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जिस अमेरिका के भरोसे जंग में कूद गया यूक्रेन, अब वही निपटाने में जुटा: जेलेंस्की-ट्रंप फाइट के बाद हथियार-पैसा सब बंद


रूस से बीते तीन वर्षों से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के अड़ियल रवैये के चलते अब उनके देश की मदद रुक गई है। जेलेंस्की के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बहस और झगड़ा करने के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद पर विराम लग गया है। जेलेंस्की लगातार ट्रम्प के दबाव के बाद भी युद्ध जारी रखना चाहते हैं। जेलेंस्की ने सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ही नहीं बल्कि अपने पुराने एक समर्थक सीनेटर से भी झगड़ा कर लिया है।

अमेरिका नहीं देगा अब सैन्य मदद

मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन को जाने वाली सारी सैन्य मदद पर रोक लगाई है। फॉक्स न्यूज को व्हाइट हाउस के एक कर्मचारी ने बताया, “राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि उनका पूरा ध्यान सीजफायर पर है। हमें चाहिए कि हमारे बाकी मित्र देश भी इसी के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं और इसकी समीक्षा भी ताकि शान्ति बहाली का रास्ता आसानी से निकल सके।” व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि मदद अस्थायी तौर पर ही रोकी गई है।
फरवरी, 2022 में युद्ध चालू होने के बाद अमेरिका लगातार यूक्रेन को मिसाइल, छोटे हथियार, टैंक, तोपें, गोला बारूद और बख्तरबंद गाड़ियाँ तक दे रहा था। लेकिन अब इस पर विराम लग गया है। 2022 के बाद से तीन साल के भीतर अमेरिका यूक्रेन को लगभग 175 बिलियन डॉलर (₹15 लाख करोड़ से अधिक) के सैन्य साजोसामान देने की मंजूरी दे चुका है। इसमें से 90% से अधिक मदद दी भी जा चुकी है। यह सारी मदद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के राष्ट्रपति रहते हुए दी गई थी।
बायडेन ने दिसम्बर, 2024 में लगभग ₹50 हजार करोड़ से अधिक की मदद का भी ऐलान किया था। यूक्रेन को लगातार अमेरिकी हथियार भेजे जा रहे थे। कई मौकों पर यूक्रेन की हार को अमेरिकी हथियारों ने ही रोका। जेलेंस्की के नेतृत्व वाला यूक्रेन 2022 में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दम पर ही युद्ध लड़ने गया था। इसमें भी यूरोपियन देशों ने उसके आर्थिक सहायता ज्यादा दी है। हथियार अमेरिका से ही आए हैं। लेकिन अब यह बंद हो गई है। इसका रूस से चल रहे युद्ध पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

ट्रम्प से जेलेंस्की ने की थी खुले में लड़ाई

अमेरिका का यह मदद बंद करने का फैसला जेलेंस्की के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वांस के साथ झगड़ा करने के बाद हुआ है। 28 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में यह झगड़ा मीडिया के सामने हुआ था। बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति वांस ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की प्रोपेगेंडा कर रहे हैं और कैमरा लाकर युद्ध दिखा रहे हैं।
वहीं जेलेंस्की ने कहा था कि रूस कल को अमेरिका पर भी हमला कर सकता है। ट्रम्प ने बैठक में उनसे स्पष्ट कर दिया था कि वह कोई भी डील करने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रम्प ने बैठक में ही जेलेंस्की को कसके लताड़ लगाई थी। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि जेलेंस्की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से इतनी घृणा करते हैं कि कोई डील करना मुश्किल है।
ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की ने अमेरिका सम्मान नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि जेलेंस्की अमेरिकी मदद का फायदा उठाना चाहते हैं। इस तू-तू मैं-मैं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। इसके बाद से साफ़ हो गया था कि अमेरिका अब यूक्रेन को समर्थन नहीं देने वाला और जल्द शांति का पक्षधर है।

पुराने समर्थक सीनेटर से भी कर लिया झगड़ा

जेलेंस्की ने अपने अड़ियल रवैये के चलते सिर्फ ट्रम्प से ही लड़ाई नहीं की। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम से भी झगड़ा मोल ले लिया है। लिंडसे ग्राहम लगातार यूक्रेन के समर्थक रहे हैं। वह रूस के खिलाफ बोलते रहे हैं और जेलेंस्की की प्रशंसा करते रहे हैं। लेकिन उनकी हरकतों पर हाल ही में उन्होंने जेलेंस्की की आलोचना की।
इतनी सी बात पर जेलेंस्की उन पर भड़क गए। उन्होंने लिंडसे ग्राहम की आलोचना कर डाली। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें यूक्रेन की नागरिकता दे सकता हूँ। वह हमारे देश का नागरिक बन जाएँगे, और फिर उनकी बात में दम होगा। और मैं उन्हें यूक्रेन के नागरिक के तौर पर उनसे जानना चाहूंगा कि राष्ट्रपति कौन बने।”
2015 के एक कानून के अनुसार यूक्रेन में जब तक युद्ध होगा तब तक देश में चुनाव नहीं हो सकते। इसी कानून का सहारा उठा कर जेलेंस्की लगातार राष्ट्रपति बने हुए हैं। उन पर राष्ट्रपति पद हथियाने का आरोप लग रहा है। यूक्रेन में चुनाव की माँग भी तेज हो रही है।