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इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ बिहार : जुमे पर स्कूल बंद रख सकते हैं , नीतीश सरकार ने हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ घटाई; ईद-मुहर्रम की बढ़ाई


बीते साल बिहार के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार यानी जुमे के दिन होने का मामला सामने आया था। ऐसा बगैर किसी आधिकारिक आदेश के हो रहा था। लेकिन अब बिहार की जदूय-राजद सरकार ने स्कूलों में शुक्रवार के साप्ताहिक आदेश को ‘आधिकारिक’ रूप दे दिया है।

बिहार के शिक्षा विभाग ने साल 2024 के लिए स्कूलों का छुट्टी कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें बड़े फेरबदल देखने को मिले हैं। 2023 में सरकारी स्कूलों में रविवार सहित 64 दिन की छुट्टी थी। 2024 में रविवार सहित कुल 60 छुट्टी ही मिलेंगे। एक तरफ हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ कम कर दी गई है तो दूसरी ओर ईद-मुहर्रम की छुट्टी बढ़ा दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार उर्दू प्राथमिक/मध्य/ माध्यमिक/उच्च माध्यमिक या मकतब रविवार को खुले रहेंगे। इन जगहों पर साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होंगे। इतना ही नहीं मुस्लिम बहुल इलाकों में चलने वाले अन्य सरकारी स्कूल भी साप्ताहिक अवकाश अब शुक्रवार को रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवल जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

                                                 लाइव हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर का अंश
          दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर। लाल घेरे में आप स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी से जुड़ी जानकारी पढ़ सकते है

2024 में सरकारी स्कूलों के लिए नीतीश सरकार ने छुट्टी का जो कैलेंडर जारी किया है उससे पता चलता है कि रामनवमी, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और रक्षाबंधन जैसी छुट्टियाँ हटा दी गई हैं। वहीं बकरीद और मुहर्रम पर छुट्टी एक-एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है। यह कैलेंडर बिहार के कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यालयों पर लागू होगा।

 2023 में तीज पर दो दिन और जिउतिया पर एक दिन की छुट्टी थी, जो अब नहीं मिलेगी। दीपावली पर भी मात्र एक दिन की छुट्टी दी गई है। राज्य में इससे पहले अशोक अष्टमी और अंतिम श्रावणी की छुट्टी भी होती थी, लेकिन इस बार इन्हें भी रद्द किया गया है। भाईदूज और मकर संक्रान्ति जैसे त्योहारों की कोई छुट्टी नहीं होगी।

                                                        बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

इसके उलट 2024 में बकरीद की तीन दिन की जबकि मोहर्रम की दो दिन छुट्टी रहेगी। वर्ष 2023 में यह छुट्टियाँ क्रमशः 2 और 1 दिन थीं। इनमें इजाफा किया गया है। साथ ही ईद की भी छुट्टी भी तीन दिनों की होगी। शब ए बारात और चेहल्लुम जैसे मुस्लिम त्यौहारों के साथ नए कैलेंडर में मुस्लिमों के कुल 6 त्योहारों पर कुल 10 दिनों की छुट्टी दी गई है।

                                                             बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

कैलेंडर में हिन्दुओं के मात्र 4 त्योहार शामिल किए गए हैं जिनके लिए कुल 9 दिनों की छुट्टी घोषित की गई है। महापुरुषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों को भी बंद किया गया है। नए आदेश में कहा गया है कि इन पर छुट्टी ना होकर भोजनावकाश तक पढ़ाई और फिर उनके बारे में चर्चा होगी। बिहार में गाँधी जयंती की भी छुट्टी नहीं होगी।

नीतीश सरकार के इस फरमान को भारतीय जनता पार्टी ने ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ बिहार‘ बताया है।

बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि नीतीश सरकार तुष्टिकरण के चलते ऐसा कर रही है।

राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी ने इसे हिन्दुओं को जातियों में बाँटने और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति बताया है।

बकरीद पर स्वीडन में मस्जिद के सामने कुरान को हवा में उछाला, लात मारी, पन्ने फाड़े और लगा दी आग : इराक का है प्रदर्शनकारी

स्वीडन में कुरान जलाकर प्रदर्शन (साभार: trtworld
यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी 28 जून 2023 को प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद के सामने मुस्लिमों के धार्मिक ग्रंथ कुरान को फाड़ा और जलाया। दरअसल, स्वीडिश पुलिस ने इसके लिए अनुमति नहीं दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार इसकी इजाजत मिली।

 ईद उल अजहा के दिन कुरान जलाने का वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मार रहे हैं। उसे जमीन पर फेंकते हैं और फिर पैरों के कुचलते हैं। आखिर उसे फाड़कर आग के हवाले कर देते हैं। प्रदर्शनकारी ईराक के बताए जा रहे हैं।

जिस समय यह प्रदर्शन किया जा रहा था, उस वक्त लगभग 200 लोग वहाँ दर्शक के तौर पर खड़े थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए और प्रदर्शनकारियों को पत्थर फेंकने की कोशिश की। पत्थर फेंकने वाले को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वहीं, बाद में पुलिस ने प्रदर्शन करने वालों पर एक जातीय या राष्ट्रीय समूह को भड़काने का मामला दर्ज कर जाँच शुरू की है।

खल्फी ने कहा, “मस्जिद ने पुलिस को कम-से-कम प्रदर्शन को किसी अन्य स्थान पर लेने का सुझाव दिया था, जो कि कानून द्वारा संभव है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करने का फैसला किया।” खल्फी के अनुसार, हर साल ईद समारोह के लिए स्टॉकहोम की मस्जिद में 10,000 से अधिक आगंतुक आते हैं।

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फ़िदान ने एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस्लाम विरोधी प्रदर्शन की अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता ने वेदांत पटेल ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों को जलाना अपमानजनक और दुखद है। उन्होंने कहा, “जो कानूनी हो सकता है, वह जरूरी नहीं कि निश्चित रूप से उचित हो।”

इस घटना को लेकर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने कहा कि अब वह इस बारे में अटकलें नहीं लगाएँगे कि कुरान का विरोध स्वीडन को नाटो (NATO) में शामिल होने की प्रक्रिया में कैसे रोड़ा बन सकता है। उन्होंने कहा, “यह कानूनी है, लेकिन उचित नहीं है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कुरान जलाने पर निर्णय लेना पुलिस का काम है।

दरअसल, स्वीडन NATO का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका इकलौता मुस्लिम सदस्य देश तुर्किये इसमें बाधा डालते रहता है। NATO का नियम है कि इसमें कोई भी नया सदस्य तभी शामिल किया जा सकता है, जब उसमें सभी सदस्य देशों की सहमति हो।

इस साल जनवरी के अंत में तुर्किये ने नाटो आवेदन पर स्वीडन के साथ बातचीत को निलंबित कर दिया था, क्योंकि एक दक्षिणपंथी डेनिश ने स्टॉकहोम में तुर्किये दूतावास के पास कुरान की प्रति जला दी थी। इसके कारण मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस्लामी मुल्क स्वीडन के झंडे जलाए गए थे।

कुरान जलाने की घटनाएँ सिर्फ स्वीडेन में ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देश डेनमार्क और नीदरलैंड में भी कुरान जलाने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस साल जनवरी में स्वीडन के बाद नीदरलैंड में कुरान जलाया गया था। इसके बाद डेनमार्क में भी इसे दोहराया गया।

स्वीडन उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है, जो स्कैन्डिनेवियाई प्रायद्वीप में स्थित है। इसकी सीमाएँ नॉर्वे, फ़िनलैंड और डेनमार्क से लगती हैं। 1.1 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश के 52% लोग ‘चर्च ऑफ स्वीडन’ में आस्था रखते हैं। वहीं 8% जनसंख्या मुस्लिम है।

दरअसल, तुर्किये स्वीडन पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से संबंध होने का आरोप लगाता है। इसके साथ ही वह स्वीडन से इस संगठन के नेता मौलवी फतुल्लाह गुलेन के प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी तुर्किये से अलग कुर्दों के लिए मुल्क की माँग करती है।

अलग देश के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी के सशस्त्र आंदोलन को तुर्किये आतंकवादी गतिविधि कहता है। तुर्किये ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है। तुर्किये के अलावा, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी उसे आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

अवलोकन करें:-

स्वीडन : फाड़ी और जलाई जाएगी कुरान, वो भी मस्जिद के सामने: कोर्ट और पुलिस ने दे दी है अनुमति

तुर्किये का कहना है कि PKK के खिलाफ स्वीडन संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं, स्वीडन में लोग कुर्द और PKK के समर्थन में हैं। इसको लेकर दोनों देशों के बीच रिश्ते तल्ख रहते हैं और तुर्किये यूरोपीय देश स्वीडन को NATO का सदस्य बनने से रोकता है। इनमें कुरान जलाने की घटनाएँ और तल्खी पैदा करती हैं।

कांग्रेस के टूलकिट प्रोपेगंडा फैलाने में 5 ‘दोस्त’ मीडिया संस्थान, बॉलीवुड से मदद

सोशल मीडिया पर एक ‘टूलकिट’ वायरल हुआ, जिसके बारे में बताया गया कि ये कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हिन्दुत्व, कुम्भ और देश को बदनाम करने का पूरा खाका है। इस टूलकिट’ का एक हिस्सा ऐसा भी है, जिस पर ज्यादा बात नहीं हुई। इसमें उन मीडिया संस्थानों के बारे में बताया गया है, जिनकी मदद लेकर कांग्रेस नेताओं को प्रोपेगंडा फैलाना है। इन कठिन परिस्थितियों में सरकार से कन्धा मिलाकर चलने की बजाए अपने ही देश की सरकार को अपमानित करने का षड़यंत्र रच रहे हैं। 
ऑक्सीजन की कमी का शोर भारत ही नहीं, विश्व ने देखा, विश्व तो भारत की सहायतार्थ खड़ा हो गया, लेकिन जयचन्द ऑक्सीजन की कमी करते रहे, और जब ऑक्सीजन की ऑडिट करने की बात होते ही, एकदम कहां से कमी पूरी हो गयी, यह लाशों पर सियासत करने वालों से जनता को पूछना होगा। अब कोई हॉस्पिटल भी नहीं बोलता कि 'हमारे पास इतने ही घंटे की ऑक्सीजन बची है।' यूँ तो जिसे देखो यही कहता नज़र आता है कि मोदी सरकार ने मीडिया को अपनी मुठ्ठी में कर रखा है, परन्तु उसी मीडिया ने उसी मोदी सरकार द्वारा ऑक्सीजन देने के बावजूद कहाँ जा रही है, इस समस्या की जड़ में जाने की कोशिश तक नहीं की, क्यों? लेकिन अपवादों से निपटने के लिए मोदी सरकार ने ब्रह्मात्र यानि "ऑक्सीजन ऑडिट" का प्रयोग कर समस्त विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया।     

मेजर सुरेंद्र पुनिआ का ट्वीट उस कड़वी सच्चाई को सार्वजनिक करने का प्रयास कर रहा है, जिसे कुर्सी के भूखे नेताओं और उनकी पार्टियों ने कभी नहीं पढ़ाया, विपरीत इसके आतताई मुग़लों को महान पढ़ाया गया। अब जब देश अपनी खोई संस्कृति एवं सम्मान को प्राप्त कर रहा है, जयचंदों के वंशज अपना सिर उठा, आपदा में अवसर खोज रहे हैं। 

टूलकिट के इस हिस्से में बताया गया है कि ‘द प्रिंट’, ‘द वायर’, ‘द क्विंट’ और ‘आउटलुक’ जैसे मीडिया संस्थानों में कोविड-19 को लेकर जो भी लेख प्रकाशित होते हैं, उन्हें शेयर किया जाए और वायरल किया जाए। ऐसे मीडिया भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने के लिए किस हद तक गिरते हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। इन संस्थानों ने महाराष्ट्र और केरल की सरकारों के खिलाफ कुछ नहीं लिखा, जहाँ कोरोना सबसे ज्यादा बेकाबू है।

इस ‘टूलकिट’ में कांग्रेस नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वो इन मीडिया संस्थानों में लिखे कोरोना सम्बंधित लेखों को खूब प्रचारित करें और उन्हें हाइलाइट करें। दो मीडिया संस्थान ऐसे भी हैं, जिन्हें इनसे भी ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इसमें लिखा है कि अगर कोई स्टोरी अन्य मीडिया संस्थानों में प्रकाशित नहीं होती है तो उन्हें ‘कारवाँ’ या पार्टी के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ को भेजा जाए। यानी, कांग्रेस की साँठगाँठ से इन मीडिया संस्थानों में नकारात्मक लेख प्रकाशित किए जा रहे थे।

इस ‘टूलकिट’ के एक पॉइंट में ‘समान विचारधारा’ वाले बॉलीवुड सेलेब्स से मदद लेने की बात भी की गई है। उनसे ट्वीट्स, मीम्स, कॉमिक वीडियोज और कार्टून्स के अलावा अन्य ऐसे वायरल पोस्ट्स को शेयर करवाने की बात की गई है, जिसमें मोदी सरकार को निशाना बनाया गया हो। समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कुछ ‘कॉम्स सेन्स सलाह’ देने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसा दिखाने को कहा गया है, जैसे मोदी सरकार और इसके मंत्रीगण मूर्ख हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए किस तरह से विदेशी मीडिया के साथ हाथ मिलाया गया था, वो भी देखिए। भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले भारतीय प्रोपेगंडा पत्रकारों को पॉइंट्स दिए गए, ताकि वो मोदी सरकार को बदनाम कर सकें। स्थानीय पत्रकारों को जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें देकर रिपोर्ट बनवा उसे वायरल करवाने की भी साजिश थी।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया है कि ये ‘टूलकिट’ सौम्या वर्मा ने तैयार किया है। वो प्रोफेसर राजीव गौड़ा के दफ्तर में कार्यरत हैं। MV राजीव गौड़ा कांग्रेस के सांसद रहे हैं और यूपीए काल में कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कर्नाटक कांग्रेस कमिटी ने उन्हें प्रवक्ता और घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया था। फ़िलहाल वो IIM बेंगलुरु में प्रोफेसर हैं। कांग्रेस की विचारधारा को फैलाने के लिए वो कई ऑनलाइन कार्यक्रम चलाते हैं।

क्या JNU की पूर्व छात्रा सौम्या वर्मा ने तैयार किया है Toolkit 

सोशल मीडिया पर मई 18 को एक दस्तावेज जम कर शेयर किया गया, जिसके बारे में लोगों ने दावा किया कि ये ‘कांग्रेस का टूलकिट’ है। इसमें कुम्भ मेला को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत बदनाम करने का खाका था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया है कि ये ‘टूलकिट’ सौम्या वर्मा ने तैयार किया है।

सौम्या वर्मा का LinkedIn प्रोफ़ाइल खँगाला तो पता चला कि वो प्रोफेसर राजीव गौड़ा के दफ्तर में कार्यरत हैं। 

सौम्या वर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपना पता दिल्ली दिया है। संबित पात्रा द्वारा शेयर किए गए कंटेंट के अनुसार, 6 पन्नों वाले कांग्रेस के ‘टूलकिट’ को उन्होंने ही ‘माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2019’ एप का प्रयोग कर के बनाया है। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की, जिसमें सौम्या वर्मा कांग्रेस नेताओं के साथ दिख रही हैं। संबित पात्रा ने लिखा, “क्या सोनिया व राहुल गाँधी कोई प्रतिक्रिया देंगे? दस्तावेज की ‘प्रॉपर्टीज’ से ही साफ़ है कि इसका ऑथर कौन है।”

लोकसभा चुनाव 2019 के समय भी सौम्या वर्मा का नाम सामने आया था। वो उन युवाओं में शामिल थीं, जिन्होंने कांग्रेस का घोषणापत्र तैयार किया था। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक किया है। इसके बाद उन्होंने JNU से इतिहास में मास्टर्स की डिग्री ली। सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करते समय उनके मन में राजनीति से जुड़ने की इच्छा जागी। वो सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के स्नातक छात्रों को पढ़ाती भी थीं।

उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा तो उत्तीर्ण नहीं की, लेकिन राजनीति व राजनीतिक नीतियों के प्रति उनके मन में खासी जागरूकता आई। राजीव् गौड़ा से प्रभावित होकर वो राजनीतिक रिसर्च में रुचि लेने लगीं। ‘द प्रिंट’ से बातचीत में उन्होंने बताया था कि अब वो पर्यावरण व उससे जुड़ी नीतियों में दक्ष होना चाहती हैं। राजीव गौड़ा के दफ्तर में उन्हें ‘डिप्टी हेड ऑफ रिसर्च’ का पद दिया गया।

सौम्या वर्मा ने शशि थरूर और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के अंतर्गत काम करते हुए आंतरिक सुरक्षा, पर्यावरण और संस्थागत सुधारों को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी। ‘कांग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए।

‘ईद खुशियों का त्यौहार, कुंभ कोरोना का सुपर स्प्रेडर’: कांग्रेस का टूलकिट, मोदी और हिंदुओं को बदनाम करने का खाका

सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे दस्तावेज के बारे में बताया गया है कि ये कांग्रेस का टूलकिट है, जो लीक हो गया (फाइल फोटो)
सोशल मीडिया पर एक टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि ये कांग्रेस पार्टी का है। उक्त दस्तावेज पर कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ छाप भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा कि कांग्रेस इस तरीके से आपदा में लोगों की मदद कर रही है।

इस ‘टूलकिट’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को कोरोना के प्रबंधन में असफल रहने का दावा करते हुए इसके पीछे कुम्भ मेला, चुनावी रैलियों और सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जिम्मेदार ठहराया है। नेताओं को बताया गया है कि कैसे देश के विभिन्न कोने में मोदी सरकार को घेरना है। साथ ही हरिद्वार में लगे कुम्भ को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ करार देते हुए लिखा गया है कि भाजपा अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का राजनीतिकरण करती है।

इस ‘टूलकिट’ की मानें तो कांग्रेस ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वो कुम्भ को बार-बार ‘सुपर स्प्रेडर कुम्भ’ कह कर सम्बोधित करें। लिखा है कि इससे लोगों को एहसास होगा कि भाजपा की ‘हिन्दू नीतियाँ’ ही सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही ऐसा कर रहा है। इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया और ‘दोस्त पत्रकारों’ के साथ साँठगाँठ की बात भी की गई है।

‘कांग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए। साथ ही समाचार एजेंसी ‘रायटर्स’ और BBC जैसे मीडिया संस्थानों के लेख भी शेयर किए गए हैं।


संबित पात्रा ने जिसे कांग्रेस का ‘टूलकिट’ बताया, उसमें लिखा है, “हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए कि वो सावधानी से लगातार तस्वीरें वगैरह शेयर कर के सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताएँ कि जहाँ कुम्भ एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है, वहीं ईद में जुटने वाली भीड़ विभिन्न परिवारों और समुदायों का एक सुखद मिलान समारोह है।” साथ ही ऐसा प्रदर्शित करने को भी कहा गया है जैसे कांग्रेस के लोग इस आपदा में पीड़ितों की लगातार मदद कर रहे हों।

इसके लिए चरणबद्ध तरीके से बताया गया है कि लोगों की ‘मदद’ कैसे करनी है। पहले चरण में एक सोशल मीडिया टीम बना कर मदद की गुहार लगा रहे लोगों को मैसेज करना है। दूसरे चरण में उनसे कहना है कि वो फिर से वैसा ही पोस्ट करें लेकिन अबकी यूथ कांग्रेस और इसके नेताओं को टैग कर के। तीसरे चरण में ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से उस पोस्ट को आगे बढ़ाना है। अगले चरण में जो बात कही गई है, वो चौंकाने वाली है।

इस ‘टूलकिट’ में लोगों की ‘मदद’ के लिए कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वो आसपास के अस्पतालों में कुछ बेड्स व अन्य सुविधाएँ पहले से ही ब्लॉक कर के रखें, जिन्हें अपने नेताओं के निवेदन पर ही मुक्त किया जाए। पाँचवें पॉइंट में निर्देश दिया गया है कि IYC के हैंडल को टैग न करने वाले पीड़ितों को कोई प्रतिक्रिया न दी जाए। पत्रकारों, प्रभावशाली लोगों और मीडिया के लोगों की ‘मदद’ को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

इस ‘टूलकिट’ में माना गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्र्रूवल रेटिंग उच्चस्तर की है और आपदा व ‘कुप्रबंधन’ के बावजूद इसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यही वो मौका है, जब उनके व्यक्तित्व व छवि को धूमिल किया जाए। ऐसे हैंडल्स बनाने को खा गया है, जो देखने में मोदी समर्थक लगे। फिर उन हैंडलों से सरकार की आलोचना करनी है। विदेशी मीडिया में पीएम मोदी के खिलाफ लेखों को जम कर शेयर करने को कहा गया है।

‘टूलकिट’ में बताया गया है कि जिस तरह विदेशी मीडिया और उनके पत्रकार लगातार जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं, कुछ वैसा ही जोर-शोर से करना है। साथ ही ऐसे ‘नाटकीय’ तस्वीरें स्थानीय पत्रकारों को उपलब्ध कराने को निर्देशित किया गया है। साथ ही भारत को बदनाम करने के लिए कोरोना के ‘इंडियन स्ट्रेन’ शब्दावली का बार-बार प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है।

इस ‘टूलकिट’ में ‘बुद्धिजीवियों और विचारकों’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कराने को खा गया है, क्योंकि जनता में उनकी ‘स्वीकार्यता’ है। भाजपा नेताओं को बदनाम करने हेतु अमित शाह के लिए ‘मिसिंग’, एस जयशंकर के लिए ‘क्वारनटाइण्ड’, राजनाथ सिंह के लिए ‘साइडलाइंड’ और निर्मला सीतारमण के लिए ‘संवेदनहीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

साथ ही ऐसी पत्रिकाओं की कवर स्टोरीज को जम कर शेयर करने की सलाह दी गई है, जिसमें भाजपा नेताओं या सरकार को ‘मिसिंग’ लिखा गया हो। साथ ही पीएम मोदी को लगातार पत्र भी लिखने को बोला गया है। ‘पीएम केयर्स फंड’ पर सवाल खड़े करने के लिए सिविल सर्वेंट्स से आवाज़ उठवाने की बात की गई है। इसमें ये भी स्वीकार किया गया है कि छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘पीएम केयर्स फंड’ से भेजे गए वेंटिलेटर्स बिना प्रयोग किए पड़े हुए हैं।

इस खबर को काटने के लिए झूठ बोलने की सलाह दी गई है। कांग्रेस नेताओं को कहना है कि ये सारे वेंटिलेटर्स खराब थे। ‘पीएम केयर्स’ को बदनाम करने के लिए RTI एक्टिविस्ट्स को जुटा कर लगातार सवाल पूछने को उकसाने के लिए भी निर्देश दिया गया है। झूठा नैरेटिव बनाने की बात कही गई है कि गुजरात को मोदी सरकार ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ दे रही है। अन्य राज्यों के नागरिकों में क्रोध उत्पन्न करने के लिए बार-बार ये दिखाने को कहा गया है कि गुजरात के अलावा बाकी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।

साथ ही ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को कैसे बदनाम करना है, ये भी बताया गया है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि इसका बजट देश के स्वास्थ्य बजट से कई गुना कम है और ये कई साल का है। ‘टूलकिट’ में सलाह दी गई है कि लोगों में ये फैलाना है कि इस रकम से 2 करोड़ परिवारों को ‘न्याय योजना’ के तहत 6000 रुपए मिल जाते। दुष्प्रचार करने की सलाह दी गई है कि ये जनता के लिए नहीं, मोदी के लिए उनका व्यव्तिगत ‘वैनिटी प्रोजेक्ट’ है। दिल्ली हाईकोर्ट में केस करने की बात भी की गई है।

नोट: ऑपइंडिया फ़िलहाल ये दावा नहीं करता है कि ये टूलकिट कॉन्ग्रेस पार्टी ने तैयार किया है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पर ये इसी दावे के साथ शेयर किए जा रहे हैं।(साभार)

ईद की नमाज: अमृतसर की जामा मस्जिद, लुधियाना में सड़क पर… सैंकड़ों की भीड़, मास्क और कोविड प्रोटोकॉल सब गायब

                                        अमृतसर के जामा मस्जिद की तस्वीर (साभार: ANI)

हरिद्वार में हुए कुंभ पर रोने वालों ने यह नहीं देखा कि नहान के दौरान कोरोना के विस्फोट होने के समाचार मिलते ही नहान को तुरंत रोक दिया और और समापन नहान केवल औपचारिक रूप में सम्पन्न किया था, लेकिन हिन्दू विरोधियों को विरोध करना था, लेकिन भारत में कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप के कारण इस बार भी ईद को लेकर प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए। कई जगह इनका सख्ती से पालन हुआ तो कहीं पर सुरक्षाबलों को तैनात करके भीड़ को आने से रोका गया। इस दौरान पंजाब के अमृतसर से हैरान करने वाली तस्वीरें आईं। यहाँ भारी भीड़ में नमाजियों को एकत्रित हुए देखा जा सकता है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि भारी भीड़ में बिना किसी कोविड नियम का पालन किए नमाज पढ़ी जा रही है। ये तस्वीर अमृतसर के जामा मस्जिद खैरुद्दीन हॉल बाजार की है। यहाँ ईद-उल-फितर के अवसर पर ये लोग इकट्ठा हुए।

ऐसी ही एक तस्वीर लुधियाना के जामा मस्जिद के बाहर भी देखने को मिली। हालाँकि, इस जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उतनी तादाद में लोग इकट्ठा नहीं थे जितने अमृतसर में नजर आए। लेकिन वीडियो में देखें तो यहाँ भी कई नमाजियों के चेहरे से मास्क गायब है जबकि खुली सड़क पर वह अपनी नमाज पढ़ रहे हैं। वीडियो में दो छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं। इनके मुँह पर भी मास्क नहीं है।

 

एक तस्वीर AIMIM नेता सैयद सोहेल कादरी की भी सामने आई है। सैयद ने अपने ट्वीट में लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी साहब के नेतृत्व में पनजेशा के इरानीगल्ली मस्जिद-ए-सरदार यार जंग पर ईद उल फितर की नमाज अदा करने के लिए सहयोग की बात करते हुए।” तस्वीरों में सैयद पुलिस से बात करते दिख रहे हैं। कुछ अन्य लोग भी उनके आसपास सफेद कुर्ते टोपी में दिख रहे हैं।

ईद से पहले भी उडी थी नियमों की धज्जियां 

कोविड महामारी के कारण भीड़ को रोकने के लिए जारी की गई गाइडलाइन्स का उल्लंघन पिछले कई दिनों से होता रहा है। अभी कल ईद की खरीददारी पर निकले लोगों ने बाजार पहुँचकर खूब नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। न सोशल डिस्टेंशिंग का पालन हुआ, न लोगों के चेहरे पर मास्क लगे दिखे।

हैदराबाद के चारमीनार इलाके में लॉकडाउन से पहले ईद की खरीदारी करने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ गई। दो गज की दूरी तो छोड़िए, दो कदम की दूरी भी बमुश्किल दिखी।

इसी तरह मुंबई के भिंडी बाजार में ईद की शॉपिंग करने हजारों लोग पहुँचे। यूपी के फिरोजाबाद में भी लोग घरों से निकल कर खरीदारी करने बाजारों में गए। दिल्ली के सीलमपुर में भी लोगों की भीड़ उमड़ी दिखी।

महाशिवरात्रि पर निकल रहा है लेखिका का ज्ञान, लेकिन ईद पर मटन ठीक, क्रिसमस पर ‘गोमूत्र नहीं शराब पियो’

रुचि कोकचा, महाशिवरात्रि
ख़ुद को लेखिका बताने वाली रुचि कोकचा ने महाशिवरात्रि को लेकर ‘ज्ञान देने’ वाली परंपरा निभाई। यहाँ ज्ञान से वेद-पुराणों का तात्पर्य नहीं है बलि हिन्दुओं को उलटी-सीधी सलाह देने वाली बात है। होली पर पानी बचाने, जन्माष्टमी पर हाँडी की ऊँचाई कम रखने और दीपावली पर पटाखे न जलाने की सलाह देना वामपंथियों का फेवरिट शौक हैं। इसी तरह महाशिवरात्रि पर दूध बचाने, शिवलिंग की जगह ग़रीबों को चढाने और भगवान शिव क्या चाहते हैं- ये सब वही लोग बताते हैं, जिन्हें ये तक नहीं पता कि भगवान शिव के बारे में हमारे धर्म-ग्रंथों में क्या लिखा हुआ है। इसी तरह ‘ऑब्सेस्ड’ नामक पुस्तक की लेखिका रुचि ने भी उटपटांग सलाह दी।
रुचि ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में भगवान शिव एक बच्चे को दूध पिला रहे होते हैं और लोग लाइन में लग कर मंदिर में शिवलिंग पर दूध चढ़ा रहे होते हैं। रुचि ने साथ ही लिखा कि समझने वाले समझ जाएँगे। हालाँकि, ये सब वामपंथियों के फ़र्ज़ी ज्ञान की उपज होती है क्योंकि ऐसा कहीं कुछ भी वर्णित नहीं है। रुचि इस तस्वीर के माध्यम से ये बताना चाहती थी कि हिन्दू मंदिर में शिवलिंग पर दूध अर्पित कर के उसे ‘बर्बाद’ करते हैं और भगवान शिव ‘नहीं चाहते’ कि उन्हें कोई दूध चढ़ाए क्योंकि वो ग़रीबों को लेकर चिंतित हैं।

जबकि, हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि भगवान शिव को फल-फूल, जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किया जाना चाहिए। लेकिन वामपंथी चाहते हैं कि हिन्दू अपने प्राचीन ग्रंथों व परम्पराओं को नहीं, बल्कि उनके हिसाब से चलें। रुचि भले ही महाशिवरात्रि पर ज्ञान बाँचती हों, वो ईद और क्रिसमस पर गुलछर्रे उड़ाने का एक भी मौका नहीं छोड़तीं। ईद मुस्लिमों का त्यौहार है जबकि क्रिसमस ईसाईयों का, इसीलिए उस समय रुचि ख़ासा एन्जॉय करती हैं और सारा ज्ञान हिन्दू त्योहारों के लिए बचा के रखती हैं। ईद और क्रिसमस पर खुशियाँ मनाती हुई उनकी तस्वीरों को देख कर ये स्पष्ट हो जाता है।
ईद पर कोई ज्ञान या सलाह 
देने का साहस 
नहीं रुचि में 
अगस्त 2018 में ईद के मौके पर रुचि ने मुबारकबाद देते हुए लिखा कि सभी को मटन-बिरयानी खानी चाहिए, युद्ध जैसे हालात नहीं क्रिएट करने चाहिए। हालाँकि, उन्होंने मटन के लिए बकरों को मारे जाने पर कोई ज्ञान नहीं दिया। इस दौरान उन्होंने पशु अधिकार की बातें नहीं की और न ही मुस्लिमों को जीवहत्या न करने की सलाह दी क्योंकि ये सारे सलाह हिन्दुओं के लिए बचा कर रखे जाते हैं। इसी तरह सितम्बर 2017 में भी ईद के मौके पर रुचि ने मटन-बियानी खाई थी।
क्रिसमस पर ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता
जबकि हिन्दू त्योहारों पर नाराज़ रहती हैं रुचि
वहीं ईसाईयों के त्यौहार क्रिसमस के मौके पर 25 से भी अधिक ट्वीट्स करने वाली रुचि महाशिवरात्रि पर लोगों को उलटे-पुलटे सलाह देती हैं। रुचि ने क्रिसमस 2015 के मौके पर ‘भक्तों’ को ‘गोमूत्र की जगह’ वाइन पीने की सलाह दी थी। इस दौरान वो सांता की मीठी-मीठी बातें करती हैं और अपनी तस्वीरें क्लिक कर-कर के लोगों को दिखाती हैं।
दोहरा रवैया वाले ये वामपंथी कभी भी क्रिसमस पर ये नहीं कहते कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है या हानिकारक। इसी तरह ये ईद के मौके पर लाखों पशुओं की हत्या को लेकर भी अपना रोना नहीं दिखाते। लेकिन, अपने प्राचीन धर्म-ग्रंथों का अनुसरण करते हुए जब हिन्दू हज़ारों वर्षों की परंपरा का निर्वहन करते हैं, इन्हें परेशानी हो उठती है। छोटी-छोटी चीजों को बड़ा बना कर पेश किया जाता है और ऐसा दिखाया जाता है जैसे कि मुस्लिमों व ईसाईयों के त्यौहार प्यार के लिए होते हैं जबकि हिन्दू पर्व-त्योहारों से सिर्फ़ घृणा फैलती है। ये अलग बात है कि रुचि जैसों के बयानों में अब कोई रुचि नहीं दिखाता।