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हिन्दू विरोधी दंगा: तनवीर और गुलफाम गिरफ्तार, कई फोन बरामद ; मूसा की तलाश

अंकित शर्मा
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को एक और सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान तनवीर और गुलफाम के रूप में हुई है। इन पर दंगों में शामिल होने के आरोप हैं। दोनों आरोपितों के पास से कई मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिसे जाँच के लिए फॉरेंसिक विभाग को भेज दिया गया है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार(मार्च 12, 2020) को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के आरोप में सलमान उर्फ हसीन उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हे को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि मुल्ला ने न केवल अन्य दंगाइयों के साथ मिलकर अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर में खींचा, बल्कि उन्हें जान से मारने से पहले उनके मुँह पर काला कपड़ा डाला और साथ ही उन्हें निर्वस्त्र भी किया।

सलमान के मुताबिक दंगाइयों ने उनका मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकूओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। इस मामले में क्राइम ब्रांच आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके खिलाफ अंकित शर्मा की हत्या समेत तीन अन्य केस भी दर्ज हैं।
गुरुवार को ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के सात आरोपितों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने बताया था कि हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद युनूस, आरिफ व मुहम्मद सलीम खान को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आरोपित चाँद बाग के रहने वाले हैं। इसके अलावा गिरफ्तार एक अन्य आरोपित मोहम्मद दानिश गाजियाबाद के लोनी का रहने वाला है।
कॉन्स्टेबल रतनलाल पर जब भीड़ ने हमला किया था तो वे उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली के गोकुलपुरी क्षेत्र के मौजपुर इलाके में तैनात थे। पत्‍थरबाजी में रतनलाल बुरी तरह से घायल हो गए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि उन्हें गोली भी मारी गई थी।
जाँच में यह सामने आया कि दंगाइयों ने साजिश के तहत पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। घटना वाले दिन चाँद बाग इलाके में धरनास्थल के समीप अधिकांश सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए थे। ताकि, दंगाइयों की तस्वीर कैमरे में कैद न हो सके।
अंकित शर्मा, हत्या, सलमान गिरफ्तार
 ‘हमने एक को गोद दिया’: वो फोन कॉल जिससे पकड़ा गया मुल्ला, मूसा की तलाश
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार मुल्ला एक फोन कॉल से गिरफ्त में आया। असल में पुलिस ने चॉंदबाग में दंगों के दौरान एक अपराधी मूसा के फोन को सर्विलांस पे रखा था। उसी बातचीत में मुल्ला का नाम सामने आया था। इसके बाद जब मुल्ला का फोन सर्विलांस पर लिया गया तो वह किसी से बात करते हुए सुनाई पड़ा- हमने एक को गोद दिया। मूसा की भी तलाश की जा रही है। अंकित की हत्या में उसके शामिल होने का भी संदेह है।
पहले उन्हें घसीटकर ताहिर हुसैन के घर ले गए और फिर 1 दर्जन से भी ज्यादा लोगों ने चाकुओं से वार किया।” सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित के शरीर पर करीब 14 वार किए थे। उसके मुताबिक अंकित को बहुत क्रूरता से तड़पा-तड़पाकर मारा गया और फिर शव नाले में फेंक दिया गया।

मुल्ला मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। 2005 से वह दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके में रह रहा है। वह प्याज की रेहड़ी लगाने का काम करता है। शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने उपद्रवियों से सैकड़ों फोन भी बरामद किए हैं। इनकी फोरेंसिक जॉंच के बाद कई और राज सामने आ सकते हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार संसद में मार्च 11 को दिल्ली में हुए दंगों को लेकर काफी तीखी बहस हुई, जहां सांसद तेजस्वी .....
अंकित शर्मा की नृशंस हत्या का अंदाजा हम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लगा सकते हैं। जिसके मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने इस रिपोर्ट में लिखा था कि 400 से ज़्यादा बार अंकित को चाकुओं से गोदा गया।

ताहिर हुसैन के निशाने पर पहले से थे IB के अंकित शर्मा, हत्या के वक्त बांग्लादेशी आतंकी भी थे मौजूद!

ताहिर हुसैन, अंकित शर्मा, दिल्ली दंगा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान आईबी के अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। अंकित के शरीर के हर हिस्से पर चाकू मारे गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था। इस मामले में आप के निलंबित पार्षद ताहि​र हुसैन की भूमिका संदिग्ध है। चश्मदीदों के अनुसार ताहिर के गुंडे उन्हें घसीटकर उसके घर ले गए थे।
अब जो तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि अंकित शर्मा पहले से ही ताहिर और उसके गुंडों के निशाने पर थे। उनकी हत्या के पीछे बांग्लादेशी आतंकियों के शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं। सबसे पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस ओर इशारा किया था। अब एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अंकित की हत्या की गई उस वक्त वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिले हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ताहिर निरन्तर बांग्लादेश आतंकवादियों के संपर्क में था। दूसरे, यह कि अंकित भी ताहिर के बांग्लादेशियों के साथ संबंधों की जाँच कर रहे थे। 
अंकित शर्मा की हत्या की जाँच में जो अब तक जो तथ्य सामने निकल कर आ रहे हैं, वे गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यह महज दंगे में हुई मौत नहीं थी, बल्कि एक ‘टार्गेट कीलिंग’ थी। यानी अंकित को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ रही है।
ToI की रिपोर्ट के मुताबिक अंकित 25 फरवरी को शाम 5 बजे के करीब ऑफिस से लौटे थे और अपने दोस्तों के साथ बाहर गए थे। उनके साथ उनका दोस्त कालू और कुछ और कुछ अन्य लोग भी थे, जो कि पुलिया के एक तरफ खड़े थे। तभी दूसरी तरफ से पथराव हुआ और अंकित सामने ही खड़े थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि अंकित को पत्थर लगी और वह फिसलकर गिर गए। इसके बाद दूसरी तरफ से तीन-चार लोग आए और उन्होंने अंकित को दबोच लिया। फिर उन्हें खींचते हुए दूसरी तरफ ले गए। वहाँ के लोगों का कहना था कि ‘हैरानी की बात है कि उन्होंने अंकित के अलावा किसी को टच नहीं किया।’
अंकित को किसी सुनसान जगह (शायद एक घर में) ले जाया गया, क्योंकि उसके बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा। वहाँ उनके कपड़े उतार दिए गए और उनके साथ नृशंसता की गई। फिर उनका शव फिर नाले में फेंक दिया गया। उनका शव अगले दिन 26 फरवरी को नाले से मिला था। उनके शव पर सिर्फ अंडरगारमेंट थे।
घटनाक्रम, प्रथम दृष्टया मिली जानकारी, कुछ बयानों और डॉक्टरों की शुरुआत राय को देखते हुए लगता है कि अंकित की हत्या किसी मकसद से की गई थी। आईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “घटनाक्रम संकेत देते हैं कि हत्यारे कुछ संदेश देना चाहते थे। हम जो देख रहे हैं यह उससे कहीं बड़ा है।” अंकित के शव पर चोटों की संख्या स्पष्ट नहीं है, वहीं पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि उनके शरीर पर कम से कम चाकू से मारने के 54 गहरे घाव थे।
जाँचकर्ताओं ने कहा कि मामले की जाँच अब टार्गेट कीलिंग को ध्यान में रखकर भी की जा रही है। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि अंकित का अपहरण हुआ और दूर ले जाया गया। उन्हें घटनास्थल पर नहीं मारा गया जिसने संदेह पैदा किया है। जब घटनाक्रम सामने आया तभी इस बात को बल मिला है। शव जिस हालत में मिला है उससे प्रतिशोध स्पष्ट झलकता है। भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को इस तरह नहीं मारा जाता।”
यह पूछने पर कि क्या पुलिस को कोई सुराग मिला है, इस पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे प्रत्यक्षदर्शियों की सहायता से अंकित को खींचकर ले जाने वाले शख्स की पहचान करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, “इलाके के टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सबूत का इंतजार किया जा रहा है। हम बांग्लादेशी आतंंकियों के ग्रुप को ट्रेस कर रहे हैं जिनका लोकेशन उस वक्त वहाँ पाया गया था।”
इससे पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी आशंका जताई थी कि ताहिर हुसैन के आतंकियों से रिश्ते हैं और इसकी जाँच के कारण ही अंकित शर्मा की हत्या की गई। उन्होंने 28 फरवरी को ट्वीट करते हुए कहा था, “सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा कहीं बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार तो नहीं ढूँढ रहे थे और इसीलिए उनकी हत्या ताहिर के इशारे पर कर दी गई। अंकित की हत्या अगर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर के संबंधों पर नजर रखने के लिए हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।”