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‘यदि राज्य, केंद्र सरकार तत्काल कार्रवाई नहीं करती, तो हिन्दुओं को खुद ही बचाव करना होगा’: बंगाल हिंसा पर मिलिंद परांडे, महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद

बंगाल में गत तीन दिनों से लगातार चल रही हिंसा, आगजनी, लूटपाट, धमकियों तथा राजनैतिक

विद्वेष पूर्ण हमलों ने सम्पूर्ण देश को ना सिर्फ शर्मसार किया है अपितु लोकतांत्रिक मर्यादाओं को

भी तार-तार किया है। राज्य में मतगणना के दौरान प्रारंभ हुए अनेक प्रकार के अनवरत हमलों

परअपनी चिंता व्यक्त करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय महा-मंत्री श्री मिलिंद परांडे ने आज

कहा कि बंगाल में हिन्दू समाज भयाक्रांत है और जिनके पास राज्य की कानून व्यवस्था की

जिम्मेदारी है वे अपनी आँखें मूँदे बैठे

हैं। राज्य के लगभग हर हिस्से से लगातार यही खबरें आ रही

हैं कि हिन्दू घरों, मंदिरों, बस्तियों,

बहिन-बेटियों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को समाज-कंटक टीएमसी के गुंडे व जिहादी तत्व सरेआम हिंसा, आगजनी व लूटपाट का शिकार बना रहे हैं।

अनेक हिंदुओं को राजनैतिक प्रतिद्वंदियों द्वारा लगातार धमकियाँ भी दी जा रही हैं तथा इन सब

मामलों में स्थानीय पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बन तमाशा देख रहा है। ये हिंसा अब तक एक

दर्जन से अधिक लोगों की जान ले चुकी तथा अनेक घर, दुकानें, मंदिर, बस्तियां व व्यावसायिक

प्रतिष्ठान स्वाह हो चुके हैं। हिंसा की शिकार हुतात्माओं के प्रति अपनी गहरी  संवेदना व्यक्त करते

हुए विहिप महामंत्री ने मांग की कि राज्य शासन हिंसा के तांडव को अबिलंब रोक कर दंगाइयों के

विरुद्ध कठोर कार्यवाही करे।

श्री परांडे ने यह भी कहा की राज्य सरकार के उदासीन रवैए को गंभीरता से लेते हुए अब केंद्र

सरकार भी यथोचित कार्यवाही करे। जहां सुरक्षा-बल तक सुरक्षित ना हों वहाँ सामान्य नागरिकों

का क्या हाल होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है। वर्तमान शासन व राजनैतिक नेतृत्व द्वारा

क्षुद्र राजनैतिक विद्वेष से अपने ही नागरिकों पर हो रहे भीषण अत्याचारों पर मूक दर्शक बन मुंह

मोड लेना हिंसा को बढ़ावा देने से कम नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में हिन्दू समाज को भी अपनी

रक्षा का पूर्ण अधिकार है, जिसका वह प्रयोग करेगा।   

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हुए राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की है। संगठन द्वारा जारी बयान में, विहिप ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बहाने राज्य में हिंसा, आगजनी और बर्बरता की घटनाओं ने न केवल देश को शर्मसार किया है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।

राज्य में मतगणना के दौरान प्रारंभ हुए अनेक प्रकार के अनवरत हमलों पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए विहिप के केंद्रीय महा-मंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि बंगाल में हिंदू समाज भयाक्रांत है और जिनके पास राज्य की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है वे अपनी आँखें मूँदे बैठे हैं।

उन्होंने कहा, “राज्य के लगभग हर हिस्से से लगातार यही खबरें आ रही हैं कि हिन्दू घरों, मंदिरों, बस्तियों, बहिन-बेटियों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को टीएमसी के कार्यकर्ता व जिहादी तत्व सरेआम हिंसा, आगजनी व लूटपाट का शिकार बना रहे हैं। अनेक हिंदुओं को राजनैतिक प्रतिद्वंदियों द्वारा लगातार धमकियाँ भी दी जा रही हैं तथा इन सब मामलों में स्थानीय पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बन तमाशा देख रहा है। ये हिंसा अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों की जान ले चुकी तथा अनेक घर, दुकानें, मंदिर, बस्तियाँ व व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वाह हो चुके हैं। हिंसा की शिकार हुतात्माओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए विहिप महामंत्री ने माँग की कि राज्य शासन हिंसा के तांडव को अबिलंब रोक कर दंगाइयों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करें।”

राज्य के हर कोने से रिपोर्ट आ रही है कि भाजपा समर्थकों की संपत्तियों को नष्ट किया जा रहा है। कई रिपोर्टों में कहा गया कि महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था लेकिन पुलिस ने दावों से इनकार किया है।

परांडे ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के उदासीन रवैए को गंभीरता से लेते हुए अब केंद्र सरकार भी यथोचित कार्यवाही करें। जहाँ सुरक्षा-बल तक सुरक्षित ना हों वहाँ सामान्य नागरिकों का क्या हाल होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है। वर्तमान शासन व राजनैतिक नेतृत्व द्वारा क्षुद्र राजनैतिक विद्वेष से अपने ही नागरिकों पर हो रहे भीषण अत्याचारों पर मूकदर्शक बन मुँह मोड़ लेना हिंसा को बढ़ावा देने से कम नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में हिन्दू समाज को भी अपनी रक्षा का पूर्ण अधिकार है, जिसका वह प्रयोग करेगा।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा

बता दें कि पश्चिम बंगाल में 2 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किए गए हैं, जिसके बाद से ही राज्य में हिंसा का दौर जारी है। बंगाल के कई जिलों में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, रेप और हत्या होने की शिकायत सामने आई है।

भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि नंदीग्राम, कोलकाता, आसनसोल समेत कई इलाकों में उनके समर्थकों, कार्यकर्ताओं की दुकानें लूट ली गई हैं, घरों में आग लगाई गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के साथ रेप किया गया है, जबकि कई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है।कैलाश विजयवर्गीय का दावा है कि नतीजों के बाद से बंगाल में 9 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। इनमें से 6 नाम सामने आ चुके हैं। जगदाल में शोभा रानी मंडल, राणाघाट में उत्तम घोष, बेलेघाट में अभिजीत सरकार, सोनारपुर दक्षिण में हरोम अधिकारी, सीतलकुची में मोमिक मोइत्रा और बोलपुर में गौरब सरकार की हत्या का बीजेपी ने दावा किया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल तथा राहुल गांधी माफी मांगें: विहिप

दिसम्बर 18, 2020। विश्व हिंदू परिषद ने आज कहा है कि बजरंग दल के विषय में वॉल स्ट्रीट जर्नल की मिथ्या रिपोर्ट के आधार पर राहुल गांधी ने जिस प्रकार फेसबुक की आड़ में बजरंग दल को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा उससे उनकी मानसिकता की कलई खुल गई है। विहिप महासचिव श्री मिलिंद परांडे ने आज कहा कि टुकड़े टुकड़े गैंगसीएए विरोधियों तथा दिल्ली के दंगाइयों सहित अनेक राष्ट्र विरोधियों के साथ खड़े होकर उनकी पैरवी करने वाले राहुल गांधी को बजरंग दल जैसा राष्ट्रवादी संगठन आंखों में खटक रहा है। चीन के साथ उनके रिश्ते जगजाहिर हैं। उन्हें अमेरिकी जर्नल पर तो विश्वास है किंतु एक राष्ट्रव्यापी राष्ट्रवादी युवा संगठन पर नहीं!

विहिप महा सचिव ने वॉल स्ट्रीट जनरल से भी उसके इस अक्षम्य अपराध के लिए माफी मांगने को कहा है। उन्होंने कहा कि उसने बजरंग दल की आड़ में भारत को बदनाम करने का जो दुस्साहस किया हैउसे हम कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि इससे पहले विक्की लीक के माध्यम से मीडिया में आई खबरों से स्पष्ट होता है कि श्रीमती सोनिया गांधी भी बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के अनेक षड्यंत्र रच चुकी हैं जिनमेंवे सफल नहीं हो पाईं। अब फेसबुक ने वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए जो सच्चाई बताई हैवह इन्हें पच नहीं पा रही। इससे इनकी विद्वेष पूर्ण हिन्दू विरोधी मानसिकता स्पष्ट परिलक्षित होती है।

श्री परांडे ने कहा कि राहुल गांधी तथा वाल स्ट्रीट जर्नल को बजरंग दल सहित देश के हिंदू समाज से माफी मांगनी चाहिए।

जारीकर्ता:

विनोद बंसल

राष्ट्रीय प्रवक्ता,

वनवासी हिन्दू समाज को तोड़ने से बाज आए चर्च : मिलिंद परांडे

भगवान बिरसा मुण्डा की पावन धरती को अत्याचारी मिशनरियों के चंगुल में नहीं फंसने देंगे   
        नई दिल्ली। मार्च 16, 2020. विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर ही बनवासी समाज की प्राचीन संस्कृति व स्वधर्म को तोड़ने तथा बनवासी बच्चों को बेचने के घ्रणित षडयंत्र से ईसाई मिशनरियों को बाज आने की चेतावनी दी है. विहिप के केन्द्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने आज कहा कि ईसाई मिशनरियां झारझंड में पूतना की तरह सुन्दर रूप रख कर भगवान कृष्ण के समान शक्तिशाली वनवासी समाज को धर्मांतरण के जहर से मारने की कुचेष्टा कर रही हैं. विहिप उनके इन कुटिल षडयंत्रों को सफल नहीं होने देगी.
         श्री परांडे ने यह भी कहा कि वनवासी समाज के अनेक वीर महात्माओं ने समाज के सम्मान में विदेशी आक्रमणकारियों व विधर्मियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए वीर गति प्राप्त की. इनमें महाराणा प्रताप के साथ अकबर के विरुद्ध राणा पुंजा का संघर्ष, भील समाज के पूज्य गोविन्द गुरु जी का अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष तथा 1857 में स्वतंत्रता सेनानी टाट्या भील का संघर्ष विश्व विख्यात है. भगवान बिरसा मुंडा ने तो हिन्दू समाज की रक्षार्थ ही इन्हीं ईसाइयों की जेल में ना सिर्फ यातनाएं झेलीं अपितु, वनवासी समाज व स्वधर्म की रक्षार्थ संघर्ष करते हुए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया. झारखंड के वनवासियों को ईसाई मिशनरियों द्वारा, कुटिलता पूर्वक धर्मांतरण के कारण, हुए भीषण संघर्ष में, उनके इन महान बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए.
         उन्होंने कहा कि चर्च सीएए के नाम पर लोगों में भय व परस्पर घ्रणा का निर्माण करते हुए उन्हें भड़काने का कुचक्र रच रहा है. झारखंड के लोहरदगा सहित देशभर में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंसा भी इसी प्रकार की झूंठ व दुष्प्रचार का ही परिणाम थी. मिशनरियों सहित सम्पूर्ण सैक्यूलर गेंग को इससे बाज आना चाहिए.
         विहिप महामंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बनवासी बच्चों को बेचे जाने की घटनाओं में सलिप्त ईसाई मिशनरी संस्थाओं को, जिन्हें इस कारण बंद कर दिया गया था, गत कुछ महीनों में पुन: चालू कर दिया गया है. यह बेहद चिंतनीय है. उन पर प्रतिबन्ध जारी रहना चाहिए.   
         ज्ञातव्य रहे कि मीडिया में छपी कुछ खबरों के अनुसार हाल ही में रांची के आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो व सहायक बिशप थियोडोर मस्करेन्हस सहित ईसाई संस्थाओं व पादरियों का एक प्रतिनिधि मंडल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला है. इसने संसदीय कानून सीएए के साथ एनआरसी व एनपीआर का विरोध करते हुए, आगामी जनगणना सूची में, वनवासी समुदाय के लिए, सरना कोड को सामिल कर, उन्हें अपना अलग धर्म लिखने का विकल्प दिए जाने तक, एनपीआर स्थगित करने की मांग की है.  
        
जारीकर्ता
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिंदू परिषद