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पति ने पत्नी की भतीजी से सेक्स किया तो बीवी ने लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया

                                                                         प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
ब्राजील में एक महिला ने अपने पति का लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया। महिला अपने पति से नाराज चल रही थी। महिला के पति ने उसकी 15 साल की भतीजी के साथ सेक्स कर लिया था जिसके कारण महिला नाराज थी। यह घटना दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की है।

जानकारी के अनुसार, ब्राजील की राजधानी साओ पाउलो के नजदीक अतिबाया में हुआ। यहाँ 34 वर्षीय इस महिला ने अपने 39 वर्षीय पति से बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। इसके लिए उसने पहले पति को रिझा कर बेड पर बुलाया और उसके हाथ पैर एक कपड़े से बाँध दिए। इसके बाद उसके लिंग को एक ब्लेड से काट दिया और इसकी तस्वीरें भी ली।

इसके बाद उसने कटे हुए लिंग को टॉयलेट में बहा दिया क्योंकि उसने सुन रखा था कि कटे हुए अंग दुबारा जुड़ सकते हैं। महिला का दावा है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसका पति महिला की 14 वर्षीय भतीजी के साथ सेक्स कर चुका था। इसी का बदला लेने के लिए महिला ने यह कदम उठाया।

महिला इसके बाद खुद ही पुलिस थाने अपने-आप को सौंपने पहुँच गई। यहाँ पहुँच कर महिला ने कहा, “गुड इवनिंग सर, मैं यहाँ आत्मसमर्पण करने आई हूँ क्योंकि मैंने अपने पति का लिंग काट दिया है।” यह सुनकर पुलिस वाले भी सकते में आ गए। पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अभी उसके पति की हालत के विषय जानकारी सामने नहीं आई है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। वर्ष 2021 में ब्राजील में ही एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड का लिंग काट कर कढ़ाई में तल दिया था। महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की हत्या भी कर दी थी। जुलाई 2023 में भारत में ही आंध्र प्रदेश में एक महिला ने अपने पति का लिंग इसलिए काट दिया था क्योंकि वह अपनी पूर्व पत्नी की रील्स देखता था।

कोरोना संकट में विश्व संकट मोचन बनता भारत

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहावत है 'हिरण हरियाली को देख रोता है', कुछ जाहिल जमातियों द्वारा डॉक्टर, पुलिस और नर्सों पर थूक, पत्थर फेंकना, हॉस्पिटल में नर्सों के सामने नंगा होने वालों और इन दुष्कर्मों का समर्थन करने वालों पर सटीक बैठती है। जो बीमारी में भी हिन्दू-मुस्लिम कर रहे हैं। राष्ट्र को बताएं अब तक कुल कितने जमाती मस्जिदों से पकडे? किसने छिपाया और क्यों? क्या यह मानवहित में है? तुष्टिकरण करने के लिए बहुत ज़िंदगी हैं, पहले इस संक्रामक बीमारी से मुक्ति पाने के लिए एकजुट होकर छिपे हुए और छिपाने वालों से जमातियों को बाहर आने  लिए क्यों नहीं कहते?
Image may contain: one or more people, text that says 'अंग्रेज यहां लड़ने के लिए अपने सैनिक नही लाए थे क्योंकि उन्हे यहां के गद्दारों पर पूरा भरोसा था Achhe Din'लॉक डाउन में मुफ्त वितरित हो रहे खाने का दुरूपयोग हो रहा है, वह भी ले रहा है, जिसे जरुरत नहीं। बेशर्मी की भी हद होती है। उसके बावजूद मोदी और मोदी सरकार को बुरा-भला कहा जा रहा है, कुछ बिकाऊ पत्रकार भ्रामक खबरे प्रसारित कर सरकार के प्रयासों पर पानी फेरने में दिन-रात एक किए हुए हैं, विपरीत इसके भारत के प्रयासों को विश्व सराहा रहा है। भारत से दवाइयों की मदद मांग रहा है। जिसे देश आभास होता है कि कल तक जो विश्व भारत को इतने सम्मान से नहीं देखता था, आज कोरोना ने उसी भारत को विश्व गुरु बनने के द्वार पर ला खड़ा कर दिया है।   
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत कोरोना संकट काल में कई देशों के लिए संकटमोचक बन कर सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले सार्क और फिर जी-20 देशों के जरिए दिखाया कि कोरोना के कहर से कैसे मिलकर निपटा जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं से संवाद किया और जरूरतमंद देशों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। अमेरिका, इजरायल और ब्राजील के अलावा भारत ने स्पेन, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव समेत कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा समेत दूसरी सहायता देने का फैसला किया। इससे वैश्विक धारणा बनाने में मदद मिली है कि भारत याचक नहीं, अब दाता बन चुका है। भारत उन्हें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, पेरासिटामोल और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करा रहा है। इस कोरोना काल में मदद पाने वाले देशों की सूची लंबी होती जा रही है और मदद के लिए वे भारत का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने की प्रशंसा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने तो दुनिया के दूसरे देशों को भी भारत से सीख लेने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि मुश्किल समय में कैसा व्यवहार करना चाहिए और दूसरों की मदद की भावना से काम करना चाहिए वह भारत से सीखने की जरूरत है

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की भारत की तारीफ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘कोविड-19’ के खिलाफ लड़ाई में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति करने के फैसले के लिए अपना आभार व्यक्त किया। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को महान बताया और कहा कि वो भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो भारतीय पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। निर्यात पर ढील देने के बाद अमेरिका को अब यह दवा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि मैं सराहना करूंगा कि भारत हमारे द्वारा ऑर्डर की गईं टैबलेट्स की खेप को जारी करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति के ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी इससे पहले कभी भी इतनी अधिक मजबूत नहीं रही है। भारत मानवता की मदद के लिए अपनी ओर से हरसंभव अथक कोशिश करेगा।


अफगानिस्तान ने अदा किया शुक्रिया
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा किया है। राष्ट्रपति गनी ने कहा, ‘प्रिय मित्र नरेन्द्र मोदी, हमें 5 लाख हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन टेबलेट, एक लाख पैरासीटामोल टैबलेट और 75,000 मीट्रिक गेंहू भेजने के लिए धन्यवाद। गेंहू की पहली खेप जल्द ही अफगान के लोगों के लिए पहुंच जाएगी।’

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति को जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट संदेश में कहा, “भारत और अफगानिस्तान के बीच एक विशेष प्रकार की दोस्ती है, जो ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित है। लंबे समय से, हमने आतंकवाद के संकट के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी है। हम इसी तरह एकजुटता और साझा संकल्प के साथ कोविड-19 का मुकाबला करेंगे।”



मॉरीशस के पीएम ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार
कोरोना संकट के बीच भारत से मिली मदद के लिए मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि मैं एयर इंडिया की एक विशेष उड़ान से कल बुधवार, 15 अप्रैल को मॉरिशस पहुंची भारत सरकार की चिकित्सा मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत आभारी हूं। यह भारत और मॉरिशस के बीच के धनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।



ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा प्रभु हनुमान की तरह पहुंचाई संजीवनी बूटी
ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा है कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।



ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्‍हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के लिए धन्‍यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने जवाब में कहा “भारत और ब्राजील के बीच साझेदारी मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय में पहले से कहीं अधिक मजबूत है। भारत इस महामारी के खिलाफ मानवता की लड़ाई में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
इजरायल के पीएम ने जताया भारत का आभार
कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए फिलहाल सबसे अहम दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन है। भारत ने इस दवा की खेप इजरायल को भिजवाई है। दवा मिलने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा किया। इसके जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें साथ मिलकर इस महामारी से लड़ना होगा। भारत अपने मित्रों के लिए जो संभव है, वह करने को तैयार है। इजरायल के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।



कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव ने कहा धन्यवाद
भारत की ओर से चिकित्सीय आपूर्ति मिलने पर कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भारत सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद। मित्रता और एकजुटता का यह उच्च स्तर तब भी दिखाया गया जब भारत ने दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।


सेसेल्स ने जताया आभार
सेसेल्स के लिए स्पेशल इंडियन एयरफोर्स के विमान से दवा भेजी गई है। इन दवाइयों में पैरासीटामॉल, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। सेसेल्स ने मदद के लिए भारत का आभार जताया है। राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने संकट की इस घड़ी में सेशेल्स को दिए गए समर्थन के लिए प्रधानमंत्री मोदी, उनकी सरकार और भारत के लोगों का दिल से आभार व्यक्त किया।


मालदीव के राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री मोदी से बात कर की तारीफ
कोरोना संकट पर मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ टेलीफोन पर बातचीत में मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर खुशी जताई कि मालदीव में पहले तैनात किए गए भारतीय चिकित्सा दल और फि‍र बाद में भारत द्वारा उपहार में दी गई आवश्यक दवाओं ने द्वीप में संक्रमण के फैलाव को नियंत्रित करने में उल्‍लेखनीय योगदान दिया है।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि कोरोना जिसने विश्व में अपनी चादर फैला रखी है, कहीं हि....
मालदीव के राष्ट्रपति ने सार्क देशों की मदद के लिए COVID-19 फंड बनाने पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा दोहराई। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने चीन के वुहान से मालदीव के निवासियों की सुरक्षित निकासी और जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

मोदी ने प्रभु हनुमान की तरह पहुंचाई संजीवनी बूटी : जायर एम बोल्‍सोनारो, ब्राजील राष्‍ट्रपति


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ भारत में मोदी विरोधी आलोचना करने का कोई अवसर नहीं चूक रहे, परन्तु कोरोना बीमारी के खात्मे के लिए विश्व में उनकी जय-जयकार हो रही है। भारत माता का नाम मस्तक ऊँचा हो रहा है।  
ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा है कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।
ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्‍हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के लिए धन्‍यवाद दिया है। दरअसल में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के साथ ब्राजील के राष्‍ट्रपति बोल्सोनारो ने भी प्रधानमंत्री मोदी से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर लगे बैन को हटाने का अनुरोध किया था। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने के भारत के फैसले के बाद बोलसोनारो ने प्रधानमंत्री मोदी का तुलना भगवान हनुमान से कर डाली। भारत हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है।
ट्रंप ने भी की पीएम मोदी की तारीफ
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को महान बताया और कहा कि वो भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो भारतीय पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। निर्यात पर ढील देने के बाद अमेरिका को अब यह दवा मिल सकेगी।

ट्रंप के बयान को अधिक तवज्जो देने से इनकार
इसके पहले ट्रंप ने अमेरिका में दिये अपने बयान में कहा था कि अगर भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर से प्रतिबंध नहीं हटाया तो अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति  ट्रंप के बयान को अधिक तवज्जो देने से मना करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है।

अमेरिका ने मानी मोदी सरकार की तीन मांगें
अमेरिका चाहता था कि भारत Hydroxychloriquine दवा फौरन उसे बेचना शुरू करे। चतुर बनिए की तरह मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने तीन मांगें रख दी। मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका ने मांगें मानने में देरी नहीं की और 24 घंटे में ही भारत की मांग मना ली। भारत ने अमेरिका के सामने ये तीन मांगें रखी थीं-  
1. भारतीय दवा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाज़ार खोलो।
2. FDA के नाम पर जितनी पाबंदियां लगाई गई हैं हटाओ।
3. आगे भी हमारी दवा कंपनियों को परेशान न किया जाए।
‘जरूरतमंद देशों को करेंगे सप्लाई’
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि कोरोनावायरस महामारी के समय भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे कठिन हालात में पूरे विश्व को एक होकर इससे लड़ना होगा। इसमें मानवीय पहलू के बारे में भी सोचना होगा। भारत ने कहा कि वह इन दवाओं को उन जरूरतमंद देशों को भी भेजेगा जो इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रसित हैं। विदश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे कठिन परिस्थिति में किसी तरह के अनर्गल विवाद को खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
भारत में सबसे ज्यादा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उत्पादन 
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उत्पादन विश्व में सबसे ज्यादा भारत में होता है। वर्तमान में भारत में 20 करोड़ गोलियों का उत्पादन होता है। भारत सरकार ने दो कंपनियों को 10 करोड़ गोलियों के उत्पादन का आर्डर दिया है। विशेषकर स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सरकार ने इस दवा का उपयोग करने का सोचा है। भारत अमेरिका को दवाई निर्यात करेगा या नहीं इसपर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन यह तो तय है कि भारत अपनी जरूरत को देखकर ही दवा दूसरे देशों को निर्यात करेगा।
भारत ने अन्य देशों के नागरिकों को उनके देश पहुंचाया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुटता एवं सहयोग दिखाना चाहिए। इसी नजरिए से हमने अन्य देशों के नागरिकों को उनके देश पहुंचाया है।‘
भारत ने हाइड्रोक्सीलक्लोरोक्वीन के निर्यात पर लगायी थी रोक

बता दें कि पिछले महीने, भारत ने हाइड्रोक्सीलक्लोरोक्वीन के निर्यात पर रोक लगा दी थी जब ऐसी खबरें आईं कि कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ने कहा है कि कोरोना का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सकारात्मक नतीजे मिले हैं।
दवा के निर्यात पर क्यों लगायी थी रोक ? 

अब सवाल यह है कि आखिर भारत सरकार ने दवा देने से अमेरिका को मना क्यों किया? दरअसल भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। चूंकि इसकी कोई दवा नहीं है, इसलिए डॉक्टर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को प्रयोग के तौर पर खासकर उन लोगों को जो कोरोना संक्रमितों के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें दे रहे हैं। हालांकि इस बात को पक्के तौर पर अभी नहीं कहा जा सकता है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोना ठीक हो रहा है। लेकिन कुछ मरीजों पर कारगर प्रतीत होने के बाद इस दवा को कोरोना के मरीजों को खिलाया जा रहा है। इसी वजह से भारत सरकार ने इस दवा का निर्यात बंद कर दिया था।
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