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जनता के सामने भिड़े BJP नेता, मंच पर जमकर चले लात-घूसे

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ये क्या हुआ? कैसे हुआ?
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी की दो तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की छवि को नुक़सान हो सकता है। एक तस्वीर किराड़ी की है और दूसरी तस्वीर गोकुलपुरी की। अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर चल रही जनसभा के दौरान किराड़ी में बीजेपी के दो गुटों के नेता और कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। इतना ही नहीं, मंच पर जमकर लात-घूसे भी चले। मारपीट और हंगामे के बाद सभा रद्द कर दी गई। इस कार्यक्रम के दौरान हुए झगड़े के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया।
वहीं दूसरी जगह गोकुलपुरी में भी बीजेपी की जनसभा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। यहां मंच के नीचे महिला से अभद्रता के आरोप में एक कार्यकर्ता की पिटाई की गई। इसका भी वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है। बीजेपी में कार्यकर्ताओं के बीच पब्लिक के सामने मंच पर मारपीट को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का बयान आया है।
मनोज तिवारी ने कहा, ''एक-दो ऐसी घटनाएं घटी जिस पर नज़र है। ये मारामारी टिकटों को लेकर है क्योंकि हम सत्ता में आ रहे हैं। अनाधिकृत कॉलोनी पर खुशखबरी बहुत जल्द ही केंद्र सरकार दे सकती है और उसी के कार्यक्रम में ये मारपीट सामने आई है। ये ऐसी घटना है जो बीजेपी के संस्कार से मेल नहीं खाती है। हम चिंतित हैं।''
पार्टी संस्कारों का तो उस दिन दहन हो गया था, जिस दिन भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ था, तब से आज तक भाजपा में संस्कार देखने को नहीं मिल रहे। भाईचारा, प्रेम नहीं, देखने को नहीं मिल रहा। पार्टी में नहीं आता, न आये, मरने दो। ये है आज संस्कार। आश्चर्य होता है कि दिल्ली में ही आज कई मंडल सुचारु रूप से संगठित ही नहीं है। अपने मंडल की गतिविधियां शीर्ष नेतृत्व को भेजनी ही अपने कुछ लग्गू-भग्गुओं को साथ रखो, व्हाट्सअप पर फोटो डाल दो, बन गया मंडल, मंडल सुचारु रूप से संगठित और कार्यविंत है। मनोज साहब ये है सच्चाई, कोई आरोप नहीं। और नहीं, निम्न लेख देखिए। क्या ऐसे लोग मोदी-योगी-अमित के परिश्रम का पलीता नहीं कर रहे? 
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''तीन सदस्यीय कमिटी बनाई है और चार पांच दिन के अंदर जो भी दोषी होगा, उसके ऊपर संगठनात्मक कार्रवाई अवश्य होगी। कोई भी हमारे लिए खास और साधारण कार्यकर्ता कम नहीं. जांच में जो दोषी पाए गए उन पर कार्रवाई होगी।''
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अभी दो ही दिन पूर्व दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी ने जो दर्द बयां किया, वास्तव मे.....

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याद है लोकसभा चुनावों में हुआ यह झगड़ा 
कल तक जो समस्त गैर-भाजपा पार्टियों में होता था, वही मारपीट और गाली-गलोच भाजपा में भी शुरू हो चुकी है। पीछे लोक सभा चुनाव के दौरान भी मारपिटाई की घटना घटी, लेकिन उस समय जनता के दिमाग में केवल नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनता देखने की लालसा ने उस ओर ध्यान नहीं दिया, नज़रअंदाज़ का दिया। लेकिन जब स्थानीय चुनाव होते हैं, तब ये घटनाएं अपना रंग दिखाती है। अनाधिकृत कॉलोनियों का तो बहाना होता है, वास्तव में ये जो अनचाहे उम्मीदवार थोपे जाते हैं, झगडे की जड़ है। बाहर से आये आदमी को टिकट दे दिया जाता है, और इतने वर्षों से पार्टी के लिए तन,मन और धन से लगे होते हैं, उन्हें दूध में से मक्खी की तरह फेंकने की बजाए उन्ही पर उस बाहरी आदमी को जितवाने की ज़िम्मेदारी डाल दी जाती हैं। लोकसभा चुनावों से पूर्व हुए नगर निगम चुनावों में तो प्रचार के दौरान बीच सड़क पर झगड़ा देखा गया, झगड़ा इतना बढ़ गया कि उचित बात पर झगड़ा करने वाले पर ही महिलाओं से अभद्र व्यवहार लगा जिला अध्यक्ष तक शिकायत हो गयी। उम्मीदवार बिक गया, और भाजपा ने सीट गँवाई ही नहीं, जमानत जब्त।    

दिल्ली : क्या वास्तव में पार्टी को छोड़ने वाले हैं मनीष सिसोदिया?--मनोज तिवारी, सांसद एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला कांग्रेस से नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी से है। जिस प्रकार कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए चुनाव मैदान में आती है, उसी भांति भाजपा भी दिल्ली में अपने अस्तित्व के लिए चुनाव लड़ती है। पहले 15 वर्ष शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने उपरांत अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने में कामयाबी पायी। यानि लगभग 20 वर्षों से अधिक समय से भाजपा दिल्ली सत्ता से बाहर है। 
वास्तव में दिल्ली भाजपा मोदी-योगी-अमित त्रिमूर्ति के कन्धों पर निर्भर रहती है। लोकसभा चुनावों की भांति स्थानीय चुनावों में भी त्रिमूर्ति के करिश्में को प्रभावी समझती है। लोकसभा चुनाव में जनता इस त्रिमूर्ति के नाम पर वोट करती है। 
खैर, अब भाजपा ने दूसरे के घरों में झाँकने की नीति को अपनाये हुए है। दिल्ली नगर निगम चुनावों में क्या हुआ? केजरीवाल के कुछ पदाधिकारियों और मंत्री द्वारा राशन कार्ड बनाये जाने को खूब उछाला, परिणाम, नगर निगम में दूसरे नंबर पर आ गयी। और जिस तरह केजरीवाल सरकार जनता को जनता को मुफ्तखोर बना रही है, उसका लाभ भी निश्चित रूप से केजरीवाल सरकार को मिलना तय है, भले ही 67 सीटें न मिलें, लेकिन सत्ता से दूर नहीं रहेगी। 
अभी 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने का जनता में मिलाजुला असर है, कुछ विरोध में है तो कुछ पक्ष में। पक्षकारो का मानना है कि जब नेता अपनी तिजोरियां भर रहे हैं, मोदी सरकार जनता की आमदनी पर गिद्ध की निगाह रख रही है, ऐसे में अगर अरविन्द केजरीवाल बिजली, पानी मुफ्त कर रहा है, तो कौन-सा पाप कर रहा है। नेता जनसेवक होता है, फिर उन्हें किस आधार पर हर माह लाखों की मुफ्त सुविधाएं, वेतन और कार्यकाल पूरा होने उपरांत पेंशन। आम जनता को नहीं मालूम की निगम पार्षद से लेकर एक सांसद को मिलने वाली इन मुफ्त सुविधाओं पर हर माह करोड़ों धन खर्च होता है, उस पर कोई नहीं बोलता, क्यों?
जहाँ तक दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का पार्टी छोड़ने की अटकलों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए, क्योकि चुनाव निकट आने पर केजरीवाल-सिसोदिया मंडल चर्चा में बने रहने के नए-नए उपाय अमल में लाते रहते हैं। इसलिए सिसोदिया का पार्टी छोड़ना मात्र एक शिगूफा ही प्रतीत जान पड़ता है। फिर भी अगर भाजपा अध्यक्ष कोई बात बोले उसे नकारा भी नहीं जा सकता। क्योकि नेता कब गिरगिट की तरह रंग बदल लें कुछ नहीं कह सकते।   
दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी में टूट की तरफ इशारा करते हुए कहा है कि किसी भी दिन दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पार्टी से इस्तीफा दे सकते है। मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली बीजेपी में कोई फूट नहीं है और ना ही पार्टी के भीतर कोई कलह चल रही है, अलबत्ता मनीष सिसोदिया कभी भी पार्टी छोड़ सकते हैं। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी के सभी संस्थापक सदस्य पार्टी छोड़ चुके हैं और अब सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही बचे हैं जो अकेले लड़ रहे हैं। तिवारी ने कहा कि पार्टी के बाकी संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास कहां गए? प्रशांत भूषण कहां हैं? आनंद कुमार कहां हैं? योगेंद्र यादव कहां हैं?
मनोज तिवारी ने कहा कि इन नेताओं की तरह ही मनीष सिसोदिया भी किसी भी दिन पार्टी छोड़ने का एलान कर सकते हैं। मनोज तिवारी ने ये भी कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों का एलान भी नहीं हुआ है लेकिन अभी से अरविंद केजरीवाल ने खुद को पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में अभी तक किसी का नाम मुख्यमंत्री के दौर पर घोषित नहीं किया है।
दौर पर घोषित नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि बीजेपी की परंपरा हमेशा ये रही है कि यहां हमेशा फैसले लोकतांत्रित तरीके से लिए जाते हैं। मनोज तिवारी ने कहा कि बीजेपी विधानसभा चुनावों में अपने काम को लेकर जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की दिल्ली को साकार करने की कोशिश करेगी।
उत्तर पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि बीजेपी में कोई भेदभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि पार्टी की सारी पॉलिसी सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लिए बनाई जाती है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये अरविंद केजरीवाल हैं जो बांटो और राज करो के सिद्धांत पर चलते हैं जबकि बीजेपी विकास की राजनीति करती है।

केजरीवाल ने अब हेल्थ को लेकर दिल्लीवासियों से की अपील - हर संडे सिर्फ 10 मिनट देने हैं

Image result for अरविन्द केजरीवालजैसे-जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव निकट आ रहे हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री उतने ही सक्रीय नज़र आ रहे हैं। उनके नितरोज होते निर्णय डूबती नैया को पार लगाने में शायद सक्षम हो सके। पहले 200 यूनिट तक बिजली उपभोक्ताओं को फ्री, और उसके बाद मार्च तक बकाया पानी के बिलों को माफ़ करना, दिल्ली के मतदाताओं को प्रभावित करेगा। इस प्रकार केजरीवाल सरकारी धन के आधार पर मतदाताओं को खरीद ही नहीं रहे, बल्कि दिल्लीवासियों को मुफ्तखोर जरूर बना रहे हैं। यदि केजरीवाल सरकार ने बिजली चोरी रोकने पर कठोर कदम उठाये होते, टैरिफ कम होने एवं सब्सिडी भी बंद करने के बावजूद समस्त दिल्लीवासियों को इतना लाभ होता कि इनके विपक्षी कहीं टिक नहीं पाते। कभी पीली तार तो कभी मीटर घरों से बाहर लाने के नाम पर ईमानदार उपभोक्ताओं को ही डराया-धमकाया गया। लेकिन सभी के मीटर आज तक घरों से बाहर नहीं आए, क्यों?  क्या कारण हैं कि सभी मीटर घरों/फैक्ट्री एवं कार्यालयों से बाहर क्यों नहीं आए? बिजली चोरी करने वालों से ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतान करना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार को इस ओर गंभीरता से सोंच कर कदम उठाना चाहिए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अगस्त 28 को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हेल्थ से जुड़े सभी क्षेत्रों के बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने दिल्ली में हेल्थ एजुकेशन, हेल्थ बजट, मोहल्ला क्लिनिक, पॉलिक्लिनिक, अस्पताल समेत तमाम मसलों पर बात की. केजरीवाल ने कहा, ''दिल्ली सरकार में हेल्थ एजुकेशन में सबसे ज्यादा जोर दिया है. हेल्थ सेक्टर में 14% बजट बढ़ाया था. 2014-15 में 35000 करोड़ बजट था, जबकि अब 78,000 करोड़ बजट पहुंचा है. हर साल 14% हेल्थ को दिया. हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में इम्प्रोवाइजेशन हुआ है, मोहल्ला क्लिनिक, पॉलिक्लिनिक, अस्पताल में इम्प्रोवाइजेशन हुआ. नए अस्पताल भी बन रहे हैं.''
अरविंद केजरीवाल ने डेंगू चिकनगुनिया के प्रति लोगों की जागरुकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, ''इस वक़्त आने वाले समय में डेंगू चिकनगुनिया में भारत उन 100 देशों में हैं, जहां प्रकोप सबसे ज्यादा होता है. पूरे देश में 300% प्रकोप बढ़ गया है. पूरे देश में सबसे ज्यादा मौत 2017 में डेंगू, चिकनगुनिया के कारण हुई. दिल्ली में उल्टा चल रहा है. 2015 में 15867, 2018 में 2798 हो गए. यानी दिल्ली में डेंगू चिकनगुनिया की 3 साल में 80% कमी हुई है. 2015 में डेंगू के कारण 60 मौत हुई, 2018 में 4 मौत हुई. इस साल एक भी मौत नहीं हुई है.'' 
उन्होंने आगे कहा, दिल्ली में बहुत सारे फीवर क्लीनिक मोहल्ला क्लिनिक बनाये गए. हर अस्पताल में नोडल अफसर बनाये गए. प्राइवेट अस्पताल में 20% कैपेसिटी बढ़ाने की इजाजत दी. दिल्ली में जागरूकता फैलाई गई. मामले में कमी के लिए सभी एजेंसियों और दिल्लीवालों को शुक्रिया अदा करता हूं. इस साल ये आंकड़े और कम करना चाहते हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने बताया कि ''एक सितंबर से कैंपेन शुरू कर रहे हैं. 10 हफ्ते, 10 महीने, 10 मिनट डेंगू पर वार होगा. हर संडे आपको सिर्फ घर की चेकिंग करनी है, घर में साफ पानी में डेंगू चेक करना है. 8 दिन से पहले उस पानी को बदलने से यह मुमकिन है. जहां भी पानी जमा है वहां चेकिंग करनी है. पूरी दिल्ली से अपील है हर संडे सिर्फ 10 मिनट देने हैं.''
 दिल्ली में पानी बिल पर नई माफी योजना
उन्होंने कहा, 100 मिनट मांग रहे हैं यानी सिर्फ पौने दो घटें. डेंगू का मच्छर 200 मीटर से ज्यादा नहीं उड़ सकता. मैं भी अपने घर की चेकिंग करूंगा, सभी मंत्री, विधायक, ऑफिसर करेंगे. आरडब्ल्यूए स्कूल के बच्चों को इन्वॉल्व करेंगे. सरकार के लिए ऑड इवन की मदद जैसे हुई वैसे दिल्लीवाले इसमें भी मदद करेंगे. इस काम में एमसीडी को भी साथ लेंगे.

पानी-बिजली के बाद दिल्‍लीवालों के लिए केजरीवाल का एक और तोहफा


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जैसे-जैसे दिल्ली विधान सभा चुनाव निकट आ रहे हैं, आम आदमी पार्टी ने जनता से किए वायदों को पूरा करने तिजोरी और पिटारा खोल दिया है। सावन-भादों में जिस प्रकार वर्षा रानी अपने यौवन पर आती है, उसी भाँति केजरीवाल सरकार भी दिल्लीवासियों को एक के बाद एक सौगातों देकर दिल्ली में अपनी सरकार होने का अहसास करवा रही। 
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का अब तक इसलिए विरोध होता रहा कि केजरीवाल ने दिल्ली के कुछ नहीं किया। लेकिन चुनाव आने पर सौगातों देनी शुरू कर, अपने पुरे किए वायदों के दम पर पुनः सत्ता प्राप्त करने जनता के पास जाएंगे। 
वैसे आप के कुछ विधायकों का काम उल्लेखनीय रहा। पालम विधानसभा के विधायक ने महावीर एन्क्लेव की दशा ही बदल दी। क्षेत्र ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के सांसद, विधायक और पार्षद देखे, लेकिन सीवर और पानी लाइन किसी ने नहीं डाली। लेकिन आप विधायक ने सीवर और पानी की डाल कर लोगों को बहुत आराम देने के साथ-साथ घर-घर गैस पाइप लाइन पहुँचाने का काम किया है। जबकि कुछ विधायक तो ऐसे हैं, जो अपने क्षेत्र में सीवर की सफाई तक नहीं करवा पाते। सड़कें टूटी पड़ी हैं, कोई चिन्ता नहीं। लेकिन पालम विधायक का काम निश्चित रूप से जरुरत से ज्यादा सराहनीय है। 
दूसरे, अगस्त 5 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त करने वाले बिल को कोई देरी किए अपना समर्थन देकर, सिद्ध कर दिया कि राष्ट्रीय मुद्दों पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं। हालाँकि सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कांग्रेस की भांति सबूत मांगने पर ख़राब हुई अपनी छवि को सुधार लिया। जबकि कांग्रेस और उसके कुछ समर्थक दल अभी भी कुएं के मेंढक बने हुए हैं। जिसका नुकसान आगामी चुनावों में कांग्रेस और इसके समर्थकों में बर्दाश्त करना होगा। 
सत्ता के गलियारों में चर्चा थी कि केजरीवाल सरकार दिल्ली नगर निगम व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर अपने विरोधी भाजपा को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बेनकाब करेगी, लेकिन उसमे अभी तक केजरीवाल सरकार असफल ही है।    
दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अगस्त 8 को अपनी कैबिनेट मीटिंग के बाद दिल्‍ली की जनता के लिए एक बार फिर अपना पिटारा खोल दिया है। मुफ्त बिजली-पानी के बाद अब केजरीवाल सरकार ने हर यूजर को हर महीने 15 जीबी डाटा देना का बड़ा ऐलान किया है।
मुफ्त इंटरनेट का किया था वादा
दिल्‍ली की सरकार ने चुनाव से पहले दिल्‍ली वालों के लिए बड़ा एलान करते हुए हर यूजर को मुफ्त इंटरनेट देने का वादा किया था। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद सीएम केजरीवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि दिल्‍ली सरकार की मुफ्त इंटरनेट योजना के तहत पूरी दिल्‍ली में सरकार 11हजार वाई-फाई हॉट स्‍पॉट लगाने जा रही है।उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली के हर विधानसभा क्षेत्र में 100 हॉट स्‍पॉट लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं बस से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी यह सुविधा होगी। बस स्‍टैंड में 4000 हॉट स्‍पॉट लगाए जाएंगे।
महिला सुरक्षा पर सरकार गंभीर
वहीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर आप सरकार ने आज एक और बड़ा एलान किया है। दिल्ली में हर विधानसभा में 2000 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। केजरीवाल ने बताया कि जनता की भारी मांग पर अब पूरी दिल्ली में 1 लाख 40,000 CCTV कैमरा लगेंगे।
सीसीटीवी लगाने से हो रहा फायदा
इसका मतलब हर विधानसभा में 2000 CCTV और लगेंगे।सीसीटीवी के फायदे के बारे में बताते हुए सीएम ने कहा कि अभी भी बहुत से वाकये सामने आए जहां इन CCTV की मदद से चोरी पकड़ी गई, या होने से बच गई। हर विधानसभा क्षेत्र में 2000 CCTV कैमरे और लगना, दिल्ली की महिलाओं को सुरक्षित रखने में बहुत ही कारगर साबित होगा।
इससे पहले किया था 200 यूनिट मुफ्त बिजली का एलान
इससे पहले दो अगस्‍त को सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्‍लीवालों के लिए प्रतिमाह 200 यूनिट तक बिजली का बिल माफ करने का एलान किया था। इसमें 200 यूनिट तक माफ और वहीं, 201 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने पर आधा करने की बात कही थी। बता दें कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया गया था। इस घोषणा से करीब 33 लाख घरों को फायदा पहुंचने की उम्‍मीद है।
लेकिन अगर तेज भागते मीटरों को और हटवा देते, जिससे समस्त दिल्ली प्रभावित होती। इस बात से वह स्वयं परिचित हैं, की दिल्ली में अधिकांश मीटर तेज हैं, वैसे पानी के मीटरों की भी लगभग यही स्थिति है। 
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केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान द....

क्या दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए केजरीवाल ने मीडिया को खरीद लिया है?

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनावों में महागठबन्धन के नाम पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भाजपा विरोधियों के संपर्क साध रहे थे, उनका उद्देश्य पंजाब के अतिरिक्त अन्य राज्यों से लोकसभा सीटें प्राप्त कर अपनी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर लाना था। भाजपा विरोधी केवल दिल्ली के ही आधार पर केजरीवाल का साथ प्रसंद था, अन्यथा केजरीवाल की पार्टी और कांग्रेस की स्थिति एक जैसी है। इस बात से भी सभी पार्टियाँ अच्छी तरह परिचित हैं कि जितने उम्मीदवारों की जमानत इस पार्टी की जब्त हुई हैं, शायद ही किसी पार्टी के उम्मीदवारों की हुई हों। 
लेकिन केजरीवाल कई मामलों में मोदी को भी पीछे छोड़ते रहे हैं। जब कभी दिल्ली में नगर निगम और विधानसभा चुनाव हुए हैं, केजरीवाल ने मीडिया का भरपूर लाभ उठाया है। ऐसी ही अब होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों में देखने को मिल रहा है। जिस कारण शंका हो रही है कि पिछले बार की तर्ज पर क्या दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रिंट मीडिया को खरीद लिया है? क्या केजरीवाल अखबारों में पेड न्यूज दे रहे हैं? क्या दिल्ली के पत्रकारों ने केजरीवाल के आगे सरेंडर कर दिया है? 
आखिर हम ये सवाल क्यों कर रहे हैं? दरअसल आज, 23 जुलाई को दिल्ली से छपने वाले ज्यादातर अखबारों में एक जैसी खबर छपी हुई है। सिर्फ मेन टाइटल को छोड़ दें तो सारी की सारी खबर एक जैसी है। जी हां, अखबार कई हैं, लेकिन उनमें खबर एक जैसी है। अखबार की भाषा एक है, लोगों की तस्वीर और उनके बयान एक हैं। अब सोचिए ये कैसे संभव हो सकता है? क्योंकि सभी अखबारों के रिपोर्टर अलग-अलग है, संपादक अलग-अलग हैं, तो फिर खबर हू-ब-हू एक जैसी कैसे? ये साफ संकेत हैं कि अरविंद केजरीवाल अखबार में दिल्ली सरकार की झूठी तारीफ के लिए पैसे दे रहे हैं। पेड न्यूज के जरिए लोगों को गुमराह करने की साजिश में दिल्ली के बड़े अखबार भी शामिल हो गए हैं।
दैनिक जागरण अखबार के दिल्ली एडिशन में ‘कॉलोनियों के नियमितिकरण में केंद्र की शर्तों को मानने का निर्देश’ टाइटल से विस्तृत खबर छपी हुई है। इसमें नौ लोगों का इंटरव्यू भी है।
नवभारत टाइम्स में पूरी की पूरी यही खबर ‘ दिल्ली में कच्ची कॉलोनियां, कितनी बदली तस्वीर?’ शीर्षक से छपी है। इसमें भी उन्हीं नौ लोगों के साथ बातचीत हू-ब-हू प्रकाशित की गई है।
इसके बात पंजाब केसरी अखबार में भी यही खबर ‘कच्ची कॉलोनियों में रहने वालों ने कहा, केजरीवाल ने बदल दी जिंदगी’ नाम से छपी है। इसमें भी उन्हीं नौ लोगों के साथ की गई बातचीत को जगह दी गई है।
इन खबरों से लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। ऐसे में यह सवाल उठना सही है कि क्या केजरीवाल ने प्रिंट मीडिया को खरीद लिया है?
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। आइए देखते हैं-
4.5 करोड़ के काम और 22.75 करोड़ का विज्ञापनपूरी दुनिया में ईमानदारी का ढोल पीटने वाले दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो राजधानी में किसी भी नागरिक के गले नहीं उतरा। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने महज 4.50 करोड़ रुपये के काम के लिए 22.75 करोड़ रुपये विज्ञापन पर लुटा दिए। वैसे भी केजरीवाल काम से ज्यादा ढिंढोरा पीटने में विश्वास करते हैं। गौरतलब है कि वेस्ट लक्ष्मी मार्केट और खुरेजी खास में सीवर लाइन बदलने के समारोह का विज्ञापन दिया गया। ध्यान रहे कि सीवर लाइन डलवाने पर 4 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च आएगा, जबकि कार्य के शुभारंभ के लिए 22.75 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किया गया। बाद में केजरीवाल ने दिल्ली के अलग अलग इलाके और मोहल्लों के नाम पर अलग-अलग विज्ञापन छपवाया, जिससे खर्च में भारी इजाफा हुआ और दिल्ली के सभी अखबारों में विज्ञापन पर करोड़ों रुपये लुटा दिया गया।
विज्ञापन घोटाला
केजरीवाल पर विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप है। इसके लिए उनकी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूले भी जाने हैं। जांच में पाया गया है कि सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल ने अपनी और अपनी पार्टी का चेहरा चमकाने की कोशिश की है। इनमें से उनकी पार्टी की ओर से दिए गए कई झूठे और बेबुनियाद विज्ञापन भी शामिल हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार भी केजरीवाल सरकार पर दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली की जनता के खजाने पर डाका डालने का आरोप है। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने जनता के 522 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च कर किए थे।

पत्रकारों के जरिए केजरीवाल करते हैं मीडिया को मैनेज!
दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी छवि चमकाने के लिए मीडिया का जमकर इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उन्होंने पत्रकारों की एक फौज भी खड़ी की हुई है। उनकी टीम में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने पहले तो पत्रकारिता करते हुए उनकी मदद की और बाद में उनकी पार्टी से ही जुड़ गये। ऐसे पत्रकारों की भी तादाद बड़ी है जिन्हें केजरीवाल सरकार ने पत्रकारिता की नौकरी से अलग कहीं न कहीं ‘एडजस्ट’ कर रखा है। 
केजरीवाल ने अपने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को खड़ा करने के लिए पत्रकारों का बहुत ही सधे अंदाज में इस्तेमाल किया। शुरुआती दौर में मीडिया हाउस और पत्रकारों को साधने का काम उनके आंदोलन में सहयोगी बने पत्रकार मित्र मनीष सिसौदिया, आशुतोष, शाजिया इल्मी, योगेन्द्र यादव, अभिनंदन शेखरी, नागेंद्र और उनके स्वयंसेवी संस्थाओं के मित्र संजय सिंह, प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर, शेखर सिंह आदि मित्रों ने बखूबी निभाई।
केजरीवाल जब आंदोलन का पाला बदलकर राजनीति में घुसे तो जिन पत्रकारों और चैनलों ने उनका विरोध किया, उन पत्रकारों और चैनलों को केजरीवाल बिका हुआ बताने लगे। लेकिन दिलचस्प बात यह कि केजरीवाल ने खुद पत्रकारों और मीडिया को खरीदने का एक सरकारी तंत्र खड़ा किया, केजरीवाल की राजनीति का यह एक रोचक घटनाक्रम है-
केजरीवाल के मीडिया और पत्रकारों से शुरुआती मधुर रिश्ते 
केजरीवाल ने साल 2000 में भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोड़ी और शहरों के गरीबों के हक की आवाज उठाने के लिए परिवर्तन नाम की संस्था अपने पत्रकार मित्र मनीष सिसौदिया के साथ शुरु की। 2006 में परिवर्तन को छोड़कर आरटीआई के लिए अरुणा राय के साथ काम किया फिर इसे भी छोड़कर 2011 में इंडिया अंगेस्ट करप्शन और अन्ना के साथ जुड़कर जनलोकपाल के लिए आंदोलन खड़ा किया। इस यात्रा में उनके पत्रकारों और मीडिया चैनलों के साथ अच्छे संबंध रहे।

अरविंद केजरीवाल ने जब आप पार्टी बनायी तो कई पत्रकारों ने परोक्ष- अपरोक्ष रुप से आप का समर्थन किया। इसी दौरान टीवी पत्रकार आशुतोष ने आप को ज्वाइन कर लिया। तहलका और गुलेल न्यूज पोर्टल में काम करने वाले आशीष खेतान भी आप में शामिल हो गये। केजरीवाल ने जब पहली बार दिल्ली में सरकार बनायी तो उनके मीडिया से आपसी संबंध वैसे नहीं रहे जैसे आंदोलन के समय थे।
पत्रकार और मीडिया कांग्रेस से उनके होने वाले गठजोड़ और जनलोकपाल बिल पर विरोध में खड़ी दिखाई पड़ी। केजरीवाल ने जब 2015 में 70 में से 67 सीट जीत कर फिर से सरकार बनायी तो उनके सामने मीडिया के साथ इस तरह के रिश्ते रखने की चुनौती थी जिससे सरकार की सकारात्मक छवि ही जनता के सामने आये। मीडिया से बनने वाले ऐसे रिश्ते को दिल्ली डायलाग कमीशन नाम दिया गया।
दिल्ली डायलाग कमीशन 
दिल्ली डायलाग कमीशन को पूर्व पत्रकार आशीष खेतान के साथ-साथ मनीष सिसौदिया को सौंप दिया गया। केजरीवाल इसके चेयरमैन और आशीष खेतान वाइस चेयरमैन बने। सिसौदिया सदस्य के रुप में इससे जुड़ गये। इस कमीशन को तमाम तरह की नागरिक सुविधाओं, महिला सुरक्षा, सफाई, जल प्रबन्धन इत्यादि पर समाधान प्राप्त करना था। ऑड- ईवेन कार्यक्रम का विचार इसी कमीशन की उपज थी। इस डायलाग में पत्रकारों को आमंत्रित किया जाने लगा। इस डायलाग के दौरान दिल्ली सरकार की सकारात्मक खबरों को देने की व्यवस्था हुई, जिससे खबरें जनता के पास पहुंचे। खबरों के साथ- साथ पत्रकारों को कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में मनोनीत किया जाने लगा। 

इस तरह से दिल्ली के 28 कालेजों मे 27 पत्रकारों को केजरीवाल ने गवर्निंग बॉडी का सदस्य बनाया। ये सभी पत्रकार जमकर केजरीवाल सरकार की अपने लेखों या ब्लॉग में तारीफ करते रहे, उनमें से कुछ इस तरह से हैं
सबा नकबी
पत्रकार सबा नकबी को 2015 में ही कमला नेहरु कालेज के गवर्निंग बॉडी का सदस्य नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने दिल्ली चुनावों के ऊपर एक किताब The Capital Conquest: How the AAP’s Victory has Redefined Indian Elections लिखी है। इस किताब में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तारीफों के पुल बांधे गये हैं। जनवरी 2016 में Scroll.in के लिए केजरीवाल सरकार की पहली वर्षगांठ पर एक जबरदस्त सकारात्मक लेख लिखा।

राजेश रामचन्द्रन
इकनॉमिक टाइम्स में राजनीति संपादक को मैत्रयी कालेज की संचालन समिति में नियुक्त किया गया। इसके बाद इन्होंने अपने ब्लॉग में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की प्रसंशा की।

नेहा लालचंदानी
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टर नेहा आप के बारे में रिपोर्ट लिखती रही हैं। उन्हें गार्गी कालेज की संचालन समिति में सदस्य बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या उपराज्यपाल के साथ होने वाली जबानी जंग में केजरीवाल को शब्दों से नायक साबित करती रही हैं। उनके अनुसार केजरीवाल के पास भविष्य का एक विज़न है और वह सिस्टम को बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

शरद शर्मा
शरद शर्मा एनडीटीवी में पत्रकार हैं। केजरीवाल की सरकार ने उन्हें कमला नेहरु कालेज की संचालन समिति में सबा नकबी के साथ नियुक्त किया। वह केजरीवाल की ईमानदारी और अखंडता के गीत गाते रहते हैं।

अभय कुमार दूबे
राजनीति समीक्षक व विश्लेषक अभय दूबे को दिल्ली कालेज ऑफ आर्ट्स एण्ड कामर्स की संचालन समिति में नियुक्त किया गया। 6 जून 2016 को एनडीटीवी में रविश कुमार के डिबेट शो में योगेन्द्र यादव और प्रशात भूषण के सामने केजरीवाल का जमकर बचाव किया। दोनों योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने केजरीवाल के मनमाने तौर-तरीकों को लेकर काफी विरोध किया था, जिसके परिणामस्वरुप दोनों को आप से अप्रैल 2015 में बाहर होना पड़ा था। अभय दूबे को दिल्ली सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति का भी सदस्य बनाया।

अनुराग धंडा
अनुराग धंडा टीवी पत्रकार हैं। केजरीवाल की सरकार ने उन्हें दिल्ली के शहीद सुखदेव कालेज ऑफ बिजनेस स्टडीज़ की संचालन समिति में सदस्य नियुक्त किया। दो भाग के अपने ब्लॉग- आप की महाभारत का सच– में केजरीवाल की भूषण और यादव से हुई सार्वजनिक जूतम-पैजार के बारे में लिखा है। ब्लॉग में उन्होंने साफ- साफ केजरीवाल के साथ खड़े होने के बारे में लिखा है। वह लिखते है कि केजरीवाल से इस झगड़े के पीछे की असली वजह योगेन्द्र यादव का अतिमहत्वाकांक्षी होना है। वह भूषण के साथ मिलकर केजरीवाल की सत्ता पलटना चाहते थे। उनके ब्लॉग का यही निष्कर्ष है कि आप पार्टी ने एक साथ मिलकर योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निकाला था, इस तरह से पूरी पार्टी केजरीवाल के साथ थी।

भाषा सिंह
पत्रकार भाषा सिंह को दिल्ली सरकार ने महर्षि वाल्मिकी कालेज की संचालन समिति में सदस्य के रुप में नियुक्त किया। वह केजरीवाल का अक्सर इंटरव्यू करती रहती हैं। विधान सभा चुनाव से पहले और बाद में, या सरकार की वर्षगांठ पर। इन सभी इंटरव्यू में केजरीवाल को प्रधानमंत्री मोदी या केन्द्र सरकार पर हमला करने का मौका देने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।

सईद फाज़ील अली
पत्रकार सईद फाज़ील अली को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली कालेज ऑफ कॉमर्स एण्ड आर्ट्स के संचालन समिति में सदस्य नियुक्त किया। उनके लेखों से आप की राजनीति पर उनका रुख एकदम से स्पष्ट हो जाता है, उदाहरण के लिए- “AAP Made A Tryst With Destiny… At The Stroke Of The Midnight Hour, When The World Was Half Asleep, Prashant, Yogendra Were expelled.”

पंकज वोहरा
पत्रकार पंकज बोहरा को केजरीवाल सरकार ने शहीद सुखदेव कालेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की संचालन समिति में सदस्य नियुक्त किया। वैसे तो वह आप के बारे में कम ही लिखते हैं लेकिन चैनलों के डिबेट शोज़ में केजरीवाल का बचाब करते हैं।

संजय मिश्रा
प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकार संजय मिश्रा को केजरीवाल सरकार ने श्री अरविंदो कालेज की संचालन समिति का सदस्य नियुक्त किया।

अंबिका पंडित
टाइम्स ऑफ इंडिया की अंबिका पंडित को दिल्ली की सरकार ने मैत्रयी कालेज की संचालन समिति में नियुक्त किया। लेकिन सभी पत्रकारों में मात्र यही एक थी जिन्होंने केजरीवाल सरकार की ऑड-ईवेन स्कीम और सरकार के जेडर रिसोर्स सेन्टर को बंद करने के फैसले की आलोचना की थी।

राजदीप सरदेसाई और पुण्य प्रसून वाजपेयी
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पत्रकारों की जिस फौज के साथ अपनी राजनीतिक लड़ाई जितना चाहते थे, उसमें ऐसे कई छुपे रुस्तम भी थे जो निष्पक्ष पत्रकारिता की आड़ में उनके साथ खड़े थे। इसमें सबसे पहले नाम आता है राजदीप सरदेसाई और पुण्य प्रसून वाजपेयी का। दोनों ही न्यूज चैनल के नामचीन एंकर हैं। राजदीप को प्रधानमन्त्री मोदी से विरोध था तो गरीब और मजदूरों की बात करने वाले साम्यवादी एंकर वाजपेयी को केजरीवाल के रूप में राजनीतिक स्तर पर मोदी का विरोध करने वाले एक प्लेटफार्म की जरूरत थी।

स्मरण हो, आजतक चैनल में तूफान उस समय आ गया था, जब प्रसून द्वारा केजरीवाल का साक्षात्कार पर हुई ड्रामेबाज़ी का वीडियो लीक हो गया था। जिसने प्रमाणित कर दिया था कि ये जो कुछ भी हो रहा है सबका सब प्रायोजित है। स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार थी, केवल जनता को धोखा और भ्रमित करने मात्र ये सब नाटक हो रहा है।  
इनके साथ ही पत्रकार मुकेश केजरीवाल और रूपाश्री नंदा ने भी केजरीवाल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
इतना ही नहीं केजरीवाल सरकार ने सरकारी विज्ञापनों की निगरानी के लिए वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया। कमिटी में थानवी के अलावा शैलेश कुमार और जगतीत सिंह देसवाल को सदस्य बनाया गया। केजरीवाल को राजनीति का एक अहम नायक बनाने में पत्रकार और मीडिया की फौज ने एक बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन सत्ता में आने के बाद जिन पत्रकारों और चैनलों ने केजरीवाल का विरोध किया उसे वो सुपारी पत्रकारिता की संज्ञा देकर बदनाम करने लगे।