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शाइस्ता की तरह मुख़्तार अंसारी की बीवी अफशाँ भी फरार, उत्तर प्रदेश पुलिस ने रखा है 50000 रूपए का इनाम

                             माफिया मुख्तार अंसारी की बीवी पर भी है 50 हजार का इनाम
उत्तर प्रदेश की गाजीपुर पुलिस ने 12 इनामी अपराधियों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में माफिया मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी का नाम भी शामिल है। पुलिस ने उस पर 50  हजार 
रूपए का इनाम रखा है। माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन पर भी यूपी पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा हुआ है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही शाइस्ता फरार चल रही है।

कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है। जिसे भारत के वास्तविक इतिहास बताने वालों को साम्प्रदायिक और दंगाई बताने वालों को अपने दिमाग को खोलकर देखना ही समझना होगा कि जिस तरह वोट के भूखे नेता और उनकी पार्टियां माफियाओं के बर्बरता को दरकिनार कर उनकी मौत पर सियापा मचाया जा रहा है, ठीक इसी तरह इन छद्दम देशप्रेमियों ने आतताई मुगलों के खुनी इतिहास को पर्दा डाल उन्हें महान बताया था। कल तक किसी बादशाह की बेगम की तरह रहने वाली क्यों बिलों में मुंह छुपाये बैठी हैं? कल तक जेल में मुख़्तार के साथ शान से रहने वाली अफशां क्यों मुंह छुपाये इधर से उधर भाग रही है।  

माफिया मुख्तार अंसारी की बीवी अफशां को भी शाइस्ता की तरह पुलिस तलाश रही है। जानकारी के मुताबिक, अफशां पर गाजीपुर कोतवाली में 406, 420, 386 और 506 के तहत मामला दर्ज है। इसके अलावा मऊ के दक्षिण टोला थाने में उसपर गैंगस्टर एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज है। यह एफआईआर 31 जनवरी 2022 को दर्ज कराई गई थी। इस FIR को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बद मुख्तार की बीवी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अफशाँ को हाईकोर्ट भेजते हुए पुनर्विचार अर्जी दाखिल करने के निर्देश दिए थे। उच्च न्यायालय ने पुनर्विचार अर्जी को भी खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट से पुनर्विचार अर्जी खारिज होने के बाद पुलिस ने अफशाँ की तलाश तेज कर दी। अब जब गाजीपुर पुलिस ने जिले के 12 इनामी अपराधियों की सूची जारी की तो उसमें अफशाँ का भी नाम था। अफशँ की तलाश ईडी को भी है। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में ईडी मुख्तार अंसारी के बीवी को तलाश रही है। फिलहाल मुख्तार और उसका बेटा अब्बास जेल में है।

गाजीपुर पुलिस की लिस्ट में मुख्तार के एक अन्य सहयोगी जाकिर हुसैन का नाम भी शामिल है। जाकिर पर भी 50 हजार रुपए का इनाम घोषित है। पुलिस ने जिन 12 अपराधियों की लिस्ट जारी की है उसमें अफशाँ और जाकिर के अलावा सद्दाम हुसैन, सोनू मुसहर, अंकित राय, अंकुर यादव, अशोक यादव, अमित राय, अंगद राय और विरेंद्र दुबे जैसे अपराधियों के नाम शामिल हैं। पुलिस की तरफ से इन सभी पर 25-25 हजार रुपए का इनाम रखा गया है।

माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार चल रही है। यूपी पुलिस ने उसपर पहले 25 हजार रुपए का इनाम रखा था बाद में इसे बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया था। बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या से पहले अतीक का बेटा असद भी एनकाउंटर में मारा जा चुका था।

2019 में योगी को चूहा बताने वाले ही बन गए चूहा

हर प्राणी को समझना चाहिए कि "बड़ा नवाला खा लो, बड़ा बोल मत बोलो", क्योकि समय से बड़ा बलवान और पाप से बड़ा कलंक कोई दूसरा नहीं होता। योगी सरकार से पूर्व तक जिन बाहुबलियों ने अपने सियासतखोरों की छत्रसाया में शेर बन जिसे चूहा कहकर मजाक बनाते थे, समय ने ऐसी पलटी मारी कि कल के बाहुबली आज खुद चूहे बन गए और मजे की बात यह है कि उनके आका भी उनकी कोई सहायता कर पा रहे। क्योकि उन्हें भी डर है कि पता नहीं कौन-सी फाइल खोल हमें ही नाप दे। अपने 4 दशक के पत्रकारिता अनुभव में योगी आदित्यनाथ जैसा कठोर प्रशासक उत्तर प्रदेश को नहीं मिला। पिछली सरकारों ने प्रदेश को जिस अंधकार में झोंक दिया था, उस अंधकार से प्रकाश में योगी जैसा ही सख्त मुख्यमंत्री ही लाने में सक्षम है। और उस अंधकार से निकलने के लिए कम से कम योगी को 10 वर्ष और चाहिए।   
उत्तर प्रदेश का माफिया विधायक मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश की बांदा जेल पहुँच गया है। कल 100 लोगों की टीम उसे पंजाब की रोपड़ जेल से लेकर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल आई। इस स्थानांतरण के दौरान मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अफजल ने कहा, “उनकी मंशा सही नहीं है। बांदा जेल में उसे चाय में जहर मिला कर दिया गया था… हमें न्यायपालिका में पूरा भरोसा है। हमने उसे स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवाने के लिए याचिका डाली है।”

अफजल ने कहा, “मुझे आशा है कि सुप्रीम कोर्ट इस बात को सुनिश्चित करेगा कि जो लोग सत्ता में हैं, वह किसी को मारें नहीं। पब्लिक रैली में भाजपा राज्य अध्यक्ष ने (विकास दुबे के संदर्भ में) कहा था, ‘गाड़ी यूपी के किस बॉर्डर पर पलटेगी, ये नहीं बताऊँगा।’ वहीं एक मंत्री ने कहा, ‘गाड़ी तो पलट कर रहेगी।’”

अंसारी आगे बोले, “यदि वे मनमाने ढंग से कुछ करते हैं, तो ऐसे तानाशाहों के अंत का समय निकट है। तानाशाही खत्म करने के लिए बलिदान की जरूरत है। यदि ऐसा कुछ हुआ, तो मैं सोचूँगा कि मुख्तार, तानाशाह सरकार के अंत के लिए बलिदान हो गया।”

मुख्तार अंसारी को 900 किमी का रास्ता तय कर बांदा लाया गया है। इस काम के लिए यूपी की योगी सरकार को पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने होना पड़ा। बहुत दलीलों के बाद अंसारी को बांदा जेल में भेजा गया। वह एक वसूली केस में साल 2019 से रोपड़ जेल में बंद था।

मुख्तार के ऊपर उत्तर प्रदेश भर में 52 से ज्यादा केस होने के बावजूद अफजल अंसारी उनके साथ अच्छे बर्ताव और सभी सुविधाओं की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा जिन योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल को आज वह तानाशाही बता रहे हैं और अपने भाई के लिए चिंता प्रकट कर रहे हैं, उनके लिए साल 2019 में अफजल अंसारी चूहे शब्द का प्रयोग कर चुके हैं।

अफजल ने साल 2019 में द लल्लटॉप को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था, “मुलायम सिंह ने सिर्फ 5 दिन के लिए अंदर किया था और योगीजी भोएँ भोएँ संसद में खड़े होकर रोए थे कि दुनिया को लगा पता नहीं क्या हो गया। ये तो कुछ बड़े कमजोर दिल का चूहा है। ये दूसरे का क्या उपहास उड़ाएगा।”

अफजल अंसारी, मुख्तार अंसारी के भाई हैं। अफजल से पहले मुख्तार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट के पास जाकर अपना डर जताया था। वहीं सोशल मीडिया पर भी कुछ ‘बाप मास्टर’ गैंग वाले एक्टिव हुए जिन्होंने सोशल मीडिया पर ये बताने की कोशिश की, कि कैसे मुख्तार स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है। 

इंडिया मुस्लिम हिस्ट्री ने अपने ट्वीट में लिखा था कि मुख्तार संभव है कि कुछ लोगों के लिए एक अभिशाप हो, लेकिन वह स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है। ट्वीट में कहा गया था कि  मुख्तार अंसारी के दादा डॉ मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष थे और दादा के भाई भी बड़े हकीम थे।

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मुख्तार अंसारी से कांग्रेस बाहुबली नेता अजय राय को जान का खतरा

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मुख्तार अंसारी से कांग्रेस बाहुबली नेता अजय राय को जान का खतरा

पूर्व उप राष्ट्रपति व कांग्रेस नेता हामिद अंसारी भी मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। इस खानदानी कनेक्शन के चलते मुख्तार की कांग्रेस और कई अन्य सियासी दलों में ठीक-ठीक जान पहचान और रूतबा है। कुछ लोग जहाँ मुख्तार के लिए भावनात्मक माहौल बनाने के लिए इन बिंदुओं का प्रयोग कर रहे हैं तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन सभी कनेक्शन को देखकर अंदाजा लगा रहे हैं कि पंजाब सरकार ने मुख्तार को बचाने के लिए इतनी लड़ाई क्यों लड़ी। वैसे हामिद अंसारी की राष्ट्रीयता को बेनकाब रॉ अधिकारी यादव ने अपनी पुस्तक कर चुके हैं, कि किस तरह ईरान में राष्ट्रदूत रहते वह पाकिस्तान की सहायता कर रहे थे। 

उत्तर प्रदेश : मुलायम सरकार ने मुख्तार अंसारी पर POTA लगाने वाले जिस DSP को भेज दिया था जेल, योगी सरकार ने वापस लिया केस

                              योगी आदित्यनाथ, शैलेन्द्र कुमार सिंह और मुख़्तार अंसारी (बाएँ से दाएँ)
उत्तर प्रदेश के खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया है। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ महीने बाद ही वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ DM कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लालजी की तरफ से डीएम दफ्तर के रेस्ट रूम में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और हंगामा करने की FIR दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तुरंत चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और शैलेन्द्र को जेल जाना पड़ा था। अब इस केस को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया है। शैलेन्द्र ने इस पर ख़ुशी जताते हुए कहा:

“राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था और मुझे जेल में डाल दिया गया था। लेकिन, जब योगी जी की सरकार बनी तो उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे CJM न्यायालय द्वारा मार्च 6, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की प्रति आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा।”

2004 में जब मैनें माफिया मुख्तार अंसारी पर LMG केस में POTA लगा दिया था, तो मुख्तार को बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने मेरे ऊपर केस खत्म करने का दबाव बनाया। जिसे न मानने के फलस्वरूप मुझे Dy SP पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। इस घटना के कुछ महीने बाद ही तत्कालीन सरकार के इशारे पर, राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में अपराधिक मुकदमा लिखा गया और मुझे जेल में डाल दिया गया।
लेकिन जब मा. योगी जी की सरकार बनी तो, उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे मा. CJM न्यायालय द्वारा 6 मार्च, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। मा. न्यायालय के आदेश की नकल आज ही प्राप्त हुई।
मैं और मेरा परिवार मा. योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा। संघर्ष के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी शुभेक्षुओं का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
जय हिंद 🙏

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शैलेन्द्र सिंह ने संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। सहायक अभियोजन अधिकारी की तरफ से दी गई रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (वाराणसी) ने मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी किया। फरवरी 2004 में ततकालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री को भेजे पत्र में शैलेन्द्र ने आरोप लगाया था कि LMG जब्ती केस में मुख़्तार अंसारी का नाम हटाने के लिए उन पर ऊपर से बड़ा दबाव बनाया जा रहा है।

पंजाब की जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के उत्तर प्रदेश प्रत्यर्पण में वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार कई महीनों से अड़ंगा लगा रही थी। 5 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गैंगस्टर मुख्तार अंसारी दो सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि बांदा जेल के अधीक्षक चिकित्सा सुविधाओं की देखरेख करेंगे। पंजाब सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि किसी राज्य को इस प्रकार के स्थानांतरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

BSP नेता मुख्तार अंसारी के बेटे के घर में छापेमारी, 6 विदेशी बंदूकों सहित 4431 कारतूस बरामद

अब्बास अंसारी
अब्बास अंसारी के घर से मिले कई अवैध हथियार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अभी दो ही दिन पूर्व लेख शीर्षक "जनसेवा के नाम लूट मचाते नेता" लिखा था, लेकिन अभी प्राप्त समाचार के अनुसार नेता गुण्डागर्दी भी करते हैं, क्या ऐसे नेताओं से देश अथवा जनसेवा की कामना की जा सकती है? वैसे अक्सर जमीन से जुड़े मुद्दों पर लिखता ही रहता हूँ, उसमें से कुछ का लिंक नीचे दे रहा हूँ।  
लगभग तीन दशक निस्स्वार्थ भाव से जनसेवा एवं राजनीति में आते थे, परन्तु आज स्थिति एकदम विपरीत है। इसमें दोषी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ चुनाव आयोग भी बराबर के दोषी हैं। 
चुनाव आयोग आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के नामांकन रद्द क्यों नहीं करता?
अगर किसी पार्टी ने सत्ता के लालच में किसी आपराधिक छवि वाले को टिकट दिया है, चुनाव ऐसे अपराधियों के नामांकन रद्द क्यों नहीं करता? क्या चुनाव आयोग जनता की बजाए राजनीतिक दलों के हित में काम करता है? चुनाव में ऐसे ही लोग बूथ कैप्चर कर भरी मतों से जीत कर जनता और सरकार पर अपना राज चलाते हैं। ऐसे में एक और ज्वलंत प्रश्न होता है जब आपराधिक छवि वाले सरकारी सदन पहुँच सकते हैं, फिर आपराधिक छवि वाले सरकारी नौकरी में क्यों नहीं नियुक्त हो सकते? फिर किस कारण आपराधिक छवि वालों को सरकारी नौकरी क्यों नहीं मिलती? यह बात इस बात को भी प्रमाणित करती है कि देश में दो कानून चलते हैं, एक जनमानस के लिए और दूसरा राजनीतिक पार्टियों के लिए। 
उत्तर प्रदेश के बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के दिल्ली स्थित घर पर लखनऊ पुलिस ने गुरुवार (अक्टूबर 17, 2019) को छापेमारी करके 6 बंदूक और 4,431 कारतूस बरामद किए।
बरामद हथियारों की कीमत लाखों में बताई जा रही है। इनमें इटली, ऑस्ट्रिया और स्लोवेनिया मेड रिवॉल्वर, बंदूक और कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा अब्बास के पास से मैंग्नम की रायफल, अमेरिका मेड रिवॉल्वर, ऑस्ट्रिया की स्लाइड और ऑटो बोर पिस्टल भी इस छापेमारी में जब्त हुई है।
जानकारी के मुताबिक अभी हाल ही अब्बास पर एक लाइसेंस पर एक से ज्यादा हथियार खरीदने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसे यूपी पुलिस ने महानगर कोतवाली में दर्ज किया था। इसके अलावा उस पर फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस को दिल्ली ट्रांसफर कराने का भी मुकदमा दर्ज था।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट
इन शिकायतों के आधार पर ही लखनऊ पुलिस ने अब्बास के दिल्ली में वसंत कुंज स्थित घर पर छापेमारी की और विदेशी हथियारों के साथ 4,431 के करीब कारतूसें बरामद कीं। इसके अलावा कई अन्य प्रकार के संदिग्ध उपकरण भी अब्बास के घर से बरामद हुए हैं।
मामले से संबंधित जारी प्रेस नोट के अनुसार पुलिस ने मुख्तार अंसारी के बेटे पर धारा 420, 467, 468, 471, और 30 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन नोट में हथियार बरामदगी के संबंधित सभी जानकारी दी गई हैं।
इसके अनुसार पुलिस ने इस छापेमारी में इटली से लाई गई एक 12 बोर की डबल बैरल, स्लोवेनिया से लाई गई 12 बोर सिंगल बैरल गन, इंडियन आर्म्स कॉर्प लखनऊ से खरीदी हुई 300 बोर रायफल, दिल्ली से खरीदी हुई 12 बोर डबल बैरल गन, शस्त्रागार मेरठ से खरीदी गई 357 बोर रिवॉल्वर Ruger, GP100 भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार अब्बास अंसारी ने साल 2012 में लखनऊ से ही डबल बैरल बंदूक का लाइसेंस प्राप्त किया था। इसके बाद उसने इसी के आधार पर अन्य हथियारों का भी सौदा किया और पुलिस को सूचित किए बिना दिल्ली पहुँच गया।
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क्या है संविधान का औचित्य ? जब कभी भी देश में कोई विवाद होता है समस्त राजनीतिक दल संविधान की दुहाई देते नज़र आते हैं , .....

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज हर कांग्रेस विरोधी कांग्रेस का विरोध करता नज़र आता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कांग्रेस...



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मतदान वाले दिन सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा इतनी अधिक भीड़ होती है कि जनता को इधर से उधर जाने में बड़ी कठिनाई होती है। ....

लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अब्बास के ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई और जानकारी के आधार पर अब्बास के निवास स्थान पर छापेमारी हुई। जिसमें अब्बास पर लगाए आरोप सही मिले।