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ट्रंप का मोदी सरकार को दो टूक जवाब, अमेरिका का दें साथ नहीं तो मसूद अजहर मामले में धोना पड़ेगा हाथ

Trump's answer to Modi's government will be answered, America will not be allowed to go to Masood Azhar case in the handsवाशिंगटन की ओर से दिल्ली को ईरान से तेल खरीद मामले में सख्त संदेश पहु्ंचा दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत को चुनाव करना है कि उसे ईरान से तेल खरीदना है या फिर मसूद अजहर पर प्रतिबंध के मामले में अमेरिकी मदद चाहिए। दूसरे अर्थों में इसका यही मतलब निकाला जा सकता है कि भारत में चुनावों का लाभ उठाकर, अमेरिका भारत को ब्लैकमेल कर रहा है। 

अमेरिकी भारत से ईरान से तेल आयात बंद करने की अपील 

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वो पुलवामा हमले के बाद मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर साथ दे रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि उसने ब्रिटेन,फ्रांस जैसे देशों के साथ मिलकर मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की ग्लोबल आतंकी लिस्ट में शामिल करने की भरपूर कोशिश की है, जो आगे भी जारी रहेगी। अगर भारत अमेरिकी स्टैंड के साथ खड़ा होता है। अमेरिका ने मांग की है कि भारत को अमेरिका का साथ देते हुए ईरान से तेल आयात रोक देना चाहिए। अमेरिका का मानना है कि भी आंतकवादी नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी रुख के साथ खड़ा होना चाहिए। 

चाबहार पोर्ट के निर्माण पर प्रतिबंध नहीं

नई दिल्ली के साथ बातचीत ने अमेरिकी प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि ईरान पर प्रतिबंधों का असर चाबहार पोर्ट के निर्माण पर नहीं लागू होगा। चाबहार पोर्ट का निर्माण पहले की तरह जारी रहेगा। बता दें चाबहार पोर्ट भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच ट्रेड का बड़ा जरिया है। इससे पाकिस्तान रुट की जरुरत नहीं पड़ती है।
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अमेरिका के ईरान प्रतिबंधों से भारत को राहत देने से इनकार के बाद अब सऊदी अरब ने भी बड़ी झटका दिया है। दरअसल सऊदी अरब .....

2 मई से भारत ईरान से नहीं खरीद पाएगा तेल 

भारत को ईरान से तेल खरीदने की मिली छूट 1 मई 2019 से खत्म हो रही है। 2 मई के बाद से भारत ईरान से तेल नहीं खरीद सकेगा। ऐसा करके अमेरिका ईरान पर अधिकतम दबाव बनाना चाहता है।  

अमेरिका के बाद सऊदी अरब ने भी दिया झटका

saudi arabiaअमेरिका के ईरान प्रतिबंधों से भारत को राहत देने से इनकार के बाद अब सऊदी अरब ने भी बड़ी झटका दिया है। दरअसल सऊदी अरब ने ऐसे हालात के बावजूद क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ाने से इंकार कर दिया है। सऊदी के इस ऐलान से दुनिया में क्रूड की कीमतें बढ़ सकती हैं और इस क्रम में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर महंगाई की मार पड़ सकती है।

उत्पादन बढ़ाने की योजना नहींः सऊदी अरब

बुधवार को सऊदी अरब के एनर्जी मिनिस्टर खालिद अल-फलीह (Khalid al-Falih) ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी क्रूड के खरीदारों को प्रतिबंध से छूट वापस लिए जाने के बाद तत्काल तेल उत्पादन बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। रियाद में एक फाइनेंस कांफ्रेंस के दौरान फलीह ने कहा, ‘वेनेजुएला संकट और ईरान पर सख्ती के बावजूद ग्लोबल इन्वेंट्रीज बढ़ रही हैं। इसलिए तत्काल कुछ होने की उम्मीद नहीं दिखती है।’

फिलहाल अच्छी है आपूर्ति

उन्होंने कहा कि मार्केट में फिलहाल अच्छी आपूर्ति है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने कस्टमर्स से बात कर रहे हैं। हमारी इन्वेंट्रीज पर नजर है और साथ ही अन्य प्रोड्यूसर्स से भी बात कर रहे है।’
अमेरिका ने इस हफ्ते अपनी कार्रवाई को वाजिब ठहराते हुए कहा कि मार्केट में पर्याप्त सप्लाई है। डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने कहा कि उसने सऊदी अरब और यूएई से भी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए बात की है।

सऊदी अरब का बाजार आकलन पर जोर

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी किंगडम के अधिकारियों ने निजी बातचीत में कहा कि वे ईरान तेल के बाजार पर असर का आकलन किए बिना तेल उत्पादन बढ़ाने को उत्सुक नहीं है।
बीते साल सऊदी अरब ने अमेरिका के कहने पर तेल उत्पादन रिकॉर्ड लेवल तक बढ़ा दिया था। साथ ही अमेरिका ने चीन और भारत जैसे देशों को ईरान से तेल की खरीद की छूट दिए जाने से ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतें गिर गई थीं।
इसके चलते तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (Opec) और रूस की अगुआई वाले उसके सहयोगियों 2019 की शुरुआत में सप्लाई में कटौती कर दी थी। इसके पीछे उन्होंने बाजार को संतुलित करने की वजह बताई थी।

मोदी के सहारे अमेरिका से टकराएगा यह देश, लगाई तेल खरीदने की गुहार

Venezuela-US sanctions
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध भारत में उनके विरोधी उनको हटाने के लिए एक के बाद एक गठबंधन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अन्य देश उनकी विदेश नीतियों से प्रभावित हो अपने व्यापार के लिए मोदी का सहारा ले रहे हैं। जो मोदी की विदेश नीतियों के सफल होने का शुभ संकेत है। देखिए: 
अमेरिका का एक अन्य दुश्मन देश अब भारत के सहारे उससे टकराने की कोशिश कर रहा है। हम लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला की बात कर रहे हैं। कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहे वेनेजुएला ने कहा कि वह भारत को ज्यादा तेल बेचना चाहता है। उसने कहा कि वह अपनी कमाई बढ़ाने के लिए भारत की ओर देख रहा है। भारत दुनिया में ऑयल का तीसरा बड़ा कंज्यूमर देश है। इससे पहले अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने वाला एक अन्य देश ईरान के भी भारत से अच्छे रिश्ते हैं और वह भारत को कच्चा तेल बेच रहा है।

पेमेंट के लिए नया सिस्टम डेवलप करेगा वेनेजुएला

वेनेजुएला के ऑयल मिनिस्टर और लैटिन अमेरिकी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी पीडीवीएसए (PDVSA) के प्रेसिडेंट मैनुअल कुवेदो ने अमेरिकी प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करने के लिए एक वैकल्पिक पेमेंट मैकेनिज्म पर काम करने के संकेत दिए। पेट्रोटेक कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने रिपोर्टर्स से बातचीत में कहा, ‘हमारे भारत के साथ अच्छे संबंध हैं और हम इन रिश्तों को जारी रखना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की इकोनॉमी को 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा और वह अब भारत को ज्यादा तेल बेचना चाहता है।

Venezuela-US sanctionsवेनेजुएला पर प्रेशर बना रहा है अमेरिका

गौरतलब है कि अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने का दबाव बनाने के उद्देश्य से वहां से तेल का निर्यात रोकने के लिए पीडीवीएसए पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। कुवेदो ने कहा, ‘भारत के साथ उसके संबंध कायम रहेंगे। ट्रेड जारी रहेगा और हम धीरे-धीरे संबंधों को विस्तार देंगे।’

भारत-चीन को हो सकता है फायदा

वेनेजुएला ने रोजाना 15.7 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है, जो दो दशक पहले की तुलना में आधा ही है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से इंपोर्ट पर बैन लगाए जाने के साथ पीडीवीएसए भारत और चीन जैसे दूसरे बड़े कंज्यूमर देशों को तेल बेचने की भरसक कोशिश कर रहा है।
वेनेजुएला के भारत के साथ हैं अच्छे संबंध
Venezuela-US sanctions
कुवेदो ने कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत के तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के भारत के साथ ‘अच्छे संबंध’ हैं। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत के साथ उनके संबंध बरकरार रहेंगे। ट्रेड जारी रहेगा और हम आपसी ट्रेड संबंधों का विस्तार करेंगे।’ वेनेजुएला के मंत्री ने कहा कि सभी कंज्यूमर देशों की तरफ से यह सुनना अहम है। 
पेमेंट मैकेनिज्म पर उन्होंने कहा, ‘भारत को पर्याप्त तेल उपलब्ध कराने के लिए हमारे पास हर तरह के मैकेनिज्म और चैनल हैं। पीडीवीएसए विश्व स्तर की एक अच्छी कंपनी है और इस संबंध को जारी रखने के लिए हम हर संभव कोशिश करेंगे।’
वेनेजुएला को होगा 20 अरब डॉलर का नुकसान
कुवेदो ने अमेरिकी प्रतिबंधों को एकतरफा और अवैध करार दिया, जिससे ऑयल रेवेन्यू पर निर्भर इकोनॉमी को 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका दुनिया भर में स्थित रिसोर्सेज पर कब्जा कर रहा है। अभ वे वेनेजुएला की सिटगो पेट्रोलियम (Citgo Petroleum Corp) को टारगेट कर रहे हैं।’ सिटगो पेट्रोलियम, पीडीवीएसए की एक यूनिट है और वेनेजुएला की बड़ी विदेशी एसेट है। यह अमेरिका की तीन रिफाइनरियों को परिचालित करती है, जो अमेरिका के कुल फ्यूल प्रोडक्शन में लगभग 4 फीसदी योगदान करती है।

हो गई बड़ी डील, भारत में तेल जमा करेगा यह अरब देश

जल्द ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपने कच्चे तेल को भारत में जमा करना शुरू कर देगा। दरअसल भारत ने यूएई की अाबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) को कर्नाटक के पादुर स्थित अपने अंडरग्राउंड स्ट्रैटेजिक ऑयल स्टोरेज के एक हिस्से को लीज पर देने के लिए शुरुआती समझौता किया है। तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह इस साल यूएई की कंपनी के साथ हुई दूसरी इस तरह की डील है। पादुर में विदेशी कंपनियों को तेल जमा करने की अनुमति देने से भारत को 10 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।
भारत का होगा तेल पर पहला अधिकार
एग्रीमेंट के मुताबिक, वहां जमा किए गए तेल को एडीएनओसी स्थानीय रिफाइनर कंपनियों को बेच सकेगी, लेकिन इमर्जेंसी की स्थिति में इस तेल पर पहला अधिकार भारत सरकार का होगा। यूएई की कंपनी ने ट्वीट में बताया, ‘एडीएनओसी ने कर्नाटक में पादुर अंडग्राउंड फैसिलिटी में क्रूड ऑयल के स्टोरेज की संभावनाओं की तलाश के लिए आईएसपीआरएल के साथ समझौता किया है।’
भारत के बचेंगे 10 हजार करोड़ रुपए
इन अंडरग्राउंड स्टोरेज इस्तेमाल के लिए विदेशी कंपनियों को देने से जहां सरकार को तेल स्टोर करने में आने वाली कॉस्ट की बचत करने में मदद मिलेगी। लॉ एंड आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने 8 नवंबर को कैबिनेट मीटिंग के बाद कहा था कि विदेशी कंपनियों को पादुर में तेल जमा करने की अनुमति देने से सरकार को 10 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पिछले हफ्ते ही कैबिनेट ने पादुर में विदेशी तेल कंपनियों को तेल जमा करने की अनुमति देने के फैसले पर मुहर लगाई है। जहां विशाखापट्टनम फैसिलिटी के एक तिहाई हिस्से को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ले चुकी है और भारत सरकार ने मंगलूर स्टोरेज को भर दिया है। वहीं 2.5 एमटी की पादुर फैसिलिटी अभी तक खाली है।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जमा होगा तेल
भारत ने कर्नाटक के मंगलूर और पादुर व आंध्र प्रदेश के पादुर में अंडरग्राउंड कुएं तैयार किए हैं, जिनमें इमर्जेंसी के लिए 53.33 लाख टन तेल जमा किया जा सकता है। इतने तेल से भारत की 9.5 दिनों की तेल की जरूरत पूरी हो सकती है। विदेशी तेल कंपनियों को इनमें तेल जमा करने की अनुमति दे दी गई है, हालांकि इसके साथ ही यह शर्त भी रखी गई है कि इमर्जेंसी में भारत सरकार इस तेल को अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है।
भारत में तेल जमा करेगा संयुक्त अरब अमीरात
एडीएनओसी ने इस साल फरवरी में मंगलूर के 1.5 एमटी स्ट्रैटेजिक ऑयल स्टोरेज का आधा हिस्सा भरने के लिए समझौता किया था। आबूधाबी में एग्रीमेंट के दौरान मौजूद रहे प्रधान ने अपने ट्वीट में कहा, ‘आईएसपीआरएल (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व इंटिटी ऑफ इंडिया) और यूएई ने कर्नाटक में पादुर स्ट्रैटजिक रिजर्व में क्रूड ऑयल भरने में की एडीएनओसी के निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए समझौता किया है।’