| ये क्या हुआ? कैसे हुआ? |
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी की दो तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की छवि को नुक़सान हो सकता है। एक तस्वीर किराड़ी की है और दूसरी तस्वीर गोकुलपुरी की। अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर चल रही जनसभा के दौरान किराड़ी में बीजेपी के दो गुटों के नेता और कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। इतना ही नहीं, मंच पर जमकर लात-घूसे भी चले। मारपीट और हंगामे के बाद सभा रद्द कर दी गई। इस कार्यक्रम के दौरान हुए झगड़े के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया।
वहीं दूसरी जगह गोकुलपुरी में भी बीजेपी की जनसभा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। यहां मंच के नीचे महिला से अभद्रता के आरोप में एक कार्यकर्ता की पिटाई की गई। इसका भी वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है। बीजेपी में कार्यकर्ताओं के बीच पब्लिक के सामने मंच पर मारपीट को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का बयान आया है।
मनोज तिवारी ने कहा, ''एक-दो ऐसी घटनाएं घटी जिस पर नज़र है। ये मारामारी टिकटों को लेकर है क्योंकि हम सत्ता में आ रहे हैं। अनाधिकृत कॉलोनी पर खुशखबरी बहुत जल्द ही केंद्र सरकार दे सकती है और उसी के कार्यक्रम में ये मारपीट सामने आई है। ये ऐसी घटना है जो बीजेपी के संस्कार से मेल नहीं खाती है। हम चिंतित हैं।''
पार्टी संस्कारों का तो उस दिन दहन हो गया था, जिस दिन भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ था, तब से आज तक भाजपा में संस्कार देखने को नहीं मिल रहे। भाईचारा, प्रेम नहीं, देखने को नहीं मिल रहा। पार्टी में नहीं आता, न आये, मरने दो। ये है आज संस्कार। आश्चर्य होता है कि दिल्ली में ही आज कई मंडल सुचारु रूप से संगठित ही नहीं है। अपने मंडल की गतिविधियां शीर्ष नेतृत्व को भेजनी ही अपने कुछ लग्गू-भग्गुओं को साथ रखो, व्हाट्सअप पर फोटो डाल दो, बन गया मंडल, मंडल सुचारु रूप से संगठित और कार्यविंत है। मनोज साहब ये है सच्चाई, कोई आरोप नहीं। और नहीं, निम्न लेख देखिए। क्या ऐसे लोग मोदी-योगी-अमित के परिश्रम का पलीता नहीं कर रहे?
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''तीन सदस्यीय कमिटी बनाई है और चार पांच दिन के अंदर जो भी दोषी होगा, उसके ऊपर संगठनात्मक कार्रवाई अवश्य होगी। कोई भी हमारे लिए खास और साधारण कार्यकर्ता कम नहीं. जांच में जो दोषी पाए गए उन पर कार्रवाई होगी।''
अवलोकन करें:-
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| याद है लोकसभा चुनावों में हुआ यह झगड़ा |


जैसे-जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव निकट आ रहे हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री उतने ही सक्रीय नज़र आ रहे हैं। उनके नितरोज होते निर्णय डूबती नैया को पार लगाने में शायद सक्षम हो सके। पहले 200 यूनिट तक बिजली उपभोक्ताओं को फ्री, और उसके बाद मार्च तक बकाया पानी के बिलों को माफ़ करना, दिल्ली के मतदाताओं को प्रभावित करेगा। इस प्रकार केजरीवाल सरकारी धन के आधार पर मतदाताओं को खरीद ही नहीं रहे, बल्कि दिल्लीवासियों को मुफ्तखोर जरूर बना रहे हैं। यदि केजरीवाल सरकार ने बिजली चोरी रोकने पर कठोर कदम उठाये होते, टैरिफ कम होने एवं सब्सिडी भी बंद करने के बावजूद समस्त दिल्लीवासियों को इतना लाभ होता कि इनके विपक्षी कहीं टिक नहीं पाते। कभी पीली तार तो कभी मीटर घरों से बाहर लाने के नाम पर ईमानदार उपभोक्ताओं को ही डराया-धमकाया गया। लेकिन सभी के मीटर आज तक घरों से बाहर नहीं आए, क्यों? क्या कारण हैं कि सभी मीटर घरों/फैक्ट्री एवं कार्यालयों से बाहर क्यों नहीं आए? बिजली चोरी करने वालों से ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतान करना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार को इस ओर गंभीरता से सोंच कर कदम उठाना चाहिए।


