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बॉम्बे हाई कोर्ट को मानव तस्करी की आशंका : 2017 से अब तक 279 लोग शिरडी से लापता

कांग्रेस और एनसीपी की बैसाखियों पर चल रही महाराष्ट्र में शिव सेना की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार पर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्मयी मृत्यु से सरकार और बॉलीवुड पर छाए संकट के बादलों में जनहित भावना लुप्त होती नज़र आ रही है। काफी समय से लॉक डाउन के पूर्व से ही शिरडी के दर्शनार्थियों के गायब होने का समाचार सुर्ख़ियों में है, लेकिन सुशांत और बॉलीवुड में ड्रग माफिया के उजागर होने और किसी बड़े नेता के पुत्र, जिसे छोटे पेंगुइन के नाम से सम्बोधित किया जा रहा है, को बचाने और चर्चा यह भी है कि रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी पर कसते शिकंजे की असली वजह सोनिया गाँधी को अंटोनिओ के नाम से सम्बोधित किये जाना ही मुख्य कारण होने की वजह से शिरडी से गायब होते लोगों की लेशमात्र भी चिंता नहीं। काश, स्थिति विपरीत होती, क्या तब भी उद्धव चुपचाप बैठे होते?

दूसरे, रोज हज़ारों की संख्या में शिरडी आने वाले लोगों से महाराष्ट्र को पर्यटन से आय होने के साथ-साथ हज़ारों को रोजगार भी मिल रहा है। यदि शिरडी से लोगों के गायब होने का सिलसिला जारी रहने से महाराष्ट्र सरकार को कितना नुकसान होगा, क्या उद्धव ने कभी चिंता की? काश ! अपने पुत्र की इस सत्ता लोलुपता की मनोदशा को देखने के लिए बालासाहब जीवित होते।  

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मानव तस्करी की आशंका व्यक्त करना महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है। और निश्चित रूप से गंभीरता और निष्पक्ष जाँच ही इस आशंका को दूर पायेगी कि इस घिनौने खेल में कौन-कौन शामिल हैं? क्योंकि किसी राजनीतिक संरक्षण के बिना मानव तस्करी असंभव है।   
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र के शिरडी शहर से पिछले कुछ सालों से गायब हो रहे लोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस को मामले में संज्ञान लेने का निर्देश दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महसूस किया कि लापता हो रहे लोगों का पता लगाने में महाराष्ट्र पुलिस का प्रयास काफी असंतोषजनक रहा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (DGP) से इस मुद्दे पर गौर करने और सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। उच्च न्यायालय ने डीजीपी से, गुमशुदगी के पीछे (मानव) तस्करी या अंग तस्करी रैकेट की संभावना की जाँच करने और इस पर से पर्दा हटाने का आदेश भी दिया है। 

शिरडी पुलिस द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट को सौंपे गए आँकड़ों के अनुसार 2017 से 27 अक्टूबर, 2020 के बीच अहमदनगर के शिरडी से लगभग 279 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें से 67 लापता लोगों को अभी तक ट्रेस नहीं किया जा सका हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने पाया कि 2017 में शिरडी से 20 लोग लापता हो गए थे, जिनका अभी पता नहीं चल पाया है। वहीं इस साल मार्च में हुए लॉकडाउन से पहले 20 अन्य लोगों के लापता होने की सूचना है।

इंदौर निवासी मनोज सोनी द्वारा कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। मनोज 10 अगस्त, 2017 को अपने परिवार के साथ साईंबाबा मंदिर में दर्शन करने के लिए शिरडी आए थे। उनकी 35 वर्षीय पत्नी दीप्ति एक शाम मंदिर में दर्शन करने के बाद गायब हो गई थी, जिनका अभी तक पता नहीं लग पाया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुघे और न्यायमूर्ति बीयू देबदवार की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर को अहमदनगर के एसपी को दीप्ति मामले में पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर अदालत को एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था।

इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा मानव तस्करी करने वाले गिरोहों की संलिप्तता पर संदेह किया जा रहा है।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आँकड़ों में कहा गया है कि 2017 में शिरडी से लापता 71 लोगों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जिनमें से 51 लोग वापस मिल गए थे जबकि दीप्ति सहित 20 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं 2018 में गुम हुए 82 व्यक्तियों में से 13 का पता अभी तक नहीं चल पाया है और 2019 में लापता हुए 88 में से 14 के लापता होने की सूचना है। इस साल 2020 में 38 लोग लापता हुए, जिनमें केवल 18 लोगों का ही पता चला है।

मानव-तस्करी के मद्देनजर अदालत को जवाब देते हुए अभियोजक ने अदालत से कहा कि, शिरडी पुलिस को अभी तक किसी भी मानव तस्करी या अंग तस्करी समूह का लिंक इस मामले में नहीं मिला है। जिसके लिए लोगों का अपहरण या उन्हें गायब किया जा रहा है।

न्यायाधीशों ने कहा कि 26 अक्टूबर को अदालत के आदेश के बाद पुलिस को गहरी नींद से उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इंसान झूठ बोल सकता है लेकिन दस्तावेज झूठ नहीं बोलेंगे। 22 नवंबर, 2019 को कोर्ट के आदेश के अनुसार, शिरडी पुलिस द्वारा जाँच के लिए गठित विशेष यूनिट का इस मामले में किया गया प्रयास संतोषजनक नहीं है।

अदालत ने आगे कहा, “हम आश्वस्त हैं कि शिरडी पुलिस स्टेशन ने शायद ही कोई प्रयास किया हो। और यह इस तरफ इशारा किया कि अहमदनगर पुलिस विभाग के प्रमुख भी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं।”

बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि वह 24 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में डीजीपी के जवाब का इंतजार करेगी।

शिरडी में एक-एक कर गायब हो रहे लोग!

Image result for shirdi sai babaप्रतिदिन हज़ारों की संख्या में शिरडी दर्शनार्थ जाते हैं, लेकिन उनके विश्वास को ठेस पहुँचाने, दर्शनार्थियों के कथित रूप से गायब होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक साल में अब तक 88 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं। यदि ये गायब होने का सिलसिला नहीं रुका, वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब शिरडी दर्शन करने वालों का अभाव हो जाएगा और लोगों की आस्था भी समाप्त होने लगेगी। 
प्राप्त समाचारों के अनुसार, इस मामले में अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गुमशुदगी के पीछे मानव तस्करी या अंग रैकेट के जांच के आदेश जारी किए हैं बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के जज टीवी नवाडे और एसएम गवान्हे की पीठ ने ये टिप्पणी मनोज कुमार नामक शख्स की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की बता दें कि मनोज की पत्नी 2017 में शिरडी से लापता हुई थींइसके बाद से मनोज ने पत्नी को ढूढ़ने की काफी कोशिश की, लेकिन उनका पता तक नहीं चला
औरंगाबाद कोर्ट ने कहा पिछले एक साल में शिरडी से 88 से अधिक लोग कथित रूप से लापता हुए हैंइनमें से ज्यादातर वो लोग हैं जो मंदिर में दर्शन करने के लिए शिरडी पहुंचे थे पीठ ने कहा कि गायब लोगों में कुछ का पता चला है, लेकिन कुछ का अभी तक पता नहीं चल सका है जो लोग अभी भी लापता हैं उनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं कोर्ट ने कहा जब कोई गरीब व्यक्ति गायब होता है तो उसके रिश्तेदार असहाय हो जाते हैं ज्यादातार लोग पुलिस के पास तक नहीं पहुंच पाते हैं और बमुश्किल से ऐसे मामले अदालत तक पहुंच पाते हैं
कोर्ट ने कहा, अभी तक के पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 88 से अधिक लोग गायब हैं कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं के पीछे मानव तस्करी और अंगों का रैकेट हो सकता है अदालत ने इस तरह सकी संभावनाओं को देखते हुए अमहदनगर के पुलिस अधीक्षक को जांच के लिए विशेष इकाई गठित करने के आदेश दिए हैं गौरतलब है कि शिरडी महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है यहां स्थित साईं मंदिर में देश-दुनिया के भक्त दर्शन के लिए आते हैं

2 साल में 629 पाकिस्तानी लड़कियों को खरीद कर ले गए चीनी

पाकिस्तान की महिलाओं को खरीद कर चीन के लोग अपने घर ले जा रहे हैं। पाकिस्तानी महिलाओं को बेचने का धंधा बड़े पैमाने पर हो रहा है। पाकिस्तान के अधिकतर इलाके गरीब हैं। वहॉं के लोग आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े हैं। इसका फायदा उठाकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग नेटवर्क ने जाल बिछा लिया है। ‘एसोसिएट प्रेस’ के आँकड़ों के अनुसार, 2018 से अब तक 629 पाकिस्तानी महिलाओं को बेचा जा चुका है। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पाकिस्तान के एक ख़ुफ़िया अधिकारी ने बताया कि चीन को ख़ुश रखने के चक्कर में पाकिस्तान सरकार देह व्यापार के इस धंधे पर कार्रवाई करने के लिए हरी झंडी नहीं दिखा रही है। इन देह व्यापारियों के ख़िलाफ़ अदालत में मामला दर्ज कराया गया था। कुल 31 चीनी नागरिकों के ख़िलाफ़ सुनवाई चल रही थी। अदालत ने सभी चीनी नागरिकों को बाइज्जत बरी कर दिया। पीड़ित महिलाओं ने बयान देने से इनकार कर दिया, क्योंकि या तो उन्हें प्रलोभन दिया गया था या फिर उन्हें डराया-धमकाया गया। इन महिलाओं को दुल्हन बना कर चीन ले जाया जाता है, लेकिन वहाँ जाकर इनका सामना क्रूर हकीकत से होता है।

2 पीड़ित महिलाओं ने पहचान न उजागर करने की शर्त पर ‘एसोसिएट प्रेस’ को बताया कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वालों के ख़िलाफ़ बयान देने पर उनका बहुत बुरा अंजाम होता, इसीलिए वो हिम्मत नहीं जुटा पाईं। एक ईसाई एक्टिविस्ट ने कई पाकिस्तानी महिलाओं को चीन के लोगों को बेचे जाने के ख़िलाफ़ अभियान चलाया। इस मामले की जाँच कर रहे कई ख़ुफ़िया अधिकारियों का तबादला कर दिया गया और पाकिस्तान की सरकार ने इसके पीछे कोई कारण भी नहीं बताया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। न सिर्फ़ ख़ुफ़िया अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया है, बल्कि मीडिया को भी ह्यूमन ट्रैफिकिंग व इससे जुड़े लोगों के बारे में लिखने से मना कर दिया गया है।
पाकिस्तान के ही अधिकारी मानते हैं कि वहाँ ह्यूमन ट्रैफिकिंग का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है और इस पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। इसके लिए झूठी शादी का सहारा लेकर ग़रीब परिवारों को झाँसा दिया जाता है। अधिकारियों व पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है कि वो ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़े अपराधों की जाँच न करें। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो दोनों देशों के नियमों का पालन करते हुए पाकिस्तान और चीन के बीच होने वाली शादियों का ‘हैप्पी फैमिली फॉर्मेशन’ के अंतर्गत समर्थन करता है। साथ ही मंत्रालय ने जोड़ा कि अवैध शादियों के ख़िलाफ़ चीन ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है।
इससे पहले ख़बर आई थी कि देह-व्यापार के इस धंधे में सबसे ज्यादा पाकिस्तान की ईसाई लड़कियों को शिकार बनाया जा रहा है। ग़रीब ईसाई परिवार की महिलाओं को चीनी नागरिकों के हाथों बेच दिया जाता है और वो उन्हें अपने देश ले जाते हैं। चीनी नागरिक इन ईसाई महिलाओं के साथ शादी करते हैं और चीन ले जाकर उन्हें वेश्यावृत्ति में ढकेल देते हैं। ह्यूमन ट्रैफिकिंग के दलाल चीनी नागरिकों से तो 50 लाख रुपए तक वसूल लेते हैं लेकिन पाकिस्तान परिवारों को इसका मात्र 20-25% ही दिया जाता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के पास 50 से भी अधिक ऐसी महिलाओं की सूची भेजी गई है, जिन्हें चीनियों के हाथों बेच डाला गया। पाकिस्तान को चीन से हर साल मदद के रूप में अरबों रुपए मिल रहे हैं। चीन ने अपने बेल्ट्स एन्ड रोड प्रोजेक्ट में भी पाकिस्तान को साझीदार बनाया हुआ है। वह पाकिस्तान के कई इलाक़ों में विकास कार्य कर रहा है। इन सबको देखते हुए पाकिस्तान अपनी महिलाओं की ख़रीद-बिक्री पर चुप रहना ही बेहतर समझ रहा है।