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पिंजरे में कैद बार गर्ल्स को बाहर से लगाया ताला, निकाह में रात भर हुआ अमानवीय डांस

                                 पिंजरे में बार गर्ल्स को कैद कर रात भर डांस करवाया (फोटो: दैनिक भास्कर)
मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि वह अपने फायदे के लिए किसी को भी नुकसान पहुँचाने से गुरेज नहीं करता। अगर हम ये कहें कि स्वार्थी व्यक्ति से बड़ा खतरनाक कोई नहीं हो सकता, तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। दरअसल, बिहार के भोजपुर से एक अमानवीय तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

इस तस्वीर में कुछ लोग अपने मनोरंजन के लिए पिंजड़े में बंद युवतियों को नचा रहे हैं। जी हाँ, यह वही बिहार है, जहाँ महिला सशक्तीकरण की दिशा में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक, भोजपुर के कोइलवर थाना क्षेत्र के कोइलवर चौक वार्ड नंबर 10 में मोहम्मद नसीम के घर भागलपुर से बारात आई थी। इस दौरान कोरोना के नियमों की धज्जियाँ तो उड़ाई ही गई। साथ ही जमकर अश्लीलता भी परोसी गई।

हद तो तब हो गई जब इन लोगों ने एक पिंजरे के जैसा स्टेज बनाकर उसके अंदर बार बालाओं को जानवरों की तरह ठूँस दिया और रात भर उनसे डांस करवाया। इस मामले को लेकर BDO बीबी पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए हमें इसकी जानकारी मिली है। थाने में बात करके इस पर जाँच शुरू की जाएगी। जाँच सही साबित होने पर इन पर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, कोइलवर गाँव के ही संजय सोलंकी कहा कि बार बालाओं को एक पिंजरे में कैद करके डांस करवाना अमानवीय है। उन्होंने बताया कि इस पिंजरे में कलाकार युवतियों को डालकर एक बड़े ताले से लॉक कर दिया गया था, उसके अंदर वह डांस कर रही थीं। जगह इतनी कम थी कि वे चाहकर भी इसमें थकने के बाद नहीं बैठ सकती थीं।

अपना पेट भरने के लिए मजबूरी में करते हैं डांस

कोरोना संकटकाल में अपना पेट भरने के लिए स्थानीय डांसर को ये सब काम मजबूरी में करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अभी लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं रह गया है। इस समय हम लोगों को खाने की भी दिक्कत हो गई है। पहले एक दिन के 1500 रुपए मिलते थे, लेकिन अभी अब सब काम बंद हो गया है।
कोरोना महामारी के दौरान देश भर में लोगों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। कोई रोजगार के लिए, कोई भोजन के लिए तो कोई दवा के लिए जद्दोजहद कर रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी कुछ लोग अपने मनोरंजन के लिए लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जो कि बेहद शर्मनाक है।

मोदी सरकार द्वारा 1000 वर्ष बाद पूरा होगा राजा भोज का स्वप्न, ‘उत्तर के सोमनाथ’

                                भोजपुर के इस शिवालय को 'उत्तर का सोमनाथ' भी कहा जाता है
मध्य प्रदेश के रायसेन में बेतवा नदी के किनारे भोजपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर का पुराना वैभव फिर से लौट कर आने वाला है क्योंकि केंद्र सरकार ने इसके बचे हुए निर्माण-कार्य को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजा भोज ने इस्लामी आक्रांता महमूद गजनवी से बदला लेने के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया था। विजय के बाद इस मंदिर का निर्माण हुआ। भोपाल से भोजपुर की दूरी 32 किलोमीटर है।

‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित संजय पोखरियाल की खबर के अनुसार, आज से 1000 वर्ष पूर्व जब राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, तब इसका गुम्बद और कुछ अन्य हिस्से का निर्माण बचा रह गया था। शायद राजा के निधन के कारण ऐसा हुआ था। अब केंद्र सरकार इस बचे-खुचे निर्माण को उसी रूप में पूरा करने जा रही है, जैसा प्रांगण के पाषाणखण्डों पर उकेरे गए मूल नक़्शे में दिख रहा है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देखरेख में अब इस मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। इस शिवालय को भोजपुर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जिसे लोग ‘उत्तर का सोमनाथ’ कहते हैं। इसे लाल पत्थरों से तराशा गया है। 21.5 फीट ऊँचा और 17.8 फीट परिधि वाला ये शिवलिंग सबसे विशाल है। चबूतरे पर स्थित शिवलिंग के पास पुजारी भी सीढ़ी लगा कर जाते हैं।

इसका 66 फ़ीट ऊँचा प्रवेशद्वार सभी मंदिरों में सबसे ऊँचा माना जाता है। ऊँचे स्तम्भों पर खड़े इस मंदिर की दीवारों पर काफी अच्छी चित्रकारी की गई है। बताया गया है कि इसका शिखर कई प्रयासों के बावजूद पूर्ण नहीं हो सका क्योंकि शिखर इतना भारी हो जाता कि मंदिर उसका भार नहीं सह पाता। भवन से शिखर के भारी होने की सम्भावना के कारण ही इसका निर्माण-कार्य रुका रह गया था, जो अब पूरा होगा। 

धार के महान परमार राजा भोज (1000-1053 ईसवी) ने जब सोमनाथ मंदिर में महमूद गजनवी द्वारा तोड़फोड़ की घटना के बारे में सुना तो उन्होंने क्षुब्ध होकर उस पर हमला बोल दिया। भगवान शिव के अपमान से क्रुद्ध राजा भोज के हमले के बाद महमूद गजनवी तो रेगिस्तान में भाग खड़ा हुआ लेकिन उसके बेटे सालार मसूद को मौत के घाट उतार दिया गया। सोमनाथ का बदला लेने के बाद राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।