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करण जौहर की ‘ड्रग्स पार्टी’ की शिकायत करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से धमकी : ‘केस वापस ले, वरना ठोक देंगे’

भारत में होती ड्रग्स पर कार्यवाही से होती पाकिस्तान में घबराहट से लगता है कि पाकिस्तान की कमाई का शायद यह ही सर्वोत्तम श्रोत है। और इसी कारण बॉलीवुड पाकिस्तान कलाकारों को भारतीय फिल्मों में लेते हैं, जिनके कारण इन्हें ड्रग्स मिलने में आसानी होती रहती है। जबकि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों में प्रदर्शन पर सख्ती है। 
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पाकिस्तान से धमकी भरा कॉल आने का दावा किया है। धमकी में उन्हें बॉलीवुड फिल्म निर्माता करण जौहर के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने या गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। अकाली दल नेता ने धमकी देने वाले शख्स का नाम और फोन नंबर शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस से मामले को संज्ञान में लेने का अनुरोध किया है।

अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किए गए एक वीडियो संदेश में सिरसा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, “अभी मेरे पास पाकिस्तान से एक फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम मोहम्मद वसीम बताया और मुझे धमकी दी कि ‘भाई’ ने कहा है कि बॉलीवुड वाला करण जौहर वाला केस है, उसे 2 दिन में वापस लेकर नौटंकी बंद कर, वरना तेरे को ठोकेंगे। जब मैंने पूछा कि ‘भाई’ कौन है, तो उसने कहा कि तू ‘भाई’ को नहीं जानता। ‘भाई’ को पूरा देश जानता है। क्यों मरना चाहता है। ये नौटंकी बंद करो, वरना ठोक देंगे। उसने मुझे कहा कि जब हम तुम्हें ठोकेंगे तो तुम्हें क्या, तुम्हारे परिवार को भी पता चल जाएगा कि भाई कौन है।”

सिरसा ने कहा कि वे इसकी शिकायत पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ के साथ पश्चिम जिला डीसीपी को दे रहे हैं। वो चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस इस पर संज्ञान लेकर जाँच करे। सिरसा ने आगे कहा कि वह इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं है और बॉलीवुड में नशीली ड्रग्स के खिलाफ लगातार काम करते रहेंगे।

सिरसा ने फोन करने वाले को संबोधित करते हुए कहा, “भाई हम तेरे से डरने वाले नहीं हैं। तुमने बहुत गलत आदमी को धमकी दिलवाई है। तुम्हें बहुत बड़ी गतफहमी है कि मैं तुम्हारे गलतफहमी से डर जाऊँगा। ये सिद्धांत की लड़ाई है और मैं इसे लड़ूँगा। इस धमकी का मुझे एक फायदा हुआ है, अब मैं इस लड़ाई को और भी शिद्दत से लड़ूँगा। और इतनी शिद्दत से लड़ूँगा कि जो लोग मुझे डरा रहे हैं, मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, उन्हें यह गलती पूरी जिंदगी याद रहेगी। उनको इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। भाई को मैं कहना चाहता हूँ कि तेरे जैसे भाई दरवाजे के बाहर खड़े हैं, गलियों में भीख माँग रहे हैं। तेरे जैसे भाई से हम डरते नहीं है, तू अपने घर पर भाई होगा, मुझे डरा-धमका नहीं सकता।”

सिरसा ने एनसीबी प्रमुख राकेश अस्थाना से 15 सितंबर को मुलाकात की थी, जिसमें करण जौहर, दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, अर्जुन कपूर, विक्की जैसे कई शीर्ष बॉलीवुड नामों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

बीते साल करण जौहर के घर एक पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दीपिका पादुकोण, मलाइका अरोड़ा, अर्जुन कपूर, शाहिद कपूर, विक्की कौशल, वरुण धवन सहित अन्य सितारे नजर आ रहे थे। मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि पार्टी में शामिल होने वाले लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया गया था।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो प्रमुख राकेश अस्थाना से मुलाकात कर करण जौहर की पार्टी में शामिल होने वाले स्टार्स के खिलाफ जाँच और कार्रवाई की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि शाहिद कपूर ‘उड़ता पंजाब’ में पूरी दुनिया के सामने सिख युवाओं को नशेड़ी बताते हैं। लेकिन सच्चाई उड़ता बॉलीवुड है।

दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में ‘मुस्लिम भीड़’ ने बनाया सिख की दुकान को निशाना

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काबुल में सिख की दुकान पर हमला
दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों का असर अब दूर दराज इस्लामिक देशों में भी दिखने लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में एक सिख दुकानदार की दुकान पर साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा हमला किया गया। हमले का विडियो पूर्व विधायक एवं अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने ट्विटर पर शेयर की।
उन्होंने इस हमले की सूचना देते हुए अपने ट्विटर पर लिखा, “मुझे ये साझा करते हुए बहुत निराशा हो रही है कि दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा सिख दुकानदार की दुकान पर हमला हुआ। मैं इन गुंडों को बताना चाहता हूँ कि सिख तो दिल्ली दंगों में पीड़ितों के मददगार रहे हैं। सिखों ने ही इन दंगों में पीड़ित लोगों को लंगर और दवाई उपलब्ध कराई है।”


मनजिंदर सिंह सिरसा ने काबुल में हुए इस हमले की एक अन्य वीडियो को भी ट्विपर पर शेयर किया है और इस तरह की घटनाओं को शर्मनाक बताया है। उन्होंने इस घटना पर फौरन कार्रवाई के लिए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से और काबुल में स्थित भारत की एंबैसी से गुहार लगाई है कि वे इस मामले को अफगानिस्तान सरकार के सामने उठाएँ और वहाँ पर सिखों और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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पूर्व विधायक द्वारा जारी की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि जिस दुकानदार पर हमलावरों ने हमला किया, वे विडियो में हाथ जोड़े स्तब्ध खड़े हैं। जबकि उनकी दुकान का सारा सामान उथला-पुथला जा चुका है।

1984 सिख विरोधी दंगे : रकाबगंज गुरुद्वारे पर हमले में घिरे कमलनाथ

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1984 सिख नरसंहार मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम फिर से उछला है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया है कि गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब पर हुए हमले के सम्बन्ध में दो गवाह बयान देने को तैयार हैं। सिरसा ने उन दोनों गवाहों से बात की और उन्होंने कहा कि उन्हें जब भी बुलाया जाएगा, वे एसआईटी के समक्ष बयान देने को तैयार हैं।
मनजिंदर सिंह सिरसा दिल्ली के राजौरी गार्डन क्षेत्र से विधायक हैं। शिरोमणि अकाली दल के नेता सिरसा ने कहा कि एसआईटी भी उन गवाहों का बयान लेने के लिए तैयार हो गई है। एसआईटी ने कहा है कि इसके लिए तारीख मुक़र्रर की जाएगी। सिरसा ने कांग्रेस से कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद से तुरंत हटाने की माँग की है ताकि सिखों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
Image result for रकाबगंज सिख दंगेसिरसा ने दोनों गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि यह एक नरसंहार का मामला है और चूँकि वे एक मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ बयान देने जा रहे हैं, उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। सिरसा ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि कमलनाथ 1984 सिख नरसंहार मामले में गिरफ़्तार होने वाले पहले पदस्थ मुख्यमंत्री होंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने अपनी पुस्तक में रकाबगंज गुरुद्वारा पर हमले का जिक्र किया है। फुल्का ने लिखा है कि भीड़ द्वारा गुरुद्वारा को नुक़सान पहुँचाया गया था और 2 सिखों को ज़िंदा जला डाला गया था। फुल्का लिखते हैं कि हत्यारों द्वारा 5 घंटे तक उत्पात मचाया गया और कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ पूरे 2 घंटे तक भीड़ के साथ रहे। तत्कालीन कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर ने भी मौके पर कमलनाथ की मौजूदगी की पुष्टि की थी। अगले दिन इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर छपी थी कि कमलनाथ ने ही भीड़ का नेतृत्व किया था।

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सिखों का नरसंहार चालू हो गया था। इसमें जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार जैसे कई कांग्रेस नेताओं का हाथ सामने आया था। अभी हाल ही में ख़बर आई थी कि गृह मंत्रालय ने स्पेशल जाँच टीम (SIT) को सिख नरसंहार से जुड़े ऐसे सभी मामलों की फाइल्स फिर से खोलने की अनुमति दे दी है, जिनमें आरोपितों को या तो क्लीनचिट दे दी गई थी या फिर जाँच पूरी हो चुकी थी।
जिस दिन कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिख दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुना दी। सज्जन कुमार को सजा सुनाने के बाद कमलनाथ भी ट्रेंड करने लगे तथा सिख संगठनों ने भी इनके मुख्यमंत्री बनने का विरोध किया है कारण, सिख दंगों में सज्जन कुमार के साथ कमलनाथ भी दोषी हैं लेकिन बाद में दंगों की जांच के लिय बने आयोग द्वारा कमलनाथ का नाम दंगों से हटा दिया गया था
सवाल ये भी है कि आखिर कमलनाथ का दंगों से किसने और क्यों हटाया? सिख दंगों में कमलनाथ के रोल को समझने के लिए हमें तीन दशक पहले 1984 में जाना होगा कमलनाथ को बेटा बताने वाली देश की तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके बॉडीगार्ड(सिख) ने प्रधानमंत्री आवास पर ही गोलियों से भून डाला था इसके बाद पूरे दिल्ली में सिखों के खिलाफ दंगे शुरू हो गए थे ये दंगे बड़े पैमाने पर हुए और निर्दोष लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया कांग्रेस पार्टी के कई नेता इन दंगों में लोगों को भड़का रहे थे जिससे मौत का आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था
कमलनाथ पर आरोप है कि दिल्ली स्थित रकाबगंज गुरुद्वारे के पास जब दो सिखों को जिन्दा जला दिया गया, उस वक्त वो घटना स्थल पर ही मौजूद थे और भीड़ को भड़काने का काम कर रहे थे भाजपा नेता ताजिंदर बग्गा की मानें तो कमलनाथ ने रकाबगंज गुरूद्वारे में भी आग लगाई थी लेकिन एसआईटी, रंगनाथ मिश्रा कमीशन और नानावटी आयोग के जांच के दौरान कमलनाथ के खिलाफ इन आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला रंगनाथ मिश्रा कमीशन ने कमलनाथ के खिलाफ किसी भी सबूत के होने से इंकार कर दिया तथा उनका नाम दंगों से हटा दिया था जिन रंगनाथ मिश्रा के कमीशन ने कमलनाथ को क्लीन चिट दी थी उन्हीं रंगनाथ मिश्रा को कांग्रेस ने राज्यसभा से सांसद बनाया रंगनाथ मिश्रा 1998-2004 तक कांग्रेस से राज्यसभा में सांसद रहे