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क्या कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने 60 करोड़ रूपए कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल इंचार्ज जावद को यूनिवर्सिटी बनाने के लिए दिए थे? अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद का भाई हमूद सिद्दीकी हैदराबाद से गिरफ्तार, 25 साल से चल रहा था फरार: चिटफंड के बहाने की थी करोड़ों की ठगी

     अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन का भाई हमूद सिद्दीकी हैदराबाद से गिरफ्तार (फोटो साभार: न्यूज 18, हिंदुस्तान)
दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जाँच अब मध्य प्रदेश के महू तक पहुँच गई है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों की टेरर मॉड्यूल में संलिप्तता सामने आने के बाद एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी। इसी कड़ी में महू पुलिस ने यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद सिद्दीकी के भाई हमूद सिद्दीकी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमूद पिछले 25 सालों से पुलिस की पकड़ से बचता आ रहा था। उस पर आरोप है कि महू में चिटफंड और इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाकर उसने लोगों को पैसा दोगुना करने का झाँसा दिया और करोड़ों रुपए हड़प लिए। उसके शिकार सिर्फ कारोबारी ही नहीं बल्कि नौकरीपेशा परिवार भी बने थे।
महू पुलिस अधिकारी और इंदौर एसपी ग्रामीण योगचोन भूटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस लगातार हमूद सिद्दीकी की तलाश में जुटी हुई थी लेकिन हमूद पुलिस की करवाई को देखते हुए अंडर ग्राउंड हो गया था। बकौल पुलिस, उसके बारे में किसी तरह की कोई जानकारी पुलिस को नहीं मिल रही थी और जब पूछताछ में उसकी लोकेशन का पता चला तो उसकी गिरफ्तारी हुई। 

खुद को शेयर ट्रेडिंग का बिजनेसमैन बताकर रह रहा था हमूद

दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट में जब महू कनेक्शन सामने आया तो पुलिस ने जवाद सिद्दीकी और उसके परिवार की पुरानी गतिविधियों की जाँच शुरू की। इसी दौरान पुराने ठगी मामलों की फाइलें खुलीं और हमूद की तलाश तेज कर दी गई। पुलिस को शक है कि जवाद ने अपने फरार भाई के नाम पर अल-फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी बनाई थी, जिसके जरिये भारी मात्रा में लोगों से पैसे जुटाए गए।
हैदराबाद में फरारी के दौरान हमूद खुद को शेयर ट्रेडिंग का बिजनेसमैन बताकर रह रहा था। पुलिस ने उसके रिश्तेदारों और परिचितों की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाया और योजना बनाकर उसे पकड़ लिया। अब उसे महू लाया जाएगा, जहाँ उसके पुराने मामलों की विस्तृत जाँच की जाएगी।
माना जा रहा है कि महू छोड़ने के बाद हमूद किन-किन लोगों के संपर्क में रहा, उसकी आय किन रास्तों से आती रही और ठगी की रकम का इस्तेमाल कहाँ हुआ, इन सब की परतें अब एक-एक कर खोली जाएँगी।
क्या कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने मात्र 100 में यूनिवर्सिटी को जगह दी थी? 
कहा जा रहा है कि ये हैं जवाद सिद्दीकी दिल्ली बम कांड के मास्टरमाइंड और कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के इंचार्ज और अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक। करोड़ों, अरबों की पोंजी स्कीम से लेकर यूनिवर्सिटी तक। इस यूनिवर्सिटी की परमिशन किसने दी थी, क्या आपको पता है? कहा जा रहा है कि कांग्रेस की भूपेन्द्र हुड्डा सरकार ने 2014 में।

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने बाकायदा नियम कानून और संविधान में संशोधन करके फरीदाबाद की बेशकीमती 60 एकड़ जमीन को बहुत कम कीमत में एक ठग और फ्रॉड जवाद अहमद सिद्दीकी को जो कि मध्य प्रदेश में फ्रॉड करके भागा था उसे दे दिया और इतना ही नहीं हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने माइनॉरिटी विकास योजना के अंतर्गत यहां इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए 60 करोड रुपए भी अलॉट किए, सोचिए जो कांग्रेस अदानी को जमीन देने पर छाती कूटती है वहीं कांग्रेस किस तरह से आतंक के अड्डे बनाने के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे 60 एकड़ जमीन देती है। इस अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अंदर एक विशाल मस्जिद बनी है और उस मस्जिद के इमाम के घर पर ही आतंकी मुजम्मिल शकील रहता था। पुलिस ने मस्जिद के इमाम को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, मुजम्मिल शकील के परिवार वाले कह रहे हैं कि मेरे डॉक्टर बेटे को उसे इमाम ने ही ब्रेनवॉश करके आतंकी बनाया होगा।

अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो समय के साथ पता लग ही जाएगा क्योंकि भारतीय एजेंसियों ने जावेद को भी अपनी यूनिवर्सिटी के संपूर्ण दस्तावेज और लेनदेन के खातों सहित  पूछताछ के लिए बुला लिया है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की जमीन के बारे में कई आरोप लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह जमीन मात्र 100 रूपए में दी थी, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी की जमीन की जांच शुरू हो गई है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन का कितना हिस्सा उपयोग किया, किसने और कितने पैसे में जमीन बेची गई, और इसमें किस-किस का हाथ है।

जांच में यह भी पता चला है कि यूनिवर्सिटी ने जमीन खरीदने में कई नियमों का उल्लंघन किया है, जिसमें रास्तों पर कब्जा करना और किसानों को दबाव में लाकर जमीन बेचने के लिए मजबूर करना शामिल है।

5600 करोड़ रूपए की कोकीन तस्करी का सरगना कांग्रेस सदस्य, RTI सेल का पूर्व चेयरमैन तुषार गोयल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया : रिपोर्ट में दावा- पहले sex racket भी चलाता था

                              कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा के साथ आरोपित तुषार गोयल (साभार: एनडीटीवी/आजतक)
दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी में 5600 करोड़ रुपए की कोकीन की एक बड़ी खेप को पकड़ा है। इस ड्रग सिंडिकेट का सरगना तुषार गोयल है। तुषार गोयल कांग्रेस का नेता है और वह साल 2022 में दिल्ली प्रदेश 
कांग्रेस की RTI सेल का चेयरमैन रह चुका है। उसने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका जिक्र किया है।

सरगना तुषार गोयल के कई कांग्रेस नेताओं के साथ फोटो भी सामने आए हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में हुआ है। खुद तुषार गोयल ने स्पेशल सेल की पूछताछ में इसका खुलासा किया है कि वह 2022 में कांग्रेस दिल्ली का RTI सेल प्रमुख था। उसने बताया कि वह साल 2002 में यूथ कांग्रेस का सदस्य बना था।

पुलिस तुषार गोयल के बैकग्राउंड को खंगाल रही है। कहा जा रहा है कि 40 वर्षीय तुषार गोयल ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता है। उसके पिता दिल्ली में तुषार पब्लिकेशन और ट्यूलिप पब्लिकेशन के मालिक हैं। तुषार ने साल 2008 में शादी की और उसके बाद देह व्यापार का काम शुरू कर दिया और सेक्स रैकेट चलाने लगा।

इसी दौरान तुषार गोयल की मुलाकात दुबई के एक गिरोह से हुई। तभी से वह देह व्यापार के साथ-साथ ड्रग्स के धंधे में जुड़ गया और ड्रग्स की तस्करी करने लगा। दिल्ली पुलिस को अगस्त में इसकी भनक लगी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस पिछले दो महीने से उस पर और उसके गिरोह पर नजर रख रही है। आखिरकार उसे दबोच लिया गया।

 

                                               तुषार गोयल द्वारा डाला गया RTI (साभार: आजतक)

तुषार गोयल का साथी हिमांशु पहले बाउंसर था। वहीं, तुषार का ड्राइवर औरंगजेब सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। चौथा आरोपित भरत जैन ही मुंबई से 15 किलोग्राम कोकीन दिल्ली लाया था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से पहले 15 किलोग्राम कोकिन बरामद की थी। इसके बाद उनकी निशानदेही पर महिपालपुर के गोदाम में छापा मारकर बाकी की ड्रग्स जब्त की गई।

दरअसल, दिल्ली के महिपालपुर में 550 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी और हिमांशु कुमार शामिल है। लगभग 5600 करोड़ रुपए की कोकीन के तार दुबई से जुड़े हैं। सप्लायर के तौर पर दुबई के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग्स मुंबई के बंदरगाह तक पहुँचा और वहाँ से इसे दिल्ली लाया गया था। इसे महिपालपुर के गोदाम में रखा गया था। कोकीन के साथ-साथ वहाँ से 40 किलोग्राम गाँजा भी बरामद किया गया है। कहा जा रहा है कि इन ड्रग्स से 50 लाख डोज बनाई जा सकती हैं। इस खेप को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहुँचाया जाना था।

पप्पू नहीं हैं राहुल गाँधी, इतनी ‘गहरी सोच’ कि कई बार समझना मुश्किल होता है: सैम पित्रोदा को कांग्रेस नेता में ‘रणनीतिकार’ दिखे, स्वरा भास्कर ने भी पाया ‘इंटेलिजेंट’

                                स्वरा भास्कर के बाद सैम पित्रौदा ने राहुल गाँधी को 'पप्पू' कहा
अमेरिका के टेक्सास में आयोजित एक कार्यक्रम में गाँधी परिवार के पूर्व सलाहकार सैम पित्रौदा ने मंच पर चढ़कर राहुल गाँधी की तारीफों के पुल बाँधे। इस दौरान उन्होंने लोगों को समझाया कि आखिर क्यों राहुल गाँधी को ‘पप्पू’ नहीं कहा जाना चाहिए।

उन्होंने राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए कहा, “राहुल गाँधी का एजेंडा कुछ बड़े मुद्दों को संबोधित करना है। मैं आपको बता दूँ कि वह ‘पप्पू’ नहीं हैं, वह उच्च शिक्षित हैं, वह किसी भी विषय पर गहरी सोच रखने वाले रणनीतिकार हैं और कई बार उन्हें समझना बहुत मुश्किल होता है।।”

सैम पित्रोदा ने आगे कहा कि राहुल गाँधी की सोच का कोई तोड़ नहीं है। उनके पास एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसको गलत दिखाने के लिए भाजपा ने करोड़ों रुपए खर्च किए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राहुल के खिलाफ गलत दृष्टिकोण बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी कांग्रेस समर्थक ने इस तरह मंच से राहुल गाँधी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया हो। इससे पहले स्वरा भास्कर ने भी राहुल गाँधी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया था।

इंडिया टुडे से बात करते हुए स्वरा भास्कर ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि इस तरह की तुलना जायज होगी, लेकिन मुझे राहुल गाँधी की याद आ रही है। उन्हें हर कोई पप्पू कहने लगा। इसके कारण धीरे-धीरे लोगों को यकीन होने लगा कि वे पप्पू हैं। लेकिन मैं उनसे मिली हूँ। वे बेहद ही बुद्धिमान और मुखर इंसान हैं। इसी तरह बॉलीवुड का भी पप्पूकरण कर दिया गया है।”

दिलचस्प बात ये है कि पित्रौदा और भास्कर के इन बयानों के कारण राहुल गाँधी की तारीफ की जगह उनका और भी मखौल उड़ता है। लोग कहते हैं कि इस तरह के बयान देकर तो कांग्रेसी  सिर्फ ये बता रहे हैं कि वो भी मानते हैं कि लोग राहुल गाँधी को क्या समझते हैं और उन्हें सिर्फ उनका बचाव करना है।

बांग्लादेश : बड़े कारोबारी और उसके हीरो बेटे की हत्या: बचने के लिए पिस्टल से गोली चलाई, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला – शेख मुजीबुर रहमान पर भी बना चुके थे मूवी

                                 बांग्लादेश में कारोबारी सेलीम खान और उनके बेटे शंतो खान की हत्या
बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सत्ता परिवर्तन की वजह बना। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहाँ भीड़ ने कई हिन्दुओं की हत्याएँ कर दी हैं और मंदिरों पर भी हमले किए गए हैं। अब ‘लक्ष्मीपुर मॉडल यूनियन परिषद’ के अध्यक्ष सेलीम खान और उनके फिल्म स्टार बेटे शंतो खान को भीड़ ने मार डाला है। घटना सोमवार (5 अगस्त, 2024) के दोपहर की है। दोनों भीड़ से बचने के लिए चाँदपुर सदर उपजिला स्थित अपने आवास से भाग रहे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

बलिया यूनियन स्थित फोरक्काबाद बाजार में भीड़ ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया। उन्होंने खुद को बचाने के लिए पिस्टल से गोलियाँ भी चलाई, लेकिन सब बेकार। वो किसी तरह आगे बढ़ कर बागरा बाजार तक पहुँचे, लेकिन वहाँ फिर से भीड़ ने उन्हें घेर लिया। वहाँ भीड़ ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, सेलीम खान कई वर्षों से नौसैन्य सीमा में पद्मा-मेघना नदी से सैकड़ों ड्रेजरों की मदद से अवैध रूप से रेत निकाल रहे थे और करोड़ों टका जमा कर रहे थे।

उन्हें इन गतिविधियों के कारण जेल भी हुई थी। बांग्लादेश के ‘एंटी-करप्शन कमीशन’ (ACC) में उनके खिलाफ अभी भी केस चल रहा है। चाँदपुर सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिस-इन-चार्ज (OIC) मोहम्मद शेख मोहसिन आलम ने कहा कि पुलिस को दोनों पिता-पुत्र की मौत के बारे में पता चला है, लेकिन घटना के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि जवान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर नहीं गए। सेलीम खान ‘शापला मीडिया’ के भी संस्थापक हैं।

‘शापला मीडिया’ के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण भी हो कर चुके थे। इस कंपनी के ‘शहंशाह’ और ‘विद्रोही’ नामक फ़िल्में काफी लोकप्रिय हुई थीं। उन्हें शेख हसीना का करीबी माना जाता था, उन्होंने शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की बायोपिक फिल्म ‘बंग बंधु’ का निर्माण भी किया था। उन्होंने अपने बेटे को लॉन्च करने के लिए शेख मुजीबुर रहमान के बचपन पर आधारित फिल्म ‘तुंगी परार मियाँ भाई’ बनाई थी। अभिनेत्री कौशानी मुखोपाध्याय ने शंतो खान की मौत पर दुःख जताते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है। कई अन्य बंगाली फिल्म हस्तियों ने दुःख जताया है।

नेहरू वाला अनाथालय, बच्चियों के साथ राहुल गाँधी की तस्वीर! लड़कियों के लिए बाथरूम में दरवाजे तक नहीं, कांग्रेस के प्रोपेगंडा की NCPCR अध्यक्ष ने खोल दी पोल

राहुल गाँधी की तस्वीर जिस अनाथालय की बच्चियों के साथ आई थी, वहाँ थी भारी अनियमितता
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा फैलाए जा रहे प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अगर भारत को वैश्विक शक्ति और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो केंद्र सरकार को एक्शन में आना होगा NCPCR जैसे संगठनों को नियंत्रित करना होगा। उन्होंने NCPCR पर सासनीख़ेज होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये भारत की छवि को खराब कर रहा है।

NCPCR आजकल मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे अवैध छात्रावासों और मदरसों में बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर सक्रिय रहता है। साथ ही हिन्दू छात्र-छात्राओं को ईसाई मिशनरियों और इस्लामी मौलवियों द्वारा अपने मजहब के तौर-तरीके सिखाए जाने के खिलाफ भी बाल आयोग एक्शन में है। इससे मिशनरी-मौलवी गिरोह को खासी मिर्ची लगी हुई है। प्रियंक कानूनगो ने विवेक तन्खा को जवाब देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक ट्वीट शेयर किया।

इस ट्वीट में राहुल गाँधी ने 2 तस्वीरें डाली हैं, जिनमें वो बच्चों के साथ दिख रहे हैं। राहुल गाँधी इस दौरान ‘स्वराज भवन’ के ‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ पहुँचे हुए थे। साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा कि उनके चुनावी प्रचार अभियान की शानदार शुरुआत हुई है, कई मुस्कुराहटों और काफी मात्रा में ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत हुई है। प्रियंक कानूनगो ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते समय नाबालिग बच्चों के चेहरों को ढँक दिया। साथ ही उन्होंने ‘पत्रिका’ की एक खबर शेयर की।

उन्होंने जवाब दिया, “प्रयागराज में आनंद भवन परिसर में जहाँ आपके नेता राहुल गाँधी प्रयागराज प्रवास के दौरान रेस्ट करते थे और चुनाव अभियान के दौरान ऊर्जा ग्रहण करते थे, वहीं गाँधी परिवार द्वारा चलाए जा रहे बग़ैर लायसेंस के अनाथ आश्रम में किशोर वय अनाथ लड़कियों के बाथरूम में दरवाज़े नहीं लगाए गए थे, अनाथ बच्चियों को परिवारों में गोद नहीं दिया जाता था, विदेशी फ़ंडिंग भी आती थी। यह सब मेरे द्वारा किए गए NCPCR के निरीक्षण में उजागर हुआ।”

साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे निरीक्षण के बाद FIR दर्ज की गई। प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस से देश की बदनामी नहीं हुई बल्कि विवेक तन्खा की पार्टी और गाँधी ख़ानदान का सच उजागर हुआ। उन्होंने राज्यसभा सांसद को जवाब देते हुए लिखा, “आप सम्मानित सांसद हैं कृपया गांधी परिवार को ‘देश’ मानना बंद करिए, भारत बहुत महान देश है।” बता दें कि इसी ‘स्वराज भवन’ में चल रहे अनाथालय में भारी अनियमितताएँ सामने आई थीं।

‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ का गठन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत के खंडित होने के बाद किया था। वहाँ अनाथ बच्चियों को रखा जाता था। 17 से 29 साल तक की लड़कियाँ यहाँ रखी गई थीं। प्रियंक कानूनगो ने अपने निरीक्षण के बाद आदेश दिया था कि बाथरूम में दरवाजे लगाए जाएँ। वहाँ रह रहीं बच्चियों की असुरक्षा का मामला भी सामने आया था। डीएम के सामने भी ये मामला आया था। फिर लड़कियों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया था।

कर्नाटक : मुस्लिम को बनाओ डिप्टी CM, 5 स्पेशल विभाग हमें दो: वक्फ बोर्ड ने रख दी अपनी डिमांड; हिन्दुओं आंखें खोलो और चुनावी हिन्दुओं का बहिष्कार करो

कर्नाटक वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शफी सादी
कर्नाटक में कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य के वक्फ बोर्ड ने एक नई माँग उठाई है। वहाँ सुन्नी उलमा बोर्ड के मुस्लिम नेताओं ने कहा कि कर्नाटक में उप मुख्यमंत्री किसी मुस्लिम समुदाय के नेता को बनाओ। इसके अलावा 5 मुस्लिम विधायकों को गृह राजस्व, स्वास्थ्य और अन्य खास विभागों की जिम्मेदारी सौंप दो।

बुजुर्गों ने कोई कहावत गली-कूचों में कंचे खेलते हुए नहीं बनाई थी, लेकिन हिन्दू एक के बाद एक ठोकर खाने के बाद भी छद्दम-निरपेक्ष नेताओं और पार्टियों की वास्तविकता को नहीं पहचानने की भूल कर अपनी आने वाली पीडियों को घोर संकट में डाल रहा है। कांग्रेस अभी तक बहुमत होने के बावजूद कर्नाटक मुख्यमंत्री का निर्णय लेने में असफल हो रही है तो सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अपनी मांग रख दी है। हिन्दू चुनावी हिन्दुओं के मकड़जाल में फंस अपने ही हाथों अपना नरसंहार करने पर तुला है। संत कृपालु जी महाराज के प्रवचन अपने चैनल पर दिखाकर चर्चित होने वाले भी भूल रहे हैं कि जब 7 मार्च 1966 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी गो-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधुओं पर गोलियां चलवाकर पार्लियामेंट स्ट्रीट को उनके खून से लाल कर दिया था, तब कृपालु जी इंदिरा को श्राप देते हुए कहा था कि 'एक दिन हिमालय से आधुनिक वेशभूषा में तेजस्वी तेरी पार्टी को समाप्त कर देगा... ', विरोधी हिन्दुओं को जातियों में लड़वाकर अपना खेल खेलने में व्यस्त हैं। 2014 से निरन्तर परमपिता भी हिन्दुओं की आंखें खोलने का प्रयास कर रहे है, लेकिन हिन्दू अपनी आंखें बंद किये बैठा है। ठीक ही कहा है: सोए हुए जगाना सरल है, परन्तु जो जागे हुए सो रहा हो, उसे जगाना बहुत कठिन है, बिलकुल वही स्थिति आज हिन्दुओं की है।   

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शफी सादी ने कहा कि उन्होंने चुनाव से पहले ही कहा था कि किसी मुस्लिम को प्रदेश का उपमुख्यमंत्री होना चाहिए और उनको (मुस्लिमों को) 30 सीटें दी जानी चाहिए। हालाँकि, उन्हें 15 सीटें मिलीं, जिनमें से 9 मुस्लिम उम्मीदवार जीते।

अब उनका कहना है कि इन चुनावों में करीब 72 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस केवल मुसलमानों की वजह से जीती। सादी बोले कि एक समुदाय के तौर पर मुस्लिमों ने कांग्रेस को बहुत कुछ दिया है। अब समय आ गया है कि बदले में उन्हें कुछ मिले।

शफी ने माँग की, “हम एक मुस्लिम उप-मुख्यमंत्री और पाँच मंत्री चाहते हैं जिनके पास गृह, राजस्व और शिक्षा जैसे अच्छे विभाग हों। इसके साथ हमें शुक्रिया देना कांग्रेस की जिम्मेदारी है। इन सभी को लागू करने के लिए हमने सुन्नी उलमा बोर्ड कार्यालय में इमरजेंसी मीटिंग की है।”

वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि 9 मुस्लिम विधायकों में से किसे ये पद दिए जाएँ ये कांग्रेस  निर्णय लेगी कि किसने अच्छा किया। कई मुस्लिम प्रत्याशियों ने अपनी विधानसभा छोड़ अन्य क्षेत्रों का भी दौरा किया और हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल दिया। यही वजह है कि कांग्रेस जीत सकी। उनकी जिम्मेदारी है कि मुस्लिम समुदाय का एक डिप्टी सीएम होना चाहिए।

15 में से जीते 9 विधायक

इस बार चुनाव में कांग्रेस ने अपनी पार्टी से 15 मुस्लिम कैंडिडेट्स को मैदान में उतारा था। इनमें से 9 जीत पाने में सफल हुए।
इनके नाम बीदर से रहीम खान जीते, मंगलुरु से खादर फरीद, मैसूर से तनवीर सैत, बेलगावी से आसिफ सैत, शिवाजीनगर से रिजवान अरशद, चामराजपेट से जमीन अहमद खान, रामनगर से एच ए इकबाल हुसैन, शांति नगर से एन ए हैरीस, गुलबर्गा से कनीज फातिमा है।

मुख्यमंत्री के नाम का नहीं हुआ चुनाव

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के नतीजे 13 मई को ही आ गए थे। लेकिन कांग्रेस अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इस पद के लिए डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच प्रतिस्पर्धा मानी जा रही है। विधायक दल का नेता चुनने के लिए 14 कई को हुई बैठक में दोनों पक्षों की नारेबाजी का बाद यह जिम्मेदारी आलाकमान को दे दी गई है।