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‘जिंदा है LTTE वाला प्रभाकरन’: पाझा नेदुमारन, पूर्व कांग्रेस नेता का दावा, श्रीलंका ने 2009 में मार गिराने का किया था दावा

आतंकवादी संगठन लिट्टे चीफ प्रभाकरन 
आतंकवादी संगठन लिट्टे के चीफ प्रभाकरन के जिंदा होने का दावा किया गया है। यह दावा पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और ‘वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ तमिल’ के अध्यक्ष पाझा नेदुमारन ने किया है। नेदुमारन कहा है कि प्रभाकरन उनके संपर्क में है और जल्द ही सामने आएगा। श्रीलंकाई सरकार ने मई 2009 में प्रभाकरन के मारे जाने की घोषणा की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 फरवरी 2023 को तमिलनाडू के तंजावुर में मीडिया से बात करते हुए पाझा नेदुमारन ने कहा है कि श्रीलंका की वर्तमान स्थिति और राजपक्षे सरकार के खिलाफ विद्रोह को देखते हुए प्रभाकरन के सामने आने का सही समय आ गया है। प्रभाकरन जल्द ही सबके सामने आएगा।

पाझा नेदुमारन ने यह भी कहा है कि उन्हें दुनिया भर की तमिल आबादी के सामने यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि प्रभाकरन बहुत अच्छा काम कर रहा है और वह जिंदा है। इससे प्रभाकरन को लेकर चल रहीं अफवाहों को विराम मिलेगा। प्रभाकरन जल्द ही तमिलों के बेहतर जीवन के लिए कुछ नया करेगा। इसलिए दुनिया भर के तमिलों को एकजुट हो जाना चाहिए।

नेदुमारन ने आगे कहा है कि प्रभाकरन और लिट्टे ने भारत का विरोध करने वाले किसी भी देश को कभी भी अपनी जमीन पर पैर नहीं रखने दिया। उन्होंने कहा, “न ही ऐसे किसी देश से उसका कोई संबंध रहा जो भारत का विरोधी हो। इसीलिए, भारत सरकार को श्रीलंका में चीन की मजबूत होती स्थिति को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह प्रभाकरन के परिवार के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाकरन फिलहाल अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहा है। उसको लेकर यह जानकारी वह प्रभाकरन के परिवार की स्वीकृति के बाद दे रहे हैं।

वेलुपिल्लई प्रभाकरन श्रीलंकाई तमिल गुरिल्ला और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE) का संस्थापक है। वह श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में एक स्वतंत्र तमिल राज्य बनाने की माँग करता था। लिट्टे के कारण करीब तीन दशक तक श्रीलंका गृह युद्ध की आग में जलता रहा। हालाँकि इसके बाद श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में प्रभाकरन को मौत के घाट उतार दिया।

प्रभाकरन की मौत को लेकर अलग-अलग तरह के दावे होते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि सेना से घिरने के बाद उसने खुद को गोली मार ली थी। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में सेना द्वारा उसको मौत के घाट उतारने की बात कही गई थी। हालाँकि, बीते 14 साल में प्रभाकरन के जीवित होने को लेकर पहली बार दावा किया गया है।

चीन के कर्ज में फँस कंगाली के कगार पर पहुँचा श्रीलंका: 500000 लोग गरीबी रेखा से नीचे, 200000 की गई नौकरी

श्रीलंका आज कंगाली की कगार पर खड़ा है। आर्थिक और मानवीय आपदा गहरा गई है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमत आसमान छू रही। रिकॉर्ड स्तर पर महँगाई है। आखिर श्रीलंका की यह हालत हुई कैसे?

दरअसल, श्रीलंका की अर्थव्यवस्था सबसे अधिक पर्यटन पर आश्रित है। इस पर कोरोना महामारी के कारण ग्रहण लग गया है। दूसरी ओर श्रीलंका को चीन से कर्ज लेना काफी महँगा पड़ रहा है। उसके कर्ज चुकाते-चुकाते श्रीलंका आज आर्थिक बदहाली की स्थिति में पहुँच गया है। बताया जा रहा है कि देश का खजाना खाली होने को है और वह जल्द ही दिवालिया हो सकता है।

विश्व बैंक का अनुमान है कि श्रीलंका में महामारी की शुरुआत के बाद से 5,00,000 लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में महँगाई 11.1 प्रतिशत की रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया। बढ़ती महँगाई की वजह से लोगों की प्लेट से खाने के सामान दूर होने लगे हैं। वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजपक्षे सरकार द्वारा श्रीलंका में आर्थिक आपातकाल घोषित करने के बाद सेना को चावल और चीनी सहित आवश्यक वस्तुओं को सुनिश्चित करने की शक्ति दी गई थी, हालाँकि इससे कुछ खास फायदा नहीं हुआ।

श्रीलंका के लिए सबसे अधिक दबाव वाली समस्याओं में से एक विशेष रूप से चीन के ऋण का भारी बोझ है। उस पर चीन का 5 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज है और पिछले साल उसने अपने गंभीर वित्तीय संकट से निपटने में मदद के लिए बीजिंग से अतिरिक्त 1 अरब डॉलर का ऋण लिया था, जिसका भुगतान किस्तों में किया जा रहा है। अगले 12 महीनों में सरकारी और निजी क्षेत्र में श्रीलंका को घरेलू और विदेशी ऋणों में अनुमानित 7.3 बिलियन डॉलर चुकाने की आवश्यकता होगी, जिसमें जनवरी में 500 मिलियन डॉलर अंतर्राष्ट्रीय सॉवरेन बांड पुनर्भुगतान भी शामिल है। हालाँकि, नवंबर तक उपलब्ध विदेशी मुद्रा भंडार केवल 1.6 बिलियन डॉलर था।

विपक्षी सांसद और अर्थशास्त्री हर्षा डी सिल्वा ने हाल ही में संसद में कहा था कि अगले साल जनवरी तक विदेशी मुद्रा भंडार 437 मिलियन डॉलर होगा, जबकि फरवरी से अक्टूबर 2022 तक सेवा के लिए कुल विदेशी ऋण 4.8 बिलियन डॉलर होगा, जिससे राष्ट्र पूरी तरह से दिवालिया हो जाएगा। सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजीत निवार्ड काबराल ने हालाँकि सार्वजनिक तौर पर कहा है कि श्रीलंका अपने ऋणों को चुका सकता है।

श्रीलंका में बुर्का और 1000+ मदरसों को बैन करने की तैयारी

अप्रैल 2019 में इस्लामिक आतंकवाद ने श्रीलंका को दहला दिया था। उसके बाद से ही वह इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर लगातार सख्ती दिखा रहा है। इसी क्रम में वह अब बुर्का पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। साथ ही 1000 से ज्यादा इस्लामिक स्कूल (मदरसा) भी बंद किए जाएँगे।

श्रीलंका के पब्लिक सिक्योरिटी मंत्री सरत विरासेकेरा (Sarath Weerasekera) ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (12 मार्च 2021) को उन्होंने कैबिनेट से मँजूरी के लिए इससे संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।

विरासकेरा ने बताया, “हमारे शुरुआती दिनों में मुस्लिम महिलाएँ और लड़कियाँ बुर्का नहीं पहनती थीं। यह मजहबी अतिवाद का प्रतीक है जो हाल में ही सामने आया है। हम इसे निश्चित तौर पर बंद कर देंगे।” उल्लेखनीय है कि बौद्ध बहुल देश में चर्च और होटलों पर 2019 में हुए आतंकी हमलों के बाद बुर्का पहनने पर अस्थायी तौर पर पाबंदी लगा दी गई थी। इन हमलों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

विरासेकेरा ने कहा कि सरकार की योजना 1000 से ज्यादा ऐसे मदरसों को बंद करने की भी है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी स्कूल खोल कर बच्चों को वह नहीं पढ़ा सकता जो वह पढ़ाना चाहता है।”

इससे पहले पिछले साल कोविड संकट के दौरान श्रीलंकाई सरकार ने संक्रमण से मौत होने पर मुस्लिमों की इच्छा के विपरीत उन्हें दफनाने की बजाए उन्हें जलाने के आदेश दिए थे। अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों की आलोचना के बाद इस साल इस आदेश को हटा लिया गया था।

2019 के हमले के बाद गोटाभाया राजपक्षे श्रीलंका के राष्ट्रपति चुने गए थे। लिट्टे के सफाए के लिए जाने जाने वाले राजपक्षे ने सत्ता सँभालते ही इस्लामिक आतंकवाद से सख्ती से निपटने की बात कही थी। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “लिट्टे से हम काफ़ी अच्छी तरह से निपटे। हमारी खुफिया एजेन्सियाँ उस आंदोलन की पृष्ठभूमि, नेताओं, तौर-तरीकों और इतिहास से अच्छी तरह अवगत थे। खुफिया एजेंसियों को उनके नेताओं के ठिकानों के बारे में पता था। लेकिन, इस्लामी आतंकवाद को लेकर दुर्भाग्य से ऐसा कुछ भी नहीं है। यह नया खतरा है। इससे निपटने के लिए हमें और क्षमता विकसित करनी पड़ेगी। लेकिन मैं अपने देश में इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं दूँगा और कभी बर्दाश्त नहीं करूँगा।” इस दिशा में उन्होंने भारत के साथ मिलकर काम करने की बात कही थी।

यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड भी बुर्का पर बैन की तैयारी कर रहा है। पिछले दिनों बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध को लेकर वहाँ हुए रेफेरेंडम में 51% वोटरों ने इसका सम​र्थन किया था। स्विट्जरलैंड के 26 में से 15 प्रांतों में पहले से ही ऐसे प्रतिबंध लागू हैं।

स्लोवाकिया में इस्लाम पूर्ण रूप से प्रतिबंधित ; श्रीलंका ने लगाया बुर्का पर बैन

स्लोवाकिया
आज के समय में इस्लाम तेजी से दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। यह धर्म ना सिर्फ इस्लामिक देशों में, बल्कि भारत जैसे हिन्दू प्रधान देश में भी मुस्लिमों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। ऐसे में, यूरोप में एक देश ऐसा भी है, जहाँ इस्लाम को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। 
स्लोवाकिया से पूर्व चीन ने इस्लाम पर नकेल डालने के साथ, चर्चा है कि कुरान भी अब चीन देश के अनुसार लिखा जाने पर मंथन चल रहा है। यानि अगर चीन इस उद्देश्य में सफल हो गया उस स्थिति में चीन का इस्लाम विश्व से बिल्कुल अलग होगा। वहां अज़ान, नमाज और रोजे पर तो प्रतिबन्ध है। 
यूरोप में स्थित स्लोवाकिया (Slovak Republic) नामक देश में मुस्लिमों को कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस देश की पार्लियामेंट ने ही इस्लाम पर बैन लगा दिया है। ख़ास बात यह है कि स्लोवाक नेशनल पार्टी (एसएनएस) के इस विधेयक को पक्ष और विपक्ष ने मिलकर दो-तिहाई बहुमत से पारित किया था। यानी अब वहाँ कोई भी नागरिक खुद को मुस्लिम रजिस्टर नहीं करा सकता और स्लोवाकिया में धर्म की लिस्ट में अब इस्लाम का नाम नहीं आएगा।
उनका मानना था कि बढ़ते हुए इस्लामिक कट्टरपंथ और चरमपंथ के पीछे इस्लाम की वह शिक्षा है, जो मस्जिदों और मदरसों के जरिए लोगों के बीच पहुँचकर समाज में नफरत पैदा कर रही है।
2016 में इस्लाम धर्म को स्वीकार न करने वाला स्लोवाकिया दुनिया का पहला देश बन चुका था। यह देश मानता है कि इस्लाम असंवैधानिक है। उस समय स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको ने बयान दिया था कि वो इस्लाम को धर्म नहीं मानते और इसीलिए स्लोवाकिया में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं। इसी के साथ उन्होंने अपने देश में किसी भी मुस्लिम को शरण देने से भी इंकार कर दिया था।
इस प्रकार स्लोवाकिया देश सिर्फ अपनी बॉर्डर में सिर्फ ईसाई माइग्रेंट्स को ही आने की इजाजत देता है। यानी, अगर देश की सीमा पार करने की कोशिश कोई मुस्लिम करता है, तो उसे भगा दिया जाता है। इससे साफ़ है कि ये देश मुस्लिमों को सीमा में नहीं आने देना चाहता।
2016 के बाद से ही, स्लोवाक-कानून ने इस्लाम को राजकीय मान्यता प्राप्त धर्म बनना असंभव कर दिया था। जिससे यह देश यूरोप के सभी देशों में इस्लाम के खिलाफ सबसे कठोर कानूनों वाला देश बन गया है। हाल ही के कुछ समय में यूरोप भर में हुए सिलसिलेवार इस्लामी आतंकी हमलों के बाद इस महाद्वीप में मुस्लिम विरोधी भावना घर कर गई है, जिसके चलते वहाँ पर नए अप्रवासी विरोधी दलों का भी जन्म हो रहा है।
ज्ञात हो कि भारत जैसे देश में आज भी नागरिकता संशोधन (CAA) जैसे कानून बहस का विषय बने हुए हैं, जिसमें कि विदेशों से आने वाले हिन्दू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात कही गई है। बावजूद इसके इसे इस्लाम धर्म के खिलाफ बताने की पूरी योजनाएँ शाहीन बाग़ जैसे विरोध प्रदर्शनों के द्वारा बनाई जा रही हैं।
श्रीलंका ने लगाया बुर्का पर बैन
कुछ पिछले साल ही श्री लंका सरकार ने चेहरा ढँकने वाले बुर्क़ा का प्रयोग बैन कर दिया था। श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गठित संसदीय समिति ने तत्काल प्रभाव से बुर्का पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की है। समिति ने धार्मिक और जातीय आधार पर राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण भी रद्द करने का प्रस्ताव पेश किया है। समिति की तरफ से यह फैसला ईस्टर आतंकी हमले के मद्देनजर उठाया गया है। गौरतलब हो कि इस आतंकी हमले में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।  समाचार पत्र ‘डेली मिरर’ के अनुसार विशेष रिपोर्ट के तौर पर गुरुवार को संसद में पेश किए गए प्रस्ताव में ईस्टर हमलों के बाद 14 विवादास्पद मुद्दों के हल करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार कई देश पहले ही बुर्के पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।
इसमें सुझाव दिया गया है कि पुलिस के पास यह अधिकार होना चाहिए कि वह सार्वजनिक स्थानों पर किसी व्यक्ति को पहचानने के लिए उसे चेहरा दिखाने के लिए कह सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वह व्यक्ति पुलिस के अनुरोध पर अमल नहीं करता तो उसे बिना वारंट गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

प्रस्ताव में देश के चुनाव आयोग से जाति और धर्म पर आधार राजनीतिक दलों के पंजीकरण को निलंबित करने के लिए एक कानून बनाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्रों को तीन साल के भीतर शिक्षा मंत्रालय के तहत सामान्य स्कूल प्रणाली में भेजा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में मदरसों को मुस्लिम धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के तहत विनियमित करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है।
गौरतलब है स्थानीय आतंकवादी समूह नेशनल तौहीद जमात के नौ आत्मघाती हमलावरों ने ईस्टर संडे पर तीन गिरजाघरों और तीन आलीशान होटलों को निशाना बनाया था, जिसमें 11 भारतीयों समेत 258 लोगों की मौत हो गई थी।
एक इमरजेंसी क़ानून के माध्यम से इस नियम को लागू करते हुए सरकार ने कहा कि किसी भी प्रकार से ऐसी चीजों का सार्वजनिक तौर पर उपयोग प्रतिबंधित रहेगा, जिससे व्यक्ति की पहचान छुपती हो। आपको बता दें कि श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ़्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्क़ा पहनने पर प्रतिबंध है।
इस्लामिक चरमपंथियों के बढ़ते भय और लगातार बढ़ते प्रवासी संकट के बीच इस देश के राजनेताओं और विधाई शक्तियों ने इस्लाम धर्म के प्रति रुख में बदलाव लाया है। वर्ष 2016 में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको की सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्लोवाकिया में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है।
वर्तमान में, स्लोवाकिया एकमात्र ऐसा यूरोपियन यूनियन (EU) सदस्य राज्य है, जहाँ कोई भी वैध आधिकारिक मस्जिद नहीं है। बताया जाता है कि इस देश में मुस्लिम समुदाय किराए के घरों या फिर अस्थायी प्रार्थना घरों में ही मिलते हैं।

कश्मीर में कर्फ्यू पर रोने वालों ने श्रीलंका टीम को सुरक्षित निकालने के लिए कराची में कर्फ्यू क्यों लगाया?

गौतम गंभीर, पाकिस्तान, कश्मीर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
साल 2009 में श्रीलंका की टीम पर हुए आतंकवादी हमले के 10 साल बाद अब पाकिस्तान में एक बार फिर दोबारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का आगाज हुआ है। हालाँकि, हमले के बाद पाक टीम का होम ग्राउंड दुबई शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच चल रही एक दिवसीय सीरीज ने पाकिस्तान में इस खेल की वापसी करवा दी हैं। बताया जा रहा है कि श्रीलंका टीम इस दौरे को लेकर काफ़ी डरी हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें आला दर्जे की सुरक्षा दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार करीब 30 से ज्यादा गाड़ियों के बीच श्रीलंकाई टीम को कराची स्टेडियम पहुँचाया गया। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खुद पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर द्वारा शेयर की गई। हम देख सकते हैं कि इन गाड़ियों में बख्तरबंद गाड़ियों से लेकर बुलेटप्रुफ गाड़ियाँ मौजूद हैं। गंभीर ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा कि इतना कश्मीर किया कि कराची भूल गए।
इसके अलावा खुद वीडियो बनाने वाले दो लोगों की बातचीत सुनकर ऐसा लग रहा है, जैसे पाकिस्तान की इन हरकतों ने उन्हें भी हँसने पर मजबूर कर दिया हो। वीडियो में ये लोग गाड़ियों की गिनती करते हुए कहते नजर आ रहे हैं, “आज हम आपको दिखाएँगे कर्फ्यू लगाकर मैच कैसे खेला जाता है।”

वीडियो की शुरुआत होते ही वीडियो बनाने वाले दोनों पाकिस्तानी सामने से आती बाइक को ‘धूम’ वाली बाइक बताते हैं, फिर गाड़ियों को गिनते हुए हैरान भी होते हैं और मजाक भी उड़ाते हैं। अंत में एंबुलेंस देखकर कहते हैं कि इतनी सुरक्षा के बाद भी अगर कोई मसला हो जाता है तो इन पर एंबुलेंस की भी व्यवस्‍था है। इसके बाद दोनों ठहाके मारकर पाकिस्तान की इस हरकत पर हँसने लगते हैं।

खैर, गंभीर के ट्वीट के बाद बाकी अन्य लोग इस वीडियो को देखकर पाकिस्तान के सुरक्षित जगह होने पर सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतनी सुरक्षा व्यवस्था के साथ श्रीलंकाई टीम को स्टेडियम पहुँचाया जा रहा है या फिर जंग लड़ने के लिए।
इतनी सिक्योरिटी देखकर यूजर्स मजाक उड़ा रहे है कि लगता है जैसे इमरान खान की सारी सिक्योरिटी हटाकर बाजवा ने श्रीलंका टीम को दे दी हैं। वहीं कुछ गंभीर द्वारा शेयर इस वीडियो पर लिख रहे हैं कि कराची में कर्फ्यू लगाने वाले पूछ रहे हैं कि कश्मीर में कर्फ्यू क्यों है?
पाकिस्तान में असुरक्षा को लेकर लोगों का कहना है कि बिना हाई सिक्योरिटी के ये कोई आयोजन नहीं कर सकते हैं और दूसरे की जगह के लिए लड़ाई करने चले हैं। अगर ये आतंकवाद पर कोई कदम लेते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।
लोगों ने गौतम गंभीर को पाकिस्तान की हकीकत शेयर करने के लिए धन्यवाद भी किया है और कहा है कि हम देख सकते हैं पाकिस्तान कितना असुरक्षित देश हैं।
दस साल से ज्यादा समय के बाद श्रीलंकाई टीम ने पाकिस्तान की सरजमीं पर कोई वनडे मैच खेला था। हालांकि, इस मुकाबले में श्रीलंकाई टीम को पाकिस्तान की टीम ने बाबर आजम के शतक और उस्मान शिनवारी की घातक गेंदबाजी की बदौलत करारी शिकस्त दी।
साल 2009 में पाकिस्तान के लाहौर में श्रीलंका की टीम बस पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में श्रीलंकाई टीम के कई खिलाड़ी घायल हुए थे, जबकि कई अन्य लोगों की मौत हुई थी। इस खौफनाक मंजर से निकलने के बाद श्रीलंकाई टीम ने कभी भी पाकिस्तान दौरे पर जाने की हिम्मत नहीं दिखाई, लेकिन श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ समझौता किया अपनी युवा टीम को पाकिस्तान दौरे पर भेज दिया, जहां टीम को 3-3 मैचों की टी20 और वनडे सीरीज खेलनी है।
इन दस सालों में पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक टी20 मैच खेला गया है, लेकिन पहली बार सोमवार 30 सितंबर को कोई वनडे मैच खेला गया। इससे पहले जब श्रीलंका की टीम कराची स्टेडियम के लिए होटल से रवाना हुई तो पाकिस्तान ने मेहमान टीम को कड़ी सुरक्षा दी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने श्रीलंकाई टीम को अपने यहां पूरी सुरक्षा देने का वादा किया था। इस पर खरा उतरते हुए पाकिस्तान सरकार ने बोर्ड को तीन दर्जन से ज्यादा(करीब 42) गाड़ियां प्रदान कीं, जिनमें हथियारों से लैस जवान मौजूद थे।
पाकिस्तान ने बस श्रीलंकाई की टीम सुरक्षा में टैंक ही नहीं भेजे बाकी सबकुछ भेज दिया। बहुत कम देखा जाता है कि किसी देश में खिलाड़ियों की इतनी सुरक्षा हो, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपना यहां इंटरनेशनल क्रिकेट कराने के लिए मेहमान टीमों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली।
इससे पहले कम सुरक्षा की वजह से श्रीलंका की टीम बस पर हमला हो गया था। इसके बाद से पाकिस्तान में कोई टेस्ट मैच नहीं हो सका है। यहां तक कि कोई बड़ी टीम भी पाकिस्तान दौरे पर नहीं गई है। जिम्बाब्वे, श्रीलंका, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड जैसे टीमें ही पाकिस्तान में टी20 सीरीज खेलने गई हैं। हालांकि, ये टीम भी एक हफ्ते से कम समय में वहां से लौट आई हैं। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)

World Cup 2019 : पाक खिलाड़ी का दावा फिक्स है वर्ल्ड कप, बांग्लादेश से जानबूझकर हारेगा भारत

इंग्लैंड में खेले जा रहे विश्व कप का रोमांच अब अपने चरम पर है। अफगानिस्तान और दक्षिण अफ्रीका वर्ल्ड कप के 12वें सीजन के सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो गए हैं। पाकिस्तान और इंग्लैंड समेत कई टीमें सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी बासित अली ने टूर्नामेंट को लेकर एक अजीबोगरीब बयान दिया है, जिसको लेकर अब हलचल मच गई है।
Basit Ali reckons India will not want Pakistan to qualify for the semi-finals and may play poorly in their matches against Sri Lanka and Bangladesh 🙄
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बासित अली ने एक पाकिस्तानी चैनल से बातचीत में कहा कि क्रिकेट अब अनिश्चितताओं का खेल नहीं रहा है, बल्कि सब कुछ फिक्स है, उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तानी टीम को सेमीफाइनल में नहीं देखना चाहता है, इसीलिए भारतीय टीम जानबूझकर बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाफ अपने मैच हार सकती है। ऐसे में पाकिस्तान और भारत के बीच सेमीफाइनल की रेस देखने को मिलेगी।
पाकिस्तान की इस विश्व कप में शुरुआत बेहद ही खराब रही। सात मैच में तीन जीत दर्ज कर सात अंको के साथ वो वर्ल्ड कप की अंकतालिका में छठवें पायदान पर है। जून 26 को हुए मुकाबले में उसने न्यूजीलैंड को मात देकर सेमीफाइनल के लिए अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं।

बासित अली ने यह भी आरोप लगाया कि 1992 के विश्व कप में न्यूजीलैंड की टीम चैंपियन बनने वाली पाकिस्तान टीम से इसलिए हार गई थी, ताकी वह सेमीफाइनल अपनी जमीन पर खेल सकें। बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी बासित अली का करियर बेहद ही छोटा रहा है। मैच फिक्सिंग में नाम आने के बाद बासित को मजबूरी में महज 26 साल की उम्र में क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा था।