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कश्मीर : स्कूल-कॉलेज, मोबाइल, इंटरनेट और टीवी बंद; धारा 144 लागू

Image result for omar abdullah-महबूबा मुफ़्तीजम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी हमले की आशंका के बाद सरकार की एडवाइजरी के बाद हालात तनावपूर्ण हैं. रविवार(अगस्त 4) रात को श्रीनगर समेत कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर प्रत‍िबंध लगा दिया गया। श्रीनगर में धारा 144 लागू कर दी गई है उमर अब्‍दुल्‍ला और महबूबा मुफ्ती ने दावा किया कि उन्‍हें उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया है
इस बीच खबर है कि श्रीनगर में केबल टीवी बंद कर दिया गया है किसी भी नेता को रैली की इजाजत नहीं हैनेताओं पर सख्‍ती के सवाल पर गृह मंत्रालय ने कहा है कि ये सब सुरक्षा के मद्देनजर किया गया हैहालांकि क‍िसी भी नेता को हाउस अरेस्‍ट नहीं किया गया है इस बीच जम्‍मू में सभी स्‍कूल और कॉलेज के साथ साथ कुछ ऑफ‍िसों में भी सुरक्षा की दृष्‍ट‍ि से छुट्टी कर दी गई है कश्‍मीर में सोमवार(अगस्त 5) को होने वाली सभी स्‍कूल कॉलेज की परीक्षाएं आगे बढ़ा दी गई हैं 
Sushma Chauhan, Deputy Commissioner, Jammu: All schools, colleges, and academic institutions, both private and government, are advised to remain closed as a measure of caution.

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इससे पहले र‍वि‍वार(अगस्त 4) शाम को श्रीनगर में एक सर्वदलीय बैठक हुई इसमें घाटी के सभी दलों (बीजेपी, कांग्रेस) ने हिस्‍सा लिया इस बैठक के बाद फारुख अब्‍दुल्‍ला ने कहा, घाटी में लोग डरे हुए हैंउन्‍होंने कहा-केंद्र सरकार ऐसा कोई काम न करे, जिससे यहां तनाव भड़के
जम्‍मू कश्‍मीर के ताजा हालात पर राज्‍यपाल सत्‍यपाल‍ मलिक ने आपात बैठक भी बुलाईइसमें राज्‍य के तमाम आला अधिकारियों ने हिस्‍सा लिया जम्‍मू कश्‍मीर के अलावा दूसरे जिलों में भी स्‍कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. जम्‍मू इलाके में सुरक्षाबलों की 40 कंपन‍ियां तैनात की गई है
You are not alone @OmarAbdullah. Every Indian democrat will stand with the decent mainstream leaders in Kashmir as you face up to whatever the government has in store for our country. Parliament is still in session & our voices will not be stilled. @INCIndia https://twitter.com/omarabdullah/status/1158075327333031941 
12:07 AM - Aug 5, 2019
शश‍ि थरूर ने कश्‍मीरी नेताओं के समर्थन में किया ट्वीट
कश्‍मीर में इस समय क्‍या हो रहा है. कश्‍मीर में आधी रात को नेताओं को क्‍यों अरेस्‍ट किया जा रहा हैअगर कश्‍मीरी हमारे नागरि‍क हैं तो वहां के नेता हमारे साझीदार हैं। कश्‍मीर के सियासी नेताओं के साथ आज खड़ा होने का वक्‍त है उमर अब्‍दुल्‍ला आप अकेले नहीं हैभारत का हर वह नागरिक जो लोकतंत्र भरोसा करता है आपके साथ है

इधर घाटी में तनावपूर्ण हालात के बीच सोमवार(अगस्त 5) को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक राजधानी दिल्‍ली में होगी ये बैठक सुबह 9.30 बजे से संभव है इस बैठक में जम्‍मू-कश्‍मीर के हालात पर भी चर्चा हो सकती है सूत्रों के अनुसार, संसद सत्र के समापन के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कश्‍मीर के दौरे पर जा सकते हैं इधर घाटी में राजनीतिक दलों का कहना है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में अतिरिक्‍त सेन्‍य बलों की तैनाती से यहां पर डर का माहौल बना हुआ है
अम‍ित शाह ने अज‍ित डाेभाल के साथ बैठक की
इससे पहले रविवार(अगस्त 4) को केंद्रीय गृहमंत्री ने जम्मू एवं कश्मीर में बढ़ते तनाव के बीच एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की राज्य में भारी संख्या में की गई सुरक्षाबलों की तैनाती ने आशंकाओं और तनावों को जन्म दिया है बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, गृह सचिव राजीव गौबा, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख अरविंद कुमार, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया

अतरिक्त सचिव (जम्मू एवं कश्मीर डिवीजन) ज्ञानेश कुमार ने अलग से कश्मीर घाटी की स्थिति के बारे में गृहमंत्री को विस्तार से अवगत कराया सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने आतंरिक सुरक्षा और जम्मू एवं कश्मीर के हालातों पर चर्चा की, जहां आतंकवादी हमलों की आशंका के बाद अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है
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सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि सभी पयर्टक और तीर्थयात्री यथासंभव जल्द से जल्द राज्य छोड़ दें सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा अमरनाथ यात्रा पर हमला किए जाने की साजिश की सूचना मिलने और इन आतंकी हमलों से निपटने की तैयारी के बारे में शाह ने बैठक में चर्चा की

महबूबा ने फिर दी धमकी- अगर कुछ हुआ तो नतीजे होंगे बहुत खतरनाक, मुल्क आएगा चपेट में

Mehbooba Muftiजम्मू कश्मीर में जारी हलचल के बीच राजनीतिक कयासबाजी का दौर भी जारी है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राज्य के मौजूदा हालत को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कश्मीर में इस समय घबराहट का माहौल है। महबूबा ने सरकार को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि धारा 370 और 35 ए से किसी भी तरह की छेड़खानी करने का मतलब होगा कि इसके नतायज भयावह होंगे।
महबूबा ने कहा, 'होटलों को किसी भी राजनीतिक बैठकें आयोजित करने से मना किया गया है।  इसलिए आज(अगस्त 4) शाम में 6 बजे मेरे आवास पर बैठक होगी। इस समय यहां हालात बहुत खराब है।  हमने इस देश के लोगों को समझाने का प्रयास किया था कि अगर 35A या 370 से छेड़छाड़ करेंगे तो इसके परिणाम होंगे। हमने अपील भी की है, लेकिन केंद्र की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला है। वो ये भी नहीं कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। वे ये भी नहीं कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक हो जाएगा।' 
हमें परेशान किया जा रहा है

महबूबा ने कहा, 'उन्होंने (सरकार) अलगाववादियों के साथ जो करना था वो किया। अब वे मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के खिलाफ उसी रणनीति का उपयोग कर रहे हैं। जब उन्हें एक सर्वदलीय बैठक का संकेत मिला, तो फारूक साहब को चंडीगढ़ ले जाया गया। वे राजनीतिक दलों के खिलाफ भ्रष्टाचार का इस्तेमाल कर रहे है। हमारे कई कार्यकर्ताओं को भी परेशान किया जा रहा है।'
नतीजे होंगे खतरनाक
पीडीपी प्रमुख ने आगे कहा, 'अगर आप 35 ए या 370 के खिलाफ छेड़छाड़ करने की कोशिश करेंगे तो उसके नतीजे बहुत खतरनाक होंगे और पूरा मुल्क इसकी चपेट में आएगा। हमने अपील भी की मिन्नतें भी की लेकिन सरकार की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है। यहां तक कि हमारी शिकायतों को नजरदांज किया जा रहा है। इस समय कश्मीर के लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि जो भी शांति पसंद लोगों को एकत्र होना होगा

पीएम मोदी पर निशाना
इतना नही महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ट्वीट भी किया। उन्होंने कहा, 'यात्रियों, पर्यटकों,  मजदूरों, क्रिकेटरों और छात्रों को कश्मीर से जाने को कहा गया है, कश्मीरियों को राहत देने की कोशिश नहीं की जा रही है।  कहां गई इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत?'

इस बीच रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक की। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस बैठक में जम्मू कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
संसद भवन में अमित शाह ने डोवाल और गृह सचिव के साथ की हाई लेवल मीटिंग 
जम्मू कश्मीर में मौजूदा राजनीतिक हालातों के बीच संसद भवन परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक हाई लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा सहित गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब जम्मू कश्मीर को लेकर जारी अलर्ट के बीच तमाम तरह की अटकलें लगनी जारी हैं। समझा जाता है कि बैठक में जम्मू कश्मीर के हालात पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक में वास्तव में क्या चर्चा हुई, इस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है।
वहीं अगस्त 5 की सुबह प्रधानमंत्री आवास पर एक बैठी कैबिनेट बैठक होने जा रही है। यह बैठक सुबह 9.30 बजे होगी। कश्मीर में मौजूदा हालातों के बाद कई तरह की अफवाहें फैली हैं लेकिन राज्य प्रशासन ने किसी भी तरह की अफवाहों का खंडन किया है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि संवैधानिक प्रावधानों में किसी तरह के बदलाव के बारे में राज्य को कोई जानकारी नहीं है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि अनुच्छेद 35-ए, अनुच्छेद 370 तथा राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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जम्मू-कश्मीर के केरन के सेक्टर में अगस्त 3 को पाकिस्तानी की बॉर्डर एक्शन टीम यानी BAT की ओर से की जा रही घुसपैठ की साजि....

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने कश्मीर में जो इंतजाम किए हैं उन पर न्यूज चैनलों पर लगाता...

सेना ने विफल की पाकिस्तान की साजिश
सेना ने जम्मू कश्मीर के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास अग्रिम चौकी पर पाकिस्तान की आपको बता दें कि भारतीय सेना ने शनिवार को पाकिसतान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के एक हमले को विफल कर दिया। इस दौरान कम से कम पांच से सात पाक बैट कमांडो/घुसपैठिये मारे गये हैं।  पाकिस्तान  घाटी में शांति को भंग करने और अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने के लगातार प्रयास कर रहा है जिस वजह से अमरनाथ यात्रा रद्द कर दी गई है और पर्यटकों को घाटी छोड़ने को कहा गया है।
ब्रिटेन में अपने नागरिकों से कश्मीर जाने से सतर्क रहने का कहा
सुरक्षा कारणों और जम्मू कश्मीर प्रशासन के परामर्श के बाद सैलानी और अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालु को कश्मीर घाटी से लौटने लगे हैं।  कश्मीर के मौजूदा हालातों के बीच ब्रिटेन की सरकार ने जम्मू कश्मीर की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए शनिवार को नया यात्रा परामर्श जारी किया।

कश्मीर में सुरक्षा के खतरे के मद्देनजर मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए नागरिकों से सतर्कता बरतने और ताजा घटनाओं से वाकिफ रहने को कहा गया है। पिछले चार दिनों के भीतर जम्मू-कश्मीर के शोपियां और बारामूला जिलों में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के एक कमांडर समेत चार आतंकी मारे गए हैं।

धारा-370 और 35 A के हटने से बेचैनी क्यों?

कश्मीर में सुरक्षा इंतजामों को लेकर न्यूज चैनलों पर बहस क्यों?
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने कश्मीर में जो इंतजाम किए हैं उन पर न्यूज चैनलों पर लगातार बहस हो रही है।

इन चर्चाओं में आतंकियों के समर्थक भी भाग ले रहे हैं जो हमारे सुरक्षा बलों की तैनाती पर एतराज कर रहे हैं। ऐसी चर्चाओं से आतंकियों के समर्थकों को सरकार के खिलाफ जहर उगलने का अवसर मिल रहा है। सब जानते हैं कि कश्मीर में पाकिस्तान की दखलंदाजी है। हाल ही में जो घातक हथियार बरामद किए है उनसे पता चलता है कि आतंकी बड़ी कार्यवाही करने वाले हैं। ऐसे में यदि सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं तो एतराज क्यों? क्या विदेशी आतंकियों से कश्मीर को बचाने का हक सरकार और सुरक्षा बलों को नहीं है? यदि इन सुरक्षा इंतजाम पर भी चैनलों पर बहस होगी तो किसी सरकार का काम करना मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी आतंक से ग्रस्त कश्मीर के सुरक्षा इंतजाम गुप्त ही रहने चाहिए। सरकार कितने सुरक्षा बल तैनात कर रही है इससे कोई सरोकार नहीं होना चाहिए। न्यूज चैनल वालों को कम से कम कश्मीर से लाइव प्रसारण नहीं करना चाहिए।
महबूबा की घबराहट:
कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती इन दिनों कुछ ज्यादा ही घबराई हुई हैं। दो अगस्त को भी अलगाववादी नेता सज्जाद लोन को साथ लेकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की। यह वो ही महबूबा है जिन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 और 35-ए के साथ छेड़छाड़ की गई तो कश्मीर में तिरंग को कांधा देने वाला कोई नहीं मिलेगा। सवाल उठता है कि महबूबा की वो दबंगता कहां गई? अब अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती से ही महबूबा इतनी घबराह गई हैं? असल में अब महबूबा जैसे नेताओं की दुकान कश्मीर से उखड़ चुकी है। महबूबा हों या फारुख अब्दुल्ला। ऐसे नेताओं की पोल कश्मीर के लोगों के सामने खुल चुकी है। रोज रोज के आतंक से कश्मीर के आम लोग भी परेशान हो गए हैं। कश्मीर के लोग अब अमन और सुकून चाहते हैं। विदेशी पैसा बंद हो जाने से पत्थरबाज भी खामोश है।

अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती याद करों हिन्दुओं के पलायन और उनकी माँ-बहनों के होते बलात्कार का दर्द 
कश्मीर में ऐसा डर का माहौल मैने पहले कभी नही देखा ..कहना है पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का..
30-31 साल की उम्र रही होगी महबूबा मुफ्ती की
जब 1989/90 में घाटी की सभी मस्जिदों से मूल निवासी हिन्दुओं को कश्मीर छोड़कर जाने के ऐलान हो रहे थे।
किसके कहने पर मस्जिदों से ऐलान हो रहे थे? कौन करवा रहा था, मस्जिदों से ऐलान? किसके इशारे पर मस्जिदों का दुरूपयोग हो रहा था? 
जब रातोंरात हिन्दुओं के घरों पर क्रास के निशान लगा दिए गये थे । 
जब हिन्दुओं को अपनी जवान बेटियाँ वहीं छोड़कर जाने के फरमान सुनाये गये थे।   
मैडम मेहबूबा जी ... 30 साल की उम्र इतनी कम नही होती की आज 60 की उम्र में आपको याद भी नही कि किस डर के माहौल में हिन्दुओं ने अपना घर छोड़ा होगा या अपनो का कत्लोग़ारत होते या अपनी आँखों के सामने अपनी माँ और बहनों का बलात्कार होते देखा होगा ! ! ये खौफ का नंगा नाच आपकी उस कश्मीरियत ने ही किया था जिसे बचाने की दुहाई देते हुए आप हाथ जोड़ रहीं हैं।  
हो सकता है उस समय आप अपनी बहन का फर्जी अपहरण करवाकर.. भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री रहे अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद के साथ मिलकर अपने खास आतंकवादियों को छुड़वाने के ड्रामे में व्यस्त हो इसलिये आपको घाटी के हिन्दुओं का खौफ नही दिखा होगा। कंधार विमान अपहरण में तो निर्दोषों को बचाने सभी पार्टियों के समर्थन उपरांत आतंकवादियों को छोड़ा गया था, जिसका आज तक समस्त भाजपा विरोधी रोना-रोते हैं, लेकिन डॉ रुबैया मुफ़्ती के फर्जी अपहरण के कारण छोड़े गए आतंकवादियों पर सब चुप्पी साधे हुए हैं। 
आज इन्हीं पीड़ित परिवारों को अब्दुल्ला खानदान और महबूबा मुफ्ती के चेहरे पर पसरा खौफ उतना ही आकर्षक लग रहा है जितनी आकर्षक मोदीजी की कुटिल मुस्कान लगती है।  
2 अगस्त को जम्मू कश्मीर सरकार ने अमरनाथ यात्रियों और कश्मीर घूमने आए पर्यटकों को कश्मीर छोडऩे का फरमान जारी किया तो तनाव पूर्ण हालात हो गए लेकिन तीन अगस्त को घाटी और जम्मू में हालात सामान्य दिखे। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर दोहराया है कि सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। राज्यपाल ने साफ कहा कि कश्मीर में कोई बड़ी घटना नहीं होने जा रही। हालांकि तीन अगस्त को पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी राज्यपाल से मुलाकात की। उमर भी जानना चाहते थे, कि आखिर कश्मीर में क्या हो रहा है? राजपाल ने उमर से भी कहा कि किसी को भी बघराने की जरुरत नहीं है। सारे कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं।
कश्मीर का जिक्र आए और धारा 370 और 35 ए की बात ना हो ऐसा हो नहीं सकता, इसको लेकर अक्सर ही विरोध के सुर उठते रहे हैं, दरअसल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता दी गई है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक ऐसा लेख है जो जम्मू और कश्मीर राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता है।
वहीं 35 A की बात करें तो भारतीय संविधान का 35 ए अनुच्छेद एक अनुच्छेद है जो जम्मू और कश्मीर राज्य विधानमण्डल को 'स्थायी निवासी' परिभाषित करने तथा उन नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता है। यह भारतीय संविधान में जम्मू और कश्मीर सरकार की सहमति से राष्ट्रपति के आदेश पर जोड़ा गया, जो कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा 14 मई 1954 को जारी किया गया था। यह अनुच्छेद 370 के खण्ड (1) में उल्लेखित है।

Article 370 अक्सर ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाये जाने की मांग की जाती रही है जबकि कश्मीर के नेता और स्थानीय निवासी ऐसी किसी भी संभावना मात्र का पुरजोर विरोध करते आ रहे हैं।
धारा 370 के प्रावधानों पर एक नजर-
धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।

इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को मिले हुए हैं-
कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है।
कश्मीर में अल्पसंख्यकों [हिन्दू-सिख] को 16% आरक्षण नहीं मिलता।
धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।
धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई (RTI) और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते है।
जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है।
जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है।
भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।
भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।
जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

अनुच्छेद 35A  के क्या हैं मायने
35A से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते हैं
14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे वही स्थायी निवासी माना जाएगा
वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, राज्य में सम्पत्ति नहीं खरीद सकता।
वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, जम्मू और कश्मीर सरकार की नौकरियों के लिये आवेदन नहीं कर सकता।

वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, जम्मू और कश्मीर सरकार के विश्विद्यालयों में दाखिला नहीं ले सकता, न ही राज्य सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है।
हालांकि धारा 370 में समय के साथ-साथ कई बदलाव भी किए गए हैं। 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था। उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री हुआ करता था, जिसे बाद में बदला गया।
इसके अलावा पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय नागरिक के जाने पर उसे अपने साथ पहचान-पत्र रखना जरूरी होता था, लेकिन बाद में विरोध के बाद इस प्रावधान को हटा दिया गया था।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस संवैधानिक प्रावधान के पूरी तरह ख़िलाफ़ थे। उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है। हाल ही में घाटी में इस आशंका की खबरें गरमा रही हैं कि शायद सरकार राज्य से इसे हटा सकती है और इसको लेकर पीडीपी नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारूक़ और उमर अब्दुल्ला सभी एकजुट होकर इस हालात पर चिंता जताते दिख रहे हैं।
जम्मू कश्मीर को लेकर सरगर्मियां तेज हैं और सरकार ने राज्य में जारी अमरनाथ यात्रा को लेकर अगस्त 2 को अमरनाथ यात्रियों को यहां से जाने संबधी एक एडवायजरी जारी की थी, बताया जा रहा है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ये कदम उठाया गया है।
इस मसले पर राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों में खासी हलचल है और सबको लग रहा है कि घाटी में कुछ बड़ा होने वाला है, इसके मद्देनजर पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस के नेताओं ने गवर्नर से मुलाकात की।
वहीं पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों के भेजे जाने से लोगों को लगता है कि केंद्र सरकार राज्य को मिले विशेषाथिकारों पर हमला करने जा रही है।
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लोकसभा चुनाव 2019 के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात कही है। इस पर जम्...

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वैसे तो इस्लाम में हाथ जोड़ने की मनाही है। लेकिन वो पीएम मोदी से हाथ जोड़कर अपील करती हैं कि जम्मू-कश्मीर को जो संवैधानिक आजादी मिली है उसमें वो किसी तरह की छेड़छाड़ न करें। उन्होंने कहा कि मोदी जी आप बहुत बड़ा जनमत लेकर आए हैं। आप से अपील है कि आप हमारी खास पहचान को बरकरार रखें। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी किये जाने के बाद अफरातफरी का माहौल है। 
सैलानियों को कश्मीर से निकालने के लिए अतिरिक्त उड़ान​