरेक्टर बन रहे हैं।” वहीं टीएमसी सांसद साकेत गोखले को लेकर कहा, “आप वर्चुअली अपने लिए ही परेशानी बन रहे हैं।” इस दौरान विपक्षी सांसद सदन में नारेबाजी करते रहे।

उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, “आज भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा कलंकित दिन है कि विपक्ष के नेता खुद वेल में आ गए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। मैं दुखी हूँ, स्तब्ध हूँ। भारतीय संसदीय परंपरा इस हद तक बिगड़ जाएगी कि विपक्ष के नेता वेल में आ जाएँगे, उपनेता वेल में आ जाएँगे।”

इसके कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दिया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए 21 घंटे का समय निर्धारित किया है। सांसद इस समय को चर्चा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

राज्यसभा में शुक्रवार को नीट से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिए। सभापति जगदीप धनखड़ ने बताया कि उन्हें इस विषय पर चर्चा के लिए कुल 22 नोटिस मिले हैं। इनमें नीट में अनियमितता, चीटिंग और पेपर लीक के विषय पर बहस के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया गया था। हालाँकि, सभापति ने इन सभी नोटिस को अस्वीकार कर दिया। 

बिहार : जिस मामले में 26 साल से फरार हैं लालू प्रसाद यादव, उस केस में कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट: अवैध हथियार खरीदने का आरोप

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है। ये मामला दो दशक से भी ज्यादा पुराना है, जिसमें लालू यादव के नाम पर हथियार लिए गए और उन हथियारों को अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया गया। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ये वारंट जारी किया है। इस मामले 23 आरोपितों पर केस दर्ज किया गया था। लालू यादव के पेश न होने के कारण अदालत ने ऐक्शन लेते हुए उनके खिलाफ स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये फर्जीवाड़ा 23 अगस्त 1995 से लेकर 15 मई 1997 के बीच किया गया था। कुल तीन फर्म से हथियार और कारतूस की खरीद की गई थी। इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित 23 आरोपित नामजद हैं। इसमें से 6 के खिलाफ ट्रायल चल रहा है, जबकि दो की मौत हो चुकी है। बाकी आरोपित फरार हैं। ग्वालियर की अदालत ने लालू प्रसाद यादव को इस मामले में 1998 में फरार घोषित किया था।

यूपी की फर्म के संचालक राजकुमार शर्मा पर आरोप है कि उसने ग्वालियर की हथियारों की तीन कंपनियों से फर्जीवाड़ा कर 1995 से 1997 के बीच हथियार और कारतूस खरीदे थे। शर्मा ने हथियार और
कारतूस बिहार में बेच दिए थे। जिन लोगों को यह हथियार बेचे गए, उनमें लालू प्रसाद यादव का नाम भी है।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में लालू प्रसाद यादव आरोपित हैं तो, लेकिन वो राजद के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ही हैं या कोई और, इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। अदालत के रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि नहीं हो रही थी। दस्तावेजों के अनुसार आरोपी लालू प्रसाद के पिता का नाम कुंद्रिका सिंह है। वहीं, राजद नेता लालू प्रसाद के पिता का नाम कुंदन राय है। लालू प्रसाद के पिता का नाम सिर्फ फरारी पंचनामे में लिखा है। पुलिस ने कोर्ट में जो चालान और फरार आरोपितों की सूची पेश की है, उनमें पिता का नाम नहीं लिखा था। शेष आरोपितों के पिता के नाम के साथ शहर तक का उल्लेख था। हालाँकि, पूर्व सांसद और विधायक लालू प्रसाद यादव का जिक्र होने से यह केस एमपी-एमएलए कोर्ट में गया है। 

अब पुलिस का दावा है कि आरोपी लालू प्रसाद यादव कोई और नहीं बल्कि राजद नेता ही हैं। इसी आधार पर उन्हें आरोपित बनाया और गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस ने अपने अनुसंधान के बाद ही लालू प्रसाद यादव को आरोपी बनाया है। यह केस अन्य कोर्ट से एमपी-एमएलए कोर्ट को ट्रांसफर हुआ था। अब स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने तलब किया है।

‘मुँह खोला तो तेरा रेप होगा’: महिला मराठी प्रोड्यूसर को अभद्र गाली-गलौच, हत्या की धमकी : संजय राउत का ऑडियो वायरल

                                                  डॉ स्वप्ना पाटकर को धमकियाँ
शिवसेना नेता संजय राउत एक बार फिर से अपनी ‘अभद्र भाषा’ के चलते खबरों में आ गए हैं। कथिततौर पर मराठी फिल्मों की प्रोड्यूसर डॉ स्वप्ना पाटकर के साथ बातचीत की उनकी एक ऑडियो वायरल हुई है। इस ऑडियो में जो पुरुष है, उसकी ओर से महिला को गंदी-गंदी गाली दी जा रही है। ऑडियो में औरत से बात करते हुए “स%$ली, मादरच&^द और बहन&^%” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है।

इसके अलावा ऑडियो में आदमी कहता है, “इस कॉल को रिकॉर्ड कर, पुलिस को भेज या जो मन हो वो कर। बस तू देखती जा। प्रॉपर्टी या तो मेरे नाम कर या फिर सुजीत के नाम।”

डॉ स्वप्ना पाटकर वही महिला हैं जिन्होंने साल 2021 में संजय राउत के ऊपर गाली-गलौच करने का और उन्हें पिछले 8 साल से तंग करने का आरोप लगाया था। अब ऑपइंडिया इस ऑडियो को लेकर ये पुष्टि नहीं करता है कि जो आवाज इसमें है वो स्वप्ना पाटकर और संजय राउत की है या नहीं। लेकिन इस ऑडियो को टाइम्स नाऊ नवभारत ने भी शेयर किया है और बताया है कि 70 सेकेंड की इस ऑडियो में 27 बार गाली दी गई हैं।

ये लीक ऑडियो संजय राउत से बातचीत की है: डॉ स्वप्ना पाटकर

इसके अलावा इस ऑडियो को लेकर स्वप्ना पाटकर ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि ये उनके और संजय राउत के बीच हुई बातचीत की ऑडियो है। उन्होंने SSR वॉरियर नाम के चैनल पर अपलोड किए गए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें पिछले 18 महीनों में कई बार धमकियाँ मिली हैं और इन्हीं धमकियों के मद्देनजर उन्होंने अपनी शिकायत दी है। उन्होंने संजय राउत से जुड़े ‘पात्रा चॉल जमीन घोटाले’ मामले की जाँच में जुटे संबंधित अधिकारियों को इन धमकियों और ऑडियो क्लिप के बारे में बताया है। उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखा है और ईडी को भी धमकियों के बारे में बताया है।

स्वप्ना कहती हैं कि संजय की पत्नी वर्षा और उनके नाम अलीबाग में जमीन थी जिसे ईडी ने अपनी जाँच में अटैच किया। संपत्ति के दस्तावेज भी संजय राउत के करीबी सुजीत पाटकर के घर छापेमारी में मिले। लेकिन ईडी ने जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ शुरू की तो उनको रेप और हत्या की धमकियाँ आने लगीं और उन पर दबाव बनने लगा कि वह संजय राउत का नाम वापस लें।

स्वप्ना को मिली धमकियों में भाजपा पर इल्जाम मढ़ने का बनाया जा रहा दबाव

मालूम हो कि स्वप्ना पाटकर को पिछले हफ्ते भी धमकी वाला एक पत्र मिला था जिसमें कहा गया था कि अगर उन्होंने ईडी के सामने कुछ भी कहा तो उनका रेप किया जाएगा। इस धमकी के बाद उन्होंने वकोला पुलिस में अपनी शिकायत दी थी। पत्र में स्वप्ना को कहा गया था कि वह मीडिया में बोलें कि ये सब उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैय्या के कहने पर किया है।

स्वप्ना की इस शिकायत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैय्या ने भी 30 जुलाई को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बताया कि आज शाम 4 बजे धमकी, गाली-गलौच, ऑडियो क्लिप से जुड़ी शिकायतों के संबंध में वकोला थाने जाएँगे। उन्होंने अपने ट्वीट में पत्र शेयर किया है। इसमें लिखा है, “अगर मुँह खोला तो तेरा रेप करके थाना में खड़ी मिलेगी तू। ईडी के सामने बकबक करेगी तो मरेगी। मीडिया को बता कि सोमैय्या ने जबरदस्ती किया और आगे चुप बैठ वरना कोई नहीं बचा पाएगा।”

स्वप्ना पाटकर और संजय राउत का विवाद

बता दें कि डॉ स्वप्ना पाटकर इससे पहले पिछले साल संजय राउत पर इल्जाम लगाने के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर बताया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं। पाटकर ने बताया था कि राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

उत्तर प्रदेश : हार से डरे सपा सांसद एसटी हसन ने मुस्लिमों को दिखाया UCC का खौफ

उत्तर प्रदेश में जिस पार्टी की डबल इंजन की सरकार है, उससे समाजवादी पार्टी को डबल डर सता रहा है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी आदित्यनाथ की मेहनत रंग ला ही रही है। उधर केंद्र में सरकार जनहित में एक के बाद एक नए कानून ला रही है। इसके चलते सपा और उसके नेता बौखलाए हुए हैं। मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी सांसद डॉ. एसटी हसन मुसलमानों को कॉमन सिविल कोड का खौफ दिखाकर डराते नजर आए। हसन ने कहा कि अगर यह कानून आया तो मुसलमानों के अधिकार छिन जाएंगे। इस कानून के आने के बाद आप दूसरी शादी नहीं कर पाएंगे।

चुनाव आने वाले हैं…अल्लाह के वास्ते इसमें बंट मत जाना
दरअसल, समाजवादी पार्टी को अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में हार का डर अभी से सता रहा है। मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. एसटी हसन ने कहा,”कौम के लिए मैं आपसे इतनी दरख़्वास्त करना चाहता हूं कि चुनाव आने वाले हैं। अल्लाह के वास्ते इसमें बंट मत जाना। सिर्फ एक ही मकसद होना चाहिए कि बीजेपी को हराना है।’ बीजेपी कानून ला रही है, इसके बाद मुस्लिम संस्थाओं में 50% मुस्लिमों के पढ़ने का अधिकार खत्म हो जाएगा। अगर आप चुनावों में बंटे तो इसके नतीजे घातक होंगे।

यह कानून आया तो मुसलमानों के अधिकार छिन जाएंगे
सपा सांसद यहीं नहीं रुके, भाजपा के खिलाफ उनका जहर उगलना जारी रहा। उन्होंने कहा कि BJP देश के मुसलमानों को मजदूर बनाकर रखना चाहती है। बहुत जल्द कॉमन सिविल कोड आने वाला है. उन्होंने कहा कि BJP कॉमन सिविल कोड लाने वाली है। अगर । इस कानून के आने के बाद आप दूसरी शादी नहीं कर पाएंगे। मुस्लिम पर्सनल लॉ खत्म हो जाएगा। मुस्लिमों के शैक्षणिक संस्थानों का माइनॉरिटी स्टेटस खत्म हो जाएगा।

सपा सांसद ने उपमुख्यमंत्री पर भी किया था पलटवार
सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य साइकोसिस (मानसिक बीमारी) से ग्रसित हैं। उन्हें इलाज की जरूरत है। दरअसल, केशव प्रसाद मौर्य ने पिछले दिनों कहा था कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले लुंगी छाप गुंडे घूमते थे। जालीदार टोपी लगाए लोग बंदूक-गोली लिए व्यापारियों को डराने का काम करते थे। जब शिकायत की जाती थी तो धमकी भी देते थे। ऐसे लोगों से बीजेपी ने निजात दिलायी है।

यह वही सांसद जो ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान गाना भूले
सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को मानसिक बीमार बताने वाले सपा के ये वही सांसद हैं जी खुद ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान ही भूल गए थे। सपा सांसद एसटी हसन, पहली लाइन के बाद बोले- जय हे, जय हे। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सांसद डॉ. एसटी हसन ध्वजारोहण करने के बाद थोड़ा सा राष्ट्रगान गाने के बाद आगे की पंक्तियां ही भूल गए। सिर्फ सांसद ही नहीं वहां मौजूद सपा जिला अध्यक्ष डीपी यादव, महानगर अध्यक्ष शाने अली शानू सहित अन्य किसी को भी राष्ट्रगान याद नहीं था। जिसके बाद बमुश्किल राष्ट्रगान पूरा किया गया।

राष्ट्रगान को अधूरा छोड़ना अपमान, लोगों ने की ट्रोलिंग
दरअसल मुरादाबाद से सांसद डॉ. एसटी हसन स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के लिए शहीद पार्क पहुंचे थे। सांसद ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया और फिर उनके ओर से झंडारोहण किया गया। झंडारोहण होते ही राष्ट्र गान शुरू हुआ, लेकिन उनके साथ खड़े उनके लोग राष्ट्र गान ही भूल गए। लोगों की तो छोड़िए सांसद भी राष्ट्र गान नहीं गा पाए। दूसरी ही पंक्ति पर सब अटक गए और एक दूसरे का मुंह देखने लगे। सांसद भी खुद अपने साथी कार्यकर्ताओं का मुंह देखने लग गए। अंत में जब किसी को आगे की लाइनें याद नहीं आई तो सांसद धीरे से जय हे-जय हे.. बोलने लगे और ध्वजारोहण कार्यक्रम खत्म हो गया। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम के झंडारोहण का वीडियो वायरल हो गया और लोग जमकर कमेंट करते हुए सांसद को ट्रोल किया। एक यूजर ने लिखा, ‘अगर सांसद ही राष्ट्रगान भूल जाएंगे तो फिर आम नागरिकों के लिए क्या संदेश जाएगा. यह तो राष्ट्रगान का अपमान है।’

कांग्रेस सांसद फूलो देवी ने अपने ही सांसदों पर लगाया आरोप, आजतक की पत्रकार का झूठ फिर पकड़ा गया

एक समय था जब राज्य सभा में समाज के प्रतिष्ठित लोगों को भेजा जाता था, लेकिन मोदी विरोध मोदी विरोधी इस सम्मानित सदन में गुंडे भेज कर अपमानित कर रहे हैं। राज्य सभा अध्यक्ष को ऐसे गुंडागर्दी पर उतारू सांसदों को हमेशा के संसद से बाहर ही नहीं, बल्कि मिलने वाली हर सरकारी सुविधा भी वापस लेनी चाहिए। इस पहले आम आदमी पार्टी के संसद संजय सिंह भी हंगामा कर चुके हैं। संसद में बदतमीजी करने वाले, मंत्रियों के हाथ से जवाब छीन कर फाड़ने वाले मार्शलों से मारपीट करने वाले, एवं राज्यसभा में सिटी मारने वाले, राज्यसभा में चैयरमेन की और रूल बुक फेंक कर मारने वाले प्रताप सिंह बाजवा जैसे सांसदों की सदन से सदस्यता रदद् कर देनी चाहिए। 
राज्य सभा में अगस्त 11 को हुए हंगामे पर कांग्रेस सांसद फूलो देवी ने अपने ही सांसदों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। फूलो देवी का साफ कहना है कि विपक्षी पुरुष सांसदों ने धक्का-मुक्की किया जिससे वो गिर गई। देखिए वीडियो-

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इस मामले को लेकर जो रिपोर्ट तैयार की गई है उसके मुताबिक जैसे ही संशोधन बिल पेश किया गया, विपक्षी सासंद सदन के वेल में आ गए और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने लगे। सदस्यों ने टेबल पर चढ़ने की कोशिश की और पेपर फाड़े। हंगामा बढ़ने पर सुरक्षा को देखते हुए मार्शल तैनात किए गए, जिसके बाद विपक्षी सासंदों ने मार्शल के साथ धक्का-मुक्की करनी शुरू कर दी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक महिला मार्शल को एक सांसद ने बुरी तरह से घसीटा, जिसके बाद महिला मार्शल को कई चोटें आईं। एक सांसद ने तो सुरक्षा घेरा तोड़ने के चक्कर में एक पुरुष मार्शल के गले को पकड़ लिया जिससे मार्शल का दम घुटने लगा। न्यूज 18 की खबर के अनुसार-

6:02 बजे – डोला सेन ने कपड़े का एक फंदा शांता छेत्री के गले मे डाला और नारेबाजी करने लगीं.
6:08 बजे – फूलो देवी नेताम ने पेपर फाड़े.
6:09 बजे – छाया देवी ने भी कुछ पेपर फाड़े.
6:22 बजे – डोला सेन ने मंत्री पीयूष गोयल और प्रह्लाद जोशी का रास्ता रोका, धक्का भी दिया.
6:23 बजे– डोला सेन ने सुरक्षाकर्मियों के साथ भी बहस की. एक महिला अधिकारी को धक्का दिया. कपड़े का फंदा भी लहराया.
6:32 बजे – ई करीम ने एक पुरुष मार्शल को गले से पकड़ा और उसे धक्का दिया
+ एक महिला मार्शल को फूलो देवी नेताम और छाया वर्मा ने घसीट लिया।

देखिए वीडियो किस तरह फूलो देवी महिला मार्शल को घसीट रही हैं- 

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महिला मार्शल को घसीटने वाली कांग्रेस सांसद फूलो देवी आजतक की पक्षकार मौसमी सिंह के साथ बातचीत में स्वीकार करती हैं कि पुरुष सांसदों ने धक्का दिया। लेकिन कांग्रेस की करीबी पक्षकार मौसमी सिंह फूलो देवी को मार्शल बोलने के लिए मजबूर करती है। सांसद फूलो देवी ने कहा कि पुरुष सांसदों ने सबसे ज्यादा धक्का-मुक्की की। उनके कारण ही कई महिलाएं पुरुष सांसदों के बीच फंस गईं। ऐसे में उन्हें और अन्य कई महिला सांसदों को चोटें आईं हैं। जब कांग्रेस सांसद फूलो देवी ने सच बोल दिया, तब मौसमी सिंह ने उन्हे पार्टी लाइन के अनुसार बोलने के लिए संकेत दिया। मौसमी सिंह के कहने पर जो फूलो देवी पहले विपक्षी सांसदों को जिम्मेदार बता रही थीं, मार्शलों पर झूठे आरोप लगाने लगीं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर आजतक की किरकिरी हो रही है।

48 मिनट में सरकार के विपक्ष पर 8 बड़े हमले
1. संसद में मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के अलोकतांत्रिक और हिंसक व्यवहार ने भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय की कहानी लिखी।

2. सरकार ने कई मौकों पर विपक्ष को चर्चा करने का प्रस्ताव भेजा, लेकिन हर बार हमारी अपील को सुना नहीं गया।

3. विपक्ष का चर्चा में कोई इंट्रेस्ट नहीं था और उन्होंने पहले से ही तय कर रखा था कि संसद को बाधित करना है।

4. विपक्षी सदस्यों का दुर्व्यवहार भारत के संसदीय इतिहास के लिए शर्मनाक है और उन्हें देश से इसके लिए माफी जरूर मांगनी चाहिए।

5. शर्मनाक और रुकावट डालने वाले व्यवहार के लिए विपक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।

6. पूरे देश ने संसद में विपक्ष का ड्रामा देखा है। विपक्ष ये पचा नहीं पा रहा है कि देश उनसे हार मान चुका है। माई वे या हाईवे वाली सोच की निंदा करते हैं। देश भी इस तरह की सोच की निंदा करता है।

7. राहुल गांधी कहते हैं कि ये देश में लोकतंत्र की हत्या है। राष्ट्र देख रहा है कि उन्होंने संसद में क्या किया। अगर उन्हें अपनी जिम्मेदारी का जरा सा भी अहसास है तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। सभापति भी इस पर सख्त एक्शन लें ताकि इस तरह की हरकतें दोहराई न जाएं।

8. विपक्ष ने आम जनता और टैक्स देने वालों की फिक्र नहीं की। घड़ियाली आंसू बहाने की जगह विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।

‘…लाशों से ढेर लगाएँगे’ – ‘1 जनवरी से बदल जाएगी किसान आंदोलन की प्लानिंग’ : कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिटटू की धमकी

आखिर कांग्रेस और किसान आंदोलन को समर्थन दे रही पार्टियां, अपनी राजनीति चमकाने के लिए कब तक अराजकता का माहौल बनाती रहेंगी? इसमें भी कोई दो राय नहीं कि किसान आंदोलन प्रारम्भ होने से पूर्व ही इस पर अराजक तत्वों का एकाधिकार हो चूका था। किसानों की आड़ में देश में अराजकता फ़ैलाने के समाचार सुनने को मिलते ही रहते हैं। 

ये लोग सत्ता में रहते और सत्ता से बाहर रहकर जनता को जनहित के नाम पर किस तरह पब्लिक एक्सचेकर पर डाका मार रहे हैं। नगर निगम से लेकर संसद तक कितने भूतपूर्व और वर्तमान जनसेवक हैं, जो शपथ लेते ही पेंशन के हक़दार बन जाते हैं, यानि हर माह करोड़ों रूपए पेंशन के नाम लूट रहे हैं, कोई जन प्रतिनिधि आयकर रिटर्न नहीं भरते क्यों? ये लोग क्या बादशाह हैं? जिस दिन से ये जान प्रतिनिधि टैक्स देना शुरू कर देंगे, खजाने में कोई कमी नहीं होगी, महंगाई भी बहुत कम हो सकती है, उसके लिए किसी में धरना अथवा प्रदर्शन करने का साहस नहीं, बस किस तरह देश में अराजकता फैलानी है, उसकी तरफ ध्यान रहता है।   

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच विवादित बयानों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने हिंसक टिप्पणी की है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार को धमकाते हुए कहा कि वो सोचते हैं कि हम यहाँ पर बैठे हैं इतने दिनों से तो बैठे-बैठे थक जाएँगे। उन्होंने कहा, “1 तारीख (जनवरी 1, 2021) के बाद हम लाशों के भी ढेर लगाएँगे। हम अपना खून भी देंगे। हम इसके लिए कहीं भी, किसी भी हद तक जा सकते हैं।”

रवनीत सिंह बिट्टू के इस बयान को लेकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। वो पंजाब के लुधियाना से लोकसभा सांसद हैं। वहाँ से वो लगातार दूसरी बार सांसद बने हैं। जहाँ 2014 में उन्हें 3 लाख वोट मिले थे, 2019 में उन्होंने 3.83 लाख वोट पाकर AAP और भाजपा को हराया। इससे पहले 2009 में वो आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद रह चुके हैं। कहा जाता है कि ‘किसान हितैषी’ दिखने के लिए उन्होंने ही होड़ लगाई थी, जिसके बाद हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया।

अब उन्होंने ऐलान किया है कि प्रदर्शनकारी जनवरी 1 के बाद एक नई प्लानिंग के साथ आएँगे। पंजाब में अकाली दल और कांग्रेस के बीच प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी और कट्टरता को लेकर एक होड़ सी मची हुई है और इसमें दिल्ली की आम आदमी पार्टी भी घुस गई है। एक के बाद एक विवादित बयान सामने आ रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी को जान की धमकी से लेकर अब ‘लाशों के ढेर लगाने’ की बातें की जा रही हैं।

कंगना रनौत और दिलजीत दोसाँझ के बीच ट्विटर पर चली बहस के दौरान भी बिट्टू का नाम आया था। जून 18, 2020 को की गई एक ट्वीट में बिट्टू ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह से माँग की थी कि जत्थेदार हरप्रीत सिंह, दिलजीत दोसाँझ और जैजी बी पर FIR की जाए, क्योंकि इन्होने SFJ और पन्नू के खालिस्तान की माँग का समर्थन किया है। कंगना ने उनकी इस ट्वीट का सहारा लेकर दिलजीत पर निशाना साधा था।

ये पहली बार नहीं है, जब प्रदर्शनकारियों का उनके नेताओं ने मरने-मारने की बात की हो। कुछ ही दिनों पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा जा सकता है, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी। 

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जिस तरह से इस प्रदर्शन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उससे

"जाओ कुत्तो,... भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा. जाओ मेरे खिलाफ केस कर दो.' MP बदरुद्दीन अजमल

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असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ)प्रमुख बदरुद्दीन अजमल कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के सवाल पर भड़क गए. उन्होंने पत्रकार का सिर फोड़ने तक की धमकी दे डाली. अजमल यहीं नहीं रुके, उन्होंने पत्रकार को कई अपशब्द कहे. पत्रकार ने सिर्फ इतना सा सवाल कर लिया कि वह 2019 के चुनाव में किस पार्टी का समर्थन करेंगे. यह सवाल अजमल को रास नहीं आया और अभद्रता पर उतारू हो गए. अजमल खुद असम की धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं.
एआईयूडीएफ चीफ बदरुद्दीन अजमल ने हाल ही में असम में हुए पंचायत चुनाव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी.  इस कार्यक्रम में उन्होंने दक्षिण सलमारा जिले के पंचायत चुनाव के विजेताओं का अभिनंदन किया. पत्रकार ने बाद में लोकसभा सदस्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
Badaruddin Ajmal
एक स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकार ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गठजोड़ की एआईयूडीएफ की योजना के बारे में सवाल किया. लोकसभा सदस्य ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, "हम दिल्ली में महागठबंधन (विपक्ष) के साथ हैं."  इसके बाद पत्रकार ने पूछा कि चुनाव के बाद कौन सी पार्टी जीतती है, क्या एआईयूडीएफ इसको देखकर अपना रुख बदलेगी. इस पर अजमल भड़क गए और कहा, "तुम कितना करोड़ रुपये दोगे ? (अपशब्द).. यह पत्रकारिता है? तुम जैसे लोग पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं. यह व्यक्ति पहले से ही हमारे खिलाफ है." इसके बाद अजमल ने और भी अपशब्द कहे. इसके बाद उन्होंने दूसरे पत्रकार का माइक छीनकर सवाल पूछने वाले पत्रकार को मारने की कोशिश की. यह दिखाती है जेहादी प्रवित्ति। 
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अजमल ने कहा, "जाओ कुत्तो, बीजेपी ने तुम्हें कितने पैसों में खरीदा है. भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा. जाओ मेरे खिलाफ केस कर दो.' वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि अजमल किस तर्ह से अपने सामने रखे टीवी चैनल का माइक उठाकर फेंक देते हैं. अजमल ने पत्रकार को धमकी देते हुए कहा कि यहां आसपास कई लोग हैं, जो मेरे एक इशारे पर तुम्हे खत्म कर देंगे. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अजमल के साथ बैठे उनके अन्य साथी हंसते रहे. असम में एआईयूडीएफ के कुल 13 विधायक हैं. पार्टी के 3 सांसद भी है. 2005 में पार्टी का गठन हुआ था लेकिन पार्टी ने तेजी से असम में अपना प्रभाव बढ़ाया है.