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इंतजार हुसैन की ‘The Kashmir Files’ की रिलीज रोकने वाली याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने किया ख़ारिज

विवेक अग्निहोत्री निर्देशित ‘The Kashmir Files’ के प्रदर्शन से आखिर मुस्लिमों को क्यों परेशानी हो रही है? जब कश्मीर में हिन्दू कश्मीरियों पर अत्याचार होने के साथ-साथ मस्जिदों का दुरूपयोग हो रहा था, तब ये लोग क्यों चुप थे? आज सच्चाई सामने आने से क्यों डर लग रहा है? तब किसी को सेकुलरिज्म क्यों नहीं याद आया? कौन-कौन इस षड़यंत्र में शामिल थे? इन फाइलों का खुलना बहुत जरुरी है।  
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज पर रोक लगाने की माँग वाली इंतेज़ार हुसैन सैयद द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में कश्मीरी पंडितों पर किए गए अत्याचारों को दिखाया गया है। यह फिल्म 11 मार्च, 2022 को अपने शेड्यूल के अनुसार रिलीज होने के लिए तैयार है।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, जनहित याचिका को खारिज करते हुए, मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की पीठ ने याचिकाकर्ता से केंद्र सरकार से संपर्क करने और उपाय तलाशने को कहा।

मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने याचिकाकर्ता से आगे पूछा कि क्या उन्होंने यह जानने के लिए एक आरटीआई दायर की थी कि क्या सीबीएफसी ने प्रमाण पत्र जारी किया है। इस पर याचिकाकर्ता ने जवाब दिया, “आरटीआई में कम से कम एक महीना लगता है।” अदालत ने टिप्पणी की कि इस सिर्फ इस आधार पर फिल्म पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

इस मामले में उच्च-न्यायालय में ‘जनहित याचिका (PIL)’ दायर की गई थी, जिस पर आज मंगलवार (8 मार्च, 2022) को शाम 4 बजे हुई सुनवाई में ख़ारिज कर दिया गया। बता दे कि मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता के समक्ष इस याचिका को अर्जेन्ट लिस्टिंग के लिए उठाया गया, जिस पर वो सुनवाई के लिए राजी हो गए थे।

इस PIL को उत्तर प्रदेश के रहने वाले इंतज़ार हुसैन सैयद ने दायर किया था। ‘द कश्मीर फाइल्स’ शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को रिलीज होने वाली है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के ट्रेलर में मुस्लिमों को कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करते हुए दिखाया गया है, जो मुस्लिम समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। इंतजार हुसैन सैयद का दावा है कि पूरी फिल्म इस घटनाक्रम के एक ही पक्ष को दिखाती है, जो हिन्दू समाज को आक्रोशित कर के भड़का सकती है।

इस याचिका में फिल्म की रिलीज रोकने के साथ-साथ इसके ट्रेलर को भी YouTube से हटाने की माँग की गई थी। दावा है कि हिन्दुओं के भड़कने के बाद पूरे देश में भारी हिंसा हो सकती है, जिससे जानमाल की बड़ी क्षति होगी। याचिका में ये भी दावा किया गया है कि 5 राज्यों में चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल इस फिल्म का इस्तेमाल सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने इस फिल्म के ट्रेलर को तुरंत सभी सोशल मीडिया साइट्स से हटाए जाने की माँग की।

अवलोकन करें:-

The Kashmir Files : कहीं मुस्लिम सहेली ने ही करवाया गैंगरेप तो कहीं छोटे से बच्चे ने दी इस्लाम के हिसाब से च

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The Kashmir Files : कहीं मुस्लिम सहेली ने ही करवाया गैंगरेप तो कहीं छोटे से बच्चे ने दी इस्लाम के हिसाब से च

‘द कश्मीर फाइल्स’ में जहाँ एक तरफ अनुपम खेर, पुनीत इस्सर और मिथुन चक्रवर्ती जैसे वरिष्ठ अभिनेता हैं, वहीं दर्शन कुमार भी इसका अहम हिस्सा हैं पल्लवी जोशी ने भी फिल्म में एक अहम किरदार निभाया है। इसे 90 के दशक में कश्मीर में हिन्दुओं के नरसंहार के ऊपर बनाया गया है। विवेक अग्निहोत्री को ‘चॉकलेट (2005)’, ‘धन धना धन गोल (2007)’, ‘हेट स्टोरी (2012)’, ‘ज़िद (2014)’, ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जैम (2016)’, ‘जुनूनीयत (2016)’ और ‘द ताशकंद फाइल्स (2019)’ के लिए जाना जाता है।

आप नेता बॉम्बे हाई कोर्ट की वकील निकिता जैकब भी भारत के खिलाफ साजिश में फँसी

                                                              निकिता जैकब / ग्रेटा
दिल्ली पुलिस ने भारत विरोधी अभियानों की साजिश रचने के लिए उच्च न्यायालय की वकील निकिता जैकब के खिलाफ 4 फरवरी को शिकायत दर्ज की है। दरअसल, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) ने दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज करते हुए राजद्रोह के आरोपों के तहत एफआईआर की माँग की है।

एलआरओ ने एक ट्वीट करते हुए बताया, “भारतीय संसद से पारित कृषि कानून के खिलाफ अभियान चलाने के लिए विदेशी हस्तियों द्वारा अभियान को व्यवस्थित करने के लिए @DelhiPolice के पास @AamAadmiParty की नेता मुंबई HC की वकील निकिता जैकब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत एफआईआर माँग की गई है।”

अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा के नक्शेकदम पर चलते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान विरोध के समर्थन में ट्वीट किया था। जिसके बाद उसने एक ‘टूलकिट‘ को लेकर भी ट्वीट किया, जिसमें उसने बताया कि किसान समर्थन में रुचि रखने वाले लोग इसका उपयोग कर सकते हैं।” हालाँकि, यह टूलकिट सिर्फ एक रिसोर्स फ़ाइल नहीं थी, बल्कि यह एक खतरनाक दस्तावेज था, जिसमें देखा गया कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत विरोधी ताकतें भारत के लोकतंत्र में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर सबके सामने इस धमाकेदार ट्वीट के खुलासे के तुरंत बाद ग्रेटा ने दस्तावेज़ को डिलीट कर दिया और इससे जुड़े सभी दस्तावेजों को या तो प्राइवेट बना दिया गया या उसे ट्रांसफर या पूरी तरह खत्म कर दिया गया। लेकिन जब तक वह ऐसा करती उससे पहले सोशल मीडिया यूज़र्स बहुत सारी सामग्री डाउनलोड, सॉर्ट और उसे काफी लोगों तक वायरल कर चुके थे।

कैसे हुआ निकिता जैकब का पर्दाफाश

दस्तावेजों की जाँच करते समय यह पता चला कि निकिता जैकब कथित रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने से पहले दस्तावेजों की एडिटिंग कर रही थी। यहाँ हम आपको गूगल दस्तावेज़ों की एडिट हिस्ट्री के कुछ स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं, जिनका उपयोग सोशल मीडिया पर भारत विरोधी आंदोलन को व्यवस्थित रूप से करने के लिए किया जा रहा था।
बेनकाब होने के बाद जैकब ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया

कौन है निकिता जैकब

ट्विटर पर डिलीट किए गए प्रोफाइल के अनुसार बॉम्बे हाई कोर्ट की वकील निकिता जैकब पर्यावरणविद और कथिततौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई हैं। ट्विटर यूजर विजय पटेल के अनुसार, वह “सॉलिडैरिटी विद इंडियन फार्मर्स” नाम के दस्तावेज़ की ओनर थी, जिसे 30 जनवरी, 2020 को क्रिएट किया गया था। वह न्यूज़ इन्फ़्यूज़ नाम से इंस्टाग्राम पर एक प्रोपेगैंडा अकाउंट भी चलाती है।
वहीं इंस्टाग्राम पर भी उसने अब अपने एकाउंट और न्यूज़ इन्फ्यूज़ अकाउंट को प्राइवेट कर दिया है।
इसके अलावा डॉक्यूमेंट में एक और यूजर मरीना पत्तरसन का भी नाम शामिल था, जिसे बार-बार एडिट करते हुए देखा गया था। उसने भी अपना ट्विटर एकाउंट डिलीट कर दिया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट को मानव तस्करी की आशंका : 2017 से अब तक 279 लोग शिरडी से लापता

कांग्रेस और एनसीपी की बैसाखियों पर चल रही महाराष्ट्र में शिव सेना की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार पर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्मयी मृत्यु से सरकार और बॉलीवुड पर छाए संकट के बादलों में जनहित भावना लुप्त होती नज़र आ रही है। काफी समय से लॉक डाउन के पूर्व से ही शिरडी के दर्शनार्थियों के गायब होने का समाचार सुर्ख़ियों में है, लेकिन सुशांत और बॉलीवुड में ड्रग माफिया के उजागर होने और किसी बड़े नेता के पुत्र, जिसे छोटे पेंगुइन के नाम से सम्बोधित किया जा रहा है, को बचाने और चर्चा यह भी है कि रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी पर कसते शिकंजे की असली वजह सोनिया गाँधी को अंटोनिओ के नाम से सम्बोधित किये जाना ही मुख्य कारण होने की वजह से शिरडी से गायब होते लोगों की लेशमात्र भी चिंता नहीं। काश, स्थिति विपरीत होती, क्या तब भी उद्धव चुपचाप बैठे होते?

दूसरे, रोज हज़ारों की संख्या में शिरडी आने वाले लोगों से महाराष्ट्र को पर्यटन से आय होने के साथ-साथ हज़ारों को रोजगार भी मिल रहा है। यदि शिरडी से लोगों के गायब होने का सिलसिला जारी रहने से महाराष्ट्र सरकार को कितना नुकसान होगा, क्या उद्धव ने कभी चिंता की? काश ! अपने पुत्र की इस सत्ता लोलुपता की मनोदशा को देखने के लिए बालासाहब जीवित होते।  

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मानव तस्करी की आशंका व्यक्त करना महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है। और निश्चित रूप से गंभीरता और निष्पक्ष जाँच ही इस आशंका को दूर पायेगी कि इस घिनौने खेल में कौन-कौन शामिल हैं? क्योंकि किसी राजनीतिक संरक्षण के बिना मानव तस्करी असंभव है।   
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र के शिरडी शहर से पिछले कुछ सालों से गायब हो रहे लोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस को मामले में संज्ञान लेने का निर्देश दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महसूस किया कि लापता हो रहे लोगों का पता लगाने में महाराष्ट्र पुलिस का प्रयास काफी असंतोषजनक रहा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (DGP) से इस मुद्दे पर गौर करने और सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। उच्च न्यायालय ने डीजीपी से, गुमशुदगी के पीछे (मानव) तस्करी या अंग तस्करी रैकेट की संभावना की जाँच करने और इस पर से पर्दा हटाने का आदेश भी दिया है। 

शिरडी पुलिस द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट को सौंपे गए आँकड़ों के अनुसार 2017 से 27 अक्टूबर, 2020 के बीच अहमदनगर के शिरडी से लगभग 279 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें से 67 लापता लोगों को अभी तक ट्रेस नहीं किया जा सका हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने पाया कि 2017 में शिरडी से 20 लोग लापता हो गए थे, जिनका अभी पता नहीं चल पाया है। वहीं इस साल मार्च में हुए लॉकडाउन से पहले 20 अन्य लोगों के लापता होने की सूचना है।

इंदौर निवासी मनोज सोनी द्वारा कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। मनोज 10 अगस्त, 2017 को अपने परिवार के साथ साईंबाबा मंदिर में दर्शन करने के लिए शिरडी आए थे। उनकी 35 वर्षीय पत्नी दीप्ति एक शाम मंदिर में दर्शन करने के बाद गायब हो गई थी, जिनका अभी तक पता नहीं लग पाया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुघे और न्यायमूर्ति बीयू देबदवार की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर को अहमदनगर के एसपी को दीप्ति मामले में पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर अदालत को एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था।

इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा मानव तस्करी करने वाले गिरोहों की संलिप्तता पर संदेह किया जा रहा है।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आँकड़ों में कहा गया है कि 2017 में शिरडी से लापता 71 लोगों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जिनमें से 51 लोग वापस मिल गए थे जबकि दीप्ति सहित 20 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं 2018 में गुम हुए 82 व्यक्तियों में से 13 का पता अभी तक नहीं चल पाया है और 2019 में लापता हुए 88 में से 14 के लापता होने की सूचना है। इस साल 2020 में 38 लोग लापता हुए, जिनमें केवल 18 लोगों का ही पता चला है।

मानव-तस्करी के मद्देनजर अदालत को जवाब देते हुए अभियोजक ने अदालत से कहा कि, शिरडी पुलिस को अभी तक किसी भी मानव तस्करी या अंग तस्करी समूह का लिंक इस मामले में नहीं मिला है। जिसके लिए लोगों का अपहरण या उन्हें गायब किया जा रहा है।

न्यायाधीशों ने कहा कि 26 अक्टूबर को अदालत के आदेश के बाद पुलिस को गहरी नींद से उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इंसान झूठ बोल सकता है लेकिन दस्तावेज झूठ नहीं बोलेंगे। 22 नवंबर, 2019 को कोर्ट के आदेश के अनुसार, शिरडी पुलिस द्वारा जाँच के लिए गठित विशेष यूनिट का इस मामले में किया गया प्रयास संतोषजनक नहीं है।

अदालत ने आगे कहा, “हम आश्वस्त हैं कि शिरडी पुलिस स्टेशन ने शायद ही कोई प्रयास किया हो। और यह इस तरफ इशारा किया कि अहमदनगर पुलिस विभाग के प्रमुख भी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं।”

बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि वह 24 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में डीजीपी के जवाब का इंतजार करेगी।

शिरडी में एक-एक कर गायब हो रहे लोग!

Image result for shirdi sai babaप्रतिदिन हज़ारों की संख्या में शिरडी दर्शनार्थ जाते हैं, लेकिन उनके विश्वास को ठेस पहुँचाने, दर्शनार्थियों के कथित रूप से गायब होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक साल में अब तक 88 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं। यदि ये गायब होने का सिलसिला नहीं रुका, वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब शिरडी दर्शन करने वालों का अभाव हो जाएगा और लोगों की आस्था भी समाप्त होने लगेगी। 
प्राप्त समाचारों के अनुसार, इस मामले में अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गुमशुदगी के पीछे मानव तस्करी या अंग रैकेट के जांच के आदेश जारी किए हैं बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के जज टीवी नवाडे और एसएम गवान्हे की पीठ ने ये टिप्पणी मनोज कुमार नामक शख्स की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की बता दें कि मनोज की पत्नी 2017 में शिरडी से लापता हुई थींइसके बाद से मनोज ने पत्नी को ढूढ़ने की काफी कोशिश की, लेकिन उनका पता तक नहीं चला
औरंगाबाद कोर्ट ने कहा पिछले एक साल में शिरडी से 88 से अधिक लोग कथित रूप से लापता हुए हैंइनमें से ज्यादातर वो लोग हैं जो मंदिर में दर्शन करने के लिए शिरडी पहुंचे थे पीठ ने कहा कि गायब लोगों में कुछ का पता चला है, लेकिन कुछ का अभी तक पता नहीं चल सका है जो लोग अभी भी लापता हैं उनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं कोर्ट ने कहा जब कोई गरीब व्यक्ति गायब होता है तो उसके रिश्तेदार असहाय हो जाते हैं ज्यादातार लोग पुलिस के पास तक नहीं पहुंच पाते हैं और बमुश्किल से ऐसे मामले अदालत तक पहुंच पाते हैं
कोर्ट ने कहा, अभी तक के पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 88 से अधिक लोग गायब हैं कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं के पीछे मानव तस्करी और अंगों का रैकेट हो सकता है अदालत ने इस तरह सकी संभावनाओं को देखते हुए अमहदनगर के पुलिस अधीक्षक को जांच के लिए विशेष इकाई गठित करने के आदेश दिए हैं गौरतलब है कि शिरडी महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है यहां स्थित साईं मंदिर में देश-दुनिया के भक्त दर्शन के लिए आते हैं