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‘OTT पर गे और लेस्बियन कंटेंट की भरमार, चला गया स्वच्छ मनोरंजन का जमाना’

OTT पर समलैंगिक कंटेंट पर अमीषा पटेल का (दाएँ) निशाना, उर्फी जावेद (बाएँ) बिफरीं
OTT और बॉलीवुड कंटेंट को लेकर अभिनेत्री अमीषा पटेल और मॉडल उर्फी जावेद के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। ‘ग़दर 2’ की अभिनेत्री ने कहा था कि OTT प्लेटफॉर्म्स गे और लेस्बियन कंटेंट्स से भरे पड़े हैं। अब उर्फी जावेद ने कहा है कि वो अमीषा पटेल के इस बयान से क्षुब्ध हैं। उर्फी जावेद ने शनिवार (8 जुलाई, 2023) को इंस्टाग्राम स्टोरीज के माध्यम से कहा कि पूछा कि ये Gayism और Lesbianism क्या होता है? उन्होंने पूछा कि क्या अपने बच्चों को इससे दूर रखना है?

उर्फी जावेद ने कहा कि जब अमीषा पटेल ने ‘कहो न प्यार है’ फिल्म किया, तो क्या उनका मतलब सिर्फ ‘स्ट्रेट’ लोगों से था? उर्फी जावेद ने लिखा कि जब सार्वजनिक हस्तियाँ बिना खुद को शिक्षित किए संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह के बयान देती हैं तो उन्हें खासी परेशानी होती है। उर्फी जावेद ने व्यक्तिगत निशाना साधते हुए कहा कि अमीषा पटेल को 25 वर्षों से काम नहीं मिल रहा है, जिस कारण वो एक कड़वी व्यक्ति बन गई हैं। उर्फी जावेद ने अमीषा पटेल का वीडियो शेयर करते हुए ये टिप्पणी की।

47 वर्षीय अमीषा पटेल ने कहा था कि लोग ‘क्लीन एंटरटेनमेंट’ की तलाश में हैं। उनका कहना था कि ऐसे कंटेंट डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि OTT के सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स पर जो कंटेंट हैं उनमें समलैंगिक दृश्यों की भरमार है। उन्होंने कहा था कि अब वो जमाना चला गया, जब दादा-दादी अपने पोते-पोतियों के साथ बैठ कर सिनेमा देख सकते थे। OTT के दृश्यों के दौरान बच्चों को दूर रखना पड़ता है।

अमीषा पटेल ने कहा कि आजकल के कंटेंट्स ऐसे हैं कि आपको या तो अपने बच्चों की आँखों को कवर करना पड़ता है या फिर टीवी में लॉक लगाना पड़ता है। आजकल ऐसे कंटेंट आ रहे हैं कि आप नहीं चाहेंगे कि आपके बच्चे इसे देखें। हाल ही में अमीषा पटेल ने ‘ग़दर 2’ के निर्देशक अनिल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी कंपनी ने अभिनेता-अभिनेत्रियों का ख्याल नहीं रखा, Zee के हस्तक्षेप के बाद सबको पैसे मिले। हालाँकि, अनिल शर्मा ने अब मनमुटाव से इनकार किया है।


राजस्थान : नाबालिग हिंदू छात्रा और मुस्लिम महिला टीचर की कहानी में नया मोड़, कहा- हम लेस्बियन, किसी लड़के से शादी नहीं कर सकते

प्रतीकात्मक फोटो, साभारः leonardo.ai
राजस्थान के बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ से 30 जून 2023 को एक नाबालिग हिंदू छात्रा अचानक गायब हो गई। स्कूल की एक मुस्लिम महिला टीचर पर उसके अपहरण का आरोप लगा। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव फैल गया है। अब छात्रा और टीचर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दोनों ने खुद को एक-दूसरे के प्यार में बताया है। लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा है कि वे एक-दूसरे के बिना जिंदा नहीं रह सकतीं।

जारी किए गए वीडियो में छात्रा और टीचर निदा वहलीम के चेहरे पर मास्क है। वीडियो की शुरुआत में छात्रा ने कहा कि उसे अपने लापता होने के बाद दंगों की जानकारी मिली है। अगर लोगों को लग रहा है कि टीचर ने उसका अपहरण किया है तो ये गलत है। हम अपनी मर्जी से एक साथ आए हैं। इसके बाद निदा वहलीम अल्लाह की कसम खाते हुए कह रही है कि वह लड़की को बहला-फुसला कर नहीं लाई है।

दोनों ने वीडियो कहाँ से बनाया इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है। पीछे से किसी बच्चे के रोने की आवाज भी सुनाई दे रही है। वीडियो में दोनों ने आगे अपने-अपने परिजनों से उन्हें परेशान करने के लिए माफ़ी माँगी है। खुद को लेस्बियन बताते हुए कहा है कि वे किसी लड़के से शादी नहीं कर सकतीं। एक-दूसरे से बहुत प्यार करती हैं। लोगों से दोनों ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ देने की अपील की है।

वीडियो में टीचर निदा वहलीम ने कहा है कि वे मर जाएँगी पर छात्रा से अलग नहीं रह पाएँगी। खुद को पूरी तरह से सुरक्षित और एक-दूसरे के साथ खुश बताया है। वीडियो के अंत में छात्रा ने अपने परिजनों से अपील की है कि वो टीचर निदा वहलीम पर कोई केस न करें क्योंकि ऐसा उसने अपनी मर्जी से किया है। हालाँकि बीकानेर की SP तेजस्विनी गौतम ने दैनिक भास्कर को छात्रा के नाबालिग होने और FIR पर जाँच जारी होने की जानकारी दी है। इस घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। विरोध में बाजार बंद रहा और मामले को लव जिहाद बता कर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

30 जून को निदा वहलीम नाम की एक 25 वर्षीया मुस्लिम टीचर पर 17 वर्षीया हिन्दू छात्रा को अपने साथ ले कर भागने का आरोप लगा था। छात्रा के परिजनों ने इसी केस में निदा के 2 भाइयों जुनैद और नावेद को भी नामजद किया था। निदा वहलीम की पिछले 2 माह से नाबालिग छात्रा से काफी करीबी होने की बात सामने आई थी।

फेवरिट सेक्स पोजिशन, मर्दानगी वाला व्यायाम… गे-लेस्बियन पोर्न: ईसाई ‘कन्वर्जन सेंटर में इलाज के नाम पर गोरखधंधा

वास्तव में समय बहुत बलवान होता है, एक समय था, जब मीडिया किसी हिन्दू संत अथवा संगठन द्वारा असामाजिक काम के करने पर समस्त हिन्दू समाज को लज्जित करने से पीछे नहीं रहते थे, परन्तु वही दुष्कर्म किसी दूसरे धर्मों में होने पर चुप्पी साधे रहते थे। मीडिया की इस नीति में अब कुछ अंतर दिखने लगा है। जबकि मुख्यधारा का मीडिया अभी भी अपनी TRP के मकड़जाल में फंसा हुआ है। 
केरल में ईसाई मिशनरियों द्वारा LGBTQI कन्वर्जन थेरेपी संस्थान (कन्वर्जन सेंटर्स) चलाए जा रहे हैं। इसके तहत एलेक्स (बदला हुआ नाम) नामक एक व्यक्ति को आईना दिया गया और ये कहने को कहा गया, “मैं पापी हूँ। मैं समलैंगिक हूँ। मैं कभी स्वर्ग नहीं जा सकता। जीसस क्राइस्ट मुझसे घृणा करते हैं। मुझे खुद को बदलना होगा।” अदिचिरा स्थित विन्सेंटियन कॉन्ग्रिगेशन द्वारा संचालित परित्राणा रीट्रीट सेंटर में अलेक्स सहित 30 लोग भर्ती थे। ये जगह केरल में कोट्टायम-एट्टुमन्नूर हाइवे पर स्थित है।

इस सेंटर की स्थापना 1990 में हुई थी। ‘द न्यूज़ मिनट’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, अलेक्स को जब पता चला कि वो समलैंगिक है तो उसने खुद को ‘ठीक करने के लिए’ इस रिट्रीट सेंटर से संपर्क किया, जहाँ उसे 21 दिन के कोर्स में पंजीकृत किया गया। उसे एक बाइबिल, सफ़ेद कपड़े और एक नोटबुक दिया गया। रिट्रीट सेंटर से काफी दूर एकांत में ‘गे कन्वर्जन सेंटर’ स्थित है। 25000 रुपए जमा कराने और एक कंसेंट फॉर्म भरने के बाद वहाँ भेजा जाता है।

वहाँ 18 से 27 वर्ष की उम्र के कई पुरुष एवं महिलाएँ थीं। उन्हें एक-दूसरे से बातचीत की अनुमति नहीं थी और खाली समय में होली मेरी (Holy Mary) की तस्वीर के सामने प्रार्थना करने को कहा जाता था।

वहाँ सेशन लेने वाले पादरी खुद को साइकेट्रिस्ट और साइकोलॉजिस्ट बताते थे। उन सबका दावा था कि वो पहले ‘Gay’ थे, लेकिन अब जीसस की राह पर चल कर ‘ठीक हो गए’ हैं। सभी को सुबह में ‘मर्दानगी बढ़ाने’ वाला व्यायाम कराया जाता था।

फिर प्राइवेट काउंसलिंग सेशंस होते थे, जहाँ उनसे उनकी यौन इच्छाओं और पसंदीदा सेक्स पॉजिशंस के बारे में सवाल पूछे जाते थे। साथ ही उन्हें लेस्बियन पोर्न देखने को कहा जाता था। जबकि लेस्बियनों को गे पोर्न देखने का निर्देश दिया जाता था। अलेक्स का कहना है कि इन सबके बावजूद वो और उसके साथ भर्ती अन्य लोग ‘ठीक नहीं’ हो पाए और सभी गहरी मानसिक प्रताड़ना और दबाव से गुजरे।

उनमें से कोई अपने माता-पिता की हत्या में जेल चला गया, कुछ घर से भाग निकले, कुछ ने आत्महत्या की तो कुछ ने इसी तरह जीवन बिताने की सोची। इसी तरह एक अन्य ट्रांस ईसाई महिला भी इस ‘थेरेपी’ से गुजरीं। उक्त महिला को तिरुवनंतपुरम के एक ऐसे ही सेंटर में भर्ती कराया गया था। उक्त संस्था की वेबसाइट दावा करती है कि उन्हें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से फंड्स मिलते हैं।

महिला ने बताया कि सेंटर में भर्ती लोगों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें चारों तरफ से 4 मीटर ऊँची दीवारों के बीच रखा जाता है। 4 पुरुष कर्मचारियों ने उक्त महिला के हाथ-पाँव बाँध कर जबरन बेहोश कर दिया। अर्ध-बेहोशी की अवस्था में उसे कई इंजेक्शंस दिए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ‘कन्वर्जन थेरेपी’ अवैध है। लेकिन, लोगों को इन सेंटरों में अजीबोगरीब पलों से गुजरना पड़ता है।