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BBC के खिलाफ 10,000 करोड़ रूपए की मानहानि का मुकदमा, हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों को लेकर प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री बनाने के मामले में BBC पर मानहानि का मुकदमा दायर हुआ है। ब्रिटेन की मीडिया संस्थान को इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस भी जारी किया है। एक NGO ने 10,000 करोड़ रुपए के अपने मानहानि के मुक़दमे में आरोप लगाया है कि इस डॉक्यूमेंट्री ने भारत की प्रतिष्ठा को मलीन करने का कार्य किया है। साथ ही न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को भी बदनाम किया है।

‘ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (BBC)’ को ये समन सोमवार (22 मई, 2023) को जारी किया गया। गुजरात के NGO ‘जस्टिस फॉर ट्रायल’ ने दिल्ली उच्च-न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। इस मामले में ‘BBC (UK)’ के अलावा ‘बीबीसी इंडिया’ को भी नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा गया है। डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ को दो हिस्सों में जारी किया गया था। ‘BBC (UK)’ ने इसे जारी किया था, जबकि ‘बीबीसी इंडिया’ इसी की भारतीय शाखा है।

NGO की तरफ से 67 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे दिल्ली हाईकोर्ट में पेश हुए। भारत के सॉलिसिटर जनरल रहे हरीश साल्वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव का केस भी लड़ चुके हैं, जिसके बाद उनकी मौत की सज़ा पर रोक लग गई थी। उन्होंने कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री ने भारत और इसकी पूरी व्यवस्था को बदनाम किया है, न्यायपालिका सहित। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

जस्टिस सचिन दत्ता ने सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किया। इससे पहले 3 मई को एक भाजपा नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने BBC और Wikimedia को नोटिस जारी किया गया था। माँग की गई थी कि इन्हें RSS और VHP को बदनाम करने वाले कंटेंट्स प्रकाशित करने से रोका जाए। एक विकिपीडिया पेज पर इस डॉक्यूमेंट्री का लिंक उपलब्ध था, जबकि भारत में ये बैन है। इस प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री के जरिए मुस्लिम कट्टरपंथियों का भी बचाव किया गया था।

इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS का मुखपत्र बने बीबीसी पर IT छापे से काम नहीं चलेगा, BBC भारत में बैन होना चाहिए


बीबीसी भारत विरोधी तो है ही वह इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS का मुखपत्र बन गया। वह साजिश के तहत इस्लामा को बढ़ावा देती और हिंदुओं के खिलाफ विरोध को दिखाती है। वह जानबूझकर हिंदुओं को आतंकवादी कहने वाली राणा अयूब का इंटरव्यू करती है और बीबीसी वर्ल्ड न्यूज में दिखाती है। कर्नाटक में उठे हिजाब मुद्दे के दौरान विरोधस्वरूप कुछ हिंदू युवक भगवा गमछा लेकर पहुंचे थे जिसे राणा अयूब हिंदू आतंकवादी कह रही है। हिंदू लड़कों को आतंकवादी कहकर उनकी हत्या किए जाने को भड़काया था। इस साक्षात्कार के तुरंत बाद, कर्नाटक में मुसलमानों ने हिंदू लड़कों का कत्लेआम किया गया था। ऐसे में तो यही कहा जा सकता है कि IT raids से काम नहीं चलेगा, BBC को भारत में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

41 कांग्रेस सांसदों ने की थी बीबीसी पर प्रतिबंध लगाने की मांग

बीबीसी पर प्रतिबंध लगाने की मांग कोई नई नहीं है। 14 अगस्त 1975 को 41 कांग्रेस सांसदों ने बीबीसी पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक बयान पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कहा गया था, “बीबीसी ने भारत को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा”। लेकिन वायसराय नेहरू ने इसकी अनुमति नहीं दी। अगर बीबीसी पर प्रतिबंध लगता है तो हम 1947 से अधूरे छोड़े गए उपनिवेशवाद को समाप्त करने के एक महत्वपूर्ण कदम को पूरा करेंगे।

बीबीसी कभी ISIS की दुल्हनों पर डॉक्यूमेंट्री नहीं बनाती

बीबीसी बेशर्मी से ब्रिटेन में ISIS की दुल्हनों का बचाव करती है। लेकिन इन लड़कियों का किस तरह ब्रेनवाश किया जाता है और किस तरह वह ISIS के चंगुल में फंस जाती हैं इस पर कभी डॉक्यूमेंट्री नहीं बनाती। कहा जाता है कि इस तरह की पांच लाख काफिर लड़कियां हैं। ISIS की एक दुल्हन की बात भी सुन लीजिए।

हिंदू धर्म को लेकर बीबीसी का दोहरा मापदंड 

बीबीसी का दोहरा मापदंड देखिए कि ईसाई और इस्लाम धर्म अगर किसी बीमारी और समस्या को ठीक करती है तो वह अच्छा है लेकिन जैसे ही हिंदू धर्म की बात आती है तो वे इस पर सवालिया निशान लगते हैं। अभी बागेश्वर धाम सरकार के मामले में भी इसे देख सकते हैं।

बीबीसी का नस्लवादी नजरिया

बीबीसी का नस्लवादी नजरिया देखिए। पश्चिम के लोग अगर गाय को गले लगाते हैं तो वे इसे दुनिया का वेलनेस ट्रेंड बताते हैं। वहीं भारत में जब एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने कहा कि 14 फरवरी को काऊ हग डे मनाया जाए। इस पर बीबीसी कार्टून बनाकर व्यंग्य करती है कि पूरा वीक मनाया जाना चाहिए- काऊ गोबर डे, काऊ मूत्र डे, काऊ मिल्क डे, काऊ घास डे वगैरह।

हिंदू धर्म के प्रति बीबीसी की नफरत

हिंदू धर्म के प्रति बीबीसी की नफरत का नजारा देखिए कि दिवाली पर वह रिपोर्ट प्रकाशित करती है- शोर और प्रदूषण से मुक्त और शांत हो ऐसी दिवाली। वहीं उसकी दूसरी रिपोर्ट देखिए जिसमें वह लिखता है- नए साल के अवसर हजारों लोख पटाखे छोड़ने लंदन में जुटे। यानी दिवाली पर पटाखे न चले तो अच्छा और वे जब नए साल में पटाखे चलाएं तो अच्छा।

इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करना बीबीसी का धर्म

इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करना और उसका समर्थन करना बीबीसी ने अपना धर्म बना लिया है। अफगानिस्तान पर एक रिपोर्ट देखिए- तालिबान बिना खून खराबे के शहरों पर कैसे कब्जा कर रहा है? वहीं कश्मीर पर उसकी रिपोर्ट देखिए- भारतीय सेना धर्म के नाम पर लोगों को पीट रही है और प्रताड़ित कर रही है।

बीबीसी का हर लेखक हलाला प्रोडक्ट

बीबीसी की रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि वहां का हर लेखक हलाला प्रोडक्ट है। उसका एजेंडा देखिए, दिवाली पर उसकी रिपोर्ट- दिवालीः घर की सफाई की परंपरा कैसे महिलाओं की मुसीबत बढ़ाती रही है। वहीं होली पर हजारों-लाखों कविताओं में से उसे क्या मिलता है यह भी देखिए- होरी खेलूंगी, कह बिस्मिल्लाह, नाम नबी की रतन चढ़ी, बूंद पड़ी अल्लाह अल्लाह।

‘BBC ने मोदी के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया, ये स्तरहीन पत्रकारिता’: बॉब ब्लैकमैन, ब्रिटिश सांसद, कहा – ठीक से नहीं किया रिसर्च


बीबीसी (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन) ब्रिटेन और पश्चिमी देशों के एजेंडे को आगे बढ़ाती है। पश्चिमी देशों का एजेंडा है भारत की प्रगति में अवरोध पैदा करना। यह इस बात से जाहिर होती है कि बीबीसी कभी भी भारत के संदर्भ में आतंकियों को आतंकवादी नहीं कहता बल्कि चरमपंथी कहता है। इसी एजेंडे के तहत गुड आतंकवाद और बैड आतंकवाद जैसे शब्द गढ़े गए। पश्चिमी देशों और पाकिस्तान में होने वाली आतंकी घटनाएं बैड आतंकवाद पुकारे जाते। परंतु भारत में होने वाले आतंकवाद को गुड आतंकवाद कहा जाता है। 

बीबीसी लगातार हिंदूफोबिक एजेंडे के तहत अपनी खबरें प्रकाशित व प्रसारित करता रहा है। बीबीसी हिंदुओं को असहिष्णु और चरमपंथी के रूप में प्रचारित करता है। सवाल यह हहै कि जिस देश ने सताए हुए पारसियों, यहूदियों, तिब्बतियों, बहाइयों और कई अन्य लोगों को आश्रय दिया है, उसे असहिष्णु कैसे कहा जा सकता है। बीबीसी का दोहरा चरित्र तब उजागर हो जाता है जब कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी घटनाएं होती हैं तो वह वहां आतंकवादी को आतंकवादी नहीं कहता वह चरमपंथी कहता है।

बीबीसी के इसी हिंदू विरोधी एजेंडे की वजह से सितंबर 2022 में लीसेस्टर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच झड़प भी हुआ। इसके खिलाफ ब्रिटेन में रह रहे हिंदूओं ने लामबंद होकर प्रदर्शन भी किया। दर्जनों ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने बीबीसी के हिंदू विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने और हिंदूफोबिक होने के खिलाफ यहां पोर्टलैंड के बीबीसी हाउस के सामने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ब्रिटेन में हिंदुओं ने ट्विटर पर अभियान शुरू किया था।

ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन (UK MP Bob Blackman) ने बीबीसी (BBC) की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। ब्लैकमैन ने मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में तथ्यों को पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

ब्रिटिश सांसद ने News18 से बात करते हुए कहा, “बीबीसी ब्रिटिश सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। पीएम मोदी को लेकर ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री स्तरहीन पत्रकारिता का परिणाम है। इस पर उचित शोध नहीं किया गया है। ये पूरी तरह से अनुचित है।”

इससे पहले कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के 33 वर्ष पूरे होने पर 27 जनवरी, 2023 को ट्वीट कर हैरो ईस्ट के कंजरवेटिव सांसद बॉब ब्लैकमैन ने उन पर (कश्मीरी पंडितों) हुए अत्याचार के बारे में अपने देश के लोगों को शिक्षित करने की कसम खाई थी। उन्होंने कहा था कि घाटी में 1990 में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ, जिसके कारण उन्हें अपने घरों को छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गृहमंत्री ने कहा, “हजारों साजिशें सच्चाई को नुकसान नहीं पहुँचा सकतीं। सच्चाई सूरज की तरह चमकता है। साल 2002 से लेकर अब तक वे लोग नरेंद्र मोदी के खिलाफ ऐसा कर रहे हैं। हर बार हम मजबूत और सच्चाई के साथ लोगों के बीच अधिक लोकप्रियता हासिल करके उभरे हैं।”

बीबीसी ने ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल पर हमला किया है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाने का आदेश जारी किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया था। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे। यही नहीं, BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) में काफी बवाल भी हुआ था।

दिल्ली स्थित BBC दफ्तर पर इनकम टैक्स का छापा : कांग्रेस-महुआ मोइत्रा ने शुरू किया रोना

भारत के खिलाफ लगातार प्रोपेगंडा चलाने वाले BBC के दिल्ली स्थित दफ्तर पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। हाल ही में मीडिया संस्थान ‘ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों को लेकर दुष्प्रचार करते हुए एक विवादस्पद डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। इतना ही नहीं, उसकी ताज़ा डॉक्यूमेंट्री में ISIS आतंकी शमीमा बेगम का महिमामंडन भी किया गया था। इससे उसके अपने ही देश के लोग नाराज़ हैं।

अब सामने आया है कि BBC के दिल्ली स्थित दफ्तर में मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को IT विभाग के अधिकारी पहुँचे और तलाशी लेनी शुरू की। बीबीसी हाल ही में रूस-यूक्रेन सीरीज को लेकर बनाई गई वीडियो सीरीज के कारण भी सुर्ख़ियों में रहा था। ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लोगों ने जम कर इसके खिलाफ प्रदर्शन किया है। लेस्टर में हिन्दू विरोधी हिंसा के दौरान इसने हिन्दुओं के खिलाफ दुष्प्रचार किया और हमलावर मुस्लिमों को बचाने की कोशिश की।

BBC ने लंदन स्थित अपने मुख्यालय में भारत में इसके दफ्तर में पड़ी इनकम टैक्स रेड के बारे में जानकारी पहुँचा दी है। BBC का दिल्ली स्थित ये दफ्तर KG मार्ग के HT हाउस बिल्डिंग में स्थित है। कहा जा रहा है कि ये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का सर्वे है, जिस दौरान सभी कर्मचारियों के फोन ले लिए गए और कइयों को घर जाने के लिए भी कहा गया। हालाँकि, IT विभाग ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं किया है।

कुछ खबरों में BBC के मुंबई स्थित दफ्तर की तलाशी की बात भी कही गई है, लेकिन अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। संसद में ‘हरामी’ शब्द का प्रयोग कर के गाली बकने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा इस मामले पर टिप्पणी करने वाले विपक्षी नेताओं में आगे रहीं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली स्थित बीबीसी के दफ्तर पर इनकम टैक्स के छापे की खबर है। वाह, सच में? ये अप्रत्याशित है।” उन्होंने इस दौरान गौतम अडानी की SEBI अध्यक्ष से मुलाकात पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस पार्टी ने इसे ‘अघोषित आपातकाल’ करार दिया है।

शेखर कपूर और कबीर बेदी ने BBC को बताया ‘गटर पत्रकारिता’

                                                                              साभार: India Taoday
गुजरात दंगों पर आधारित बीबीसी की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री पर विवाद जारी है। मशहूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर और बॉलीवुड अभिनेता कबीर बेदी ने इस विवादित डॉक्यूमेंट्री पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कई ट्वीट किए हैं। कबीर के ट्वीट पर सहमति जताते हुए 23 जनवरी, 2023 को डायरेक्टर शेखर कपूर (Shekhar Kapur) ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कबीर बेदी (Kabir Bedi) को टैग करते हुए लिखा, “आप ठीक कह रहे हैं कबीर। मैं भारत को अस्थिर करने के प्रयासों को लगातार देख रहा हूँ… ऐसा लगता है जैसे अब कोई भारत को महाशक्ति बनने से नहीं रोक सकता।”

कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है। देखिए, जब भी भारत में कोई विदेशी मेहमान आता है, मोदी विरोधी किसी न किसी बहाने जैसे CAA विरोध में शाहीन बाग, कृषि कानूनों की आड़ में किसान आंदोलन आदि लेकिन विरोधी न मोदी और न ही भारत की प्रतिष्ठा को कलंकित करने में सफल हुए, बल्कि इन लोगों ने अपने आपको बेनकाब कर, भारत के उस इतिहास को जीवित कर रहे हैं कि किस तरह से बिकाऊ गद्दारों की वजह से एक मजबूत भारत पर मुग़ल आक्रांताओं ने राज किया। मोदी विरोधी जिस गुजरात दंगे के जिन्न को पुनः जीवित करने का प्रयास करने की भयंकर भूल कर रहे हैं, नहीं जानते कि जनता भी सोंच रही कि जिस साबरमती ट्रैन में रामभक्तों को जिन्दा जलाये जाने के कारण हुए दंगे हुए थे कि उस नीच हरकत को करने में इस गैंग ने परदे के पीछे खेल खेला हो? 

इससे पहले 22 जनवरी 2023 को भी शेखर कपूर ने ट्वीट करके बीबीसी पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, “मुझे आश्चर्य है कि क्या बीबीसी के पास कभी ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति विंस्टन चर्चिल के बारे में सच्चाई बताने का साहस था, जो बंगाल के अकाल के लिए काफी हद तक जिम्मेदार था। जिसके कारण भुखमरी से लाखों लोगों की मौत हो गई थी। वह उन जनजातीय समाज के लोगों, कुर्दों पर रासायनिक बम गिराने वाला पहला व्यक्ति है।”

इतना ही नहीं, दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी ने बीबीसी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। कबीर ने बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज को लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “बीबीसी डॉक्यूमेंट्री एक मौलिक तथ्य पर प्रकाश डालती है: कॉन्ग्रेस शासन के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेष जाँच दल ने पीएम मोदी को इस मामले में बरी कर दिया था। 2002 की ब्रिटिश जाँच की उतनी ही विश्वसनीयता है, जितनी कि इराक में जनसंहार के हथियारों की रिपोर्ट की।”

इससे पहले अभिनेता ने 20 जनवरी, 2023 को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बीबीसी को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने बीबीसी की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री ‘द मोदी क्वेश्चन’ को पक्षपाती डॉक्यूमेंट्री बताते हुए दावा किया था कि मोदी के भारत में ‘धार्मिक अशांति है’, यह दशकों पुराने आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों को अदालतों ने काफी समय पहले ही सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा था कि यह गटर पत्रकारिता है। सनसनीखेज खबर चलाने के नाम पर सभी अंधे हो चुके हैं।

सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है। बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है।

दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जारी इस विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था। इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे।

BBC ने फिर परोसा झूठ: RSS को बदनाम करने के लिए खबर में डाला फर्जी एंगल

आरएसएस और भाजपा की छवि धूमिल करने के प्रयासों में एक बार फिर से बीबीसी के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। बीबीसी ने एक बार फिर अपनी खबर को एंगल देने के लिए आरएसएस को बदनाम करने की कोशिश की है। अब ये चाहे उसने अपने अजेंडे के तहत किया हो या फिर अज्ञातनावश, लेकिन एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि बीबीसी अपनी रिपोर्टों के जरिए हिंदूवादी संगठनों को बदनाम करने के लिए इतना आतुर है कि वो भूल चुका है, खबर में किसी तथ्य की पुष्टि करने से पहले उसके बारे में खँगालना पत्रकारिता का मूल धर्म है।
दरअसल, कुछ समय पहले एक खबर आई कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर चिंता जाहिर की। साथ ही इस संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई गई। जिसपर भारतीय किसान यूनियन की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है। उनकी ओर से पंजाब के महासचिव हरिंदर लाखोवाल ने अपने बयान में कहा कि हम प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अपने लिए सब्सिडी माँग रहे हैं जब तक किसानों के खाते में सब्सिडी नहीं आएगी तब तक हम ऐसे ही पराली जलाते रहेंगे।
अब चूँकि प्रदूषण मुद्दे पर इतना गैर-जिम्मेदाराना बयान आया तो इस पर हर मीडिया हाउस में रिपोर्ट की जानी आम बात है। लेकिन बीबीसी ने इस पूरी रिपोर्ट को करके आखिर में अपनी अजेंडापरस्त पत्रकारिता का फिर उदाहरण दे दिया। दरअसल, रिपोर्ट के अंत में लिखा गया कि ‘भारतीय किसान यूनियन’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन है। जबकि वास्तविकता में ये संगठन आरएसएस से जुड़ा हुआ ही नहीं है।
ये बात सच है कि आरएसएस से किसानों का बहुत बड़ा संगठन जुड़ा हुआ है, लेकिन उसका नाम भारतीय किसान यूनियन नहीं है, बल्कि भारतीय किसान संघ है। जिसकी स्थापना श्री दत्तोपंथ जी थेंगड़ी द्वारा 4 मार्च 1979 में की गई थी।
जबकि भारतीय किसान यूनियन की स्थापना चौधरी महेंद्र सिंह टिकैट द्वारा की गई थी। जिसकी पुष्टि स्वयं भारतीय किसान संघ ने पिछले साल अपने एक बयान में की थी और बताया था कि दोनों संगठन अलग-अलग हैं।
अब ये कहा जा सकता है कि प्रथम दृष्टया, इन दोनों संगठनों के नाम में समानता के कारण इनमें फर्क़ समझना थोड़ा कठिन है क्योंकि ‘यूनियन’ का हिंदी पर्याय ‘संघ’ ही होता है। इसके अलावा इंटरनेट पर भारतीय किसान यूनियन डालने पर भी आरएसएस से जुड़े संगठन यानी भारतीय किसान संघ का ही पेज खुलता है। जिसका तकनीकी कारण, दोनों शब्दों का लगभग एक जैसा मिलना या फिर आरएसएस से जुड़े इस संघ का गूगल पर ज्यादा सर्च किया जाना हो सकता है। इसलिए, मुमकिन है कि ये गलती किसी पत्रकार से अज्ञानतवश या हड़बड़ी में हुई हो।
लेकिन, ऐसी स्थिति में भी बीबीसी को ये समझने की जरूरत है कि जब आप किसी मामूली खबर में जबरन अपने संस्थान के अजेंडे को परोसने की कोशिश करते हैं, तब ये गलती भूल नहीं, उतावलापन कहलाती है। उस समय साफ पता चलता है कि ये जल्दबाजी में किसी की छवि धूमिल करने का एक प्रयास है। इसके लिए जरूरी है कि रिपोर्ट में झूठी पुष्टि करने से पहले तथ्यों की छानबीन की जाए। ताकि पाठक और विरोधी आप पर, आपकी पत्रकारिता पर, आपके संस्थान की नीतियों पर सवाल न उठा पाएँ?
बीबीसी की भाँति ही हिंदी मीडिया के जाने-माने संस्थान जनसत्ता ने भी इस खबर को इसी एँगल से पेश किया है।
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आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण हवा बेहद जहरीली हो गई है। आलम यह है कि लोगों के लिए घ...

अब जब सारा सच सामने है तो यह कहा जा सकता है कि एजेंडाबाजी की आड़ में बीबीसी जैसे बड़े संस्थान फेक न्यूज़ या मनचाहा ट्वीस्ट देने के अड्डे बनते जा रहे हैं। उस पर मजेदार बात यह है कि पकड़े जाने पर भी न माफ़ी माँगते हैं और न ही जल्दी भूल-सुधार करते हैं।

शोकग्रस्त BBC ने दी आतंकी बगदादी को श्रद्धांजलि

बगदादी, बीबीसी
'कुत्ते की मौत मरने वाले' बगदादी से बीबीसी ने जताया प्रेम और दिया सम्मान
वाशिंगटन पोस्ट ने जिस तरह से खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस के प्रमुख सरगना अबू-बकर अल-बगदादी के मारे जाने के बाद उसे इस्लामिक विद्वान बताते हुए उसका गुणगान किया, बीबीसी उससे भी कई क़दम आगे निकल गया। बीबीसी ने बगदादी को ऐसे प्रस्तुत किया, जैसे वो मानव-सेवा के लिए बलिदान हुआ कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो। लेकिन नहीं, वो तो कई नृशंस कत्लों का गुनहगार आतंकी था। यह भी कह सकते हैं कि बीबीसी ने बगदादी के मौत के बाद एक तरह से शोक मनाया और उसे ऐसे सम्मान दिया, जैसे वो कोई ऋषि-मुनि रहा हो। बीबीसी ने बार-बार उसके लिए सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया। ट्रम्प ने बताया कि रोते-चीखते बगदादी की मौत सुरंग में गिरने के बाद हुई। उससे पहले अमेरिकी सेना ने उसका पीछा किया। ट्रम्प ने उसे कायर, अनैतिक, बीमार, क्रूर और हिंसक आतंकी करार दिया। लेकिन, उससे पहले जरा बगदादी के बारे में बीबीसी की भाषा देखिए:
  • बगदादी ‘छिपे हुए थे।’
  • उन‘ पर निगरानी रखी जा रही थी।
  • उनके‘ बार-बार जगह बदलने के कारण इससे पहले रेड नहीं हो सका।
  • बगदादी ‘कथित‘ इस्लामिक स्टेट के ‘मुखिया थे‘।
  • अप्रैल के एक वीडियो में आईएस ने बताया था कि बगदादी ज़िंदा ‘हैं।’
  • 2014 में बगदादी पहली बार ‘दिखे थे।’
  • बगदादी अंतर्मुखी ‘थे।’
  • मई 2017 में वह ज़ख़्मी ‘हो गए थे।’
  • बगदादी 2010 में आईएसआईएस के ‘नेता बने थे।’
  • दुनिया ‘उन्हें‘ अल-बगदादी के नाम से जानती थी।
  • बगदादी का परिवार ‘धर्मनिष्ठ‘ था।
  • बगदादी कंठस्थ करने के लिए ‘जाने जाते थे।’
  • वह रिश्तेदारों को सतर्क नज़र से ‘देखते थे‘ कि इस्लामिक क़ानून का पालन हो रहा है या नहीं।
  • वह 2004 में दो पत्नियों व छह बच्चों के साथ ‘रहे।’
  • वह बच्चों को क़ुरान ‘पढ़ाते थे।’
  • बगदादी फुटबॉल क्लब ‘के स्टार थे।’
  • बगदादी हिंसक इस्लामिक मूवमेंट की तरफ़ ‘आकर्षित हो गए।’
  • वो क़ैदियों को इस्लाम की शिक्षा ‘देते थे।’
  • उन्हें‘ शूरा काउंसिल में शामिल किया गया।
बीबीसी की उपर्युक्त भाषा से लगता है कि उसका कोई अपना मर गया है और वो उसे श्रद्धांजलि दे रहा है। श्रद्धांजलि देते समय जैसे किसी व्यक्ति के अच्छे कार्य गिनाए जाते हैं, वैसे ही लगभग 4 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन के सबसे बड़े सरगना की मौत पर बीबीसी ने गिनाया। क्या हजार लाशें गिरा कर कोई एकाध बार फुटबॉल खेल ले तो उसे आतंकी कहा जाएगा या फिर दुनिया को बताया जाएगा कि ‘एक फुटबॉल स्टार नहीं रहा’? हो सकता है बीबीसी को हिंसक इस्लामिक आतंक ‘आकर्षित’ लगता हो लेकिन लाखों जान लेने वाला ये आतंकवाद डरावना है, भयावह है- आकर्षक नहीं।
जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों को मार रहे आतंकी ‘विद्रोही’ हो जाते हैं, बगदादी ‘एक्टिविस्ट’ अर्थात कार्यकर्ता हो जाता है, लादेन एक अच्छा ‘पिता’ हो जाता है और दाऊद इब्राहिम तो मीडिया के इस वर्ग के लिए बॉलीवुड हीरो से कम है नहीं। आख़िर क्या कारण है कि जब भी किसी आतंकी की मौत हो जाती है तो उसके घर-परिवार को ढूँढ कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि उसके पिता एक शिक्षाविद हैं या फिर उसकी माँ कितनी अच्छी हैं या फिर उसका परिवार कितना सरल, शांत और शौम्य है? क्या इन चीजों से कोई फ़र्क़ पड़ता भी है क्या?
हाल ही में कमलेश तिवारी की मौत के बाद लल्लनटॉप जैसे मीडिया पोर्टल ने लिखा कि आरोपितों के पिता के बयान को सुना जाना चाहिए। क्या इससे कमलेश तिवारी वापस आ जाएँगे या फिर उनके पीड़ित परिजनों को न्याय मिल जाएगा? क्या हत्यारोपित का पिता कुछ बोल दे तो उसे पत्थर की लकीर मान लेनी चाहिए? ठीक इसी तरह, बीबीसी आईएसआईएस के सरगना की मौत पर शोक मनाता दिख रहा है और उसे ऐसे सम्मान दे रहा है, जैसे कोई अपने मृत पिता को देता है।
लगे हाथ बीबीसी को मोसुल के उसी ‘पवित्र मस्जिद’ में जाकर बगदादी की आत्मा की शांति के लिए नमाज भी अदा करनी चाहिए, जिसमें वह पहली बार दिखा था। अरे सॉरी, ‘दिखे थे।’ बगदादी की रूह की शांति के लिए बीबीसी को कुछ चील-कौवों को खाना खिलाना चाहिए और हो सके तो गयाजी जाकर तर्पण-अर्पण भी करना चाहिए। लेकिन हाँ, लाखों मृतकों के परिजन दुनिया के सबसे बड़े न्यूज़ नेटवर्क्स में से एक से यह सवाल ज़रूर पूछेंगे कि उनकी बदहाली के जिम्मेदार व्यक्ति का गुणगान कर के उनके जले पर नमक क्यों छिड़का जा रहा है?
यही स्थिति रही तो आश्चर्य नहीं होगा अगर कल को बीबीसी का होमपेज खोलते ही ज़ाकिर नाइक के वीडियो मिलें, जिसमें वह ‘जिहाद’ के लिए मुस्लिम युवकों को भड़काता दिखे। जब आईएसआईएस के सबसे बड़े आतंकी का गुणगान किया जा सकता है, फिर ज़ाकिर नाइक तो बहुत छोटी बात है। सबसे बड़ी बात कि बीबीसी ने इस लेख में ‘कथित इस्लामिक स्टेट’ का प्रयोग किया है। अर्थात, बीबीसी यह मानता ही नहीं है कि इस्लामिक स्टेट नामक कोई आतंकी संगठन इस दुनिया में है भी। बीबीसी का कहना है कि 4-6 लाख लोग यूँ ही हवा में मर गए, उन्हें किसी ने नहीं मारा।
जब आईएसआईएस है ही नहीं तो फिर अमेरिका की सेना सीरिया में पूरी-भाजी तलने गई थी? बीबीसी ने क्षण भर में उन सैनिकों के बलिदानों को भी नकार दिया, जिनकी मौत आईएसआईएस से लड़ते हुए हुई। साथ ही बीबीसी ने भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी नकार दिया, जिन्होंने पता लगाया था कि केरल सहित भारत के कई हिस्सों से मुस्लिम युवकों ने आईएसआईएस ज्वाइन किया है। आईएसआईएस तो था ही नहीं, है ही नहीं, वो तो ‘कथित आईएसआईएस’ है। हिंसक इस्लामिक क़ानून और हिंसक विचारधारा को बीबीसी ने ऐसे प्रस्तुत किया है, जैसे ये किसी धर्मग्रन्थ का हिस्सा हो।
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आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के नेता अबू बक्र अल-बगदादी की हत्या की खबरों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रं....

बीबीसी के लिए यह सब नया नहीं है। यह मीडिया के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जो आतंकियों से सहानुभूति रखता है। यहाँ हमने उसके इस कारनामे को हूबहू आपने सामने रख कर यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे आतंकियों के सम्मान में मीडिया संस्थान झुकते हैं और उसे ऐसे सम्मान देते हैं, जैसे वह लाखों मौतों का गुनहगार न होकर कोई समाजिक कार्यकर्ता हो। अगर भारत में आएँ तो यहाँ नक्सलियों को ऐसे ही ट्रीट किया जाता है, जैसे वो सम्पूर्ण समाज के प्रतिनिधि हों और सरकार से जनता का हक़ माँग रहे हों। भले ही वो लोगों को भड़का कर भीमा-कोरेगाँव हिंसा भड़काते हों, उन्हें महिमामंडित कर के दिखाया जाता है।

Maulana Masood Azhar : पुलवामा हमले के बाद पाक लीडर्स ने जैश से संपर्क किया था : पाक विदेश मंत्री महमूद कुरैशी

BBC Interview: Pakistan foreign minister shah mahmood qureshi admits pakistani government is in contact with Jaish-e-Mohammad chief maulana masood azhar news: Dainik Bhaskar Latest news in Hindi
पाकिस्तान को झूठ बोलने की इतनी अधिक आदत हो गयी है कि उसे ही पता नहीं चलता कि वह सच बोल रहा है या झूठ। और यह इसकी नई नहीं बहुत पुरानी आदत है। स्मरण हो, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान रोज रात को 9 बजे विविध भारती पर "ढोल की पोल" कार्यक्रम में पाकिस्तान के झूठ की पोल खोली जाती थी। खैर, अब के हालत पर गौर करने पर भी यही झूठ प्रवत्ति उजागर हो रही है। कुछ समय पूर्व तक भूतपूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ भारत को धमकी देते हुए कहते थे कि "पाकिस्तान ने परमाणु शब्बेरात के लिए बनाकर नहीं रखे हैं।" लेकिन अब कहते हैं कि "अगर भारत पर एक नुक्लिअर फेंका तो भारत 20 नुक्लियर फेंक कर पाकिस्तान को बर्बाद कर देगा।" अब देखिए बीबीसी को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री क्या कहा रहे हैं:- 
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ही किया पाकिस्तान को बेनकाब 
पुलवामा हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था, क्योंकि खुद जैश ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत ने पाकिस्तान को इसके सबूत भी दिए, लेकिन पाक लगातार इनकार कर रहा है कि हमला जैश ने कराया है। इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का बीबीसी को दिया एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है, जिसमें महमूद कुरैशी खुद बोल रहे हैं कि हमले के बाद पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संपर्क किया था।
इंटरव्यू में पूछे गए सवाल-जवाब : बीबीसी का इंटरव्यू काफी लंबा है लेकिन जिस क्लिप में शाह महमूद कुरैशी ने जैश से संपर्क की बात कही है वो 39 सेकंड का है। वही क्लिप वायरल हो रही है।
रिपोर्टर : क्या आपको लगता है कि जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान में है?
महमूद कुरैशी : नहीं, मैं श्योर नहीं हूं।
रिपोर्टर : पुलवामा हमले का जिम्मेदार जैश-ए-मोहम्मद है?
महमूद कुरैशी : नहीं..नहीं ऐसा नहीं है।
रिपोर्टर : जैश ने खुद ही हमले की जिम्मेदारी ली है?
महमूद कुरैशी : नहीं। जब लीडरशिप ने जैश से संपर्क किया, तब उन्होंने कहा कि नहीं। उन्होंने हमले से इनकार किया।
रिपोर्टर : लीडरशिप में किसने जैश से संपर्क किया?
महमूद कुरैशी : वो लोग जो जैश से संपर्क में हैं।
वायरल वीडियो :



LOL, To prove JeM wasn't hit, and the Indian attack was a failure, Pakistan went ahead to the extent of exposing their complicity. Must WATCH
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कई विपक्षी दलों द्वारा भारत की एयर स्‍ट्राइक पर उठाए जा रहे सवालों के मद्देनजर एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा है क....

इस बयान से क्या फर्क पड़ सकता है : शाह महमूद कुरैशी का बयान पाकिस्तान और खुद पीएम इमरान खान के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि पाक लगातार नकारता रहा है कि जैश का पुलवामा में हाथ है। इतना ही नहीं, इमरान खान लगातार कह रहे हैं कि पाक सरकार का आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में इंटरनेशनल मीडिया के सामने शाह महमूद कुरैशी का बयान पाक सरकार को झूठा साबित करता है। ये बयान भारत के डोजियर को और मजबूती देगा, साथ ही अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब होगा।(साभार)