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क्या कांग्रेस विपक्ष बनने की बजाए Fake News फैक्ट्री बन गयी है?

भारत में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां सबसे पुरानी हैं, लेकिन दोनों ही देशहित को कम अपने स्वार्थ को अधिक सार्थक करने जनता को मूर्ख बनाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहीं। और इन दोनों का मिश्रण सोनिया गाँधी टीम से निकली आम आदमी पार्टी है।जो मुफ्त की हड्डियों को दिल्लीवासियों के आगे फेंक सत्ता हथियाने में लगी है। यही कारण है कि दिल्ली और पंजाब के अलावा किसी अन्य राज्य की जनता आम आदमी पार्टी को नहीं गरदांती। 
जब बात पाकिस्तान और चीन की आती है, भाजपा विरोधी अन्य पार्टियों से अधिक यही तीनों पार्टियां सबूत मांग जनता को भ्रमित करती हैं, इन्हे देशहित की नहीं, केवल अपने वजूद को बनाए रखने की है। 
जिस तरह चीन ने दूसरों की धरती को हड़पने की होड़ में विवाद खड़ा कर रही है, और भारत 1962 से अब तक चीन द्वारा हड़पी जमीन को वापस लेने के संघर्ष कर रहा है, ये तीनों पार्टियां चीन की बोली बोल रही हैं, क्या इन से देशहित की कल्पना की जा सकती है। कम्युनिस्टों ने 1962 में चीन का समर्थन किया, जो अब इतिहास बन गया है, परन्तु अब तो स्पष्ट ही गलवान घाटी में जख्मी सैनिकों के रक्तदान के लिए मना कर दिया है। लेकिन कांग्रेस तो फेक फोटो डाल मोदी सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने के चक्कर में अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने पर तुली है।   
गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बाद पूरा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट होकर चीन को सबक सिखाने में लगा है, लेकिन कांग्रेस झूठी और मनगढ़त बातों के जरिए लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रही है। नया मामला पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की फोटो को लेकर है। कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने इंदिरा गांधी की 1971 की सैनिकों को संबोधित करते हुए एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। कांग्रेसी नेताओं ने इस फोटो को शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये तस्वीर उसी जगह की है जहां 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है। लेकिन आश्चर्य होगा कि हमारी जांच में हमें पता चला कि ये तस्वीर गलवान घाटी की नहीं बल्कि लेह की है। देखिए कांग्रेसी नेताओं के ट्वीट-

गूगल इमेज में सर्च करने पर पता चला कि एपी की यह तस्वीर 1971 में पीटीआई ने प्रकाशित की थी। इंदिरा गांधी गलवान घाटी से करीब 220 किलोमीटर दूर लेह में सैनिकों को संबोधित कर रही थीं। यह तस्वीर वेबसाइट art-sheep.com पर भी इंदिरा गांधी पर लिखे गए एक लेख के साथ छपी है। तस्वीर के साथ कैप्शन में साफ लिखा है, “1971 में लेह में जवानों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की एक दुर्लभ तस्वीर।”
इसके बाद कई फैक्ट चेक वेबसाइट ने भी जांच में इसे लेह का पाया। फिर लोगों ने इन्हें क्लास लगानी शुरू कर दी।


कांग्रेस इससे पहले भी अपने झूठे वायदों के लिए विख्यात रही है
भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लोगों को हर प्रकार से मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां झूठी और मनगढ़त बातों के जरिए लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रही है। नया मामला कांग्रेस पार्टी द्वारा सभी जरूरतमंद मजदूरों के रेल टिकट का खर्च उठाने का है। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी, लेकिन कांग्रेस के इस बयान को सोशल मीडिया में काफी निंदा हो रही है।  
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का यह बयान सिर्फ और सिर्फ आम लोगों को दिगभ्रमित और बरगलाने वाला है। आइए बताते हैं कैसे?
भारतीय रेलवे कर रहा है 85 फीसद खर्च
कांग्रेस द्वारा फैलाई जा रही झूठ की हकीकत ये है कि जरूरतमंद प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए  रेलवे 85% और राज्य सरकार सिर्फ 15% खर्चा उठा रही है। प्रवासी मजदूरों से एक भी पैसा नहीं लिया जा रहा है। इसके अलावा रेलवे यात्रा के दौरान खाना और पानी देने के साथ साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करके आधी क्षमता पर ट्रेन चला रहा है। खर्च में ट्रेन की वापसी किराया भी शामिल है। राज्य सरकरों को सिर्फ बचे हुए 15 प्रतिशत का ही भुगतान करना है, जो बहुत बड़ी रकम नहीं है। राज्य सरकारों को यह भार महज इस व्यवस्था में दायित्व सुनिश्चित करन के लिए दिया गया है चूंकि राज्य सरकार जाने वाले श्रमिकों की पहचान करती है, उनके स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग करती है और उनकी आवश्यकताओं के हिसाब से उनकी जाने की प्राथमिकता तय करती है, इसलिए ही यह भार दिया गया है। 

राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित यात्रियों की ही घर वापसी
रेलवे केवल राज्य सरकारों द्वारा लाये गए एवं निर्धारित किए गये यात्रियों को ही स्वीकार कर रहे है। अन्य किसी यात्री समूह या व्यक्ति को रेल यात्रा करने की इजाजत नहीं है। इसके अलावा किसी भी स्टेशन पर कोई टिकट नहीं बेचा जा रहा है। रेलव केवल राज्य सरकारों द्वार मांगी गई रेलगाड़ी के अलावा और कोई गाड़ी नहीं चला रहा है। राज्य सरकारें जब गंतव्य के साथ जाने वालों की सूची देती हैं, तभी रेलवे उन लोगों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करती है। 

न्याय योजना कांग्रेस शासित राज्यों में लागू नहीं किया
लोकसभा चुनाव 2019 के पहले कांग्रेस ने न्याय योजना को लेकर खूब प्रचार प्रसार किया लेकिन चुनाव हारने के बाद ही न्याय योजना की बात कांग्रेस यदा कदा ही करती है लेकिन बड़ी बात ये है कि सालभर बीत जाने के बाद भी कांग्रेस शासित पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान लागू नहीं कर पाईं।

डिटेंशन सेंटर को लेकर कांग्रेस ने झूठ बोला 
डिटेंशन सेंटर और सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के मुद्दे पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर जो झूठे आरोप लगाए थे, उसका पर्दाफाश हो चुका है। पीआईबी की एक ख़बर से साफ हो जाता है कि कांग्रेस की सरकारों के दौरान डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। इस खबर का पीआईबी ने खंडन किया। 13 दिसंबर, 2011 को पीआईबी द्वारा प्रकाशित की गई एक ख़बर से साफ हो जाता है कि कांग्रेस की सरकारों के दौरान डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पीआईबी के मुताबिक तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गोलपुरा, कोकराझाड़ और सिल्चर में डिटेंशन सेंटर बनाए ताकि अवैध घुसपैठियों को प्रत्यर्पण तक वहाँ और रखा जाए। इसके साथ ही इस खबर में ये भी बताया गया था कि कांग्रेस ने नवंबर 2011 तक 362 लोगों को डिटेंशन सेंटर में भेजा था। गोलपुरा में 221, कोकराझाड़ में 79 और सिल्चर के डिटेंशन कैम्प में 62 लोगों को भेजे जाने की खबर थी। इस दौरान 78 लोगों को प्रत्यर्पित किया गया था।

13 जनवरी 2011 को भारत और बांग्लादेश के बीच घुसपैठियों के प्रत्यर्पण को लेकर करार भी हुआ था, इसके साथ ही भारत ने बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया था। वहीं तत्कालीन गृह राज्यमंत्री मुल्लाप्पली रामचंद्रन ने लोकसभा में इसकी लिखित जानकारी भी दी थी। गौरतलब है कि पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर बीजेपी द्वारा जारी किए वीडियो को गलत करार दिया था, वहीं भाजपा की ओर से बताया गया कि NPR की स्कीम कांग्रेस राज में ही शुरू हुई थी तब पी. चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे।
फेक न्यूज फैलाते रंगे हाथ पकड़ी गई कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड राम्या
कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना ‘राम्या’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में फेक न्यूज फैलाते रंगे हाथ पकड़ी गई थी। दिव्या स्पंदना ने एक ट्वीट कर लिखा कि, ‘बड़ी मुश्किल से वीडियो ढूंढा है, ये 1998 का इन्टरव्यू है जिसमे साहब खुद कह रहे है हाई स्कूल तक पढा हूँ, लेकिन आज साहब के पास ग्रेजुएशन की डिग्री है जो 1979 मे किया था!!’


कांग्रेस सोशल मीडिया हेड ने इंटरव्यू को एडिट कर लोगों को गलत जानकारी देकर भरमाने की कोशिश की। दिव्या ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी के सिर्फ हाई स्कूल पास होने का दावा किया, लेकिन अगर आप कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला के साथ प्रधानमंत्री मोदी की पूरी बातचीत देखेंगे तो आपको सच्चाई का पता चलेगा। ओरिजनल वीडियो में प्रधानमंत्री साफ कहते हैं कि बीए और एमए की पढ़ाई एक्सटर्नल एक्जाम (कोरेस्पोंडेस कोर्स) से पूरी की है।
राइट ऑफ को लेकर कांग्रेस ने फैलाई झूठी खबर!
राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी भी जोर-शोर से फेक न्यूज फैलाने में लगी हुई है। मोदी सरकार पर हमले के लिए कांग्रेस तथ्यों से खिलवाड़ करती रही है। कांग्रेस के ट्विटर हैंडल और नवजीवन वेबसाइट के जरिए लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती रही है। बड़े अखबार और वेबसाइट भी बगैर तथ्यों की जांच-परख किए इन खबरों को प्रकाशित कर देते हैं।

केंद्र सरकार ने जब राज्यसभा में स्वीकार किया कि सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से सितंबर 2017 तक 2.41 लाख करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ किया तो कांग्रेस पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि सरकार ने कंपनियों का 2.41 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया। सोची-समझी चाल के तहत कांग्रेस ने राइट ऑफ को वेव ऑफ दिखाते हुए मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की, क्योंकि मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम के रहते कांग्रेस पार्टी को बैंकों द्वारा लोन की रकम राइट ऑफ करने और वेव ऑफ किए जाने का अंतर पता नहीं हो, ऐसा हो नहीं सकता। कांग्रेस पार्टी की वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा गया है कि, Loans Worth ₹2.41 Lakh Crore to Corporate Bodies Waived Off
इसके साथ ही पार्टी से ही संबंधित नवजीवन वेबसाइट पर प्रकाशित खबर का शीर्षक है– ‘सरकार ने माना, सार्वजनिक बैंकों ने 2014 से 2017 के बीच माफ किया 2,41,911 करोड़ रुपए का कर्ज’। वेबसाइट में लिखा गया है कि वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने राज्यसभा सांसद रिताब्रता बनर्जी के सवाल के जवाब में दी लिखित प्रतिक्रिया में यह स्वीकार किया है कि वित्त वर्ष 2014-15 से सितंबर 2017 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2,41,911 करोड़ रुपए कर्ज माफ (वेव ऑफ) कर दिए हैं। जबकि, रिताब्रत बनर्जी के सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने राज्यसभा को बताया कि सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से सितंबर 2017 के बीच 2,41,911 करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ किया है।

कांग्रेस ने राइट ऑफ को वेव ऑफ बताकर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की। कांग्रेस की इस साजिश पर सीनियर जर्नलिस्ट सुनील जैन ने ट्टीट किया है कि, ‘राहुल गांधी, यह वाकई अविश्वसनीय है कि सिर्फ नरेंद्र मोदी पर हमला बोलने के लिए कांग्रेस पार्टी को तथ्यों को इस हद तक तोड़ना-मरोड़ना चाहिए। लोन के ‘राइटिंग ऑफ’ और इसके ‘वेविंग ऑफ’ में अंतर है। निश्चित है कि आपकी विशाल पार्टी में कुछ लोग तो यह जानते ही होंगे?’

इस फेक न्यूज की खबर पर नवभारत टाइम्स अखबार में साफ बताया गया है कि राइट ऑफ और वेव ऑफ क्या होता है और कैसे सरकर को बदनाम करने की कोशिश की गई।
राहुल से एनसीसी का सवाल पूछने वाली कैडेट को एबीवीपी कार्यकर्ता बताया
24 मार्च, 2018 को कर्नाटक में स्टूडेंट्स से रूबरू होते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वह एनसीसी के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीसी कैडेट संजना सिंह ने कहा, “आश्चर्य की बात है कि राहुल गांधी को एनसीसी के बारे में नहीं पता! यह कोई और चीज नहीं है, यह रक्षा की दूसरी पंक्ति है! आशा है कि राहुल गांधी इसके बारे में जाने! एक नेता के लिए यह जानना जरूरी है।” जाहिर है कि इस एनसीसी कैडेट ने सही बात कही, लेकिन कांग्रेस पार्टी का स्पोक्स पर्सन बन चुके कुछ पत्रकारों को ये बात चुभ गई। एशिया टाइम्स ऑनलाइन के साउथ एशिया एडिटर सैकत दत्ता ने इसके बारे में ट्वीट किया कि संजना सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ी हुई हैं। जबकि सच्चाई यह है कि किसी दूसरी संजना सिंह के प्रोफाइल को पोस्ट कर सैकत दत्ता ने झूठ खबर फैलाने की कोशिश की। इसी तरह कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड ने भी इस झूठी खबर को फैलाने की कोशिश की। लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि झूठी खबर फैलाने की मंशा से ये किया गया था जिसका पर्दाफाश हो चुका है।

दुष्प्रचार पर उतरी कांग्रेस !
अल्ट न्यूज पर लगाई गई इस खबर में आप देख सकते हैं कि एक तस्वीर में राजनाथ सिंह के पैरों में गिरे हुए पुलिस इंस्पेक्टर की तस्वीर है, दूसरी तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है जिसमें मुंबई हमले का मास्टर माइंड आतंकवादी हाफिज सईद से उन्हें हाथ मिलाते हुए दिखाया जा रहा है, लेकिन इन तस्वीरों की सच्चाई जानेंगें तो आप कांग्रेस के कुकृत्यों को भी सही रूप में देख पाएंगे।

फोटो शॉप से बनाई Fake तस्वीरें
इन तस्वीरों की सच्चाई भी जान लीजिए। दरअसल राजनाथ सिंह के पैरों में गिरे पुलिस इंस्पेक्टर की तस्वीर एक फिल्म की है। इसमें एक राजनेता के कदमों में पुलिस इंस्पेक्टर को गिड़गिड़ाते हुए दिखाया गया है। दूसरी तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाफिज सईद से हाथ मिलाते हुए दिखाया गया है, लेकिन वास्तविक तस्वीर 1 जनवरी 2016 की तस्वीर है जब प्रधानमंत्री मोदी लाहौर गए थे तो उन्होंने तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ से हाथ मिलाया था। इन दोनों ही तस्वीरों से फोटो शॉप के जरिये छेड़छाड़ की गई है और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है।

Fake तस्वीरों का कांग्रेसी कनेक्शन
दोनों ही तस्वीर वायरल करने वालों का नाता कांग्रेस पार्टी से बताया गया। दरअसल तस्वीर पोस्ट करने वालों में से एक आलमगीर रिजवी फ्रेंड्स ऑफ कांग्रेस वेबसाइट के एनआरआई टीम में सोशल मीडिया वोलेंटियर के रूप में लिस्टेड है। जबकि अरशद चिस्ती के ट्विटर प्रोफाइल में कांग्रेस के आइटी सेल का सदस्य बताया गया है। आलमगीर रिजवी को कई बार बताया गया कि ये तस्वीरें नकली हैं, लेकिन उन्होंने इसे नहीं हटाया। अलबत्ता कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा ने इसे रीट्वीट भी किया है। उन्होंने लिखा है, “अगर यह सही तस्वीर है, तो यह बहुत ज्यादा है। समझ से परे, दंग रह गए।”


हालांकि संजय झा ने इस रीट्वीट के लिए क्षमा मांग ली, लेकिन यह साफ हो गया कि आजकल सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों को लेकर कई ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं जो Fake हैं। 
कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता ही नहीं अध्यक्ष राहुल गांधी खुद इसमें शामिल रहे हैं। आइए हम राहुल के द्वारा फैलाए गए कई और झूठ को देखते हैं जो उन्होंने देश की जनता को गुमराह करने के लिए फैलाए-
जीएसटी पर देश से बोला झूठ
यूपीए के दस वर्षों के शासन में कांग्रेस पार्टी जीएसटी को लेकर तमाम राज्यों के बीच आम राय नहीं बना पाई थी, क्योंकि उसका जीएसटी को लेकर कोई साफ रुख नहीं था। 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी तो उसने नए सिरे से जीएसटी को लेकर कवायद शुरू की और सभी राज्य सरकारों के बीच इसे लेकर सहमति बनाई। हालांकि राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सहमति नहीं दी थी, लेकिन हकीकत ये है कि कांग्रेस की सभी राज्य सरकारों ने जीएसटी का समर्थन किया और संसद के दोनों ही सदनों में कांग्रेस ने जीएसटी पास करवाने के लिए पक्ष में वोटिंग भी की थी।

नोटबंदी पर देश से बोला झूठ
राहुल गांधी ने कहा कि संघ परिवार के एक विचारक ने प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का विचार दिया था। राहुल गांधी का यह बयान सरासर झूठा है। सच्चाई यह है कि देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और कालाधन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने काफी गहन विचार-विमर्श के बाद नोटबंदी का ऐलान किया था। रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी भी कह चुके हैं कि नोटबंदी का पहला विचार फरवरी 2016 में आया था और सरकार ने विमुद्रीकरण के बारे में रिजर्व बैंक की राय मांगी थी। आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने पहले तो सरकार को मौखिक रूप से इस पर राय दी। बाद में एक विस्तृत नोट बनाकर सरकार को भेजा गया जिसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि नोटबंदी की खामियां और खूबियां क्या-क्या हैं। इसके बाद पूरी तैयारी के साथ 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया गया था।

रायबरेली पर देश से बोला झूठ
राहुल गांधी कहते रहे हैं कि मोदी सरकार आने के बाद से रायबरेली के साथ भेदभाव किया जाता रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि यूपीए के जमाने में राजीव गांधी के नाम पर रायबरेली में जो पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी स्थापित की गई थी उसे पांच वर्षों के दौरान यूपीए सरकार ने महज 1 करोड़ रुपये दिए थे। जबकि मोदी सरकार ने पहले दो वर्षों में इस यूनीवर्सिटी के लिए 360 रुपये देकर इसे एक संस्थान के रूप में विकसित किया। इतना ही नहीं रायबरेली में स्थित इंडियन टेलीकॉम इंडस्ट्रीज नाम का संस्थान बंद होने के कगार पर था और वहां अफसरों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस संस्थान को 500 करोड़ आवंटित कर जीवनदान दिया और 1100 करोड़ रुपये का आर्डर भी दिलाया।

महंगाई पर देश से बोला झूठ
राहुल ने पिछले वर्ष गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान ट्विटर पर लिखा “जुमलों की बेवफाई मार गई, नोटबंदी की लुटाई मार गई, GST सारी कमाई मार गई बाकी कुछ बचा तो – महंगाई मार गई… बढ़ते दामों से जीना दुश्वार, बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार?” राहुल गांधी ने इस सवाल के साथ एक इन्फोग्राफिक्स भी पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने गैस सिलिंडर, प्याज, दाल, टमाटर, दूध और डीजल के दामों का हवाला देकर 2014 और 2017 के दामों की तुलना में सभी चीजों के दामों में वास्तविक दामों से सौ प्रतिशत अधिक की बढ़ोतरी दिखा दी। जैसे ही राहुल गांधी ने ये ट्वीट किया, लोगों ने इस चालाकी को पकड़ लिया और फिर शुरू हो गई राहुल की खिंचाई।

महिला साक्षरता के आंकड़े पर बोला झूठ
राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पिछले वर्ष 3 दिसंबर को “22 सालों का हिसाब, गुजरात मांगे जवाब” अभियान के तहत प्रधानमंत्री मोदी से महिला सुरक्षा, पोषण और महिला साक्षरता से जुड़ा सवाल पूछा था, लेकिन इस सवाल के साथ राहुल ने जो इन्फोग्राफिक्स पोस्ट किया था उसमें गुजरात की महिला साक्षरता के उल्टे आंकड़े दिखाए थे। इन आंकड़ों में दिखाया गया था कि 2001 से 2011 के बीच गुजरात में महिला साक्षरता दर में 70.73 से गिरकर 57.8 फीसदी हो गई है।

राहुल गांधी ने जो आंकड़े दिखाए थे वे सरासर गलत थे। गुजरात में महिला साक्षरता की सच्चाई इसके उलट है। सही आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में 2001 से 2011 के बीच महिला साक्षरता में 12.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 1991 से 2001 के बीच हुई 8.9 फीसदी बढ़ोतरी से काफी ज्यादा है। इतना ही नहीं इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर हुई साक्षरता वृद्धि से भी ये काफी ज्यादा है।
45,000 करोड़ एकड़ जमीन पर बोला झूठ
गुजरात चुनाव में प्रचार के दौरान ही राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलने के क्रम में ऐसा कुछ कह दिया था जो कि असंभव है। राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने अपने उद्योगपति दोस्तों को 45,000 करोड़ एकड़ जमीन दे दी, लेकिन राहुल ने जमीन का जो आंकड़ा बोला वह असंभव है। 45,000 करोड़ एकड़ जमीन इस धरती से भी तीन गुना ज्यादा है। आपको बता दें कि पूरी धरती ही लगभग 13,000 करोड़ एकड़ की है।

लोकसभा सदस्यों की संख्या पर बोला झूठ
वर्ष 2017 के सितंबर में राहुल गांधी जब अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या ही 546 बता डाली। जबकि सच्चाई यह है कि लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 545 है, इनमें से 543 को जनता चुनती है और दो सदस्य (ऐंग्लो-इंडियन) मनोनित किए जाते हैं। आप ही बताइए जो शख्स इतने वर्षों से लोकसभा का सदस्य है, उसे लोकसभा के सदस्यों की संख्या तक नहीं पता है।

इंदिरा कैंटीन को बताया अम्मा कैंटीन
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में इंदिरा कैंटीन योजना की लॉन्चिंग में भी राहुल गांधी के ज्ञान पर सवाल उठ गए। पहली बार में उन्होंने योजना का नाम ही गलत बता दिया। जबकि यह योजना उनकी दादी यानी इंदिरा गांधी के नाम पर शुरू हो रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने उसे तमिलनाडु में जयललिता के नाम पर चलने वाली अम्मा कैंटीन बता दिया। हालांकि, बाद में उन्हें भूल का अंदाजा हुआ और उन्होंने गलती सुधारने की कोशिश की। लेकिन जिस व्यक्ति में सामान्य ज्ञान का इतना अभाव है उससे क्या उम्मीद की जा सकती है?

महाभारत काल पर झूठ
राहुल गांधी की हरकतें बतातीं हैं कि वे झूठे प्रचार के जरिए और निराधार खबरें फैला कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने को आतुर हैं। इसी क्रम में वे कई बार खुद के ‘अज्ञानी’ होने का भी सबूत दे देते हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस ट्वीट को देखिए-

दरअसल अपने ट्वीट में महाभारत काल का उदाहरण दे रहे हैं और इसे 1000 साल पहले की घटना बता रहे हैं। साफ है कि इस ट्वीट से एक बात साबित हो जाती है कि राहुल गांधी न सिर्फ झूठ फैलाते हैं बल्कि वे अज्ञानी भी हैं। कौरव-पांडव की बात करने वाले राहुल को ये भी नहीं पता है कि महाभारत काल पांच हजार वर्ष से अभी अधिक पुराना है। इस ट्वीट से ये भी पता लग जाता है कि लोग उन्हें गंभीरता से क्यों नहीं लेते हैं?

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का झूठ
प्रधानमंत्री मोदी 22 और 23 सितंबर, 2017 को वाराणसी में विकास योजनाओं का शुभारंभ कर रहे थे, जिसके लिए शहर के लोग वर्षों से इंतजार कर रहे थे तो दूसरी तरफ इन धर्मनिरपेक्ष ताकतों ने गोलबंद होकर शहर की आबोहवा बिगाड़ने का काम किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए हुई पुलिस कार्रवाई को क्रूर और दमनकारी साबित करने के लिए पत्रकारों और राजनेताओं ने एक ऐसी घायल लड़की की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सैकड़ों किलोमीटर दूर लखीमपुर खीरी में युवकों से मारपीट में घायल एक लड़की की तस्वीर थी।

दैनिक हिन्दुस्तान की पूर्व संपादक और प्रसार भारती की पूर्व सीईओ मृणाल पांडे ने लिखा-
इसी तस्वीर को प्रशांत भूषण ने भी रीटीव्ट किया-
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथी और आप नेता संजय सिंह ने भी इस तस्वीर की सच्चाई जाने बगैर रीट्वीट कर दिया-

इसके बाद और लोगों ने इस झूठी तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।
अब देखिए वह तस्वीर जिसके आधार पर झूठी खबर फैलायी गई।
नोटबंदी पर भी झूठा प्रचार किया गया
08 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की। इसे जन विरोधी बताने के लिए भी झूठी तस्वीरों का सहारा लिया गया। 

मोदी को बदनाम करने 'कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा' का सहारा लेकर जनता को भ्रमित किया जा रहा था। 
नोटबंदी के मुखर विरोधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जब दिल्ली की सड़कों पर ममता बनर्जी के साथ कोई समर्थन नहीं मिला तो उन्होंने 20 नवंबर को एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा-
हालांकि केजरीवाल के इस ट्वीट की सच्चाई सामने आ गयी-
अवलोकन करें:-
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भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच टकराव जारी है। कांग्रेस और वामपंथियों को छोड़कर पूरा विपक्ष इस समय मोदी सरकार .....

सैनिकों की शहादत को भी क्षेत्रवाद के चश्मे से देखती है शिवसेना; बिहार रेजीमेंट की तारीफ पर सेना का किया अपमान

शिवसेना ने फिर अपना संकुचित चेहरा दिखाया है। क्षेत्रवाद की राजनीति से जन्मी शिवसेना का चरित्र आज भी वैसा ही, जैसा उसकी स्थापना के समय था। आज भी यह पार्टी हर मुद्दे को क्षेत्रवाद के चश्मे से देखती और प्रतिक्रिया देती है। गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष में बिहार रेजीमेंट के जवानों ने जिस तरह पराक्रम दिखाते हुए शहादत दी, उस पर पूरे देश को गर्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 जवानों की शहादत को याद करते हुए उनकी वीरता की तारीफ की। लेकिन शिवसेना को यह तारीफ रास नहीं आया। शिवसेना नेता संजय राउत ने तारीफ पर सवाल उठाकर सेना का अपमान करने से बाज नहीं आए।
सैनिकों की शहादत पर शिवसेना की राजनीति
संजय राउत ने बिहार रेजीमेंट की तारीफ करने वाले प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ‘बिहार रेजीमेंट’ ने लद्दाख की गलवान घाटी में बहादुरी दिखाई। तो महारों, मराठों, राजपूतों, सिखों, गोरखाओं, डोगरा रेजीमेंट सीमा पर तंबाकू मलते बैठे थे क्या? महाराष्ट्र के वीरपुत्र सुनील काले कल पुलवामा में शहीद हो गए। लेकिन बिहार में चुनाव होने के कारण ही सेना में ‘जाति’ और ‘प्रांत’ का महत्व बताया जा रहा है। इस तरह की राजनीति कोरोना से भी बदतर है! महाराष्ट्र में विपक्ष इस खुजली को खुजलाने का काम कर रहा है।
बिहार रेजीमेंट का नाम लेने पर शिवसेना को आपत्ति
शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय लिखने के बाद मीडिया से सवाल करने पर संजय राउत ने कहा कि सेना की कोई भी रेजीमेंट बस रेजीमेंट होती है। हर रेजीमेंट की अपनी परंपरा और गाथा है। सभी रेजीमेंट देश की होती है। किसी प्राांत, राज्य या किसी धर्म की नहीं होती है।
शिवसेना ने शहादत को चुनाव से जोड़ा 
संजय राउत ने कहा कि राजपूताना रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट है, महार, बिहार, गोरखा और डोगरा रेजीमेंट है.. यह परंपरा के नाते रेजीमेंट का नाम होता है। सिर्फ एक रेजीमेंट का नाम लेना। एक राज्य का नाम लेना, यह राष्ट्रीय अखंडता और एकात्म के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के कारण बिहार रेजीमेंट का नाम लिया जा रहा है।
गलवान में बिहार रेजीमेंट का पराक्रम
गलवान में भारतीय सेना ने ‘पराक्रम’ की जो पटकथा लिखी है वो चीन को सदियों याद रहेगी। 16 बिहार रेजीमेंट के वीर सैनिकों ने चीन के कई सैनिकों की गर्दन और रीढ़ की हड्डी तोड़ दी थी और चीन के 40-50 सैनिकों को मार गिराया था। इसके अलावा चीनी सेना के कर्नल को भी बंधक बना लिया था। सैनिकों ने मौजूद चीन की पोस्ट को नष्ट कर दिया। चीन के कई सैनिक वहां से भाग खड़े हुए।
बिहार रेजीमेंट में शामिल दूसरे राज्यों के सैनिकों का अपमान
बिहार रेजीमेंट में सिर्फ बिहार के लोग ही नहीं चुने जाते, बस इस रेजीमेंट का नाम ही ‘बिहार रेजिमेंट’ है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इसकी शुरूआत बिहार के ज़िलों से हुई थी। बिहार रेजीमेंट के शहीद होने वाले 20 सैनिकों में न सिर्फ बिहार के बल्कि दूसरे राज्यों के भी जवान शामिल थे। देश के कई हिस्सों में अलग-अलग तरह से जवानों को सलामी दी गई। 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफ‍िसर रहे कर्नल संतोष बाबू भी तेलंगाना के रहने वाले थे। तेलंगाना के सूर्यपेट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसी तरह बिहार, पंजाब, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड के रहने वाले सैनिकों का उनके गृह राज्य में अंतिम विदाई दी गई। लेकिन शिवसेना ने इन शहीद सैनिकों को क्षेत्रीय आधार पर बांटकर उनकी शहादत का अपमान किया है।
आइए आपको बताते हैं बिहार रेजीमेंट और उसके पराक्रम के इतिहास के बारे में 
अपने पराक्रम और शौर्य के लिए मशहूर रही बिहार रेजीमेंट भारत के तमाम महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों का हिस्सा रही है। देश के लिए प्राणों की आहुति देना बिहार रेजीमेंट की परंपरा रही है। 18वीं सदी में बिहार बटालियन से शुरू हुआ गठन 1941 में बिहार रेजीमेंट के तौर पर स्थापित हुआ। तबसे अब तक इस रेजीमेंट के जवान सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर सीमाओं पर संघर्ष के समय में इतिहास रचते रहे हैं। ‘वी​र बिहारियों’ की इस रेजीमेंट के नाम एक ‘World Record’ समेत कई कीर्ति गाथाएं दर्ज हैं। इस रेजीमेंट ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति ऑपरेशनों के तहत सोमालिया और कोंगो में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
उरी में दर्ज हुआ रेजीमेंट का बलिदान
18 सितंबर 2016 की तारीख इस रेजीमेंट के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि जम्‍मू कश्‍मीर के उरी सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी सीमा से आए घुसपैठियों से मुकाबले में इस रेजीमेंट के 15 जांबाजों ने जान न्यौछावर कर दी थी। उरी सेक्टर स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में कुल 17 जवान शहीद हुए थे, जिनमें सबसे ज़्यादा 15 जवान बिहार रेजिमेंट के थे। इनमें से 6 बिहार मूल के थे।
मुंबई में शहीद हुए थे मेजर उन्नीकृष्णन
साल 2008 में जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था, तब एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ऑपरेशन ब्लैक टॉरनैडो में शहीद हुए थे। असल में, मेजर उन्नीकृष्णन बिहार रेजीमेंट के थे, जिन्हें प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में भेजा गया था। मुंबई में आतंकी हमले से जूझने से पहले कारगिल युद्ध में बिहार रेजीमेंट ने इतिहास रचा था।
कारगिल में भी कुर्बान हुए जांबाज़
जुलाई 1999 में बटालिक सेक्टर के पॉइंट 4268 और जुबर रिज पर पाकिस्‍तानी घुसपैठियों के कब्जे की कोशिश को बिहार रेजीमेंट के जवानों ने ही नाकाम किया था। कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन गुरजिंदर सिंह सूरी को महावीर चक्र और शहीद मेजर मरियप्पन सरावनन को वीर चक्र से नवाज़ा गया था। पटना के गांधी मैदान के पास कारगिल चौक पर कारगिल में शहीद हुए 18 जांबाजों की याद में स्‍मारक है।
आज़ादी से पहले और बाद में मिले कई पुरस्कार और मेडल 
यहां जानना चाहिए कि 1941 में स्थापित हुई बिहार रेजिमेंट के नाम भारत की आज़ादी से पहले ही 5 मिलिट्री क्रॉस और 9 मिलिट्री मेडल थे जबकि आज़ादी के बाद से अब तक इस रेजीमेंट के खाते में 7 अशोक चक्र, 9 महावीर चक्र और 21 कीर्ति चक्र, 70 शौर्य पदक सहित सेना के कई पुरस्कार और मेडल शामिल हैं।
बिहार रेजीमेंट के सामने दुनिया का सबसे बड़ा सरेंडर
साल 1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना से संघर्ष के दौरान बिहार रेजीमेंट के किस्से मशहूर हैं। कहा जाता है कि गोलियां कम पड़ने पर इस रेजीमेंट के सैनिकों ने दुश्मन को संगीनों से ही मार दिया था। उस युद्ध में पाकिस्तान के 96 हजार सैनिकों ने बिहार रेजीमेंट के जांबाज़ों के आगे ही घुटने टेके थे। इस आत्‍मसमर्पण को दुनिया में लड़े गए अब तक के सभी युद्धों में रिकॉर्ड माना जाता है।

प्रसिद्ध है बिहार रेजीमेंट का मोटो और हुंकार
‘करम ही धरम’ इस रेजिमेंट का मोटो रहा है और इसके मुताबिक मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य को ही रेजीमेंट के जवान अपना कर्म और धर्म मानते हैं। वॉर क्राय यानि हुंकार के रूप में बिहार रेजीमेंट के वाक्य हैं ‘जय बजरंग बली’ और ‘बिरसा मुंडा की जय’। इस तरह की हुंकार भरकर बिहार रेजीमेंट के जवान दुश्मन पर टूट पड़ते हैं।
क्यों दुर्गम घाटियों में तैनात है रेजीमेंट?
खबरों की मानें तो बिहार रेजीमेंट के जवान चूंकि बहादुर होते हैं और वो किसी भी स्थिति को झेलने की क्षमता रखते हैं इसलिए इस रेजीमेंट के जवानों की तैनाती दुर्गम और जटिल परिस्थितियों वाले इलाकों में की जाती रही है। भारत चीन सीमा यानि एलएसी पर गलवन घाटी और इस तरह के कुछ अन्य दुर्गम स्थानों पर रेजीमेंट के जवान तैनात हैं।

राजस्थान : राहुल गाँधी पर टिप्पणी के बाद कहाँ गायब हुआ घायल सैनिक का परिवार?

राहुल गाँधी सैनिक
भारत-चीन तनाव के बीच अलवर जिले के सिपाही सुरेंद्र सिंह भी घायल हो गए थे। उनके पिता बलवंत सिंह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को राजनीति न करने की सलाह दी थी। अब पता चला है कि नौगाँवा का ये पूरा परिवार भूमिगत हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया है कि अलवर ज़िले के सिपाही सुरेंद्र सिंह के पिता ने राहुल गाँधी को देशभक्ति की सलाह क्या दी, राजस्थान के सत्ताशीन कांग्रेस प्रशासन ने सैनिक के घर पहुँच कर उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
राठौड़ ने कांग्रेस पार्टी और अशोक गहलोत की सरकार से पूछा कि क्या अब आप सैनिक के वृद्ध पिता को डरा धमकाकर राजनीति करेंगे? राहुल गाँधी पर बयान देने के बाद परिवार अचानक से कहाँ भूमिगत हो गया है, इस सम्बन्ध में कुछ पता नहीं चल सका है। परिवार के अलवर स्थित मकान पर टाला लटका हुआ है। बलवंत सिंह के वीडियो को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर के राहुल गाँधी पर निशाना साधा था।

‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, बयान देने के बाद एसडीएम, पुलिस और प्रशासन घायल सैनिक के घर पहुँचा था। वहाँ पर घायल सैनिक के माता-पिता और भाई में से कोई नहीं मिला। न सिर्फ़ घर पर ताला लटका हुआ था बल्कि परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिला। उक्त सैनिक की पत्नी अलवर शहर के दिवाकरी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद से उनका घर भी बंद है।
सुरेंद्र के हवाले से ही गलवान घाटी में हुए भारत-चीन संघर्ष की कहानी सामने आई थी। इसके बाद रामगढ़ और अलवर के पुलिस अधिकारियों का बलवंत सिंह के घर पर जमावड़ा लग गया था। पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता कि सैनिक का परिवार कहाँ गया है। एसडीएम ने बताया कि वो एक दिन पहले ही परिवार से मिली थीं लेकिन अब उन्हें परिवार का कोई सदस्य मिल ही नहीं रहा।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने आरोप लगाया है कि राजस्थान का पुलिस-प्रशासन कांग्रेस सरकार के इशारे पर सैनिक के परिवार को परेशान कर रहा है। उनका आरोप है कि राहुल गाँधी पर दिए उनके बयान को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सैनिक के परिवार को डराने-धमकाने वाला कृत्य बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाजपा ने पुलिस-प्रशासन का रवैया न बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 जवान बलिदान हो गए थे। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी सरकार को घेरने की कोशिश में अनर्गल सवाल उठा रहे हैं। राहुल ने शुक्रवार (जून 19, 2020) को गलवान घाटी में घायल हुए जवान के पिता बलवंत सिंह का वीडियो ट्वीट कर सरकार को घेरा था। 
इसके बाद घायल जवान सुरेंद्र के पिता बलवंत ने वीडियो जारी कर कहा था, “ये भारतीय सेना मजबूत सेना है। चीन को हरा सकती है। और भी देशों को हरा सकती है। राहुल गाँधी, आप नेतागिरी मत करना। ये राजनीति अच्छी नहीं है। मेरा छोरा पहले भी फौज में लड़ा। अब फिर लड़ेगा शेर की तरह। भगवान करे ठीक हो जाए तो फिर लड़ेगा देश के लिए।” ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। 
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लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 जवान बलिदान हो गए थे। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता लगातार बया.....
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज भारत को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो गए, परन्तु आत्मनिर्भर नहीं बन पाया, क्यों? पहले सो....
राहुल गाँधी ने गलवान घाटी की हिंसक झड़प में घायल हुए एक जवान के पिता के बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया था, “यह देखकर दुख होता है कि भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रधानमंत्री को बचाने के लिए झूठ बोलने पर उतर आए हैं। अपने झूठ से हमारे शहीदों का अपमान मत करिए।” इसी के जवाब में घायल जवान के पिता का यह वीडियो सामने आया है।